पण्डिता रमाबाई Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 5

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Class 7 Sanskrit Chapter 5 पण्डिता रमाबाई Summary Notes

पण्डिता रमाबाई पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ में विदुषी रमाबाई के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला गया है। रमाबाई ने अपना सम्पूर्ण जीवन बालिकाओं और महिलाओं की शिक्षा के लिए अर्पित कर दिया था। इन्होंने असहाय महिलाओं के लिए पुणे नगर में आश्रम स्थापित किए।

पण्डिता रमाबाई Summary

रमाबाई, संस्कृत और वेदों की विदुषी थी। उनका जन्म 1858 सन् में अनन्तशास्त्री और लक्ष्मीबाई के यहाँ हुआ। उन्हें  ‘सरस्वती’ आदि उपाधियाँ प्राप्त थीं। रमाबाई ने अपनी माता से संस्कृत का अद्वितीय ज्ञान प्राप्त किया।
पण्डिता रमाबाई Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 5.1
उनके माता-पिता और बड़ी बहन की मृत्यु हो गई। रमाबाई ने समग्र देश की पैदल यात्रा की। वह ब्रह्मसमाज से अत्यधिक प्रभावित थी। 1880 सन् में उन्होंने विपिन बिहारी दास से विवाह किया, परन्तु शीघ्र ही उनके पति का देहान्त हो गया।
पण्डिता रमाबाई Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 5.2

उन्होंने स्त्रीशिक्षा और समाज सेवा के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। रमाबाई ने कई देशों में भ्रमण किया। उन्होंने विधवा स्त्रियों की सहायता के लिए अमेरिका में धन एकत्रित किया। भारत आकर उन्होंने मुम्बई में शारदा-सदन की स्थापना की। शारदा-सदन में स्त्रियों को छपाई, टाइप तथा काष्ठ-कला आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहाँ बेसहारा स्त्रियाँ सम्मानपूर्वक जीवन-यापन करती हैं। सन् 1922 में रमाबाई का देहान्त हो गया। परन्तु समाज सेवा तथा स्त्रीशिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

पण्डिता रमाबाई Word Meanings Translation in Hindi

(क) स्त्रीशिक्षाक्षेत्रे अग्रगण्या पण्डिता रमाबाई 1858 तमे ख्रिष्टाब्दे जन्म अलभत। तस्याः पिता अनन्तशास्त्री डोंगरे माता च लक्ष्मीबाई आस्ताम्। तस्मिन् काले स्त्रीशिक्षायाः स्थितिः चिन्तनीया आसीत्। स्त्रीणां कृते संस्कृतशिक्षणं प्रायः प्रचलितं नासीत्। किन्तु डोंगरे रूढिबद्धां धारणां परित्यज्य स्वपत्नी संस्कृतमध्यापयत्। एतदर्थं सः समाजस्य प्रतारणाम् अपि असहत। अनन्तरं रमा अपि स्वमातुः संस्कृतशिक्षा प्राप्तवती।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
चिन्तनीया-शोचनीय (pitiable), परित्यज्य-छोड़कर (giving up), अध्यापयत्-पढ़ाया (taught), प्रतारणाम्-ताड़ना को (to taunt), असहत-सहन किया (tolerated), स्वमातुः-अपनी माता से (from her mother), प्राप्तवती-प्राप्त की (received).

सरलार्थ :
स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में अग्रगण्या पण्डिता रमाबाई ने 1858 ई० में जन्म लिया। उनके पिता अनन्त शास्त्री डोंगरे और माता लक्ष्मीबाई थीं। उस समय में स्त्रियों की शिक्षा की दशा शोचनीय थी। स्त्रियों के लिए संस्कृत शिक्षा लगभग अप्रचलित थी। परन्तु डोंगरे ने रूढ़ियों से बँधी हुई धारणा को छोड़कर अपनी पत्नी को संस्कृत की शिक्षा दी। इसके लिए उन्होंने समाज की ताड़ना को भी सहा। इसके बाद रमा ने भी अपनी माता जी से संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की।

English Translation :
Foremost in the field of female education scholar Ramabai was born in the year 1858. Her father was Anant Shastri Dongre and mother Lakshmi Bai. In those days the condition of women’s education was pitiable. Sanskrit education for women was almost not in vogue. But giving up the notion held by convention Dongre gave Sanskrit education to his wife. For this Rama’s father tolerated the taunts of the society also. After this Rama also received Sanskrit education from her mother.

(ख) कालक्रमेण रमायाः पिता विपन्नः सञ्जातः। तस्याः पितरौ ज्येष्ठा भगिनी च दुर्भिक्षपीडिताः दिवङ्गताः। तदनन्तरं रमा स्व-ज्येष्ठभ्रात्रा सह पद्भ्यां समग्रं भारतम् अभ्रमत्। भ्रमणक्रमे सा कोलकातां प्राप्ता। संस्कृतवैदुष्येण सा तत्र ‘पण्डिता’ ‘सरस्वती’ चेति उपाधिभ्यां विभूषिता। तत्रैव सा ब्रह्मसमाजेन प्रभाविता वेदाध्ययनम् अकरोत्। पश्चात् सा स्त्रीणां कृते वेदादीनां शास्त्राणां शिक्षायै आन्दोलनं प्रारब्धवती। 1880 तमे ख्रिष्टाब्दे सा विपिनबिहारीदासेन सह बाकीपुर न्यायालये विवाहम् अकरोत् । साधैकवर्षात्अनन्तरं तस्याः पतिः दिवङ्गतः।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
विपन्न:-निर्धन (poor), दुर्भिक्ष-अकाल (famine), कुर्वती करती हुई (while doing), आन्दोलनम्-आन्दोलन को (movement), प्रारब्धवती-आरम्भ किया (started), दिवङ्गताः-मृत्यु को प्राप्त हो गए (passed away), सार्धेकवर्षात्-डेढ़ साल से (के) (One and a half year).

सरलार्थ :
समय के बदलने से रमा के पिता निर्धन हो गए। उनके माता-पिता और बड़ी बहन अकाल से पीड़ित होकर मृत्यु को प्राप्त हो गए। इसके पश्चात् रमा अपने बड़े भाई के साथ पैदल सारे भारत में घूमती हुई कोलकाता पहुँचीं। संस्कृतविद्वता के कारण उन्हें वहाँ ‘पण्डिता’ और ‘सरस्वती’ उपाधियों द्वारा विभूषित किया गया। वहाँ ही ब्रह्म-समाज से प्रभावित होकर उन्होंने वेदों का अध्ययन किया। बाद में उन्होंने बालिकाओं और स्त्रियों के लिए संस्कृत और वेद-शास्त्र आदि की शिक्षा के लिए आन्दोलन आरम्भ किया। सन् 1880 ई० में उन्होंने विपिन बिहारी दास के साथ न्यायालय में विवाह किया। डेढ़ वर्ष के बाद उनके पति की मृत्यु हो गयी।

English Translation :
Time circle (fate) made Rama’s father poor. Her parents and elder sister passed away after suffering from famine. After that, touring India on foot Rama and her elder brother reached Kolkata. Due to deep knowledge of Sanskrit there she was adorned with ‘Pandita’ and ‘Saraswati’ titles.

After being impressed there with Brahmo-Samaj Rama studied Vedas. Later, she started a movement of teaching Sanskrit and Vedas, scriptures etc. to girls and women. In 1880 she married Vipin Bihari Das in court. After one and half years her husband expired.

(ग) तदनन्तरं । मनोरमया सह जन्मभूमिं महाराष्ट्र प्रत्यागच्छत्। नारीणां सम्मानाय शिक्षायै च सा स्वकीयं जीवनम् अर्पितवती। हण्टर-शिक्षा-आयोगस्य समक्षं रमाबाई नारीशिक्षाविषये स्वमतं प्रस्तुतवती।सा उच्चशिक्षार्थं इंग्लैण्डदेशं गतवती।तत्र ईसाईधर्मस्य स्त्रीविषयकैः उत्तमविचारैः प्रभाविता जाता।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
प्रत्यागच्छत् ( प्रति+आगच्छत् )-लौट आई (returned), प्रस्तुतवती प्रस्तुत किया (presented.) सरलार्थः इसके पश्चात् वे पुत्री मनोरमा के साथ महाराष्ट्र लौट आईं। स्त्रियों के सम्मान और शिक्षा के लिए उन्होंने अपना जीवन अर्पित कर दिया। हण्टर-शिक्षा-आयोग के सामने रमाबाई ने महिला शिक्षा के विषय में अपना मत प्रस्तुत किया। वे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैण्ड गईं। वहाँ स्त्रियों के विषय में ईसाई धर्म के उत्तम विचारों से प्रभावित हुईं।

English Translation:
After that she returned to Maharashtra with (her) daughter Manorama. She devoted her life for the proper honour and education of women. She presented her opinion about women’s education in Hunter Education Commission. She went to England for higher education. She was impressed with the remarkable thinking of the Christian faith about women.

(घ) इंग्लैण्डदेशात् रमाबाई अमरीकादेशम् अगच्छत्। तत्र सा भारतस्य विधवास्त्रीणां सहायतार्थम् अर्थसञ्चयम् अकरोत्। भारतं प्रत्यागत्य मुम्बईनगरे सा ‘शारदा-सदनम्’ अस्थापयत्। अस्मिन् आश्रमे निस्सहायाः स्त्रियः निवसन्ति स्म। तत्र स्त्रियः मुद्रण टङ्कण-काष्ठकलादीनाञ्च प्रशिक्षणमपि लभन्ते स्म।परम् इदं सदनं पुणेनगरे स्थानान्तरितं जातम्। ततः पुणेनगरस्य समीपे केडगाँव-नाम्नि स्थाने ‘मुक्तिमिशन’ नाम संस्थानं तया स्थापितम्। अत्र अधुना अपि निराश्रिताः स्त्रियः ससम्मानं जीवनं यापयन्ति।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
अर्थसञ्चयम्-धन इकट्ठा करना (collect money), प्रत्यागत्य (प्रति+आगत्य )-लौटकर (after returning), निस्सहायाः (ब०व०)-बेसहारा (destitute), मुद्रणम्-छपाई (printing), टङ्कणम्-टाइप (typing), काष्ठकला-लकड़ी पर कलाकारी (wood craft), संस्थानम्-संस्था (institution), निराश्रिताः (ब०व०)-बेसहारा (destitute), ससम्मानं आदर सहित (with honour), यापयन्ति-बिताती हैं (spending time).

सरलार्थः
इंग्लैण्ड देश से रमाबाई अमरीका गईं। वहाँ उन्होंने भारत की विधवा महिलाओं की सहायता के लिए धन इकट्ठा किया। भारत लौटकर मुम्बई नगर में उन्होंने ‘शारदा-सदन’ स्थापित किया। इस आश्रम में बेसहारा स्त्रियाँ रहती थीं। वहाँ महिलाएँ छपाई, टाइप और लकड़ी की कलाकारी आदि का प्रशिक्षण भी लेती थीं। परन्तु इस सदन का पुणे नगर में स्थान परिवर्तन हो गया। इसके पश्चात् पुणे नगर के समीप केडगाँव नामक स्थान पर इनके द्वारा ‘मुक्ति मिशन’ नामक संस्था स्थापित की गई। यहाँ अब भी बेसहारा महिलाएँ सम्मान का जीवन बिताती हैं।

English Translation :
Rama Bai went to America from England. There she collected money for the help of the Indian widows. After returning to India she founded ‘Sharda Sadan’ in Mumbai city. The destitute women lived in this asylum (shelter). Women also took training in typing, printing and woodcraft there. But this asylum (shelter) has been shifted to Pune. After this an institution by the name of ‘Mukti Mission’ was founded by her at a place named ‘Ked Gaon’ near Pune city. Here even now destitute women are spending their lives with honour.

(ङ) 1922 तमे ख्रिष्टाब्दे रमाबाई-महोदयायाः निधनम् अभवत्। सा देश-विदेशानाम् अनेकासु भाषासु निपुणा आसीत्। समाजसेवायाः अतिरिक्तं लेखनक्षेत्रे अपि तस्याः महत्त्वपूर्णम् अवदानम् अस्ति। ‘स्त्रीधर्मनीति’, ‘हाई कास्ट हिन्दू विमेन’ इति तस्याः प्रसिद्ध रचनाद्वयं वर्तते।

शब्दार्थाः (Word Meanings):
निधनम्-मृत्यु (death), अवदानम्-योगदान (contribution), समाजसेवायाः-समाजसेवा का (of social service), रचनाद्वयं-दो रचनाएँ (two works.) पण्डिता रमाबाई

सरलार्थ :
सन् 1922 ई० में रमाबाई जी की मृत्यु हो गई। वह देश-विदेश की अनेक भाषाओं में निपुण थीं। समाजसेवा के अलावा लेखन के क्षेत्र में भी उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। ‘स्त्री धर्म नीति’ और ‘हाई कास्ट हिन्दू विमेन’ ये उनकी प्रसिद्ध दो रचनाएँ हैं।

English Translation :
Madam Rama Bai died in the year 1922. She was proficient in many native and foreign languages. Besides social service, her contribution in the field of writing is also important. ‘Stree Dharma Niti’ and ‘High Caste Hindu Women’ are her two famous works.

CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 1

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CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 1

निर्धारित समय: 3 घंटे
अधिकतम अंकाः 80

खण्ड: – ‘क’
अपठित-अवबोधनम्

प्रश्न 1.
अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (10)

पुरा सर्वे जनाः नीतिधर्मपरायणाः आसन्। तेषां कृते चरित्रमेव सर्वोपरि आसीत्। सर्वे समाजस्य सुव्यवस्थायै नियमान् पालयन्ति स्म। परं यदा नरैः नियमान् उल्लंघ्य व्यवहारम् आरब्धम् तदा प्रभृति एव भ्रष्टाचारस्य जन्म अभवत्। भ्रष्टाचारस्य मूले लोभस्य प्रवृत्तिः। लोभः च अनन्तक: व्याधिः। धनलोभिनः जनाः कस्यचित् लघुतरम् अपि कार्यं विना किमपि स्वीकृत्य न कुर्वन्ति। अन्यान् च उत्कोचादिग्रहणे प्रेरयन्ति। इत्थम् भ्रष्टाचारः शनैः शनैः प्रसरति। सम्पूर्ण राष्ट्र अधोगतिम् प्राप्नोति। अस्य परिपकारः भाषणेषु न अस्ति। लोभस्य विकारस्य दूरकरणाय प्रयतनीयम् येन भ्रष्टाचारस्य अन्तः भवेत्।

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (1 × 4 = 4)
(i) जनाः समाजस्य नियमान् किमर्थं पालयन्ति?
(ii) लोभस्य प्रवृत्तिः कस्य मूले भवति?
(iii) अनन्तकः व्याधिः कः?
(iv) पुरा सर्वे जनाः कीदृशाः आसन्?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (2 × 2 = 4)
(i) धनलोभिनः जनाः किम् कुर्वन्ति?
(ii) भ्रष्टाचारस्य अन्तः कथं भविष्यति?

III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः शुद्धम् उत्तरम् चित्वा लिखत- (½ × 1 = 1)
(i) ‘सम्पूर्ण राष्ट्रम्” इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
(क) राष्ट्रम्
(ख) सम्पूर्ण
(ग) सम्पूर्ण राष्ट्रम्
(घ) राष्ट्रः

(ii) ‘भाषणेषु’ इत्यत्र का विभक्तिः?
(क) षष्ठी
(ख) सप्तमी
(ग) तृतीया
(घ) चतुर्थी

IV. अस्य अनुच्छेदस्य कृते समुचितं शीर्षकं लिखत। (½ × 1 = ½)

खण्ड: – ‘ख’
रचनात्मक कार्यम्

प्रश्न 2.
मञ्जूषातः प्रार्थनापत्रे उचितपदैः रिक्तस्थानानि पूरयत-

दातव्यम्, अधोलिखितस्य, विवरणं, शीघ्रं, वर्तते, नवदिल्ली

नैनीताल-छात्रावासः
नैनीताल:
दिनांक: 12-9-2020
प्रबन्धक महोदय,
न्यू एज पब्लिशर्स
______(1)______
श्रीमन्तः
सेवायाम् निवेदनम् अस्ति यत् ______(2)______ पुस्तकस्य महती आवश्यकता ______(3)______। अतः वी.पी.पी. द्वारा ______(4)______ प्रेषणीयम्। समग्रं ______(5)______ अपि लेखनीयम्। समुचितं कमीशनं ______(6)______।
(i) रुचिरा-अष्टमी श्रेणी-एका प्रतिः।

भवदीयः
वैभवः

प्रश्न 3.
अधोदत्तं चित्रं दृष्ट्वा प्रदत्तशब्दानाम् सहायतया पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत- (2 × 5 = 10)

मञ्जूषा – वृक्षाः, पर्वतीय, दृश्यम्, सूर्यः, उदेति, पुष्पाणि, सुन्दराणि पर्वताः, सन्ति, दृश्यन्ते, जनाः गच्छन्ति, रम्यं चित्रं
CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 1 Q3

प्रश्न 4.
अधोदत्तां कथाम् मञ्जूषायाम् प्रदत्तशब्दानाम् सहायतया पूरयत- (1 × 4 = 4)

लंकायाः, चत्वारः, ज्येष्ठः, पतिव्रता

अयोध्यायाः नृपस्य दशरथस्य ______(1)______ पुत्राः आसन्। तस्य ______(2)______ पुत्रः श्रीरामः आसीत्। श्रीरामस्य पत्नी सीता ______(3)______ स्त्री आसीत्। युद्धे रामः ______(4)______. नृपम् रावणम् अजयत्।

खण्ड: – ‘ग’
अनुप्रयुक्त-व्याकरणम्

प्रश्न 5.
(अ) सन्धिं सन्धिविच्छेदं वा कुरुत- (1 × 4 = 4)
(i) अद्य + अपि = ___________
(ii) रमेशः = ______ + ______
(iii) सु + आगतम् = ___________
(iv) इत्यादि = ______ + ______

(ब) मञ्जूषातः अव्ययपदं चित्वा वाक्यानि पूरयत- (1 × 4 = 4)
विना, एव, यथा, पुरतः
(i) सत्यम् ___________ जयते।
(ii) विद्यालयस्य ___________ वाटिका अस्ति।
(iii) सः ___________ चिन्तयति तथा आचरति।
(iv) विद्यां ___________ जीवनं वृथा।

प्रश्न 6.
मञ्जूषातः विलोमपदानि चित्वा लिखत- (½ × 6 = 3)

आदानम्, अवरोहः, समता, चलः, गमनम्, दत्वा

(i) आगमनम् ___________
(ii) गृहीत्वा ___________
(iii) अचलः ___________
(iv) प्रदानम् ___________
(v) विषमता ___________
(vi) आरोहः ___________

प्रश्न 7.
(अ) मञ्जूषातः पर्यायपदानि चित्वा लिखत- (½ × 6 = 3)

क्षिप्रम्, इदानीम्, शब्दं, प्रतिज्ञा, दृष्ट्वा, कानने

(i) सम्प्रति ___________
(ii) शीघ्रम् ___________
(iii) वने ___________
(iv) वीक्ष्य ___________
(v) रवं ___________
(vi) समयः ___________

(ब) कोष्ठकेषु दत्तेषु शब्देषु उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (1 × 3 = 3)
(i) पथिकः ___________ गच्छति। (ग्राम / ग्राम: / ग्रामाः)
(ii) स्वामी ___________ धनं यच्छति। (सेवकं / सेवकाय / सेवकः)
(iii) ___________ विना जीवनं व्यर्थम्। (धर्म: / धर्मस्य / धर्म)

प्रश्न 8.
(अ) अधोलिखितपदानि आधृत्य वाक्यानि रचयत- (1 × 4 = 4)
(i) हिमालयः ___________
(ii) उद्याने ___________
(iii) आकाशे ___________
(iv) विद्यालयः ___________

(ब) मञ्जूषातः अङ्कानाम् कृते पदानि लिखत- (1 × 4 = 4)

षोडश, द्वाचत्वारिंशत्, सप्तत्रिंशत्, षड्विंशतिः

(i) 26 ___________
(ii) 42 ___________
(iii) 37 ___________
(iv) 16 ___________

खण्ड: – ‘घ’
पठित-अवबोधनम्

प्रश्न 9.
अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत- (5)
सावित्री अनेकाः संस्थाः प्रशासनकौशलेन सञ्चालितवती। दुर्भिक्षकाले प्लेगकाले च सा पीडितजनानाम् अश्रान्तम् अविरतं च सेवाम् अकरोत्। सहायता-सामग्री-व्यवस्थायै सर्वथा प्रयासम् अकरोत्। महारोगप्रसारकाले सेवारता सा स्वयम् असाध्यरोगेण ग्रस्ता 1897 तमे ख्रिस्ताब्दे निधनं गता।
साहित्यरचनया अपि सावित्री महीयते। तस्याः काव्यसङ्कलनद्वयं वर्तते ‘काव्यफुले’ ‘सुबोधरत्नाकर’ चेति। भारतदेशे महिलोत्थानस्य गहनावबोधाय सावित्रीमहोदयायाः जीवन-चरितम् अवश्यम् अध्येतव्यम्।

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) सावित्री केषाम् सेवाम् अकरोत्?
(ii) सावित्रीमहोदयायाः किम् अवश्यम् अध्येतव्यम्?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) सावित्रीमहोदयायाः निधनम् कथम् अभवत्?

III. यथानिर्देशम् उत्तरत- (½ × 2 = 1)
(i) ‘निरन्तरम्’ इति पदस्य पर्यायः कः?
(क) अश्रान्तम्
(ख) अविरतम्
(ग) निधनम्
(घ) प्रयासम्

(ii) ‘सञ्चालितवती’ इति क्रियापदस्य कर्तृपदम् किम्?
(क) अनेकाः
(ख) संस्थाः
(ग) सावित्री
(घ) प्रशासन

प्रश्न 10.
अधोलिखितं नाट्यांशं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत- (5)

छात्राः – वयम् सर्वे स्वदेशस्य राज्यानाम् विषये ज्ञातुम् इच्छामः।
अध्यापिका – शोभनम्। वदत। अस्माकम् देशे कति राज्यानि सन्ति?
सायरा – चतुर्विंशतिः महोदये।
सिल्वी – न हि न हि महाभागे! पञ्चविंशतिः राज्यानि सन्ति।
अध्यापिका – अन्यः कोऽपि……?
स्वरा – (मध्ये एव) महोदये! मे भगिनी कथयति यदस्माकं देशे अष्टाविंशतिः राज्यानि सन्ति। एतदतिरिच्य सप्त केन्द्रशासितप्रदेशाः अपि सन्ति।

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) छात्राः केषाम् विषये ज्ञातुम् इच्छन्ति?
(ii) कति केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ति?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) अस्माकं देशे कति राज्यानि सन्ति?

III. यथानिर्देशम् उत्तरत- (½ × 2 = 1)
(i) ‘इच्छामः’ इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
(क) वयम्
(ख) सर्वे
(ग) देशस्य
(घ) विषये

(ii) ‘अस्माकं’ इति पदे किम् वचनम्?
(क) एकवचनम्
(ख) बहुवचनम्
(ग) द्विवचनम्
(घ) ममवचनम्

प्रश्न 11.
अधोलिखितं पद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (1 × 4 = 4)

वने दिग्गजानां तथा केशरीणाम्,
तटीनामियं वर्तते भूधराणाम्।
शिखीनां शुकानां पिकानां धरेयं,
क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः।।

प्रश्नाः
I. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(i) केषां वनम् अस्ति?
(ii) भूधराणां का अस्ति?
(iii) इयं धरा केषाम् अस्ति?
(iv) क्षितौ का राजते?

प्रश्न 12.
रेखांकितपदानाम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणम् कुरुत- (1 × 4 = 4)
(i) लुब्धस्य यशः नश्यति।
(ii) चञ्चलः वने जालम् प्रासारयत्।
(iii) सततं ध्येयस्मरणम् करणीयम्।
(iv) व्याधस्य नाम चञ्चलः आसीत्।

प्रश्न 13.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (1 × 4 = 4)

तदा, चला, अस्तं, सन्तः

(i) सूर्यः पूर्वदिशायाम् उदेति पश्चिमदिशि च ___________ गच्छति।
(ii) यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते ___________ चन्दगहणं भवति।
(iii) सूर्यः अचलः पृथिवी च ___________।
(iv) मधुरसूक्तरसं ___________ सृजन्ति।

प्रश्न 14.
अधोलिखितवाक्यानि कः / का, ‘कं / कां’ प्रति कथयति? (1 × 3 = 3)
यथा- इदानीम् अहम् त्वां खादिष्यामि / क: / का व्याघ्रः / कं / काम् व्याधम्
(i) जनाः मयि स्नानं कुर्वन्ति।
(ii) अरे मूर्ख! सर्वः स्वार्थं समीहते।
(iii) यत्र कुत्रापि छेदनं कुर्वन्ति।

हास्यबालकविसम्मेलनम् Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 4

By going through these CBSE Class 7 Sanskrit Notes Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम् Summary, Notes, word meanings, translation in Hindi, students can recall all the concepts quickly.

Class 7 Sanskrit Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम् Summary Notes

हास्यबालकविसम्मेलनम्  पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ में रोचक हास्य कवि सम्मेलन का वर्णन किया गया है। पाठ में अव्ययों का प्रयोग हुआ है। अव्यय जो तीनों लिंगों, तीनों वचनों और सभी विभक्तियों में सदैव एक ही रूप में होता है, अर्थात् जिसका व्यय अर्थात् परिवर्तन (Change) नहीं होता है, वह ‘अव्यय’ कहलाता है।

हास्यबालकविसम्मेलनम् Summary

प्रस्तुत पाठ में हास्य बालकवियों के सम्मेलन को प्रस्तुत किया गया है। इसमें अनेक हास्य कविताओं को सम्मिलित किया गया है। पाठ में अव्ययों का प्रयोग हुआ है। जो शब्द तीनों लिंगों में, तीनों वचनों में तथा सभी विभक्तियों में सदा एक ही रूप में प्रयोग होते हैं वे ‘अव्यय’ कहलाते हैं।

एक श्लोक में वैद्य को यमराज का सहोदर बताया गया है। यमराज तो केवल प्राणों का ही हरण करता है, परन्तु वैद्य प्राणों के साथ धन का भी हरण करता है।दूसरे श्लोक में भी वैद्य के विषय में व्यंग्य किया गया है कि चिता में जलते हुए शव को देखकर वैद्य को आश्चर्य हुआ। वहं सोचने लगा कि यह किसकी कलाकारी है?
हास्यबालकविसम्मेलनम् Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 4

तीसरे श्लोक में कहा है कि पराए माल पर जहाँ तक सम्भव हो हाथ फेर देना चाहिए। इस संसार में पराया अन्न मुश्किल से प्राप्त होता है। चौथे श्लोक में गजाधर कवि, खाने के लोभी तुन्दिल, यमराज, वैद्य इत्यादि पर व्यंग्य किया गया है।

हास्यबालकविसम्मेलनम् Word Meanings Translation in Hindi

(विविध-वेशभूषाधारिणः चत्वारः बालकवयः मञ्चस्य उपरि उपविष्टाः सन्ति। अधः श्रोतारः हास्यकविताश्रवणाय उत्सुकाः सन्ति कोलाहलं च कुर्वन्ति।)

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
उपरि-ऊपर (on/at), उपविष्टा:-बैठे हुए (are sitting), श्रोतार:-सुननेवाले (audience), कोलाहलम्-शोर (noise), अध:-नीचे (underneath).

सरलार्थ :
(विभिन्न वेशभूषा वाले चार बालकवि मञ्च के ऊपर बैठे हुए हैं। नीचे श्रोता हास्य कविता सुनने के लिए उत्सुक हैं और शोर मचा रहे हैं।)

English Translation :
(Four child-poets in different attires (dresses) are sitting on the stage. Below the audience are eager to hear the humorous poetry and is making a noise.)

(क) सञ्चालक:-अलं कोलाहलेन। अद्य परं हर्षस्य अवसरः यत् अस्मिन् कविसम्मेलने काव्यहन्तारः कालयापकाश्च भारतस्य हास्यकविधुरन्धराः समागताः सन्ति। एहि, करतलध्वनिना वयम् एतेषां स्वागतम् कुर्मः।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
काव्यहन्तार:-काव्य को नष्ट करनेवाले (the undoers of poetry), कालयापकाः-समय को नष्ट करनेवाले (those who waste time), धुरन्धरा:-अग्रणी/श्रेष्ठ (prominent), एहि-आइए (please come), करतलध्वनिना-तालियों से (with applause/with clapping sounds), उत्सुका:-जानने के इच्छुक (eager).

सरलार्थ :
सञ्चालक-शोर करने से बस करो (शोर मत करो)। आज बहुत प्रसन्नता का अवसर है कि इस कवि सम्मेलन में काव्यहन्ता (काव्य को नष्ट करनेवाले) और कालयापक (समय बर्बाद करनेवाले) भारत के श्रेष्ठ हास्य कवि आए हुए हैं। आओ! हम सब तालियों से इन सबका स्वागत करें।

English Translation :
Director-Don’t make noise. Today is an occasion of great pleasure that in this conference poets, the eminent humorous poets of India, the Kavyahantara (the undoers of poetry) and the Kalyapakah (those who waste time) are present. Please come! Let us welcome them with applause.

(ख) गजाधरः-सर्वेभ्योऽरसिकेभ्यो नमो नमः। प्रथमं तावद् अहम् आधुनिक वैद्यम् उद्दिश्य स्वकीयं काव्यं श्रावयामि वैद्यराज! नमस्तुभ्यं यमराजसहोदरः। यमस्तु हरति प्राणान् वैद्यः प्राणान् धनानि च॥ (सर्वे उच्चैः हसन्ति)

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
अरसिकेभ्यः -नीरस जनों को (to uninteresting persons), आधुनिकम्-आधुनिक (आजकल के) (modern), नमस्तुभ्यम् (नमः + तुभ्यम्)-तुम्हें प्रणाम (Saluta tion to you), सहोदरः -सगा भाई (real brother), हरति-ले जाता है (takes away), यमराज मृत्यु का देवता (god of death), उच्चैः -जोर से (loudly), उद्दिश्य-लक्ष्य करके (aiming).

सरलार्थः
गजाधर-सब नीरस जनों को नमस्कार। तब तक पहले मैं आधुनिक वैद्यों को लक्ष्य करके अपनी कविता सुनाता हूँ हे वैद्यराज! यमराज के भाई, आपको नमस्कार है। यमराज तो प्राणों को ले जाता है, वैद्य प्राणों को और धन को ले जाता है। (सब जोर से हँसते हैं)

English Translation :
Gajadhar—Salutation to all the uninteresting persons. Then first of all I recite my poem aiming at the modern physician. Oh! Physician! brother of the God of death, I bow to you. The God of death takes away only life but the physician takes away both life and money.

(ग) कालान्तकः-अरे! वैद्यास्तु सर्वत्र परन्तु न ते मादृशाः कुशलाः जनसंख्यानिवारणे। ममापि काव्यम् इदं शृण्वन्तु भवन्तः चितां प्रज्वलितां दृष्ट्वा वैद्यो विस्मयमागतः। नाहं गतो न मे भ्राता कस्येदं हस्तलाघवम्॥ (सर्वे पुनः हसन्ति)

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
मादृशाः-मेरे जैसे (like me), चितां-चिता को (to pyre), प्रज्ज्वलितां-जलती हुई (burning), विस्मयमागतः (विस्मयम् + आगतः)-आश्चर्यचकित हो गया (surprised), मे भ्राता-मेरा भाई (यमराज) (my brother) (god of death), कस्येदं (कस्य + इदं) किसकी यह (whose), हस्तलाघवम्-हाथ की सफाई (sleight of hand).

सरलार्थ :
कालान्तक-अरे ! वैद्य तो सब जगह हैं, परन्तु वे जनसंख्या कम करने में मेरे जैसे निपुण नहीं हैं। आप सब मेरे भी इस काव्य को सुनिए। चिता को जलती हुई देखकर वैद्य ने आश्चर्य किया कि न मैं गया, न मेरा भाई, यह किसके हाथ की सफाई है। (सब फिर हँसते हैं)

English Translation :
Kalantak-Oh! the physicians are everywhere but they are not as expert as I am in reducing the population. All of you please listen to this poem of mine also. Looking at the burning pyre, the physician was surprised that neither he nor his brother (the God of death) went (there), then whose sleight of hand it was? (Again all laugh)

(घ) तुन्दिल:-(तुन्दस्य उपरि हस्तम् आवर्तयन्) तुन्दिलोऽहं भोः! ममापि इदं काव्यं श्रूयताम्, जीवने धार्यतां च परान्नं प्राप्य दुर्बुद्धे! मा शरीरे दयां कुरु! परान्नं दुर्लभं लोके शरीराणि पुनः पुनः॥ (सर्वे पुनः अट्टहासं कुर्वन्ति)

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
तुन्दस्य उपरि-तोंद के ऊपर (on the pot belly), आवर्तयन् फेरता हुआ (stroking), धार्यताम्-धारण करें (adopt), परान्नम्-दूसरे के अन्न को (food grain of others) पर+अन्नम्, दुर्लभं-कठिनाई से प्राप्त करने योग्य (rare), लोके-संसार में (in the world), अट्टहासं-जोर से हँसना (laugh loudly).

सरलार्थ : –
तुन्दिल-(तोंद के ऊपर हाथ फेरते हुए) मैं तुन्दिल हूँ। अरे ! मेरी भी इस कविता को सुनो और जीवन में अपनाओ-दुष्टबुद्धिवाले! दूसरे का अन्न प्राप्त करके शरीर पर दया मत कर। संसार में दूसरे का अन्न दुर्लभ है। शरीर बार-बार मिलता रहता है। (सब फिर जोर से हँसते हैं)

English Translation :
Tundil-(stroking his pot belly) I am Tundil. Listen to this poem of mine and adopt it in your life. Hey! you wicked minded! Do not have mercy on your body (life) while accepting food from somebody else. The other’s food is rare in the world, one gets life again and again. (Again everyone laughs loudly)

(ङ) चार्वाकः- आम्, आम् शरीरस्य पोषणं सर्वथा उचितमेव। यदि धनं नास्ति, तदा ऋणं कृत्वापि पौष्टिकः पदार्थः एव भोक्तव्यः। तथा कथयति चार्वाककविः यावज्जीवेत् सुखं जीवेद् ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्। श्रोतार:-तर्हि ऋणस्य प्रत्यर्पणं कथम्? चार्वाकः-श्रूयतां मम अवशिष्टं काव्यम् घृतं पीत्वा श्रमं कृत्वा ऋणं प्रत्यर्पयेत् जनः॥ (काव्यपाठश्रवणेन उत्प्रेरितः एकः बालकोऽपि आशुकवितां रचयति, हासपूर्वकं च श्रावयति)

बालकः- श्रूयताम् श्रूयतां भोः! ममापि काव्यम्
गजाधरं कविं चैव तुन्दिलं भोज्यलोलुपम्।
कालान्तकं तथा वैद्यं चार्वाकं च नमाम्यहम्॥
(काव्यं श्रावयित्वा ‘हा हा हा’ इति कृत्वा हसति। अन्ये चाऽपि हसन्ति सर्वे गृहं गच्छन्ति।)

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
आम्-हाँ (yes), ऋणं-कर्ज (loan), पौष्टिकः-पुष्टि देने वाला (nourishing), भोक्तव्यः-उपभोग करना चाहिए (should consume), यावज्जीवेत् (यावत् + जीवेत् )-जब तक जीवित रहो (as long as you live), घृतं-घी को (ghee, fatty eatables), प्रत्यर्पणम्-लौटाना (return), अवशिष्टम्-बचा हुआ (remaining), श्रम-परिश्रम/मेहनत ( hardwork), उत्प्रेरित:-प्रेरित हुआ (being inspired), हासपूर्वकम्-खुश होकर, हँसते हुए (joyfully), श्रावयति सुनाता है (recites), भोज्यलोलुपम्-खाने का लोभी (greedy of food), प्रत्यर्पणम्-(प्रति+अर्पणम्) MICHI (Repaying).

सरलार्थ :
चार्वाक- हाँ, हाँ। शरीर का पोषण हमेशा ही ठीक रहता है। अगर धन नहीं है (व्यक्ति के पास) तब कर्ज लेकर भी पौष्टिक (शरीर को बलवान बनाने वाले) पदार्थों का ही उपभोग करना चाहिए। और चार्वाक कवि कहते हैं जब तक जियो सुख से जियो (जीना चाहिए), कर्ज (उधार) लेकर भी घी पियो (पीना चाहिए)। श्रोतागण- तो कर्ज को कैसे चुकाया जाए? चार्वाक- मेरी बची हुई कविता भी सुनिए घी पीकर, परिश्रम करके लोगों को कर्ज वापस कर देना चाहिए। (काव्य पाठ से प्रेरित होकर एक बालक भी तुरंत कविता की रचना करता है और हँसते हुए सुनाता है-) बालक- अरे सुनिए, सुनिए! मेरी भी

कविता-गजाधर कवि और खाने के लोभी तुन्दिल, (प्राण लेने वाले) कालान्तक को तथा वैद्य चार्वाक को मैं प्रणाम करता हूँ। [कविता सुनाकर (बालक) ‘हा हा हा’ ऐसा करके हँसता है। दूसरे भी हँसते हैं और सभी घर जाते हैं।]

English Translation :
Charvak- Yes, yes. Nourishing the body is always most appropriate. If there is no money then one should even borrow and consume nourish ing food. The poet Charvak says- As long as one lives one should live in comfort. One should consume ghee (good nourishing food) even if one need to borrow.
Audience- Then how should one repay the debt.
Charvak- Please listen to my remaining poem. After drinking ghee (consuming healthy nourishing food) and doing hard work one should repay the debt.
(Inspired by this poetry-recitation, a boy hastily writes a verse and recites it with a laugh)
Boy- Please listen to my poem too.
(Salulte the poet Gajadhar, the glutton (greedy of food) Tundil as also Kalantaka (Destroyer of Time) and the physician Charvak.)
(On reciting the verse the boy laughs. The other laughs too. And everyone goes home.)

स्वावलम्बनम् Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 3

By going through these CBSE Class 7 Sanskrit Notes Chapter 3 स्वावलम्बनम् Summary, Notes, word meanings, translation in Hindi, students can recall all the concepts quickly.

Class 7 Sanskrit Chapter 3 स्वावलम्बनम् Summary Notes

स्वावलम्बनम् पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ में दो मित्रों की कथा के द्वारा वर्णन किया गया है कि स्वावलम्बी मनुष्य सदा सुखी रहता है। पराधीन व्यक्ति दुःखी होता है। सबको अपना कार्य स्वयं करना चाहिए। पाठ में संख्यावाची शब्दों से भी अवगत करवाया गया है।

स्वावलम्बनम् Summary

कृष्णमूर्ति तथा श्रीकण्ठ दो मित्र थे। श्रीकण्ठ का पिता समृद्ध था। उसके घर में सब प्रकार के सुख साधन थे। उसके विशाल भवन में चालीस खम्बे थे। अठारह कमरों में पचास खिड़कियाँ थीं। कृष्णमूर्ति के माता-पिता साधारण कृषक थे। उनका घर आडम्बर शून्य तथा अत्यधिक साधारण था। एक बार श्रीकण्ठ उसके घर आया। उसके घर में नौकर को न देखकर श्रीकण्ठ ने कहा–’तुम्हारे घर में एक भी नौकर नहीं है। मेरे यहाँ तो अनेक नौकर हैं।’
स्वावलम्बनम् Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 3.1

स्वावलम्बी कृष्णमूर्ति कहने लगा-‘मेरे आठ नौकर हैं। यथा-दो पैर, दो हाथ, दो आँख तथा दो कान। ये प्रतिपल मेरे अधीन रहते हैं। परन्तु तुम्हारे नौकर दिन-रात कार्य नहीं कर सकते।’ अतः तुम नौकरों के अधीन हो। अपना कार्य स्वयं करने से सुख ही प्राप्त होता है। यह सुनकर श्रीकण्ठ अत्यधिक प्रसन्न हुआ और कहने लगा’आज से मैं भी अपना कार्य स्वयं करूँगा।’
स्वावलम्बनम् Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 3.2

स्वावलम्बनम् Word Meanings Translation in Hindi

(क) कृष्णमूर्तिः श्रीकण्ठश्च मित्रे आस्ताम्। श्रीकण्ठस्य पिता समृद्धः आसीत्।अतः तस्य भवने सर्वविधानि सुख-साधनानि आसन्। तस्मिन् विशाले भवने चत्वारिंशत् स्तम्भाः आसन्। तस्य अष्टादश-प्रकोष्ठे षु पञ्चाशत् गवाक्षाः, चतुश्चत्वारिंशत् द्वाराणि षट्त्रिंशत् विद्युत्-व्यजनानि च आसन्। तत्र दश सेवकाः निरन्तरं कार्यं कुर्वन्ति स्म। परं कृष्णमूर्तेः माता पिता च निर्धनौ कृषकदम्पती। तस्य गृहम् आडम्बरविहीनं साधारणञ्च आसीत्।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
समृद्धः-धनवान् (rich), चत्वारिंशत्-चालीस (forty), स्तम्भाः खम्भे (pillars), अष्टादश-अठारह (eighteen), प्रकोष्ठेषु-कमरों में (in rooms), पञ्चाशत्-पचास (fifty), गवाक्षाः-खिड़कियाँ (windows), चतुश्चत्वारिंशत्-चवालीस (forty four), द्वाराणि-दरवाज़े (doors), षट्त्रिंशत्-छत्तीस (thirty six), गृहम्-घर (home), कृषकदम्पती-किसान पति-पत्नी (peasant couple), आडम्बरविहीनं-दिखावा रहित (without pomp and show.)

सरलार्थ :
कृष्णमूर्ति और श्रीकण्ठ दो मित्र थे। श्रीकण्ठ के पिता धनवान् थे। इसलिए उसके घर में सब प्रकार के सुख-साधन थे। उस बड़े घर में चालीस खम्भे थे। उसके अठारह कमरों में पचास खिड़कियाँ और चवालीस दरवाज़े और छत्तीस पंखे थे। वहाँ दस नौकर हमेशा (लगातार) काम करते रहते थे परन्तु कृष्णमूर्ति के माता और पिता किसान पति-पत्नी थे। उसका घर आडम्बर (दिखावा) रहित और साधारण था।

English Translation :
Krishnamurthy and Shrikantha were two friends. Shrikantha’s father was rich. Therefore, there were all types of comforts and luxuries in his house. There were forty pillars in that house. There were fifty windows and forty four doors and thirty-six electric fans in eighteen rooms. Ten servants used to work continuously there, but Krishnamurthy’s parents were a peasant couple. His house was without pomp and show and (very) ordinary.

(ख) एकदा श्रीकण्ठः तेन सह प्रात: नववादने तस्य गृहम् अगच्छत्। तत्र कृष्णमूर्तिः तस्य
माता पिता च स्वशक्त्या श्रीकण्ठस्य आतिथ्यम् अकुर्वन्। एतत् दृष्ट्वा श्रीकण्ठः

अकथयत्-
“मित्र! अहं भवतां सत्कारेण सन्तुष्टोऽस्मि। केवलम् इदमेव मम दुःखं यत् तव गृहे एकोऽपि भृत्यः नास्ति। मम सत्काराय भवतां बहु कष्टं जातम्। मम गृहे तु बहवः कर्मकराः सन्ति।”

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
आतिथ्यम्-अतिथि-सत्कार (hospitality), कर्मकरा:-काम करने वाले (workers), सन्तुष्टः-सन्तोष करनेवाला (satisfied), भवताम्-आपके (with you), बहवः-बहुत से (many), भृत्यः-नौकर (servant).

सरलार्थ :
एक बार श्रीकण्ठ उसके साथ सवेरे नौ बजे उसके घर गया। वहीं कृष्णमूर्ति और उसके माता पिता जी ने अपने सामर्थ्य से श्रीकण्ठ का अतिथि-सत्कार किया। यह देखकर श्रीकण्ठ ने कहा- “मित्र ! मैं तुम्हारे सत्कार से सन्तुष्ट हूँ। केवल यह बात मुझे दुःखी कर रही है कि तुम्हारे घर में एक भी सेवक नहीं है। जिससे मेरे सत्कार के लिए आप सबने बहुत कष्ट सहा है। मेरे घर में तो बहुत से सेवक हैं।”

English Translation :
Once Shrikantha went to Krishnamurthy’s home with him at nine in the morning. There Krishnamurthy and his parents provided him hospitality the best of their capability. On seeing this Shrikantha said, “Friend! I am satisfied with your hospitality. The only thing that makes me unhappy is that there is not a single servant in your home because of which you are taking the trouble for my hospitality. There are many servants in my home.”

(ग) तदा कृष्णमूर्तिः अवदत्-“मित्र! ममापि अष्टौ कर्मकराः सन्ति। ते च द्वौ पादौ, द्वौ हस्तौ, द्वे नेत्रे, द्वे श्रोत्रे इति। एते प्रतिक्षणं मम सहायकाः। किन्तु तव भृत्याः सदैव सर्वत्र च उपस्थिताः भवितुं न शक्नुवन्ति। त्वं तु स्वकार्याय भृत्याधीनः। यदा यदा ते अनुपस्थिताः, तदा तदा त्वं कष्टम् अनुभवसि। स्वावलम्बने तु सर्वदा सुखमेव, न कदापि कष्टं भवति।”

शब्दार्थाः ( Word Meanings):
स्वावलम्बने-आत्मनिर्भरता में (in self-reliant), प्रतिक्षणं-हरपल (every moment), अनुपस्थिताः-उपस्थित नहीं हैं (ब०व०) (absent), अधीन:-निर्भर (dependant), स्वकार्याय-अपने काम के लिए (for your work), अनुभवसि-अनुभव करते हो (feel).

सरलार्थ :
तब कृष्णमूर्ति बोला- “मित्र! मेरे भी आठ नौकर हैं। और वे दो पैर, दो हाथ, दो आँखें और दो कान हैं। ये हर पल मेरे सहायक हैं। परन्तु तुम्हारे नौकर सदा सब जगह उपस्थित नहीं हो सकते। तुम तो अपने कार्य के लिए अपने सेवकों के अधीन हो। जब-जब वे अनुपस्थित होते हैं, तब-तब तुम कष्ट का अनुभव करते हो। स्वावलम्बन में तो हमेशा सुख ही है, कभी कष्ट नहीं होता है।”

English Translation:
Then Krishnamurthy spoke, “Friend! I have eight servants. These are two feet, two hands, two eyes and two ears. Every moment these are my helpers. But your servants are not capable of being present everywhere all the time. You are dependent on you servants for your work. Whenever they are not present you feel distressed. There is always comfort in self-reliance and there is no problem at all.

(घ) श्रीकण्ठः अवदत्-“मित्र! तव वचनानि श्रुत्वा मम मनसि महती प्रसन्नता जाता। अधुना अहमपि स्वकार्याणि स्वयमेव कर्तुम् इच्छामि।” भवतु, सार्धद्वादशवादनमिदम्। साम्प्रतं गृह चलामि।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
अवदत्-कहा, बोला (said)
मनसि-मन (हृदय) में (in heart)
अधुना-अब (Now)
स्वयमेव-अपने आप ही (also myself only)
भवतु-ठीक है (ok)
सार्धद्वादशवादनम्-साढ़े बारह बजे (half past twelve)
साम्प्रतं-अब
इस समय (Now).

सरलार्थ :
श्रीकण्ठ बोला-“मित्र! तुम्हारे वचनों को सुनकर मेरे मन में बहुत प्रसन्नता हुई। अब मैं भी अपना काम स्वयं ही करूँगा।” ठीक है। अब साढ़े बारह बजे हैं। मैं अब घर चलता हूँ।

English Translation : Shrikantha said, “Friend! hearing your words, I am pleased in my heart. Now, I will also do my work myself.” All right. It is half past twelve. I shall now go home.

CBSE Class 7 Sanskrit रचना संवादलेखनम्

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CBSE Class 7 Sanskrit रचना संवादलेखनम्

1. मातृपुत्री-संवादः (माँ और बेटी के बीच संवाद)।

माता – पुत्रि! पश्य, तत्र _____________ कः तिप्रति।
पुत्री – किम् एषः _____________ अस्ति?
माता – आम शक: _____________ भवति। परं शकस्य _____________ रक्ता भवति।
पुत्री – आम् पश्यामि, सः स्व-चञ्च्वा वृक्षस्य _____________ खादति। अम्ब। किम् एषः अपि कूजति?
माता – नहि, शुक: न _____________, सः वदति।
पुत्री – अहम् एकदा एकं _____________ अपश्यम्।
माता – सः किं वदति स्म?
पुत्री – सः _____________ ‘अतिशोभनम्, अतिशोभनम्’ इति।

मञ्जूषा – शुकः, शुकम्, वृक्षे, अवदत्, कूजति, हरितः, रक्ता, फलानि

उत्तरम्-
वृक्षे, शुकः, हरितः, चञ्चुः, फलानि, कूजति, शुकम्, अवदत्

2. सखीद्वयस्य मध्ये संवादः (दो सखियों के बीच संवाद)

प्रीतिः – हलो! _____________! अहं प्रीतिः वदामि।
दीप्तिः – हलो! सर्वं कथं चलति? किं करोषि?
प्रीतिः – साम्प्रतम् _____________ करोमि।
दीप्तिः – काचद् _____________ आगच्छति। किं तत्र तव मित्राणि _____________ कुर्वन्ति?
प्रीतिः – नहि, दूरदर्शने वार्ता प्रसरति। अहं प्रयोजना-कार्येण सह वार्ताम् आकर्णयामि।
दीप्तिः – कः विषयः _____________?
प्रीतिः – वार्तायाः विषयोऽस्ति-‘प्रदूषणम् अस्य निराकरणम् च।’
दीप्तिः – अति रुचिकरः विषयः अयम्। तव _____________ विषयः कः?
प्रीतिः – मम प्रयोजनाकार्यस्य विषयः _____________ इति।

मञ्जूषा – प्रयोजनाकार्यम्, जलप्रदूषणम्, प्रयोजनाकार्यस्य, दीप्ते, ध्वनिः, वार्तायाः, वार्ताम्

उत्तरम्-
दीप्ते, प्रयोजनाकार्यम्, ध्वनिः, वार्ताम्, वार्तायाः, प्रयोजनाकार्यस्य, जलप्रदूषणम्

3. काक-पिकयोः संवादः (कौए और कोयल के बीच संवाद)

काकः – त्वं कः असि?
पिकः – अहं पिक: अस्मि।
काकः – त्वं किं करोषि?
पिकः – अहं _____________।
काकः – त्वं कुत्र कूजसि?
पिकः – अहं _____________ कूजामि।
काकः – त्वम् अपि कृष्णः अहमपि कृष्णः। अत्र कः _____________?
पिकः – भेदः प्रत्यक्षं भविष्यति।
काकः – तत् कथम्?
पिकः – अहं _____________ मधुरं कूजामि। परं त्वं तु सदैव ‘का-का’ एव करोषि। तव ध्वनिः मधुरा नास्ति।
काकः – कथं विस्मरसि? अहं प्रतिदिनं _____________ सुप्तान् जागरयामि।
पिकः – एतत् कार्यं तु _____________ अपि करोति।
काकः – अलं _____________। परस्परं स्नेहः कर्त्तव्यः।
पिकः – भवतु। आवाम् _____________ स्वः।

मञ्जूषा – आम्रवृक्षे, प्रातः, विवादेन, घटिका, मित्रे, भेदः, वसन्तकाले, कूजामि

उत्तरम्-
कूजामि, आम्रवृक्षे, भेदः, वसन्तकाले, प्रातः, घटिका, विवादेन, मित्रे।

4. बालक-आगन्तुकयोः संवादः (बालक तथा आगन्तुक के बीच संवाद)

आगन्तुक: – बालक! किं तव जनक: _____________ अस्ति?
बालकः – मान्य! जनक: औषधाय _____________ गतः।
आगन्तुक:- अहं तव _____________ मित्रं जगदीशचन्द्रः।
बालकः – नमस्ते! उपविशतु भवान्।
आगन्तुक:- तव _____________ किम्?
बालकः – _____________ नाम पीयूषः।
आगन्तुक:- त्वं कस्यां _____________ पठसि?
बालकः – अहं _____________ पठामि।
आगन्तुक:- स्वजनकाय एतत् _____________ यच्छ। अधुना अहं गच्छामि।
बालकः – अहं जनकाय निवेदयिष्यामि।

मञ्जूषा – पुस्तकम्, जनकस्य, नाम, कक्षायाम्, आपणम्, गृहे, सप्तमी-कक्षायाम्, मम

उत्तरम्-
गृहे, आपणम्, जनकस्य, नाम, मम, कक्षायाम्, सप्तमी-कक्षायाम्, पुस्तकम्

5. बालकस्य खगस्य च मध्ये संवादः (बालक और पक्षी के बीच संवाद)

खगः – हे _____________! कुत्र गच्छसि?
बालकः – अहं _____________ गच्छामि। त्वं किं करोषि?
खगः – अहं _____________ विचरामि।
बालकः – अहमपि गगने विचरितम इच्छामि। परं मम _____________ न सन्ति।
खगः – त्वं _____________ कथं न गच्छसि? प्रतिदिनम् आकाशे वायुयानानि गच्छन्ति।
बालकः – चिन्तयामि यदा अहं वयस्क : भविष्यामि तदा _____________ भविष्यामि।
खगः – उत्तमः संकल्पः। _____________ अस्त।
बालकः – _____________।

मञ्जूषा – धन्यवादाः, शुभम्, विद्यालयम्, बालक, पक्षाः, आकाशे, वायुयान-चालक:, वायुयानेन

उत्तरम्-
बालक, विद्यालयम्, आकाशे, पक्षाः, वायुयानेन, वायुयान-चालक:, शुभम्, धन्यवादाः।