Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions सन्धि

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Sanskrit Vyakaran Class 7 Solutions सन्धि

अधोदत्तानि पदानि अवलोकयत- (निम्नलिखित पदों को देखिए- Look at the words given below.)

सूर्योदयः – (सूर्य + उदयः – अ + उ = ओ)
विद्यार्थी – (विद्या + अर्थी – आ + अ = आ)
जगदीश्वरः – (जगत् + ईश्वरः – त् → द्; द् + ई = दी)
कश्चनः – (क: + चन – श्)
रामोऽपि – (रामः + अपि – अः → ओ; अ → ऽ)

ऊपर दिए गए प्रत्येक पद में पूर्वपद के अन्तिम वर्ण तथा उत्तर पद के प्रथम वर्ण के पास-पास आने से उनमें परिवर्तन आया है। इसी परिवर्तन (विकार) को सन्धि कहते हैं।

सन्धि तीन प्रकार की होती है-
1. स्वर-सन्धि – जब दो निकटवर्ती स्वर वर्णों के मेल से परिवर्तन होता है, वहाँ स्वर-सन्धि होती है; यथा- विद्या + आलयः = विद्यालयः।

2. व्यञ्जन-सन्धि – जब पूर्व पद के अन्तिम वर्ण व्यञ्जन और उत्तर पद के प्रथम वर्ण स्वर अथवा व्यञ्जन का मेल होता है, तब परिवर्तन व्यञ्जन में होता है। यह व्यञ्जन-सन्धि कहलाती है; यथा- जगत् + ईश्वर = जगदीश्वर, रामम् + कथयतु = रामं कथयतु।

3. विसर्ग-सन्धि – जब पूर्व पद का अन्तिम वर्ण विसर्ग और उत्तर पद का प्रथम वर्ण स्वर अथवा व्यञ्जन होता है, तब परिवर्तन विसर्ग में होता है। यह विसर्ग-सन्धि कहलाती है; यथा- बालः + अस्ति = बालोऽस्ति।

ध्यान दें- यहाँ केवल ‘स्वर-सन्धि’ पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा।
स्वर-सन्धि पाँच प्रकार की होती है-
1. दीर्घ-सन्धि – ह्रस्व या दीर्घ ‘अ, इ, उ, ऋ’ के बाद ह्रस्व या दीर्घ समान स्वर आए, तो दोनों के स्थान पर दीर्घ स्वर ‘आ, ई, ऊ, ऋ’ होता है।
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions सन्धि 1
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions सन्धि 2

2. गुण-सन्धि – जब पूर्व पद के अन्त में ‘अ’ या ‘आ’ और उत्तर पद के आरम्भ में ‘इ’ या ‘ई’ आए, तो ‘ए’ होता है। यदि उत्तर पद के अन्त में ‘उ’ या ‘ऊ’ आए, तो ‘ओ’, ‘ऋ’ आए, तो ‘अर्’ और ‘लु’ आए, तो ‘अल्’ हो जाता है।
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions सन्धि 3

3. वृद्धि-सन्धि – जब पूर्व पद के अन्त में ‘अ’ या ‘आ’ आए और उत्तर पद के आरम्भ में ‘ए’ या ‘ऐ’ आए, तो ‘ऐ’ और ‘ओ’ या ‘औ’ आए, तो ‘औ’ हो जाता है।
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions सन्धि 4

4. यण-सन्धि – जब पूर्व पद के अन्त में ह्रस्व अथवा दीर्घ ‘इ, उ, ऋ या लु’ हों उसके बाद उत्तर पद के आरम्भ में कोई भी असमान (भिन्न) स्वर आए, तो उन्हें क्रमशः ‘य, व्, र् और ल्’ हो जाते हैं।
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions सन्धि 5

5. अयादि-सन्धि – जब पूर्व पद के अन्त में ए, ऐ, ओ या औ’ आए और उत्तर पद के आरम्भ में कोई भी ‘असमान’ (भिन्न) स्वर आए, तो उन्हें क्रमशः ‘अय, आय, अव् या आव्’ हो जाता है।
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions सन्धि 6

नोट- यदि छात्र पाठ्यपुस्तक में आए सन्धियुक्त पदों पर ध्यान दें तथा उसी संदर्भ में सन्धि नियम समझें, तो पाठगत शब्दों का अर्थ भी समझ आ जाएगा और नियम भी स्वतः ही याद रह जाएगा।

अभ्यासः

प्रश्न 1.
संधिविच्छेदं कुरुत- (संधिविच्छेद कीजिए- Disjoin the Sandhi.)
(i) शिवालय = ________ + ___________
(ii) विद्यानंदः = ________ + ___________
(iii) कवीन्द्रः = ________ + ___________
(iv) धर्मेशः = ________ + ___________
(v) सूर्योदयः = ________ + ___________
(vi) महोत्सवः = ________ + ___________
(vii) भूर्ध्वम् = ________ + ___________
(viii) यमुनोर्मिः = ________ + ___________
(ix) मातेव = ________ + ___________
(x) महर्षिः = ________ + ___________
(xi) सदैव = ________ + ___________
(xii) एकैकम् = ________ + ___________
(xiii) अत्यधिकम् = ________ + ___________
(xiv) प्रत्येकम् = ________ + ___________
(xv) अन्वेषणम् = ________ + ___________
(xvi) मात्रुपदेशः = ________ + ___________
उत्तरम्-
(i) शिव + आलयः
(ii) विद्या + आनंदः
(iii) कवि + इन्द्रः
(iv) धर्म + ईशः
(v) सूर्य + उदयः
(vi) महा + उत्सवः
(vii) भू + ऊर्ध्वम्
(viii) यमुना + ऊर्मिः
(ix) माता + इव
(x) महा + ऋषिः
(xi) सदा + एव
(xii) एक + एकम्
(xiii) अति + अधिकम्
(xiv) प्रति + एकम्
(xv) अनु + एषणम्
(xvi) मातृ + उपदेशः

प्रश्न 2.
सन्धिं कुरुत- (सन्धि कीजिए- Join the Sandhi.)
(i) अति + आचारः = ________ + ___________
(ii) प्रति + उपकारम् = ________ + ___________
(iii) अनु + एषणम् = ________ + ___________
(iv) पितृ + आज्ञा = ________ + ___________
(v) सदा + एव = ________ + ___________
(vi) भानु + उदयः = ________ + ___________
(vii) ने + अनम् = ________ + ___________
(viii) पौ + अकः = ________ + ___________
(ix) शिव + आलयः = ________ + ___________
(x) नर + इंद्रः = ________ + ___________
(xi) रजनी + ईशः = ________ + ___________
(xii) रेखा + अंकितः = ________ + ___________
(xiii) महा + ईशः = ________ + ___________
(xiv) माता + इव = ________ + ___________
(xv) नि + ऊनम् = ________ + ___________
उत्तरम्-
(i) अत्याचारः
(ii) प्रत्युपकारम्
(iii) अन्वेषणम्
(iv) पित्राज्ञा
(v) सदैव
(vi) भानूदयः
(vii) नयनम्
(viii) पावकः
(ix) शिवालयः
(x) नरेंद्रः
(xi) रजनीशः
(xii) रेखांकितः
(xiii) महेशः
(xiv) मातेव
(xv) न्यूनम्

प्रश्न 3.
उचित विकल्पम् चित्वा रिक्तस्थानेषु लिखत- (उचित विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों में लिखिए- Choose appropriate answer and fill in the blanks.)
(क) (i) नदी + अत्र = ___________ (नदीत्र, नद्यत्र, नदित्र)
(ii) देवी + इच्छा = ___________ (देव्यीक्षा, देवीच्छा, देवेच्छा)
(iii) लघु + ऊर्मिः = ___________ (लघोर्मिः, लघुर्मिः, लघूर्मि:)
(iv) महा + उदयः = ___________ (महोदयः, महोदयः, महादयः)
(v) सु + आगतम् = ___________ (सुगतम्, स्वगतम्, स्वागतम्)
उत्तरम्-
(i) नद्यत्र
(ii) देवीच्छा
(iii) लघूमिः
(iv) महोदयः
(v) स्वागतम्

(ख) (i) नयनम् = ________ + ___________ (ना + अनम्, ने + अनम्, नय + नम्)
(ii) पावकः = ________ + ___________ (पो + अकः, पौ + कः, पौ + अक:)
(iii) नाविकः = ________ + ___________ (नौ + इकः, नो + इक, नौ + विक:)
(iv) अन्विच्छा = ________ + ___________ (अन्वि + इच्छा, अनु + विच्छा, अनु + इच्छा)
(v) गायिका = ________ + ___________ (गे + यिका, गै + इका, गे + इका)
उत्तरम्-
(i) ने + अनम्
(ii) पौ + अक:
(iii) नौ + इकः
(iv) अनु + इच्छा
(v) गै + इका

सावित्री बाई फुले Summary Notes Class 8 Sanskrit Chapter 11

By going through these CBSE Class 8 Sanskrit Notes Chapter 11 सावित्री बाई फुले Summary, Notes, word meanings, translation in Hindi, students can recall all the concepts quickly.

Class 8 Sanskrit Chapter 11 सावित्री बाई फुले Summary Notes

सावित्री बाई फुले Summary

सावित्री बाई फुले ने आजीवन शोषितों व पिछड़ों के उत्थान के लिए संघर्ष किया। उनका नारा था- शिक्षा हमारा अधिकार है।’ फुले के समाज में कई समुदाय अत्यधिक लम्बे समय तक इस अधिकार से वञ्चित रहे हैं। उन्हें शिक्षा का, समानता का अधिकार दिलाने के लिए फुले ने अपना जीवन समर्पित कर दिया।
सावित्री बाई फुले Summary Notes Class 8 Sanskrit Chapter 11

वञ्चित समुदाय में स्त्रियों की दशा तो और भी दयनीय थी। उनकी शिक्षा के लिए सावित्री फुले को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वह अन्त तक स्त्रियों के अधिकारों के लिए लड़ती रही। सावित्री फुले स्त्रियों की शिक्षा पर बल देती रहीं।

सावित्री फुले महाराष्ट्र की पहली महिला शिक्षिका थीं। वह गरीब कन्याओं को शिक्षा देती थीं। इनका जन्म सन् 1831 ई० में हुआ। इसकी माता का नाम लक्ष्मीबाई तथा पिता का नाम खंडोजी था। सावित्री का विवाह ज्योतिबा फुले के साथ हुआ।
सावित्री बाई फुले Summary Notes Class 8 Sanskrit Chapter 11.2

सावित्री फुले ने सामाजिक कुरीतियों का प्रबल विरोध किया। उन्होंने मनुष्यों की समानता और स्वतन्त्रता के पक्ष का समर्थन किया। सावित्री फुले ने ‘पूना सेवासदन’ जैसी अनेक संस्थाओं की स्थापना की। सन् 1897 ई० में सावित्री फुले का देहान्त हो गया।

सावित्री बाई फुले Word Meanings Translation in Hindi

मूलपाठः, अन्वयः, शब्दार्थः सरलार्थश्च

(क) उपरि निर्मितं चित्रं पश्यत। इदं चित्रं कस्याश्चित् पाठशालायाः वर्तते। इयं सामान्या पाठशाला नास्ति। इयमस्ति महाराष्टस्य प्रथमा कन्यापाठशाला। एका शिक्षिका गहात पस्तकानि आदाय मार्गे कश्चित् तस्याः उपरि धूलिं कश्चित् च प्रस्तरखण्डान् क्षिपति। परं सा स्वदृढनिश्चयात् न विचलति। स्वविद्यालये कन्याभिः सविनोदम् आलपन्ती सा अध्यापने संलग्ना भवति। तस्याः स्वकीयम् अध्ययनमपि सहैव प्रचलति। केयं महिला? अपि यूयमिमां महिलां जानीथ? इयमेव महाराष्ट्रस्य प्रथमा महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले नामधेया।

शब्दार्थ-
उपरि-ऊपर।
पश्यत-देखो।
इदम्-यह (नपुं.)।
कस्याश्चित्-किसी।
नास्ति-नहीं है।
प्रथमा-प्रथम (स्त्री.)
निर्मितम्-बने हुए।
गृहात्-घर से।
एका-एक (स्त्री.)।
मार्गे-रास्ते में।
आदाय-लेकर।
प्रस्तरखण्डान्-पत्थर के टुकड़ों को।
कश्चित्-कोई।
परम्-परन्तु।
क्षिपति-फेंकता है।
सविनोदम्-मजाक के साथ।
विचलति-विचलित होती है।
सहैव-साथ ही।
आलपन्ती-बात करती हुई।
जानीथ-जानते हो।
केयं-कौन है यह।
संलग्ना-लगी हुई।
नामधेया-नामक।
स्वकीयम्-अपना।
स्वदृढनिश्चयात्-अपने मजबूत संकल्प से।
प्रचलति-चलता है।

सरलार्थ-
ऊपर बने हुए चित्र को देखो। यह चित्र किसी पाठशाला का है। यह सामान्य विद्यालय नहीं है। यह महाराष्ट्र की पहली कन्या पाठशाला है। एक अध्यापिका घर से पुस्तकें लेकर चलती है। मार्ग में कोई उसके ऊपर धूल और कोई पत्थर के टुकड़े फेंकता है। परन्तु वह अपने दृढ़ निश्चय से विचलित नहीं होती है। अपने विद्यालय में लड़कियों से हँसी मजाक के साथ बात करती हुई वह पढ़ाने में लगी होती है। उसका अपना अध्ययन भी साथ ही चलता है। कौन है यह महिला? क्या तुम सब इस महिला को जानते हो? यह ही महाराष्ट्र की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले है।

(ख) जनवरी मासस्य तृतीये दिवसे 1831 तमे ख्रिस्ताब्दे महाराष्ट्रस्य नायगांव-नाग्नि स्थाने सावित्री अजायत। तस्याः माता लक्ष्मीबाई पिता च खंडोजी इति अभिहितौ। नववर्षदेशीया सा ज्योतिबा-फुले महोदयेन परिणीता। सोऽपि तदानीं त्रयोदशवर्षकल्पः एव आसीत्। यतोहि सः स्त्रीशिक्षायाः प्रबल: समर्थकः आसीत् अतः सावित्र्याः मनसि स्थिता अध्ययनाभिलाषा उत्साहं प्राप्तवती। इतः परं सा साग्रहम् आङ्ग्लभाषाया अपि अध्ययनं कृतवती।

शब्दार्थ-
तृतीये दिवसे-तीसरे दिवस (तारीख) में।
नववर्षदेशीया-नौ साल वाली।
नाम्नि-नामक।
ख्रिस्ताब्दे-ईस्वीय वर्ष में।
अजायत-उत्पन्न हुई।
तदानीम्-तब।
अभिहितौ-कहे गए हैं।
यतोहि-क्योंकि।
परिणीता-ब्याही गई (Married)।
अध्ययनाभिलाषा-पढ़ने की इच्छा।
त्रयोदश०-तेरह (Thirteen)।
इतः परम्- इससे भी बढ़कर।
मनसि-मन में।
आंग्ल०-अंग्रेजी भाषा का। उत्सम्-बल।
साग्रहम्-आग्रह के साथ।

सरलार्थ-
3 जनवरी, सन् 1831 में महाराष्ट्र के नायगांव नामक स्थान पर सावित्री का जन्म हुआ। उसकी माता लक्ष्मीबाई तथा पिता खंडोजी नामक हुए हैं। नौ वर्ष की अवस्था में वह ज्योतिबा फुले महोदय के साथ ब्याही गई। उस समय वह भी तेरह वर्ष का ही था। क्योंकि वह स्त्री शिक्षा का प्रबल समर्थक था अतः सावित्री के मन में स्थित पढ़ने की इच्छा को बल प्राप्त हुआ। इससे बढ़कर उसने आग्रहपूर्वक अंग्रेजी भाषा का भी अध्ययन किया।

(ग) 1848 तमे ख्रिस्ताब्दे पुणेनगरे सावित्री ज्योतिबामहोदयेन सह कन्यानां कृते प्रदेशस्य प्रथम विद्यालयम् आरभत। तदानीं सा केवलं सप्तदशवर्षीया आसीत्। 1851 तमे ख्रिस्ताब्दे अस्पृश्यत्वात् तिरस्कृतस्य समुदायस्य बालिकानां कृते पृथक्तया तया अपरः विद्यालयः प्रारब्धः।

शब्दार्थ-
कन्यानां कृते-लड़कियों के लिए।
आरभत-प्रारम्भ किया।
पृथक्तया-अलग से (Separate)
सप्तदश०-सत्रह वर्ष की (Seventeen)
तदानीम्-तब।
तिरस्कृतस्य-तिरस्कृत का (Hated)
अस्पृश्यत्वात्-छुआछूत के कारण
प्रारब्धः-आरम्भ किया (Started) (Untouchability)।
अपरः-दूसरा (Other)

सरलार्थ-
1848 ईस्वी सन् में पुणे नगर में सावित्री ने ज्योतिबा महोदय के साथ कन्याओं के लिए प्रदेश के प्रथम विद्यालय को आरम्भ किया। तब वह केवल सत्रह वर्ष की थी। ईस्वी सन् 1851 में छुआछूत के कारण अपमानित समुदाय की बालिकाओं के लिए पृथक् उसके द्वारा दूसरा विद्यालय प्रारम्भ किया गया।

(घ)सामाजिककुरीतीनां सावित्री मुखरं विरोधम् अकरोत्। विधवानां शिरोमुण्डनस्य निराकरणाय सा साक्षात् नापितैः मिलिता। फलतः केचन नापिताः अस्यां रूढी सहभागिताम् अत्यजन्। एकदा सावित्र्या मार्गे दृष्टं यत् कृपं निकषा शीर्णवस्त्रावृताः तथाकथिताः निम्नजातीयाः काश्चित् नार्यः जलं पातुं याचन्ते स्म। उच्चवर्गीयाः उपहासंकर्वन्तः कपात जलोदधरणं अवारयन् । सावित्री एतत् अपमानं सोढं नाशक्नोत् । सा ताः स्त्रियः निजगृहं नीतवती। तडागं दर्शयित्वा अकथयत् च यत् यथेष्टं जलं नयत। सार्वजनिकोऽयं तडागः। अस्मात् जलग्रहणे नास्ति जातिबन्धनम्। तया मनुष्याणां समानतायाः स्वतन्त्रतायाश्च पक्षः सर्वदा सर्वथा समर्थितः।

शब्दार्थ-
मुखरम्-प्रबलता से (Severe)।
अकरोत्-किया।
निराकरणाय-दूर करने के लिए।
नापितैः-नाई लोगों से (Barbers)
केचन-कुछ।
रूढौ-रिवाज में (Custom)
अत्यजन्-छोड़ दिया (Left)
एकदा-एक बार
यत्-कि।
निकषा-पास (Near)
शीर्णवस्त्रावृताः-फटे पुराने वस्त्रों से ढकी हुई।
निम्नजातीया:-नीच जाति वाली।
नार्यः-नारियाँ (Women)
पातुम्-पीने के लिए।
उपहासम्-मजाक (Fun)
जलोद्धरणम्-जल को निकालना।
अवारयन्-मना करते हैं।
सोढुम्-सहने के लिए।
नाशक्नोत्-नहीं सकी।
नीतवती-ले गई।
दर्शयित्वा-दिखाकर।
यथेष्टम्-इच्छा के अनुसार।
जातिबन्धनम्-जाति का बन्धन (Casteism)।
तया-उसने। सर्वदा-सदा।
सर्वथा-पूर्ण रूप से (Fully)।
समर्थितः-समर्थन किया (Supported)।

सरलार्थ-
सावित्री ने सामाजिक कुरीतियों (समाज में फैले बुरे रिवाजों, परंपराओं) का प्रबल विरोध किया। विधवाओं के शिर को मूंडने की प्रथा को दूर करने के लिए वह साक्षात् नाई लोगों से मिली। (इसके) फलस्वरूप कुछ नाइयों ने इस रिवाज़ में सहभागिता का त्याग कर दिया। एक बार सावित्री ने मार्ग में देखा कि कुएँ के पास फटे पुराने वस्त्रों में ढकी हुई तथाकथित नीच जाति की कुछ स्त्रियाँ जल पीने के लिए याचना कर रही थीं। उच्च वर्ग वाले उनका मज़ाक उड़ाते हुए कुएँ से जल निकालने के लिए मना कर रहे थे।

सावित्री इस अपमान को सहन न कर सकी। वह उन स्त्रियों को अपने घर ले गई और तालाब को दिखाकर उसने कहा कि (तुम) इच्छा के अनुसार जल ले जाओ। यह तालाब सार्वजनिक है। इससे जल लेने में जाति का बन्धन नहीं है। उसने मनुष्यों की समानता और स्वतन्त्रता के पक्ष का सदा तथा पूर्ण रूप से समर्थन किया।

(ङ) ‘महिला सेवामण्डल”शिशुहत्या प्रतिबन्धक गृह’ इत्यादीनां संस्थानां स्थापनायां फुलेदम्पत्योः अवदानम् महत्वपूर्णम्। सत्यशोधकमण्डलस्य गतिविधिषु अपि सावित्री अतीव सक्रिया आसीत्। अस्य मण्डलस्य उद्देश्यम् आसीत् उत्पीडितानां समुदायानां स्वाधिकारान् प्रति जागरणम् इति।

शब्दार्थ –
अवदानम्-योगदान (Contribution)।
संस्थानाम्-संस्थाओं के।
गतिविधिषु-गतिविधियों में।
उत्पीडितानाम्-सताए गए।
प्रतिबन्धक-रोकने वाला।
स्थापनायां-स्थापना में।
उद्देश्यम्-लक्ष्य।
अतीव-अत्यधिक।
जागरणम्-जागरण (जगाना)।

सरलार्थ-
‘महिला सेवामण्डल’ व ‘शिशुहत्या प्रतिबन्ध गृह’ इत्यादि संस्थाओं की स्थापना में फुले दम्पति (पति-पत्नी) का योगदान महत्त्वपूर्ण है। सत्य शोधक-मण्डल की गतिविधियों में भी सावित्री अत्यधिक सक्रिय थी। इस मण्डल का उद्देश्य था सताए गए समुदायों का अपने अधिकारों के प्रति जागरण।

(च) सावित्री अनेकाः संस्थाः प्रशासनकौशलेन सञ्चालितवती। दुर्भिक्षकाले प्लेग-काले च सा पीडितजनानाम् अश्रान्तम् अविरतं च सेवाम् अकरोत्। सहायता-सामग्री-व्यवस्थायै सर्वथा प्रयासम् अकरोत। महारोगप्रसारकाले सेवारता सा स्वयम असाध्यरोगेण ग्रस्ता 1897 तमे खिस्ताब्दे निधनं गता। साहित्यरचनया अपि सावित्री महीयते। तस्याः काव्यसङ्कलनद्वयं वर्तते ‘काव्यफुले’ ‘सुबोधरत्नाकर’ चेति। भारतदेशे महिलोत्थानस्य गहनावबोधाय सावित्रीमहोदयायाः जीवनचरितम् अवश्यम् अध्येतव्यम्।

शब्दार्थ-
सञ्चालितवती-सञ्चालन किया (चलाया)।
दुर्भिक्ष०-अकाल समय में।
अश्रान्तम्-बिना थके।
अविरतम्-निरन्तर।
प्रयासम्-प्रयत्न।
प्रसार०-फैलना।
निधनम्-मृत्यु को।
महीयते-बढ़-चढ़कर है।
गहन०-गहराई से।
अवबोधाय-समझने के लिए।
अध्येतव्यम्-पढ़ना चाहिए।
प्रशासनकौशलेन-शासन (निर्देशन)
प्लेग-काले-प्लेग (चूहों के द्वारा फैलने की कुशलता से। वाला रोग) के समय में।
उत्थानस्य-उन्नति का।

सरलार्थ-
सावित्री ने अनेक संस्थाओं को प्रशासन कौशल के द्वारा चलाया। अकाल के समय तथा प्लेग (रोग) के समय उसने पीड़ित लोगों की बिना थके निरन्तर सेवा की। सहायता-सामग्री की व्यवस्था के लिए उसने पूर्णरूपेण प्रयत्न किया। महारोग के प्रसार के समय सेवा में लगी हुई वह स्वयं असाध्य रोग से ग्रस्त होकर सन् 1897 में मृत्यु को प्राप्त हो गई। . साहित्य रचना के द्वारा भी सावित्री महान् है। उसके दो काव्यसंकलन हैं-‘काव्य फुले’ तथा ‘सुबोधरत्नाकर’। भारतदेश में महिलाओं की उन्नति को गहराई से समझने के लिए सावित्री महोदया के जीवन चरित का अवश्य अध्ययन करना चाहिए।

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम्

We have given detailed NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Ruchira Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् Questions and Answers come in handy for quickly completing your homework.

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Ruchira Chapter 13 अमृतं संस्कृतम्

Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् Textbook Questions and Answers

प्रश्न: 1.
उच्चारणं कुरुत- (उच्चारण कीजिए- Pronounce these.)

उपलब्धासु
सङ्गणकस्य
चिकित्साशास्त्रम्
वैशिष्ट्यम्
भूगोलशास्त्रम्
वाङ्मये
विद्यमानाः
अर्थशास्त्रम्
उत्तराणि:
छात्र ध्यानपूर्वक शुद्ध उच्चारण करें।

प्रश्न: 2.
प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तराणि लिखत- (प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखिए- Answer the following questions in one word.)

(क) का भाषा प्राचीनतमा?
उत्तराणि:
संस्कृतभाषा

(ख) शून्यस्य प्रतिपादनं कः अकरोत् ?
उत्तराणि:
भास्कराचार्यः

(ग) कौटिल्येन रचितं शास्त्रं किम्?
उत्तराणि:
अर्थशास्त्रम्

(घ) कस्याः भाषायाः काव्यसौन्दर्यम् अनुपमम्?
उत्तराणि:
संस्कृतभाषायाः

(ङ) काः अभ्युदयाय प्रेरयिन्ति?
उत्तराणि:
सूक्तयः।

प्रश्न: 3.
प्रश्नानाम् उत्तराणि एकवाक्येन लिखत। (प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए। Answer the questions in one sentence.)

(क) सङ्गणकस्य कृते सर्वोत्तमा भाषा का?
उत्तराणि:
सङ्गणकस्य कृते संस्कृतमेव सर्वोत्तमा भाषा।

(ख) संस्कृतस्य वाङ्मयं कैः समृद्धमस्ति?
उत्तराणि:
संस्कृतस्य वाङ्मयं वेदैः, पुराणैः, नीतिशास्त्रैः चिकित्साशास्त्रादिभिः च समृद्धमस्ति ।

(ग) संस्कृतम् किं शिक्षयति?
उत्तराणि:
संस्कृतभाषा शिक्षयति यत् सर्वभूतेषु आत्मवत् व्यवहारः कर्त्तव्यः। अथवा संस्कृतभाषा आत्मवत् सर्वभूतेषु व्यवहारं कर्तुम् शिक्षयति।

(घ) अस्माभिः संस्कृतं किमर्थं पठनीयम्?
उत्तराणि:
अस्माभिः संस्कृतं मनुष्यस्य समाजस्य च परिष्कारार्थम् पठनीयम्।

प्रश्नः 4.
इकारान्त-स्त्रीलिङ्गशब्दरूपम् अधिकृत्य रिक्तस्थानानि पूरयत- (इकारान्त-स्त्रीलिंग-शब्दरूप के आधार पर रिक्त स्थान भरिए- Fill in the blanks according to ‘इकारान्त’ feminine gender words.)

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् 1
उत्तराणि:
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् 2

प्रश्नः 5.
रेखाङ्कितानि पदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्ननिर्माण कीजिए Frame questions based on the underlined words.)

(क) संस्कृते ज्ञानविज्ञानयोः निधिः सुरक्षितोऽस्ति ।
उत्तराणि:
संस्कृते ज्ञानविज्ञानयोः का सुरक्षितोऽस्ति?

(ख) संस्कृतमेव सङ्गणकस्य कृते सर्वोत्तमा भाषा।
उत्तराणि:
संस्कृतमेव कस्य कृते सर्वोत्तमा भाषा?

(ग) शल्यक्रियायाः वर्णनं संस्कृतसाहित्ये अस्ति।
उत्तराणि:
शल्यक्रियायाः वर्णनं कस्मिन् अस्ति?

(घ) वरिष्ठान् प्रति अस्माभिः प्रियं व्यवहर्त्तव्यम्।
उत्तराणि:
कान् प्रति अस्माभिः प्रियं व्यवहर्त्तव्यम् ?

प्रश्नः 6.
उदाहरणानुसारं पदानां विभक्तिं वचनञ्च लिखत- (उदाहरण के अनुसार शब्दों के विभक्ति और वचन लिखिए- Write the inflexion and number of the words according to the example.)

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् 3
उत्तराणि:
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् 4

प्रश्न: 7.
यथायोग्यं संयोज्य लिखत- (यथा-उचित मिलाकर लिखिए- Match the following correctly.)

‘क’ – ‘ख’
कौटिल्येन – अभ्युदयाय प्रेरयन्ति।
चिकित्साशास्त्रे – ज्ञानविज्ञानपोषकम्।
शून्यस्य आविष्कर्ता – अर्थशास्त्रं रचितम्।
संस्कृतम् – चरकसुश्रुतयोः योगदानम्।
सूक्तयः – आर्यभटः।
उत्तराणि:
कौटिल्येन – अर्थशास्त्रं रचितम्।
चिकित्साशास्त्रे – चरकसुश्रुतयोः योगदानम्।
शून्यस्य आविष्कर्ता – आर्यभटः।
संस्कृतम् – ज्ञानविज्ञानपोषकम्।
सूक्तयः – अभ्युदयाय प्रेरयन्ति।

Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् Additional Important Questions and Answers

(1) पाठांशं पठत अधोदत्तान् च प्रश्नान् उत्तरत। (पाठांश को पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। Read the extract and answer the questions that follow.)

इयं भाषा अतीव वैज्ञानिकी। केचन कथयन्ति यत् संस्कृतमेव सङ्गणकस्य कृते सर्वोत्तमा भाषा। अस्याः वाङ्मयं वेदैः, पुराणैः, नीतिशास्त्रैः चिकित्साशास्त्रादिभिश्च समृद्धमस्ति। कालिदासादीनां विश्वकवीनां काव्यसौन्दर्यम् अनुपमम्। कौटिल्यरचितम् अर्थशास्त्रं जगति प्रसिद्धमस्ति । गणितशास्त्रे ह्यह्यह्यह्यशून्यस्य प्रतिपादनं सर्वप्रथमम् आर्यभटटः अकरोत् । चिकित्साशास्त्रे चरकसुश्रुतयोः योगदानं विश्वप्रसिद्धम्। संस्कृते यानि अन्यानि शास्त्राणि विद्यन्ते तेषु वास्तुशास्त्रं, रसायनशास्त्रं, खगोलविज्ञानं, ज्योतिषशास्त्रं, विमानशास्त्रम् इत्यादीनि उल्लेखनीयानि।

I. एकपदेन उत्तरत-(एक शब्द में उत्तर दीजिए- Answer in one word.)

(i) संस्कृतभाषा कीदृशी?
उत्तराणि:
वैज्ञानिकी

(ii) अर्थशास्त्रं कस्य रचना?
उत्तराणि:
कौटिल्यस्य

(iii) कालीदासादीनां काव्यसौन्दर्य कीदृशम्?
उत्तराणि:
अनुपमम्

(iv) चिकित्साशास्त्रे कयोः योगदानम् विश्वप्रसिद्धम्?
उत्तराणि:
चरकसुश्रुतयोः

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए- Answer in a complete sentence.)

(i) संस्कृतवाङ्मयम् कैः समृद्धम्?
उत्तराणि:
संस्कृतवाङ्मयम् वेदैः, पुराणैः, नीतिशास्त्रैः, चिकित्साशास्त्रादिभिः च समृद्धम्।

(ii) आर्यभटः किमर्थं प्रसिद्धः?
उत्तराणि:
आर्यभटः गणितशास्त्रे शून्यस्य प्रतिपादनम् सर्वप्रथमम् अकरोत्, एतदर्थं सः प्रसिद्धः?

III. भाषिककार्यम्
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए- Answer as directed.)

1. ‘कौटिल्यरचितम् अर्थशास्त्रं जगति प्रसिद्धम् अस्ति’- इति वाक्ये – 

(i) ‘अस्ति’ क्रियापदस्य क: कर्ता? ……………. (कौटिल्यरचितम्, अर्थशास्त्रम्, प्रसिद्धम्)
उत्तराणि:
अर्थशास्त्रम्

(ii) पर्यायः कः? संसारे – …………….
उत्तराणि:
जगति

(iii) प्रसिद्धम् इति पदम् कस्य विशेषणम्?- …………….
उत्तराणि:
अर्थशास्त्रस्य/अर्थशास्त्रम् इति पदस्य

(iv) चरकसुश्रुतयोः- अत्र किं विभक्तिवचनम् (प्रथमा द्विवचनम्, षष्ठी द्विवचनम्, सप्तमी द्विवचनम्)
उत्तराणि:
षष्ठी द्विवचनम्

(2) परस्पर-मेलनं कृत्वा सूक्तीः पुनः लिखत- (परस्पर मेल करके सूक्तियाँ पुनः लिखिए Match the following quotes and rewrite them.)

(i) भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे – जयते।
(ii) वसुधैव – कर्मसु कौशलम्।
(iii) योगः – अमृतमश्नुते।
(iv) सत्यमेव – संस्कृतं संस्कृतिः तथा।
(v) विद्यया – कुटुम्बकम्।
उत्तराणि:
(i) भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिः तथा।
(ii) वसुधैव कुटुम्बकम्।
(iii) योगः कर्मसु कौशलम्।
(iv) सत्यमेव जयते।
(v) विद्ययाअमृतमश्नुते। (विद्यया + अमृतम् + अश्नुते)

(3) मञ्जूषातः उचितपदं चित्वा वाक्यानि पूरयत (मञ्जूषा से उचित पद चुनकर वाक्य पूरे कीजिए। Complete the sentences by picking out the appropriate word from the box.)

सूक्तयः, भाषाणाम्, प्राचीनतमा, संस्कृतम्, संस्कृतग्रन्थेषु |

(i) विश्वस्य उपलब्धासु भाषासु संस्कृतभाषा ।
(i) भाषा इयं अनेकासा . .जननी मता।
(iii) संस्कृते विद्यमानाः . अभ्युदयाय प्रेरयन्ति।
(iv) ……….. मानवजीवनाय विविधाः विषयाः समाविष्टाः।
(v) अस्माभिः ……… अवश्यमेव पठनीयम्।
उत्तराणि:
(i) प्राचीनतमा
(ii) भाषाणाम्
(iii) सूक्तयः
(iv) संस्कृतग्रन्थेषु
(v) संस्कृतम्।

(4) इकारान्त-स्त्रीलिंग-शब्दरूपाणि यथानिर्देशं पूरयत। (इकारान्त स्त्रीलिंग शब्दरूप यथानिर्देश पूरे कीजिए। Complete the declcusion of इकारान्त words in feminine gender as directed.)

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् 5
उत्तराणि:
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् 6
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 13 अमृतं संस्कृतम् 7

(1) प्रदत्तविकल्पेभ्यः उचितं पदं चित्वा वाक्यानि पूरयत- (दिए गए विकल्पों से उचित पद चुनकर वाक्य पूरे कीजिए- Complete the sentences by picking out the appropriate word from the given options.)

(क) (i) प्राचीनयोः …………… निधिः संस्कृतभाषायाम् सुरक्षितः। (चरकसुश्रुतयोः, ज्ञानविज्ञानयोः, महापुरुषोः)
उत्तराणि:
ज्ञानविज्ञानयोः

(ii) संस्कृतेन मनुष्यस्य समाजस्य च …………… भवेत्। (कौशलम्, संस्कृतिः, परिष्कारः)
उत्तराणि:
परिष्कारः

(iii) ….. चरकसुश्रुतयोः योगदानं विश्वप्रसिद्धम्। (गणितशास्त्रे, चिकित्साशास्त्रे, वास्तुशास्त्रे)
उत्तराणि:
चिकित्साशास्त्रे

(vi) भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे …………… संस्कृतिश्च। (ज्योतिषशास्त्रम्, साहित्यम्, संस्कृतम्)
उत्तराणि:
संस्कृतम्

(v) ………………. आत्मवत् व्यवहारं कुर्यात्। (महापुरुषेषु, संस्कृतग्रन्थेषु, सर्वभूतेषु)
उत्तराणि:
सर्वभूतेषु।

(ख)
(i) ……………… अमृतमश्नुते? (विद्याः, विद्यायाः, विद्यया)
उत्तराणि:
विद्यया

(ii) किं संस्कृतभाषायां केवलं ……………… साहित्यं वर्तते? (धार्मिक, धार्मिकम्, धार्मिक:)
उत्तराणि:
धार्मिकम्

(iii) ……………… रचितं अर्थशास्त्रं जगति प्रसिद्धम्। (कौटिल्यस्य, कौटिल्येन, कौटिल्यम्)
उत्तराणि:
कौटिल्येन

(vi) संस्कृते सूक्तयः……………… प्रेरयन्ति। (अभ्युदयः, अभ्युदये, अभ्युदयाय)
उत्तराणि:
अभ्युदयाय

(v) संस्कृतवाङ्मये ……………… विद्यन्ते। (अनेक शास्त्राणि, अनेकाः शास्त्राः, अनेकानि शास्त्राणि)
उत्तराणि:
अनेकानि शास्त्राणि।

Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः

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Sanskrit Vyakaran Class 7 Solutions संख्यावाचक-शब्दाः

संख्यावाची शब्द दो प्रकार के होते हैं-

  1. संख्यावाचक (गणनावाचक)
  2. क्रमवाचक (पूरणार्थक संख्या)।

1. संख्यावाचक शब्द – जो शब्द संख्या का बोध कराते हैं, वे ‘संख्यावाचक शब्द’ कहलाते हैं; यथा- एक: (एक, one), द्वौ (दो, two), त्रयः (तीन, three) इत्यादि।

2. क्रमवाचक शब्द – जो शब्द संख्या के क्रम का बोध कराते हैं, वे ‘क्रमवाचक शब्द’ कहलाते हैं। इन्हें पूरणार्थक संख्या भी कहते हैं; यथा-प्रथमः (पहला, first), द्वितीयः (दूसरा, second), तृतीयः (तीसरा, third) इत्यादि।

संख्यावाचक शब्द – चाहे गणनावाचक हों या क्रमवाचक वे विशेषण होते हैं। अतः इनका रूप विशेष्यपद के लिंग, वचन आदि पर निर्भर करता है। संख्यावाचक शब्दों के रूप (सर्वनाम की भाँति) तीनों लिंगों में होते हैं। यथा- संख्यावाचक शब्द रूप एक- ‘एका, एकम्, एकेन’ इत्यादि।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि संख्यावाचक (गणनावाचक) शब्दों में केवल एक से चार तक की संख्या वाले शब्दों में लिंग भेद होता है। यथा-
एक: बालक:
एका बालिका
एकम् पुस्तकम्
द्वौ बालको
द्वे बालिके
द्वे पुस्तके
त्रयः बालकाः
तिस्रः बालिकाः
त्रीणि पुस्तकानि
चत्वारः बालकाः
चतस्रः बालिकाः
चत्वारि पुस्तकानि

किन्तु पञ्च बालकाः, पञ्च बालिकाः, पञ्च पुस्तकानि। ‘पञ्च’ के आगे कोई लिंग भेद नहीं होता।

संख्यावाचक शब्द रूप

एक – एक
(‘एक’ के शब्द रूप तीनों लिंगों में पृथक्-पृथक् होते हैं और केवल एक वचन में होते हैं।)
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः 1
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः 2
विशेष – ‘एक’ शब्द सर्वनाम माना जाता है। इसके रूप सर्वनाम शब्द की भाँति चलते हैं।
यथा- एषः – एकः, एतम् – एकम्, एषा – एका, एतेन – एकेन इत्यादि।

द्वि – दो
(‘द्वि’ के शब्द रूप तीनों लिंगों में पृथक्-पृथक् होते हैं और केवल द्विवचन में होते हैं।)
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः 3

त्रि – तीन
(‘त्रि’ के शब्द रूप तीनों लिंगों में पृथक्-पृथक् होते हैं और केवल बहुवचन में होते हैं।)
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः 4

चतुर् – चार
(‘चतुर्’ के शब्द रूप तीनों लिंगों में पृथक्-पृथक् होते हैं और केवल बहुवचन में होते हैं।)
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः 5
(विशेष – पञ्चन्, षट्, सप्तन्, अष्टन्, नवन् एवं दशन् के तीनों लिंगों में रूप समान होते हैं। सभी शब्द बहुवचन में होते हैं।)

‘पञ्चन् – पञ्च – पाँच, षट् – षट – छह, सप्तन् – सप्त – सात’
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः 6

‘अष्टन् – आठ, नवन् – नौ, दशन् – दस’
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः 7

‘क्रमबोधक संख्या’ (पूरणार्थक संख्या)
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions संख्यावाचक-शब्दाः 8
11. एकादश
12. द्वादश
13. त्रयोदश
14. चतुर्दश
15. पञ्चदश
16. षोडश
17. सप्तदश
18. अष्टादश
19. नवदश / एकोनविंशतिः
20. विंशतिः
21. एकविंशतिः
22. द्वाविंशतिः
23. त्रयोविंशतिः
24. चतुर्विंशतिः
25. पञ्चविंशतिः
26. षड्विंशतिः
27. सप्तविंशतिः
28. अष्टाविंशतिः
29. नवविंशतिः / एकोनत्रिंशत्
30. त्रिंशत्
31. एकत्रिंशत्
32. द्वात्रिंशत्
33. त्रयस्त्रिंशत्
34. चतुस्त्रिंशत्
35. पञ्चत्रिंशत्
36. षट्त्रिंशत्
37. सप्तत्रिंशत्
38. अष्टत्रिंशत्
39. एकोनचत्वारिंशत् / नवत्रिंशत्
40. चत्वारिंशत्
41. एकचत्वारिंशत्
42. द्विचत्वारिंशत् / द्वाचत्वारिंशत्
43. त्रयश्चत्वारिंशत् / त्रिचत्वारिंशत्
44. चतुश्चत्वारिंशत्
45. पञ्चचत्वारिंशत्
46. षट्चत्वारिंशत्
47. सप्तचत्वारिंशत्
48. अष्टचत्वारिंशत्
49. एकोनपञ्चाशत् / नवचत्वारिंशत्
50. पञ्चाशत्
51. एकपञ्चाशत्
52. द्विपञ्चाशत्
53. त्रिपञ्चाशत्
54. चतुःपञ्चाशत्
55. पञ्चपञ्चाशत्
56. षट्पञ्चाशत्
57. सप्तपञ्चाशत्
58. अष्टपञ्चाशत्
59. नवपञ्चाशत् / एकोनषष्टिः
60. षष्टिः
61. एकषष्टिः
62. द्विषष्टिः
63. त्रयःषष्टिः
64. चतुःषष्टिः
65. पञ्चषष्टिः
66. षट्षष्टिः
67. सप्तषष्टिः
68. अष्टषष्टिः / अष्टाषष्टिः
69. नवषष्टिः / एकोनसप्ततिः
70. सप्ततिः
71. एकसप्ततिः
72. द्विसप्ततिः
73. त्रिसप्ततिः
74. चतुस्सप्ततिः
75. पञ्चसप्ततिः
76. षट्सप्ततिः
77. सप्तसप्ततिः
78. अष्टसप्ततिः / अष्टासप्ततिः
79. नवसप्ततिः / एकोनाशीतिः
80. अशीतिः
81. एकाशीतिः
82. द्वयशीतिः
83. त्र्यशीतिः
84. चतुरशीतिः
85. पञ्चाशीतिः
86. षडशीतिः
87. सप्ताशीतिः
88. अष्टाशीतिः
89. नवाशीतिः / एकोननवतिः
90. नवतिः
91. एकनवतिः
92. द्विनवतिः
93. त्रिणवतिः
94. चतुर्णवतिः
95. पञ्चनवतिः
96. षण्णवतिः
97. सप्तनवतिः
98. अह्यष्टनवतिः / अष्टानवतिः
99. नवनवतिः / एकोनशतम्
100. शतम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
उचित विकल्पेन रिक्तस्थानानि पूरयत- (उचित विकल्प द्वारा रिक्तस्थान भरिए- Fill in the blanks with the correct option.)
(क) 1. __________ छात्रा। (एका, एकम्, एक:)
2. __________पत्रम्। (एकः, एकम्, एका)
3. __________ कृषक:। (एकम्, एकः, एका)
4. __________ वाटिके। (द्वौ, एका, द्वे)
5. __________ बालकौ। (द्वे, एकः, द्वौ)
6. __________ पुस्तके। (एकम्, द्वौ, द्वे)
7. __________ अध्यापकाः। (तिस्रः, त्रीणि, त्रयः)
8. __________ कलमानि। (त्रयः, त्रीणि, तिस्त्रः)
9. __________ फलानि। (चत्वारः, चतस्त्रः, चत्वारि)
10. __________ अश्वाः। (चत्वारि, चत्वारः, चतस्त्रः)
उत्तरम्-
1. एका
2. एकम्
3. एकः
4. द्वे
5. द्वौ
6. द्वे
7. त्रयः
8. त्रीणि
9. चत्वारि
10. चत्वारः

(ख) 1. __________ तिथि: (तृतीय, तृतीया, तृतीयम)
2. __________ दिनम् (द्वितीयः, द्वितीयम्, द्वितीया)
3. __________ कक्षा (नवमी, नवमम्, नवमः)
4. __________ गृहम् (प्रथमा, प्रथमः प्रथमम्)
5. __________ बालिका (चतुर्थी, चतुर्था, चतुर्थः)
उत्तरम्-
1. तृतीया
2. द्वितीयम्
3. नवमी
4. प्रथमम्
5. चतुर्थी।

प्रश्न 2.
मञ्जूषायाः उचितं संख्यावाचि-पदं चित्वा रिक्तस्थानपूर्तिं कुरुत- (मञ्जूषा से उचित संख्यावाचि-पद चुनकर रिक्तस्थान भरिए- Fill in the blanks by picking out the correct numeral from the box.)

त्रयस्त्रिंशत्, अष्टचत्वारिंशत्, नवविंशतिः, द्विपञ्चाशत्, अशीतिः

1. षोडश त्रयोदश च __________ भवन्ति।
2. नवदश चतुर्दश च __________ सन्ति।
3. चतुर्विंशतिः अष्टविंशतिः च __________ भवन्ति।
4. एकादश एकोनसप्ततिः च __________ भवन्ति।
5. द्विचत्वारिंशत् षट् च __________ भवन्ति।
उत्तरम्-
1. नवविंशतिः
2. त्रयस्त्रिंशत्
3. द्विपञ्चाशत्
4. अशीतिः
5. अष्टचत्वारिंशत्

नीतिनवनीतम् Summary Notes Class 8 Sanskrit Chapter 10

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Class 8 Sanskrit Chapter 10 नीतिनवनीतम् Summary Notes

नीतिनवनीतम् Summary

संस्कृत साहित्य सर्वतोभावेन एक समृद्ध साहित्य है। इसमें ज्ञान-विज्ञान की सभी विधाओं का तलस्पर्शी विवेचन हुआ है। प्रत्येक विधा को ‘शास्त्र’ की संज्ञा प्राप्त है। इस साहित्य में जीवनोपयोगी सन्देश तथा व्यवहारोपयोगी बातें पदे पदे उपलब्ध होती हैं। ये वचन यत्र तत्र सुभाषितों और नीति श्लोकों के रूप में प्राप्त होते हैं। जीवनमार्ग पर चलते हुए जब मनुष्य किंकर्तव्यविमूढ हो जाता है तो ये कथन ही उसका मार्गदर्शन करते हैं। नीतिशतक, विदुरनीति तथा चाणक्य नीति आदि ग्रन्थ ऐसे ही श्लोकों के अमर आगार हैं।

इसी श्रृंखला में स्मृतिग्रन्थों की रचना हुई। ये मानव सभ्यता के संविधान कहे जाते हैं। इनमें मनुस्मृति का नाम विशेष उल्लेखनीय है। प्रस्तुत पाठ मनुस्मृति के कतिपय श्लोकों का संकलन है जो सदाचार की दृष्टि से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। यहाँ कहा है-माता-पिता तथा गुरुजनों का आदर करने वाला व्यक्ति दीर्घायु होता है। इसके अतिरिक्त सुख-दुःख में समान रहना, अन्तरात्मा को आनन्दित करने वाले कार्य करना आदि शिष्टाचारों का उल्लेख भी किया गया है।

नीतिनवनीतम् Word Meanings Translation in Hindi

मूलपाठः, अन्वयः, शब्दार्थः सरलार्थश्च

(क) अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥1॥

अन्वयः-
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः तस्य आयुर्विद्यायशोबलम् (इति) चत्वारि वर्धन्ते।

शब्दार्थ-
अभिवादन:-प्रणाम।
उपसेविन:-सेवा करने वाले का।
चत्वारि-चार।
वर्धन्ते-वृद्धि को प्राप्त होते हैं।

सरलार्थ-
प्रणाम करने वाले तथा नित्य वृद्ध लोगों की सेवा करने वाले (व्यक्ति) की आयु, विद्या, यश तथा बल-ये चार वस्तुएँ वृद्धि को प्राप्त होती हैं।

(ख) यं मातापितरौ क्लेशं सहेते सम्भवे नृणाम्।
न तस्य निष्कृतिः शक्या कर्तुं वर्षशतैरपि॥2॥

अन्वयः-
नृणां सम्भवे मातापितरौ यं क्लेशं सहेते, तस्य निष्कृतिः वर्षशतैरपि कर्तुं न शक्या।

शब्दार्थ-
नृणाम्-मनुष्यों का।
सम्भवे-जन्म के समय।
क्लेशं-कष्ट को।
सहेते-सहन करते हैं।

निष्कृतिः-बदला।
शतैः-सैकड़ों। शक्या-की जा सकती। सरलार्थ-मनुष्यों के जन्म के अवसर पर माता-पिता जिस कष्ट को सहन करते हैं, उसका बदला सैकड़ों वर्षों में भी नहीं चुकाया जा सकता।

(ग) तयोर्नित्यं प्रियं कुर्यादाचार्यस्य च सर्वदा।
तेष्वेव त्रिषु तुष्टेषु तपः सर्वं समाप्यते॥3॥

अन्वयः-
तयोः आचार्यस्य च नित्यं सर्वदा प्रियं कुर्यात्। तेष्वेव त्रिषु तुष्टेषु तपः सर्वं समाप्यते।।

शब्दार्थ-
तयोः-उन दोनों का।
कुर्यात्-करे।
त्रिषु-तीनों के।
तुष्टेषु-प्रसन्न होने पर।
समाप्यते-पूर्ण होता है।

सरलार्थ-
उन दोनों का (अर्थात् माता व पिता का) तथा गुरु का सदा और नित्य ही प्रिय करना चाहिए। उन तीनों के प्रसन्न हो जाने पर सभी तप सम्पन्न हो जाते हैं।

(घ) सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।
एतद्विद्यात्समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः॥4॥

अन्वयः-
सर्वं परवशं दु:खम्, सर्वम् आत्मवशं सुखम्, एतत् सुखदुःखयोः लक्षणं समासेन विद्यात्।।

शब्दार्थ-
परवशम्-दूसरे के वश में होना।
आत्म-अपने।
समासेन-संक्षेप में।
लक्षणम्-परिभाषा।
विद्यात्-जान लेना चाहिए।

सरलार्थ-
दूसरे के वश में होना ही दुःख है तथा अपने वश में होना ही सुख है। यह सुख-दुःख की परिभाषा संक्षेप में जानना चाहिए।

(ड) यत्कर्म कुर्वतोऽस्य स्यात्परितोषोऽन्तरात्मनः।
तत्प्रयत्नेन कुर्वीत विपरीतं तु वर्जयेत्॥5॥

अन्वयः-
यत् कर्म कुर्वतः अस्य अन्तरात्मनः परितोषः स्यात्, तत् प्रयत्नेन कुर्वीत, विपरीतं तु वर्जयेत्।।

शब्दार्थ-
कुर्वतः-करते हुए।
अन्तरात्मन:-अन्तरात्मा का।
परितोषः-सन्तोष।
कुर्वीत-करना चाहिए।
वर्जयेत्-त्याग कर दे।

सरलार्थ-
जिस कार्य को करते हुए अन्तरात्मा को संतोष होता है, उसे प्रयत्न पूर्वक करना चाहिए, विपरीत का त्याग करना चाहिए।

(च) दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत्॥
सत्यपूतां वदेद्वाचं मनः पूतं समाचरेत्॥6॥

अन्वयः-
दृष्टिपूतं यादं न्यसेत्, वस्त्रपूतं जलं पिबेत, सत्यपूतां वाचं वदेत्, मनः पूतं समाचरेत्।।

शब्दार्थ-
दृष्टिपूतम्-दृष्टि के द्वारा पवित्र।
न्यसेत्-रखे।
पिबेत्-पीना चाहिए।
वाचम्-वाणी को।
समाचरेत्-आचरण करना चाहिए।

सरलार्थ-
दृष्टि के द्वारा पवित्र कदम को रखे, वस्त्र से पवित्र जल पीना चाहिए, सत्य से पवित्र वाणी को कहना चाहिए। मन से पवित्र आचरण करना चाहिए।