Bal Ram Katha Class 6 Questions and Answers Summary Chapter 2 जंगल और जनकपुर

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Class 6 Hindi Bal Ram Katha Chapter 2 Question Answers Summary जंगल और जनकपुर

Bal Ram Katha Class 6 Question Answers Chapter 2

पाठाधारित प्रश्न

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वन में विश्वामित्र ने कौन-कौन-सी विद्याएँ सिखाईं?
उत्तर:
महर्षि विश्वामित्र ने दोनों भाइयों को बला-अतिबला नामक विद्याएँ सिखाईं। इसके सीखने के बाद निद्रावस्था में भी कोई उन पर आक्रमण नहीं कर सकता था।

प्रश्न 2.
राजमहल से निकलने के बाद महर्षि विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण ने रात में कहाँ विश्राम किया?
उत्तर:
राजमहल से निकलने के बाद महर्षि विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण ने सरयू नदी के तट पर विश्राम किया।

प्रश्न 3.
ताड़का को किसने मारा?
उत्तर:
ताड़का को राम और लक्ष्मण ने मारा।

प्रश्न 4.
महर्षि ने आश्रम की जिम्मेदारी किसे सौंपी?
उत्तर:
महर्षि ने आश्रम की रक्षा की जिम्मेदारी राम-लक्ष्मण को सौंप दी?

प्रश्न 5.
राक्षस की सेना में कब भगदड़ मच गई?
उत्तर:
सुबाहु के मरने पर राक्षस की सेना में भगदड़ मच गई।

प्रश्न 6.
मारीच क्यों क्रोधित था?
उत्तर:
राम ने मारीच की माँ ताड़का का वध किया था, इसलिए वह क्रोधित था।

प्रश्न 7.
मिथिला के राजा कौन थे? उनकी क्या प्रतिज्ञा थी।
उत्तर:
मिथिला के राजा जनक थे। उनकी प्रतिज्ञा थी कि वह अपनी पुत्री सीता का विवाह उसी राजकुमार से करेंगे जो विशाल शिव के धनुष को तोड़ेगा।

प्रश्न 8.
शिव धनुष की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
शिव धनुष अत्यंत विशाल था। उसे आठ पहियों वाली लोहे की पेटी में रखा गया था, जिसे खिसकाकर अनुचर एक स्थान से दूसरे स्थान पर से जाते थे।

प्रश्न 9.
अयोध्या से बारात को मिथिला पहुँचने में कितना समय लगा?
उत्तर:
बारात को मिथिला पहुँचने में पाँच दिन लग गए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
महर्षि विश्वामित्र ने नदी-तट पर राजकुमारों से क्या कहा?
उत्तर:
नदी तट पर विश्वामित्र ने राजकुमारों से कहा कि आज की रात्रि हम नदी के किनारे विश्राम करेंगे। मैं तुम्हें कुछ विद्याएँ सिखाना चाहता हूँ। इन्हें सीखने के बाद कोई तुम पर प्रहार नहीं कर सकेगा। उस समय भी नहीं जब तुम नींद में रहो। विश्वामित्र ने दोनों भाइयों को बला-अतिबला विद्याएँ सिखाईं।

प्रश्न 2.
विश्वामित्र ने दोनों भाइयों को असली खतरा किससे बताया?
उत्तर:
विश्वामित्र ने दोनों भाइयों को असली खतरा राक्षसी ताड़का से बताया। वह नदी के पार जंगल में रहती थी।

प्रश्न 3.
विश्वामित्र कौन थे? वह राजा दशरथ के पास क्यों आए थे?
उत्तर:
विश्वामित्र स्वयं शक्तिशाली और वीर राजा थे। बाद में अपना राजपाट छोड़कर उन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया। जंगल में उन्होंने सिद्धाश्रम बना लिया था। वह सिद्धि के लिए एक यज्ञ कर रहे थे, जिसमें दो राक्षस बाधा डाल रहे थे। उन राक्षसों के वध के लिए राम को अपने साथ ले जाने वह दशरथ के पास आए थे।

प्रश्न 4.
किस-किस का विवाह किस-किसके साथ हुआ?
उत्तर:
राम का विवाह सीता के साथ, लक्ष्मण का विवाह उर्मिला के साथ, भरत का विवाह मांडवी के साथ और शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति के साथ संपन्न हुआ। मांडवी और श्रुतकीर्ति राजा जनक के छोटे भाई कुशध्वज की पुत्रियाँ थीं।

प्रश्न 5.
राजा दशरथ के दरबार में ऐसी कौन-सी घटना घटी जिससे वे काफ़ी उदास हो गए?
उत्तर:
राजा दशरथ के राज्य में चारों तरफ खुशियाँ छाई हुई थीं तभी वहाँ महर्षि विश्वामित्र जी आए। महर्षि के स्वागत सत्कार के बाद राजा दशरथ ने कहा कि मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ। आपके आदेश का पूरी तरह पालन होगा। यह सुन विश्वामित्र ने अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राम को माँगा, यह सुनकर राजा दशरथ काफ़ी उदास हो गए।

प्रश्न 6.
राजा दशरथ ने राम को महर्षि विश्वामित्र के साथ जाने की अनुमति कैसे दे-दी?
उत्तर:
जब मुनि वशिष्ठ ने राम की शक्ति के बारे में बताया। उनसे रघुकुल की रीति का पालन करते हुए अपना वचन निभाने को कहा। उन्होंने बताया कि विश्वामित्र के साथ रह कर राम उनसे अनेक नई विद्याएँ सीख सकेंगे। उनके समझाने पर राजा दशरथ ने राम को जाने की अनुमति दे दी, लेकिन उन्होंने राम के साथ लक्ष्मण को भी जाने को कहा।

प्रश्न 7.
विश्वामित्र की बात सुनकर राजा दशरथ की मनोस्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महर्षि विश्वामित्र की बात सुनकर पुत्र वियोग की आशंका से राजा काँप उठे और बेहोश होकर गिर पड़े। होश आने पर पुनः मूर्छित हो गए। वह राम से बहुत अधिक प्रेम करते थे। वे राम के बिना रहने में असमर्थ थे। उन्हें बार-बार यह आंशका भी सता रही थी कि 16 वर्षीय राम मायावी राक्षसों का मुकाबला कैसे कर पाएंगे। इसी चिंता से वे काफ़ी डरे हुए थे।

प्रश्न 8.
ताड़का कौन थी? उसका अंत कैसे हुआ?
उत्तर:
ताड़का एक राक्षसी थी। जब राम ने धनुष की प्रत्यंचा को खींचकर छोड़ा। उसकी टंकार सुनकर ताड़का गरजती हुई राम की ओर दौड़ी। वह क्रोध में भरकर राम की ओर दौड़ी उसने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। राम ने उस पर बाण चलाए। लक्ष्मण ने भी निशाना साधा। राम का एक बाण उसके हृदय में लगा और उसकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 9.
सुंदरवन का नाम ‘ताड़का वन कैसे पड़ गया।’
उत्तर:
ताड़का एक राक्षसी थी। जिस वन में रहती थी, उसके भय के कारण उसका नाम ही ताड़का वन पड़ गया था। सुंदर वन नदी के पार था। यह अत्यंत घना और दुर्गम जंगल था। उसके डर से वहाँ कोई नहीं आता जाता था। जो भी उधर आता था। ताड़का उस पर अचानक आक्रमण कर मार डालती थी। अतः उसके भय और आतंक के कारण सुंदर वन का नाम ताड़कावन पड़ गया।

प्रश्न 10.
विवाह से ठीक पहले विदेहराज ने राजा दशरथ से क्या कहा?
उत्तर:
विवाह से ठीक पहले विदेहराज ने महाराज दशरथ से कहा- ‘राजन। राम ने मेरी प्रतिज्ञा पूरी कर बड़ी पुत्री सीता को अपना लिया। मेरी इच्छा है कि छोटी पुत्री उर्मिला का विवाह लक्ष्मण से हो जाए। मेरे छोटे भाई कुशध्वज की पुत्रियाँमांडवी और श्रुतकीर्ति भरत तथा शत्रुघ्न से ब्याही जाएँ। राजा दशरथ ने उनके इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया।

प्रश्न 11.
जनकपुरी की शोभा का वर्णन पाठ के आधार पर कीजिए।
उत्तर:
विवाह के अवसर पर जनकपुरी नगरी जगमगा रही थी। हर मार्ग पर तोरण दवार पर बने थे। प्रवेश दवारों पर बंदनवार एवं घरों में मंगलगीत गाए जा रहे थे। वहाँ की महिलाएँ राम-सीता की जोड़ी की झलक पाने को उत्सुक प्रतीत होती थीं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राम-लक्ष्मण ने विश्वामित्र के आश्रम की रक्षा किस प्रकार की?
उत्तर:
महर्षि विश्वामित्र यज्ञ की तैयारियों में लग गए। उन्होंने आश्रम की सुरक्षा की जिम्मेदारी राम-लक्ष्मण को दे दी। राम लक्ष्मण ने यज्ञ पूरा होने तक न सोने का निर्णय लिया। वे लगातार जागते रहे और चौकस रहे। हाथ में धनुष और कमर में तलवार लटकाए हुए हर स्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार थे। यज्ञ सपन्न होने के दिन सुबाहु और मारीच ने राक्षसों के दल-बल के साथ आश्रम पर धावा बोल दिया। मारीच को क्रोध इसलिए भी था क्योंकि राम ने उसकी माँ का वध कर दिया था। राम ने मारीच को निशाना बनाया। वह बाण लगते ही मूर्छित हो गया। होश में आने पर वह उठकर भाग गया। राम का दूसरा बाण सुबाहु को लगा। वह वहीं ढेर हो गया। अन्य राक्षस जान बचाकर भाग गए।

प्रश्न 2.
विश्वामित्र राम को मिथिला क्यों ले गए? मिथिला की घटनाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को मिथिला चलने को कहा, क्योंकि वहाँ उन्हें अद्भुत शिव धनुष दिखाना था और मिथिला में राजा जनक के एक आयोजन में उन्हें शामिल होना था। राजा जनक ने प्रतिज्ञा कर रखी थी कि जो यह धनुष उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, सीता का विवाह उसके साथ कर दिया जाएगा। अनेक राजकुमार तो इसे हिला भी न सके थे। धनुष सचमुच विशाल था, लेकिन महर्षि विश्वामित्र का आदेश पाकर राम ने यह धनुष उठा लिया, उसे आसानी से झुकाया और ऊपर से दबाकर प्रत्यंचा खींची। इस दबाव से धनुष बीच से टूट गया। सभी लोग वहाँ बैठे आश्चर्यचकित रह गए।

प्रश्न 3.
राजा जनक क्यों आश्चर्यचकित थे? उन्होंने महर्षि विश्वामित्र से क्या पूछा?
उत्तर:
राजा जनक अपनी प्रतिज्ञा और सीता के विवाह को लेकर बहुत चिंतित थे, लेकिन राम द्वारा शिव धनुष के उठाने पर राजा जनक चकित हो गए। जब धनुष टूट गया तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। उन्हें अपनी पुत्री सीता के लिए योग्य वर मिल गया था। उनकी प्रतिज्ञा पूरी हो गई। उन्होंने महर्षि विश्वामित्र से पूछा- “मुनिवर। आपकी अनुमति हो तो मैं महाराज दशरथ के पास संदेश भेजूं, बारात लेकर आने का आमंत्रण। यह शुभ संदेश उन्हें शीघ्र भेजना चाहिए।”

प्रश्न 4.
जनकपुरी को बारात के स्वागत के लिए कैसे सजाया गया था?
उत्तर:
बारात के स्वागत के लिए जनकपुरी में धूम मची हुई थी। पूरी जनकपुरी जगमगा रही थी। हर मार्ग पर तोरणद्वार बने थे। हर जगह फूलों की चादर बिछाई गई थीं प्रत्येक कोना सुंगधित था। हर कोने के प्रवेश द्वार पर बंदनवार लगे थे। प्रत्येक घर से मंगलगीतों की ध्वनि सुनाई देती थी। नगर में खुशी का माहौल था।

मूल्यपरक प्रश्न

प्रश्न 1.
तुम ऐसे कामों की सूची बनाओ जो हॉस्टल में छात्र स्वयं करते हैं?
उत्तर:
ऐसे कई काम हैं जो छात्र स्वयं प्रतिदिन करते हैं; जैसे-

  • अपना बिस्तर ठीक करना
  • कमरे में झाडू लगाना
  • चीजों को व्यवस्थित जगह पर रखना
  • अपनी प्लेट खुद धोना
  • अपने मोजे साफ़ करना
  • अपने जूते पॉलिश करना।

प्रश्न 2.
अपने घर के कामों में माँ का हाथ बँटाओ।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

अभ्यास प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ताड़का कौन थी?
2. राम ने विश्वामित्र के साथ वन में जाकर क्या किया?
3. शिव धनुष कहाँ रखा हुआ था?
4. शिव धनुष को किसने उठाया?
5. महर्षि ने राजकुमारों को कौन-कौन सी विद्याएँ सिखाईं ?
6. विश्वामित्र ने दोनों भाइयों को असली खतरा किससे बताया?
7. महर्षि ने आश्रम की जिम्मेदारी किसे सौंपी?
8. सुंदरवन का नाम ‘ताड़कावन’ कैसे पड़ गया?
9. ताड़का की मृत्यु के बाद वन में क्या परिवर्तन आया?
10. बारात के स्वागत में जनकपुर को कैसे सजाया गया?
11. किस-किसका विवाह किस-किसके साथ हुआ?
12. राजा जनक की क्या प्रतिज्ञा थी। इनकी यह प्रतिज्ञा कैसे पूरी हुई?

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. विश्वामित्र राम को मिथिला क्यों ले गए? मिथिला की घटनाओं का वर्णन करें?
2. राम ने यज्ञ की रक्षा किस प्रकार की?
3. ताड़का कौन थी? उसका अंत कैसे हुआ?
4. राजा जनक क्यों चकित थे? उन्होंने महर्षि विश्वामित्र से क्या पूछा?

Bal Ram Katha Class 6 Chapter 2 Summary

राजमहल से निकलकर महर्षि विश्वामित्र दोनों राजकुमारों के साथ सरयू नदी के कनारे की ओर बढ़े। वे सधे कदमों से दूर तक सरयू के किनारे-किनारे चलते रहे। देखते ही देखते अयोध्या नगरी पीछे छूट गई। सब कुछ दृष्टि से ओझल हो गया। शाम हो गई। राजकुमारों के चेहरों पर थकान का कोई चिह्न नहीं था। दिनभर पैदल चलने के बाद भी वे थके नहीं थे। वे उत्साहित कदमों से आगे बढ़ते ही जा रहे थे। दिनभर पैदल चलने के बाद उन्होंने आसमान पर दृष्टि डाली। आसमान मटमैला हो गया था। पशु-पक्षी अपने घरों को लौट रहे थे। तभी महर्षि ने कहा-“हम आज रात नदी तट पर ही विश्राम करेंगे।” उन्होंने राम से कहा कि मैं तुम दोनों को कुछ विद्याएँ सिखाना चाहता हूँ। इस विद्या को सीखने के बाद कोई तुम पर प्रहार नहीं कर सकेगा।

दोनों भाई राम और लक्ष्मण नदी में हाथ मुँह धोकर विश्वामित्र के नजदीक आकर बैठे। उन्होंने दोनों भाइयों को “बला, अतिबला” नाम की दो विद्याएँ सिखाईं। रात में वे वहीं तिनकों और पत्तों का बिस्तर बनाकर सोए।

सुबह होते ही उन्होंने पुनः यात्रा शुरू कर दी। वे सरयू के किनारे चलते-चलते ऐसे स्थान पर जा पहुँचे जहाँ दो नदियाँ आपस में मिलती थीं। उस संगम की दूसरी नदी गंगा थी। अगली सुबह वे लोग नाव से गंगा पार करके आगे बढ़े। नदी के पार घना जंगल था। वहाँ डरावना वातावरण देखकर महर्षि ने राम-लक्ष्मण को समझाया-‘ये जानवर और वनस्पतियाँ जंगल की शोभा हैं। इनसे कोई डर नहीं है। असली खतरा राक्षसी ताड़का से है, वह यहीं रहती है। तुम्हें यह खतरा हमेशा के लिए मिटा देना है। ‘उस सुंदर वन का नाम ही ‘ताड़कावन’ पड़ गया था। महर्षि की आज्ञा सुनकर राम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई। टंकार सुनते ही ताड़का गरजते हुए राम की ओर दौड़ी। ताड़का ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए राम ने उस पर वाण चलाए। लक्ष्मण ने निशाना साधा। ताड़का राम का एक तीर लगते ही गिर पड़ी और फिर नहीं उठी। यह देखकर विश्वामित्र बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने उन्हें सौ तरह के अस्त्र-शस्त्र दिए और उनके प्रयोग की विधि बताई। तीनों ने रात वहीं बिताई। ताड़का के वन में न होने के कारण वह स्थान अब पूरी तरह से भयमुक्त था। अब चारों तरफ शांति थी।

अगले दिन अंतिम पड़ाव था सिद्धाश्रम। वहाँ पहुँचकर महर्षि यज्ञ की तैयारियों में लग गए। आश्रम की सुरक्षा की जिम्मेदारी रामलक्ष्मण पर थी। पाँच दिन तक सब कुछ ढीक-ठाक चलता रहा। राम-लक्ष्मण ने यज्ञ पूरा होने तक रात-दिन जगकर आश्रम को देखभाल की। अनुष्ठान के अंतिम दिन अचानक आवाजों से आसमान गूंज उठा। सुबाहु और मारीच ने राक्षसों के दल-बल के साथ आश्रम पर धावा बोल दिया। मारीच इस बात से भी क्रोधित था कि राम-लक्ष्मण ने उसकी माँ को मारा था। वे दोनों राक्षस ताड़का के पुत्र थे। राम ने राक्षसों को देखते ही मारीच पर बाण चलाया। वह बाण लगते ही मूर्छित हो गया। वह बहुत दूर जाकर गिरा, पर मरा नहीं। होश आने तक वह दक्षिण दिशा को भागा। सुबाहु बाण लगते ही मर गया। सुबाहु के मरते ही राक्षस सेना में भगदड़ मच गई। महर्षि विश्वामित्र का अनुष्ठान संपन्न हो गया। इसके बाद जब राम ने अपने लिए आज्ञा पूछी तब विश्वामित्र ने कहा कि हम यहाँ से मिथिला जाएँगे।

दूसरे दिन विश्वामित्र राम-लक्ष्मण के साथ महाराज जनक के यहाँ पहुँचे। राजा जनक ने महल से बाहर आकर विश्वामित्र का स्वागत किया। राजकुमारों को देख विदेहराज चकित रह गए। महर्षि ने उन्हें बताया कि ये राजकुमार महाराज दशरथ के पुत्र हैं। अगले दिन ऋषि-मुनि और राजकुमार यज्ञशाला में उपस्थित हुए। शिव धनुष को विदेहराज की आज्ञा से यज्ञशाला में लाया गया। शिव धनुष विशाल था। वह लोहे की पेटी में रखा हुआ था। पेरी में आठ पहिए लगे थे। धनुष को खींचकर यज्ञशाला में लाया गया। राजा जनक ने बताया कि मैंने प्रतिज्ञा कर रखी है कि जो यह धनुष उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ाकर छोड़ देगा। उसी के साथ पुत्री सीता का विवाह होगा। शिव के इस धनुष को अनेक राजकुमारों ने तोड़ने की कोशिश की, किंतु विफल रहे। ‘यह देखकर राजा जनक पलभर के लिए उदास हो गए। अंत में विश्वामित्र ने राम को संकेत किया। राम ने सिर झुकाकर गुरु की आज्ञा स्वीकार की और विशाल धनुष को सहज ही उठा लिया। विदेहराज यह देख चकित हो गए। राम ने आसानी से धनुष झुकाया और प्रत्यंचा खींची। बच्चों के खिलौने की तरह उन्होंने शिव के धनुष को तोड़ डाला। महाराज जनक की खुशी का ठिकाना न था। उनकी प्रतिज्ञा पूरी हई और सीता के लिए योग्य वर मिल गया। महर्षि विश्वामित्र से अनुमति लेकर राजा जनक ने महाराज दशरथ के पास बारात लेकर आने का निमंत्रण भेजा। नगर में इस खबर से काफ़ी धूम मच गई। महाराज जनक का संदेश मिलते ही अयोध्या में खुशियाँ छा गईं। पाँच दिनों में बारात मिथिला पहुँची। जनकपुरी जगमग कर रही थी। चारों तरफ नगरी को दुल्हन की तरह सजाया गया था। नगर में फूलों की चादर बिछी हुई थी। विवाह से ठीक पहले राजा जनक ने दशरथ से कहा- ‘राजन। राम ने मेरी प्रतिज्ञा पूरी करके बड़ी बेटी सीता को अपना लिया। मेरी इच्छा है कि छोटी पुत्री उर्मिला का विवाह लक्ष्मण से हो जाए। मेरे छोटे भाई कुशध्वज की भी दो पुत्रियाँ हैं मांडवी और श्रुतकीर्ति। कृपया उन्हें भरत और शत्रुघ्न के लिए स्वीकार करें। ‘महाराज दशरथ ने राजा जनक के इस प्रस्ताव को अविलंब स्वीकार कर लिया। विवाह संपन्न हुआ। बारात बहुओं को लेकर अयोध्या लौट आई। रानियों ने पुत्र बधुओं की आरती उतारी। यह आनंद उत्सव कई दिनों तक चलता रहा।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या 7
दृष्टि – नज़र। ओझल – गायब। चिह्न – निशान। बसेरा – रहने का स्थान। चरवाहे – पशु चराने वाले। विश्राम – आराम। निकट – पास। प्रहार – चोट, हमला। बिस्तर – बिछावन।

पृष्ठ संख्या 9
वृक्ष – पेड़। कठिन – मुश्किल। दुर्गम – जहाँ जाना कठिन हो। क्रोधित – गुस्से में। विधि – तरीका।

पृष्ठ संख्या 10
भयमुक्त – बिना डर के। गायब होना – लुप्त हो जाना। प्राकृतिक – कुदरती। सौंदर्य – सुंदरता। आश्वस्त – भरोसेमंद। अनुष्ठान – यज्ञ। निर्विघ्न – बिना रुकावट के। चौकस – सावधान। धावा बोलना – हमला करना। मूर्च्छित होना – बेहाश होना। भगदड़ – खलबली मचना।

पृष्ठ संख्या 11
उल्लेख – जिक्र, वर्णन। अनुचर – नौकर चाकर। लजित – शर्मिंदा। वत्स – बेटा। अद्भुत – अनोखा।

पृष्ठ संख्या 13
संकेत – इशारा। सहज – सरल, स्वाभाविक। हतप्रभ – हैरान। सन्नाटा – चुप्पी। योग्य – लायक। अनुमति – इजाजत। पुत्र-बधू – पुत्र की पत्नी।

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गद्य – खंड

काव्य – खंड

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi – B

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गद्य – खंड

काव्य – खंड

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Bal Ram Katha Class 6 Questions and Answers Summary Chapter 1 अवधपुरी में राम

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Class 6 Hindi Bal Ram Katha Chapter 1 Question Answers Summary अवधपुरी में राम

Bal Ram Katha Class 6 Question Answers Chapter 1

पाठाधारित प्रश्न

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अयोध्या नगरी कहाँ थी?
उत्तर:
आयोध्या नगरी सरयू नदी के तट पर थी।

प्रश्न 2.
कोसल राज्य की राजधानी कहाँ थी?
उत्तर:
अयोध्या कोसल राज्य की राजधानी थी।

प्रश्न 3.
अयोध्या के राजा कौन थे?
उत्तर:
राजा दशरथ अयोध्या के राजा थे।

प्रश्न 4.
राजा दशरथ के पिता कौन थे?
उत्तर:
महाराज अज राजा दशरथ के पिता थे।

प्रश्न 5.
राजा दशरथ की कितनी रानियाँ थीं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
राजा दशरथ की तीन रानियाँ थीं। कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी।

प्रश्न 6.
विश्वामित्र के आश्रम का नाम लिखें।
उत्तर:
विश्वामित्र के आश्रम का नाम सिद्धाश्रम था।

प्रश्न 7.
राजा दशरथ के कितने पुत्र थे? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
राजा दशरथ के चार पुत्र थे-राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न।

प्रश्न 8.
मुनि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को कौन-सा यज्ञ करने को कहा?
उत्तर:
मुनि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को पुत्रेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी।

प्रश्न 9.
राम का जन्म कब हुआ?
उत्तर:
चैत्र मास की नवमी के दिन राम का जन्म हुआ।

प्रश्न 10.
राजा दशरथ को राम अधिक प्रिय क्यों थे?
उत्तर:
ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण और उनमें, विवेक, शालीनता, मानवीय गुणों के कारण राजा दशरथ को राम अधिक प्रिय थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राजा दशरथ कैसे शासक थे? उन्हें क्या दुख था?
उत्तर:
राजा दशरथ यशस्वी, न्यायप्रिय और कुशल शासक थे। उनके कोई संतान नहीं थी, इस कारण वे चिंतित एवं दुखी रहते थे।

प्रश्न 2.
विश्वामित्र राजा दशरथ के पास क्यों आए थे? उन्होंने राजा दशरथ से क्या कहा?
उत्तर:
विश्वामित्र सिद्धि के लिए एक यज्ञ कर रहे थे। उसमें राक्षस बाधा डाल रहे थे। वे राक्षसों को मारने तथा यज्ञ की रक्षा के लिए दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र राम को ले जाना चाहते थे। इसलिए वे दशरथ के पास राम को लेने आए थे।

विश्वामित्र ने दशरथ से कहा कि मैं केवल कुछ दिनों के लिए राम को अपने साथ ले जाना चाहता हूँ। यज्ञ दस दिन में पूरा हो जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मैं स्वयं राक्षसों को मार सकता हूँ पर मैंने संन्यास ले लिया है। यदि आप राम को नहीं देंगे तो मैं खाली हाथ लौट जाऊँगा।

प्रश्न 3.
अयोध्या नगरी का वर्णन अपने शब्दों में करें।
उत्तर:
अवध में सरयू नदी के किनारे अयोध्या एक अति सुंदर नगर था। अयोध्या कोसल राज्य की राजधानी थी। इसकी भव्यता देखने को बनती थी। यहाँ आलीशान इमारतें थीं, चौड़ी सड़कें थीं। लोगों के घर भी भव्य थे। बाग-बगीचे थे। चारों ओर खेतों में हरियाली थी। अयोध्या में कहीं पर भी गरीबी का कोई चिह्न नज़र नहीं आता था। सभी लोग संपन्नता का जीवन व्यतीत करते थे। दुख और विपन्नता का वहाँ वास न था। पूरा नगर विलक्षण, अद्भुत एवं मनोरम था। लोग मर्यादाओं का पालन करते थे। हर व्यक्ति सदाचारी था। अत: कहा जा सकता है कि हर तरह से अयोध्या संपन्न नगरी थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राजा दशरथ ने राम को वन में विश्वामित्र के साथ न भेजने के लिए क्या-क्या तर्क दिए?
उत्तर:
राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र राम थे, जिन्हें वे प्राणों से भी अधिक चाहते थे। जब ऋषि विश्वामित्र ने यज्ञ की रक्षा के लिए राम को माँगा तो राजा दशरथ ऋषि को सीधे शब्दों में मना नहीं कर सकते थे। अतः उन्होंने न भेज पाने की असमर्थता व्यक्त की। इसके उन्होंने निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किएँ।

  1. उन्होंने कहा कि मेरा राम अभी सोलह वर्ष का भी नहीं हुआ है। वह राक्षसों से कैसे युद्ध कर पायेगा।
  2. राक्षस मायावी हैं। वह उनका छल-कपट कैसे समझेगा? उन्हें कैसे मारेगा। इससे अच्छा तो यही होगा कि आप मेरी सेना ले जाएँ। मैं स्वयं ही आपके साथ चलकर युद्ध करूँगा।
  3. हे! महामुनि! प्राणों से प्रिय राम के बिना मैं एक पल भी नहीं रह सकता हूँ।

प्रश्न 2.
महर्षि विश्वामित्र ने क्रोध में राजा दशरथ से क्या कहा?
उत्तर:
महर्षि विश्वामित्र ने क्रोध में राजा दशरथ से कहा कि आप रघुकुल की रीति तोड़ रहे हैं। राजन, आप वचन देकर पीछे हट रहे हैं। आपका यह व्यवहार कुल के विनाश का सूचक है। मैं स्वयं दुष्ट राक्षसों का संहार कर सकता हूँ, लेकिन मैंने संन्यास ले रखा है। अगर आप राम को नहीं देंगे तो मैं यहाँ से खाली हाथ लौट जाऊँगा।

प्रश्न 3.
मुनि वशिष्ठ ने महाराज दशरथ को क्या समझाया?
उत्तर:
विश्वामित्र राम को अपने साथ ले जाना चाहते थे। राजा दशरथ इसके लिए तैयार नहीं थे। यह सुनकर महर्षि विश्वामित्र क्रोधित हो गए। बात बिगड़ती देख मुनि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को समझाते हुए कहा कि राजन, आपको अपना वचन निभाना चाहिए। यही रघुकुल की रीति रही है। आपके पूर्वजों ने सदा अपने वचनों को निभाया है। आप राम की चिंता न करें। महर्षि के रहते राम का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। स्वयं विश्वामित्र तपस्वी एवं सिद्ध पुरुष हैं। वे अनेक गुप्त विद्याओं के ज्ञाता हैं। राम का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। राम उनसे कई नई विद्याएँ सीख लेंगे। इसलिए आप राम को उनके साथ जाने दें।

प्रश्न 4.
राजा दशरथ को कौन सा दुख था? वह कैसे दूर हुआ?
उत्तर:
राजा दशरथ को निस्संतान होने का दुख था। संतान की कमी उन्हें हमेशा बहुत सताती थी। वशिष्ठ मुनि ने राजा दशरथ को पुत्रेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी। महान तपस्वी ऋष्यशृंग की देख-रेख में पुत्रेष्टि यज्ञ किया गया। इसके कुछ समय बाद राजा दशरथ की इच्छा की पूर्ति हुई। उनकी तीनों रानियाँ पुत्रवती हो गईं। इससे निस्संतान होने का दुख दूर हो गया।

मूल्यपरक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रचंड गरमी के दिनों में कच्ची या पक्की सड़क की तपती धूप में नंगे पाँव चलने पर पाँव जलते हैं। इस परिस्थिति में पेड़ की छाया में खड़ा होने और पाँव धो लेने पर बड़ा आराम महसूस होता है। ठीक उसी तरह जैसे प्यास लगने पर पानी मिल जाए और भूख लगने पर भोजन। तुम्हें किसी वस्तु की आवश्यकता हुई होगी और वह कुछ समय बाद पूरी हो गई होगी। तुम सोचकर लिखो कि आवश्यकता पूरी होने के पहले तक आपकी मनोस्थिति कैसी थी?
उत्तर:
आवश्यकता न पूरी होने के पहले तक मन बहुत विचलित रहता है। मन में बार-बार यह प्रश्न उठता है कि इच्छा पूरी होगी अथवा नहीं। मन में इस तरह की बेचैनी होती है कि जितना जल्दी हो सके आवश्यकता पूरी हो जाए।

प्रश्न 2.
क्या तुम राम की तरह अपने माता-पिता के निर्णय को स्वीकार करते हो?
उत्तर:
हाँ मैं श्रीराम की तरह अपने माता-पिता के निर्णय का हमेशा पालन करता हूँ।

अभ्यास प्रश्न

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

1. अयोध्या किस राज्य की राजधानी थी?
2. अयोध्या के राजा कौन थे?
3. राजा दशरथ के पिता कौन थे?
4. दशरथ के पुत्रों के नाम क्या थे?
5. राजा दशरथ राम से अधिक प्रेम क्यों करते थे?
6. द्वारपाल ने किसके आने की सूचना दी?
7. मुनि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को कौन सा यज्ञ करने को कहा?
8. राजा दशरथ कैसे थे?

लघुउत्तरीय प्रश्न

1. अयोध्या नगरी की विशेषताओं का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए?
2. राजा दशरथ कैसे शासक थे। उन्हें किस बात की चिंता थी?
3. राजकुमारों के जन्म पर नगर का माहौल क्या था?
4. महर्षि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को क्या परामर्श दिया?
5. चारों राजकुमारों में क्या विशेषता थी?
6. विश्वामित्र कौन थे? वह राजा दशरथ के पास क्यों आए थे।
7. राजा दशरथ ने कौन सा यज्ञ किया था? इसका क्या उद्देश्य था? यह यज्ञ किस प्रकार संपन्न हुआ?
8. पुत्रमोह में फंसे राजा दशरथ को कर्तव्यपालन के लिए कैसे प्रेरित किया गया?

Bal Ram Katha Class 6 Chapter 1 Summary

यह कथा अवध की है। प्राचीन काल की बात है अवध में सरयू नदी के किनारे बसा बहुत ही सुंदर अयोध्या नगर था। वहाँ का राजमहल तो भव्य था ही, अन्य इमारतें भी आलीशान थीं। सड़कें चौड़ी थीं। बाग-बगीचे अत्यंत हरे-भरे थे। चारों तरफ खेतों में हरियाली नज़र आती थी। पानी से भरे सरोवर, हवा में हिलती फसलें देखने में मनमोहक लगती थीं। पूरा नगर संपन्न एवं विलक्षण था। अयोध्या कोसल राज्य की राजधानी थी। वहाँ राजा दशरथ राज करते थे। वे कुशल योद्धा और न्यायप्रिय शासक थे। लोग मर्यादाओं का पालन करते थे। उनके राज्य में सभी खुश थे किंतु राजा के मन में एक दुख था। उनकी तीन-तीन रानियों के होते हुए भी उनके यहाँ कोई संतान न थी। इस कारण राजा दशरथ चिंतित रहते थे। राजा दशरथ की चिंता बढ़ती जा रही थी।

राजा दशरथ ने अपनी चिंता से वशिष्ठ मुनि को अवगत कराया। महर्षि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को सलाह दी-“आप पुत्रेष्ठि यज्ञ करें, महाराज। आपकी इच्छा पूरी होगी।” ऋष्यशृंग की देख-रेख में पूरी तैयारी के साथ सरयू नदी के किनारे यज्ञशाला बनाकर यज्ञ प्रारंभ किया। इस यज्ञ में अनेक राजा आमंत्रित थे। अनेक ऋषि-मुनि भी पधारे। सभी ने एक-एक आहुति डाली। अंतिम आहुति राजा की थी। यज्ञ पूरा हुआ अग्निदेव ने महाराज दशरथ को आशीर्वाद दिया। कुछ समय बाद तीनों रानियाँ पुत्रवती हुईं। चैत्र मास की नवमी के दिन महारानी कौशल्या ने राम को जन्म दिया। रानी सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को तथा कैकेयी ने भरत को जन्म दिया। राजमहल में खुशियाँ छा गईं। नगर में एक बड़े समारोह का आयोजन किया गया। चारों राजकुमार धीरे-धीरे बड़े हुए। वे बड़े सुंदर थे। बड़े होने पर राजकुमारों को शिक्षा-दीक्षा के लिए गुरु के पास भेजा गया। चारों राजकुमार कुशाग्र बुद्धि के थे। उन्होंने शस्त्र विद्या तथा अन्य सभी प्रकार की विद्याओं में कुशलता प्राप्त की। चारों भाइयों में राम सर्वोपरि थे। उनमें विवेक, शालीनता एवं न्यायप्रियता के गुण थे। राजा दशरथ को राम सबसे अधिक प्रिय थे। चारों राजकुमार धीरे-धीरे बड़े होने लगे। वे विवाह के योग्य हो गए। राजा दशरथ उनके लिए सुयोग्य बधुएँ चाहते थे। राजा दशरथ सोच ही रहे थे कि एक दिन अयोध्या के राजमहल में विश्वामित्र पधारे। विश्वामित्र कभी स्वयं राजा थे किंतु अपना राजपाट छोड़कर संन्यास ग्रहण कर जंगल में आश्रम बनाकर रहते थे। उनके आश्रम का नाम था-सिद्धाश्रम। महल में उनका सत्कार किया गया। विश्वामित्र को दरबार में ऊँचा स्थान प्रदान किया गया। राजा दशरथ ने उनसे पूछा कि मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ? महर्षि विश्वामित्र ने कहा-“मैं सिद्धि के लिए एक यज्ञ कर रहा हूँ। दो राक्षस उसमें विघ्न डाल रहे हैं। आपके बड़े पुत्र राम ही उन राक्षसों को मार सकते हैं। आप उसे मुझे दे दें ताकि यज्ञ पूरा हो सके।” यह सुनकर राजा दशरथ चिंता में पड़ गए और बेहोश होकर गिर पड़े। विश्वामित्र राजा के मन की बात जानकर काफ़ी नाराज़ हो गए। राजा दशरथ ने कहा कि आप चाहें तो मेरी सारी सेना ले जाएँ। मैं खुद आपके साथ चलकर राक्षसों से युद्ध करूँगा। विश्वामित्र ने राजा दशरथ की दुविधा को समझ कर कहा कि मैं राम को केवल कुछ दिनों के लिए ही माँग रहा हूँ। यज्ञ दस दिनों में पूरा हो जाएगा। इस पर भी राजा दशरथ पुत्र वियोग की आशंका से काँप उठे, पर महर्षि वशिष्ठ शांत थे। महर्षि विश्वामित्र का क्रोध बढ़ता चला जा रहा था। वे बोले-‘आप रघुकुल की रीति तोड़ रहे हैं राजन। वचन देकर पीछे हट रहे हैं। यह वर्ताव कुल के विनाश का सूचक है।’ अगर आप राम को मेरे साथ नहीं जाने देंगे तो मैं खाली हाथ लौट जाऊँगा। राजा दशरथ यही कहते रहे कि मैं राम के बिना नहीं रह सकता। बात बिगड़ती देखकर मुनि वशिष्ठ आगे आए। उन्होंने राजा दशरथ को समझाया। महर्षि विश्वामित्र के साथ रहने पर राजकुमार राम को होने वाले लाभ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आप राम को विश्वामित्र के साथ जाने दें। महर्षि विश्वामित्र सिद्ध पुरुष हैं। उन्हें अनेक गुप्त विद्याओं की जानकारी है। राम उनसे अनेक नई विद्याएँ सीख सकेंगे। अंत में राजा दशरथ ने मुनि वशिष्ठ की बात को दुखी मन से स्वीकार कर लिया, लेकिन वे राम को अकेले. नहीं भेजना चाहते थे। अत: लक्ष्मण को भी राम के साथ भेज दिया। राम-लक्ष्मण को दरबार में बुलाया गया। इसके अलावा वन जाने की सूचना माता कौशल्या को भी दी गई। दोनों भाइयों ने खुशी-खुशी निर्णय स्वीकार किया। शंखध्वनि हुई और नगाड़े बजे। महाराज दशरथ ने भावुक होकर दोनों पुत्रों का मस्तक सूंघकर उन्हें महर्षि को सौंप दिया। दोनों राजकुमार अपने पीठ पर तुणीर बाँधे कमर में तलवार लटकाए महर्षि के साथ चल पड़े। विश्वामित्र आगे-आगे चल रहे थे। राम-लक्ष्मण उनके पीछे। लक्ष्मण, राम से दो कदम पीछे चल रहे थे।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या 1
दर्शनीय – देखने योग्य। भव्य – शानदार। इमारत – भवन। लबालब – पूरा भरा हुआ। संपन्न – खुशहाल। विपन्नता – गरीबी, दरिद्रता। अनुमति – आज्ञा। विलक्षण – विचित्र। योद्धा – युद्ध में निपुण। उत्तराधिकारी – वारिस। मर्यादा – नियम। सदाचारी – अच्छे आचरण वाला। यशस्वी – प्रसिद्ध । आयु – उम्र।

पृष्ठ संख्या 3
सलाह – राय। पुत्रेष्टि यज्ञ – पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ। तमाम – सारे। मंत्रोच्चार – मंत्रों का उच्चारण। मंगलगीत – बधाई के गीत। मनोकामना – मन की इच्छा। समारोह – जलसा, आयोजन। आयोजित करना – प्रबंध करना, मनाना। सम्मान – आदर। सुदर्शन – देखने में सुंदर। दक्ष – चतुर। अर्जित किया – प्राप्त किया। कुशाग्र – तेज। पारंगत – चतुर, कुशल, दक्ष। सर्वोपरि सबसे ऊपर। विवेक – अच्छे बुरे की पहचान। शालीनता – अच्छे चाल चलन एवं व्यवहार वाला होना। न्यायप्रियता – न्यायपूर्ण कार्य करने के लिए प्रसिद्ध।

पृष्ठ संख्या 4
परिजन – रिश्तेदार। गहन मंत्रणा – गंभीर सोच-विचार। तत्काल – उसी समय। अगवानी करना – स्वागत करना। हिचक – संकोच। सिद्धि – किसी कार्य में विशेष सफलता प्राप्त करना। अनुष्ठान – धार्मिक कार्य। बिजली गिरना – अचानक विपत्ति आना। अचकचाना – घबरा जाना। दुविधा – असमंजस। अशंका – भय डर। सन्नाटा – चुप्पी। संज्ञाशून्य – बेहाश।

पृष्ठ संख्या 5
सशंकित – शंका। अनिष्ट – हानि। मायावी – छल-कपट। प्रतिक्रिया – बदले की क्रिया। व्यक्त – प्रकट। खंडित – भंग। संहार – नाश। शक्ति – ताकत। खिन्न – दुखी, परेशान। तर्क बहस।

पृष्ठ संख्या 6
स्वीकार – मंजूर। आग्रह – निवेदन। स्वस्तिवाचन – ईश वंदना से मंगल वचन। बीहड़ – घना, उबड़ खाबड़। तुणीर – तरकश।

Law of Mass Action

Law of Mass Action

In 1864 two Norwegian chemists namely Maximilian Guldberg and Peter Waage formulated the law of mass action, based on the experimental studies of many reversible reactions.

The law states that, “At any instant, the rate of a chemical reaction at a given temperature is directly proportional to the product of the active masses of the reactants at that instant”.

Rate α [Reactant]x

where, x is the stoichiometric coefficient of the reactant and the square bracket represents the active mass (concentration) of the reactants.

Active mass = (\(\frac{n}{V}\)) mol dm-3(or) mol L-1

where n is the number of moles and V is the volume of the container (dm3 or L)

Law of Mass Action

Equilibrium constants (Kp and Kc):

Let us consider a reversible reaction,

xA + yB ⇄ lC + mD

where, A and B are the reactants, C and D are the products and x, y, l and m are the stoichiometric coeffients of A, B, C and D, respectively.

Applying the law of mass action, the rate of the forward reaction,

rfα[A]x[B]y (or) rf = kf[A]x[B]y

Similarly, the rate of the backward reaction,

rbα[C]l[D]m
(or)
rb=Kb[C]l[D]m

where kf and kb are proportionality constants

At equilibrium,

Rate of forward reaction (rf)
= Rate of backward reaction (rb)
kf[A]x[B]y = kb[C]l[D]m

Law of Mass Action img 1

where, Kc is the equilibrium constant in terms of concentration (active mass).

At a given temperature, the ratio of the product of active masses of reaction products raised to the respective stoichiometric coefficients in the balanced chemical equation to that of the reactants is a constant, known as equilibrium constant. Later when we study chemical kinetics we will learn that this is only approximately true.

If the reactants and products of the above reaction are in gas phase, then the equilibrium constant can be written in terms of partial pressures as indicated below,

Law of Mass Action img 2

Where, pA, pB, pC, and pD are the partial pressures of the gas A, B, C and D, respectively.

Law of Mass Action

Relation Between Kp and Kc

Let us consider the general reaction in which all reactants and products are ideal gases.

xA + yB ⇄ lC + mD

The equilibrium constant, Kc is

Law of Mass Action img 3

and Kp is,

Law of Mass Action img 4

The ideal gas equation is

PV = nRT
or
P = \(\frac{n}{V}\)RT

Since

Active mass = molar concentration = n/V
P = active mass × (RT)

Based on the above expression the partial pressure of the reactants and products can be expressed as,

PxA = [A]x(RT)x
PyB = [B]y(RT)y
Plc = [C]l(RT)l
PmD = [D]m(RT)m

On substitution in Eqn.2,

Law of Mass Action img 5

By comparing equation (1) and (4), we get

Kp = kc(RT)∆ng ………… (5)

where, Δng is the difference between the sum of number of moles of products and the sum of number of moles of reactants in the gas phase.

The following relations become immediately obvious.

When Δng = 0
Kp = Kc(RT)°
Kp = Kc

Law of Mass Action

Examples:

1. H2(g) + I2(g) ⇄ 2HI(g)
2. N2(g) + O2(g) ⇄ 2NO(g)

When Δng = +ve
Kp = Kc(RT)+ve
Kp > kc(RT)

Examples:

1. 2NH3(g) ⇄ N2(g) + 3H2(g)
2. PCI5(g) ⇄ PCl3(g) + Cl2(g)

When Δng = – ve
KP = KC(RT)-ve
KP < KC

Examples:

1. 2H2(g) + O2(g) ⇄ 2H2O(g)
2. 2SO2(g) + O2(g) ⇄ 2SO3(g)

Relation Between Equilibrium Constants for Some Reversible Reactions

Law of Mass Action img 6

Law of Mass Action

Equilibrium Constants for Heterogeneous Equilibrium

Consider the following heterogeneous equilibrium.

CaCO3(s) ⇄ CaO(s) + CO2(g)

The equilibrium constant for the above reaction can be written as

Law of Mass Action img 7

A pure solid always has the same concentration at a given temperature, as it does not expand to fill its container. i.e. it has same number of moles L-1 of its volume. Therefore, the concentration of a pure solid is a constant. The above expression can be modified as follows.

KC = [CO2]
or
KP = PCO2

The equilibrium constant for the above reaction depends only the concentration of carbon dioxide and not the calcium carbonate or calcium oxide. Similarly, the active mass (concentration) of the pure liquid does not change at a given temperature. Consequently, the concentration terms of pure liquids can also be excluded from the expression of the equilibrium constant.

For example,

CO2(g) + H2O(l) ⇄ H+(aq) + HCO3(aq)
Since, H2O((l)) is a pure liquid the Kc can be expressed as

Law of Mass Action img 8

Law of Mass Action

Example

Write the KP and Kc for the following reactions

1. 2SO2(g) + O2(g) ⇄ 2SO3(g)
2. 2CO(g) ⇄ CO2(g) + C(s)

Law of Mass Action img 9

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Chapter 1 Chemical Reactions and Equations

More Resources

Chapter 2 Acids Bases and Salts

Chapter 3 Metals and Non-metals

Chapter 4 Carbon and its Compounds

Chapter 5 Periodic Classification of Elements

Practical Based Questions for Class 10 Science Chemistry

Chapter 6 Life Processes

Chapter 7 Control and Coordination

Chapter 8 How do Organisms Reproduce

Chapter 9 Heredity and Evolution

Chapter 10 Light Reflection and Refraction

Chapter 11 Human Eye and Colourful World

Chapter 12 Electricity

Chapter 13 Magnetic Effects of Electric Current

Chapter 14 Sources of Energy

Chapter 15 Our Environment

Chapter 16 Management of Natural Resources

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