CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 2 with Solutions

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CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 2 with Solutions

निर्धारित समय : 3 घंटे
अधिकतम अंक : 80

सामान्य निर्देश:
(क) इस प्रश्न-पत्र के दो खंड हैं- ‘अ’ और ‘ब’।
(ख) खंड ‘अ’ में कुल 10 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी प्रश्नों में उपप्रश्न दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(ग) खंड ‘ब’ में कुल 7 वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

खंड ‘अ’- वस्तुपरक प्रश्न (अंक 40)

अपठित गद्यांश (अंक 10)

प्रश्न 1.
नीचे दो गद्यांश दिए गए हैं किसी एक गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (5 x 1 = 5)
वर्तमान युग कंप्यूटर युग है। यदि भारतवर्ष पर नज़र दौड़ाकर देखें तो हम पाएँगे कि जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर का प्रवेश हो गया है। बैंक, रेलेव-स्टेशन, हवाई अड्डे, डाक खाने, बड़े-बड़े उद्योग-कारखाने, व्यवसाय, हिसाब-किताब, रुपये गिनने तक की मशीनें कंप्यूटरीकृत हो गई हैं। अब भी यह कंप्यूटर का प्रारंभिक प्रयोग है। आने वाला समय इसके विस्तृत फैलाव का संकेत दे रहा है। प्रश्न उठता है कि क्या कंप्यूटर आज की ज़रूरत है?

इसका उत्तर है- कंप्यूटर जीवन की मूलभूत अनिवार्य वस्तु तो नहीं है, किंतु इसके बिना आज की दुनिया अधूरी जान पड़ती है। सांसारिक गतिविधियों, परिवहन और संचार उपकरणों आदि का ऐसा विस्तार हो गया है कि उन्हें सुचारु रूप से चलाना अत्यंत कठिन होता जा रहा है। पहले मनुष्य जीवन-भर में अगर सौ लोगों के संपर्क में आता था तो आज वह दो-हज़ार लोगों के संपर्क में आता है। पहले दिन में पाँच-दस लोगों से मिलता था तो आज पचास-सौ लोगों से मिलता है। पहले वह दिन में काम करता था तो आज रातें भी व्यस्त रहती हैं। आज व्यक्ति के संपर्क बढ़ रहे हैं, व्यापार बढ़ रहे हैं, गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, आकांक्षाएँ बढ़ रही हैं, साधन बढ़ रहे हैं। इस अनियंत्रित गति को सुव्यवस्था देने की समस्या आज की प्रमुख समस्या है। कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है।

इस आवश्यकता ने अपने अनुसार निदान ढूँढ लिया है। कंप्यूटर एक ऐसी स्वचालित प्रणाली है जो कैसी भी, अव्यवस्था को व्यवस्था में बदल सकती है। हड़बड़ी में होने वाली मानवीय भूलों के लिए कंप्यूटर राम बाण औषधि है। क्रिकेट के मैदान में अंपायर की निर्णायक भूमिका हो या लाखों-करोड़ों की लंबी-लंबी गणनाएँ कंप्यूटर पलक झपकते ही आपकी समस्या हल कर सकता है। पहले इन कामों को करने वाले कर्मचारी हड़बड़ाकर काम करते थे, एक भूल से घबराकर और अधिक गड़बड़ी करते थे। परिणामस्वरूप काम कम, तनाव अधिक होता था। अब कंप्यूटर की सहायता से काफी सुविधा हो गई है।

(i) वर्तमान युग कंप्यूटर का युग क्यों है?
(क) कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना असंभव-सी हो गई है।
(ख) कंप्यूटर ने पूरे विश्व के लोगों को जोड़ दिया है।
(ग) कंप्यूटर जीवन की अनिवार्य मूलभूत वस्तु बन गया है।
(घ) कंप्यूटर मानव सभ्यता के सभी अंगों का अभिन्न अवयव बन चुका है।
उत्तर
(क) कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना असंभव-सी हो गई है।

(ii) गद्यांश के अनुसार कंप्यूटर के महत्व के विषय में कौन-सा विकल्प सही है?
(क) कंप्यूटर काम के तनाव को समाप्त करने का उपाय है।
(ख) कंप्यूटर कई मानवीय भूलों को निर्णायक रूप से सुधार देता है।
(ग) कंप्यूटर के आने से सारी हड़बड़ाहट दूर हो गई है।
(घ) मानव की सारी समस्याओं का हल कंप्यूटर से संभव है।
उत्तर
(ख) कंप्यूटर कई मानवीय भूलों को निर्णायक रूप से सुधार देता है।

(iii) गद्यांश के अनुसार किस आवश्यकता ने कंप्यूटर में अपना निदान ढूँढ लिया है?
(क) अनियंत्रित कर्मचारियों को अनुशासित करने की।
(ख) अनियंत्रित गति को सुव्यवस्था देने की।
(ग) अधिक से अधिक लोगों से जुड़ जन-जागरण लाने की
(घ) अधिक से अधिक कार्य कभी भी व कहीं भी करने की।
उत्तर
(ख) अनियंत्रित गति को सुव्यवस्था देने की।

(iv) कंप्यूटर के प्रयोग से पहले अधिक तनाव क्यों होता था?
(क) लंबी-लंबी गणनाएँ करनी पड़ती थीं।
(ख) गलतियों के डर से कर्मचारी घबराए रहते थे।
(ग) क्रिकेट मैचों में ग़लत निर्णय का ख़तरा रहता था।
(घ) मानवीय भूलों के कारण बड़ी दुर्घटनाएँ होती थीं।
उत्तर
(ख) गलतियों के डर से कर्मचारी घबराए रहते थे।

(v) कंप्यूटर के बिना आज की दुनिया अधूरी है क्योंकि
(क) सारी व्यवस्था, उपकरण और मशीनें कंप्यूटरीकृत हैं।
(ख) कंप्यूटर ही मानव एकीकरण का आधार है।
(ग) कंप्यूटर ने सारी प्रक्रियाएँ आसान बना दी हैं।
(घ) कंप्यूटर द्वारा मानव सभ्यता अधिक समर्थ हो गई है।
उत्तर
(क) सारी व्यवस्था, उपकरण और मशीनें कंप्यूटरीकृत हैं।

अथवा

पाठक आमतौर पर रूढ़िवादी होते हैं, वे सामान्यतः साहित्य में अपनी स्थापित मर्यादाओं की स्वीकृति या एक स्वप्न-जगत् में पलायन चाहते हैं। साहित्य एक झटके में उन्हें अपने आस-पास के उस जीवन के प्रति सचेत करता है, जिससे उन्होंने आँखें मूंद रखी थीं। शुतुरमुर्ग अफ्रीका के रेगिस्तानों में नहीं मिलते; वे हर जगह बहुतायत में उपलब्ध हैं।

प्रौद्योगिकी के इस दौर का नतीजा जीवन के हर गोशे में नकद फसल के लिए बढ़ता हुआ पागलपन है; और हमारे राजनीतिज्ञ, सत्ता के दलाल, व्यापारी, नौकरशाह-सभी लोगों को इस भगदड़ में नहीं पहुँचने, जैसा दूसरे करते हैं वैसा करने, चूहादौड़ में शामिल होने और कुछ-न-कुछ हांसिल कर लेने को जिए जा रहे हैं। हम थककर साँस लेना और अपने चारों ओर निहारना, हवा के पेड़ में से गुज़रते वक्त पत्तियों की मनहर लय-गतियों को और फूलों के जादुई रंगों को, फूली सरसों के चमकदार पीलेपन को, खिले मैदानों की घनी हरीतिमा को मर्मर ध्वनि के सौंदर्य, हिमाच्छादित शिखरों की भव्यता, समुद्र तट पर पछाड़ खाकर बिखरती हुई लहरों के घोष को देखना-सुनना भूल गए हैं।

कुछ लोग सोचते हैं कि पश्चिम का आधुनिकतावाद और भारत तथा अधिकांश तीसरी दुनिया के नव-औपनिवेशिक चिंतन के साथ अपनी जड़ों से अलगाव, व्यक्तिवादी अजनबियत में हमारा अनिवार्य बे-लगाम साव, अचेतन के बिंब, बौद्धिकता से विद्रोह, यह घोषणा कि ‘दिमाग अपनी रस्सी के अंतिम सिरे पर है’, यथार्थवाद का विध्वंस, काम का ऐन्द्रिक सुख मात्र रह जाना और मानवीय भावनाओं का व्यावसयीकरण तथा निम्नस्तरीयकरण इस अंधी घाटी में आ फँसने की वजह है।

लेकिन वे भूल जाते हैं कि आधुनिकीकरण इतिहास की एक सच्चाई है, कि नई समस्याओं को जन्म देने और विज्ञान को अधिक जटिल बनाने के बावजूद आधुनिकीकरण, एक तरह से मानव जाति की नियति है। मेरा सुझाव है कि विवेकहीन आधुनिकता के बावजूद आधुनिकता की दिशा में धैर्यपूर्वक सुयोजित प्रयास होने चाहिए। एक आलोचक किसी नाली में भी झाँक सकता है, पर वह नाली-निरीक्षक नहीं होता। लेखक का कार्य दुनिया को बदलना नहीं, समझना है। साहित्य क्रांति नहीं करता; वह मनुष्यों का दिमाग बदलता है और उन्हें क्रांति की आवश्यकता के प्रति जागरूक बनाता है।

(i) गद्यांश में ‘शुतुरमुर्ग’ की संज्ञा किसे दी गई है?
(क) लेखक, जो संसार को समझना चाहता है।
(ख) राजनीतिज्ञ, जो अपने स्वार्थ साधना चाहता है।
(ग) पाठक, जो सपनों की दुनिया में रहना चाहता है।
(घ) नौकरशाह, जो दूसरों जैसा बनने को होड़ में शामिल है।
उत्तर
(ग) पाठक, जो सपनों की दुनिया में रहना चाहता है।

(ii) आधुनिकता की दिशा में सुयोजित प्रयास क्यों होने चाहिए?
(क) इससे जीवन सुगम हो जाएगा तथा मानव प्रकृति का आनंद ले सकेगा।
(ख) नई समस्याओं को जन्म लेने के पहले ही रोका जा सकेगा।
(ग) आधुनिक होने की प्रक्रिया सदा से मानव सभ्यता का अंग रही है।
(घ) इससे विज्ञान सरल हो अधिक मानव कल्याणी हो सकेगा।
उत्तर
(ग) आधुनिक होने की प्रक्रिया सदा से मानव सभ्यता का अंग रही है।

(iii) ‘नक़द फ़सल के लिए बढ़ता हुआ पागलपन’ से क्या तात्पर्य है?
(क) लोग तुरंत व अधिक से अधिक लाभ कमाना चाहते हैं।
(ख) लोग प्रकृति को समय नहीं देना चाहते हैं।
(ग) लोग थके हुए हैं पर विश्राम नहीं करना चाहते हैं।
(घ) लोग भौतिकतावादी तथा अमीर लोगों की नकल करना चाहते हैं।
उत्तर
(क) लोग तुरंत व अधिक से अधिक लाभ कमाना चाहते हैं।

(iv) पाठक साहित्य से आमतौर पर क्या अपेक्षा रखते हैं?
(क) साहित्य को हमारे मन की बात कहनी चाहिए।
(ख) साहित्य को संसार को यथावत समझना चाहिए।
(ग) साहित्य तनाव कम करने वाला होना चाहिए।
(घ) साहित्य को जीवन कौशलों व मूल्यों की शिक्षा देनी चाहिए।
उत्तर
(ख) साहित्य को संसार को यथावत समझना चाहिए।

(v) लेखक के अनुसार साहित्य क्या कार्य करने के लिए प्रेरित करता है?
(क) लोगों के यथार्थ से अवगत करा बदलाव के लिए।
(ख) लोगों को जीवन की समस्याओं को भुला आगे बढ़ते जाने के लिए।
(ग) लोगों को यथार्थवाद का विध्वंस करने के लिए।
(घ) लोगों को भावनाओं व ऐन्द्रिक सुख से ऊपर उठ कार्य करने के लिए।
उत्तर
(क) लोगों के यथार्थ से अवगत करा बदलाव के लिए।

प्रश्न 2.
नीचे दो गद्यांश दिए गए हैं किसी एक गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (5 x 1 = 5)
पशु को बाँधकर रखना पड़ता है, क्योंकि वह निरंकुश है। चाहे जहाँ-तहाँ चला जाता है, इधर-उधर मुँह मार देता है। क्या मनुष्य को भी इसी प्रकार दूसरों का बंधन स्वीकार करना चाहिए? क्या इससे उसमें मनुष्यत्व रह पाएगा। पशु के गले की रस्सी को एक हाथ में पकड़ कर और दूसरे हाथ में एक लकड़ी लेकर जहाँ चाहो हाँककर ले जाओ। जिन लोगों को इसी प्रकार हाँके जाने का स्वभाव पड़ गया है, जिन्हें कोई भी जिधर चाहे ले जा सकता है, काम में लगा सकता है, उन्हें भी पशु ही कहा जाएगा।

पशु को चाहे कितना मारो, चाहे कितना उसका अपमान करो, बाद में खाने को दे दो, वह पूँछ और कान हिलाने लगेगा। ऐसे नर-पशु भी बहुत से मिलेंगे जो कुचले जाने और अपमानित होने पर भी जरा-सी वस्तु मिलने पर चट संतुष्ट और प्रसन्न हो जाते हैं। कुत्ते को कितना ही ताड़ना देने के बाद उसके सामने एक टुकड़ा डाल दो, वह झट से मार-पीट को भूल कर उसे खाने लगेगा। यदि हम भी ऐसे ही हैं तो हम कौन हैं, इसे स्पष्ट कहने की आवश्यकता नहीं।

पशुओं में भी कई पशु मार-पीट और अपमान को नहीं सकते। वे कई दिन तक निराहार रहते हैं, कई पशुओं ने तो प्राण त्याग दिए, ऐसा सुना जाता है पर इस प्रकार के पशु मनुष्य-कोटि के हैं, उनमें मनुष्यत्व का समावेश है, यदि ऐसा कहा जाए तो अत्युक्ति न होगी।

(i) कई पशुओं ने प्राण त्याग दिए। क्योंकि
(क) उन्हें विद्रोह करने की अपेक्षा प्राण त्यागना उचित लगा।
(ख) उन्हें तिरस्कृत हो जीवन जीना उचित नहीं लगा।
(ग) वह यह शिक्षा देना चाहते थे की प्यार, मार-पीट से अधिक कारगर है।
(घ) वह यह दिखाना चाहते थे कि लोगों को उनकी आवश्यकता अधिक है न कि उन्हें लोगों की।
उत्तर
(ख) उन्हें तिरस्कृत हो जीवन जीना उचित नहीं लगा।

(ii) बंधन स्वीकार करने से मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ेंगे?
(क) मनुष्य सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से कम स्वतंत्र हो जाएगा।
(ख) मनुष्यत्व में व्यक्तिगत इच्छा व निर्णय का तत्व समाप्त हो जाएगा।
(ग) मनुष्य बँधे हुए पशु समान हो जाएगा।
(घ) मनुष्य की निरंकुशता में परिवर्तन हो जाएगा।
उत्तर
(ख) मनुष्यत्व में व्यक्तिगत इच्छा व निर्णय का तत्व समाप्त हो जाएगा।

(iii) मनुष्यत्व को परिभाषित करने हेतु कौन-सा मूल्य अधिक महत्वपूर्ण है?
(क) स्वतंत्रता
(ख) न्याय
(ग) शांति
(घ) प्रेम
उत्तर
(क) स्वतंत्रता

(iv) गद्यांश के अनुसार कौन-सी उद्घोषणा की जा सकती है?
(क) सभी पशुओं में मनुष्यत्व है।
(ख) सभी मनुष्यों में पशुत्व है।
(ग) मानव के लिए बंधन आवश्यक नहीं है।
(घ) मान-अपमान की भावना केवल मानव ही समझता है।
उत्तर
(ग) मानव के लिए बंधन आवश्यक नहीं है।

(v) गद्यांश में नर और पशु की तुलना किन बातों को लेकर की गई है?
(क) पिटने की क्षमता।
(ख) पूँछ-कान आदि को हिलना।
(ग) बंधन स्वीकार करना।
(घ) लकड़ी द्वारा हाँके जाना।
उत्तर
(ग) बंधन स्वीकार करना।

अथवा

व्यक्ति चित्त सब समय आदर्शों द्वारा चालित नहीं होता। जितने बड़े पैमाने पर मनुष्य की उन्नति के विधान बनाए गए, उतनी ही मात्रा में लोभ, मोह जैसे विकार भी विस्तृत होते गए, लक्ष्य की बात भूल गए, आदर्शों को मज़ाक का विषय बनाया गया और संयम को दकियानूसी मान लिया गया।

परिणाम जो होना था, वह हो रहा है। यह कुछ थोड़े-से लोगों के बढ़ते हुए लोभ का नतीजा है, परंतु इससे भारतवर्ष के पुराने आदर्श और भी अधिक स्पष्ट रूप से महान और उपयोगी दिखाई देने लगे हैं। भारतवर्ष सदा कानून को धर्म के रूप में देखता आ रहा है। आज एकाएक कानून और धर्म में अंतर कर दिया गया है।

धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, कानून को दिया जा सकता है। यही कारण है कि जो धर्मभीरु हैं, वे भी त्रुटियों से लाभ उठाने में संकोच नहीं करते। इस बात के पर्याप्त प्रमाण खोज जा सकते हैं कि समाज के ऊपरी वर्ग में चाहे जो भी होता रहा हो, भीतर-बाहर भारतवर्ष अब भी यह अनुभव कर रहा है कि धर्म कानून से बड़ी चीज़ है। अब भी सेवा, ईमानदारी, सच्चाई और आध्यात्मिकता के मूल्य बने हुए हैं।

वे दब अवश्य गए हैं, लेकिन नष्ट नहीं हुए हैं। आज भी वह मनुष्य से प्रेम करता है, महिलाओं का सम्मान करता है, झूठ और चोरी को ग़लत समझता है, दूसरों को पीड़ा पहुँचाने को पाप समझता है।

(i) मनुष्य ने आदर्शों को मज़ाक का विषय किस कारण बना लिया?
(क) कानून
(ख) उन्नति
(ग) लोभ
(घ) धर्मभीरुता
उत्तर
(ग) लोभ

(ii) धर्म एवं कानून के संदर्भ में भारत के विषय में कौन-सा कथन सबसे अधिक सही है?
(क) महिलाओं का सम्मान धर्म तो है, पर कानून नहीं है।
(ख) धर्म और कानून दोनों को धोखा दिया जा सकता है।
(ग) भले लोगों के लिए कानून नहीं चाहिए और बुरे इसकी परवाह नहीं करते हैं।
(घ) भारत का निचला वर्ग कदाचित अभी भी कानून को धर्म के रूप में देखता है।
उत्तर
(ग) भले लोगों के लिए कानून नहीं चाहिए और बुरे इसकी परवाह नहीं करते हैं।

(iii) भारतवर्ष में सेवा और सच्चाई के मूल्य ……………….. रेखांकित के लिए विकल्प छाँटिए
(क) मनुष्य की समाज पर निर्भरता में कमी होने के कारण इनमें ह्रास हुआ है।
(ख) जीवन में उन्नति के बड़े पैमाने के कारण कहीं छिप-से गए हैं।
(ग) न्यायालयों में कानून की सत्याभासी धाराओं में उलझकर रहे गए हैं।
(घ) परमार्थ के लिए जीवन की बाजी लगाने वाले यह सिद्ध करते हैं कि यह व्यक्ति के मन को अभी भी नियंत्रित कर रहे हैं।
उत्तर
(ख) जीवन में उन्नति के बड़े पैमाने के कारण कहीं छिप-से गए हैं।

(iv) भारतवर्ष का बड़ा वर्ग बाहर-भीतर कदाचित क्या अनुभव कर रहा है?
(क) धर्म, कानून से बड़ी चीज़ है।
(ख) कानून, धर्म से बड़ी चीज़ है।
(ग) संयम अशक्त और अकर्मण्ण्य लोगों के लिए है।
(घ) आदर्श और उसूलों से यथार्थ जीवन असंभव है।
उत्तर
(क) धर्म, कानून से बड़ी चीज़ है।

(v) निम्नलिखित में से सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक का चयन कीजिए।
(क) उन्नति के संदर्भ में जीवन मूल्यों की प्रासंगिकता
(ख) मानव चित्त के आकर्षण निवारण में आदर्शों की भूमिका
(ग) समाज कल्याण हेतु धर्म और कानून का सहअस्तित्व
(घ) धार्मिक व सार्वभौमिक मूल्यों का एकीकरण
उत्तर
(क) उन्नति के संदर्भ में जीवन मूल्यों की प्रासंगिकता

व्यावहारिक व्याकरण (अंक 16)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित पाँच भागों में से किन्हीं चार भागों के उत्तर दीजिए। (4 x 1 = 4)
(i) ‘तताँरा बहुत बलशाली भी था।’ रेखांकित में पद है
(क) संज्ञा पद
(ख) सर्वनाम पद
(ग) विशेषण पद
(घ) क्रिया पद
उत्तर
(ग) विशेषण पद

(ii) वे माँ से कहानी सुनते रहते हैं।’ वाक्य में क्रियापदबंध है
(क) वे माँ से
(ख) माँ से कहानी
(ग) सुनते रहते हैं
(घ) कहानी सुनते
उत्तर
(ग) सुनते रहते हैं

(iii) बँगले के पीछे लगा पेड़ गिर गया। वाक्य में रेखांकित पदबंध है
(क) संज्ञा पदबंध
(ख) क्रिया पदबंध
(ग) विशेषण पदबंध
(घ) क्रियाविशेषण पदबंध
उत्तर
(ग) विशेषण पदबंध

(iv) वाक्य ……………………..’ से बनता है।
(क) स्वर
(ख) व्यंजन
(ग) शब्द
(घ) पद
उत्तर
(घ) पद

(v) मैं तेज़ी से दौड़ता हुआ घर पहुँचा। रेखांकित में कौन-सा पदबंध है
(क) क्रियाविशेषण पदबंध
(ख) विशेषण पदबंध
(ग) संज्ञा पदबंध
(घ) क्रिया पदबंध
उत्तर
(क) क्रियाविशेषण पदबंध

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पाँच भागों में से किन्हीं चार भागों के उत्तर दीजिए। (4 x 1 =4)
(i) ‘बच्चे आए हैं और खेल रहे हैं।’ वाक्य-रचना की दृष्टि से है।
(क) मिश्र वाक्य
(ख) सरल वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) सामान्य वाक्य
उत्तर
(ग) संयुक्त वाक्य

(ii) “राम घर गया। उसने माँ को देखा।” का संयुक्त-वाक्य होगा
(क) राम ने घर जाकर माँ को देखा।
(ख) राम घर गया और उसने माँ को देखा।
(ग) राम घर गया अतः उसने माँ को देखा।
(घ) जब राम घर गया तब उसने माँ को देखा।
उत्तर
(ख) राम घर गया और उसने माँ को देखा।

(iii) निम्नलिखित में मिश्र-वाक्य है
(क) चोर को देखकर सिपाही उसे पकड़ने दौड़ा।
(ख) नेताजी भाषण देकर चले गए।
(ग) सेठ जानता है कि नौकर ईमानदार है।
(घ) उसने खाना खाया और सो गया।
उत्तर
(ग) सेठ जानता है कि नौकर ईमानदार है।

(iv) निम्नलिखित में संयुक्त-वाक्य है
(क) वह बाज़ार पुस्तक ख़रीदने गया।
(ख) वह बाज़ार से पुस्तक ख़रीद लाया।
(ग) जब वह बाज़ार गया तब पुस्तक ख़रीद लाया।
(घ) वह बाज़ार गया और पुस्तक ख़रीद लाया।
उत्तर
(घ) वह बाज़ार गया और पुस्तक ख़रीद लाया।

(v) मिश्र वाक्य को संयुक्त वाक्य में अथवा संयुक्त को सरल वाक्य में बदलने को कहते हैं
(क) वाक्य निर्माण
(ख) वाक्य रूपांतरण
(ग) वाक्य प्रक्रिया
(घ) वाक्य संश्लेषण
उत्तर
(क) वाक्य निर्माण

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पाँच भागों में से किन्हीं चार भागों के उत्तर दीजिए। (4 x 1 = 4)
(i) ‘महावीर’- शब्द में कौन-सा समास है-
(क) कर्मधारय
(ख) द्विगु ।
(ग) तत्पुरुष
(घ) अव्ययीभाव
उत्तर
(क) कर्मधारय

(ii) ‘वनगमन’- समस्तपद का विग्रह होगा
(क) वन का गमन
(ख) वन से गमन
(ग) वन को गमन
(घ) वन और गमन
उत्तर
(ग) वन को गमन

(iii) ‘पीत है जो अंबर’- का समस्तपद है
(क) पितांबर
(ख) पीतम्बर
(ग) पीतांबर
(घ) पीला अंबर
उत्तर
(ग) पीतांबर

(iv) ‘गुरुदक्षिणा’ शब्द के सही समास-विग्रह का चयन कीजिए।
(क) गुरु से दक्षिणा–तत्पुरुष समास
(ख) गुरु का दक्षिणा-तत्पुरुष समास
(ग) गुरु की दक्षिणा–तत्पुरुष समास
(घ) गुरु के लिए दक्षिणा-तत्पुरुष समास
उत्तर
(घ) गुरु के लिए दक्षिणा-तत्पुरुष समास

(v) ‘दिनचर्या’ समस्तपद का विग्रह है
(क) दिन की चर्या
(ख) दिन में आराम
(ग) दिन में चलना
(घ) दिन भर खाना
उत्तर
(क) दिन की चर्या

प्रश्न 6.
निम्नलिखित चारों भागों के उत्तर दीजिए। (4 x 1 =4)
(i) पढ़ाई में मेहनत कर मैं …………. हो सकता हूँ। मुहावरे से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए।
(क) अंधों में काना राजा
(ख) एक पंथ दो काज
(ग) अपना हाथ जगन्नाथ
(घ) पैरों पर खड़ा होना
उत्तर
(घ) पैरों पर खड़ा होना

(ii) ‘विपत्ति में उसकी अक्ल …… उपयुक्त मुहावरे से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए।
(क) खो जाना
(ख) ठनक जाना
(ग) चकरा जाना
(घ) आगबबूला हो जाना
उत्तर
(ग) चकरा जाना

(iii) सच्चे शूरवीर देश की रक्षा में प्राणों की ……….. हैं। रिक्त स्थान की पूर्ति सटीक मुहावरे से कीजिए
(क) बाजी लगा देते हैं।
(ख) जान लगा देते हैं।
(ग) ताकत लगा देते हैं।
(घ) आहुति लगा देते हैं।
उत्तर
(क) बाजी लगा देते हैं।

(iv) गरीब माँ-बाप अपना ……… कर बच्चों को पढ़ाते हैं और वे चिंता नहीं करते। रिक्त स्थान की पूर्ति सटीक मुहावरे से कीजिए।
(क) गला काट
(ख) पेट काट
(ग) खून बहा
(घ) मन लगा
उत्तर
(ख) पेट काट

पाठ्यपुस्तक (अंक 14)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए। (4 x 1 = 4)

कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो,
साँस थमती गई, नब्ज जमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
कट गए सर हमारे तो कुछ गम नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया,
मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो ………. (1)

ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज़ आती नहीं,
हुस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करे
वो जवानी जो खू में नहाती नहीं,
आज धरती बनी है दुलहन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो……….(2)

(i) ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’- पंक्ति में ‘सर’ किसका प्रतीक है
(क) स्वाभिमान
(ख) सिर
(ग) घमंड
(घ) पराक्रम
उत्तर
(क) स्वाभिमान

(ii) पद्यांश में ‘बाँकपन’ शब्द प्रतीक है
(क) वक्रता
(ख) अद्भुत
(ग) छवि
(घ) बेमिसालपन
उत्तर
(घ) बेमिसालपन

(iii) धरती के दुलहन बनने से तात्पर्य है
(क) दुलहन की भाँति शर्मा रही है।
(ख) सैनिकों के खून से नहा गई है।
(ग) बलिदान से गौरवान्वित हुई है।
(घ) दुलहन की भाँति अपने प्रियतम की आस देख रही है।
उत्तर
(ग) बलिदान से गौरवान्वित हुई है।

(iv) सर पर कफन बाँधने का अर्थ है
(क) बलिदान के लिए तैयार होना।
(ख) मरने की कोशिश करना।
(ग) अपने लिए जान की बाजी लगाना।
(घ) लोगों को दिखाना कि हम मरने से नहीं डरते।
उत्तर
(क) बलिदान के लिए तैयार होना।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए। (5 x 1 = 5)
हमारे जीवन की रफ्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है। कोई बोलना नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं, तब अपने आप से लगातार बड़बड़ाते रहते हैं। अमेरिका से हम प्रतिस्पर्धा करने लगे। एक महीने में पूरा होने वाला काम एक दिन में पूरा करने की कोशिश करने लगे। वैसे भी दिमाग की रफ्तार हमेशा तेज़ ही रहती है।

उसे ‘स्पीड’ का इंजन लगाने पर वह हज़ार गुना अधिक रफ्तार से दौड़ने लगता है। फिर एक क्षण ऐसा आता है जब दिमाग का तनाव बढ़ जाता है और पूरा इंजन टूट जाता है। यही कारण है जिससे मानसिक रोग यहाँ बढ़ गए हैं। अकसर हम या तो गुज़रे हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहते हैं। हम या तो भूतकाल में रहते हैं या भविष्य काल में असल में दोनों ही काल मिथ्या हैं। एक चला गया है, दूसरा आया ही नहीं है।

हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए। चाय पीते-पीते उस दिन दिमाग से भूत और भविष्य दोनों ही काल उड़ गए थे। केवल वर्तमान क्षण सामने थे। और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था।

(i) गद्यांश में मानसिक रोगों के बढ़ने का कारण क्या बताया गया है?
(क) अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करना।
(ख) तेज़ रफ्तार से दौड़ते दिमाग का तनाव।
(ग) सामर्थ्य से अधिक कार्य करने का दबाव।
(घ) खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहना।
उत्तर
(ख) तेज़ रफ्तार से दौड़ते दिमाग का तनाव।

(ii) जीवन की रफ्तार बढ़ने का अर्थ है
(क) प्रतियोगी होना।
(ख) दूसरों को हराना।
(ग) तीव्र गति से कार्य का निष्पादन करना।
(घ) जल्दी बूढ़ा होना।
उत्तर
(ग) तीव्र गति से कार्य का निष्पादन करना।

(iii) ‘दोनों ही काल मिथ्या हैं’- इसका तात्पर्य है?
(क) समय सदा सत्य नहीं रहता।
(ख) दोनों ही काल झूठे हैं।
(ग) व्यक्ति का नियंत्रण केवल वर्तमान पर रहता है।
(घ) व्यक्ति को खट्टी-मीठी यादों में नहीं रहना चाहिए।
उत्तर
(ग) व्यक्ति का नियंत्रण केवल वर्तमान पर रहता है।

(iv) दिमाग पर स्पीड का इंजन क्यों लगाया जाता है?
(क) अमेरिका से प्रतिस्पर्धा के लिए
(ख) दौड़ने की गति बढ़ाने के लिए
(ग) दिमाग की स्पीड बढ़ाने के लिए
(घ) दिमाग को तनावमुक्त रख अधिक कार्य करने के लिए।
उत्तर
(ग) दिमाग की स्पीड बढ़ाने के लिए

(v) अनंतकाल के विस्तृत होने का क्या कारण था?
(क) समय व्यतीत नहीं हो पाने के कारण
(ख) लेखक के बोर होने के कारण।
(ग) लेखक केवल वर्तमान के बारे में सोच पा रहा था।
(घ) क्योंकि आकाश का दूसरा नाम अनंत है।
उत्तर
(ग) लेखक केवल वर्तमान के बारे में सोच पा रहा था।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए। (5 x 1 = 5)
वामीरो के रुदन स्वरों को सुनकर उसकी माँ वहाँ पहुँची और दोनों को देखकर आग बबूला हो उठी। सारे गाँववालों की उपस्थिति में यह दृश्य उसे अपमानजनक लगा। इस बीच गाँव के कुछ लोग भी वहाँ पहुँच गए। वामीरो की माँ क्रोध में उफ़न उठी। उसने तताँरा को तरह-तरह से अपमानित किया।

गाँव के लोग भी तताँरा के विरोध में आवाजें उठाने लगे। यह तताँरा के लिए असहनीय था। वामीरो अब भी रोए जा रही थी। तताँरा भी गुस्से से भर उठा। उसे जहाँ विवाह की निषेध परंपरा पर क्षोभ था वहीं अपनी असहायता पर खीझ। वामीरो का दुख उसे और गहरा कर रहा था।

उसे मालूम न था कि क्या कदम उठाए चाहिए? अनायास उसका हाथ तलवार की मूठ पर जा टिका। क्रोध में उसने तलवार निकाली और कुछ विचार करता रहा। क्रोध लगातार अग्नि की तरह बढ़ रहा था।

(i) गद्यांश में क्रोध और अग्नि की तुलना क्यों की गई है?
(क) क्रोध और अग्नि दोनों ही बड़े गर्म होते हैं।
(ख) क्रोध और अग्नि दोनों ही पर नियंत्रण कठिन है।
(ग) तताँरा का स्वभाव बहुत गुस्से वाला था।
(घ) वामीरो की माँ और तताँरा दोनों ही गुस्से में थे।
उत्तर
(ख) क्रोध और अग्नि दोनों ही पर नियंत्रण कठिन है।

(ii) तताँरा को गुस्सा क्यों आया?
(क) वामीरो की माँ ने तताँरा से झगड़ा किया।
(ख) उसे विवाह की निषेध परंपरा पर क्षोभ था।
(ग) वामीरो अब विवाह के लिए तैयार न थी।
(घ) वामीरो ने तताँरा की सहायता नहीं की।
उत्तर
(ख) उसे विवाह की निषेध परंपरा पर क्षोभ था।

(iii) वामीरो की माँ को दृश्य अपमानजनक क्यों लगा?
(क) माँ को गाँव के समक्ष अपमान महसूस हुआ।
(ख) माँ को वामीरो के लिए तताँरा पसंद नहीं था।
(ग) माँ गाँव की परंपरा से बँधी थी।
(घ) माँ वामीरो से बहुत प्यार करती थी।
उत्तर
(ग) माँ गाँव की परंपरा से बँधी थी।

(iv) तताँरा-वामीरो कथा समाज की किस समस्या की ओर ध्यान इंगित कराती है?
(क) जाति-प्रथा
(ख) बेमेल-विवाह
(ग) विवाह के परंपरागत नियम
(घ) बाल-विवाह
उत्तर
(ग) विवाह के परंपरागत नियम

(v) ‘आग बबूला हो उठने’ का क्या अर्थ है
(क) अत्यधिक क्रोध आना
(ख) आग की प्रचंड लपटों की तरह लहराना
(ग) बच्चों की चिंता करना
(घ) बहुत परेशान हो उठना
उत्तर
(क) अत्यधिक क्रोध आना

खंड ‘ब’- वर्णनात्मक प्रश्न (अंक 40)

पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक (अंक 14)

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2 x 2 = 4)
(क) एकांकी ‘कारतूस’ के अनुसार वज़ीर अली एक जाँबाज सिपाही कैसे था?
(ख) कहानी ‘बड़े भाई साहब’ के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?
(ग) कबीर के अनुसार व्यक्ति अपने स्वभाव को निर्मल कैसे रख सकता है?
उत्तर
संभावित उत्तर संकेत
(क)

  • बहादुरी के किस्से प्रचलित थे।
  • अकेले कर्नल के खेमे में आ पहुँचा।
  • कर्नल से अपनी ही गिरफ्तारी के लिए कारतूस ले गया।
  • कर्नल को अपना परिचय दिया।
  • आसानी से कर्नल के खेमे से चला गया।

(ख)

  • जीवन की समझ अनुभव से आती है।
  • किताबी ज्ञान से नहीं आती।
  • अम्माँ, दादा, और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण दिए।

(ग)

  • अपने आस-पास निंदक रखने चाहिए।
  • निंदक हमें हमारी त्रुटियाँ बताते रहते हैं।
  • निंदक वास्तव में हमारे सच्चे हितैषी होते हैं।

प्रश्न 11.
‘मनुष्यता’ कविता और ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ का केंद्रीय भाव एक ही है। लगभग 60-70 शब्दों में सिद्ध कीजिए। (1 x 4 = 4)
उत्तर
संभावित उत्तर संकेत

  • मनुष्यता कविता- मानव के त्याग, बलिदान, मानवीय एकता, सहानुभूति, सद्भाव, उदारता, करुणा आदि पर बल देती है।
  • अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले पाठ का प्रतिपाद्य- मानव और प्रकृति के सामंजस्य, मानव और प्रकृति
    के अन्य जीवधारियों के मध्य सामंजस्य जिसके अंतर्गत सहानुभूति, सद्भाव, उदारता, प्रेम, त्याग और करुणा पर बल दिया गया है।
  • ऊपर दिए गए सभी गुण- मनुष्यत्व के गुण हैं।
  • उदारता, करुणा, सद्भाव, सहानुभूति गुणों पर दोनों पाठ आधारित हैं।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए। (2 x 3 = 6)
(क) ‘सपनों के से दिन’ पाठ के लेखक और ‘टोपी शुक्ला’ नामक पात्र का बचपन एक जैसा-सा है। आपके बचपन से इनकी कथा कैसे मिलती-जुलती है?
(ख) रामदुलारी की मार से टोपी पर क्या प्रभाव पड़ा? ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
(ग) महंत और अपने भाई हरिहर काका को एक जैसे क्यों लगने लगते हैं? ‘हरिहर काका’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
संभावित उत्तर संकेत
(क)

  • खेल-कूद में मन लगना।
  • स्कूल के मस्ती भरे दिन।
  • अध्यापकों तथा अभिभावकों का डर।
  • बचपन में मिला अपनापन और प्यार।
  • मित्रता भेद-भाव नहीं मानती है।

(ख)

  • टोपी पिटता रहा लेकिन रामदुलारी की इस बात को नहीं स्वीकारा कि वह इफ्फ़न के घर फिर कभी नहीं जाएगा।
  • टोपी बहुत उदास हो गया था।
  • उसका सारा बदन दुखता रहा था।
  • वह बस यही सोचता रहा था
  • कि काश वह एक दिन के लिए मुन्नी बाबू से बड़ा हो पाता और उसे सबक सिखा पाता।

(ग)

  • दोनों ही स्वार्थ में डूबे हुए थे।
  • दोनों में से कोई भी हरिहर काका को नहीं, उनकी जमीन-जायदाद चाहते थे।
  • उनकी जमीन हथियाने के लिए वे किसी भी हद तक गिर सकते हैं।
  • दिखावा करने के अलावा दोनों कुछ नहीं करते थे।
  • दोनों हरिहर काका की जान तक लेने को तैयार थे।

लेखन (अंक 26)

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 80-100 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए। (1 x 6 = 6)
(क) जब हम चार रनों से पिछड़ रहे थे

संकेत-बिंदु-

  • खिलाड़ियों की मनोदशा
  • दर्शकों की मनोदशा
  • प्रयास और परिणाम ङ्के

(ख) देशा पर पड़ता विदेशी प्रभाव
संकेत-बिंदु-

  • हमारा देश और संस्कृति
  • विदेशी प्रभाव
  • परिणाम और सुझाव

(ग) मित्रता
संकेत-बिंदु-

  • आवश्यकता
  • कौन हो सकता है मित्र
  • लाभ

उत्तर
अंक योजना
(क) भूमिका – 1 अंक
(ख) विषयवस्तु – 4 अंक
(ग) भाषा – 1 अंक

प्रश्न 14.
आपसे अपने बचत खाते की चेक-बुक खो गई है। इस संबंध में बैंक प्रबंधक को उचित कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखिए।
अथवा
नगर निगम को एक पत्र लिखिए जिसमें नालियों की सफाई एवं कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का सुझाव हो।
उत्तर
अंक योजना

  • आरंभ और अंत की औपचारिकताएँ – 1
  • अंक विषयवस्तु – 3 अंक
  • भाषा – 1 अंक

प्रश्न 15.
विद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह के आयोजन के लिए आपको संयोजक बनाया गया है। विद्यालय की ओर से सभी विद्यार्थियों के लिए लगभग 30-40 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए।
अथवा
विद्यालय में छुट्टी के उपरांत फुटबॉल खेलना सीखने की विशेष कक्षाएँ आयोजित की जाएंगी। इच्छुक विद्यार्थियों द्वारा अपना नाम देने हेतु सूचना-पट्ट के लिए लगभग 30-40 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए।
उत्तर
अंक योजना

  • विषयवस्तु – 2 अंक
  • प्रस्तुति – 3 अंक
  • भाषा – 1 अंक

प्रश्न 16.
विद्यालय के ‘अहंक समूह’ द्वारा प्रस्तुत ताजमहल नाटक के बारे में नाम, पात्र, दिन, समय टिकट आदि की सूचना देते हुए लगभग 25-50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
अथवा
अपनी दुकान को किराए पर उठाने के लिए लगभग 25-50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर
अंक योजना

  • विषयवस्तु – 2
  • अंक प्रस्तुति – 2 अंक
  • भाषा – 1 अंक

प्रश्न 17.
‘यदि मैं समाचार-पत्र होता’- विषय पर लगभग 100-120 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए।
अथवा
‘गंगा और मैं’- विषय पर लगभग 100-120 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए।
उत्तर
अंक योजना

  • कथावस्तु – 3
  • अंक भाषा – 2 अंक

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 1 with Solutions

Students can access the CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi with Solutions and marking scheme Course B Set 1 will help students in understanding the difficulty level of the exam.

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 1 with Solutions

निर्धारित समय : 3 घंटे
अधिकतम अंक : 80

सामान्य निर्देश:
(क) इस प्रश्न-पत्र के दो खंड हैं- ‘अ’ और ‘ब’।
(ख) खंड ‘अ’ में कुल 10 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी प्रश्नों में उपप्रश्न दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(ग) खंड ‘ब’ में कुल 7 वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

खंड ‘अ’- वस्तुपरक प्रश्न (अंक 40)

अपठित गद्यांश (अंक 10)

प्रश्न 1.
नीचे दो गद्यांश दिए गए हैं किसी एक गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (5 x 1 = 5)
मानव तथा समाज में परस्पर घनिष्ठ संबंध है। मनुष्य अपनी व्यक्तिगत उन्नति करते हुए भी सामाजिक संबंध के लिए सदा व्याकल रहता है। समाज एक परिवर्तनशील इकाई है। यग परिवर्तन के साथ समाज अपना स्वरूप बदलता रहता है। आधुनिक युग में समाज गाँव या नगर तक सीमित नहीं रहा।

आज उसका क्षेत्र देश के कोने-कोने तक विस्तीर्ण हो गया है। इसी कारण प्रभात होते ही मनुष्य अपने इस विस्तृत समाज का ज्ञान प्राप्त करने के लिए बेचैन रहता है। इसकी जानकारी प्राप्त करने का सरल, सुलभ और सस्ता साधन है- समाचार-पत्र। समाचार-पत्रों के इतिहास से यही स्पष्ट होता है कि इसका जन्म सातवीं शताब्दी में चीन में हुआ था, पर इसका प्रारंभिक रूप इतना विकसित नहीं था। मुद्रण कला के आविष्कार के बाद सन 1609 में जर्मनी से सर्वप्रथम समाचार-पत्र प्रकाशित हुए।

1662 में ब्रिटेन ने भी इस ओर ध्यान दिया और समाचार-पत्रों का प्रकाशन आरंभ किया। भारत में इसका जन्म ब्रिटिश काल में हुआ। सन 1835 में यहाँ से सर्वप्रथम ‘इंडिया गजट’ प्रकाशित हुआ। तत्पश्चात इनकी संख्या बढ़ती गई। हिंदी का प्रथम समाचार-पत्र ‘उदंत मार्तंड’ नाम से प्रकाशित हुआ। समय एवं परिस्थितियों के साथ-साथ इनकी संख्या बढ़ती गई जिससे संख्या में वृद्धि हुई।।

(i) ब्रिटेन में समाचार-पत्रों का प्रकाशन कब प्रारंभ हुआ?
(क) सन 16 वीं शताब्दी में
(ख) सन 1835 में
(ग) सातवीं शताब्दी में
(घ) सन 1662 में
उत्तर
(घ) सन 1662 में

(ii) सबसे पहला समाचार-पत्र किस देश से प्रकाशित हुआ?
(क) ब्रिटेन से
(ख) भारत से
(ग) जर्मनी से
(घ) चीन से
उत्तर
(ग) जर्मनी से

(iii) हिंदी का प्रथम समाचार–पत्र किस नाम से प्रकाशित हुआ?
(क) पंजाब केसरी
(ख) इंडिया गजट
(ग) बंगाल गजट
(घ) उदंत मार्तंड
उत्तर
(घ) उदंत मार्तंड

(iv) अपने समाज की जानकारी प्राप्त करने के लिए किस साधन का प्रयोग किया जाता है?
(क) इतिहास द्वारा
(ख) समाचार-पत्रों द्वारा
(ग) मुद्रण कला द्वारा
(घ) दिए गए सभी साधनों द्वारा
उत्तर
(ख) समाचार-पत्रों द्वारा

(v) समाचार-पत्रों का जन्म किस शताब्दी में हुआ?
(क) सोलहवीं शताब्दी
(ख) सातवीं शताब्दी
(ग) बीसवीं शताब्दी
(घ) ग्यारहवीं शताब्दी
उत्तर
(ख) सातवीं शताब्दी

अथवा

यह एक सर्वविदित तथ्य है कि मानवीय गुणों का अधिकाधिक विकास विपरीत परिस्थितियों में ही होता है। जीवन में सर्वत्र इस सत्य के उदाहरण भरे हुए हैं। कष्ट और पीड़ा आंतरिक वृत्तियों के परिशोधन के साथ ही एक ऐसी आंतरिक दृढ़ता को जन्म देते हैं जो मनुष्य को तप्त स्वर्ण की भाँति खरा बनाता है।

विपत्तियों के पहाड़ से टकराकर उसका बल बढ़ता है। हृदय में ऐसी अद्भुत वृत्ति का जन्म होता है कि एक बार कष्टों से जूझकर वह फिर उनको खेल समझने लगता है।

उसके हृदय में विपत्तियों को ठोकर मारकर अपना मार्ग बना लेने की वीरता उत्पन्न हो जाती है। मन की भाँति ही शरीर की दृढ़ता शारीरिक श्रम के द्वारा आती है। शारीरिक परिश्रम उसके शरीर को बलिष्ठ बनाता है। विपत्तियों में तप कर दृढ़ हुए शरीर की भाँति परिश्रम की अग्नि में तपकर शरीर का लोहा इस्पात बन

(क) मा जाता है। एक शायर ने खूब कहा है कि ‘मुश्किलें इतनी पड़ी मुझ पर कि मंज़िल आसान हो गई’। सत्य से परिचित कराने के लिए जो कार्य कष्टों का आधिक्य करता है, शारीरिक दृढ़ता के लिए वही कार्य श्रम करता है। दोनों ही ऐसे हथौड़े हैं जो पीट-पीटकर शरीर और मन में इस्पाती दृढ़ता को जन्म देते हैं।

(i) विपरीत परिस्थितियाँ कारण हैं
(क) अनुकूल परिस्थितियों को रोकने की
(ख) समस्या समाधान की
(ग) सामाजिक चुनौतियाँ स्वीकारने की
(घ) मानवीय गुणों के विकास की
उत्तर
(घ) मानवीय गुणों के विकास की

(ii) मनुष्य को सोने जैसा शुद्ध बनाने में सहायक है
(क) शरीर की दृढ़ता
(ख) विश्वास की दृढ़ता
(ग) आंतरिक दृढ़ता
(घ) विपत्तियों से टकराव
उत्तर
(ग) आंतरिक दृढ़ता

(iii) विपत्तियों के बीच अपना मार्ग बना लेने की क्षमता कब उत्पन्न होती है?
(क) बाधाओं से बचकर
(ख) कष्टों से खेलकर
(ग) कष्टों से जुड़कर
(घ) साधन संपन्न बनकर
उत्तर
(ख) कष्टों से खेलकर

(iv) ‘लोहा इस्पात बन जाता है’ कथन का आशय है
(क) दुर्बल सबल बन जाता है
(ख) बलहीन बलवान बन जाता है
(ग) सबल अति प्रबल बन जाता है
(घ) निर्मल प्रबल बन जाता है
उत्तर
(ग) सबल अति प्रबल बन जाता है

(v) गद्यांश का उचित शीर्षक होगा
(क) मन और शरीर
(ख) मानसिक पीड़ा और शारीरिक पीड़ा
(ग) मन और शरीर की दृढ़ता
(घ) मानव का विकास
उत्तर
(ग) मन और शरीर की दृढ़ता

प्रश्न 2.
नीचे दो गद्यांश दिए गए हैं किसी एक गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (5 x 1 =5)
समाज में सर्वाधिक ताकत यदि किसी के पास है तो वह युवा वर्ग के पास है। लेकिन ताकत सदैव अग्नि के समान होती है और अग्नि के दो ही प्राकृतिक रूप विद्यमान हैं- एक रूप तो यह कि अग्नि जला सकती है इस कदर जला सकती है कि सारे विश्व को राख के ढेर में बदल दे और दूसरा रूप यह है कि अग्नि प्रकाश दे सकती है। यह इस कदर प्रकाशित कर सकती है कि सारे विश्व का अंधकार समाप्त कर दे। मनुष्य एक बुद्धिमान प्राणी है जो इन दोनों का प्रयोग अपने हित के लिए करना जानता है।

यदि रोटी को बिना तवे की सहायता से सेंका जाए तो रोटी सिंक नहीं पाएगी बल्कि जल जाएगी। जिस प्रकार मनुष्य को रोटी बनाने के लिए तवे की ज़रूरत पड़ती है ठीक उसी प्रकार से ताकत का इस्तेमाल करने के लिए संयम की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार तवा रोटी को जलने से बचाता है, रोटी को पकने में मदद करता है उसी प्रकार संयम ताकत का सही दिशा में प्रयोग करना सिखाता है। सृजन करने में मदद करता है। ताकत का आप जिस दिशा में प्रयोग करेंगे वह उसी दिशा मे रंग दिखाएगी किंतु इतना समझ लीजिए कि जिस प्रकार अग्नि को विनाशक बनाना आसान है, सृजनकर्ता बनाना कठिन है, उसी प्रकार ताकत के प्रयोग से विनाश करना आसान है लेकिन निर्माण करना अत्यंत मुश्किल।

(i) समाज का सर्वाधिक शक्तिशाली वर्ग है
(क) पुरुष वर्ग
(ख) किशोर वर्ग
(ग) युवा वर्ग
(घ) मजदूर वर्ग
उत्तर
(ग) युवा वर्ग

(ii) अग्नि के दो रूपों से तात्पर्य है
(क) राख के ढेर में बदलने वाली, गर्मी वाली
(ख) भोजन पकाने वाली, अंधकार को खत्म करने वाली
(ग) बलवान और प्रकाश वाली
(घ) जलाने वाली और प्रकाश देने वाली
उत्तर
(घ) जलाने वाली और प्रकाश देने वाली

(iii) ताकत का सही इस्तेमाल करने के लिए आवश्यकता होती है
(क) जल्दबाजी की
(ख) संयम की
(ग) समय की
(घ) मनुष्य की
उत्तर
(ख) संयम की

(iv) ताकत के प्रयोग से आसान हो जाता है
(क) रोटी सेंकना
(ख) साहस करना
(ग) निर्माण करना
(घ) विनाश करना
उत्तर
(ग) निर्माण करना

(v) गद्यांश का उचित शीर्षक होगा
(क) ताकत का सही प्रयोग
(ख) अग्नि और हम
(ग) अग्नि के उपयोग
(घ) साहस भरी जिंदगी
उत्तर
(क) ताकत का सही प्रयोग

अथवा

अपने इतिहास के अधिकांश कालों में भारत एक सांस्कृतिक इकाई होते हुए भी पारस्परिक यद्धों से जर्जर होता रहा। यहाँ के अनेक शासक अपने शासन-कौशल में धूर्त एवं असावधान थे। समय-समय पर यहाँ दुर्भिक्ष, बाढ़ तथा प्लेग के प्रकोप होते रहे जिससे हज़ारों व्यक्तियों की मृत्यु हुई। जन्मजात असमानता धर्मसंगत मानी गई। जिसके फलस्वरूप तथाकथित दबे-कुचले व्यक्तियों का जीवन अभिशाप बन गया।

इन सबके होते हुए भी हमारा विचार है कि पुरातन संसार के किसी भी भाग में मनुष्य के मनुष्य से तथा मनुष्य के राज्य से ऐसे सुंदर एवं मानवीय संबंध नहीं रहे थे। किसी भी अन्य प्राचीन सभ्यता में गुलामों की संख्या इतनी कम नहीं रही, जितनी भारत में और न ही अर्थशास्त्र के समान किसी प्राचीन न्याय ग्रंथ ने मानवीय अधिकारों की इतनी सुरक्षा की। मनु के समान किसी अन्य प्राचीन स्मृतिकार ने युद्ध में न्याय के ऐसे उच्च आदर्शों की घोषणा भी नहीं की।

प्राचीन भारत के युद्धों के इतिहास में कोई भी ऐसी कहानी नहीं हैं जिसमें नगर के नगर तलवार के घाट उतारे गए हों अथवा शांतिप्रिय नागरिकों का सामूहिक वध किया गया हो। असीरिया के बादशाहों की भयंकर क्रूरता जिसमें वे अपने बंदियों की खालें तक खिंचवा लेते थे। प्राचीन काल में पूर्णतः अप्राप्य है निसंदेह कहीं-कहीं क्रूरता एवं कठोरतापूर्वक व्यवहार था परंतु अन्य प्रारंभिक मानवीयता है।

(i) एक सांस्कृतिक इकाई होते हुए भी भारत के इतिहास की क्या विशेषता रही है?
(क) उन्नति की राह पर आगे बढ़ना
(ख) अन्य संस्कृतियों को अपनाना
(ग) पारस्परिक युद्ध से जर्जर होना
(घ) प्रगति न कर पाना
उत्तर
(ख) अन्य संस्कृतियों को अपनाना

(ii) जन्मजात असमानता को धर्मसंगत मानने से नीचे कुल के व्यक्तियों का जीवन कैसा हो गया?
(क) श्राप मुक्त हो गया
(ख) अभिशाप बन गया
(ग) सँवर गया
(घ) श्रेष्ठतम बन गया
उत्तर
(ख) अभिशाप बन गया

(iii) अर्थशास्त्र क्या है?
(क) प्राचीन धर्म ग्रंथ
(ख) मानवीय अधिकारों का प्रामाणिक लेख
(ग) मानवीय अधिकारों की एक पुस्तक
(घ) मानवीय अधिकारों का प्राचीन ग्रंथ
उत्तर
(ग) मानवीय अधिकारों की एक पुस्तक

(iv) प्राचीन भारत में क्या अप्राप्य है?
(क) बादशाहों की युद्ध प्रियता के प्रमाण
(ख) बादशाहों की क्रूरता एवं बंदियों के प्रति उनके अत्याचारों के प्रमाण
(ग) बादशाहों के स्मारक
(घ) बादशाहों की लोगों के प्रति संवेदनहीनता
उत्तर
(ख) बादशाहों की क्रूरता एवं बंदियों के प्रति उनके अत्याचारों के प्रमाण

(v) हमारी प्राचीन सभ्यता की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता है
(क) उसकी मानवीयता
(ख) उसकी संवेदनशीलता
(ग) उसके मानवीय संबंध
(घ) उसकी भावनाएँ
उत्तर
(क) उसकी मानवीयता

व्यावहारिक व्याकरण (अंक 16)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित पाँच भागों में से किन्हीं चार भागों के उत्तर दीजिए। (4 x 1 = 4)

(i) ‘प्यास का मारा कौआ घड़े पर बैठ गया।’ वाक्य में रेखांकित पदबंध है
(क) संज्ञा पदबंध
(ख) सर्वनाम पदबंध
(ग) क्रिया पदबंध
(घ) विशेषण पदबंध
उत्तर
(ग) क्रिया पदबंध

(ii) निम्नलिखित में से कौन–सा रेखांकित पदबंध संज्ञा पदबंध है?
(क) लोहे की बड़ी अलमारी से कोट निकालो
(ख) पत्थर लुढ़कते चले जा रहे थे।
(ग) कुछ लोग सोते-सोते चलते हैं।
(घ) उस घर के कोने में बैठा हुआ आदमी जासूस है।
उत्तर
(क) लोहे की बड़ी अलमारी से कोट निकालो

(iii) दिए गए विकल्पों में से सर्वनाम पदबंध कौन-सा है?
(क) इतनी लगन से काम करने वाला मैं
(ख) बंगले के पीछे खड़ा लड़का
(ग) बरगद और पीपल की घनी छाँव
(घ) मेरे आगरा वाले मित्र
उत्तर
(क) इतनी लगन से काम करने वाला मैं

(iv) ‘हमारा बगीचा इस सड़क से उस सड़क तक फैला है।’ वाक्य में रेखांकित पदबंध है
(क) संज्ञा पदबंध
(ख) सर्वनाम पदबंध
(ग) क्रियाविशेषण पदबंध
(घ) विशेषण पदबंध
उत्तर
(ग) क्रियाविशेषण पदबंध

(v) ‘सत्य की राह पर चलने वाले व्यक्ति देश का गौरव होते हैं।’ वाक्य में रेखांकित पदबंध है
(क) संज्ञा पदबंध
(ख) सर्वनाम पदबंध
(ग) क्रिया पदबंध
(घ) विशेषण पदबंध
उत्तर
(क) संज्ञा पदबंध

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पाँच भागों में से किन्हीं चार भागों के उत्तर दीजिए। (4 x 1 = 4)

(i) ‘जैसा करोगे वैसा भरोगे’- रचना के आधार पर वाक्य भेद है
(क) इच्छावाचक
(ख) सरल वाक्य
(ग) मिश्रित वाक्य
(घ) संयुक्त वाक्य
उत्तर
(ग) मिश्रित वाक्य

(ii) निम्नलिखित वाक्यों में संयुक्त वाक्य है
(क) परिश्रम करने से सफलता मिली।
(ख) क्योंकि उसने परिश्रम किया उसे सफलता मिली।
(ग) उसने परिश्रम किया और उसे सफलता मिली।
(घ) परिश्रम करने वाले ने सफलता प्राप्त की।
उत्तर
(ग) उसने परिश्रम किया और उसे सफलता मिली।

(iii) ‘वह आया था परंतु मैं न मिल सका।’- रचना के आधार पर वाक्य भेद है
(क) संयुक्त वाक्य
(ख) मिश्रित वाक्य
(ग) सरल वाक्य
(घ) निषेधात्मक वाक्य
उत्तर
(क) संयुक्त वाक्य

(iv) निम्नलिखित वाक्यों में सरल वाक्य है
(क) अपराध सिद्ध हुआ और उसे सजा हुई।
(ख) जब अपराध सिद्ध हो गया तब उसे सजा हो गई।
(ग) जैसे ही अपराध सिद्ध हुआ वैसे ही उसे सजा हो गई।
(घ) अपराध सिद्ध होने पर उसे सजा हुई।
उत्तर
(घ) अपराध सिद्ध होने पर उसे सजा हुई।

(v) निम्नलिखित वाक्यों में मिश्र वाक्य है
(क) वेतन मिलेगा और क़र्ज़ उतर जाएगा।
(ख) अगर तुम झूठ नहीं बोलते तो तुम्हें नौकरी मिल जाती।
(ग) हमें बड़ों का आदर करना चाहिए।
(घ) थोड़ा रुकिए और आगे जाइए।
उत्तर
(ख) अगर तुम झूठ नहीं बोलते तो तुम्हें नौकरी मिल जाती।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पाँच भागों में से किन्हीं चार भागों के उत्तर दीजिए। (4 x 1 = 4)
(i) ‘ग्रंथ रूपी रत्न’ का समस्तपद है
(क) रत्नग्रंथ
(ख) ग्रंथरत्न
(ग) ग्रंथ रत्ना
(घ) रत्न रूपा
उत्तर
(ख) ग्रंथरत्न

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा समस्तपद द्वंद्व समास है?
(क) नीलगगन
(ख) आजन्म
(ग) तिराहा
(घ) सच-झूठ
उत्तर
(घ) सच-झूठ

(iii) किस समस्तपद में अव्ययीभाव समास है?
(क) लगातार
(ख) हाथोंहाथ
(ग) घोडागाड़ी
(घ) मदांध
उत्तर
(ख) हाथोंहाथ

(iv) ‘हवनसामग्री’ किस समस्तपद का विग्रह है?
(क) हवन की सामग्री
(ख) हवन के लिए सामग्री
(ग) हवन हेतु सामग्री
(घ) हवन का सामग्री
उत्तर
(ख) हवन के लिए सामग्री

(v) कर्मधारय समास है
(क) सत्याग्रह
(ख) पुरुषोत्तम
(ग) गुणहीन
(घ) रथचालक
उत्तर
(ख) पुरुषोत्तम

प्रश्न 6.
निम्नलिखित चारों भागों के उत्तर दीजिए। (4 x 1 = 4 )

(i) उससे सावधान रहना है वह तो ……… है। उपयुक्त मुहावरे से वाक्य पूरा करें।
(क) हाथ मलना
(ख) बाज न आना
(ग) आस्तीन का साँप
(घ) चूड़ियाँ पहनना
उत्तर
(ग) आस्तीन का साँप

(ii) ‘आँखें फोड़ना’ मुहावरे का अर्थ है(
(क) बड़े ध्यान से पढ़ना
(ख) बहुत कष्ट झेलना
(ग) पसीना बहाना
(घ) बहुत मेहनत करना
उत्तर
(घ) बहुत मेहनत करना

(iii) रीमा परीक्षा में इतने अंक पाकर ………..”। उपयुक्त मुहावरे से रिक्त स्थान पूर्ण करें।
(क) फूला ना समाना
(ख) हवा से बातें करना
(ग) आसमान में उड़ना
(घ) हवाई किले बनाना
उत्तर
(क) फूला ना समाना

(iv) ‘बाट जोहना’ मुहावरे का अर्थ है
(क) पता ना मिलना
(ख) उपाय ना मिलना
(ग) प्रतीक्षा करना
(घ) अवसर न मिलना
उत्तर
(ग) प्रतीक्षा करना

पाठ्यपुस्तक (अंक 14)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए। (4 x 1 =4)

उसी उदार की कथा सरस्वती बखानती,
उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती।
उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती;

तथा उसी उदार को समस्त सृष्टि पूजती।
अखंड आत्मभाव जो असीम विश्व में भरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

(i) धरा कैसे व्यक्तियों को पाकर स्वयं को धन्य मानती
(क) सदाचारी व्यक्तियों को
(ख) परोपकारी व्यक्तियों को
(ग) ईमानदार व्यक्तियों को
(घ) पुण्य आत्मा को
उत्तर
(ख) परोपकारी व्यक्तियों को

(ii) अखंड आत्मभाव का अर्थ है
(क) आत्मा एक है
(ख) आत्मीयता का भाव
(ग) आत्मा शुद्ध है
(घ) आत्मा पवित्र है
उत्तर
(ख) आत्मीयता का भाव

(iii) कवि ने सच्चा मनुष्य किसे कहा है?
(क) जो सच बोलता है।
(ख) जो दूसरे मनुष्य के लिए मरता है
(ग) जो ईमानदारी की राह पर चलता हैं
(घ) जो कभी झूठ नहीं बोलता है
उत्तर
(ख) जो दूसरे मनुष्य के लिए मरता है

(iv) ‘कृतार्थ’ का संधि-विच्छेद है
(क) कृत + अर्थ
(ख) कृ + अर्थ
(ग) कृता + अर्थ (घ) कृता + र्थ
उत्तर
(क) कृत + अर्थ

प्रश्न 8.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए। (5 x 1 = 5)
महज़ इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है- बुद्धि का विकास। जो कुछ पढ़ो, उसका अभिप्राय समझो। रावण भूमंडल का स्वामी था। ऐसे राजाओं को चक्रवर्ती कहते हैं। आजकल अंग्रेजों के राज्य का विस्तार बहुत बढ़ा हुआ है पर इन्हें चक्रवर्ती नहीं कह सकते।

संसार में अनेक राष्ट्र अंग्रेज़ों का आधिपत्य स्वीकार नहीं करते, बिलकुल स्वाधीन हैं। रावण चक्रवर्ती राजा था, संसार के सभी महीप उसे कर देते थे। बड़े-बड़े देवता उसकी गुलामी करते थे। आग और पानी के देवता भी उसके दास थे, मगर उसका अंत क्या हुआ? घमंड ने उसका नामो-निशान तक मिटा दिया, कोई उसे एक चुल्लू भर पानी देने वाला भी ना बचा। आदमी और जो कुकर्म चाहे करे पर अभिमान ना करे, इतराए नहीं। अभिमान किया और दीन दुनिया दोनों से गया।

(i) भूमंडल का स्वामी कौन था?
(क) आग के देवता
(ख) पानी के देवता
(ग) रावण
(घ) शाहेरूम
उत्तर
(ग) रावण

(ii) लेखक के भाई ने असल चीज़ किसे बताया?
(क) इम्तिहान पास कर लेना
(ख) बुद्धि का विकास
(ग) अभिमान करना
(घ) कठिन मेहनत करके कुछ पाना
उत्तर
(ख) बुद्धि का विकास

(iii) अंग्रेज़ चक्रवर्ती क्यों नहीं बन पाए?
(क) क्योंकि वह बहुत क्रूर थे।
(ख) हिंदुस्तानियों से नफरत करते थे
(ग) कई राष्ट्रों ने अंग्रेज़ों का आधिपत्य स्वीकार नहीं किया था
(घ) अंग्रेजों की रणनीति ठीक नहीं थी
उत्तर
(ग) कई राष्ट्रों ने अंग्रेज़ों का आधिपत्य स्वीकार नहीं किया था

(iv) मनुष्य को भूल कर भी क्या नहीं करना चाहिए?
(क) कर्म
(ख) अभिमान
(ग) नशा
(घ) दूसरों का बुरा
उत्तर
(ख) अभिमान

(v) रावण के विनाश का कारण क्या था?
(क) सारे संसार को अपना दास समझना
(ख) देवताओं को भी अपने आगे सर झुका कर खड़े रखना
(ग) मन में अहंकार रखना
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 9.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए। (5 x 1 =5)
निकोबारी उसे बेहद प्रेम करते थे। तताँरा एक नेक और मददगार व्यक्ति था। सदैव दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहता। अपने गाँववालों को ही नहीं, अपितु समूचे द्वीपवासियों की सेवा करना अपना कर्तव्य समझता था। उसके इस त्याग की वजह से वह चर्चित था। सभी उसका आदर करते।

वक्त मुसीबत में उसे स्मरण करते और वह भागा-भागा वहाँ पहुँच जाता। दूसरे गाँवों में भी पर्व-त्योहारों के समय उसे विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता। उसका व्यक्तित्व तो आकर्षक था ही, साथ ही आत्मीय स्वभाव की वजह से लोग उसके करीब रहना चाहते।

पारंपरिक पोशाक के साथ वह अपनी कमर में सदैव एक लकड़ी की तलवार बाँधे रहता। लोगों का मत था, बावजूद लकड़ी की होने पर तलवार में अद्भुत दैवीय शक्ति थी। तताँरा अपनी तलवार को कभी अलग न होने देता। उसका दूसरों के सामने उपयोग भी न करता। किंतु उसके चर्चित साहसिक कारनामों के कारण लोग-बाग तलवार में अद्भुत शक्ति का होना मानते थे। तताँरा की तलवार एक विलक्षण रहस्य थी।

(i) निकोबारी तताँरा को प्यार क्यों करते थे?
(क) क्योंकि वह नेक और मददगार था
(ख) बुद्धिमान था
(ग) चालाक था
(घ) रूपवान था
उत्तर
(क) क्योंकि वह नेक और मददगार था

(ii) तताँरा के विषय में सही है
(क) वह किसी की मदद नहीं करता था
(ख) वह सबके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार करता था
(ग) वह सबकी मदद करता था
(घ) दिए गए सभी विकल्प उचित हैं
उत्तर
(ग) वह सबकी मदद करता था

(iii) तताँरा की तलवार किसकी थी?
(क) लकड़ी की
(ख) सोने की
(ग) ताँबे की
(घ) लोहे की
उत्तर
(क) लकड़ी की

(iv) लोगों के अनुसार किसमें अद्भुत दैवीय शक्ति थी?
(क) तताँरा की पोशाक में
(ख) तताँरा की तलवार में
(ग) तताँरा के व्यवहार में
(घ) तताँरा के व्यक्तित्व में
उत्तर
(ख) तताँरा की तलवार में

(v) लोग-बाग तताँरा की तलवार में अद्भुत शक्ति का होना क्यों मानते थे?
(क) दूसरों की मदद करने के कारण
(ख) उसके चर्चित एवं साहसिक कारनामों के कारण
(ग) उसमें अपारशक्ति छिपी होने के कारण
(घ) लकड़ी की बनी होने के कारण
उत्तर
(ख) उसके चर्चित एवं साहसिक कारनामों के कारण

खंड ‘ब’- वर्णनात्मक प्रश्न (अंक 40) मार

पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक (अंक 14)

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2 x 2 = 4)

(क) बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?
(ख) गाँव में किस पर्व का आयोजन होता था? उसमें क्या होता था?
(ग) मीरा ने कृष्ण से अपनी सहायता करने का आग्रह क्यों किया है?
उत्तर
(क) बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबी ज्ञान से नहीं आती बल्कि अनुभव से आती है। इसके लिए उन्होंने अम्माँ, दादा व हेडमास्टर की माँ के उदाहरण भी दिए हैं कि वे पढ़े-लिखे न होने पर भी हर समस्याओं का समाधान आसानी से कर लेते हैं। अनुभवी व्यक्ति को जीवन की समझ होती है, वे हर परिस्थिति में अपने को ढालने की क्षमता रखते हैं।

(ख) गाँव में पशु पर्व का आयोजन होता था। इसमें हृष्ट-पुष्ट पशुओं का प्रदर्शन तो होता ही था। साथ-साथ पशुओं से युवकों की शक्ति-परीक्षा की प्रतियोगिता भी होती थी। इसके अतिरिक्त, नृत्य-संगीत और भोजन का भी आयोजन होता था।

(ग) मीरा ने कृष्ण से अपनी सहायता करने का आग्रह इसलिए किया क्योंकि वे मानती हैं कि उनके आराध्य श्रीकृष्ण भक्त-वत्सल हैं। वे भक्तों की एक पुकार पर उनका उद्धार करने के लिए दौड़े चले आते हैं। भक्तों के प्रति इसी असीम प्रेम के कारण उन्होंने द्रौपदी, प्रह्लाद और गजराज के कष्टों को दूर किया। उसी प्रकार मीरा मानती हैं कि वह उनकी अनन्य दासी है इस नाते प्रभु उसके भी कष्टों को दूर करें।

प्रश्न 11.
रूढ़ियाँ जब बंधन लगने लगे तब उनका टूट जाना ही अच्छा है। क्यों? लगभग 60 से 70 शब्दों में स्पष्ट कीजिए। (1 x 4 =4)
उत्तर
रूढ़ियाँ और बंधन समाज को अनुशासित करने के लिए बने होते हैं, परंतु जब उनके कारण मनुष्यों की भावनाओं को ठेस पहुँचने लगे और वे सब बोझ लगने लगें तो उनका टूट जाना ही अच्छा होता है। तताँरा-वामीरो की कहानी में हमने जाना कि रूढ़ियों के कारण इनका प्रेम-विवाह नहीं हो सकता था, जिसके कारण दोनों को जान गवानी पड़ी। जहाँ रूढ़ियाँ किसी का भला करने की जगह नुकसान करें और जहाँ रूढ़ियाँ आडंबर लगने लगें वहाँ उनका टूट जाना ही बेहतर होता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए। (2 x 3 = 6)
(क) किन घटनाओं के कारण टोपी को कक्षा में शर्म आने लगी थी?
(ख) पी० टी० अध्यापक कैसे स्वभाव के व्यक्ति थे? विद्यालय के कार्यक्रमों में उनकी कैसी रुचि थी?
(ग) हरिहर काका के मामले में गाँववालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे?
उत्तर
(क) टोपी को जब नवीं कक्षा में पहले व दूसरे साल फेल होना पड़ा, तो परिवार के साथ-साथ विद्यालय में भी अध्यापकों ने उसकी उपेक्षा करनी शुरू कर दी तथा नए सहपाठियों से भी उसे सहानुभूति नहीं मिल सकी। अंग्रेजी अध्यापक ने तो एक दिन उसके द्वारा उत्तर देने के लिए हाथ उठाने पर उससे यहाँ तक कह दिया कि वह उन्हें अन्य विद्यार्थियों से प्रश्न पूछने दे, उससे तो वे अगले साल भी पूछ लेंगे। उनके इस कटाक्ष पर जब बच्चे हँसे, तो टोपी शर्म से पानी-पानी हो गया। कक्षा में उसके नए सहपाठी उससे बहुत छोटे थे और उनके बीच में यह अंतर बहुत बड़ा दिखाई देता था। अत: वे दूर ही रहना चाहते थे और मौका मिलने पर उसकी हँसी भी उड़ाते थे। इन्हीं सब कारणों से टोपी को कक्षा में शर्म आने लगी थी।

(ख) पी०टी० अध्यापक बहुत सख्त व अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे। विद्यालय में वे जरा-सी गलती होने पर विद्यार्थियों की चमड़ी उधेड़ देते थे। विद्यालय की प्रार्थना सभा में वे बच्चों को पंक्तिबद्ध खड़ा करते थे और यदि कोई बच्चा थोड़ी-सी भी शरारत करता, तो उसकी खाल खींच लेते थे।

स्काउट परेड के आयोजन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। बच्चों को अपने मार्गदर्शन में कुशलतापूर्वक परेड करवाते थे और परेड के समय बच्चों को ‘शाबाशी’ भी देते थे इसलिए बच्चों को उनकी यही शाबाशी फौज के तमगों-सी लगती थी और कुछ समय केलिए उनके मन में पी०टी० साहब के प्रति आदर का भाव जाग जाता था।

(ग) हरिहर काका के मामले में गाँव के लोगों के दो वर्ग बन गए थे। दोनों ही पक्ष के लोगों की अपनी-अपनी राय थी। आधे लोग परिवार वालों के पक्ष में थे। उनका कहना था कि काका की ज़मीन पर हक़ तो उनके परिवार वालों का बनता है। काका को अपनी ज़मीन-जायदाद अपने भाइयों के नाम लिख देनी चाहिए, ऐसा न करना अन्याय होगा। दूसरे पक्ष के लोगों का मानना था कि महंत हरिहर की ज़मीन उनको मोक्ष दिलाने के लिए लेना चाहता है।

काका को अपनी ज़मीन ठाकुर जी के नाम लिख देनी चाहिए। इससे उनका नाम और यश भी फैलेगा और उन्हें सीधे बैकुंठ की प्राप्ति होगी। इस प्रकार जितने मुँह थे उतनी बातें होने लगीं। प्रत्येक का अपना मत था। इन सबका एक कारण था कि हरिहर काका विधुर थे और उनकी अपनी कोई संतान न थी जो उनका उत्तराधिकारी बनता। पंद्रह बीघे ज़मीन के कारण इन सबका लालच स्वाभाविक था।

लेखन (अंक 26)

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 80-100 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए। (1 x 6 = 6)
(क) बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
संकेत-बिंदु-

  • लिंग अनुपात
  • सुकन्या समृद्धि योजना लागू करना
  • योजना के उद्देश्य एवं लक्ष्य
  • निष्कर्ष

(ख) साक्षरता अभियान
संकेत-बिंदु-

  • साक्षरता का अर्थ
  • साक्षरता की दर
  • निरक्षरता के कारण
  • निष्कर्ष।

(ग) अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम
संकेत-बिंदु-

  • अंतरिक्ष में भारत का इतिहास
  • विदेशी सहायता से उपग्रह भेजना
  • स्वदेशी यान से उपग्रह भेजना
  • स्वदेशी यान से विदेशी उपग्रह अतंरिक्ष में भेजना
  • निष्कर्ष।

उत्तर
(क) बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ वर्ष 1961 की जनगणना में एक हज़ार लड़कों के मुकाबले बालिकाओं की 961 संख्या संज्ञान में आई। उसके बाद वर्ष 1991 में यह संख्या एक हजार के मुकाबले घटकर 941, वर्ष 2001 में 927 तथा वर्ष 2011 में घटकर 918 हो गई।

इसे सामाजिक संतुलन के लिए खतरा मानते हुए लिंग अनुपात में सुधार करना अति आवश्यक हो गया। केंद्रीय सरकार के महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल पर देश के सभी 640 जिलों में से निम्न लिंगानुपात वाले 100 जिलों का चयन कर प्रधानमंत्री ने 22.01.2015 को हरियाणा के पानीपत से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना की शुरुआत की।

बाद में 100 जिलों को 161 जिलों तक बढ़ाया गया ताकि भ्रूण-हत्या पर रोकथाम, बालिकाओं की सुरक्षा व समृद्धि तथा उनकी शिक्षा में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए वर्ष 2014 में ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ की भी शुरुआत की गई। यह योजना मूलत: 10 वर्ष तक की बालिकाओं के लिए है। इसके अंतर्गत बालिका के खाते में एक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक हज़ार और अधिक से अधिक डेढ़ लाख रुपये या इसके बीच की कितनी भी रकम जमा कर सकते हैं।

यह पैसा खाता खुलने के 14 साल तक जमा करना पड़ता है। परंतु खाता बेटी के 21 वर्ष के होने पर ही मैच्योर होता है। हालाँकि बेटी के 18 साल के होने पर आधा पैसा निकलवा सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत मूलधन पर प्रतिवर्ष 9.1 फीसदी ब्याज मिलता रहेगा। इसी प्रकार की योजनाओं के माध्यम से भ्रूण-हत्या पर लगाम लगाकर, बालिकाओं की सुरक्षा व समृद्धि पर ध्यान देकर तथा लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान देकर हम देश की नारी का सम्मान करते हुए नए भारत का निर्माण कर सकते हैं। योजना लाग करने के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। जहाँ एक ओर कन्याओं को आर्थिक लाभ मिलने से बेहतरी हुई है वहीं दूसरी ओर बालिकाओं के लिंग अनुपात में भी
सुधार आया है।

(ख) साक्षरता अभियान
साक्षरता का अर्थ है- साक्षर होना, अर्थात पढ़ने व लिखने की क्षमता से संपन्न होना। भारत में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने हस्ताक्षर करने के साथ-साथ रुपये-पैसों का हिसाब-किताब कर सकने में सक्षम है तो उसे साक्षर माना जाता है। वर्ष 1947 में भारत की साक्षरता दर कुल जनसंख्या का 12 प्रतिशत थी। वर्तमान में 74 प्रतिशत भारतीय साक्षर हैं।

यह विश्व की कुल साक्षर आबादी की 85 प्रतिशत दर से बहुत कम है। भारत में केरल राज्य 94 प्रतिशत पढ़ी-लिखी जनता के साथ सबसे ऊपर तथा बिहार 64 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ सबसे नीचे है। यूनेस्को के अनुसार भारत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा अनपढ़ों का देश है। इस निरक्षरता का मुख्य कारण निर्धनता है। निर्धन व अशिक्षित माँ-बाप जो जीवन-यापन की मूलभूत आवश्यकताओं से भी वंचित हैं, अपने बच्चों को या तो विद्यालय में प्रवेश नहीं दिलवाते या फिर बच्चे बीच में ही विद्यालय छोड़ जाते हैं।

जागरूकता न होने के कारण कमजोर वर्ग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को अपना नहीं पाता और शिक्षा पर खर्च होने वाली अपार धनराशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। हालाँकि जब से भारत सरकार ने शिक्षा का अधिकार लागू किया तब से भारत की साक्षरता दर में काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

सन 1978 में प्रौढ़ शिक्षा अभियान के तहत 15 वर्ष से 35 वर्ष के नागरिकों को शिक्षित करने की योजना थी तथा इसके बाद भी कई सरकारी योजनाएँ बनीं। समाजसेवी संस्थाओं ने भी इस क्षेत्र में काफी काम किया, परंतु पाठ्यक्रमों का अरुचिकर होने या किसी अन्य त्रुटियों की वजह से ये योजनाएँ फलीभूत नहीं हो पाईं। भ्रष्ट प्रशासन की वजह से यह समस्या और बढ़ गई। निष्कर्षतः हम कह सकते हैं किप्रशासन व समाज दोनों के योगदान से ही इस समस्या से निपटा जा सकता है।

(ग) अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम अंतरिक्ष की खोज में अमेरिका, रूस तथा चीन ने काफी सफलताएँ प्राप्त की हैं। 1970 के दशक में भारत ने भी अपने कदम इस ओर बढ़ाए तथा सर्वप्रथम 19 अप्रैल 1974 को प्रथम भारतीय उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ को सोवियत रूस की भूमि से अंतरिक्ष में छोड़ा गया। हालाँकि कुछ दिनों बाद ‘आर्यभट्ट’ ने अपना काम करना बंद कर दिया था, फिर भी यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम न था। इसके बाद दूसरा उपग्रह ‘भास्कर’ अंतरिक्ष में छोड़ा गया। फिर 1980 में प्रथम स्वदेशी प्रक्षेपण यान एस.एल.वी. 3 ने ‘रोहिणी’ नामक उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया।

इसके बाद ‘रोहिणी-2’ को अंतरिक्ष में भेजा तथा दो अन्य प्रक्षेपण यान (रॉकेट) विकसित किए, जिससे भारत उपग्रह प्रक्षेपण तकनीक वाले देशों की सूची अर्थात अंतरिक्ष क्लब में शामिल हो गया। भारत ने कई दिशाओं में कदम बढ़ाते हुए ठोस ईंधन वाले एस.एल.वी. यानों के साथ-साथ तरल ईंधन वाले यानों का निर्माण किया। वहीं दूसरी ओर स्कवाड्रन लीडर राकेश शर्मा सोवियत रूस की मदद से पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने।

कई उपग्रह अंतरिक्ष में इसी प्रकार भेजने के बाद बड़ी सफलता तब मिली जब 22.10.2008 को चंद्रयान को अंतरिक्ष में भेजा गया। फिर 24.09.2014 को मंगलयान पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की यात्रा करने में सफल रहा। इसके बाद भारत ने नया इतिहास रचते हुए 15.02.2017 के रिकार्ड 104 (भारत के 03 तथा विदेशों के 101) उपग्रह हमारे देश के श्रीहरिकोटा से पी.एस.एल.वी-सी 37 प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजे गए।

अभी हाल ही में 22.07.2019 को चंद्रयान-2 अंतरिक्ष में भेजा गया, जिसे 06.09.2019 को चंद्रमा पर उतरकर वहाँ की सतह तथा वायुमंडल संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी को पृथ्वी पर भेजना था किंतु अफ़सोस कि यह अभियान असफल रहा। चंद्रयान पर उतरने के बाद कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। फिर भी हमारा देश इस समय इस क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्रों की सूची में शामिल है। एक समय था जब अपना देश 1975 में आर्यभट्ट उपग्रह का 5 करोड़ रुपये का खर्च सहन नहीं कर पा रहा था। अतः इसे अन्य देश से प्रक्षेपित किया था किंतु आज दूसरे देशों के उपग्रह अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर करोड़ों डालर की मूल्यवान विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।

प्रश्न 14.
बीमारी होने के कारण परीक्षा न दे सकने पर प्रधानाचार्या को ‘चिकित्सा-अवकाश’ के लिए एक आवेदन-पत्र लिखिए।
अथवा
‘कला-छाया’ नाम की एक संस्था दूरदर्शन के लिए कार्यक्रम बनाती है। संस्था को कुछ ऐसे युवकों की आवश्यकता है जो अभिनय जानते हों तथा कम से कम दसवीं पास हों। साथ-साथ हिंदी-अंग्रेज़ी का ज्ञान रखते हों। अपनी योग्यताओं का विवरण देते हुए ‘कला-छाया’ को एक आवेदन-पत्र लिखिए।
उत्तर
परीक्षा भवन
नई दिल्ली
श्रीमती प्रधानाचार्या
अ०ब०स० उच्च विद्यालय
दिल्ली
विषयः चिकित्सा अवकाश हेतु आवेदन-पत्र।
महोदया
निवेदन यह है कि मैं दसवीं कक्षा की छात्रा हूँ। पिछले चार-पाँच दिन से हो रहे वायरल बुखार से परेशान होकर आपको पत्र लिख रही हूँ। ज्वर के कारण मैं स्कूल नहीं आ पाई। खून की जाँच से पता चला है कि मुझे डेंगू हो गया है। इस कारण मैं आगामी दस दिन तक विद्यालय नहीं आ पाऊँगी। कमज़ोरी के कारण शरीर कार्य करने में असमर्थ है। इस कारण 28 जुलाई से 7 अगस्त तक होने वाली परीक्षाओं में भी मैं सम्मिलित नहीं हो पाऊँगी। आपसे प्रार्थना है कि मुझे इन दस दिनों का चिकित्सा-अवकाश प्रदान करें। आपकी अति कृपा होगी। आपकी आज्ञाकारी शिष्या
क०ख०ग०
दिनांक: 10
अप्रैल,
20xx

अथवा

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
प्रबंधक महोदय
कला-छाया मंच, दिल्ली। विषयः अभिनय हेतु अपनी योग्यताओं का विवरण देते हुए आवेदन-पत्र। मान्यवर विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि आपकी संस्था को कुछ ऐसे युवकों की आवश्यकता है जो अभिनय जानते हों और हिंदी-अंग्रेज़ी शुद्ध बोल सकते हों। इस कार्य हेतु मैं स्वयं को एक उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करता हूँ। मुझसे संबंधित पूर्ण विवरण इस प्रकार है
नाम – समीर वासू
पिता का नाम – कुलवंत सिंह वासु
पता – क.ख.ग. गली नं: 5
रोहिणी, दिल्ली-110085
शिक्षा – दसवीं पास (92 प्रतिशत)
अन्य योग्यताएँ – विद्यालय स्तर पर मैंने अनेक नाटकों व नुक्कड़ नाटकों में अभिनय किया है। अभिनय का डिप्लोमा भारतीय नाटक संस्थान से प्राप्त किया है। हिंदी, अंग्रेज़ी शुद्ध बोलने व लिखने में सक्षम हूँ तथा स्वयं भी छोटे-छोटे नाटक लिख सकता हूँ।
आशा है मेरी योग्यताओं को देखते हुए आप मुझे अपने यहाँ कार्य करने का अवसर अवश्य प्रदान करेंगे। धन्यवाद सहित।
भवदीय,
समीर वासु

प्रश्न 15.
गुमशुदा बच्चे की तलाश के लिए अख़बार में प्रकाशित करने हेतु एक सूचना 30 से 40 शब्दों में तैयार कीजिए।
अथवा
ग्रीष्मावकाश में बालभवन द्वारा आयोजित होने वाली बाल चित्रकला कार्यशाला की सूचना 30-40 शब्दों में तैयार कीजिए।
उत्तर
गुमशुदा की तलाश
सूचना
दिनांक: 6 अक्टूबर, 20xx
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि चार साल का एक बच्चा जिसका नाम सलीम है, उसने काली शर्ट व लाल निकर पहनी है, वह रोहिणी सेक्टर-27 का निवासी है तथा पैरों में काले रंग के जूते पहने हैं, वह थोड़ा तुतलाकर बोलता है। वह दिनांक 30 सितंबर, 20xx सेक्टर-27 रोहिणी से लापता है। इस बच्चे के बारे में किसी प्रकार की जानकारी देने के लिए कृपया इस नं. पर संपर्क करें-7865xxxxxx, 891765xxxx
धानाध्यक्ष
रोहिणी, दिल्ली.

अथवा

बालभवन, आई०टी०ओ०, नई दिल्ली
सूचना
बाल चित्रकला कार्यशाला का आयोजन

दिनांक : 4 मई, 20xx
आप सभी को सूचित किया जाता है कि बाल भवन इस ग्रीष्मावकाश में दो विभिन्न आयु वर्ग समूहों- कनिष्ठ समूह (5-10 वर्ष) तथा वरिष्ठ समूह (11 से 16 वर्ष) के बच्चों के लिए चित्रकला कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। इच्छुक अभिभावक बच्चों का पंजीकरण निर्धारित तिथि व स्थान पर आकर करवा सकते हैं। सारी सामग्री बाल भवन द्वारा दी जाएगी।

कार्यशाला आयोजन – 1 जून से 15 जून
कार्यशाला का समय – प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक
पंजीकरण की तिथि 10 मई से 12 मई तक
पंजीकरण का स्थान बालभवन का स्वागत कक्ष
पंजीकरण का समय – प्रातः 9 बजे से 4 बजे तक
पंजीकरण का शुल्क – 400 रुपये निदेशक
बाल भवन, नई दिल्ली

प्रश्न 16.
‘समीर किताब भंडार, के लिए 25 से 50 शब्दों में एक आकर्षक विज्ञापन बनाएँ।
अथवा
‘राजकुमारी बैग्स’ नाम से बैगों की दुकान का 25 से 50 शब्दों में आकर्षक विज्ञापन बनाएँ।
उत्तर
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 1 with Solutions 1
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 1 with Solutions 2

प्रश्न 17.
दिए गए विषय पर 100-120 शब्दों में लघु कथा लिखिए।
• हार के आगे जीत है।
अथवा
• समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता।
उत्तर
किसी दूर गाँव में एक पुजारी रहते थे जो हमेशा धर्म-कर्म के कामों में लगे रहते। एक दिन किसी काम से गाँव के बाहर जा रहे थे तो अचानक उनकी नज़र एक बड़े से पत्थर से पड़ी। तभी उनके मन में विचार आया कि कितना विशाल पत्थर है? क्यूँ ना इस पत्थर से भगवान की एक मूर्ति बनाई जाए। यही सोचकर पुजारी ने वो पत्थर उठवा लिया। गाँव लौटते समय पुजारी ने वो पत्थर का टुकड़ा एक मूर्तिकार को दे दिया, जो बहुत प्रसिद्ध मूर्तिकार था।

अब मूर्तिकार जल्दी ही अपने औज़ार लेकर पत्थर को काटने में जुट गया। जैसे ही मूर्तिकार ने पहला वार किया, उसे एहसास हुआ कि पत्थर बहुत ही कठोर है। मूर्तिकार ने एक बार फिर से पूरे जोश के साथ प्रहार किया लेकिन पत्थर टस से मस भी नहीं हुआ। अब तो मूर्तिकार का पसीना छूट गया। वो लगातार हथौड़े से प्रहार करता रहा लेकिन पत्थर नहीं टूटा। उसने कई प्रयास किए लेकिन पत्थर तोड़ने में नाकाम रहा।

अगले दिन जब पुजारी आए तो मूर्तिकार ने भगवान की मूर्ति बनाने से मना कर दिया और सारी बात बताई। पुजारी जी ने दुखी मन से पत्थर वापस उठाए और गाँव के ही एक छोटे मूर्तिकार को वो पत्थर मूर्ति बनाने के लिए दे दिया। अब मूर्तिकार ने अपने औज़ार उठाया और पत्थर काटने में जुट गया, जैसे ही उसने पहला हथौड़ा मारा पत्थर टूट गया क्योंकि पत्थर पहले मूर्तिकार की चोटों से काफ़ी कमज़ोर हो गया था। पुजारी यह देखकर बहुत खुश हुआ और देखते ही देखते मूर्तिकार ने भगवान शिव

की बहुत सुंदर मूर्ति बना डाली। पुजारी जी मन ही मन पहले मूर्तिकार की दशा सोचकर मुस्कुराए कि उस मूर्तिकार ने कई प्रहार किए और थक गया, काश उसने एक आखिरी प्रहार भी किया होता तो वो सफल हो गया होता।

अथवा एक नगर में एक बहुत ही अमीर आदमी रहता था, उस आदमी ने अपना सारा जीवन पैसे कमाने में लगा दिया। उसके पास इतना धन था कि वह उस नगर को भी खरीद सकता था, लेकिन उसने अपने संपूर्ण जीवन में कभी किसी की मदद तक नहीं की। इतना धन होने के बावजूद, उसने अपने लिए भी उस धन का उपयोग नहीं किया, न कभी अपनी पसंद के कपड़े, भोजन एवं अन्य इच्छा कि पूर्ति तक की। वह अपने जीवन में केवल पैसे कमाने में व्यस्त रहा।

वह पैसा कमाने में इतना व्यस्त एवं मस्त हो गया कि उसे उसके बुढ़ापे का भी पता नहीं चला, और वह जीवन के आखिरी पड़ाव पर पहुँच गया। इस तरह उसके जीवन का अंतिम दिन भी नज़दीक आ गया और यमराज उसके प्राण लेने धरती पर आए, जिसे देखकर वह आदमी डर गया। यमराज ने कहा, “अब तेरे जीवन का अंतिम समय आ गया है, और मैं तुझे अपने साथ ले जाने आया हूँ।” सुनकर वह आदमी बोला- “प्रभु अभी तक तो मैंने अपना जीवन जिया भी नहीं, मैं तो अभी तक अपने काम में व्यस्त था

अतः मुझे अपनी कमाई हुई धन-दौलत का उपयोग करने के लिए समय चाहिए।” यमराज ने उत्तर दिया, “मैं तुम्हें और समय नहीं दे सकता, तुम्हारे जीवन के दिन समाप्त हो गए हैं, और अब दिनों को और नहीं बढ़ाया जा सकता। समय किसी के लिए नहीं रुकता।

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 5 for Practice

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CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 5 for Practice

निर्धारित समय : 3 घंटे
अधिकतम अंक : 80

सामान्य निर्देश:
(क) इस प्रश्न-पत्र के दो खंड हैं- ‘अ’ और ‘ब’।
(ख) खंड ‘अ’ में कुल 10 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी प्रश्नों में उपप्रश्न दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(ग) खंड ‘ब’ में कुल 7 वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

खंड ‘अ’- वस्तुपरक प्रश्न ( अंक 40)

अपठित गद्यांश (अंक 5)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
यह घटना सन 1899 की है। उन दिनों कोलकाता में प्लेग फैला हुआ था। शायद ही कोई ऐसा घर बचा था, जहाँ यह बीमारी न पहुँची हो। ऐसी विकट स्थिति में भी स्वामी विवेकानंद और उनके शिष्य रोगियों की सेवा-सुश्रूषा में जुटे हुए थे। वे अपने हाथों से नगर की गलियाँ और बाज़ार साफ़ करते थे और जिस घर में प्लेग का कोई मरीज होता था, उसे दवा आदि देकर उसका उपचार करते थे। उसी दौरान कुछ लोग स्वामी विवेकानंद के पास आए। उनका मुखिया बोला,

“स्वामी जी, इस धरती पर पाप बहुत बढ़ गया है, इसीलिए प्लेग की महामारी के रूप में भगवान लोगों को दंड दे रहे हैं, पर आप ऐसे लोगों को बचाने का यत्न कर रहे हैं। ऐसा करके आप भगवान के कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।” मंडली के मुखिया की कील जैसी बातें सुनकर स्वामी जी गंभीरता से बोले, “सबसे पहले तो मैं आप सब विद्वानों का नमस्कार करता हूँ।” इसके बाद स्वामी जी बोले, “आप सब यह तो जानते ही होंगे कि मनुष्य इस जीवन में अपने कर्मों के कारण कष्ट और सुख पाता है।

ऐसा जो व्यक्ति कष्ट से पीड़ित है और तड़प रहा है, यदि दूसरा व्यक्ति उसके घावों पर मरहम लगा देता है तो वह स्वयं ही पुण्य का अधिकारी बन जाता है। आज यदि आपके अनुसार प्लेग से पीड़ित लोग पाप के भागी हैं और हमारे कार्यकर्ता इन लोगों की मदद कर रहे हैं, वे तो पुण्य के भागी बन रहे हैं। बताइए कि इस संदर्भ में आपको क्या कहना है?” उनकी बात सुनकर सभी लोग भौंचक्के रह गए और चुपचाप सिर झुकाकर वहाँ से चले गए।

(i) कोलकाता में कौन-सी महामारी फैली थी?
(क) चेचक
(ख) प्लेग
(ग) हैजा
(घ) स्वाइन फ्लू
उत्तर
(ख) प्लेग

(ii) महामारी के विषय में कुछ लोगों की धारणा थी कि
(क) यह ईश्वर का कहर है
(ख) इस पर नियंत्रण असंभव है
(ग) दवाओं द्वारा इसकी रोकथाम संभव है
(घ) लोगों को उनके पाप का दंड मिल रहा है
उत्तर
(घ) लोगों को उनके पाप का दंड मिल रहा है

(iii) कुछ लोगों की दृष्टि में विवेकानंद जी द्वारा पीड़ितों की सेवा करना था
(क) लोक कल्याण में बाधा
(ख) लोक कल्याण में सहायता
(ग) ईश्वर के कार्य में बाधा
(घ) ईश्वर के कार्य में सहायता
उत्तर
(ग) ईश्वर के कार्य में बाधा

(iv) स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार उनके तथा कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा कार्य था
(क) मानवोचित कर्म
(ख) पाप कर्म
(ग) समाज सेवा
(घ) पुण्य का कार्य
उत्तर
(घ) पुण्य का कार्य

(v) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक हो सकता है
(क) दंड
(ख) महामारी
(ग) कर्मों का फल
(घ) पाप और पुण्य
उत्तर
(घ) पाप और पुण्य

अथवा

महाभारत में देश के प्रायः अधिकांश वीर कौरवों के पक्ष में थे। मगर फिर भी जीत पांडवों की हुई, क्योंकि उन्होंने लाक्षा-गृह की मुसीबत झेली थी, वनवास के जोखिम को पार किया था। साहस की ज़िंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है। ऐसी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह बिलकुल निडर, बिल्कुल बेखौफ़ होती है। साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह इस बात की चिंता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं।

जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है। अड़ोस-पड़ोस को देखकर चलना साधारण जीव का काम है। क्रांति करने वाले लोग अपने उद्देश्य की तुलना न तो पड़ोसी के उद्देश्य से करते हैं और न अपनी चाल को ही पड़ोसी की चाल देखकर मद्धिम बनाते हैं, बल्कि निडर होकर अपने लक्ष्य को पूरा करते हैं।

(i) इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक होगा
(क) संकट और विकास
(ख) साहस की आवश्यकता
(ग) हिम्मत और जिंदगी
(घ) स्वाभिमानी जीवन
उत्तर
(ग) हिम्मत और जिंदगी

(ii) पांडवों की जीत के पीछे क्या कारण बताया गया है?
(क) सत्य की शक्ति
(ख) कृष्ण का साथ
(ग) भाग्य का साथ ।
(घ) संकटों का मुकाबला
उत्तर
(घ) संकटों का मुकाबला

(iii) ‘साहस की जिंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है।’ यह किस प्रकार का वाक्य है?
(क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्र वाक्य
(घ) नकारात्मक वाक्य
उत्तर
(क) सरल वाक्य

(iv) साहसी मनुष्य की पहचान क्या है?
(क) वह आस-पड़ोस को देखकर चलता है
(ख) वह मनमानी करता है
(ग) वह जनमत की उपेक्षा करता है
(घ) वह लोगों की निंदा की परवाह नहीं करता
उत्तर
(घ) वह लोगों की निंदा की परवाह नहीं करता

(v) क्रांतिकारी लोग
(क) निडर होकर मनमानी करते हैं
(ख) निडर होकर अपने लक्ष्य को पूरा करते हैं
(ग) आस-पड़ोस की चिंता करते हैं
(घ) कुछ नहीं करते हैं
उत्तर
(ख) निडर होकर अपने लक्ष्य को पूरा करते हैं

अपठित पद्यांश (अंक 5)

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)

भोर हुई पेड़ों की बीन बोलने लगी,
पात-पात हिले डाल-डाल डोलने लगी।
कहीं दूर किरणों के तार झनझना उठे,
सपनों के स्वर डूबे धरती के गान में।
लाखों ही लाख दीए तारों के खो गए,
पूरब के अधरों की हल्की मुस्कान में।
कुछ ऐसे पूरब के गाँव की हवा चली,
खपरैलों की दुनिया आँख खोलने लगी।
जमे हुए धुएँ-सी पहाड़ी है दूर की,
काजल की रेख-सी कतार है खजूर की।

सोने का कलश लिए उषा चली आ रही है,
माथे पर दमक रही आभा सिंदूर की।
धरती को परियों के सपनीले प्यार में,
नई चेतना नई उमंग बोलने लगी।
कुछ ऐसे मोर की बयार गुनगुना उठी,
अलसाए कुहरे की बाँह सिमटने लगी।
नरम-नरम किरणों की नई धूप में,
राहों के पेड़ों की छाँह लिपटने लगी।
लहराई माटी की धुली-धुली चेतना,
फसलों पर चुहचुहिया पाँख बोलने लगी।

(i) कवि ने किस समय का चित्रण किया है?
(क) प्रात:काल
(ख) संध्या
(ग) दोपहर
(घ) रात्रि
उत्तर
(क) प्रात:काल

(ii) दीए किसके हैं?
(क) जुगनुओं के
(ख) माटी के
(ग) तारों के
(घ) पीतल के
उत्तर
(ख) माटी के

(iii) दूर की पहाड़ी कैसी दिखाई दे रही है?
(क) अस्पष्ट
(ख) जमे हुए दही-सी
(ग) धुंधली
(घ) जमे हुए धुंए-सी
उत्तर
(घ) जमे हुए धुंए-सी

(iv) सोने का कलश क्या है?
(क) सूर्य
(ख) तारे
(ग) चंद्रमा
(घ) बादल
उत्तर
(क) सूर्य

(v) भोर की बयार के गुनगुनाने का परिणाम क्या हुआ?
(क) चुहचुहिया पाँख खोलने लगी
(ख) राहों के पेड़ों की चाह लिपटने लगी
(ग) अलसाए कुहरे की बाँह सिमटने लगी
(घ) माटी में चेतना आ गई
उत्तर
(ग) अलसाए कुहरे की बाँह सिमटने लगी

अथवा

हे प्रभु, निधि विनम्रता की तुम
वासी हो तुम दीन कुटी के
गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र से
सिंचित इस सुंदर भारत में
खोज सकें हम तुमको |
इसमें हमें मदद दो
ग्रहणशीलता दो हमको, दो खुला हृदय
दो कृपया अपनी विनम्रता
शक्ति दो हमको दो तत्परता
ताकि देश की जनता से

हम हो पाएँ एकाकार
वर दो प्रभु
हम अलग न पड़ जाएँ उस ‘जन’ से
जिसकी सेवा करनी हमको
सहचर बनकर सेवक बनकर
त्याग, भक्ति और विनम्रता का
हमें बना दो पुतला प्रभुवर
जिससे हम अपने भारत को
ज़्यादा समझें, ज़्यादा चाहें।

(i) प्रभु क्या है?
(क) सर्वव्यापी
(ख) विनम्रता की निधि
(ग) सर्वसुलभ
(घ) करुणा-सागर
उत्तर
(ख) विनम्रता की निधि

(ii) कवि किसमें प्रभु की मदद चाहता है?
(क) नदियों के जल से सिंचित सुंदर भारत में उन्हें खोज सके
(ख) दीन-दुखियों की कुटी में उन्हें पा सके
(ग) कण-कण में छुपे प्रभु के दर्शन हेतु
(घ) करुणामय की दया हेतु
उत्तर
(ख) दीन-दुखियों की कुटी में उन्हें पा सके

(iii) वह प्रभु से क्या माँगता है?
(क) ग्रहणशीलता और खुला हृदय
(ख) उसकी विनम्रता
(ग) शक्ति और तत्परता
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर
(घ) उपर्युक्त सभी

(iv) वह प्रभु से किसका पुतला बनने की कामना करता है?
(क) सहचर
(ख) सेवक
(ग) त्याग, भक्ति और विनम्रता
(घ) सामान्य का प्रतिरूप
उत्तर
(ग) त्याग, भक्ति और विनम्रता

(v) वह यह सब क्यों माँग रहा है?
(क) अपने लिए
(ख) देश को ज़्यादा समझने और चाहने के लिए
(ग) सबके लिए
(घ) भारत के लिए व्यावहारिक
उत्तर
(ख) देश को ज़्यादा समझने और चाहने के लिए

व्याकरण (अंक 16)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिएि। (1 x 4 = 4)

(i) जब बारिश हुई तब किसान झूमने लगा। वाक्य है
(क) सरल वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ख) मिश्र वाक्य

(ii) हम चाहते हैं कि हिंसा बंद हो जाए। रेखांकित उपवाक्य है
(क) संज्ञा उपवाक्य
(ख) सर्वनाम उपवाक्य
(ग) क्रिया उपवाक्य
(घ) विशेषण उपवाक्य
उत्तर
(क) संज्ञा उपवाक्य

(iii) सरल वाक्य है
(क) वह कामचोर था, इसलिए विफल हुआ।
(ख) वह आया, परंतु कुछ नहीं बोला।
(ग) हम लोग तैरने के लिए नदी पर गए थे।
(घ) ऐसा काम करो, जिसमें फायदा हो।
उत्तर
(ग) हम लोग तैरने के लिए नदी पर गए थे।

(iv) संयुक्त वाक्य है
(क) मुझे नहीं पता कि वे कब आएँगे।
(ख) परीक्षा कठिन है, इसलिए परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हुआ।
(ग) बच्चे शोर मचा रहा हैं।
(घ) जो जागत है, सो पावत है।
उत्तर
(क) मुझे नहीं पता कि वे कब आएँगे।

(v) ‘मैं लिख रहा हूँ जो ब्रह्म सत्य है।’ वाक्य में प्रधान उपवाक्य है
(क) ब्रह्य सत्य है
(ख) जो ब्रह्म सत्य है
(ग) मैं लिख रहा हूँ
(घ) लिख रहा हूँ
उत्तर
(क) ब्रह्य सत्य है

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिएि। (1 x 4 =4)

(i) ‘मुझसे पत्र नहीं लिखा गया।’ वाक्य का कर्तृवाच्य है
(क) मैंने पत्र नहीं लिखा।
(ख) मैंने पत्र नहीं लिखा था।
(ग) मैं पत्र नहीं लिखता।
(घ) मैं पत्र नहीं लिख सकता।
उत्तर
(क) मैंने पत्र नहीं लिखा।

(ii) कर्मवाच्य है
(क) लड़के आँगन में सो रहे हैं।
(ख) अब चला जाए।
(ग) हम रोज़ नहाते हैं।
(घ) उससे दिन में फल खाए जाते हैं।
उत्तर
(घ) उससे दिन में फल खाए जाते हैं।

(iii) वाल्मीकि द्वारा रामायण लिखी गई। वाच्य है
(क) कर्तृवाच्य
(ख) कर्मवाच्य
(ग) भाववाच्य
(घ) कोई नहीं
उत्तर
(ख) कर्मवाच्य

(iv) भाववाच्य है
(क) पक्षी आकाश में उड़ते हैं।
(ख) बच्चा खूब रोया।
(ग) मुझसे बैठा नहीं जाता।
(घ) सिपाही द्वारा चोर पकड़ा गया।
उत्तर
(ग) मुझसे बैठा नहीं जाता।

(v) अशोक ने विश्व को शांति का संदेश दिया। वाच्य है
(क) कर्तृवाच्य
(ख) कर्मवाच्य
(ग) भाववाच्य
(घ) कोई नही
उत्तर
(घ) कोई नही

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिएि। (1 x 4 = 4)
(i) माँ आपकी रक्षा करती है। रेखांकित का पद-परिचय है
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक
(ख) जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक
(ग) जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक
(घ) भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक
उत्तर
(ख) जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक

(ii) मैं खुद पढ़ लूँगी। ‘खुद’ का पद-परिचय है–
(क) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, स्त्रीलिंग
(ख) रीतिवाचक क्रियाविशेषण, ‘पढ़ लूँगी’ क्रिया की विशेषता
(ग) निजवाचक सर्वनाम, एकवचन, स्त्रीलिंग
(घ) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, स्त्रीलिंग
उत्तर
(ग) निजवाचक सर्वनाम, एकवचन, स्त्रीलिंग

(iii) मनुष्य का चरित्र उसका उत्तम गुण होता है। वाक्य में ‘उत्तम’ का पद-परिचय है
(क) परिमाणवाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिग, ‘गुण’ विशेष्य
(ख) संख्यावाचक विशेषण, बहुवचन, स्त्रीलिंग, ‘गुण’ विशेष्य
(ग) गुणवाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिग, ‘गुण’ विशेष्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) परिमाणवाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिग, ‘गुण’ विशेष्य

(iv) हम सभी भारतीयों का अभिवादन करते हैं। ‘भारतीयों’ का पद-परिचय होगा
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा, बहुवचन, पुल्लिंग, संबंध कारक
(ख) जातिवाचक संज्ञा, बहुवचन, पुल्लिंग, संबंध कारक
(ग) गुणावाचक विशेषण, बहुवचन, पुल्लिंग, ‘सभी’ विशेष्य
(घ) गुणावाचक विशेषण, एकवचन, स्त्रीलिंग, ‘हम’ विशेष्य
उत्तर
(ख) जातिवाचक संज्ञा, बहुवचन, पुल्लिंग, संबंध कारक

(v) वह लड़का घर जाता है । ‘वह’ का पद-परिचय है
(क) पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक
(ख) संकेतवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक
(ग) संकेतवाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिंग, लड़का विशेष्य
(घ) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक
उत्तर
(घ) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिएि। (1 x 4 = 4)

(i) ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी। जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा यार करो कुर्बानी। इन पंक्तियों में कौन-सा रस है?
(क) वीर रस
(ख) रौद्र रस
(ग) अद्भुत रस
(घ) करुण रस
उत्तर
(क) वीर रस

(ii) “ऊधो, मोहिं ब्रज बिसरत नाहीं। हंससुता की सुंदर कगरी और द्रुमन की छाँहीं।।” इन पंक्तियों में किस रस का स्थायी भाव है?
(क) विस्मय
(ख) रति
(ग) शोक
(घ) क्रोध
उत्तर
(ख) रति

(iii) किलक अरे मैं नेह निहारूँ। इन दाँतों पर मोती वारूँ।। इन पंक्तियों में कौन-सा रस है?
(क) उत्साह
(ख) भक्ति
(ग) रति
(घ) वात्सल्य
उत्तर
(घ) वात्सल्य

(iv) उत्साह किस रस का स्थायी भाव है?
(क) वीभत्स
(ख) भयानक
(ग) रौद्र
(घ) वीर
उत्तर
(घ) वीर

(v) हास्य रस का उदाहरण है
(क) बसों मेरे नैनन में नंदलाल, मोर मुकुट मकराकृत कुंडल, अरुण तिलक दिए भाल।
(ख) सीस पर गंगा हँसे, भुजनि भुजंगा हँसे, हास ही को दंगा भयो नंगा के विवाह में।
(ग) दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूँ आज जो नहीं कही।
(घ) लंका की सेना कपि के गर्जन रव से काँप गई, हनुमान के भीषण दर्शन से विनाश ही भाँप गई।
उत्तर
(ख) सीस पर गंगा हँसे, भुजनि भुजंगा हँसे, हास ही को दंगा भयो नंगा के विवाह में।

पाठ्यपुस्तक (अंक 14)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा न हो कि शहर का कोई सफेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफर करता देखे।… अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे और अब किसी सफेदपोश के सामने खीरा कैसे खाएँ? हम कनखियों से नवाब साहब की ओर देख रहे थे। नवाब साहब कुछ देर गाड़ी की खिड़की से बाहर देखकर स्थिति पर गौर करते रहे।

(i) लेखक की पुरानी आदत क्या थी?
(क) गीत गाते रहना
(ख) दूसरों से बातें करना
(ग) कल्पना करते रहना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ग) कल्पना करते रहना

(ii) लेखक किसकी असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे?
(क) अपनी पत्नी की
(ख) स्वयं की
(ग) नवाब साहब की
(घ) अपने मित्रों की
उत्तर
(ग) नवाब साहब की

(iii) लेखक ने क्या-क्या अनुमान लगाया?
(क) नवाब साहब एकांत में यात्रा करना चाहते होंगे
(ख) बचत करना चाहते होंगे
(ग) अकेलेपन को दूर करने के लिए खीरे खरीदे होंगे
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर
(घ) उपर्युक्त सभी

(iv) नवाब साहब खीरे क्यों नहीं खा रहे थे?
(क) संकोचवश
(ख) उन्हें खीरे अच्छे नहीं लगते
(ग) ट्रेन में खाना मना है
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) संकोचवश

(v) डिब्बे में चढ़ते समय लेखक का क्या अनुमान था?
(क) डिब्बे में भीड़ होगी
(ख) डिब्बा खाली होगा
(ग) डिब्बे में चढ़ना मुश्किल होगा
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर
(ख) डिब्बा खाली होगा

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 2 = 2)
(i) नेताजी का चश्मा कहानी में सुभाषचंद्र बोस जी की मूर्ति किससे बनी थी?
(क) लोहा
(ख) संगमरमर
(ग) कंक्रीट
(घ) मिट्टी
उत्तर
(ख) संगमरमर

(ii) भगत जी की बहू उन्हें छोड़कर क्यों नहीं जाना चाहती थी?
(क) सामाजिक मर्यादा के कारण
(ख) संपत्ति के लोभ में
(ग) पति से प्यार होने के कारण
(घ) ससुर की चिंता के कारण
उत्तर
(घ) ससुर की चिंता के कारण

प्रश्न 9.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
मन की मन ही माँझ रही।
कहिए जाइ कौन पै ऊधौ, नाहीं परत कही।
अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।
अब इन जोग सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।
चाहति हुती गुहारि जितहिं तैं, उत तैं धार बही।
‘सूरदास’ अब धीर धरहिं क्यौं, मरजादा न लही।
उत्तर
(i) गोपियाँ अपनी मन की व्यथा को क्यों नहीं कह पा रही हैं?
(क) गोपियाँ श्रीकृष्ण के प्रेम-विरह में इतनी व्याकुल हैं कि अपने मन की बात भी करना नहीं चाहती हैं।
(ख) गोपिकाओं को अब तक ऐसा कोई नहीं मिला, जिससे वे अपने मन की व्यथा कह सकें।
(ग) श्रीकृष्ण के वियोग में गोपिकाएँ तन-मन से बहुत व्यथित हैं।
(घ) दिए गए विकल्पों के सभी उत्तर गलत हैं।
उत्तर
(घ) दिए गए विकल्पों के सभी उत्तर गलत हैं।

(ii) गोपियों का धैर्य क्यों टूटने लगा?
(क) उन्हें विश्वास था कि श्रीकृष्ण उनसे मिलने ज़रूर आएँगे, लेकिन श्रीकृष्ण नहीं आए।
(ख) श्रीकृष्ण ने उद्धव को योग-साधना सिखाने के लिए गोपियों के पास भेजा।
(ग) दोनों विकल्प सही हैं।
(घ) दोनों विकल्प गलत हैं।
उत्तर
(ग) दोनों विकल्प सही हैं।

(iii) गोपियों के पास उद्धव किसका संदेश लेकर आए थे?
(क) मथुरा के राजा कंस का
(ख) गोकुल के सरपंच का
(ग) श्रीकृष्ण जी का
(घ) दिए गए विकल्पों का सभी उत्तर गलत है।
उत्तर
(ग) श्रीकृष्ण जी का

(iv) किस मर्यादा के उल्लंघन की बात गोपियाँ उद्धव से कह रही हैं?
(क) कृष्ण के द्वारा प्रेम की मर्यादा का
(ख) उद्धव के उपदेश देने की मर्यादा के बारे में
(ग) गोपियों के प्रेम की मर्यादा के बारे में
(घ) दिए गए विकल्पों के सभी उत्तर सही हैं।
उत्तर
(क) कृष्ण के द्वारा प्रेम की मर्यादा का

(v) ‘बिरहिनि’ का अर्थ है
(क) वियोग में जीने वाली महिला
(ख) गायिका
(ग) एक तरह का गीत
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर
(क) वियोग में जीने वाली महिला

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 2 = 2)
(i) सहस्रबाहु की भुजाओं को किसने काट डाला था?
(क) लक्ष्मण ने
(ख) परशुराम ने
(ग) विष्णु ने
(घ) शिव ने
उत्तर
(ख) परशुराम ने

(ii) लड़की होना पर लड़की जैसा मत दिखना’ का क्या आशय है?
(क) आवश्यकता अनुरूप कठोर और कोमल
(ख) कठोर दिखना
(ग) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(घ) कोमल दिखना
उत्तर
(घ) कोमल दिखना

का खंड ‘ब’- वर्णनात्मक प्रश्न (अंक 40)

पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक (अंक 20)

प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2 x 4 = 8)

(क) बालगोबिन भगत की मृत्यु उन्हीं के अनुरूप हुई?
(ख) लेखक को नवाब साहब का मौन रहना भी अखर रहा था और बातें करना भी कचोटने लगा। क्यों?
(ग) ‘फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है,’ ऐसा क्यों कहा गया है?
(घ) सेनानी न होते हुए भी चश्मे वाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2 x 3 = 6)
(क) ‘कन्यादान’ कविता में माँ ने बेटी को ऐसा क्यों कहा, ‘लड़की होना, पर लड़की जैसी दिखाई मत देना’?
(ख) ‘अट नहीं रही’ कविता में कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
(ग) ‘गाधिसुनू’ किसे कहा गया है? वे मुनि की किस बात पर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे?

प्रश्न 13.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए। (3 x 2 = 6)
(क) और देखते ही देखते नई दिल्ली का कायापलट होने लगा?’ नई दिल्ली के कायापलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होंगे?
(ख) ‘साना-साना हाथ जोड़ि’…. पाठ में गंतोक को मेहनतकश बादशाहों का शहर क्यों कहा गया है?
(ग) गुरुजी की फटकार से रोता हुआ बालक भोलानाथ यकायक चुप कैसे हो गया?

लेखन (अंक 20)

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 80-100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (5 x 1 =5)
(क) महानगरीय जीवनः वरदान या अभिशाप
संकेत-बिंदु-

  • शहरों की ओर बढ़ते कदम
  • दिवास्वप्न
  • वरदान रूप
  • महानगरीय जीवन-एक अभिशाप।

(ख) बदलती दुनिया में पीछे छूटते जीवन-मूल्य
संकेत-बिंदु-

  • संसार परिवर्तनशील
  • बदलाव का प्रभाव
  • खोते नैतिक मूल्य।

(ग) सत्संगति का प्रभाव
संकेत-बिंदु-

  • सत्संगति का अर्थ
  • सत्संगति से लाभ
  • विद्यार्थी में सत्संगति का महत्व।

प्रश्न 15.
आपका मित्र बोर्ड की परीक्षा में प्रथम घोषित किया गया है। इस अवसर पर उसे लगभग 80-100 शब्दों में बधाई पत्र लिखिए। (5 x 1 =5)
अथवा
चेक बुक खो जाने की सूचना देते हुए अपने बैंक के प्रबंधक को 80-100 शब्दों में पत्र लिखिए।(5 x 1 =5)

प्रश्न 16.
विद्यालय के वार्षिकोत्सव के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा निर्मित हस्तकला की वस्तुओं की प्रदर्शनी के प्रचार हेतु लगभग 25-50 शब्दों में एक विज्ञापन लिखिए। (5 x 1 =5)
अथवा
‘हरियाली’ पौधशाला के पौधों की बिक्री बढ़ाने हेतु 25-50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए।

प्रश्न 17.
प्रधानाचार्य की और से विद्यालय की वार्षिक पत्रिका हेतु विद्यार्थियों को लेख आदि भेजने का संदेश 30-40 शब्दों में लिखिए। (5 x 1 =5)
अथवा
मित्र को विद्यालय की रजत जयंती हेतु शुभकामना संदेश 30-40 शब्दों में लिखिए।

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 4 for Practice

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CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 4 for Practice

निर्धारित समय : 3 घंटे
अधिकतम अंक : 80

सामान्य निर्देश:
(क) इस प्रश्न-पत्र के दो खंड हैं- ‘अ’ और ‘ब’।
(ख) खंड ‘अ’ में कुल 10 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी प्रश्नों में उपप्रश्न दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(ग) खंड ‘ब’ में कुल 7 वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

खंड ‘अ’- वस्तुपरक प्रश्न ( अंक 40)

अपठित गद्यांश (अंक 5)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
संघर्ष के मार्ग में अकेले ही चलना पड़ता है। कोई बाहरी शक्ति आपकी सहायता नहीं करती है। परिश्रम, दृढ़ इच्छा शक्ति व लगन आदि मानवीय गुण व्यक्ति को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दो महत्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय हैं- प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है।

प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है। एक अध्यापक ने अध्ययन छोड़ने वाले अपने छात्रों को यह संदेश दिया था- तुम्हें जीवन में सफल होने वे लिए समस्याओं से संघर्ष करने का अभ्यास करना होगा। हम कोई भी कार्य करें, सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने का संकल्प लेकर चलें।

सफलता हमें कभी निराश नहीं करेगी। समस्त ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना अहितकर है, मानव धर्म के प्रतिकूल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है। आप जागिए, उठिए दृढ़-संकल्प और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्ष रूपी विजय रथ पर चढ़िए और अपने जीवन के विकास की बाधाओं रूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कीजिए।

(i) मनुष्य को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं
(क) निर्भीकता, साहस, परिश्रम
(ख) परिश्रम, लगन, आत्मविश्वास
(ग) साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम
(घ) परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन
उत्तर
(घ) परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन

(ii) प्रत्येक समस्या अपने साथ लेकर आती है
(क) संघर्ष
(ख) कठिनाइयाँ
(ग) चुनौतियाँ
(घ) सुखद परिणाम
उत्तर
(क) संघर्ष

(iii) समस्त ग्रंथों और अनुभवों का निष्कर्ष है
(क) संघर्ष से डरना या विमुख होना अहितकर है।
(ख) मानव-धर्म के प्रतिकूल है।
(ग) अपने विकास को बाधित करना है।
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर
(घ) उपर्युक्त सभी

(iv) ‘मानवीय’ शब्द में मूल शब्द और प्रत्यय है
(क) मानवी + य
(ख) मानव + ईय
(ग) मानव + नीय
(घ) मानव + इय
उत्तर
(ख) मानव + ईय

(v) संघर्ष रूपी विजय रथ पर चढ़ने के लिए आवश्यक है
(क) दृढ़ संकल्प, निडरता और धैर्य
(ख) दृढ़ संकल्प, उत्साह एवं साहस
(ग) दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और साहस
(घ) दृढ़ संकल्प, उत्तम चरित्र एवं साहस
उत्तर
(ख) दृढ़ संकल्प, उत्साह एवं साहस

अथवा

मानव-जाति को अन्य जीवधारियों से अलग करके महत्व प्रदान करने वाला जो एकमात्र गुरु है, वह है उसकी विचार-शक्ति। मनुष्य के पास बुद्धि है, विवेक है, तर्कशक्ति है अर्थात उसके पास विचारों की अमूल्य पूँजी है। अपने सविचारों की नींव पर ही आज मानव ने अपनी श्रेष्ठता की स्थापना की है और मानव-सभ्यता का विशाल महल खड़ा किया है।

यही कारण है कि विचारशील मनुष्य के पास जब सविचारों का अभाव रहता है तो उसका वह शून्य मानस कुविचारों से ग्रस्त होकर एक प्रकार से शैतान के वशीभूत हो जाता है। मानवीय बुद्धि जब सद्भावों से प्रेरित होकर कल्याणकारी योजनाओं में प्रवृत्त रहती है तो उसकी सदाशयता का कोई अंत नहीं होता, किंतु जब वहाँ कुविचार अपना घर बना लेते हैं तो उसकी पाशविक प्रवृत्तियाँ उस पर हावी हो उठती हैं।

हिंसा और पापाचार का दानवी साम्राज्य इस बात का द्योतक है कि मानव की विचार-शक्ति, जो उसे पशु बनने से रोकती है, उसका साथ देती है।

(i) मानव-जाति को महत्व देने में किसका योगदान है?
(क) शारीरिक शक्ति का
(ख) परिश्रम और उत्साह का
(ग) विवेक और विचारों का
(घ) मानव-सभ्यता का
उत्तर
(ग) विवेक और विचारों का

(ii) विचारों की पूँजी में शामिल नहीं है-
(क) उत्साह
(ख) विवेक
(ग) तर्क
(घ) बुद्धि
उत्तर
(क) उत्साह

(iii) मानव में पाशविक प्रवृत्तियाँ क्यों जागृत होती हैं?
(क) हिंसा-बुद्धि के कारण
(ख) असत्य बोलने के कारण
(ग) कुविचारों के कारण
(घ) स्वार्थ के कारण
उत्तर
(क) हिंसा-बुद्धि के कारण

(iv) ‘मनुष्य के पास बुद्धि है, विवेक है, तर्कशक्ति है।’ रचना की दृष्टि से उपर्युक्त वाक्य है
(क) सरल
(ख) संयुक्त
(ग) मिश्र
(घ) आज्ञावाचक
उत्तर
(क) सरल

(v) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक हो सकता है
(क) मनुष्य का गुरु
(ख) विवेक-शक्ति
(ग) दानवी शक्ति
(घ) पाशविक प्रवृत्ति
उत्तर
(ख) विवेक-शक्ति

अपठित पद्यांश (अंक 5)

प्रश्न  2.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)

दो टूक कलेजे के करता पछताता,
पथ पर आता।
पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
चल रहा लकुटिया टेक,
मुट्ठी भर दाने को, भूख मिटाने को
मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता
दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।

साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाए,
बाएँ से वे मलते हुए पेट को चलते,
और दाहिना दया-दृष्टि पाने की ओर बढ़ाए।
भूख से सूख ओठ जब जाते
दाता-भाग्य विधाता से क्या पाते?
घुट आँसूओं के पीकर रह जाते।
चाट रहे जूठी पत्तल कभी सड़क पर खड़े हुए,
और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी हैं अड़े हुए!

(i) कविता में किस पर व्यंग्य किया गया है
(क) आर्थिक न्याय पर
(ख) राजनीतिक सत्य पर
(ग) सामाजिक विषमता पर
(घ) मध्यवर्गीय जीवन पर
उत्तर
(ग) सामाजिक विषमता पर

(ii) भिखारी की इच्छा है
(क) सोना पाने की
(ख) पैसा पाने की
(ग) अनाज पाने के लिए
(घ) कपड़ा पाने की
उत्तर
(ग) अनाज पाने के लिए

(iii) बच्चे भिखारी के साथ क्यों हैं?
(क) घूमने के लिए
(ख) भीख माँगने के लिए
(ग) रास्ता ढूँढ़ने के लिए
(घ) पिता के साथ के लिए
उत्तर
(ख) भीख माँगने के लिए

(iv) भिखारी के बच्चों से कुत्ते क्यों होड़ करते हैं?
(क) जूठी पत्तल छीनने के लिए
(ख) चिढ़ाने के लिए
(ग) लड़ने के लिए
(घ) भागने के लिए
उत्तर
(क) जूठी पत्तल छीनने के लिए

(v) इस काव्यांश का शीर्षक होगा
(क) विषमता
(ख) बेबसी
(ग) गरीबी
(घ) भिक्षुक
उत्तर
(ख) बेबसी

अथवा

माटी तुझे प्रणाम।
मेरे पुण्य देश की माटी तू कितनी अभिराम।
तुझे लगा माथे से सारे कष्ट हो गए दूर
क्षण भर में ही भूल गया मैं शत्रु मंत्रणा क्रूर
सुख-स्फूर्ति का इस काया में हुआ पुनःसंचार
लगता जैसे आज युगों के बाद मिला विश्राम।
माटी तुझे प्रणाम।
तुझसे बिछुड़ मिला प्राणों को कभी न पल-भर चैन
तेरे दर्शन हेतु रात-दिन तरस रहे थे नैन

धन्य हुआ तेरे चरणों में आकर यह अस्तित्व
हुई साधना सफल, भगत को प्राप्त हो गए राम।
माटी तुझे प्रणाम।
अमर मृत्तीके लगती तू पारस से बढ़कर आज
कारा-जड़-जीवन सचेत फिर, तुझको छूकर आज
मरणशील हम, किंतु अमर तू है, अमर्त्य यह धाम
हम मर-मरकर अमर करेंगे तेरा उज्ज्व ल नाम।

(i) इस कविता को कवि किस मनोदशा में लिख रहा है?
(क) मातृभूमि से दूर विदेशी भूमि से
(ख) मातृभूमि से दूर विदेशी शत्रुओं के चुंगल में रहकर
(ग) बहुत दिनों बाद विदेशी शत्रुओं के चुंगल से मुक्त होकर
(घ) विदेश यात्रा से अनेक वर्षों बाद लौटकर
उत्तर
(ग) बहुत दिनों बाद विदेशी शत्रुओं के चुंगल से मुक्त होकर

(ii) ‘अभिराम’ का तात्पर्य है
(क) उपजाऊ
(ख) सुंदर
(ग) कष्ट उठा-उठाकर
(घ) बलिदान दे-देकर
उत्तर
(ख) सुंदर

(iii) ‘हम मर-मरकर अमर करेंगे तेरा उज्ज्वल नाम’ में मर-मर का क्या तात्पर्य है?
(क) दुर्बल निर्मल होकर
(ख) परास्त होकर
(ग) कष्ट उठा-उठाकर
(घ) बलिदान दे-देकर
उत्तर
(घ) बलिदान दे-देकर

(iv) कवि ने मिट्टी को पारस के समान क्यों कहा है?
(क) वह बहुत उपजाऊ है
(ख) वह हरी-भरी है
(ग) वह माँ की गोद-सी ममता देने वाली है
(घ) वह फसलों के रूप में सोना उगाती है
उत्तर
(घ) वह फसलों के रूप में सोना उगाती है

(v) कवि माटी के प्रति किस भावना से परिपूर्ण है?
(क) भक्ति भावना से
(ख) कृतज्ञता से
(ग) जन्मजात प्रेम से
(घ) धन्यवाद भाव से
उत्तर
(ख) कृतज्ञता से

व्यावहारिक व्याकरण (अंक 16)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 4 = 4)
(i) हमारे निकलते ही वर्षा होने लगी वाक्य है
(क) सरल वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) सरल वाक्य

(ii) मुझे विश्वास है कि आप आवश्य आएँगे। रेखांकित उपवाक्य है
(क) संज्ञा उपवाक्य
(ख) सर्वनाम उपवाक्य
(ग) क्रिया उपवाक्य
(घ) विशेषण उपवाक्य
उत्तर
(क) संज्ञा उपवाक्य

(iii) संयुक्त वाक्य है
(क) वहाँ जाकर जल्दी आ जाना।
(ख) वहाँ जाना और जल्दी आ जाना।
(ग) जब जाओगे तब जल्दी आना।
(घ) जाकर जल्दी आओ।
उत्तर
(ख) वहाँ जाना और जल्दी आ जाना।

(iv) मिश्र वाक्य है
(क) यहाँ आएँ और सुनें।
(ख) यहाँ आकर सुनो।
(ग) जब यहाँ आना तब सुनना।
(घ) आओ और सुनो।
उत्तर
(घ) आओ और सुनो।

(v) ‘मैंने एक फूल देखा, जो खिल रहा था।’ वाक्य में प्रधान उपवाक्य है
(क) जो खिल रहा था
(ख) मैंने एक फूल देखा
(ग) फूल जो खिल रहा था।
(घ) एक फूल देखा
उत्तर
(ख) मैंने एक फूल देखा

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।( 1 x 4 = 4)

(i) इनमें भाववाच्य है
(क) दूधवाले ने दूध दिया।
(ख) चोर पकड़ा गया।
(ग) दादी जी से बोला नहीं जाता।
(घ) फोर्स द्वारा घुसपैठिए पकड़े गए।
उत्तर
(ग) दादी जी से बोला नहीं जाता।

(ii) कर्तृवाक्य है
(क) चिड़िया से उड़ा जाएगा।
(ख) मुझसे यों चुपचाप नहीं बैठा जाता।
(ग) हर्ष इस समय गीत गा रहा है।
(घ) आओ साथ मिलकर खेला जाए।
उत्तर
(ग) हर्ष इस समय गीत गा रहा है।

(iii) आज हमें गणित पढ़ाया गया।वाच्य है
(क) कर्तृवाक्य
(ख) कर्मवाक्य
(ग) भाववाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ख) कर्मवाक्य

(iv) कर्मवाच्य है
(क) मैं कहानी पढ़ता हूँ।
(ख) माली द्वारा फूल तोड़े गए।
(ग) माली फूल तोड़ेगा।
(घ) उससे सोया नहीं जाता।
उत्तर
(ख) माली द्वारा फूल तोड़े गए।

(v) मैंने घोड़ा खरीदा। वाच्य है
(क) कर्तृवाक्य
(ख) कर्मवाक्य
(ग) भाववाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) कर्तृवाक्य

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 4 =4 )

(i) योगिता मंदिर में गाना गाती है। रेखांकित का पद-परिचय है
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक
(ख) जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक
(ग) जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक
(घ) भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक
उत्तर
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक

(ii) ‘आज तुमने थोड़ा-सा ही दूध क्यों पीया?’ इस वाक्य में थोड़ा-सा’ का पद-परिचय होगा
(क) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, ‘दूध’ विशेष्य का विशेषण
(ख) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, बहुवचन, दूध’ विशेष्य का विशेषण
(ग) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, ‘दूध’ विशेष्य का विशेषण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ग) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, ‘दूध’ विशेष्य का विशेषण

(iii) ‘वह कहीं चला गया है।’ वाक्य में ‘कहीं’ का पद-परिचय क्या है?
(क) कालवाचक क्रियाविशेषण, ‘चला गया है’ क्रिया की विशेषता बता रहा है।
(ख) स्थानवाचक क्रियाविशेषण, ‘चला गया है’ क्रिया की विशेषता बता रहा है।
(ग) रीतिवाचक क्रियाविशेषण ‘चला गया है’ क्रिया की विशेषता बता रहा है।
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ख) स्थानवाचक क्रियाविशेषण, ‘चला गया है’ क्रिया की विशेषता बता रहा है।

(iv) मल्लिका पत्र लिखवाती है। ‘लिखवाती है’ का पद-परिचय है
(क) अकर्मक क्रिया, एकवचन, स्त्रीलिंग, वर्तमान काल
(ख) सकर्मक क्रिया, एकवचन, स्त्रीलिंग, भूतकाल
(ग) प्रेरणार्थक क्रिया, एकवचन, स्त्रीलिंग, वर्तमान काल
(घ) एककर्मक क्रिया, संयुक्त क्रिया, एकवचन, वर्तमान काल
उत्तर
(ग) प्रेरणार्थक क्रिया, एकवचन, स्त्रीलिंग, वर्तमान काल

(v) प्रांजल दो किलो आम लाया।’ यहाँ ‘दो किलो’ का पद-परिचय है
(क) संख्यावाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिंग, आम विशेष्य
(ख) परिमाणवाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिंग, आम विशेष्य
(ग) गुणवाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिंग, आम विशेष्य
(घ) परिमाणवाचक विशेषण, बहुवचन, स्त्रीलिंग, आम विशेष्य
उत्तर
(ख) परिमाणवाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिंग, आम विशेष्य

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 4 = 4)

(i) बिकल सब रोवहिं रानी, रूपु सिलु बलु तेजु बखानी, करही विलाप अनेक प्रकारा, परिहीं भूमि ताल बारहिं बारा। इन पंक्तियों में कौन सा रस है?
(क) वीर रस
(ख) रौद्र रस
(ग) अद्भुत रस
(घ) करुण रस
उत्तर
(घ) करुण रस

(ii) उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा। मानो हवा के ज़ोर से, सोता हुआ सागर जगा।। इन पंक्तियों में किस रस का स्थायी भाव है?
(क) हास
(ख) उत्साह
(ग) शोक
(घ) रौद्र
उत्तर
(घ) रौद्र

(iii) चींटी चढ़ी पहाड़ पे मरने के वास्ते, नीचे खड़े कपिल देव कैच लेने के वास्ते। इन पंक्तियों में कौन-सा रस है?
(क) करुण
(ख) हास्य
(ग) वीर
(घ) वात्सल्य
उत्तर
(ख) हास्य

(iv) शोक किस रस का स्थायी भाव है?
(क) वीभत्स
(ख) करुण
(ग) हास्य
(घ) वीर
उत्तर
(ख) करुण

(v) शृंगार रस का उदाहरण है
(क) जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फन करिबर कर हीना।।
अस मम जीवन बंधु बिन तोही। जौ जड दैव जियावह मोही।।

(ख) कहत नटत रीझत खिझत, मिलत खिलत लजियात,
भरे भौन में करत है, नैननु ही सौ बात

(ग) कनक भूधराकार सरीरा, समर भयंकर अतिबल बीरा।

(घ) मैया मोरी दाऊ बहुत खिजायो।
मोसों कहत मोल की लीन्हो तू जसुमति कब जायो।
उत्तर
(ख) कहत नटत रीझत खिझत, मिलत खिलत लजियात,
भरे भौन में करत है, नैननु ही सौ बात

पाठ्यपुस्तक (अंक 14)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
इन सबके ऊपर, मैं तो मुग्ध था उनके मधुर गान पर – जो सदा सर्वदा ही सुनने को मिलते। कबीर के सीधे-सादे पद, जो उनके कंठ से निकलकर सजीव हो उठते। आषाढ़ की रिमझिम है। समूचा गाँव खेतों में उतर पड़ा है। कहीं हल चल रहे हैं; कहीं रोपनी हो रही है। धान के पानी-भरे खेतों में बच्चे उछल रहे हैं। औरतें कलेवा लेकर मेड़ पर बैठी हैं। आसमान बादल से घिरा; धूप का नाम नहीं। ठंडी पुरवाई चल रही।

ऐसे ही समय आपके कानों में एक स्वर-तरंग झंकार-सी कर उठी। यह क्या है – यह कौन है। यह पूछना न पड़ेगा। बालगोबिन भगत समूचा शरीर कीचड़ में लिथड़े, अपने खेत में रोपनी कर रहे हैं। उनकी अंगुली एक-एक धान के पौधे को पंक्तिबद्ध, खेत में बिठा रही हैं।

उनका कंठ एक-एक शब्द को संगीत के जीने पर चढ़ाकर कुछ को ऊपर, स्वर्ग की ओर भेज रहा है और कुछ को इस पृथ्वी की मिट्टी पर खड़े लोगों के कानों की ओर! बच्चे खेलते हुए झूम उठते हैं; मेड़ पर खड़ी औरतों के होंठ काँप उठते हैं, वे गुनगुनाते लगती हैं; हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते हैं, रोपनी करनेवालों की अंगुलियाँ एक अजीब क्रम से चलने लगती हैं! बालगोबिन भगत का यह संगीत है या जादू!

(i) लेखक भगत के किस गुण पर मुग्ध था?
(क) मधुर गान पर
(ख) उनके भोलेपन पर
(ग) सरल हृदय पर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) मधुर गान पर

(ii) खेतों में बच्चे क्या कर रहे थे?
(क) बच्चे उछल रहे थे ।
(ख) गा और नाच रहे थे
(ग) खेत में धान रोप रहे थे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) बच्चे उछल रहे थे ।

(iii) बालगोबिन भगत के गीतों का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(क) बच्चे खेलते हुए झूम उठते हैं
(ख) मेड़ पर खड़ी औरतों के होंठ काँप उठते हैं
(ग) हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते हैं
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर
(घ) उपर्युक्त सभी

(iv) आषाढ़ में खेतों में क्या चल रहा था?
(क) आसमान में बादल घिर आए
(ख) धूप नहीं दिख रही
(ग) दोनों सही
(घ) दोनों गलत
उत्तर
(ग) दोनों सही

(v) हिंदी के किस महीने के नाम का उल्लेख उपर्युक्त गद्यांश में किया गया है?
(क) सावन
(ख) जेठ
(ग) आषाढ़
(घ) फागुन
उत्तर
(क) सावन

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 2 = 2 )

(i) लेखक सेकंड क्लास डिब्बे में क्यों बैठा?
(क) वह एकांत में कहानी लिखना चाहता था।
(ख) वह सेकंड क्लास का आनंद लेना चाहता था
(ग) वह नवाबी अंदाज़ दिखाना चाहता था।
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर
(क) वह एकांत में कहानी लिखना चाहता था।

(ii) बालगोबिन भगत किसके पद गाया करते थे?
(क) रहीम के
(ख) सूरदास के
(ग) कबीर के
(घ) तुलसीदास के
उत्तर
(ग) कबीर के

प्रश्न 9.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
कितना प्रामाणिक था उसका दुख ।
लड़की को दान में देते वक्त
जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो ।
लड़की अभी सयानी नहीं थी।
अभी इतनी भोली सरल थी

कि उसे सुख का आभास तो होता था
लेकिन दुख बाँचना नहीं आता था
पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की
कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की

(i) काव्यांश में किसके दुख को प्रामाणिक बताया गया है?
(क) बेटी के
(ख) माँ के
(ग) दोनों सही
(घ) दोनों गलत
उत्तर
(क) बेटी के

(ii) माँ को अपनी बेटी अंतिम पूँजी क्यों लग रही थी?
(क) वह उसको छोड़कर जा रही थी
(ख) उसकी सुख-दुख की साथी थी
(ग) उपर्युक्त दोनों कथन सत्य
(घ) माँ-बेटी का रिश्ता अटूट था ।
उत्तर
(ग) उपर्युक्त दोनों कथन सत्य

(iii) लड़की को अभी दुनियादारी की समझ नहीं है।’ यह भाव किस पंक्ति में व्यक्त होता है?
(क) वही उसकी अंतिम पूँजी थी
(ख) लड़की अभी सयानी नहीं थी
(ग) इतनी भोती सरल थी।
(घ) दुख बाँचना नहीं आता था
उत्तर
(ख) लड़की अभी सयानी नहीं थी

(iv) उपर्युक्त काव्यांश में किस रस की अनुभूति होती है?
(क) करुण रस
(ख) शांत रस
(ग) अद्भुत रस
(घ) वीर रस
उत्तर
(ख) शांत रस

(v) ‘पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की’ का भाव है
(क) वह बहुत सीधी थी।
(ख) उसे जीवन का कोई अनुभव नहीं था
(ग) उसका कभी दुख से सामना नहीं हुआ था
(घ) सभी कथन सही
उत्तर
(घ) सभी कथन सही

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।। (1 × 2 = 2)
(i) भ्रमरगीत में किसके माध्यम से उद्धव पर व्यंग्य किया गया है?
(क) पक्षियों के माध्यम से
(ख) भ्रमर अर्थात भँवरा के माध्यम से
(ग) बादलों के माध्यम से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ख) भ्रमर अर्थात भँवरा के माध्यम से

(ii) कविता में निराला जी किसके माध्यम से उत्साह लाना चाहते हैं?
(क) नदी के माध्यम से
(ख) हवा के माध्यम से
(ग) बादल के माध्यम से
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर
(ग) बादल के माध्यम से

खंड ‘ब’- वर्णनात्मक प्रश्न (अंक 40)

पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक (अंक 20)

प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2 x 4 = 8)
(क) बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?
(ख) ‘नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है’ आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
(घ) पान वाले का रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2 x 3 = 6)
(क) गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही?
(ख) ‘कन्यादान’ कविता में माँ ने बेटी को क्या-क्या सीख दी?
(ग) परशुराम के क्रोध का क्या कारण था?

प्रश्न 13.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए। (3 x 2 = 6)
(क) ‘माता का अँचल’ पाठ में माता-पिता का बच्चों के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
(ख) झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस प्रकार सम्मोहित कर रहा था?
(ग) ‘नई दिल्ली में सब था… सिर्फ नाक नहीं थी।’ इस कथन के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

लेखन (अंक 20)

प्रश्न 14.
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 80 से 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (5 x 1 = 5)
(क) कंप्यूटर- आज की आवश्यकता
संकेत-बिंदु-

  • कंप्यूटर एक विचित्र उपकरण
  • बढ़ता उपयोग
  • इंटरनेट और कंप्यूटर
  • प्रयोग की सावधानियाँ।

(ख) विज्ञापनों का प्रभाव
संकेत-बिंदु-

  • विज्ञापन का अर्थ
  • विज्ञापनों का बोलबाला
  • विज्ञापन के लाभ
  • हानियाँ
  • विज्ञापनों का

हमारी जेब पर प्रभाव।

(ग) आतंकवाद- एक विश्वव्यापी समस्या
संकेत-बिंदु-

  • आतंकवाद का अर्थ
  • वैश्विक समस्या
  • आतंकवाद का उद्देश्य
  • रूप
  • उदाहरण
  • निष्कर्ष।

प्रश्न 15.
अपने क्षेत्र में पेड़-पौधों की अनियंत्रित कटाई को रोकने के लिए जिलाधिकारी को लगभग 80-100 शब्दों में एक पत्र लिखिए। (5 x 1=5)
अथवा
वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम आने पर मित्र को 80-100 शब्दों में बधाई पत्र लिखिए।

प्रश्न 16.
सम्राट पेन की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रचार हेतु लगभग 25-50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए। (5 x 1 = 5)
अथवा
आपके मोहल्ले में एक नया पब्लिक स्कूल खुला है। उसके लिए 20-25 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए।

प्रश्न 17.
कोरोना वैश्विक महामारी से बचाव हेतु मित्र को संदेश 30-40 शब्दों में लिखिए। (5 x 1 = 5)
अथवा
मुख्यमंत्री की ओर से गणतंत्र दिवस पर शुभकामना संदेश 30-40 शब्दों में लिखिए।

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 3 with Solutions

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CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 3 with Solutions

निर्धारित समय : 3 घंटे
अधिकतम अंक : 80

सामान्य निर्देश:
(क) इस प्रश्न-पत्र के दो खंड हैं- ‘अ’ और ‘ब’।
(ख) खंड ‘अ’ में कुल 10 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी प्रश्नों में उपप्रश्न दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(ग) खंड ‘ब’ में कुल 7 वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

खंड ‘अ’- वस्तुपरक प्रश्न ( अंक 40)

अपठित गद्यांश (अंक 5)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
लोकतंत्र के मूलभूत तत्व को समझा नहीं गया है और इसलिए लोग समझते हैं कि सब कुछ सरकार कर देगी, हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। लोगों में अपनी पहल से ज़िम्मेदारी उठाने और निभाने का संस्कार विकसित नहीं हो पाया है। फलस्वरूप देश की विशाल मानव-शक्ति अभी खर्राटे लेती पड़ी है और देश की पूँजी उपयोगी बनाने के बदले आज बोझरूप बन बैठी है। लेकिन उसे नींद से झकझोर कर जागृत करना है। किसी भी देश को महान बनाते हैं, उसमें रहने वाले लोग।

लेकिन अभी हमारे देश के नागरिक अपनी ज़िम्मेदारी से बचते रहे हैं। चाहे सड़क पर चलने की बात हो अथवा साफ़-सफ़ाई की बातें हों, जहाँ-तहाँ हम लोगों को गंदगी फैलाते और बेतरतीब ढंग से वाहन चलाते देख सकते हैं। फिर चाहते हैं कि सब कुछ सरकार ठीक कर दे। सरकार ने बहुत सारे कार्य किए हैं, इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। वैज्ञानिक प्रयोगशालाएँ खोली हैं, विशाल बाँध बनवाए हैं, फौलाद के कारखाने खोले हैं आदि-आदि बहुत सारे काम सरकार के द्वारा हुए हैं। पर अभी करोड़ों लोगों को कार्य में प्रेरित नहीं किया जा सका है। वास्तव में होना तो यह चाहिए कि लोग अपनी सूझ-बूझ के साथ अपनी आंतरिक शक्ति के बल पर खड़े हों

और अपने पास जो कुछ साधन-सामग्री हो, उसे लेकर कुछ करना शुरू कर दें। और फिर सरकार उसमें आवश्यक मदद करे। उदाहरण के लिए, गाँव वाले बड़ी-बड़ी पंचवर्षीय योजनाएँ नहीं समझ सकेंगे, पर वे लोग यह बात ज़रूर समझ सकेंगे कि अपने गाँव में कहाँ कुआँ चाहिए, कहाँ सिंचाई की ज़रूरत है, कहाँ पुल की आवश्यकता है। बाहर के लोग इन सब बातों से अनभिज्ञ होते हैं।

(i) लोकतंत्र का मूलभूत तत्व है
(क) कर्तव्य-पालन
(ख) लोगों का राज्य
(ग) चुनाव
(घ) जनमत
उत्तर
(क) कर्तव्य-पालन

(ii) किसी देश की महानता निर्भर करती है
(क) वहाँ की सरकार पर
(ख) वहाँ के निवासियों पर
(ग) वहाँ के इतिहास पर
(घ) वहाँ की पूँजी पर
उत्तर
(ख) वहाँ के निवासियों पर

(iii) सरकार के कामों के बारे में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) वैज्ञानिक प्रयोगशालाएँ बनवाई हैं।
(ख) विशाल बाँध बनवाए हैं।
(ग) वाहन चालकों को सुधारा है।
(ग) फौलाद के कारखानो खोले हैं।
उत्तर
(ग) फौलाद के कारखानो खोले हैं।

(iv) सरकारी व्यवस्था में किस कमी की ओर लेखक ने संकेत किया है?
(क) गाँव से जुड़ी समस्याओं के निदान में ग्रामीणों की भूमिका को नकारना
(ख) योजनाएँ ठीक से न बनाना
(ग) आधुनिक जानकारी का अभाव
(घ) ज़मीन से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान न देना
उत्तर
(क) गाँव से जुड़ी समस्याओं के निदान में ग्रामीणों की भूमिका को नकारना

(v) ‘झकझोरकर जागृत करना’ का भाव गद्यांश के अनुसार होगा
(क) नींद से जगाना
(ख) सोने न देना
(ग) ज़िम्मेदारी निभाना
(घ) ज़िम्मेदारियों के प्रति सचेत करना
उत्तर
(घ) ज़िम्मेदारियों के प्रति सचेत करना

अथवा

हरियाणा के पुरात्तव विभाग द्वारा किए गए अब तक के शोध और खुदाई के अनुसार लगभग 5500 हेक्टेयर में फैली यह राजधानी ईसा से लगभग 3300 वर्ष पूर्व मौजूद थी। इन प्रमाणों के आधार पर यह तो तय हो ही गया है कि राखीगढ़ी की स्थापना उससे भी सैकड़ों वर्ष पूर्व हो चुकी थी। अब तक यही माना जाता रहा है कि इस समय पाकिस्तान में स्थित हड़प्पा और मोहनजोदड़ो ही सिंधुकालीन सभ्यता के मुख्य नगर थे। राखीगढ़ी गाँव में खुदाई और शोध का काम रुक-रुककर चल रहा है।

हिसार का यह गाँव दिल्ली से मात्र एक सौ पचास किलोमीटर की दूरी पर है। पहली बार यहाँ 1963 में खुदाई हुई थी और तब इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा नगर माना गया। उस समय के शोधार्थियों ने सप्रमाण घोषणाएं की थीं कि यहाँ दबा नगर, कभी मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से भी बड़ा रहा होगा। अब सभी शोध विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि राखीगढ़ी, भारत-पाकिस्तान और अफगानिस्तान का आकार

और आबादी की दृष्टि से सबसे बड़ा शहर था। प्राप्त विवरणों के अनुसार समुचित रूप से नियोजित इस शहर की सभी सड़कें 1.92 मीटर चौड़ी थीं। यहाँ चौड़ाई कालीबंगन की सड़कों से भी ज्यादा है। एक ऐसा बर्तन भी मिला है, जो सोने और चाँदी की परतों से ढका है। इसी स्थल पर एक ‘फाउंड्री’ के भी चिह्न मिले हैं, जहाँ संभवतः सोना ढाला जाता होगा। इसके अलावा टेराकोटा से बनी असंख्य प्रतिमाएँ, ताँबे के बर्तन और कुछ प्रतिमाएँ और एक भट्ठी के अवशेष भी मिले हैं।

मई 2012 में ‘ग्लोबल हैरिटेज फंड’ ने इसे एशिया के दस ऐसे विरासत-स्थलों की सूची में शामिल किया है, जिनके नष्ट हो जाने का खतरा है। राखीगढ़ी का पुरातात्विक महत्व विशिष्ट है। इस समय यह क्षेत्र पूरे विश्व के पुरातत्व विशेषज्ञों की दिलचस्पी और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। यहाँ बहुत से काम बकाया हैं; जो अवशेष मिले हैं, उनका समुचित अध्ययन अभी शेष है। उत्खनन का काम अब भी अधूरा है।

(i) अब सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा नगर किसे मानने की संभावनाएँ हैं?
(क) मोहनजोदड़ो
(ख) राखीगढ़ी
(ग) हड़प्पा
(घ) कालीबंगा
उत्तर
(क) मोहनजोदड़ो

(ii) चौड़ी सड़कों से स्पष्ट होता है कि
(क) यातायात के साधन थे ।
(ख) अधिक आबादी थी
(ग) शहर नियोजित था
(घ) बड़ा शहर था
उत्तर
(ग) शहर नियोजित था

(iii) इसे एशिया के ‘विरासत स्थलों’ में स्थान मिला, क्योंकि
(क) नष्ट हो जाने का खतरा है।
(ख) सबसे विकसित सभ्यता है।
(ग) इतिहास में इसका नाम सर्वोपरि है।
(घ) यहाँ विकास की तीन परतें मिली हैं।
उत्तर
(क) नष्ट हो जाने का खतरा है।

(iv) पुरातत्व विशेषज्ञ राखीगढ़ी में विशेष रुचि ले रहे हैं, क्योंकि
(क) काफी प्राचीन और बड़ी सभ्यता हो सकती है।
(ख) इसका समुचित अध्ययन शेष है।
(ग) उत्खनन का कार्य अभी अधूरा है।
(घ) इसके बारे में अभी-अभी पता लगा है।
उत्तर
(ग) उत्खनन का कार्य अभी अधूरा है।

(v) उपयुक्त शीर्षक होगा
(क) राखीगढ़ी : एक सभ्यता की संभावना
(ख) सिंधु घाटी सभ्यता
(ग) विलुप्त सरस्वती की तलाश
(घ) एक विस्तृत शहर राखीगढ़ी
उत्तर
(क) राखीगढ़ी : एक सभ्यता की संभावना

अपठित पद्यांश (अंक 5)

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
अंधकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुख का नीरव रोदन। वह स्वाधीन किसान रहा, अभिमान भरा आँखों में इसका छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश वह खिसका। लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखल वह अब जिनसे हँसती थी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा। बिना दवा-दर्पन के घरनी स्वर्ग चली-आँखें आतीं भर देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर।

(i) कवि का मन जिन आँखों से डरता है, वे कैसी हैं?
(क) डरावनी
(ख) अंधकार-सी काली
(ग) अंधकार की गुहा-सी
(घ) अंधकार-सी दारुण
उत्तर
(ग) अंधकार की गुहा-सी

(ii) जिन आँखों का वर्णन कवि ने किया है, वे किसकी आँखें हैं?
(क) किसान की
(ख) अंधकार की
(ग) नीरव रोदन की
(घ) स्वाधीन भारत की
उत्तर
(क) किसान की

(iii) किसान की आँखों में अब भी क्या लहराता है?
(क) दैन्य-दुख का दारुण रोदन
(ख) अपने खेत जिनसे वह बेदखल किया गया
(ग) स्वाधीनता का अभिमान
(घ) वह संसार जो कगार सदृश खिसक गया
उत्तर
(क) दैन्य-दुख का दारुण रोदन

(iv) इस पद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(क) किसान की पीड़ा
(ख) दारुण दुख
(ग) वे आँखें
(घ) जीवन का अंधकार
उत्तर
(क) किसान की पीड़ा

(v) किसान का बेटा कहाँ गया?
(क) तारा बन गया
(ख) देख-रेख के बिना मर गया
(ग) बिना दवा-दर्पन के स्वर्ग सिधारा
(घ) कारकुन की लाठियों से मारा गया
उत्तर
(क) तारा बन गया

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 3 with Solutions 1

(i) कवि को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है
(क) मंजिल से
(ख) मार्ग-बाधाओं से
(ग) हवाओ से
(घ) तूफ़ानों से
उत्तर
(घ) तूफ़ानों से

(ii) यदि मार्ग में बाधाएँ नहीं आतीं तो
(क) गति संभव नही होती
(ख) निर्माण संभव नहीं होता
(ग) प्रगति संभव नहीं होती
(घ) मार्ग आसान नहीं होता
उत्तर
(क) गति संभव नही होती

(iii) निर्माण की संभावना वहीं होती है जहाँ
(क) तूफ़ान न आए
(ख) अवरोध न आए
(ग) बस्ती न हो
(घ) विनाश हो
उत्तर
(घ) विनाश हो

(iv) कवि धरती पर क्या बसाना चाहता है?
(क) अपना घर
(ख) स्वर्ग
(ग) मंज़िलें
(घ) रास्ते
उत्तर
(ख) स्वर्ग

(v) कवि दुनिया से क्या प्रार्थना कर रहा है?
(क) दुनिया उसके रास्तों पर फूल बिछा दे
(ख) दुनिया उसकी बस्ती को वीरान बना दे
(ग) दुनिया उसकी राह में तूफान उठा दे ।
(घ) दुनिया उसके मार्ग को आसान न बनाए
उत्तर
(ग) दुनिया उसकी राह में तूफान उठा दे ।

व्यावहारिक व्याकरण (अंक 16)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 4 = 4)
(i) ‘आगे बढ़िए और पुरस्कार प्राप्त कीजिए।’ किस प्रकार का वाक्य है?
(क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्र वाक्य
(घ) संकेतवाचक वाक्य
उत्तर
(ख) संयुक्त वाक्य

(ii) मिश्रित वाक्य है
(क) मैंने उससे सेने का कारण पूछा।
(ख) आज रविवार का अवकाश है।
(ग) जब पिता जी ने पैसे दिए तब हम बाज़ार गए।
(घ) मैं बाहर आया और बच्चे मिलने लगे।
उत्तर
(ग) जब पिता जी ने पैसे दिए तब हम बाज़ार गए।

(iii) जहाँ मैं रहती हूँ, वहीं मेट्रो स्टेशन है। रेखांकित उपवाक्य है
(क) संज्ञा उपवाक्य
(ख) सर्वनाम उपवाक्य
(ग) विशेषण उपवाक्य
(घ) क्रियाविशेषण उपवाक्य
उत्तर
(घ) क्रियाविशेषण उपवाक्य

(iv) ‘लाल रंग वाली शर्ट पहने उस लड़के को बुलाओ।’ इसका मिश्र वाक्य है
(क) लाल रंग वाली शर्ट को डाले उस लड़के को बुलाओ।
(ख) जिसने लाल रंग की शर्ट पहनी है, उस लड़के को बुलाओ।
(ग) उस लड़के को बुलाओ जो शर्ट पहले हुए है लाल रंग की।
(घ) कोई नही।
उत्तर
(ख) जिसने लाल रंग की शर्ट पहनी है, उस लड़के को बुलाओ।

(v) ‘जो धन मिला था, वह चोरी हो गया।’ वाक्य में प्रधान उपवाक्य है
(क) जो धन मिला था
(ख) वह चोरी हो गया।
(ग) चोरी हो गया
(घ) धन मिला था।
उत्तर
(ख) वह चोरी हो गया।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 4 = 4)

(i) ‘कृष्ण द्वारा बंसी बजाई जा रही है।’ वाच्य है
(क) कर्तृवाच्य
(ख) कर्मवाच्य
(ग) भाववाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ख) कर्मवाच्य

(ii) भाववाच्य है
(क) माली ने फूल तोड़ा
(ख) आइए; खेला जाए।
(ग) अनुराधा के द्वारा पौधे लगाए गए।
(घ) राम ने लीची खाई।
उत्तर
(ख) आइए; खेला जाए।

(iii) कर्मवाच्य है
(क) मेरे भाई ने पतंग उड़ाई।
(ख) मेरे भाई द्वारा पतंग उड़ाई गई।
(ग) उससे सोया नहीं जाता।
(घ) मैं प्रतिदिन व्यायाम करता हूँ।
उत्तर
(ख) मेरे भाई द्वारा पतंग उड़ाई गई।

(iv) ‘मोहन से हँसा नहीं जाता।’ वाक्य है(
क) कर्तृवाक्य
(ख) भाववाक्य
(ग) दोनों
(घ) कर्मवाक्य
उत्तर
(ख) भाववाक्य

(v) ‘राधा के द्वारा गाना गाया गया।’ वाक्य है
(क) कर्तृवाक्य
(ख) भाववाक्य
(ग) कर्मवाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ग) कर्मवाक्य

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 4 = 4)
(i) दौड़कर आइए और बगीचे से कुछ फल ले जाइए। रेखांकित का पद-परिचय है
(क) पूर्वकालिक क्रिया, रीतिवाचक क्रियाविशेषण
(ख) कालवाचक क्रियाविशेषण, सकर्मक किया।
(ग) अकर्मक क्रिया, रीतिवाचक क्रियाविशेषण, कर्म कारक
(घ) संयुक्त क्रिया, अकर्मक क्रिया, एकवचन
उत्तर
(क) पूर्वकालिक क्रिया, रीतिवाचक क्रियाविशेषण

(ii) चोर उधर भागा है। इस वाक्य में रेखांकित का पद-परिचय है
(क) रीतिवाचक क्रियाविशेषाण, भागना क्रिया का विशेषण
(ख) कालवाचक क्रियाविशेषाण, भागना क्रिया का विशेषण
(ग) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण, भागना क्रिया का विशेषण
(घ) स्थानवाचक क्रियाविशेषण, भागना क्रिया का विशेषण
उत्तर
(घ) स्थानवाचक क्रियाविशेषण, भागना क्रिया का विशेषण

(iii) वाह! तुमने तो रंग ही जमा दिया। रेखांकित का पद-परिचय है
(क) संबंधबोधक अव्यय, हर्ष के भाव की अभिव्यक्ति
(ख) समुच्चबोधक अव्यय, हर्ष के भाव की अभिव्यक्ति
(ग) विस्मयादिबोधक अव्यय, हर्ष के भाव की अभिव्यक्ति
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ग) विस्मयादिबोधक अव्यय, हर्ष के भाव की अभिव्यक्ति

(iv) मैं लाल रंग की कमीज पहनता हूँ। रेखांकित का पद-परिचय है
(क) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक
(ख) निजवाचक सर्वनाम, एकवचन, स्त्रीलिंग, कर्म कारक
(ग) निश्चयवाचक सर्वनाम, बहुवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक

(v) छात्र पत्र लिख रहा है। रेखांकित का पद-परिचय है
(क) जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक
(ख) जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक
(ग) सकर्मक क्रिया, व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिग
(घ) व्यक्तिवाचक संज्ञा, बहुवचन, कर्ता कारक
उत्तर
(क) जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 4 = 4)
(i) संचारी भाव क्या है?
(क) पात्रों या वस्तुओं के कारण उत्पन्न भाव
(ख) स्थायी भाव जाग्रत करने वाला भाव
(ग) मन में निरंतर संचारित होने वाले भाव
(घ) आलंबन द्वारा जाग्रत भाव
उत्तर
(ग) मन में निरंतर संचारित होने वाले भाव

(ii) शांत रस का स्थायी भाव है
(क) रौद्र
(ख) हास
(ग) निर्वेद
(घ) जुगुप्सा
उत्तर
(ग) निर्वेद

(iii) किस रस को रस राज कहा जाता है?
(क) शांत रस
(ख) करुण रस
(ग) शृंगार रस
(घ) हास्य रस
उत्तर
(ग) शृंगार रस

(iv) संकट में वीर घबराते नहीं, आपदाएँ देख छिप जाते नहीं। लग गए जिस काम में पूरा किया, काम करके व्यर्थ पछताते नहीं। पक्तियों में निहित रस है
(क) हास्य रस
(ख) वीर रस
(ग) शृंगार रस
(घ) अद्भुत रस
उत्तर
(ख) वीर रस

(v) निम्नलिखित पंक्तियों में रस है
नाक पकौड़ा-सी लगे, रंग बिरंगे गाल।
सूरत है लंगूर-सी, बंदर जैसी चाल।
(क) हास्य रस
(ख) वीर रस
(ग) शृंगार रस
(घ) करुण रस
उत्तर
(क) हास्य रस

पाठ्यपुस्तक (अंक 14)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5)
उनकी चिंता हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखने की थी। हर मंच में इसकी तकलीफ़ बयान करते, इसके लिए अकाट्य तर्क देते। बस इसी एक सवाल पर उन्हें झुंझलाते देखा है और हिंदी वालों द्वारा हिंदी की उपेक्षा पर दुख करते उन्हें पाया है। घर-परिवार के बारे में, निजी दुख तकलीफ़ के बारे में पूछना उनका स्वभाव था और बड़े से बड़े दुख में उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे दो शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर देता था जो किसी गहरी तपस्या गार रस से जनमती है। ‘हर मौत दिखाती है जीवन को नई राह।’ मुझे अपनी पत्नी और पुत्र की मृत्यु याद आ रही है और फ़ादर के शब्दों में झरती विरल शांति भी।

(i) फ़ादर को किस भाषा से प्रेम था?
(क) हिंदी भाषा से
(ख) अपनी मातृभाषा से
(ग) अंग्रजी भाषा से
(ग) फ्रेंच भाषा से
उत्तर
(क) हिंदी भाषा से

(ii) फ़ादर की झुंझलाहट किस कारण थी?
(क) लोगों के सवालों के कारण
(ख) घर-परिवार की दुख-तकलीफ़ों के कारण
(ग) हिंदीभाषियों द्वारा खुद ही हिंदी की उपेक्षित स्थिति के कारण
(घ) हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा न दिलवा पाने के कारण
उत्तर
(ग) हिंदीभाषियों द्वारा खुद ही हिंदी की उपेक्षित स्थिति के कारण

(iii) ‘हर मौत दिखाती है जीवन को नई राह’ का आशय है
(क) मौत के बाद ही मुक्ति है ।
(ख) मौत पुनर्जन्म के लिए राह बनाती है
(ग) मौत शाश्वत है, सत्य है, अतः मौत पर दुखी न हों
(घ) (क) एवं (ख) दोनों विकल्प सही
उत्तर
(ग) मौत शाश्वत है, सत्य है, अतः मौत पर दुखी न हों

(iv) सांत्वना भरे एक शब्द सुनने वाले पर क्या प्रभाव डालते थे?
(क) जादू-सा चमत्कारी प्रभाव
(ख) आशा से भर देते थे
(ग) असीम शांति का अनुभव कराते थे
(घ) सभी विकल्प सही
उत्तर
(घ) सभी विकल्प सही

(v) उपेक्षा का विलोम है
(क) सापेक्ष
(ख) अपेक्षा
(ग) परोक्ष
(घ) प्रत्यक्ष
उत्तर
(ख) अपेक्षा

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 2 = 2)
(i) भगत जी का बेटा कैसा था?
(क) समझदार
(ख) सुस्त और बोदा
(ग) बुद्धिमान
(घ) चालाक
उत्तर
(क) समझदार

(ii) लेखक के अलावा कोच में कितने व्यक्ति थे?
(क) एक
(ख) तीन
(ग) दो
(घ) चार
उत्तर
(क) एक

प्रश्न 9.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 5 = 5 )
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 3 with Solutions 2

(i) किसके साँस लेने से हर घर खुशबू से भर उठता है?
(क) शरद के
(ख) वसंत के
(ग) ग्रीष्म के
(घ) वर्षा के
उत्तर
(ख) वसंत के

(ii) वसंत आसमान में उड़ने के लिए क्या करता है?
(क) लंबी साँसें लेता है।
(ख) अपने पंख फड़फड़ाता है
(ग) आँखें झपकाता है
(घ) सभी गलत
उत्तर
(ख) अपने पंख फड़फड़ाता है

(iii) फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?
(क) पेड़ों में नए पत्ते निकलते हैं
(ख) नाना प्रकार के फूल खिलते हैं।
(ग) हवा में फूलों की मादक सुगंध भरी हुई होती है
(घ) सभी विकल्प सही
उत्तर
(घ) सभी विकल्प सही

(iv) कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों हट नहीं रही है?
(क) फागुन अच्छा लगता है
(ख) फागुन की सुंदरता गजब की है
(ग) फागुन हिंदी का माह है
(घ) सभी गलत
उत्तर
(ख) फागुन की सुंदरता गजब की है

(v) कविता के कवि हैं
(क) सूरदास
(ख) ऋतुराज
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ङ्के
(घ) तुलसीदास
उत्तर
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ङ्के

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए। (1 x 2 = 2)
(i) गोपियों ने योग संदेश किसके लिए उपयोगी बताया है?
(क) जिनका मन चकरी के समान है
(ख) जिनका मन शांत है
(ग) जो कृष्ण के प्रेम में डूबा है।
(घ) कोई नहीं
उत्तर
(क) जिनका मन चकरी के समान है

(ii) परशुराम पृथ्वी जीतकर किसे दान कर चुके हैं?
(क) माता-पिता को
(ख) गुरु को
(ग) राजाओं को
(घ) ब्राह्मणों को
उत्तर
(घ) ब्राह्मणों को

खंड ‘ब’- वर्णनात्मक प्रश्न (अंक 40)

पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक (अंक 20)

प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2 x 4 = 8)

(क) बालगोबिन भगत के गीतों का खेतों में काम करते हुए और आते-जाते नर-नारियों पर क्या प्रभाव पड़ता था?
(ख) ‘लखनवी अंदाज़’ रचना के नवाब साहब की सनक को आप कहाँ तक उचित ठहराते हैं? क्यों?
(ग) फादर बुल्के ने भारत में रहते हुए हिंदी के उत्थान के लिए क्या कार्य किए?
(घ) फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?
उत्तर
(क) बालगोबिन भगत का संगीत हर आयु वर्ग के लोगों पर समान रूप से असर करता था। उनके मधुर गान को सुनकर बच्चे झूम उठते थे, मेंड़ पर खड़ी औरतों के होंठ गुनगुना उठते थे, हलवाहों के पैर ताल से उठने से लगते थे और रोपनी करने वालों की अँगुलियाँ क्रम से चलने लगती थीं।

(ख) ‘लखनवी अंदाज़’ रचना में नवाब साहब की सनक को किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि झूठी आन-बान का बनावटी जीवन जीना उचित नहीं है। ऐसा करके बनावटी रईसी तो दिखाई जा सकती है, पर इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है, बल्कि इससे खुद को तकलीफ़ हो होगी।

(ग) फादर बुल्के ने 47 वर्ष भारत में रहकर निम्नलिखित कार्य किए

  • प्रयाग विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में रहकर 1950 ई० में शोध-प्रबंध-रामकथा : उत्पति और विकास पूर्ण किया।
  • ‘ब्लू बर्ड’ का ‘नीलपंछी’ नाम से हिंदी रूपांतर किया।
  • अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश तैयार किया।
  • बाइबिल का हिंदी में अनुवाद किया।
  • सेंट जेवियर्स कॉलेज राँची में हिंदी तथा संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष रहे।

(घ) देवदार का वृक्ष आकार में लंबा-चौड़ा होता है तथा छायादार भी। फ़ादर बुल्के का व्यक्तित्व भी कुछ ऐसा ही था। जिस प्रकार देवदार का वृक्ष वृहदाकार होने के कारण लोगों को छाया देकर शीतलता प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार फादर बुल्के भी अपने शरण में आए लोगों को आश्रय देते थे तथा दुख के समय में सांत्वना के वचनों द्वारा उनको शीतलता प्रदान करते थे।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2 x 3 = 6)
(क) ‘अट नहीं रही है’ कविता में ‘उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो’ के आलोक में बताइए कि फागुन लोगों के मन को किस तरह प्रभावित करता है?
(ख) परशुराम के प्रति लक्ष्मण के व्यवहार पर अपने विचार लिखिए।
(ग) माँ ने बेटी को सचेत करना क्यों ज़रूरी समझा?
उत्तर
(क) फागुन में प्रकृति में हर तरफ़ हरियाली तथा फूलों का सौंदर्य दिखाई पड़ता है। इसका प्रभाव मानव मन पर पड़े बिना नहीं रहता। इस समय मनुष्य प्रसन्न रहता है तथा उसका मन आकाश में उड़ने को करता है। वह इसकी कल्पनाओं में खो जाता है। उसे ऐसा लगता है मानो वह आकाश में उड़ रहा हो।

(ख) परशुराम को ब्राह्मण जानकर लक्ष्मण ने उनके प्रति अपने व्यवहार को काफी हद तक नियंत्रित रखा। उन्होंने उनके क्रोध को शांत करने के लिए उनको वीरव्रती, धैर्यवान तथा अक्षोभा कहा। लेकिन उनके द्वारा अपनी खुद की वीरता का गुणगान करने पर उनको रणक्षेत्र में युद्ध कर अपनी योग्यता प्रदर्शित करने को भी कहा। इस प्रकार लक्ष्मण का परशुराम के प्रति व्यवहार मिला-जुला रहा।

(ग) बेटी अभी सयानी नहीं थी, उसकी उम्र भी कम थी और वह समाज में व्याप्त बुराइयों से अनजान थी। माँ यह नहीं चाहती थी कि उसके साथ जो अन्याय हुए, वे सब उसकी बेटी को भी सहने पड़ें। इसलिए माँ ने बेटी को सचेत करना ज़रूरी समझा।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए।

(क) ‘बच्चे रोना-धोना, पीड़ा, आपसी झगड़े ज़्यादा देर तक अपने साथ नहीं रख सकते हैं।’ ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर इस कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
(ख) जॉर्ज पंचम की लाट की टूटी नाक लगाने के क्रम में पुरातत्व विभाग की फाइलों की छानबीन की ज़रूरत क्यों आ गई?
(ग) यात्राएँ विभिन्न संस्कृतियों से परिचित होने का अच्छा माध्यम है। ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ यात्रा वृत्तांत के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।
उत्तर
(क) बच्चे रोना-धोना, पीड़ा, आपसी झगड़े ज़्यादा देर तक नहीं रख पाते हैं। उनके बीच इनकी अनुभूति जितनी जल्दी होती है, उतनी ही जल्दी समाप्त भी हो जाती है। इसका कारण उनके मन का सच्चा तथा भोला होना है। इसी कारण वे बड़ों से भिन्न होते हैं। इस कथन को पुष्टि के प्रमाण ‘माता का अँचल’ पाठ में अनेक जगहों पर है; जैसे- खेल के साथियों को देखकर बालक भोलानाथ का सिसकना भूलकर बाबू जी को गोद में उतर जाना तथा खेलों में लग जाना।

(ख) जॉर्ज पंचम की लाट की टूटी नाक लगाने के क्रम में एक मूर्तिकार को बुलाया गया, जिसे लाट की नाक लगाने के लिए यह जानकारी चाहिए थी कि वह लाट कब और कहाँ बनी थी तथा उसका पत्थर कहाँ से लाया गया था? इस प्रश्न का उत्तर किसी अधिकारी के पास नहीं था. इसलिए इस प्रश्न का उत्तर पता करने की जिम्मेदारी एक क्लर्क को दी गई, जिसने पुरातत्व विभाग की फाइलों की छानबीन की, मगर कुछ भी पता नहीं चला। क्योंकि फाइलें सब कुछ हजम कर गई थीं।

(ग) यात्राएँ विभिन्न संस्कृतियों से परिचित होने का अच्छा माध्यम हैं। इस बात की पुष्टि ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ यात्रा वृत्तांत से होती है। इसमें लेखिका अपनी हिमालीय प्रदेशों की यात्रा के दौरान सिक्कम के विभिन्न दर्शनीय स्थानों पर गई हैं, जहाँ उन्हें विभिन्न संस्कृतियों, भाषा, रहन-सहन तथा अन्य चीज़ों को नज़दीक से देखने का मौका मिलता है। इनको जानने-समझने का उन्हें तभी मौका मिला जब वे यात्रा करके गईं, अन्यथा उन्हें इसका मौका नहीं मिलता। यह बात इसकी पुष्टि करता है कि संस्कृतियों को जानने में यात्राओं का बहुत बड़ा योगदान है।

लेखन (अंक 20)

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 80-100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (1 x 5 = 5)
(क) व्यायाम का महत्व
संकेत-बिंदु-

  • आवश्यकता
  • लाभ
  • चयन।

(ख) मीठी वाणी
संकेत-बिंदु-

  • मधुर वाणी : एक वरदान
  • प्रभाव और प्रयोग
  • जीवन में महत्व।

(ग) ग्लोबल वार्मिंग
संकेत-बिंदु-

  • क्या है?
  • प्रभाव
  • इससे कैसे बचें
  • निष्कर्ष।

उत्तर
(क) कहावत है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास होता है। स्वस्थ मन में अच्छे विचार आते हैं। अच्छी आदतें अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं। जैसे सुबह टहलने से शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है। इसलिए सुबह में टहलना चाहिए तथा थोड़ा व्यायाम भी करना चाहिए। खाना खाने के बाद व्यायाम नहीं करना चाहिए। छोटे बच्चों को थोड़ा टहलना चाहिए। कबड्डी तथा इस तरह के विभिन्न खेल खेलने चाहिए।

स्वस्थ रहने के लिए नियम के अनुसार चलना चाहिए। समय पर खाना-पीना चाहिए। समय पर सभी काम करके व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है। व्यायाम करने से धमनियाँ सही काम करती हैं और शरीर के सभी अंग ठीक रहने हैं तथा सही काम करते हैं। सुबह पार्क में टहलने से आँख की ज्योति बढ़ती है।

इस प्रकार हमें स्वस्थ और खुश रहना चाहिए। व्यायाम के अनेक प्रकार हैं। अपने शरीर की आवश्यकता के अनुसार हमें ऐसा व्यायाम चुनना चाहिए जो हमारी शारीरिक आवश्यकता पूर्ण करने के अलावा हमारी पहुँच में हो और साथ ही यदि वह हमारे लिए रुचिकर भी हो, तो सोने पे सुहागा होगा।

(ख) मनुष्य के जीवन में उसके द्वारा बोली गई वाणी ही उसे प्रिय या अप्रिय बनाती है। मधुर वाणी बोलने वाला व्यक्ति सभी को प्रिय लगता है और वहीं दूसरी तरफ किसी मनुष्य में अपार गुण होते हुए भी यदि उसकी वाणी में मधुरता नहीं है तो वह किसी को भी पसंद नहीं आता।

इसे हम कौआ और कोयल के उदाहरण द्वारा अच्छी तरह से समझ सकते हैं। क्योंकि दोनों का स्वरूप देखने में तो एक समान ही है, परंतु वाणी से दोनों के गुणों की पहचान हो जाती है। कोयल सबको प्रिय लगती है क्योंकि उसकी वाणी में मधुरता होती है और कौआ सबको अप्रिय लगता है क्योंकि उसकी वाणी में कर्कशता होती है।

कौए की कर्कश आवाज़ और कोयल की मधुर वाणी को सुनकर हम दोनों के गुण जान जाते हैं। मानव अपनी मधुर वाणी से शत्रु को भी अपना मित्र बना लेता है, मधुर वचनों को बोलने से बोलने वाले तथा सुनने वाले दोनों को ही शांति एवं आनंद की अनुभूति होती है। भाई-चारे का वातावरण बना रहता है तथा मानव समाज में प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्राप्त कर पाता है। हमारे भारतवर्ष में विद्वानों और कवियों ने भी मधुर वचन की औषधि की संज्ञा दी है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को अहंकार और क्रोध का त्याग करके मीठी वाणी बोलकर सबका मन हरना चाहिए।

(ग) ग्लोबल वार्मिंग शब्द पृथ्वी के तापमान में होने वाली वृद्धि को दर्शाता है। यह एक ऐसी समस्या है, जिस पर काबू नहीं किया गया तो यह पूरी पृथ्वी को ही नष्ट कर देगी। ग्लोबल वार्मिंग पूरे विश्व में एक मुख्य वायुमंडलीय मुद्दा बन गया है। सूरज की रोशनी को लगातार ग्रहण करते हुए हमारी पृथ्वी दिनों-दिन गर्म होती जा रही है, जिससे वातावरण में कॉर्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है।

इसके लगातार बढ़ते दुष्प्रभावों से इनसानों को बड़ी समस्याएं हो रही हैं। सीएफसी-11 और सीएफसी-12 जैसी ग्रीन हाउस गैसों ने सूरज के थर्मल विकिरण को अवशोषित करके पृथ्वी के वातावरण को गर्म बना दिया। ये गैसें सूर्य की किरणों को वायुमंडल में प्रवेश तो करने देती हैं, लेकिन उससे होने वाली विकिरण को वायुमंडल से बाहर नहीं जाने देती हैं।

इसी को ग्रीनहाउस प्रभाव कहा जाता है, जो पूरे विश्व में तापमान में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है। तापमान में वृद्धि से वर्षा-चक्र, पारिस्थितिक संतुलन, मौसम का चक्र आदि प्रभावित होते हैं। यह वनस्पति और कृषि को भी प्रभावित करता है, जिसके कारण हमें दुनिया भर में बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियों का सामाना करना पड़ता है। तापमान में वृद्धि और ग्लेशियरों के पिघलने के कारण बर्फबारी जैसी घटनाओं में भी कमी आई है। तापमान में वृद्धि से आद्रता में भी वृद्धि हुई है क्योंकि तापमान में वृद्धि से वाष्पीकरण की दर में वृद्धि हुई है।

स्थानीय सरकारों को चाहिए कि वे लोगों के बीच जागरूकता पैदा करें तथा ऐसे उपकरणों और वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहित करें जो पर्यावरण के अनुकूल हों। पेपर, प्लास्टिक और अन्य सामग्रियों की रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करना चाहिए। ऐसे प्रयासों को लोगों द्वारा जमीनी स्तर पर करना अत्यंत आवश्यक है, तभी हम प्रभावी तरीके से इस भयानक समस्या का मुकाबला कर सकते हैं। इससे मुकाबला करने के हम सभी को एक साथ आगे आना चाहिए और धरती पर जीवन को बचाने के लिए इस समस्या का समाधान करना चाहिए।

प्रश्न 15.
सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ते हुए धूम्रपान तथा उसके कारण संभावित रोगों की ओर संकेत करते हुए किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को 80-100 शब्दों में पत्र लिखिए।
(5 x 1 =5 )
अथवा
आपके छोटे भाई/बहन ने एक आवासीय विद्यालय में एक मास पूर्व ही प्रवेश लिया है। उसको मित्रों के चुनाव में सावधानी बरतने के लिए समझाते हुए एक पत्र 80-100 शब्दों में लिखिए।
उत्तर
परीक्षा भवन
च०छ०ज० शहर
दिनांक : 10 नवंबर, 20xx
संपादक महोदय
नवभारत टाइम्स
नई दिल्ली
विषय- सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते धूम्रपान तथा उसके कारण संभावित रोगों के संबंध में। मान्यवर मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारियों का ध्यान सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते धूम्रपान की समस्या की ओर दिलाना चाहता हूँ। इन दिनों ऐसे स्थानों पर धूम्रपान न करने के कानून के बावजूद लोग बेधड़क होकर धूम्रपान करते हैं। इसका कारण कानून का कड़ाई से पालन न कराया जाना है। अगर कानून का कड़ाई से पालन कराया जाय, तो लोग डरेंगे तथा ऐसा नहीं करेंगे। साथ ही लोगों को भी खुद पर नियंत्रण करना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें साँस की बीमारियाँ हो सकती हैं। कृपया मेरे पत्र को अपने समाचार-पत्र में शामिल करें ताकि अधिकारीगण सचेत हो सकें तथा आम जनता भी जागरूक हो सके।
धन्यवाद।
प्रार्थी
क०ख०ग०

अथवा

परीक्षा भवन
च०छ०ज० शहर
दिनांक : 10 अप्रैल, 20xx
प्रिय मोहित
शुभ प्यार! तुम्हारा पत्र मिला। जानकार अच्छा लगा कि तुम्हें अपने आवासीय विद्यालय में कुछ खास समस्या नहीं आई तथा तुम्हारा पढ़ाई में मन लगने लगा है। मोहित तुम अभी छोटे हो तथा तुम पहली बार हमसे दूर हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने गए हो। इस स्थिति में तुम्हें कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। तुम्हें नियमित कार्यों में, अपने स्वास्थ्य पर, पढ़ाई-लिखाई की नियमितता पर तथा मित्रों के चुनाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि तुम्हारे मित्र तुम्हारे लिए मददगार साबित हो सकें, न कि मुसीबत बन जाएँ। तुम्हें समझदार, पढ़ाई-लिखाई में तेज़ तथा अच्छी आदतों वाले छात्रों को अपना मित्र बनाना चाहिए, जिससे तुम उनसे कुछ सीख सको तथा उन्हें भी तुमसे कुछ जानने-समझने का मौका मिले। शेष सब कुशल है, उम्मीद है, तुम मेरी बातों पर गौर करोगे तथा आगे अच्छा करते जाओगे। सभी तुम्हें प्यार बोल रहे हैं। पत्र का जवाब देना।
तुम्हारी बहन
क०ख०ग०

प्रश्न 16.
नगर में आयोजित होने वाली भारत की सांस्कृतिक एकता प्रदर्शनी को देखने के लिए लोगों को आमंत्रित करते हुए 25-50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए। (5 x 1 =5)
अथवा
प्रदूषण से बचने के लिए जनहित में जारी एक विज्ञापन पर्यावरण विभाग की ओर से 25-50 शब्दों में लिखिए।
उत्तर
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 3 with Solutions 3
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course A Set 3 with Solutions 4

प्रश्न 17.
अपने प्रिय मित्रों को होली हेतु शुभकामना संदेश लिखिए।
अथवा
अपने भाई को दसवीं के परीक्षा-फल में प्रदेश में पहला स्थान मिला है, उसके लिए बधाई संदेश लिखिए।
उत्तर

संदेश

12 मार्च, 20xx
प्रिय मित्रो
होली मिलन की हार्दिक शुभकामनाएँ। रंगों के इस त्योहार में यही कामना करता हूँ कि आप सब स्वस्थ व दीर्घायु रहें। आपका परिवार सदैव खुश रहे। होली के ये रंग आपके संसार में खुशियों के रंग बिखेर दें। हमेशा मीठी रहे आप सबकी बोली, इस होली में खुशियों से भर जाए आपकी झोली।
आपका मित्र
संजीव

बधाई संदेश

15 जून, 20xx
प्रिय अनुज हरीश
दसवीं के परीक्षाफल में प्रदेश में पहला स्थान पाने की हार्दिक शुभकामनाएँ। मैं सदा ईश्वर से यही कामना करता हूँ कि तुम इसी प्रकार से परिवार का नाम रोशन करो, तरक्की करो, जीवन में आकाश की बुलंदियों को छुओ। इसी प्रकार परिश्रम करते रहना और आगे बढ़ते रहना। मेरा आशीष और दुलार सदा तुम्हारे साथ है।
तुम्हारा बड़ा भाई
रूपेश