सप्तभगिन्यः Summary Notes Class 8 Sanskrit Chapter 9

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Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यःSummary Notes

सप्तभगिन्यः Summary

‘सप्तभगिनी’ यह एक उपनाम है। उत्तरपूर्व के सात राज्य विशेष को यह उपाधि प्रदान की गई है। इन राज्यों के प्राकृतिक . सौन्दर्य और सांस्कृतिक विलक्षणता को ध्यान में रखकर इस पाठ की रचना की गई है। पाठ का सार इस प्रकार है हमारे देश में अट्ठाईस राज्य तथा सात केन्द्रशासित प्रदेश हैं। इन राज्यों में सात राज्यों का एक समूह है। इन्हें ‘सात बहनें’ नाम से जाना जाता है।

अरुणाचल, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैण्ड और त्रिपुरा-इन सात राज्यों का समूह ‘सात बहनें’ के नाम से प्रसिद्ध है। ये सात बहनें प्राचीन इतिहास में प्रायः स्वाधीन ही दृष्टिगोचर होती हैं। किसी भी शासक ने इन्हें अपने अधीन नहीं किया है। अनेक संस्कृतियों से विशिष्ट भारत-भूमि में इन बहनों की संस्कृति महत्त्वपूर्ण है। पर्वतों, वृक्षों तथा पुष्पों के द्वारा इन राज्यों की प्राकृतिक सम्पदा अत्यधिक समृद्धि और गौरव को बढ़ाती है। वस्तुतः ये सात राज्य सबसे श्रेष्ठ हैं।

सप्तभगिन्यः Word Meanings Translation in Hindi

मूलपाठः, अन्वयः, शब्दार्थः सरलार्थश्च

अध्यापिका – सुप्रभातम्।
छात्राः सुप्रभातम्। सुप्रभातम्।
अध्यापिका – भवतु। अद्य किं पठनीयम्?
छात्राः – वयं सर्वे स्वदेशस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामः।
अध्यापिका – शोभनम्। वदत। अस्माकं देशे कति राज्यानि सन्ति?
सायरा – चतुर्विंशतिः महोदये!
सिल्वी – न हि न हि महाभागे! पञ्चविंशतिः राज्यानि सन्ति।
अध्यापिका – अन्यः कोऽपि …?
स्वरा – ( मध्ये एव) महोदये! मे भगिनी कथयति यदस्माकं देशे नवविंशतिः राज्यानि सन्ति। एतदतिरिच्य सप्त केन्द्रशासितप्रदेशाः अपि सन्ति।

शब्दार्थ-
भवतु-ठीक है (अच्छा)।
ज्ञातुम्-जानने के लिए।
अद्य-आज।
इच्छामः-चाहते हैं।
शोभनम्-सुन्दर।
चतुर्विंशतिः-चौबीस (Twenty four)।
भगिनी-बहन।
अतिरिच्य-अतिरिक्त।
मध्ये एव-बीच में ही।
कति-कितने।
पञ्चविंशतिः-पच्चीस।
अष्टाविंशतिः-अट्ठाईस।
सप्त-सात (Seven)

सरलार्थ –

अध्यापिका – सुप्रभात।
छात्राएँ – सुप्रभात, सुप्रभात।
अध्यापिका – अच्छा, आज क्या पढ़ना है?
छात्राएँ – हम सभी अपने देश के राज्यों के विषय में जानना चाहती हैं।
अध्यापिका – सुन्दर। बोलो। हमारे देश में कितने राज्य हैं?
सायरा – महोदया, चौबीस।
सिल्वी – नहीं, नहीं। महाभागा! पच्चीस राज्य हैं।
अध्यापिका – कोई अन्य भी …………।
स्वरा – (बीच में ही) महोदया, मेरी बहन कहती है कि हमारे देश में अट्ठाईस राज्य हैं। इसके अतिरिक्त सात केन्द्रशासित प्रदेश भी हैं।

(ख) अध्यापिका – सम्यग्जानाति ते भगिनी। भवतु, अपि जानीथ यूयं यदेतेषु राज्येषु सप्तराज्यानाम् एकः समवायोऽस्ति यः सप्तभगिन्यः इति नाम्ना प्रथितोऽस्ति।
सर्वे – (साश्चर्यम् परस्परं पश्यन्तः) सप्तभगिन्यः? सप्तभगिन्यः?
निकोलसः – इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः इति किमर्थं कथ्यन्ते?
अध्यापिका – प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वर्तते। कदाचित् सामाजिक-सांस्कृतिक
परिदृश्यानां साम्याद् इमानि उक्तोपाधिना प्रथितानि।
समीक्षा – कौतूहलं मे न खलु शान्तिं गच्छति, श्रावयतु तावद्यत् कानि तानि राज्यानि?

शब्दार्थ-
सम्यक्-अच्छी प्रकार।
जानाति-जानती है।
ते-तेरी।
जानीथ-जानती हो।
यदेतेषु-इनमें।
समवायः-समूह।
प्रथितः-प्रसिद्ध।
किमर्थम्-किसलिए।
प्रतीकात्मकः-सांकेतिक (Symbolic)।
कदाचित्-संभवतः (Perhaps)।
साम्याद्-समानता से।
उक्त०-कही गई उपाधि से।
कौतूहलम्-जिज्ञासा (Eager)।
श्रावयतु-सुनाओ।
साश्चर्यम्-आश्चर्य के साथ (Surprised)।
परस्परं-एक-दूसरे को।
पश्यन्तः-देखते हुए।
कथ्यन्ते-कहे जाते हैं।
परिदृश्यानाम्-वातावरणों के।
प्रथितानि-प्रसिद्ध हैं (Famous)।

सरलार्थ –

अध्यापिका –
तुम्हारी बहन अच्छी प्रकार जानती है। ठीक है, क्या तुम जानते हो कि इन राज्यों में सात राज्यों का एक समूह है, जो ‘सात बहनें’ इस नाम से प्रसिद्ध है। सभी (आश्चर्यपूर्वक एक-दूसरे को देखते हुए) सात बहनें? सात बहनें?
निकोलस – ये राज्य ‘सात बहनें’ इस नाम से किस प्रकार कहे जाते हैं?
अध्यापिका – यह प्रयोग सांकेतिक है। संभवतः सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण की समानता के कारण ये उक्त उपाधि (अर्थात् विशेषण) के द्वारा प्रसिद्ध हो गए हों।
समीक्षा – मेरी जिज्ञासा शान्त नहीं हो रही है। सुनाइए, वे कौन-से राज्य हैं?

(ग) अध्यापिका – शृणुत!
अद्वयं मत्रयं चैव न-त्रि-युक्तं तथा द्वयम्।
सप्तराज्यसमूहोऽयं भगिनीसप्तकं मतम्॥
इत्थं भगिनीसप्तके इमानि राज्यानि सन्ति-अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मिजोरमः, मेघालयः, नगालैण्डः, त्रिपुरा चेति। यद्यपि क्षेत्रपरिमाणैः इमानि लघूनि वर्तन्ते तथापि गुणगौरवदृष्ट्या बृहत्तराणि प्रतीयन्ते।
सर्वे – कथम्? कथम्?

अन्वयः-
अद्वयं तथा मत्रयं चैव नत्रियुक्तं द्वयम्। सप्तराज्यसमूहः अयं भगिनीसप्तकं मतम्।

शब्दार्थ-
शृणुत-सुनो।
अद्वयम्-‘अ’ से प्रारम्भ होने वाले दो।
मत्रयम्-‘म’ से प्रारम्भ होने वाले तीन।
न-त्रि-युक्तम्-‘न’ से तथा ‘त्रि’ से प्रारम्भ होने वाले।
द्वयम् – दो।
अयम्- यह।
मतम्-माना गया है।
इत्थम्-इस प्रकार।
क्षेत्रपरिमाणैः-क्षेत्रफल की दृष्टि से।
लघूनि-छोटे।
वर्तन्ते-हैं।
तथापि-फिर भी।
गुणगौरवदृष्ट्या -गुण और गौरव की दृष्टि से।
बृहत्तराणि-बड़े।
प्रतीयन्ते-प्रतीत होते हैं।

सरलार्थ –

अध्यापिका – सुनो,
‘अ’ वर्ण से प्रारम्भ होने वाले (अरुणाचल और असम) दो, ‘म’ वर्ण से प्रारम्भ होने वाले (यथा मणिपुर, मिजोरम और मेघालय) तीन, तथा ‘न’ वर्ण और ‘त्रि’ से प्रारम्भ होने वाले (यथा-नगालैण्ड और त्रिपुरा) दो-यह सात राज्यों का समूह ‘भगिनी सप्तक’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार ‘भगिनी सप्तक’ में ये राज्य हैं-अरुणाचलप्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नगालैण्ड और त्रिपुरा। यद्यपि क्षेत्रफल की दृष्टि से ये (राज्य) छोटे हैं, फिर भी गुण और गौरव की दृष्टि से बड़े प्रतीत होते हैं।
सभी – कैसे? कैसे?

(घ) अध्यापिका – इमाः सप्तभगिन्यः स्वीये प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः। न केनापि शासकेन इमाः स्वायत्तीकृताः।
अनेक-संस्कृति-विशिष्टायां भारतभूमौ एतासां भगिनीनां संस्कृतिः महत्त्वाधायिनी इति।
तन्वी – अयं शब्दः सर्वप्रथमं कदा प्रयुक्तः?
अध्यापिका – श्रुतमधुरशब्दोऽयं सर्वप्रथमं विगतशताब्दस्य द्विसप्ततितमे वर्षे त्रिपुराराज्यस्योद्घाटनक्रमे केनापि प्रवर्तितः। अस्मिन्नेव काले एतेषां राज्यानां पुनः सचटनं विहितम्।

शब्दार्थ-
स्वीये-अपने।
दृष्टाः -दृष्टिगोचर होते हैं (Seen)
केनापि-किसी के द्वारा भी।
इमाः -ये
स्वायत्तीकृताः-अपने अधीन किए गए हैं।
एतासाम्-इनकी।
भगिनीनाम्-बहनों की।
महत्त्वाधायिनी-महत्त्वपूर्ण (Important)
कदा-कब।
श्रुतमधुर०-सुनने में मधुर।
विगतशताब्दस्य-बीते हुए सौ वर्ष के।
द्विसप्ततितमे-बहत्तरवें (Seventy Two)
उद्घाटनक्रमे-उद्घाटन के क्रम में।
अस्मिन्नेव-इसमें ही।
विहितम्-विधिपूर्वक किया गया।
स्वाधीनाः-स्वतन्त्र (Free)
भारतभूमौ-भारतभूमि पर।
प्रयुक्तः-प्रयोग हुआ (Used)
सङ्घटनं-संगठन (गठन) (Integration, Organization)
प्रवर्तितः-प्रारंभ किया गया (Started)

सरलार्थ –

अध्यापिका – ये सात बहनें अपने प्राचीन इतिहास में प्रायः स्वाधीन ही दृष्टिगोचर होती हैं। किसी भी शासक ने इन्हें अपने अधीन नहीं किया। अनेक संस्कृतियों से विशिष्ट भारतभूमि में इन बहनों की संस्कृति महत्त्वपूर्ण है।
तन्वी – सबसे पहले इस शब्द का प्रयोग कब हुआ?
अध्यापिका – सुनने में मधुर लगने वाला यह शब्द गत शती के बहत्तरवें साल में (1972 ई.) त्रिपुरा राज्य के उद्घाटन
क्रम में किसी के द्वारा प्रयोग किया गया। इस समय ही इन राज्यों का पुनः गठन किया गया।

(ङ) स्वरा – अन्यत् किमपि वैशिष्ट्यमस्ति एतेषाम्?
अध्यापिका – नूनम् अस्ति एव। पर्वत-वृक्ष-पुष्प-प्रभृतिभिः प्राकृतिकसम्पद्भिः सुसमृद्धानि
सन्ति इमानि राज्यानि।भारतवृक्षे च पुष्पस्तबकसदृशानि विराजन्ते एतानि।
राजीवः – भवति! गृहे यथा सर्वाधिका रम्या मनोरमा च भगिनी भवति तथैव
भारतगृहेऽपि सर्वाधिकाः रम्याः इमाः सप्तभगिन्यः सन्ति।

शब्दार्थ
अन्यत्-अन्य (दूसरा) (Other)
वैशिष्ट्य म्-विशिष्टता (Specification)
पुष्प०-फूल।
प्राकृतिकसम्पद्भिः-प्राकृतिक सम्पदाओं के द्वारा (Natural Wealth)
पुष्पस्तबक०-फूलों का गुच्छा (Bunch of Flower)
गृहे-घर में।
सर्वाधिका:-सबसे अधिक
तथैव-उसी प्रकार।
किमपि-कोई भी।
नूनम्-अवश्य (Sure)
प्रभृतिभिः-आदि के द्वारा।
सुसमृद्धानि-समृद्ध (Prosperous)
विराजन्ते-विराजमान हैं (Sat)
यथा-जिस प्रकार।
रम्या-रमणीय (Lovely)
सदृश-जैसे।
भारतवक्षे-भारत रूपी वृक्ष में/पर।

सरलार्थ –

स्वरा – इनकी दूसरी भी कोई विशेषता है।
अध्यापिका – अवश्य ही है। पर्वत, वृक्ष तथा पुष्प आदि प्राकृतिक सम्पदाओं के द्वारा ये राज्य समृद्ध हैं। भारत रूपी वृक्ष पर ये (राज्य) फूलों के गुच्छों के समान विराजमान हैं।
राजीव – आप! जिस प्रकार घर में बहन सबसे अधिक रमणीय और सुन्दर होती है, उसी प्रकार भारत रूपी घर में ये सात बहनें सबसे अधिक सुन्दर हैं।

(च) अध्यापिका – मनस्यागता ते इयं भावना परमकल्याणमयी परं सर्वे न तथा अवगच्छन्ति। अस्तु, अस्ति तावदेतेषां विषये किञ्चिद् वैशिष्ट्यमपि कथनीयम्। सावहित मनसा शृणुत जनजातिबहुलप्रदेशोऽयम्। गारो-खासी-नगा-मिजो-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः अत्र निवसन्ति। शरीरेण ऊर्जस्विनः एतत्प्रादेशिकाः बहुभाषाभिः समन्विताः, पर्वपरम्पराभिः परिपूरिताः, स्वलीलाकलाभिश्च निष्णाताः सन्ति।

मालती – महोदये! तत्र तु वंशवृक्षा अपि प्राप्यन्ते?

शब्दार्थ-
मनसि-मन में।
परम्-परन्तु।
अस्तु-ठीक है।
वैशिष्ट्यम्-विशिष्टता।
शृणुत-सुनो।
निवसन्ति-निवास करते हैं।
समन्विताः-समन्वित (युक्त)।
परम्पराभि:-परम्पराओं के द्वारा (Traditions)
निष्णाताः-कुशल (Expert)
वंशवृक्षाः -बाँस के वृक्ष (Bamboo Trees)
आगता-आ गई
अवगच्छन्ति-जानते हैं (Know)
सावहितमनसा-सावधान मन से।
बहवः-अनेक।
ऊर्जस्विनः-ऊर्जा से युक्त (Energetic)
पर्व-त्योहारों की (Festivals)
परिपूरिताः-भरे हुए (पूर्ण) (Full)
प्राप्यन्ते-प्राप्त होते हैं।
प्रभृतयः-आदि।
बहुभाषिभिः-बहुत भाषाओं से।
स्वलीलाकलाभिः-अपनी क्रिया और कलाओं से।

सरलार्थ –

अध्यापिका – तुम्हारे मन में आई हुई यह भावना परमकल्याणमयी है, परन्तु सभी ऐसा नहीं सोचते हैं। ठीक है, इनके विषय में कुछ विशेषता भी कहनी चाहिए। सावधान मन से सुनो यह जनजाति बहुल प्रदेश है। गारो, खासी, नगा तथा मिजो आदि अनेक जनजातियाँ यहाँ निवास करती हैं। शरीर से ऊर्जा से भरे हुए इन प्रदेशों के निवासी अनेक भाषाओं से युक्त त्योहारों की परम्पराओं से पूर्ण अपनी क्रियाओं और कलाओं में प्रवीण होते हैं।

मालती – महोदया! वहाँ तो बाँस के वृक्ष भी प्राप्त होते हैं?

(छ) अध्यापिका – आम्। प्रदेशेऽस्मिन् हस्तशिल्पानां बाहुल्यं वर्तते। आवस्त्राभूषणेभ्यः
गृहनिर्माणपर्यन्तं प्रायः वंशवृक्षनिर्मितानां वस्तूनाम् उपयोगः क्रियते। यतो हि अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुर्यं विद्यते। साम्प्रतं वंशोद्योगोऽयं अन्ताराष्ट्रियख्यातिम् अवाप्तोऽस्ति।
अभिनवः – भगिनीप्रदेशोऽयं बह्वाकर्षकः इति प्रतीयते।
सलीमः – किं भ्रमणाय भगिनीप्रदेशोऽयं समीचीनः?
सर्वे छात्राः – (उच्चैः) महोदये! आगामिनि अवकाशे वयं तत्रैव गन्तुमिच्छामः।
स्वरा – भवत्यपि अस्माभिः सार्द्धं चलतु।
अध्यापिका – रोचते मेऽयं विचारः। एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थं स्वर्गसदृशानि इति।

शब्दार्थ-
आम्-हाँ।
आ-से लेकर।
क्रियते-किया जाता है।
प्राचुर्यम्-अधिकता (प्रचुरता) (Plenty)
अवाप्तः-प्राप्त।
प्रतीयते-प्रतीत (ज्ञात) होता है (Known)
आगामिनि-आने वाले।
इच्छामः-चाहते हैं (Want)
भ्रमणार्थम्-भ्रमण के लिए (Tour)
भवत्यपि-आप भी।
रोचते-अच्छा लगता है।
बाहुल्यं-अधिकता।
निर्मितानाम्-बनी हुई का।
यतो हि-क्योंकि।
वंशोद्योगः-बाँसों का उद्योग।
बह्वाकर्षकः-अत्यधिक आकर्षक।
समीचीन:-उचित।
गन्तुम्-जाना।
सार्धम्-साथ।
हस्तशिल्पानाम्-हाथ से बनी वस्तुओं की (Handicraft)
ख्यातिम्-प्रसिद्धि को।

सरलार्थ-

अध्यापिका – हाँ। इस प्रदेश में हस्तशिल्पों की अधिकता है। वस्त्र व आभूषणों से लेकर घरों के निर्माण तक प्रायः बाँस के वृक्षों से निर्मित वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। क्योंकि यहाँ बाँस के वृक्षों की अधिकता है। अब यह बाँसों का उद्योग (व्यवसाय) अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि को प्राप्त हो गया है।
अभिनव – यह भगिनीप्रदेश अत्यधिक आकर्षक ज्ञात होता है।
सलीम – क्या भ्रमण के लिए यह भगिनीप्रदेश उचित है?
सभी छात्र – (जोर से) महोदया! आने वाले अवकाश में हम वहाँ ही जाना चाहते हैं।
स्वरा – आप भी हमारे साथ चलें।
अध्यापिका – मुझे यह विचार अच्छा लगता है। ये राज्य भ्रमण के लिए स्वर्ग के समान हैं।

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 12 विद्याधनम्

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NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Ruchira Chapter 12 विद्याधनम्

Class 7 Sanskrit Chapter 12 विद्याधनम् Textbook Questions and Answers

प्रश्न: 1.
उपयुक्तकथनानां समक्षम् ‘आम्’ अनुपयुक्तकथनानां समक्षं ‘न’ इति लिखत- (उचित कथनों के सामने ‘आम्’ और अनुचित कथनों के सामने ‘न’ लिखिए- Write ‘आम्’ before a right sentence and ‘न’ before a wrong sentence.)

(क) विद्या राजसु पूज्यते।
उत्तराणि:
आम्

(ख) वाग्भूषणं भूषणं न।
उत्तराणि:

(ग) विद्याधनं सर्वधनेषु प्रधानम्।
उत्तराणि:
आम्

(घ) विदेशगमने विद्या बन्धुजन: न भवति।
उत्तराणि:

(ङ) सर्वं विहाय विद्याधिकारं कुरु।
उत्तराणि:
आम्।

प्रश्न: 2.
अधोलिखितानां पदानां लिङ्ग, विभक्तिं वचनञ्च लिखत- (निम्नलिखित शब्दों का लिंग, विभक्ति और वचन लिखिए- Write the gender, inflexion and number of words given below.)

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 12 विद्याधनम् 1
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 12 विद्याधनम् 2
उत्तराणि:
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 12 विद्याधनम् 3

प्रश्न: 3.
श्लोकांशान् योजयत। (श्लोकों के अंशों को मिलाइए। Match the parts of the shlokas.)

‘क’ – ‘ख’
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनम् – हारा न चन्द्रोज्ज्वला:।
केयूरा: न विभूषयन्ति पुरुषम् – न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि।
न चौरहार्यं न च राजहार्यम् – या संस्कृता धार्यते।
सत्कारायतनं कुलस्य महिमा – विद्या-विहीनः पशुः।
वाण्येका समलङ्करोति पुरुषम् – रत्नैर्विना भूषणम्।
उत्तराणि:
‘क’ – ‘ख’
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनम् – विद्या-विहीनः पशुः।
केयूराः न विभूषयन्ति पुरुषम् – हारा न चन्द्रोज्ज्वलाः।
न चौरहार्यं न च राजहार्यम् – न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि।
सत्कारयतनं कुलस्य महिमा – रत्नैर्विना भूषणम्।
वाण्येका समलङ्करोति पुरुषम् – या संस्कृता धार्यते।

प्रश्न: 4.
एकपदेन प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखिए- Answer the questions in one word.)

(क) कः पशुः?
उत्तराणि:
विद्या-विहीनः

(ख) का भोगकरी?
उत्तराणि:
विद्या

(ग) के पुरुषं न विभूषयन्ति?
उत्तराणि:
केयूराः

(घ) का एका पुरुषं समलङ्करोति?
उत्तराणि:
वाणी

(ङ) कानि क्षीयन्ते?
उत्तराणि:
भूषणानि।

प्रश्न: 5.
रेखाङ्कितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए Frame questions based on the underlined words.)

(क) विद्याविहीनः नरः पशुः अस्ति।
उत्तराणि:
विद्याविहीनः कः पशुः भवति?

(ख) विद्या राजसु पूज्यते।
उत्तराणि:
का राजसु पूज्यते?

(ग) चन्द्रोज्ज्वला: हाराः पुरुषं न अलङ्कर्वन्ति ।
उत्तराणि:
चन्द्रोज्ज्वला: के पुरुषं न अलङ्कर्वन्ति?

(घ) पिता हिते नियुक्ते।
उत्तराणि:
कः हिते नियुक्ते?

(ङ) विद्याधनं सर्वप्रधानं धनमस्ति।
उत्तराणि:
विद्याधनं कीदृशम् धनमस्ति?

(च) विद्या दिक्षु कीर्तिं तनोति।
उत्तराणि:
विद्या कासु/कुत्र कीर्तिं तनोति?

प्रश्न: 6.
पूर्णवाक्येन प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए- Write the answers of questions in one sentence.)

(क) गुरूणां गुरुः का अस्ति?
उत्तराणि:
विद्या गुरूणां गुरुः अस्ति।

(ख) कीदृशी वाणी पुरुषं समलङ्करोति?
उत्तराणि:
संस्कृता वाणी पुरुषं समलङ्करोति ।

(ग) व्यये कृते किं वर्धते?
उत्तराणि:
व्यये कृते विद्याधनम् वर्धते।।

(घ) भाग्यक्षये आश्रयः कः?
उत्तराणि:
विद्या नाम भाग्यक्षये आश्रयः।

प्रश्नः 7.
मञ्जूषातः पुंल्लिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग-नपुंसकलिङ्गपदानि चित्वा लिखत- (मञ्जूषा से पुंल्लिग, स्त्रीलिंग और नपुंसक लिंग के शब्द चुनकर लिखिए- Choose and write the respective words of masculine, feminine and neutral genders from the box.)

| विद्या, धनम्, संस्कृता, सततम्, कुसुमम्, मूर्धजाः, पशुः, गुरुः, रतिः।।

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 12 विद्याधनम् 4
उत्तराणि:
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 12 विद्याधनम् 5

Class 7 Sanskrit Chapter 12 विद्याधनम् Additional Important Questions and Answers

(1) श्लोकांशान् योजयत- (श्लोकांशों को जोड़िए- Join the verses.)

(i) क्षीयन्ते खलु भूषणानि – विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्।
(ii) व्यये कृते वर्धते एव नित्यं – सततं वाग्भूषणं भूषणम्।
(iii) विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला – विद्या-विहीनः पशुः।
(iv) विद्या बन्धुजनों विदेशगमने – भाग्यक्षये चाश्रयः।
(v) विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं – विद्या परा देवता।
उत्तराणि:
(i) क्षीयन्ते खलु भूषणानि – सततं वाग्भूषणं भूषणम्।
(ii) व्यये कृते वर्धते एव नित्यं – विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्।
(iii) विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला – भाग्यक्षये चाश्रयः।
(iv) विद्या बन्धुजनो विदेशगमने – विद्या परा देवता।
(v) विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं – विद्याविहीनः पशुः।

(2) भिन्नवर्गस्य पदं चिनुत- (भिन्न वर्ग का पद चुनिए- Pick out the word belonging to a different category.)

(i) विद्या, देवता, एका, वाणी
उत्तराणि:
एका – (यह संख्यावाची विशेषण है, शेष संज्ञापद हैं।)

(ii) सततम्, भूषणम्, तृतीयम्, रूपम्
उत्तराणि:
सततम् – (यह अव्यय पद है, शेष शब्द रूप हैं।)

(iii) पशुः, गुरुः, धेनुः, कुरु
उत्तराणि:
कुरु – (यह क्रियापद है, शेष संज्ञा पद हैं।)

(iv) पुरुषम्, स्नानम्, नेत्रम्, धनम्
उत्तराणि:
पुरुषम् – (यह पुल्लिग पद है, शेष नपुंसकलिङ्ग हैं।)

(3) शुद्धस्य कथनस्य समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धस्य समक्षं च ‘न’ लिखत- (शुद्ध कथन के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध के सामने ‘न’ लिखिए- Put down ‘आम्’ opposite the correct statement and ‘न’ opposite the incorrect one.)

(i) स्नानं विलेपनं अलङ्कताः च मूर्धजाः पुरुषं न विभूषयन्ति। ……………………
(ii) विद्याधनं व्यये कृते न वर्धते। ……………………
(iii) भाग्यक्षये विद्या अपि आश्रयः न भवति। ……………………
(iv) राजा अपि धनं पूजयति न तु विद्याम्।……………………
(v) विद्यया एव कुलस्य महिमा भवति। ……………………
उत्तराणि:
(i) आम्
(ii) न
(iii) न
(iv) न
(v) आम्

(4) विशेषणविशेष्यपदानि योजयत- (विशेषण व विशेष्य जोड़िए- Join the adjectives with the nouns they qualify.)

(i) परा – कीर्तिः
(ii) अतुला – नेत्रम्
(iii) संस्कृता – मूर्धजाः
(iv) तृतीयम् – देवता
(v) अलङ्कताः – विद्याधनम्
(vi) सर्वधनप्रधानम् – वाणी
उत्तरत-
(i) परा – देवता
(ii) अतुला – कीर्तिः
(iii) संस्कृता – वाणी
(iv) तृतीयम् – नेत्रम्
(v) अलङ्कृताः – मूर्धजाः
(vi) सर्वधनप्रधानम् – विद्याधनम्

(5) पाठांशं पठत प्रश्नान् च उत्तरत- (पाठांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए- Read the extract and answer the questions.)

विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः ।
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्या-विहीनः पशुः ॥

I. एकपदेन उत्तरत- (एक पद में उत्तर दीजिए- Answer in one word.)

(i) विद्या नरस्य अधिकं किम्?
उत्तराणि:
रूपम्

(ii) विद्या कीदृशं धनम्?
उत्तराणि:
प्रच्छन्नगुप्तम्

(iii) विद्या केषाम् गुरुः?
उत्तराणि:
गुरूणाम्

(iv) का राजसु पूज्यते?
उत्तराणि:
विद्या

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए- Answer in a complete sentence.)

(i) विद्या किं किं करोति?
उत्तराणि:
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी च अस्ति। अथवा विद्या उपभोग-साधनानि यशः (कीर्तिं च) करोति।

(i) विद्याविहीनः केन समः/तुल्यः अस्ति?
उत्तराणि:
विद्याविहीनः पशुना समः/तुल्यः अस्ति।

(ii) विद्या कुत्र बन्धुः?
उत्तराणि:
विद्या विदेशगमने बन्धुजनः या तत्र विविधप्रकारेण साहाय्यं करोति।

III. भाषिककार्यम्

यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए- Answer as directed.)

1. ‘परा देवता’ – अत्र किं विशेषणपदम्? ………………
उत्तराणि:
परा

2. ‘विदेशगमने’ – अत्र किं विभक्तिवचनम् (प्रथमा-द्विवचनम्, द्वितीया-द्विवचनम्, सप्तमी-एकवचनम्) ………………
उत्तराणि:
सप्तमी-एकवचनम्

3. यथानिर्देशम् रिक्तस्थानानि पूरयत
(i) गुरूणाम् (गुरु) ……………… (पशु) ……………… (बन्धु)
उत्तराणि:
पशूनाम्, बन्धूनाम्

(ii) ……………… (एकवचन) ……………… (द्विवचन) गुरूणाम्
उत्तराणि:
गुरोः, गुर्वो:

4. ‘एका वाणी पुरुषं समलङ्करोति’ अत्र ‘समलंकरोति’ क्रियापदस्य कर्ता कः? ………………(एका, वाणी, पुरुषम्)
उत्तराणि:
वाणी

(1) उचितं विकल्पं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (उचित विकल्प चुनकर रिक्त स्थान भरिए Fill in the blanks with the correct option.)

(i) व्यये कृते नित्यम्। (वर्धते, क्षीयते, धार्यते)
उत्तराणि:
वर्धते

(ii) ” न विभूषयन्ति पुरुषम्। (हाराः, अलङ्कताः, केयूराः)
उत्तराणि:
केयूराः

(iii) सततम् भूषणम्। (विद्याधनम्, वाग्भूषणम्, विद्याधिकारम्)
उत्तराणि:
वाग्भूषणम्

(vi) राजसु पूज्यते न हि धनम्। (देवता, परा, विद्या)
उत्तराणि:
विद्या

(v) विद्या नाम नरस्य अतुला। (रतिः, वाणी, कीर्तिः)
उत्तराणि:
कीर्तिः

(2) उचितपदेन प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (उचित पद द्वारा प्रश्ननिर्माण कीजिए- Frame questions using the correct option.)

(i) वाणी एका समलंकरोति पुरुषम्। (किम्, कम्, काम्)
उत्तराणि:
वाणी एका कम् समलंकरोति?

(ii) हाराः पुरुषं न विभूषयन्ति। (काः, के, कः)
उत्तराणि:
के पुरुषं न विभूषयन्ति।

(iii) सततम् वाग्भूषणम् भूषणम्। (कुत्र, कुतः, कदा)
उत्तराणि:
कदा वाग्भूषणम् भूषणम्।

(vi) विद्या रत्नैः विना भूषणम्। (केन, कैः, कान्)
उत्तराणि:
विद्या कैः विना भूषणम्।

(v) विद्या भाग्यक्षये आश्रयः। (किम्, कः, का)
उत्तराणि:
का भाग्यक्षये आश्रयः।

Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions वाक्यरचना तथा अनुवादः

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Sanskrit Vyakaran Class 7 Solutions वाक्यरचना तथा अनुवादः

संस्कृत में वाक्य रचना करते समय निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान देना चाहिए-
1. कर्ताक्रियापद समन्वय: (Agreement between the subject and verb.)
यथा- सः पठति। ते पठन्ति। वचन की दृष्टि से समन्वय त्वम् पठसि।
त्वम् पठसी। अहम् पठामि। पुरुष की दृष्टि से समन्वय

2. विशेषण-विशेष्य-समन्वयः (Agreement between the adjective and the noun it qualifies.)
यथा- विशालः वृक्षः, विशाला वाटिका, विशालम् भवनम्

3. संज्ञा सर्वनाम समन्वयः (Agreement between the noun and pronoun used for it.)
यथा- बालकाः खेलन्ति। ते हसन्ति।
बालिकाः खेलन्ति। ताः हसन्ति।

वाक्य में प्रयुक्त शब्द रूप शुद्ध हो। अत: ध्यान रहे कि शब्द पुंल्लिंग है या स्त्रीलिंग, अकारान्त है अथवा आकारान्त, इकारान्त, उकारान्त अथवा ऋकारान्त; तदनुसार उसका रूप निर्धारित होगा। साथ ही विभक्ति प्रयोग का भी ध्यान रहे। क्रियापद में धातुरूप भी शुद्ध हो। अन्यथा वाक्य अशुद्ध माना जाएगा।
यथा-
अशुद्ध – शुद्ध
1. पुष्पाः विकसन्ति। – पुष्पाणि विकसन्ति।
2. बालकः कन्दुकःक्षिपति – बालकः कन्दुकं क्षिपति।
3. वयम् अध्यापिकात् पठामः। – वयम् अध्यापिकायाः पठामः।
4. शाखे खगाः उपविशन्ति। – शाखायाम् खगाः उपविशन्ति।
5. गुरुवे नमः। – गुरुवे नमः।
6. अध्यापक: छात्रान् दण्डति। – अध्यापक: छात्रान् दण्डयति।

अनुवाद- हिंदी से संस्कृत में अनुवाद करते समय उपरिलिखित सभी बिन्दुओं को ध्यान में रखें। निम्नलिखित उदाहरण ध्यान से देखें और समझें।
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions वाक्यरचना तथा अनुवादः 1
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions वाक्यरचना तथा अनुवादः 2
इस प्रकार वाक्य के प्रत्येक अंश को समझें और उसके लिए संस्कृत पर्याय को चुनें और वाक्य प्रयोग के अनुसार विभक्ति जोड़कर उचित शब्द रूप बनाएँ। क्रियापद का ध्यान रखें कि वह कर्त्तापद के अनुसार हो।

अभ्यासः

प्रश्न 1.
संस्कृतपर्यायम् लिखत। (संस्कृत पर्याय लिखिए- Give Sanskrit meanings.)
(क) 1. शिशुओं को = ____________
2. ऋषियों का = ____________
3. बेलों पर = ____________
4. पिता का = ____________
5. दो पेड़ों पर = ____________
6. पत्तों को = ____________
7. सोमवार को = ____________
8. रेलगाड़ी से = ____________
9. भाई को = ____________
10. गुफा में = ____________
उत्तरम्-
1. शिशून्
2. ऋषीणाम्
3. लतासु
4. पितुः
5. वृक्षयोः
6. पत्राणि
7. सोमवासरे
8. रेलयानेन
9. भ्रातरम्
10. गुहायाम्

(ख) 1. (हम दोनों) करेंगे = _____________
2. (तुम दोनों) गए = _____________
3. (मैंने) सोचा = _____________
4. (उसने) दण्ड दिया = = _____________ (दण्ड्)
5. (मैं) रक्षा करूँगी = _____________
6. (उन्होंने) याद किया = _____________
7. (हम) तैरते हैं = _____________
8. (तुम) देखोगे = _____________
9. (वे) आए = _____________
10. (वे) गाएँगी = _____________
उत्तरम्-
1. करिष्याव:
2. अगच्छतम्
3. अचिन्तयम्
4. अदण्डयत्
5. रक्षिष्यामि
6. अस्मरन्
7. तरामः
8. द्रक्ष्यसि
9. आगच्छन्
10. गास्यन्ति

प्रश्न 2.
अधोदत्तानि वाक्यानि संस्कृते परिवर्तयत- (निम्नलिखित वाक्यों को संस्कृत में बदलिए-
Change the following sentences into Sanskrit.)
(क) 1. मेरे पिता दुकान से फल लाते हैं। (आ + नी)
2. रोहित पैर से गेंद को दूर फेंकता है। (क्षिप्)
3. पुत्री माँ के लिए जल लाई। (स्म-प्रयोग)
4. पेड़ की शाखा पर पक्षी बैठते हैं। (उपविश्)
5. रात को सब जगह अँधेरा होता है। (सर्वत्र)
6. गर्मी की छुट्टी में हम घूमने के लिए हिमाचल प्रदेश जाएँगे। (भ्रमण)
7. माता पुत्र से कहती है- ‘झूठ मत बोलो।’ (मृषा)
उत्तरम्-
1. मम जनकः/पिता आपणात् फलानि आनयति।
2. रोहितः पादेन कन्दुकं दूरं क्षिपति।
3. पुत्री अम्बायै/मात्रे जलम् आनयति स्म।
4. वृक्षस्य शाखायाम् खगाः उपविशन्ति।
5. रात्रौ सर्वत्र अन्धकारः भवति।
6. ग्रीष्मावकाशे वयम् भ्रमणाय हिमाचलप्रदेशं गमिष्याम:।
7. माता पुत्रं वदति- ‘मृषा मा वद।’

(ख) 1. दादी सुबह बगीचे में गई। (वाटिका)
2. वह बगीचे से पीले फूल लाई। (पीत)
3. उसने फूलमालाएँ बनाईं। (रच्)
4. फूलमालाओं से उन्होंने पूजागृह को सजाया। (भूष)
5. उन्होंने देवताओं की पूजा की। (पूज्)
6. उन्होंने देवों को प्रणाम किया। (नम्)
7. उन्होंने कहा- सब देवताओं को नमस्कार। (नमः)
उत्तरम्-
1. पितामही प्रातः वाटिकाम् अगच्छत्।
2. सा वाटिकायाः पीतानि पुष्पाणि आनयत्/आनयति स्म।
3. सा पुष्पमालाः अरचयत्।
4. सा पुष्पमालाभिः पूजागृहम् अभूषयत्।
5. सा देवान् अपूजयत्।
6. सा देवान् / देवताः प्रणमति स्म / अनमत् /प्राणमत्।
7. सा अवदत्- सर्वेभ्यः देवेभ्यः नमः।

Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च

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Sanskrit Vyakaran Class 7 Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च

अधोदत्तानि वाक्यानि अवलोकयत्- (निम्नलिखित वाक्यों को देखिए- Look at the following sentences.)
1. छात्राः पठितुम् (पढ़ने के लिए) विद्यालयं गच्छन्ति।
2. ते तत्र पठित्वा (पढ़कर) गृहम् आगच्छन्ति।
उपरिदत्त वाक्यों में दो पद आए हैं जो पठ् धातु से बने हैं।
पठ् + तुमुन् = पठितुम्
पठ् + क्त्वा = पठित्वा
‘तुमुन’ और ‘क्त्वा’ प्रत्यय हैं। प्रत्यय का अपना कोई अर्थ नहीं होता। किंतु धातु के साथ जुड़ने पर धातु के अर्थ में परिवर्तन ले आते हैं। यथा- पठ् = पढ़ना, किन्तु-पठितुम् = पढ़ने के लिए तथा पठित्वा = पढ़कर।
प्रत्यय तीन प्रकार के होते हैं।
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च 1
यहाँ कृत् प्रत्ययों में केवल (क्त्वा, तुमुन् व ल्यप् ) प्रत्यय पर ध्यान देंगे।

1. क्त्वा प्रत्यय: क्त्वा प्रत्यय’ का प्रयोग ‘कर’ या ‘करके’ अर्थ में होता है। क्त्वा के ‘क्’ का लोप होकर केवल ‘त्वा’ शेष रहता है। जब वाक्य में दो क्रियाएँ होती हैं और पहली क्रिया ‘कर’ या ‘करके’ अर्थ में प्रयुक्त होती है तब धातु के साथ ‘क्त्वा’ प्रत्यय का प्रयोग होता है; यथा-रामः गृहम् गत्वा पठति । (राम घर जाकर पढ़ता है।)
यहाँ ‘गत्वा’ पद में- गम् + क्त्वा – (त्वा) = गत्वा रूप बना है।
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च 2
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च 3

ल्यप् प्रत्यय: जब धातु से पूर्व उपसर्ग होता है तब ‘क्त्वा प्रत्यय’ के स्थान पर ‘ल्यप् प्रत्यय’ का प्रयोग होता है। इस प्रत्यय का प्रयोग भी ‘कर’ या करके’ अर्थ में होता है । ‘ल्यप्’ के ‘ल’ और ‘प्’ का लोप होकर केवल ‘य’ शेष बचता है; यथा-रामः गृहम् आगत्य पठति । (राम घर आकर पढ़ता है।)
आ + गम् + ल्यप् – (य) = आगत्य
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च 4
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च 5

तुमुन् प्रत्यय: ‘तुमुन् प्रत्यय’ का प्रयोग के लिए’ अर्थ को प्रकट करने के लिए धातु के साथ होता है। तुमुन्’ के ‘उन्’ का लोप होकर ‘तुम्’ शेष बचता है। यथा- रामः पठितुम् विद्यालयं गच्छति। (राम पढ़ने के लिए विद्यालय जाता है।)
पठ् + तुमुन् – तुम् = पठितुम्
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च 6
विशेष – क्त्वा, तुमुन् व ल्यप् प्रत्ययान्त पद अव्यय होते हैं। अर्थात् वाक्य प्रयोग के समय लिंग, वचन, काल, पुरुष आदि के कारण इनमें कोई परिवर्तन नहीं आता।
यथा- सः पठितुम् गच्छति।
त्वं पठितुम् गच्छसि।
ते पठितुम् अगच्छन्।

उपसर्गः
जो शब्दांश धातुओं और शब्दों से पूर्व लगाए जाते हैं, उन्हें ‘उपसर्ग’ कहते हैं। स्वतंत्र रूप से इन उपसर्गों का कोई विशेष अर्थ नहीं होता है, परंतु ये धातु के साथ जुड़ कर उसे नये अर्थ में बदल देते हैं अथवा अर्थ में विशेषता ला देते हैं;
यथा- आ + गम् = आगच्छति (आता है।)
यहाँ कुछ प्रमुख ‘धातुओं’ के साथ ‘उपसर्गों’ का प्रयोग किया जा रहा है:
Class 7 Sanskrit Grammar Book Solutions प्रत्ययाः उपसर्गाः च 7
इस प्रकार शब्दों से पूर्व भी उपसर्ग लगाए जाते हैं।

यथा- प्रहार – ‘प्र’ उपसर्ग
विच्छेदः – ‘वि’ उपसर्ग
निर्मलः – ‘निः’ उपसर्ग
दुर्गमम् – ‘दु:’ उपसर्ग इत्यादि।

अभ्यासः

प्रश्न 1.
उचितविकल्पेन वाक्यपूर्ति कुरुत- (उचित विकल्प द्वारा वाक्यपूर्ति कीजिए- Complete the sentences with the correct option.)
1. जनाः भोजनं ____________ भ्रमणाय गच्छन्ति। (खादितुम्, खादित्वा)
2. रामः रावणं ____________ सीताम आनयत। (हत्वा, हन्तुम्)
3. वयम् क्रिकेट खेलं ____________ क्रीडाक्षेत्रम् अगच्छाम। (खेलित्वा, खेलितुम्)
4. पुत्तलिका-खेलं ____________ बालाः प्रसन्नाः अभवन्। (द्रष्टुम्, दृष्ट्वा)
5. सर्वेधावकाः ____________ सज्जाः सन्ति। (धावित्वा, धावितुम्)
उत्तरम-
1. खादित्वा
2. हत्वा
3. खेलितुम्
4. दृष्ट्वा
5. धावितुम्।

प्रश्न 2.
शुद्धं पदम् (✓) इति चिह्नन अङ्कीकुरुत- (शुद्ध पद को (✓) चिह्न से अंकित कीजिए- (✓) Tick mark the correct option.)
1. पा + क्त्वा = पीतुम् / पात्वा / पीत्वा
2. स्था + क्त्वा = स्थात्वा / स्थित्वा / स्थीत्वा
3. गम् + तुमुन् = गमितुम् / गंतुम् / गन्तुम्
4. दृश् + तुमुन् = दृष्टम् / द्रष्टुम् / दर्शितुम्
5. वि + हस् + ल्यप् = विहसय / विहस्य / व्यहस्य
6. उप + गम् + ल्यप् = उपागम्य / उपगम्य / उपगमय
7. लिख् + तुमुन् = लिखितुम् / लेखितुम् / लिखतुम्
उत्तरम्-
1. पीत्वा
2. स्थित्वा
3. गन्तुम्
4. द्रष्टुम्
5. विहस्य
6. उपगम्य
7. लेखितुम्।

प्रश्न 3.
धातु-प्रत्ययोः संयोगं वियोगं वा कृत्वा रिक्तस्थानेषु लिखित- (धातु-प्रत्ययों का संयोग अथवा वियोग करके रिक्त स्थानों में लिखिए- Join or disjoin in the roots and suffixes and write down in the blank spaces.)
1. रावणं निहत्य (नि + ________ + ________) रामः अयोध्या प्रत्यागच्छत्।
2. चलचित्रं दृष्ट्वा (________ + ________) जनाः प्रसन्नाः अभवन्।
3. विद्यालयात् ________ (आ + गम् + ल्यप्) अहं विश्रामं करोमि।
4. अधुना अहं स्वकार्य ________ (कृ + तुमुन्) इच्छामि।
5. एतत् ________ (कथ् + क्त्वा) सः तूष्णीम् अभवत्।
उत्तरम-
1. हन् + ल्यप्
2. दृश् + क्त्वा
3. आगत्य / आगम्य
4. कर्तुम्
5. कथयित्वा।

प्रश्न 4.
अधोदत्तेषु पदेषु उपसर्ग चित्वा लिखत।
(नीचे दिए गए पदों में से उपसर्ग चुनकर लिखिए- Write prefix from given words.)
1. प्रतिकारः
2. प्रणम्य
3. आदाय
4. विकल्पः
5. दुष्करम्
6. सुपुत्रः
7. उत्पतति।
उत्तरम्-
1. प्रति
2. प्र
3. आ
4. वि
5. दुः
6. सु
7. उत्।

संसारसागरस्य नायकाः Summary Notes Class 8 Sanskrit Chapter 8

By going through these CBSE Class 8 Sanskrit Notes Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः Summary, Notes, word meanings, translation in Hindi, students can recall all the concepts quickly.

Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः Summary Notes

संसारसागरस्य नायकाः Summary

अनुपम मिश्र की एक प्रसिद्ध रचना है-आज भी खरे हैं तालाब। प्रस्तुत पाठ इस रचना के ‘संसार सागर के नायक’ नामक अध्याय से संगृहीत है। यहाँ लेखक ने मानव निर्मित तालाब आदि को संसार सागर का नाम दिया है। इसमें विलुप्त हो रहे पारम्परिक ज्ञान और शिल्प के धनी गजधर के सम्बन्ध में चर्चा की गई है।पाठ का सार इस प्रकार है

संसारसागरस्य नायकाः Summary Notes Class 8 Sanskrit Chapter 8.1

सैकड़ों हजारों तालाबों का निर्माण अपने आप नहीं हुआ है। हम उन महान् शिल्पकारों को भूल गए हैं। ये तालाब ही संसार सागर हैं। नूतन समाज ने इन कलाकारों को भुला दिया है।प्रतिदिन नई-नई विधियों का आविष्कार हो रहा है, परन्तु किसी को भी ज्ञात नहीं है कि पूर्व निर्मित इन निर्माणों की गहराई को कौन माप सकता है। आज जो अज्ञात नाम हैं, वे पहले बहुत प्रसिद्ध थे। सम्पूर्ण देश में ये कलाकार निवास करते थे।
संसारसागरस्य नायकाः Summary Notes Class 8 Sanskrit Chapter 8.2

तालाबों को बनाने वालों के लिए ‘गजधर’ यह सम्मानसूचक शब्द था। जो गज भर माप को धारण करते थे, उन्हें ‘गजधर’ कहा जाता है। ये गजधर समाज की गहराई को भी मापते थे। इसलिए वे संसार सागर के नायक थे।

संसारसागरस्य नायकाः Word Meanings Translation in Hindi

मूलपाठः, अन्वयः, शब्दार्थः सरलार्थश्च ।

(क) के आसन् ते अज्ञातनामानः?

शतशः सहस्रशः तडागाः सहसैव शून्यात् न प्रकटीभूताः। इमे एव तडागाः अत्र संसारसागराः इति। एतेषाम् आयोजनस्य नेपथ्ये निर्मापयितृणाम् एककम्, निर्मातॄणां च दशकम् आसीत्। एतत् एककं दशकं च आहत्य शतकं सहस्रं वा रचयतः स्म। परं विगतेषु द्विशतवर्षेषु नूतनपद्धत्या समाजेन यत्किञ्चित् पठितम्। पठितेन तेन समाजेन एककं दशकं सहस्रकञ्च इत्येतानि शून्ये एव परिवर्तितानि।

शब्दार्थ-
के-कौन।
आसन्-थे।
अज्ञातनामान:-अज्ञात (अपरिचित) नाम वाले।
शतशः-सैकड़ों।
सहस्त्रशः-हजारों (Thousands)।
तडागाः-अनेक तालाब।
सहसैव-अचानक ही।
प्रकटीभूताः-प्रकट हुए।
इमे एव-ये ही।
एतेषाम्-इनका।
नेपथ्ये-पर्दे के पीछे।
निर्मापयितृणाम्-बनवाने वालों का।
एककम्-इकाई (Unit, Ones)।
निर्मातृणाम्-बनाने वालों का।
दशकम्-दहाई (Tens)
आहत्य-गुणित होकर (Multiply)।
रचयतः-रचना करते हैं (Creation)।
विगतेषु-बीते हुए (पिछले)।
द्विशतवर्षेषु-दो सौ सालों में।
नूतन०-नई विधि से।
पठितेन-पढ़े हुए के द्वारा।
शून्ये-शून्य में (Zero)
परिवर्तितानि-परिवर्तित हो गए हैं (Changed)।
शतकम्-सैकड़ा।
यत्किञ्चित्-जो कुछ।
सहस्त्रकम्-हजार।

सरलार्थ-
वे अज्ञात नाम वाले कौन थे? सैकड़ों व हजारों तालाब अचानक ही शून्य से प्रकट नहीं हुए हैं। ये तालाब ही यहाँ संसार सागर हैं। इनके आयोजन का पर्दे के पीछे बनाने वालों की इकाई और बनने वालों की दहाई थी। यह इकाई व दहाई गुणित होकर सौ तथा हजार की रचना करते थे। परन्तु बीते हुए दो सौ वर्षों में नई पद्धति के द्वारा समाज ने जो कुछ पढ़ा है। उस पठित समाज ने इकाई, दहाई और हजार को शून्य में ही बदल दिया है।

(ख) अस्य नूतनसमाजस्य मनसि इयमपि जिज्ञासा नैव उद्भूता यद् अस्मात्पूर्वम् एतावतः तडागान् के रचयन्ति स्म। एतादृशानि कार्याणि कर्तुं ज्ञानस्य यो नूतनः प्रविधिः विकसितः, तेन प्रविधिनाऽपि पूर्व सम्पादितम् एतत्कार्यं मापयितुं न केनापि प्रयतितम्। अद्य ये अज्ञातनामानः वर्तन्ते, पुरा ते बहुप्रथिताः आसन्। अशेषे हि देशे तडागाः निर्मीयन्ते स्म, निर्मातारोऽपि अशेषे देशे निवसन्ति स्म।

शब्दार्थ-
मनसि-मन में।
नैव-न ही।
उद्भूता-उत्पन्न हुई।
अस्मात्-इससे।
एतावतः-इन (को)।
के-कौन।
एतादृशानि-ऐसे (इस प्रकार के)।
कर्तुम्-करने के लिए।
प्रविधिः-विधि (Method)।
सम्पादितम्-बनाया गया।
मापयितुम्-मापने के लिए।
प्रयतितम्-प्रयत्न किया (Tried)।
बहुप्रथिताः-बहुत प्रसिद्ध (Very Famous)।
अशेषे-सम्पूर्ण (Whole)।
निर्मीयन्ते स्म-बनाए जाते थे।
नूतनसमाजस्य-नए समाज के।
इयमपि-यह भी।
जिज्ञासा-जानने की इच्छा।
केनापि-किसी ने भी।
पुरा-पहले, प्राचीन काल में।
निर्मातारः-बनाने वाले।

सरलार्थ-
इस नये समाज के मन में यह जानने की इच्छा भी नहीं उत्पन्न हुई कि इससे पहले इन तालाबों को किसने बनाया था। ऐसे कार्यों को करने के लिए ज्ञान की जो नई विधि विकसित हुई उस विधि के द्वारा भी पहले बनाए गए इस कार्य को मापने के लिए किसी ने भी प्रयास नहीं किया। आज जो अज्ञात नाम हैं, पहले वे बहुत प्रसिद्ध थे। सम्पूर्ण देश में तालाब बनाए जाते थे। उन्हें बनाने वाले भी सम्पूर्ण देश में निवास करते थे।

(ग) गजधरः इति सुन्दरः शब्दः तडागनिर्मातॄणां सादरं स्मरणार्थम्। राजस्थानस्य केषुचिद् भागेषु शब्दोऽयम् अद्यापि प्रचलति। कः गजधरः? यः गजपरिमाणं धारयति स गजधरः। गजपरिमाणम् एव मापनकार्ये उपयुज्यते। समाजे त्रिहस्त-परिमाणात्मिकीं लौहयष्टिं हस्ते गृहीत्वा चलन्तः गजधराः इदानीं शिल्पिरूपेण नैव समादृताः सन्ति। गजधरः, यः समाजस्य गाम्भीर्यं मापयेत् इत्यस्मिन् रूपे परिचितः।

शब्दार्थ-
स्मरणार्थम्-याद करने के लिए।
अद्यापि-आज भी।
परिमाणम्-माप को (Measurement)।
उपयुज्यते-उपयोग किया जाता है (Used)।
परिमाणात्मिकी-माप वाली।
गृहीत्वा-लेकर।
इदानीम् – अब।
समादृताः-आदर को प्राप्त (Honoured)।
मापयेत्-माप ले।
त्रिहस्त-तीन हाथ।
केषुचिद्-कुछ।
प्रचलति-चलता है।
धारयति-धारण करता है (Bears)।
यष्टि०-छड़ी।
चलन्तः-चलते हुए।
नैव-नहीं।
गाम्भीर्यम्-गहराई को (Depth)।
गजधरः-गज (लम्बाई, चौड़ाई, गहराई, मोटाई मापने की लोहे की छड़) को रखने वाला व्यक्ति।
तडागनिर्मातृणाम्-तालाब बनाने वालों के।
सादरं-आदर के साथ।

सरलार्थ-
‘गजधर’ यह सुन्दर शब्द तालाबों को बनाने वालों के सादर स्मरण के लिए है। राजस्थान के कुछ भागों में यह शब्द आज भी चलता है। (यह) गजधर कौन है? जो हाथी (गज = 3 फुट) के माप को धारण करता है, वह गजधर है। मापन कार्य में गज का माप ही उपयोग किया जाता है। समाज में तीन हाथ के माप वाली लोहे की छड़ी को हाथ में लेकर चलते हुए गजधर अब शिल्पी के रूप में आदर नहीं पाते हैं। जो समाज की गहराई (गंभीरता) को मापे-इसी रूप में जाने जाते हैं।

(घ) गजधराः वास्तुकाराः आसन्। कामं ग्रामीणसमाजो भवतु नागरसमाजो वा तस्य नव-निर्माणस्य सुरक्षाप्रबन्धनस्य च दायित्वं गजधराः निभालयन्ति स्म। नगरनियोजनात् लघुनिर्माणपर्यन्तं सर्वाणि कार्याणि एतेष्वेव आधृतानि आसन्। ते योजनां प्रस्तुवन्ति स्म, भाविव्ययम् आकलयन्ति स्म, उपकरणभारान् सगृह्णन्ति स्म। प्रतिदाने ते न तद् याचन्ते स्म यद् दातुं तेषां स्वामिनः असमर्थाः भवेयुः। कार्यसमाप्तौ वेतनानि अतिरिच्य गजधरेभ्यः सम्मानमपि प्रदीयते स्म। नमः एतादृशेभ्यः शिल्पिभ्यः।

शब्दार्थ –
वास्तुकाराः-भवन आदि का निर्माण करने वाले (Architects)।
कामम्-भले ही (चाहे)।
पर्यन्तम्-तक।
निभालयन्ति स्म-निभाते थे।
एतेष्वेव-इनमें ही।
सर्वाणि-सब। प्रस्तुवन्ति
स्म-प्रस्तुत करते थे।
आधृतानि-आधारित (Based)।
आकलयन्ति स्म-आकलन (अनुमान) करते
भाविव्ययम्-होने वाले खर्च को।
उपकरणभारान्-साधन सामग्री को (Means)।
सगृह्णन्ति स्म-संग्रह करते थे (Collected)
प्रतिदाने-बदले में (Obligation)
असमर्थाः-असमर्थ (Incapable)
भवेयुः-हों।
अतिरिच्य-अतिरिक्त (Extra)
प्रदीयते स्म-प्रदान किया जाता था (Given)
नमः-नमस्कार। वा-अथवा।

सरलार्थ-
गजधर भवननिर्माण करने वाले होते थे। भले ही, ग्रामीण समाज हो अथवा नगरीय समाज हो, उसके नवनिर्माण का और सुरक्षाप्रबन्धन का दायित्व गजधर निभाते थे। नगर नियोजन से लेकर छोटे निर्माणकार्य तक सभी कार्य इन पर ही आधारित थे। वे योजना को प्रस्तुत करते थे, भावी व्यय का अनुमान करते थे तथा साधन सामग्री का संग्रह करते थे। बदले में वे वह नहीं माँगते थे, जो उनके स्वामी न दे सकें। कार्य की समाप्ति पर वेतन से अतिरिक्त गजधरों को सम्मान भी प्रदान किया जाता था। ऐसे शिल्पियों को नमस्कार।