CBSE Class 7 Sanskrit रचना अनुच्छेद / निबन्ध-लेखनम्

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CBSE Class 7 Sanskrit रचना अनुच्छेद / निबन्ध-लेखनम्

मञ्जूषायाः सहायतया रिक्तस्थानानि पूरयित्वा अनुच्छेद / निबन्धपूर्ति कुरुत।

प्रश्न 1.
वृक्षस्य-आत्मकथा
अहं वृक्षः अस्मि। अहं परोपकाराय फलामि। अहं पूर्व ______________ आसम्। अधुना अहं ______________ सघन: वक्षः अस्मि। अहं ______________ शीतला छायां यच्छामि। खगाः आगच्छति। ते मम ______________ उपविशन्ति। ते स्वशावकेभ्यः ______________ रचयन्ति। यदा ते कूजन्ति अहं ______________ भवामि। अहं सर्वेभ्यः शुद्धं ______________ च यच्छामि।

मञ्जूषा – फलानि, शाखासु, वायुम्, प्रसन्नः पथिकेभ्यः, विशालः, बीजरूपेण, नीडम्

उत्तरम्-
बीजरूपेण, विशालः, पथिकेभ्यः, शाखासु, नीडम्, प्रसन्नः, फलानि, वायुम्।

प्रश्न 2.
मर्यादापुरुषोत्तमः श्रीरामः
श्रीरामः ______________ आसीत्। ______________ आज्ञा पालयितुम् सः चतुर्दशवर्षाणि यावत् वने ______________ अकरोत्। तेन सह तस्य ______________ सीता भ्राता लक्ष्मणः चापि ______________ अगच्छताम्। वने ______________ सीताम् अपाहरत्। रामः ______________ हत्वा सीताम् आनयत्। सः ______________ विभीषणाय अयच्छत्। रामायणे श्रीरामस्य जीवन-कथा अस्ति।

मञ्जूषा- रावणः, रावणम्, मर्यादापुरुषोत्तमः, पितुः, वनम्, निवासम्, लंका-राज्यम्, पत्नी

उत्तरम्-
मर्यादापुरुषोत्तमः, पितुः, निवासम्, पत्नी, वनम्, रावणः, रावणम्, लंकाराज्यम्।

प्रश्न 3.
प्रातःकालः
प्रात:कालः अति ______________ भवति। वृक्षेषु ______________ मधुरं कूजन्ति। उद्यानेषु ______________ विकसन्ति। ______________ सुगन्धः शुद्धः च अस्ति। जनाः ______________ गच्छन्ति। यदा ______________ पूर्वदिशायाम् उदयं गच्छति, तदा दृश्यम् ______________ भवति। प्रातः जनाः ______________ उल्लासेन कुर्वन्ति। छात्राः प्रसन्नमुखेन ______________ पठनाय गच्छन्ति। सर्वे नवजीवनम् इव ______________।

मञ्जूषा – भ्रमणाय, सूर्यः, स्वस्वकार्यम्, विद्यालयम्, पवनः, सुखकरः, खगाः, अनुभवन्ति, मनोहरम्, पुष्पाणि

उत्तरम्-
सुखकरः, खगाः, पुष्पाणि, पवनः, भ्रमणाय, सूर्यः, मनोहरम्, स्व-स्वकार्यम्, विद्यालयम्, अनुभवन्ति।

प्रश्न 4.
पितामही
पितामही प्रातः ______________ शयनात् उत्तिष्ठति। सा ______________ करोति। स्नानस्य पश्चात् सा देवस्य ______________ करोति। सा भक्तिगीतम् ______________। सा ______________ नमति। सा वदति सर्याय ______________। सा वदति-“सर्यः सकल-संसाराय ______________ यच्छति। एतस्मात कारणात् ______________ पूजनीयः अस्ति। यदा-कदा सा ______________ अपि गच्छति।

मञ्जूषा – सूर्यः, सूर्यम्, नमः, जीवनम्, पञ्चवादने, पूजनम्, गायति, देवालयम्, स्नानम्

उत्तरम्-
पञ्चवादने, स्नानम्, पूजनम्, गायति, सूर्यम्, नमः, जीवनम्, सूर्यः, देवालयम्।

प्रश्न 5.
राष्ट्रपक्षी मयूरः
प्रत्येक-देशस्य कोऽपि ______________ अस्ति। यथा श्येन: अमेरिकादेशस्य, तथा मयूरः ______________ राष्ट्रपक्षी अस्ति। एषः अतीव ______________ पक्षी अस्ति। ______________ यदा एषः मेघान् पश्यति तदा ______________ नृत्यति। तस्मिन् काले एतस्य पक्षाणाम् ______________ अद्भुतम्। मयूरः ______________ खादति। एषः वनेषु ______________ च वसति। मयूरस्य ______________ दर्शनीयम् अस्ति। अस्य मस्तके शिखण्डः मुकुटम् इव शोभते, अतएव अस्य नाम ______________ अपि अस्ति।

मञ्जूषा- भारतदेशस्य, नृत्यम्, आनन्देन, सर्पान्, सौन्दर्यम्, उपवनेषु, शिखण्डी, मनोहरः, राष्ट्रपक्षी, वर्षाकाले।

उत्तरम्-
राष्ट्रपक्षी, भारतदेशस्य, मनोहरः, वर्षाकाले, आनन्देन, सौन्दर्यम्, सर्पान्, उपवनेषु, नृत्यम्, शिखण्डी।

दुर्बुद्धि विनश्यति Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 2

By going through these CBSE Class 7 Sanskrit Notes Chapter 2 दुर्बुद्धि विनश्यति Summary, Notes, word meanings, translation in Hindi, students can recall all the concepts quickly.

Class 7 Sanskrit Chapter 2 दुर्बुद्धि विनश्यति Summary Notes

दुर्बुद्धि विनश्यति पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ की कथा ‘पञ्चतन्त्र’ नामक ग्रंथ से ली गयी है। ‘पञ्चतन्त्र’ के लेखक पं० विष्णुशर्मा हैं । इस कथा के द्वारा बताया गया है कि अनुचित समय पर बोलने से कैसे सब कुछ नष्ट हो जाता है। कभी-कभी मौन रहकर भी कार्य सफल हो सकता है।

दुर्बुद्धि विनश्यति Summary

प्रस्तुत पाठ की कथा पं. विष्णुशर्मा जी के प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘पंचतंत्र’ में से ली गई है। इस कथा में बताया गया है कि उचित-अनुचित समय देखकर ही बोलना चाहिए तथा मित्रों की बात को मानना चाहिए। मगध देश में फुल्लोत्पल नामक तालाब था। उस तालाब में संकट और विकट नामक दो हंस तथा कम्बुग्रीव नामक उनका मित्र कछुआ रहता था।
दुर्बुद्धि विनश्यति Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 2

एक बार मछुआरे वहाँ आए और कहने लगे-‘कल हम सभी जलचर प्राणियों को मार डालेंगे।’ यह सुन कर भयभीत कछुआ अपने दोनों मित्रों से सहायता के लिए विनती करने लगा।

कछुए के कहने पर उन हंसों ने एक डण्डे को दोनों किनारों से चोंच में पकड़ लिया तथा कछुए को उस डण्डे के मध्य भाग को मुख से पकड़ कर लटकने के लिए कहा। उन्होंने उसे समझाया कि वह मार्ग में बिल्कुल न बोले अन्यथा उसकी मृत्यु हो सकती है। कछुए ने उनकी बात मानी तथा उनके कहे अनुसार किया।

दुर्बुद्धि विनश्यति Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 2.1

तब वे हंस उस कछुए को लेकर दूसरे तालाब में पहुँचाने के लिए उड़ चले। रास्ते में कुछ ग्वाले उस दृश्य को देख कर आश्चर्य प्रकट करने लगे और कहने लगे-‘देखो, हंसों के साथ कछुआ भी उड़ रहा है।’ उनकी बात सुन कर ज्यों ही कछुए ने कुछ कहने के लिए अपना मुख खोला, त्यों ही वह पृथ्वी पर धड़ाम से गिरा और मर गया। शिक्षा-जो हितैषी व्यक्ति की बात को नहीं मानता है, वह शीघ्र नष्ट हो जाता है।

दुर्बुद्धि विनश्यति Word Meanings Translation in Hindi

(क) अस्ति मगधदेशे फुल्लोत्पलनाम सरः।
तत्र संकटविकट हंसौ निवसतः। कम्बुग्रीवनामकः
तयोः मित्रम् एकः कूर्मः अपि तत्रैव प्रतिवसति स्म।।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
सरः-तालाब (pond), हंसौ-हंस (द्विव०) (two swans), कूर्मः/कच्छपः-कछुआ (tortoise), तत्रैव (तत्र + एव)-वहाँ ही (there), प्रतिवसति स्म-रहता था (lived).

सरलार्थ :
मगध प्रदेश में फुल्लोत्पल नामक तालाब था। वहाँ संकट और विकट नामक दो हंस रहते थे। कम्बुग्रीव नामक उन दोनों का मित्र एक कछुआ भी वहीं रहता था।

English Translation:
There was a pond named Phullotpal in Magadh a province. Two swans Sankat and Vikat lived there. One tortoise named Kambugreev, a friend of both (swans) also lived there.

(ख) अथ एकदा धीवराः तत्र आगच्छन्। ते अकथयन्- “वयं श्वः मत्स्यकूर्मादीन् मारयिष्यामः।” एतत् श्रुत्वा कूर्मः अवदत्-“मित्रे! किं युवाभ्याम् धीवराणां वार्ता श्रुता? अधुना किम् अहं करोमि?” हंसौ अवदताम्-“प्रातः यद् उचितं तत्कर्त्तव्यम्।” कूर्मः अवदत्-“मैवम्। तद् यथाऽहम् अन्यं ह्रदं गच्छामि तथा कुरुतम्।” हंसौ अवदताम् “आवां किं करवाव?” कूर्मः अवदत्-“अहं युवाभ्यां सह आकाशमार्गेण अन्यत्र गन्तुम् इच्छामि।”

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
धीवरा:-मछुआरे (fishermen), वार्ता-वार्तालाप (conver sation), श्व:-कल (आनेवाला) (tomorrow), मत्स्यकूर्मादीन्-मछली, कछुओं आदि को (to fish, tortoise etc.), मारयिष्यामः-मारेंगे (shall kill), मैवम् (मा + एवम् )-ऐसा नहीं (not like this), हृदम्-तालाब को (to pond), आकाशमार्गेण-आकाश मार्ग से (through the sky).

सरलार्थ :
इसके पश्चात् एक बार मछुआरे वहाँ आये और कहा-“हम सब कल मछली, कछुए आदि को मारेंगे।” यह सुनकर कछुआ बोला-“मित्र! क्या तुमने मछुआरों की बातचीत सुनी। अब मैं क्या करूँ?” दोनों हंस बोले-“सुबह जो उचित है, वह करना चाहिए।” कछुआ बोला-“ऐसा मत करो, जिससे मैं दूसरे तालाब पर जा सकूँ, वैसा करो।” दोनों हंस बोले-“हम दोनों क्या करें।” कछुआ बोला- “मैं तुम दोनों के साथ आकाश-मार्ग से दूसरे स्थान पर जाने की इच्छा करता हूँ।”

English Translation :
Then once fishermen came there and said, “Tomorrow we will catch all the fish and tortoise etc.” On hearing this the tortoise said, “Friends! Did you hear what the fishermen said? What do I do now?” Both the swans said, “In the morning, we should do what is right.” The tortoise said, “Don’t do this. Do that (by which) I can go to the other pond.” Both the swans said, “What do we do?” The tortoise said, “I wish to go to another pond through the sky with both of you.”

(ग) हंसौ अवदताम्-“अत्र कः उपायः?” कच्छपः वदति-“युवां काष्ठदण्डम् एकं चञ्च्वा धारयताम्। अहं काष्ठदण्डमध्ये अवलम्ब्य युवयोः पक्षबलेन सुखेन गमिष्यामि।” हंसौ अकथयताम्-“सम्भवति एषः उपायः। किन्तु अत्र एकः अपायोऽपि वर्तते। आवाभ्यां नीयमानं त्वामवलोक्य जनाः किञ्चिद्वदिष्यन्ति एव। यदि त्वमुत्तरं दास्यसि तदा तव मरणं निश्चितम्। अतः त्वम् अत्रैव वस।” तत् श्रुत्वा क्रुद्धः कूर्मः अवदत्-“किमहं मूर्खः? उत्तरं न दास्यामि।किञ्चिदपि न वदिष्यामि।” अतः अहं यथा वदामि तथा युवां कुरुतम्।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
चञ्च्वा – चोंच से (with the beak), धारयताम्-धारण करें (द्विव०) (hold), अवलम्ब्य-नीचे लटककर/सहारा लेकर (Hanging with support), पक्षबलेन पंखों के बल से (with the force of wings), अपायः-हानि (harm), नीयमानम्-ले जाए जाते हुए को (being carried away), अवलोक्य-देखकर (on seeing), काष्ठदण्डम्-लकड़ी का डण्डा (wooden stick), श्रुत्वा -सुनकर (on hearing).

सरलार्थ :
हंस बोले-“यहाँ क्या उपाय है?” कछुआ बोला-“तुम दोनों एक लकड़ी के डण्डे को चोंच से पकड़ो। मैं लकड़ी के डण्डे के बीच में लटककर तुम दोनों के पंखों के बल से सुखपूर्वक (आराम से) जाऊँगा।” हंस बोले “यह उपाय हो सकता है। परन्तु यहाँ एक हानि भी है। हम दोनों के द्वारा ले जाए जाते हुए तुम्हें देखकर लोग कुछ बोलेंगे ही। यदि तुम उत्तर दोगे तब तुम्हारा मरना निश्चित ही है। इसलिए तुम यहीं रहो।” उसे सुनकर क्रोधित कछुआ बोला-“क्या मैं मूर्ख हूँ? उत्तर नहीं दूंगा। कुछ भी नहीं बोलूँगा।” इसलिए जैसा कहता हूँ वैसा तुम दोनों करो।

English Translation :
The swans said, “What is the solution here?” The tortoise said, “Both of you hold a wooden stick with your beak. I will hang in the middle of the wooden stick and easily go over with the force of your wings.” The swans said, “This solution is possible. But there is one disadvantage also. On seeing you being carried by us, people will say something. If you reply then your death is sure. Therefore, you stay here only.” On hearing this the angry tortoise said, “Am I a fool? I shall not reply. I shall not say anything.” Therefore, both of you do what I tell you to do.

(घ) एवं काष्ठदण्डे लम्बमानं कूर्म पौराः अपश्यन् पश्चाद् अधावन् अवदन् च-“हंहो! महदाश्चर्यम्।हंसाभ्याम् सह कूर्मोऽपि उड्डीयते।”कश्चिद्वदति-“यद्ययं कूर्मः कथमपि निपतति तदा अत्रैव पक्त्वा खादिष्यामि।” अपरः अवदत्-“सरस्तीरे दग्ध्वा खादिष्यामि।” अन्यः अकथयत्-“गृहं नीत्वा भक्षयिष्यामि” इति।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
लम्बमानम्-लटके हुए (को) (hanging), उड्डीयते-उड़ रहा है (is flying), महदाश्चर्यम्-बहुत अचम्भा (very surprising), कथमपि (कथम् + अपि)-किसी प्रकार (somehow), पक्त्वा -पकाकर (after cooking), सरस्तीरे-तालाब के किनारे (by pond’s side), दग्ध्वा -जलाकर (after cooking), खादिष्यामि-खाऊँगा (will eat), भक्षयिष्यामि-खाऊँगा (will eat), अधावन्-दौड़े (ran), पौरा:-नगरवासियों ने(citizans).

सरलार्थ :
इस प्रकार लकड़ी के डण्डे पर लटके हुए कछुए को नागरकों ने देखा/बाद में पीछे दौड़े और बोले- “अहा! बहुत अचम्भा है । हंसों के साथ कछुआ भी उड़ रहा है।” कोई बोला- “यदि यह कछुआ कैसे भी (किसी तरह) गिरता है, तब यहीं पकाकर खाऊँगा।” दूसरा बोला- “तालाब के किनारे पकाकर खाऊँगा।” अन्य ने कहा- “घर ले जाकर खाऊँगा।”

English Translation :
On doing so (and), seeing the tortoise hanging from the wooden stick, the cowherds ran after them and said, “Oh! very surprising. The tortoise is also flying with the swans.” Someone said, “If this tortoise falls somehow, then I will cook and eat it here only.” The second one said, “I will cook (roast) it by the pond’s side and eat it.” Another one said, “I will take it home to eat it.”

(ङ) तेषां तद् वचनं श्रुत्वा कूर्मः क्रुद्धः जातः। मित्राभ्यां दत्तं वचनं विस्मृत्य सः
अवदत्-“यूयं भस्मं खादत।” तत्क्षणमेव कूर्मः दण्डात् भूमौ पतितः। पौरैः सः मारितः। अत एवोक्तम्

सुहृदां हितकामानां वाक्यं यो नाभिनन्दति।
स कूर्म इव दुर्बुद्धिः काष्ठाद् भ्रष्टो विनश्यति॥

शब्दार्थाः (Word Meanings):
श्रुत्वा-सुनकर (on hearing), विस्मृत्य- भूलकर (forgetting), भस्मं-राख (ash), पौरैः-नागरिकों के द्वारा (by citizans), मित्राभ्यां-मित्रों को/के लिए (to/for friends), सुहृदाम्-अच्छे मित्रों के (of friends), हितकामानाम्-कल्याण की इच्छा रखनेवालों के (of well-wishers), अभिनन्दति-प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करता है/करती है (accepts gladly), दुर्बुद्धिः दुष्ट बुद्धिवाला (wicked minded), काष्ठाद्-लकड़ी से (from wood), भूमौ-जमीन पर (on the ground), भ्रष्टः -गिर गया (fallen).

सरलार्थः –
उनके उस वचन को सुनकर कछुआ क्रोधित हो गया। मित्रों को दिए गए वचन को भूलकर, वह बोला- “तुम सब राख खाओ।” उसी क्षण कछुआ डण्डे से भूमि पर गिर गया। नागरिकों के द्वारा वह मार डाला गया। इसलिए कहा गया है कल्याण की इच्छा रखनेवाले मित्रों के वचन को जो प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार नहीं करता है, वह लकड़ी से गिरे हुए दुष्टबुद्धि कछुए के समान नष्ट होता है।

English Translation:
On hearing these words of those (people) the tortoise became angry. Forgetting his promise given to his friends, he spoke, “You all eat ash.” At the very moment, the tortoise fell from the sky and was killed by the cowherds. Therefore, it has been said. He who does not accept gladly the words of his well-wishing friends is destroyed like the foolish tortoise fallen from the stick.

CBSE Class 7 Sanskrit रचना अपठितांश-अवबोधनम्

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CBSE Class 7 Sanskrit रचना अपठितांश-अवबोधनम्

अधोदत्तं प्रत्येकं अनुच्छेदं पठित्वा तदाधारिताम् प्रश्नान् उत्तरत।

1. भारते षड् ऋतवः भवन्ति- वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरद्, हेमन्तः, शिशिरः च। ग्रीष्मकालस्य पश्चात् वर्षाऋतुः आगच्छति। वर्षाकाले, ग्रीष्मस्य तापेन शुष्काः, पादपाः पुनः हरिताः। आकाशः कृष्णैः, मेघैः आच्छादितः भवति। नद्यः जलवेगेन प्रवहन्ति। कुत्रचित् अत्यधिका वृष्टिः भवति कुत्रचित् च अनावृष्टिः। वृष्टेः अभावात् कृषकाः महत् कष्टम् अनुभवन्ति। ते वर्षांदेवं प्रार्थयन्ति। वर्षाजलेन धरा शस्य-श्यामला भवति। एतत् दृष्ट्वा कृषकाणां चित्तं प्रफुल्लितम् भवति।

I. एकपदेन उत्तरत-

प्रश्न 1.
भारते कति ऋतवः भवन्ति?
उत्तरम्-
षड्

प्रश्न 2.
ग्रीष्मस्य पश्चात् कः ऋतुः आगच्छति?
उत्तरम्-
वर्षा

प्रश्न 3.
नद्यः कथं प्रवहन्ति?
उत्तरम्-
जलवेगेन

प्रश्न 4.
वृष्टेः अभावात् के महत् कष्टम् अनुभवन्ति?
उत्तरम्-
कृषकाः

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-

प्रश्न 1.
भारते षड् ऋतवः के सन्ति?
उत्तरम्-
भारते षड् ऋतवः सन्ति-वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरद्, हेमन्तः, शिशिरः च।

प्रश्न 2.
किं दृष्ट्वा कृषकाणां चित्तं प्रफुल्लितम् भवति?
उत्तरम्-
वर्षाजलेन धरा शस्यश्यामला इति दृष्ट्वा कृषकाणां चित्तं प्रफुल्लितम् भवति।

III. भाषिक कार्यम्-

प्रश्न 1.
‘वर्षाकाले ग्रीष्मस्य तापेन शुष्काः पादपाः पुनः हरिताः भवन्ति।’ इति वाक्ये-
(i) ‘भवन्ति’ क्रियापदस्य कर्ता कः? (तापेन, हरिताः, पादपाः)
(ii) ‘पादपाः’ इति पदस्य किं किं विशेषणम् अत्र प्रयुक्तम्? _______ ________
(iii) ‘तापेन’ अत्र किं विभक्तिः वचनम् च? _______ ________
उत्तरम्-
(i) पादपाः
(ii) शुष्काः, हरिताः
(iii) तृतीया एकवचनम् च

प्रश्न 2.
विपर्ययम् लिखत- वृष्टिः ________
उत्तरम्-
अनावृष्टिः

प्रश्न 3.
‘अनुभवन्ति’ अत्र कः उपसर्गः कः च धातुः? ________ ________
उत्तरम्-
अनु, भू

प्रश्न 4.
पदानां लिङ्गम् निर्दिशत।
(i) धरा ________
(ii) चित्तम् ________
(iii) पादपाः ________
उत्तरम्-
(i) स्त्रीलिङ्गम्
(ii) नपुंसकलिङ्गम्
(iii) पुंल्लिङ्गम्।

2. भारतवर्षः अस्माकं जन्मभूमिः। वयं भारतीयाः स्मः। भारते रम्याः देवालयाः, चित्र-विचित्र-उत्सवाः, विविधाः, वेशभूषाः। अत्र अनेकानि दर्शनीयानि स्थानानि। वैदेशिकाः अत्र पर्यटनाय आगच्छन्ति। देशस्य च विविधतां दृष्ट्वा विस्मिताः भवन्ति। यदि पर्यटकानां निवासाय भ्रमणाय च सुव्यवस्था भवेत् तर्हि अधिकाधिकाः वैदेशिकाः पर्यटकाः आगमिष्यन्ति। भारत-सर्वकारस्य पर्यटन-विभागः लाभान्वितः भविष्यति। देशः च समृद्धः भविष्यति। ‘अतिथिदेवो भव’ इति शास्त्रवचनम्।

I. एकपदेन उत्तरत-

प्रश्न 1.
अस्माकं जन्मभूमिः कः?
उत्तरम्-
भारतवर्षः

प्रश्न 2.
वयम् के स्म?
उत्तरम्-
भारतीयाः

प्रश्न 3.
के अत्र पर्यटनाय आगच्छन्ति?
उत्तरम्-
वैदेशिकाः

प्रश्न 4.
कः देवो भवेत्?
उत्तरम्-
अतिथिः।

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-

प्रश्न 1.
सर्वकारस्य पर्यटनविभागः कथं लाभान्वितः भवेत् भवन्ति?
उत्तरम्-
यदि पर्यटकानां निवासाय भ्रमणाय च सुव्यवस्था भवेत् तर्हि अधिकाधिकाः वैदेशिकाः पर्यटकाः आगमिष्यन्ति, एतेन भारतसर्वकारस्य पर्यटन-विभागः लाभान्वितः भविष्यति।

प्रश्न 2.
वैदेशिकाः पर्यटकाः कथं विस्मिताः भवन्ति।?
उत्तरम्-
भारतदेशस्य विविधतां दृष्ट्वा वैदेशिकाः पर्यटकाः विस्मिताः भवन्ति।

III. भाषिक कार्यम्-

प्रश्न 1.
‘देशः च समृद्धः भविष्यति’- इति वाक्ये-
(i) ‘भविष्यति’ क्रियापदस्य कर्ता कः? (देशः, समृद्धः) _______
(ii) ‘भविष्यति’ अत्र कः धातुः? __________ कः च लकार:? _______
(iii) अत्र किम् अव्ययम्? _________
(iv) एतत् वाक्यं बहुवचने परिवर्तयत? __________
उत्तरम्-
(i) देशः
(ii) भू, लृट्
(iii) च
(iv) देशाः च समृद्धाः भविष्यन्ति।

प्रश्न 2.
विपर्ययम् चित्वा लिखत – देशीयाः
उत्तरम्-
वैदेशिकाः

प्रश्न 3.
दृष्ट्वा- अत्र कः धातुः कः च प्रत्ययः?
उत्तरम्-
दृश्, क्त्वा।

3. गङ्गा देशस्य प्रमुखा नदी। गङ्गायाः अपरं नाम भागीरथी। एषा नदी हिमालयात् निर्गच्छति। एतस्याः नद्याः तीरे बहवः तीर्थाः मुनीनाम् आश्रमाः च सन्ति। हरिद्वारनगरम् प्रसिद्ध तीर्थस्थानम् गंगानद्याः तटम् अलंकरोति। अत्र अनेके देवालयाः सन्ति। सायंकालस्य दृश्यम् तु अत्र अनुपमम् एव। भक्ताः गंगादेवीं श्रद्धया पूजयन्ति, प्रज्वलितान् दीपान् च नद्याः जले प्रवाहयन्ति। यदा प्रज्वलिता: दीपा: जलेषु तरन्ति, तदा एवं प्रतीयते यत् ताराणां समूह : आकाशात् अवतीर्य पृथिव्याम् आगतः। गंगानदी परमपावना नदी मन्यते।

I. एकपदेन उत्तरत-

प्रश्न 1.
देशस्य प्रमुखा नदी का?
उत्तरम्-
गङ्गा

प्रश्न 2.
एषा नदी कस्मात् पर्वतात् निर्गच्छति?
उत्तरम्-
हिमालयात्

प्रश्न 3.
भक्ताः गंगादेवीं कथम् पूजयन्ति?
उत्तरम्-
श्रद्धया

प्रश्न 4.
भक्ताः कान् नद्याः जले प्रवाहयन्ति?
उत्तरम्-
दीपान्।

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-

प्रश्न 1.
गंगायाः तीरे के सन्ति?
उत्तरम्-
गङ्गायाः तीरे बहवः तीर्थाः मुनीनाम् च आश्रमाः सन्ति।

प्रश्न 2.
यदा प्रज्वलिताः दीपाः नद्याम् तरन्ति तदा किं प्रतीयते?
उत्तरम्-
यदा प्रज्वलिताः दीपा: नद्याम् तरन्ति तदा एवं प्रतीयते यत् ताराणाम् समूह : आकाशात् अवतीर्य पृथिव्याम् आगतः।

III. भाषिक कार्यम्-

प्रश्न 1.
‘यदा प्रज्वलिताः दीपाः जलेषु तरन्ति’ इति वाक्ये-
(i) ‘तरन्ति’ क्रियापदस्य कर्ता क:? (प्रज्वलिताः, दीपाः, जलेषु)
(ii) अत्र किम् अव्ययपदम्?
(iii) ‘जलेषु’ अत्र किं विभक्तिः वचनम् च?
(iv) ‘तरन्ति’ अत्र धातुः कः?
उत्तरम्-
(i) दीपाः
(ii) यदा
(ii) सप्तमी, बहुवचनम्
(iv) तृ

प्रश्न 2.
गंगा देशस्य प्रमुखा नदी। इति वाक्ये-
(i) ‘नदी’ शब्दस्य विशेषणपदम् किम्?
(ii) रिक्तस्थानपूर्ति कुरुत– देशस्य _______ (द्वि०व०) _______ (ब०व०)
उत्तरम्-
(i) प्रमुखा
(ii) देशयोः, देशानाम्

प्रश्न 3.
पदपरिचयं यच्छत।
(i) नद्याः _______ मूल शब्दाः _______ विभक्तिः _______ वचनम्
(ii) श्रद्धया _______ मूलशब्दः _______ विभक्तिः _______ वचनम्
उत्तरम्-
(i) नदी, षष्ठी, एकवचनम्
(ii) श्रद्धा, तृतीया, एकवचनम्

4. लोकमान्यः बालगंगाधरतिलक : महान् देशभक्तः आसीत्। बाल्यकालात् एव एतस्य देशभक्तस्य रुचिः राजनीतौ आसीत्। अत एव सः विधिशास्त्रस्य अध्ययनम् अकरोत्। एषः राजद्रोही इति दोषारोपणं कृत्वा ब्रिटिश-सर्वकारः तम् कारागारे अक्षिपत्। सः कारावास-काले अपि प्रयत्नशीलः आसीत्। सः गीतायाः अध्ययनं कृत्वा ‘गीता-रहस्यम्’ नाम महाग्रन्थम् अरचयत्। राष्ट्रे नवचेतना जागरयितुं सः आजीवनं प्रयत्नम् कृतवान्। एषः राष्ट्रवादी ‘स्वराज्यम् अस्माकं जन्मसिद्धः अधिकारः’ इति अघोषयत्।

I. एकपदेन उत्तरत-

प्रश्न 1.
देशभक्तस्य तिलकस्य रुचिः कस्याम् आसीत्?
उत्तरम्-
राजनीतौ

प्रश्न 2.
सः कस्य शास्त्रस्य अध्ययनम् अकरोत्?
उत्तरम्-
विधिशास्त्रस्य

प्रश्न 3.
सः कम् ग्रन्थम् अरचयत्?
उत्तरम्-
गीता-रहस्यम्

प्रश्न 4.
महान् देशभक्तः कः आसीत्?
उत्तरम्-
बालगंगाधरतिलक:।

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-

प्रश्न 1.
एषः राष्ट्रवादी किम् अघोषयत्?
उत्तरम्-
एषः राष्ट्रवादी अघोषयत्- ‘स्वराज्यम् अस्माकं जन्मसिद्धः अधिकारः’ इति।

प्रश्न 2.
सः आजीवनं किं अकरोत्?
उत्तरम्-
स: आजीवनं राष्ट्र नवचेतना जागरयितुं प्रयत्नम् अकरोत्।

III. भाषिककार्यत-
यथानिर्देशम् उत्तरत-

प्रश्न 1.
राजनीतौ __________ मूल शब्दः __________ विभक्तिः __________ वचनम्
उत्तरम्-
राजनीति, सप्तमी, एकवचनम्

प्रश्न 2.
अकरोत __________ धातः __________ लकार: __________ पुरुषः __________ वचनम
उत्तरम्-
कृ, लङ, प्रथम एक

प्रश्न 3.
कृत्वा __________ धातः __________ प्रत्ययः
उत्तरम्-
कृ, क्त्वा

प्रश्न 4.
‘एतस्य देशभक्तस्य’-अत्र किं विशेषणपदम्? __________
उत्तरम्-
एतस्य

प्रश्न 5.
समानार्थकं लिखत-
(i) अलिखत् __________
(ii) जीवन-पर्यन्तम् __________
उत्तरम्-
(i) अरचयत्
(ii) आजीवनम्

प्रश्न 6.
लिङ्गम् निर्दिशत-
(i) गीतायाः __________
(ii) एतस्य __________
उत्तरम्-
(i) स्त्रीलिङ्गम्
(ii) पुंल्लिङ्गम्

5. समाचारपत्रम् जीवनस्य अनिवार्यम् अङ्गम् जातम्। प्रातः भवति सति दैनिकं समाचारपत्रम् गृहे गृहे आगच्छति। गृहस्य सदस्याः समाचार-पत्रस्य प्रतीक्षां कुर्वन्ति। जनक: समाचारं पठितुम् इच्छति, पुत्रः खेल-समाचारम् ज्ञातुम् उत्सुक:। समाचार-पत्रे न केवलं देश-विदेश-वार्ताः राजनीति-अर्थनीति-समाचाराः परं लेखाः कथाः कार्टून-चित्राणि अपि सन्ति। समाचारपत्र-पठनेन ज्ञानवृद्धिः अपि भवति। बाला: युवकाः, वृद्धाः, गृहिण्यः सर्वे किञ्चित् रुचिकरम् अत्र लभन्ते। समाचार-पत्राणि विविधासु भाषासु प्रकाश्यन्ते।

I. एकपदेन उत्तरत-

प्रश्न 1.
किम् जीवनस्य अनिवार्यम् अङ्गम् जातम्?
उत्तरम्-
समाचारपत्रम्

प्रश्न 2.
कः खेलसमाचारान् ज्ञातुम् उत्सुक:?
उत्तरम्-
पुत्रः

प्रश्न 3.
कानि विविधासु भाषासु प्रकाश्यन्ते?
उत्तरम्-
समाचारपत्राणि

प्रश्न 4.
समाचारपत्र-पठनेन किं भवति?
उत्तरम्-
ज्ञानवृद्धिः।

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-

प्रश्न 1.
समाचारपत्रे किं किं भवति?
उत्तरम्-
समाचारपत्रे देशविदेश-वार्ताः राजनीति-अर्थनीति-समाचाराः लेखाः, कथाः कार्टूनचित्राणि च अपि भवन्ति-

प्रश्न 2.
के समाचारपत्रे किंचित् रुचिकरम् लभन्ते?
उत्तरम्-
बालाः, युवकाः, वृद्धाः, गृहिण्यः च अपि समाचारपत्रे किंचिद् रुचिकरं लभन्ते।

III. भाषिककार्यम्-
यथानिर्देशम् उत्तरत-
‘प्रातः भवति, दैनिकं समाचारपत्रं गृहे गृहे आगच्छति’। इति वाक्ये

प्रश्न 1.
‘आगच्छति’ क्रियापदस्य कर्ता कः? (प्रातः, दैनिकं, समाचारपत्रम्)
उत्तरम्-
समाचारपत्रम्

प्रश्न 2.
अत्र किम् अव्ययपदम् प्रयुक्तम्?
उत्तरम्-
प्रातः

प्रश्न 3.
गृहे गृहे- अत्र किं विभक्तिवचनम्? (द्वितीया-द्विवचनम्, प्रथमा-द्विवचनम्, सप्तमी-एकवचनम्)
उत्तरम्-
सप्तमी-एकवचनम्

प्रश्न 4.
‘आगच्छति’ अत्र कः धातुः कः च उपसर्ग:? _______ _______
उत्तरम्-
गम्, आ

प्रश्न 5.
रिक्तस्थानानि पूरयत।
समाचारपत्रम् _______ (द्विवचन) _______ (बहुवचन)
आगच्छति _______ (द्विवचन) _______ (बहुवचन)
उत्तरम्-
समाचारपत्रे, समाचारपत्राणि; आगच्छतः, आगच्छन्ति।

प्रश्न 6.
दैनिक समाचारपत्रम्- अत्र किं विशेषणम्?
उत्तरम्-
दैनिकं

प्रश्न 7.
विलोमपदम् चित्वा लिखत। सायम् _______
उत्तरम्-
प्रातः

सुभाषितानि Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 1

By going through these CBSE Class 7 Sanskrit Notes Chapter 1 सुभाषितानि Summary, Notes, word meanings, translation in Hindi, students can recall all the concepts quickly.

Class 7 Sanskrit Chapter 1 सुभाषितानि Summary Notes

सुभाषितानि पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ में विद्वानों के सुभाषित श्लोक हैं। श्लोकों के द्वारा शिक्षा दी गई है कि जीवन में क्या-क्या उपयोगी हैं और सफलता के लिए मनुष्य के व्यवहार और विचार कैसे होने चाहिए।

सुभाषितानि Summary

यहाँ संस्कृत के सुन्दर वचनों का संकलन है। प्रथम श्लोक में सुभाषितों का महत्त्व बताया गया है। इस संसार में जल, अन्न और सुभाषित-ये तीन ही रत्न बताए गए हैं। हीरा, पन्ना आदि पत्थर के टुकड़ों को रत्न कहना व्यर्थ है।

दूसरे श्लोक में सत्य की महिमा बताई गई है। इस संसार में पृथ्वी, सत्य पर टिकी है। सूर्य, सत्य के आश्रय से तपता है। सारा विश्व सत्य पर टिका हुआ है। . तीसरे श्लोक में कहा है कि इस पृथ्वी पर अनेक रत्न हैं। यथा-दान, तप, शौर्य, विनय इत्यादि। ये सभी रत्न परमात्मा प्रदत्त हैं।

चौथे श्लोक में सज्जन की महिमा कही है। हमें सज्जनों के साथ बैठना चाहिए। सज्जनों का साथ करना चाहिए और उनके साथ ही मित्रता करनी चाहिए। पाँचवें श्लोक में कहा है कि व्यक्ति को ज्ञान के संग्रह में, आहार तथा व्यवहार के विषय में संकोच नहीं करना चाहिए। छठे श्लोक में क्षमा का महत्त्व बताया गया है। जिस व्यक्ति के पास क्षमा रूपी हथियार है, उसका दुष्ट व्यक्ति कुछ बिगाड़ नहीं सकता है।

सुभाषितानि Word Meanings Translation in Hindi

(क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
मूढः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते॥1॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
पृथिव्यां-धरती पर (on earth)
सुभाषितम्-सुन्दर वचन (good sayings)
मू?:-मूों के द्वारा (by the fools)
पाषाणखण्डेषु-पत्थर के टुकड़ों में (in stones)
रत्नसंज्ञा-रत्न का नाम (names of precious stones)
विधीयते-किया जाता है/दिया जाता है (is given).

सरलार्थ :
पृथ्वी पर जल, अन्न और सुवचन ये तीन ही रत्न हैं परंतु मूों के द्वारा पत्थर के टुकड़ों को रत्न का नाम दिया जाता है।

English Translation:
The three precious stones (jewels) on earth are water, food and good sayings. But the pieces of stones are called jewels by the fools.

(ख) सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्॥2॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
सत्येन-सत्य से (by truth)
धार्यते-धारण की जाती है (is held)
तपते-जलता है (shines/glows)
वाति-बहता है/बहती है (flows)
वायुश्च-और वायु (and air)
प्रतिष्ठितम्-स्थित है (exists).

सरलार्थ :
सत्य से पृथ्वी धारण की जाती है। सत्य से सूरज तपता है और सत्य से ही वायु प्रवाहित होती है। सब कुछ सत्य में समाहित (स्थित) है।

English Translation :
The earth is held by the truth. The sun shines by the truth. The wind blows by the truth. Everything is founded in Truth.

(ग) दाने तपसि शौर्ये च विज्ञाने विनये नये।
विस्मयो न हि कर्त्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा ॥3॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
तपसि-तपस्या में (in devotion)
शौर्ये-बल में (in strength)
विज्ञाने-विशेष ज्ञान में (in wisdom)
नये-नीति में (in morality)
विस्मयो-आश्चर्य (surprise)
बहुरना-अनेक रत्नों वाली (with various jewels)
कर्त्तव्यो-करना चाहिए (should do)
वसुन्धरा पृथ्वी (earth).

सरलार्थ :
दान में, तपस्या में, बल में, विशेष ज्ञान में, विनम्रता में और नीति में निश्चय ही आश्चर्य नहीं करना चाहिए। पृथ्वी बहुत रत्नों वाली है। अर्थात् पृथ्वी में बहुत से ऐसे रत्न भरे हुए हैं।

English Translation :
One must not feel surprised in charity, devotion, strength, wisdom, humility and morality. The earth is full of such jewels.

(घ) सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्।
सद्भिर्विवादं मैत्री च नासद्भिः किञ्चिदाचरेत् ॥4॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
सद्भिरेव (सद्भिः +एव)-सज्जनों के साथ ही (only with good persons)
सहासीत ( सह+आसीत)-साथ बैठना चाहिए (should sit with)
कुर्वीत-करना चाहिए (should do)
सद्भिर्विवादम् (सद्भिः +विवादम्)-सज्जनों के साथ विवाद (झगड़ा) (argument/ debate with good persons)
नासद्भिः (न+असद्भिः )-असज्जन लोगों के साथ नहीं (not with evil-minded persons)
मैत्री-मित्रता (friendship).

सरलार्थ :
सज्जनों के साथ ही बैठना चाहिए। सज्जनों के साथ संगति (रहन-सहन) करनी चाहिए। सज्जनों के साथ विवाद (तर्क-वितर्क) और मित्रता करनी चाहिए।असज्जनों (दुष्टों) के साथ कुछ भी व्यवहार नहीं करना चाहिए।

English Translation :
One must sit with the good persons. One must keep the company of good people. One must engage in debate with good people and befriend them. One must not interact with bad people.

(ङ) धनधान्यप्रयोगेषु विद्यायाः संग्रहेषु च।
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्॥5॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
धनधान्यप्रयोगेषु-धनधान्य के प्रयोग में/व्यवहार में (in the use of wealth)
संग्रहेषु-एकत्र करने (इकट्ठा करने) में (in collections)
त्यक्तलज्जः -संकोच को छोड़नेवाला (to give up hesitation)
भवेत्-हो (होता है) (to become).

सरलार्थ :
धन धान्य के प्रयोग में और विद्या के संचय में, आहार और व्यवहार में संकोच को छोड़नेवाला अर्थात् उदार प्रवृत्ति वाला व्यक्ति सुखी (होता है)।

English Translation :
One who does not hesitate i.e is generous (liberal) in the use of wealth, in gaining knowledge, in taking proper diet and in good behaviour remains happy.

(च) क्षमावशीकृतिर्लोके क्षमया किं न साध्यते।
शान्तिखड्गः करे यस्य किं करिष्यति दुर्जनः॥6॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :

क्षमावशीकृतिर्लोके (क्षमावशीकृति: लोके)-संसार में क्षमा (सबसे बड़ा)
वशीकरण है (forgiveness is the greatest virtue in the world by which one can win over people)
क्षमया-क्षमा से (by forgiveness)
साध्यते-साधा जाता है (is achieved, accomplished)
करे-हाथ में (in hand)
दुर्जन:-बुरे लोग (bad people).

सरलार्थ :
क्षमा संसार में (सबसे बड़ा) वशीकरण है। क्षमा से क्या (कार्य) पूर्ण नहीं होता है ? जिसके हाथ में क्षमारूपी तलवार है, उसका दुष्ट व्यक्ति क्या कर सकता है (क्या बुरा कर सकता है)?

English Translation :
Forgiveness is the greatest virtue in the world. What can not be achieved by forgiveness? What (harm) can a wicked person do to a person who has the sword of forgiveness in his hand?

CBSE Class 7 Sanskrit रचना पत्रलेखनम्

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CBSE Class 7 Sanskrit रचना पत्रलेखनम्

मञ्जूषातः उचितं पदं चित्वा पत्रं पूरयत-
(मञ्जूषा से उचित पद चुनकर पत्र पूरा कीजिए- Pick out the appropriate word form the box and complete letter.)

प्रश्न 1.
मित्रम् प्रति निमन्त्रणम् (मित्र के प्रति निमन्त्रण)

पश्चिम-विहारः
दिल्लीनगरम्
दिनाङ्क: X-X-12

प्रियमित्र अनुराग
सप्रेम ___________

अत्रकुशलम्, तत्र अपि ___________ भवेत्।
अग्रिमे सप्ताहे गुरुवासरे सप्तम्यां तारिकायां मम ___________ अस्ति। सायंकाले षड्वादने गृहे ___________ आयोजितः। सर्वे बन्ध-बान्धवाः उत्सवार्थम ___________। आशा अस्ति त्वमपि ___________ सह समारोहाय आगमिष्यसि। एतस्मिन् अवसरे वयम् सर्वे ___________ गास्यामः, नर्तिष्यामः उत्सवस्य च आनन्दम् ___________।
अहम् तव आगमनस्य ___________ करिष्यामि।
पितृभ्याम् मम प्रणामाः।

तव ___________
अर्णवः

मञ्जूषा – आगमिष्यन्ति, अनुभविष्यामः, प्रतीक्षाम्, मिलित्वा, नमस्ते, प्रियमित्रम्, परिवारेण, कुशलम्, प्रीतिभोजः, जन्मदिनम्।

उत्तरम्-
नमस्ते, कुशलम्, जन्मदिनम्, प्रीतिभोजः, आगमिष्यन्ति, परिवारेण, मिलित्वा, अनुभविष्यामः, प्रतीक्षाम्, प्रियमित्रम्।

प्रश्न 2.
मित्रं प्रति वर्धापनपत्रम् (मित्र के प्रति बधाई पत्र)

826, मॉडल टाउन
नागपुरम्
दिनांङ्क X-X-12

___________ राकेश
सप्रेम नमस्ते
अत्र सर्वविधम् कुशलम् अस्ति।
अद्य एव तव ___________ प्राप्तम्। इदं ___________ मम चित्तं प्रसन्नम् अभवत् यत् त्वं ___________ प्रथम स्थाने आगतः। त्वं सततं परिश्रमं करोषि। एतत् तस्य एव ___________ अस्ति। गृहस्य सर्व सदस्याः तुभ्यम् ___________ यच्छन्ति। त्वं सदैव ___________ कुरु इति शुभकामनाः।
मातृपितृचरणेषु मम सादरं ___________।

तव ___________
राजेशः

मञ्जूषा – प्रियमित्रम्, कक्षायाम्, उन्नतिम्, सुफलम्, प्रणामाः, पठित्वा, वर्धापनानि, प्रियमित्र, पत्रम्।

उत्तरम्-
प्रियमित्र, पत्रम्, पठित्वा, कक्षायाम्, सुफलम्, वर्धापनानि, उन्नतिम्, प्रणामाः, प्रियमित्रम्।

प्रश्न 3.
ज्येष्ठभ्रातरं प्रति अनुजस्य पत्रम् (बड़े भाई के प्रति छोटे भाई का पत्र)

छात्रावासः
कानपुरम्
दिनांङ्क X-X-12

पूज्यभ्रातः
___________ नमस्कारम्
अहं सानन्दः अस्मि।
भवान् मम दिनचर्याविषये ___________। अतः निवेदयामि। अहम् प्रातः ___________ उत्तिष्ठामि। सप्तवादनपर्यंत ___________ करोमि। तत्पश्चात् ___________ सज्जः भवामि। विद्यालयात् आगत्य अहं गणितस्य ___________ करोमि। अतः अधुना ___________ मम काठिन्यं दूरीभूतम्। संस्कृतविषये मम ___________ अति शोभनाः। स्वास्थ्य-रक्षणाय अपि अहं ___________ अस्मि। चिन्ता मा अस्तु।
गृहे सर्वेभ्यः मम प्रणामाः। अन्यत् सर्वं कुशलम्।

___________
अनुजः

मञ्जूषा – गणितविषये, सादरम्, प्रयत्नशीलः, पञ्चवादने, विद्यालयाय, अपृच्छत्, स्वाध्यायम्, भवदीयः, प्राप्ताङ्काः अभ्यासम्।

उत्तरम्-
सादरम्, अपृच्छत्, पञ्चवादने, स्वाध्यायम्, विद्यालयाय, अभ्यासम्, गणितविषये, प्राप्ताङ्काः प्रयत्नशीलः, भवदीयः।

प्रश्न 4.
पितरम् प्रति पुत्रस्य पत्रम् (पिता को पुत्र का पत्र)

छात्रावासः
नवदिल्ली
दिनांङ्क: X-X-12

पूज्य-पितृचरणाः
___________ प्रणामाः
भवतः आशीर्वादेन अहं ___________ अस्मि। मम ___________ सुष्टुः चलति। मम अर्धवार्षिकी ___________ समाप्ता। अहम् साम्प्रतम् कानिचित् ___________ क्रेतुम् इच्छामि। एतदर्थं कृपया शतद्वयम् ___________ प्रेषयतु।
मातृचरणेषु मम ___________। अनुजायै स्नेहराशिः।

___________
पीयूषः

मञ्जूषा – परीक्षा, प्रणतिः, सादरम्, सकुशलः, पुस्तकानि, भवदीयः पुत्रः, अध्ययनम्, रूप्यकाणि।

उत्तरम्-
सादरम्, सकुशलः, अध्ययनम्, परीक्षा, पुस्तकानि, रूप्यकाणि, प्रणतिः, भवदीयः पुत्रः।