त्रिवर्णः ध्वजः Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 8

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Class 7 Sanskrit Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः Summary Notes

त्रिवर्णः ध्वजः पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ में हमारे देश के राष्ट्रीय प्रतीक तिरंगे झंडे के विषय में बताया गया है। भारत के तिरंगे झंडे का क्या महत्त्व है ? तीन रंग कौन-कौन से हैं ? केसरी, सफेद और हरा रंग किसके सूचक हैं ? पाठ से षष्ठी व सप्तमी विभक्ति के प्रयोग का ज्ञान प्राप्त होता है।

त्रिवर्णः ध्वजः Summary

आज स्वतंत्रता दिवस है। विद्यालय के प्राचार्य ध्वजारोहण करेंगे। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। विद्यार्थियों में मिठाई बाँटी जाएगी। . हमारे देश का झण्डा तिरंगा है। इसमें तीन रंग हैं। यथा-केसरिया, श्वेत तथा हरा। सबसे ऊपर केसरिया रंग है। यह शौर्य का सूचक है। बीच में सफेद रंग सत्य का तथा नीचे हरा रंग समृद्धि का सूचक है। इन रंगों का अन्य महत्त्व भी है। केसरिया रंग त्याग और उत्साह का सूचक है। श्वेत रंग सात्त्विकता और पवित्रता का सूचक है।

त्रिवर्णः ध्वजः Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 8.1

हरा रंग पृथ्वी की शोभा और उर्वरता का सूचक है। . झण्डे के बीच में नीले रंग का पहिया है। इसे अशोक चक्र कहते हैं। यह न्याय और प्रगति का प्रवर्तक है। सारनाथ में अशोक स्तम्भ है। उससे ही इसका ग्रहण किया गया है।

इस पहिए में 24 अरे हैं। भारत की संविधान सभा में 22 जुलाई, 1947 को इस झण्डे को स्वीकार किया गया था। यह झण्डा राष्ट्र गौरव का प्रतीक है। इसलिए स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण किया जाता है।

त्रिवर्णः ध्वजः Word Meanings Translation in Hindi

(क) (केचन बालकाः काश्चन बालिकाश्च स्वतन्त्रता-दिवसस्य ध्वजारोहणसमारोहे
सोत्साहं गच्छन्तः परस्परं संलपन्ति।)
देवेश:- अद्य स्वतन्त्रता-दिवसः। अस्माकं विद्यालयस्य
प्राचार्यः ध्वजारोहणं करिष्यति। छात्राश्च सांस्कृतिककार्यक्रमान् प्रस्तोष्यन्ति। अन्ते च मोदकानि मिलिष्यन्ति।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
त्रिवर्णः ध्वजः-तिरंगा (तीन रंगों वाला) झंडा (tricolour flag), ध्वजारोहणसमारोहे-झण्डा फहराने के समारोह में (in flag-hoisting ceremony), गच्छन्तः-जाते हुए (while going), प्रस्तोष्यन्ति-प्रस्तुत करेंगे (will present), संलपन्ति-वार्तालाप करते हैं (are conversing), मोदकानि (ब०व०)-लड्डू (laddu/sweetmeats).

सरलार्थ :
(कुछ बालक और कुछ बालिकाएँ स्वतन्त्रता दिवस के ध्वजारोहण समारोह में उत्साहपूर्वक जाते हुए आपस में वार्तालाप कर रहे हैं।) देवेश-आज स्वतन्त्रता दिवस है। हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य ध्वजारोहण करेंगे (झंडा फहराएँगे) और विद्यार्थी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत करेंगे और अन्त में लड्डू मिलेंगे।

English Translation :
(Some boys and some girls are eagerly conversing among themselves while going to the flag-hoisting ceremony.) Devesh-Today is the Independence Day. The Principal of our school will hoist the flag. And students will present the cultural programmes. And in the end we shall get Laddus.

(ख) डेविड:- शुचे! जानासि त्वम्? अस्माकं ध्वजः कीदृशः?
शुचिः- अस्माकं देशस्य ध्वजः त्रिवर्णः इति।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
जानासि-जानते हो (knows), कीदृशः-कैसा (How, like), त्रिवर्ण:-तिरंगा (tricolour).

सरलार्थ :
डेविड-शुचि! क्या तुम जानती हो? हमारा झण्डा कैसा है? शुचि-हमारे देश का झंडा तिरंगा है।

English Translation :
David-Shuchi! do you know? What is our flag like? Shuchi-Oh! The flag of our country is tricolour.

(ग) सलीमः-रुचे! अयं त्रिवर्णः कथम्?
रुचिः- अस्मिन् ध्वजे त्रयः वर्णाः सन्ति, अतः त्रिवर्णः। किं त्वम् एतेषां वर्णानां नामानि जानासि?
सलीमः- अरे! केशरवर्णः, श्वेतः, हरितः च एते त्रयः वर्णाः।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
वर्णाः (ब०व०)-रंग (colours), वर्णानां-रंगों का (of colours), केशरवर्ण:-केसरी रंग (saffron colour), श्वेतः-सफेद (white), हरितः-हरा (green).

सरलार्थ :
सलीम – रुचि! यह तिरंगा क्यों है? रुचि- इस झंडे में तीन रंग हैं, इसलिए यह तिरंगा है। क्या तुम इन रंगों के नाम जानते हो? सलीम – अरे ! केसरी रंग, सफेद और हरा ये तीन रंग हैं ?

English Translation :
Salim- Ruchi! why is it tricolour? Ruchi- This flag has three colours, therefore it is tricolour. Do you know the names of these colours? Salim- Oh! Saffron colour, white and green, These are the three colours.

(घ) देवेशः- अस्माकं ध्वजे एते त्रयः वर्णाः किं सूचयन्ति?
सलीमः- शृणु, केशरवर्णः शौर्यस्य, श्वेतः सत्यस्य, हरितश्च समृद्धेः सूचकाः सन्ति।
शुचिः- किम् एतेषां वर्णानाम् अन्यदपि महत्त्वम्?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
शृणु-सुनो (listen), हरितश्च (हरितः + च)-और हरा (and green), समृद्धेः-समृद्धि का (of prosperity), अन्यदपि (अन्यत् + अपि)-और भी (any other).

सरलार्थ :
देवेश- हमारे ध्वज में ये तीन रंग क्या सूचित करते हैं?
सलीम- सुनो, केसरी रंग वीरता का, सफ़ेद सत्य का और हरा समृद्धि का सूचक है।
शुचि- क्या इन रंगों का कोई और भी महत्त्व है?

English Translation :
Devesh- What do the three colours in our flag signify?
Salim- Listen, Saffron colour indicates bravery, White (indicates) truth and Green is an indication of prosperity.
Shuchi Is there any other significance of these colours? (Do these colours have any other significance)?

(ङ) डेविडः- आम्! कथं न? ध्वजस्य उपरि स्थितः केशरवर्णः त्यागस्य उत्साहस्य च
सूचकः। मध्ये स्थितः श्वेतवर्णः सात्त्विकतायाः शुचितायाः च द्योतकः।
अधः स्थितः हरितवर्णः वसुन्धरायाः सुषमायाः उर्वरतायाश्च द्योतकः।
तेजिन्दरः- शुचे! ध्वजस्य मध्ये एकं नीलवर्णं चक्रं वर्तते?
शुचिः – आम् आम्। इदम् अशोकचक्रं कथ्यते। एतत् प्रगतेः न्यायस्य च प्रवर्तकम्।
सारनाथे अशोकस्तम्भः अस्ति। तस्मात् एव एतत् गृहीतम्।

शब्दार्थाः (Word Meanings) : कथम् न-क्यों नहीं (why not), उपरि-ऊपर का (above), मध्ये-बीच में (in the middle), शुचितायाः-ईमानदारी से (of honesty), अधः-नीचे (below), वसुन्धरायाः-पृथ्वी का (of the earth), सुषमाया:-कान्ति/सौन्दर्य का (of beauty), उर्वरताया: उपजाऊपन का (of fertility), नीलवर्णम्-नीले रंग का (of blue colour), वर्तते-है (is), कथ्यते-कहा है (is said to be), प्रगते:-प्रगति का (of progress), प्रवर्तकम्-सूचक – (indicator), गृहीतम्-लिया गया है (is taken)

सरलार्थ :
डेविड- हाँ, क्यों नहीं, ध्वज के ऊपर स्थित केसरी रंग त्याग व उत्साह का सूचक है। बीच में स्थित सफ़ेद रंग सात्विकता और ईमानदारी का द्योतक है। नीचे स्थित हरा रंग पृथ्वी की सुषमा व उर्वरता का द्योतक है।
तेजिन्दर- हे शुचि! ध्वज के मध्य में एक नीले रंग का चक्र है?
शुचि- हाँ हाँ! यह अशोक चक्र कहलाता है। यह प्रगति और न्याय का प्रवर्तक है। सारनाथ में अशोक स्तम्भ है। यह वहीं से लिया गया है।

English Translation :
David- Yes, Why not! Saffron colour situated at the top of the flag is an indication of sacrifice and enthusiasm. White colour situated in the middle indicates goodness and honesty/truth. Green colour situated at the bottom is an indication of the earth’s beauty and fertility.
Tajindra- Shuchi! There is a blue coloured wheel at the centre?
Shuchi- Yes, Yes! This is called ‘Ashoka-Chakra’. It indicates progress and justice. At Sarnath there is the ‘Ashoka-Pillar’. It has been taken from there.

(च) प्रणवः- अस्मिन् चक्रे चतुर्विंशतिः अराः सन्ति।
मेरी- भारतस्य संविधानसभायां 22 जुलाई 1947 तमे वर्षे समग्रतया अस्य ध्वजस्य स्वीकरणं जातम्।
तेजिन्दर:- अस्माकं त्रिवर्णः ध्वजः स्वाधीनतायाः राष्ट्रगौरवस्य च प्रतीकः। अत एव
स्वतन्त्रतादिवसे गणतन्त्रदिवसे च अस्य ध्वजस्य उत्तोलनं समारोहपूर्वकं भवति।
जयतु त्रिवर्णः ध्वजः, जयतु भारतम्।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
अरा:-तीलियाँ (spokes), संविधानुसमायाम्-संविधान सभा में (in the Parliament Assembly), स्वीकरणम्-स्वीकरण/अपनाना (adopting/accepting), जातम् -हो गया (was done), उत्तोलनम् – फहराना (hoisting), समग्रतया-सर्वमत से (unanimously).

सरलार्थ :
प्रणवः- इस चक्र में 24 तीलियाँ हैं।
मेरी- भारत की संविधान सभा में 22 जुलाई 1947 के साल में (को) सर्वसंमति से इस
ध्वज को अपनाया गया था। तेजिन्दर- हमारा तिरंगा झण्डा स्वाधीनता और राष्ट्रगौरव का प्रतीक/चिह्न है। इसलिए स्वतन्त्रता
दिवस और गणतन्त्र दिवस पर इस ध्वज को समारोहपूर्वक फहराया जाता है।
तिरंगा झण्डा विजयी हो अर्थात् तिरंगे झंडे की जय हो। भारत की जय हो।

English Translation :
Pranav- There are 24 spokes in this wheel.
Mary- This flag was unanimously adopted in India’s Parliament Assembly on 22nd July 1947.
Tajindra- Our tricolour flag is a symbol of independence and national pride.
That is why on Independence day and Republic day this flag is hoisted with great enthusiasm. May the tricolour flag be victorious. May India be victorious!

CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 3

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CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 3

निर्धारित समय: 3 घंटे
अधिकतम अंकाः 80

खण्ड: – ‘क’
अपठित-अवबोधनम्

प्रश्न 1.
अधोलिखितम् अनुच्छेदं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (10)

एक: यात्रिसमूहः मरुभूम्यां गच्छति स्म। सहसा सः दस्युभिः गृहीतः। तैः यात्रिणाम् सर्वं धनं अपहृतम्। परम् द्वादशवर्षीयस्य एकस्य बालकस्य समीपे ते किमपि न प्राप्तवन्तः। ते अपृच्छन्–“किम् तव समीपे किमपि न अस्ति।” इति सः प्रत्यवदत्-“अहम् आत्मनः रुग्णां भगिनीं द्रष्टुम् गच्छामि। मम अम्बा पञ्च स्वर्णमुद्राः मम कौपीने अस्थापयत्” ते अपृच्छन्–“त्वम् अस्मान् किमर्थं वदसि?” इति। सः अवदत्-“मम माता शिक्षयति यत् कदापि असत्यम् मा वद। अतः मया सत्यम् उक्तम्” इति। बालकस्य सत्यनिष्ठां दृष्ट्वा दस्यूनाम् हृदय-परिवर्तनम् अभवत्। तैः अपि सत्यपालनस्य सङ्कल्पः गृहीतः। अयं बालकः आसीत्–’खलीफ़ा अमीन।’

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (1 × 4 = 4)
(i) केषाम् हृदय परिवर्तनम् अभवत्?
(ii) बालकस्य नाम किम् आसीत्?
(iii) अम्बा बालकाय कति मुद्राः अयच्छत्?
(iv) यात्रिसमूहः कुत्र गच्छति स्म?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (2 × 2 = 4)
(i) बालकस्य अम्बा स्वर्णमुद्राः कस्मिन् स्थापयत्?
(ii) बालकः काम् द्रष्टुम् गच्छति स्म?

III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः उचितं उत्तरम् चित्वा लिखत- (½ × 2 = 1)
(i) ‘मम माता शिक्षयति।’ अत्र क्रियापदं किम्?
(क) मम
(ख) माता
(ग) शिक्षयति
(घ) किमपि न

(ii) ‘यात्रिणाम्’ इति पदे का विभक्तिः?
(क) सप्तमी
(ख) षष्ठी
(ग) द्वितीया
(घ) पञ्चमी

IV. अस्य अनुच्छेदस्य कृते उचितं शीर्षकम् लिखत। (1)

खण्ड: – ‘ख’
‘रचनात्मकम् कार्यम्’

प्रश्न 2.
मञ्जूषातः प्रार्थनापत्रे उचितपदैः रिक्तस्थानानि पूरयत- (6)

महोदयाः, भवदीयः, मुक्तिम्, भवेत्, कुटुम्बस्य, जनकः

श्रीमन्तः प्राचार्य महाभागाः
केन्द्रीय विद्यालयः
कुरुक्षेत्रम्
_____(1)_____
सविनयं निवेदनं अस्ति यत् मम _____(2)_____ कार्यालये लिपिककार्यं करोति। तस्य अल्पवेतनेन _____(3)_____ निर्वाहः अपि दुष्करः अस्ति। अतः विद्यालयस्य शुल्कप्रदानं न सम्भवति। मम शिक्षायाः बाधा न _____(4)_____ अतः शुल्कप्रदानेन _____(5)_____ प्रदाय अनुग्रहं कुर्वन्तु भवन्तः।
दिनाङ्कः 28.4.2020
_____(6)_____ शिष्यः
माधवः

प्रश्न 3.
अधोदत्तं चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषायां प्रदत्तशब्दानाम् सहायतया पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत- (10)

मञ्जूषा – बालकाः, बालिकाः, खगाः, आकाशे, वृक्षं, जलेन, सुन्दरम्, सन्ति, चित्रम्, सिञ्चति, पादपाः, उद्यानस्य, उत्पतन्ति, प्रसन्नाः
CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 3 Q3

प्रश्न 4.
अधोदत्तां कथाम् मञ्जूषायां प्रदत्तशब्दानाम् सहायतया पूरयत- (4)

जाले, व्याघ्रः, आगच्छत्, दन्तैः

एकस्मिन् वने एकः _____(1)_____ अभवत्। एकदा सः व्याधेन विस्तारिते _____(2)_____ बद्धः अभवत्। अकस्मात् एकः मूषकः तत्र _____(3)_____। मूषकः स्वकीयैः _____(4)_____ जालस्य कर्त्तनम् कृत्वा व्याघ्रम् बहिः कृतवान्।

खण्ड: – ‘ग’
अनुप्रयुक्त-व्याकरणम्

प्रश्न 5.
मञ्जूषायां प्रदत्तपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (1 × 4 = 4)

(अ) गृहीत्वा, प्राप्य, श्रुत्वा, पीत्वा
(i) निर्गुणं ____________ दोषाः भवन्ति।
(ii) छात्राः पुस्तकानि ____________ विद्यालयं गच्छन्ति।
(iii) कटुकरसं ____________ माधुर्यम् जनयति।
(iv) सज्जनानाम् वचः ____________ जनाः प्रसीदन्ति।

(ब) सन्धिं सन्धिविच्छेदं वा कुरुत- (1 × 4 = 4)

(i) तथा + एव = ____________
(ii) महा + ईशः = ____________
(iii) मृगादीनाम् = _____ + _____
(iv) यद्यपि = _____ + _____

प्रश्न 6.
मञ्जूषायाम् प्रदत्तविलोमपदानाम् मेलनं कुरुत- (½ × 6 = 3)

पुरतः, स्वकीयम्, भीतिः, अनुरक्तिः, गमनम्, प्रियः

(i) विरक्तिः ____________
(ii) आगमनम् ____________
(iii) पृष्ठतः ____________
(iv) साहसः ____________
(v) परकीयम् ____________
(vi) अप्रियः ____________

प्रश्न 7.
(अ) मञ्जूषातः क्रियापदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (1 × 4 = 4)

रचयन्ति, अहसत्, वर्तते, गच्छन्ति

(i) सहसा बालिका उच्चैः ____________।
(ii) मम मनसि एका जिज्ञासा ____________।
(iii) जनाः भ्रमणाय उद्यानम् ____________।
(iv) मालाकाराः पुष्पैः मालाः ____________।

(ब) कोष्ठकेषु दत्तेषु शब्देषु उचितं शब्दं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (1 × 4 = 4)

(i) ____________ उभयतः वृक्षाः सन्ति। (ग्राम, ग्रामस्य, ग्रामात्)
(ii) पुत्रः ____________ सह आपणं गच्छति। (जनकं, जनकेन, जनक:)
(iii) माता ____________ क्रुध्यति। (पुत्रे, पुत्राय, पुत्र)
(iv) वानरः ____________ पतति। (वृक्षस्य, वृक्षात्, वृक्षं)

प्रश्न 8.
(अ) मञ्जूषातः अव्ययपदं चित्वा वाक्यानि पूरयत- (1 × 4 = 4)

सदा, बहिः, तर्हि, तदा

(i) यदा दशवादनं भवति ____________ छात्राः विद्यालयं गच्छन्ति।
(ii) शृगालः गुहायाः ____________ आसीत्।
(iii) सूर्यः ____________ पूर्वदिशायाम् उदेति।
(iv) यदि सफलताम् इच्छसि ____________ आलस्यं त्यज।

(ब) मञ्जूषातः अङ्कानाम् कृते पदानि लिखत- (½ × 4 = 2)

द्वासप्ततिः, षडशीतिः, अष्टानवतिः, सप्तषष्टिः

(i) 67 ____________
(ii) 72 ____________
(iii) 98 ____________
(iv) 86 ____________

खण्ड: – ‘घ’
पठित-अवबोधनम्

प्रश्न 9.
अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (5)
आसीत् कश्चित् चञ्चलो नाम व्याधः। पक्षिमृगादीनाम् ग्रहणेन सः स्वीयां जीविका निर्वाहयति स्म। एकदा सः वने जालं विस्तीर्य गृहम् आगतवान्। अन्यस्मिन् दिवसे प्रातः काले यदा चञ्चलः वनम् गतवान् तदा सः दृष्टवान् यत् तेन विस्तारिते जाले दौर्भाग्याद् एकः व्याघ्रः बद्धः आसीत्। सोऽचिन्तयत्, ‘व्याघ्रः मां खादिष्यति अतएव पलायनं करणीयम्।’ व्याघ्रः न्यवेदयत्– ‘भो मानव! कल्याणं भवतु ते। यदि त्वं मां मोचयिष्यसि तर्हि अहम् त्वां न हनिष्यामि।’

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) केषाम् ग्रहणेन व्याधः स्वीयां जीविकां निवहियति स्म।
(ii) चञ्चल कः आसीत्?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (1 × 1 = 1)
(i) यदा चञ्चल: वनम् गतवान् तदा सः किम् दृष्ट्वान्?

III. यथानिर्देशं लिखत- (1 × 2 = 2)
(i) ‘हनिष्यामि’ इति क्रियापदस्य कर्तपदं किम्?
(क) अहम्
(ख) तर्हि
(ग) त्वाम्
(घ) व्याधः

(ii) ‘विस्तारिते जाले’ अत्र विशेषणपदं किम्?
(क) जाले
(ख) जालं
(ग) विस्ता
(घ) विस्तारिते

प्रश्न 10.
अधोलिखितं नाट्यांशं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत- (5)

अध्यापिका – सम्यग्जानाति ते भगिनी। भवतु, अपि जानीथ यूयं येदतेषु राज्येषु सप्तराज्यानाम् एकः समवायः अस्ति यः सप्तभगिन्यः इति नाम्ना प्रथितोऽस्ति।
सर्वे – (साश्चर्यम् परस्परं पश्यन्तः) सप्तभगिन्यः? सप्तभगिन्यः?
निकोलसः – इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः इति किमर्थ कथ्यन्ते?
अध्यापिका – प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वर्तते। कदाचित् सामाजिक-सांस्कृतिक-परिदृश्यानाम् साम्याद् इमानि उक्तोपधिना प्रथितानि।
समीक्षा – कौतूहलं मे न खलु शान्तिं गच्छति, श्रावयतु तावद् यत् कानि तानि राज्यानि?

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत-
(i) केषाम् समवायः ‘सप्तभगिन्यः’ इति कथ्यते?
(ii) अयम् प्रयोगः कीदृशः वर्तते?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(i) “सम्यग्जानाति ते भगिनी।” इति का वदति?

III. यथानिर्देशं उत्तरत-
(i) ‘जिज्ञासा’ इत्यर्थे किम् पदं प्रयुक्तम्?
(क) शान्तिं
(ख) कौतूहलं
(ग) साम्याद्
(घ) सम्यक्

(ii) ‘श्रावयतु तावद् यत् कानि तानि राज्यानि।’ अत्र क्रियापदं किम्?
(क) तानि
(ख) राज्यानि
(ग) कानि
(घ) श्रावयतु

प्रश्न 11.
अधोलिखितं पद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (4)

कं सञ्जघान कृष्णः?
का शीतलवाहिनी गङ्गा?
के दारपोषणरता:?
कं बलवन्तं न बाधते शीतम्?

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (½ × 2 = 1)
(i) कंसम् कः जघान?
(ii) बलवन्तं किं न बाधते?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (1)
(i) शीतलवाहिनी का अस्ति?

III. यथानिर्देशम् उत्तरत- (2 × 1 = 2)
(i) ‘कंसम्’ इत्यत्र का विभक्तिः?
(ii) ‘कृष्णः’ इत्यस्य तृतीयान्तरूपं लिखत।

प्रश्न 12.
रेखांकितपदानाम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणम् कुरुत- (1 × 3 = 3)

(i) कार्यालये एका गोष्ठी निश्चिता।
(ii) कुक्षौ पुत्री अस्ति।
(iii) वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।

प्रश्न 13.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (1 × 4 = 4)

प्रियम्, वाचम्, दुःखम्, पञ्चविंशतिः

(i) अस्माकं देशे ………………… राज्यानि सन्ति।
(ii) सर्वं परवशं । ……………. अस्ति।
(iii) आचार्यस्य . .. कुर्यात्।
(iv) सत्यपूक्तं .. .वदेत्।

प्रश्न 14.
घटनाक्रमानुसारं वाक्यानि पुनः लेखनीयानि- (1 × 4 = 4)
(i) सावित्रीबाई ज्योतिबाफुलेन सह विवाहम् अकरोत्।
(ii) सावित्री 1831 तमे वर्षे जन्म अभवत्।
(iii) 1848 तमे वर्षे पुणे नगरे कन्यानाम् कृते प्रथमं विद्यालयम् आरभत।
(iv) सावित्र्याः मृत्युः 1897 तमे वर्षे अभवत्।
(v) 1851 तमे वर्षे बालिकानां कृते अपरः विद्यालयः प्रारब्धः।
(vi) सावित्र्याः माता लम्बीबाई, पिता च खण्डोजी इति अभिहितौ।
(vii) दुर्भिक्षकाले प्लेग-काले च सा पीडितजनानाम् अश्रान्तम् अविरतम् च सेवाम् अकरोत्।
(viii) सावित्री अनेकाः संस्थाः प्रशासनकौशलेन सञ्चालितवती।

सड.कल्पः सिद्धिदायकः Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 7

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Class 7 Sanskrit Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः Summary Notes

सड.कल्पः सिद्धिदायकः पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ में वर्णन किया गया है कि किस प्रकार कठिन तपस्या करके पार्वती ने शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। कथा के द्वारा शिक्षा दी गई है कि दृढनिश्चय और कठोर परिश्रम से कठिन-से-कठिन कार्य को पूर्ण किया जा सकता है। इस पाठ से धातुरूपों का अधिक ज्ञान प्राप्त होगा।

सड.कल्पः सिद्धिदायकः Summary

इस पाठ में बताया गया है कि दृढ़ इच्छा शक्ति सिद्धि को प्रदान करने वाली होती है। कथा का सार इस प्रकार हैनारद के वचन से प्रभावित होकर पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तप करने की इच्छा प्रकट की। पार्वती की माता मेना उसे तप करने के लिए निरुत्साहित करती हुई कहने लगी कि मनचाहे देवता औरसुख के सभी साधन तुम्हारे घर में हैं। तुम्हारा शरीर कोमल है जो कठोर तप के अनुकूल नहीं है। इसलिए तुम्हें तपस्या में प्रवृत्त नहीं होना चाहिए।

सड.कल्पः सिद्धिदायकः Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 7.1

पार्वती ने माता को आश्वस्त करते हुए कहा कि वह किसी भी प्रकार की बाधा से भयभीत नहीं होगी तथा अभिलाषा के पूर्ण हो जाने पर पुनः घर लौट आएगी। इस प्रकार पार्वती अपनी माता को वचन देकर वन में जाकर तपस्या करने लगी। उनकी कठोर तपस्या से हिंसक पशु भी उनके मित्र बन गए। उन्होंने वेदों का अध्ययन किया तथा कठोर तपस्या का आचरण किया।

कुछ समय पश्चात् एक ब्रह्मचारी उनके आश्रम में आया। कुशलक्षेम पूछने के पश्चात् ब्रह्मचारी ने उनसे तपस्या का उद्देश्य जानना चाहा। पार्वती की सहेली के मुख से तपस्या का प्रयोजन जानकर वह जोर से हँसने लगा।

सड.कल्पः सिद्धिदायकः Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 7.2

तब वह ब्रह्मचारी शिव की निंदा करने लगा। वह कहने लगा-शिव अवगुणों की खान है। वह श्मशान में रहता है। भूतप्रेत ही उसके अनुचर हैं। तुम उससे अपना मन हटा लो। शिव से सच्चा प्रेम करने वाली पार्वती शिव की निंदा सुनकर क्रोधित हो गईं। वह उस ब्रह्मचारी को बुरा भला कहने लगी और उसे वहाँ से चले जाने के लिए कहने लगी। ब्रह्मचारी के अडियल रवैये को देखकर पार्वती आश्रम से बाहर जाने को तत्पर हो गई। तब शिव ने अपना वास्तविक रूप प्रकट करके पार्वती से कहा कि मैं ब्रह्मचारी के रूप में शिव ही हूँ। आज तुम परीक्षा में उत्तीर्ण हो गई हो। यह सुनकर पार्वती अत्यधिक प्रसन्न हो गईं।

सड.कल्पः सिद्धिदायकः Word Meanings Translation in Hindi

(क) पार्वती शिवं पतिरूपेण अवाञ्छत्। एतदर्थं सा तपस्यां कर्तुम् ऐच्छत्। सा स्वकीयं
मनोरथं मात्रे न्यवेदयत्। तच्छ्रुत्वा माता मेना चिन्ताकुला अभवत्।

शब्दार्थाः (Word Meanings): अवाञ्छत् – चाहती थी (wanted/wished), एतदर्थम् (एतत्+अर्थम् )-इसके लिए (for this), कर्तुम्-करने के लिए (to do), ऐच्छत्-चाहती थी (wanted), मात्रे-माता को (to mother), न्यवेदयत्-निवेदन किया/बताया (told/informed), तच्छुत्वा (तत्+श्रुत्वा)-यह सुनकर (hearing this), चिन्ताकुला-चिन्ता से व्याकुल (restless with worry).

सरलार्थ :
पार्वती शिव को पति के रूप में चाहती थी। इसके लिए वह तपस्या करना चाहती थी। उसने अपनी इच्छा माँ को बताई। यह सुनकर माँ मेना चिन्ता से व्याकुल हो गईं।

English Translation :
Parvati wanted Shiva as her husband. For wanted to do penance. She informed her mother about her intention. Hearing this, Mother Mena became worried.

(ख) मेना- वत्से! मनीषिता देवता: गृहे एव सन्ति। तपः कठिनं भवति। तव शरीरं सुकोमलं वर्तते। गृहे एव वस।
अत्रैव तवाभिलाषः सफलः भविष्यति।
पार्वती- अम्ब! तादृशः अभिलाषः तु तपसा एव पूर्णः भविष्यति। अन्यथा तादृशं च पतिं कथं प्राप्स्यामि। अहं तपः एव चरिष्यामि इति मम सङ्कल्पः।
मेना- पुत्रि! त्वमेव मे जीवनाभिलाषः।।
पार्वती- सत्यम्। परं मम मनः लक्ष्यं प्राप्तुम् आकुलितं वर्तते। सिद्धिं प्राप्य पुनः तवैव शरणम् आगमिष्यामि। अद्यैव विजयया साकं गौरीशिखरं गच्छामि। (ततः पार्वती निष्क्रामति)

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
वर्तते-है (is), तवाभिलाषः (तव+अभिलाषः)-तुम्हारी अभिलाषा (your desire), तपसा-तप द्वारा (with penance), अन्यथा-नहीं तो (otherwise), प्राप्स्यामि-पाऊँगी (shall obtain), चरिष्यामि-करूँगी (shall observe), प्राप्तुम्-पाने के लिए (to obtain), प्राप्य-पाकर (having obtained), अद्यैव (अद्य + एव)-आज ही (today only), साकम्-साथ (with),निष्क्रामति-निकल जाती है (goes out), सङ्कल्पः-संकल्प (determination).

सरलार्थः
मेना- बेटी! इष्ट देवता तो घर में ही होते हैं। तप कठिन होता है। तुम्हारा शरीर कोमल है। घर पर ही रहो। यहीं तुम्हारी अभिलाषा पूरी हो जाएगी। पार्वती- माँ! वैसी अभिलाषा तो तप द्वारा ही पूरी होगी। अन्यथा मैं वैसा पति कैसे पाऊँगी। मैं तप ही करूँगी-यह मेरा संकल्प है। मेना- पुत्री, तुम ही मेरी जीवन अभिलाषा हो। पार्वती- ठीक है। पर मेरा मन लक्ष्य पाने के लिए व्याकुल है। सफलता पाकर पुन: तुम्हारी ही शरण में आऊँगी। आज ही विजया के साथ गौरी शिखर पर जा रही हूँ। (उसके बाद पार्वती बाहर चली जाती है)

English Translation :
Mena- My dear! The gods we adore are in the home only. Penance is difficult.
Your body is very gentle. Stay at home. Your desire will be fulfilled here only.
Parvati – Mother! A desire like that can be fulfilled by penance only.
Otherwise how can I obtain a husband like that. I shall do penance only-this is my resolve. (determination.)
Mena- Daughter! you are my Life’s desire.
Parvati – True. But my heart yearns to acheive its goal. Having achieved success.
I shall return to you only. I shall go to Gauri Shikhar today itself with my friend Vijaya.

(ग) (पार्वती मनसा वचसा कर्मणा च तपः एव तपति स्म। कदाचिद् रात्रौ स्थण्डिले,
कदाचिच्च शिलायां स्वपिति स्म। एकदा विजया अवदत्।)
विजया- सखि! तपःप्रभावात् हिंस्रपशवोऽपि तव सखायः जाताः।
पञ्चाग्नि-व्रतमपि त्वम् अतपः। पुनरपि तव अभिलाष: न पूर्णः अभवत्।
पार्वती- अयि विजये! किं न जानासि? मनस्वी कदापि धैर्यं न परित्यजति। अपि च मनोरथानाम् अगतिः नास्ति।
विजया- त्वं वेदम् अधीतवती। यज्ञं सम्पादितवती। तपःकारणात् जगति तव प्रसिद्धिः।
‘अपर्णा’ इति नाम्ना अपि त्वं प्रथिता पुनरपि तपसः फलं नैव दृश्यते।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
मनसा-मन से (in mind), वचसा-वाणी द्वारा (in speech), कर्मणा-कर्म द्वारा (by one’s deed), कदाचित्-कभी (sometimes), रात्रौ-रात को (at night), स्थण्डिले-भूमि पर (on barrenland), स्वपिति स्म-सोती थी (slept), हिंम्रपश्वः-हिंसक पशु (ferocious animals), सखायः-मित्र (friends), पुनरपि (पुनः + अपि)-फिर भी (inspite of that), अतपः-तप किया (did penance), किं न जानासि-क्या नहीं जानती हो (do you not know), मनस्वी-ज्ञानी (high-minded), अधीतवती-अध्ययन किया (did study), जगति-जगत में (in the world), नाम्ना-नाम से (by name), प्रथिता-विख्यात (famous), तपसः-तप का (of penance), दृश्यते-दिखाई देता है (is seen).

सरलार्थः
(पार्वती ने मन, वचन व कर्म से तप ही किया। कभी रात को भूमि पर और कभी शिला पर सोती थी। एक बार विजया ने कहा)
विजया- सखी! तप के प्रभाव से हिंसक पशु भी तुम्हारे मित्र बन गए हैं। पञ्चाग्नि व्रत भी तुमने किया। फिर भी तुम्हारी इच्छा पूर्ण नहीं हुई।
पार्वती- अरी विजया! क्या तुम नहीं जानती हो? मनस्वी कभी धैर्य नहीं छोड़ता है। एक बात और इच्छाओं की कोई सीमा नहीं होती।
विजया- तुमने वेद का अध्ययन किया। यज्ञ किया। तप के कारण तुम्हारी संसार में ख्याति है। ‘अपर्णा’ इस नाम से भी तुम विख्यात हो। फिर भी तप का फल नहीं दिखाई दे रहा।

English Translation :
(Parvati observed only penance in mind, speech and action. Sometimes she slept on barren land and sometimes on stone slab. Once Vijaya said.) Vijya- Friend! under the influence of your penance even the ferocious animals have become your friends. You observed the (difficult) panchagni vrata too. Inspite of all this your desire did not get fulfilled. Parvati – O Vijaya! Don’t you know? A high-minded person never gives up courage.

Besides there is no end to desires. Vijya- You studied the Veda. You performed sacrifice. You are famous in the world because of penance. You are also famous by the name ‘Aparna’. Despite all this the fruit of your penance is nowhere to be seen.

(घ) पार्वती- अयि आतुरहृदये! कथं त्वं चिन्तिता ………. ।
( नेपथ्ये-अयि भो! अहम् आश्रमवटुः। जलं वाञ्छामि।)
(ससम्भ्रमम् ) विजये! पश्य कोऽपि वटुः आगतोऽस्ति।
(विजया झटिति अगच्छत्, सहसैव वटुरूपधारी शिवः तत्र प्राविशत्)
विजया-वटो! स्वागतं ते! उपविशतु भवान्। इयं मे सखी पार्वती। शिवं प्राप्तुम् अत्र तपः करोति।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
नेपथ्ये-परदे के पीछे (backstage), ससम्भ्रमम्-हड़बड़ाहट से (nervously), वटुः-ब्रह्मचारी (a bachelor scholar), झटिति-झट से (जल्दी) (quickly), उपविशतु-बैठिए (please sit), भवान्-आप (your reversed self), इयं-यह (this).

सरलार्थः
पार्वती- अरे, व्याकुल हृदय वाली, तुम चिन्तित क्यों हो? (परदे के पीछे- अरे कोई है! मैं आश्रम में रहने वाला ब्रह्मचारी हूँ। मैं पानी पीना चाहता हूँ। (मुझे पानी चाहिए)। (हड़बड़ाहट से)। विजया! देखो कोई ब्रह्मचारी आया है। (विजया झट से गई और सहसा ही वटुरूपधारी शिव ने प्रवेश किया) विजया- हे ब्रह्मचारी आपका स्वागत है। कृपया बैठिए। यह मेरी सखी पार्वती है जो शिव को पति रूप में पाने के लिए तप कर रही है।

English Translation :
O impatient one! Why are you worried ? (Backstage-Is anyone there! I am a bachelor scholar/student from the hermitage. I want water.) (Nervously) Vijaya! please see some bachelor scholar/student has come. (Vijaya quickly went. All of a sudden Shiva in the guise of a bachelor scholar entered.) Vijya- 0 scholar! Welcome to you. Please sit. This is my friend Parvati. She is observing penance to obtain Shiva.

(ङ) वटुः- हे तपस्विनि! किं क्रियार्थं पूजोपकरणं वर्तते, स्नानार्थं जलं सुलभम् भोजनार्थं फलं वर्तते? त्वं तु जानासि एव शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।
( पार्वती तूष्णीं तिष्ठति) वटुः- हे तपस्विनि! किमर्थं तपः तपसि? शिवाय?
(पार्वती पुनः तूष्णीं तिष्ठति)
विजया-(आकुलीभूय) आम्, तस्मै एव तपः तपति।
(वटुरूपधारी शिवः सहसैव उच्चैः उपहसति)
वटुः- अयि पार्वति! सत्यमेव त्वं शिवं पतिम् इच्छसि? (उपहसन्) नाम्ना शिवः
अन्यथा अशिवः। श्मशाने वसति। यस्य त्रीणि नेत्राणि, वसनं व्याघ्रचर्म, अङ्गरागः चिताभस्म, परिजनाश्च भूतगणाः। किं तमेव शिवं पतिम् इच्छसि?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
क्रियार्थम्-तप की क्रिया के लिए (for doing penance), शरीरमाद्यम् (शरीरम् आद्यम् )-शरीर सर्वप्रथम (body is foremost), तूष्णीम्-चुपचाप (quiet), आकुलीमूय-व्याकुल होकर (getting agitated), उपहसति-उपहास करता है (makes fun), अशिवः-अशुभ (inauspicious), श्मशाने-श्मशान में (in the cremation ground), वसनम् वस्त्र (clothing), परिजनाश्च-(परिजनाः + च) और परिजन (all attendants), उपहसन् उपहास करते हुए (making fun).

सरलार्थः
वटुः- हे तपस्विनी! क्या तपादि करने के लिए पूजा-सामग्री है, स्नान के लिए जल उपलब्ध है? भोजन के लिए फल हैं। तुम तो जानती ही हो शरीर ही धर्म का आचरण के लिए
मुख्य साधन है। (पार्वती चुपचाप बैठी है)
वटुः- हे तपस्विनी किसलिए तप कर रही हो? शिव के लिए?
(पार्वती फिर भी चुप बैठी है)
विजया- (व्याकुल होकर) हाँ, उसी के लिए तप कर रही है।
(वटुरूपधारी शिव अचानक ही ज़ोर से उपहास करता है)
वटुः- अरी पार्वती! सच में तुम शिव को पति (रूप में) चाहती हो? (उपहास/मज़ाक करते हुए) वह नाम से शिव अर्थात् शुभ है अन्यथा अशिव अर्थात् अशुभ है। श्मशान में रहता है। जिसके तीन नेत्र हैं, वस्त्र व्याघ्र की खाल है, अंगलेप चिता की भस्म और सेवकगण
भूतगण हैं। क्या तुम उसी शिव को पति के रूप में पाना चाहती हो?

English Translation :
Vatu- (Celibate) O Lady Hermit! Is means of worship (available) for observing
penance; is water for ablutions easily available? Is there fruit for food? (You know very well that the body is the foremost means of following the path of ‘Dharma’ i.e. righteous duty). (Parvati stays quiets)
Vatu- (Celibate) O Tapasvini! Why are you observing penance? Is it for Shiva? (Parvati is still quiet)
Vijya- (Getting agitated) Yes, she is doing penance only for Him. (Shiva in the guise of a celibate bursts into laughter all of a sudden).
Vatu- O Parvati! Is it true you wish to have Shiva as your husband. (laughing in a joking manner) He is Shiva (auspicious) by name only. Otherwise he is Ashiva i.e., just the opposite. He lives in the cremation ground. He who has three eyes, tiger skin as clothing, ashes form the funeral pyre for anointment and hosts of ghosts for his attendants. Do you want that
Shiva as your husband?

(च) पार्वती- (क्रुद्धा सती) अरे वाचाल! अपसर। जगति न कोऽपि शिवस्य यथार्थं स्वरूपं जानाति। यथा त्वमसि तथैव वदसि।
(विजयां प्रति) सखि! चल। यः निन्दां करोति सः तु पापभाग् भवति एव, यः शृणोति सोऽपि पापभाग् भवति।
(पार्वती द्रुतगत्या निष्क्रामति। तदैव पृष्ठतः वटो: रूपं परित्यज्य शिवः तस्याः
हस्तं गृह्णाति। पार्वती लज्जया कम्पते)
शिव- पार्वति! प्रीतोऽस्मि तव सङ्कल्पेन अद्यप्रभृति अहं तव तपोभिः क्रीतदासोऽस्मि।
(विनतानना पार्वती विहसति)

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
वाचाल-बातूनी (one who talks too much/babbler), अपसर-दूर हट (go away), न कोऽपि (कः + अपि)-कोई भी नहीं (no body), पापभाग पापी (sinful), द्रुतगत्या-तीव्र गति से (hastily), पृष्ठतः-पीछे से (from behind), गृह्णति पकड़ लेता है (holds), लज्जया-लज्जा से (with shame), अद्यप्रभृति-आज से (today onwards), क्रीतदासः-खरीदा हुआ दास (slave), विनतानना-झुके हुए मुख वाली (with face hung).

सरलार्थः
पार्वती- (क्रुद्ध होकर) अरे वाचाल! चल हट। संसार में कोई भी शिव के यथार्थ (असली) रूप को नहीं जानता। जैसे तुम हो वैसे ही बोल रहे हो। (विजया की ओर) सखी! चलो। जो निन्दा करता है वह पाप का भागी होता है, जो सुनता है वह भी पापी होता है। (पार्वती तेज़ी से (बाहर) निकल जाती है। तभी पीछे से ब्रह्मचारी का रूप त्याग कर शिव उसका हाथ पकड़ लेते हैं। पार्वती लज्जा से काँपती है।)
शिव- पार्वती! मैं तुम्हारे (दृढ़) संकल्प से खुश हूँ। आज से मैं तुम्हारा तप से खरीदा दास हूँ। (झुके मुख वाली पार्वती मुस्कुराती है)

English Translation :
Parvati- (Being angry) 0 Babbler! go away. In this world no one knows the real Shiva. As you are so you speak. (To Vijaya) Friend, Move on. He who blames/criticizes (others) incurs sin; he who listens (to such talk) is also sinful. (Parvati exits in haste. At that very moment Shiva for saking the guise of the celibate hold her hand from behind. Parvati trembles with shame).
Shiva- Parvati! I am pleased with your (firm) resolve. Today onwards I am your slave bought by your acts of penance.
(Parvati smiles with her head hung)

सदाचारः Summary Notes Class 7 Sanskrit Chapter 6

By going through these CBSE Class 7 Sanskrit Notes Chapter 6 सदाचारः Summary, Notes, word meanings, translation in Hindi, students can recall all the concepts quickly.

Class 7 Sanskrit Chapter 6 सदाचारः Summary Notes

सदाचारः पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ के श्लोकों के द्वारा मनुष्य के सद्व्यवहार का ज्ञान दिया गया है। मनुष्य का आचरण समाज में, गुरुजन और माता-पिता एवं मित्रों के प्रति कैसा होना चाहिए, इसका उपदेश दिया गया है।

सदाचारः Summary

प्रस्तुत पाठ में सदाचार एवं नीति से सम्बन्धित बातें कही गई हैं। प्रथम श्लोक में कहा गया है आलस्य मनुष्य का महान शत्रु है और परिश्रम बन्धु। द्वितीय श्लोक में कहा गया है कि मृत्यु किसी की प्रतीक्षा नहीं करती। मनुष्य को समय रहते ही कार्य पूर्ण कर लेने चाहिएँ।

तीसरे श्लोक में बताया है कि मनुष्य को प्रिय सत्य बोलना चाहिए तथा अप्रिय सत्य नहीं बोलना चाहिए। इसी प्रकार प्रिय असत्य भी नहीं कहना चाहिए। . चतुर्थ श्लोक में कहा है कि मनुष्य को कुटिल व्यवहार कदापि नहीं करना चाहिए। उसे अपने व्यवहार में सरलता, कोमलता तथा उदारता आदि रखनी चाहिए।

पाँचवें श्लोक में बताया गया है कि मनुष्य को श्रेष्ठ गुणों से युक्त व्यक्ति व माता-पिता की मन, वचन और कर्म से सेवा करनी चाहिए। छठे श्लोक में कहा है कि मित्र के साथ कलह करके व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता है। अतः मनुष्य को ऐसा नहीं करना चाहिए।

सदाचारः Word Meanings Translation in Hindi

(क) आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपूः।
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति॥

अर्थः निश्चय से आलस्य मनुष्यों के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा दुश्मन (शत्रु) है। प्रयत्न (परिश्रम) के साथ उसका (मनुष्य का) कोई मित्र नहीं है जिसे करके वह दु:खी नहीं होता है।

English Translation :
Certainly, laziness is the greatest enemy dwelling in the human body. Hard work has no enemy. By doing hard work man never becomes sad.

अन्वयः – हि …………. (i) मनुष्याणां शरीरस्थः ……. (ii) रिपुः (अस्ति)। ……………. (iii) बन्धुः नास्ति, यं कृत्वा (मानव:) न …………… (iv)
मञ्जूषा- अवसीदति, आलस्यं महान्, उद्यमसमः
उत्तर-
(i) आलस्यं (ii) महान् (iii) उद्यमसमः (iv) अवसीदति

भावार्थः –
अर्थात् अस्मिन् संसारे ………..(i) एव जनानां शरीरे स्थितः महान् ……… (ii) अस्ति तेन कारणेन एव जनाः दु:खानि, दरिद्रतां कष्टानि च प्राप्नुवन्ति/परन्तु तथैव ……… (iii) एव जनानां मित्रमपि वर्तते। तम् कृत्वा जनाः कदापि ………(iv) न भवन्ति अर्थात् सदैव सुखानि एव प्राप्नुवन्ति। मञ्जूषा- परिश्रम्, आलस्यम्, दुःखिनः, शत्रुः
उत्तर-
(i) आलस्यम् (ii) शत्रुः (iii) परिश्रम् (iv) दु:खिनः

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
आलस्यम्-आलस्य (laziness)। हि-निश्चय से (certainly)। शरीरस्थः -शरीर में रहने वाला (dwelling in the human body)। महान्-सबसे बड़ा (greatest/ biggest)। रिपुः-शत्रु (दुश्मन) है (enemy)। उद्यमसमः-परिश्रम के समान (similar to hard work)। बन्धुः-मित्र(friend)। यम्-जिसको (whom)। न-नहीं (no/not)। अवसीदति-दुःखी होता है (becomes sad)।

(ख) श्वः कार्यमद्य कुर्वीत पूर्वाह्ने चापराह्निकम्।
नहि प्रतीक्षते मृत्युः कृतमस्य न वा कृतम्॥2॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
कुर्वीत-करना चाहिए (should do), पूर्वाह्ने-दोपहर से पहले (in the forenoon), आपराह्निकम्-दोपहर का (of the afternoon), न प्रतीक्षते-प्रतीक्षा नहीं करती है (does not wait), कृतमस्य (कृतम् + अस्य)-इसका हो गया है (his work is done), वा-या (or)

सरलार्थ :
कल का काम आज कर लेना चाहिए और दोपहर का पूर्वाह्न में। मृत्यु प्रतीक्षा (इन्तज़ार) नहीं करती कि इसका काम हो गया या नहीं हुआ अर्थात् इसने काम पूरा कर लिया या नहीं। भाव यह है कि काम को कभी टालना नहीं चाहिए क्योंकि पता नहीं कब जीवन समाप्त हो जाए।

English Translation :
One should do today what needs to be done tomorrow and in the afternoon. Death never waits for anyone whether a person’s job is done or not, that is to say that one should not procrastinate for what one doesn’t know when death will strike.

(ग) सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः॥3॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
ब्रूयात्-बोलना चाहिए (should speak), प्रियम्-मधुर (sweet), सत्यं-सच (truth), अनृतम्-झूठ (lie), सनातन:-शाश्वत (सदा से चला आ रहा) (eternal), धर्म:-धर्म/आचार (ethic).

सरलार्थ :
सच बोलना चाहिए, प्रिय बोलना चाहिए, अप्रिय सच नहीं बोलना चाहिए और प्रिय झूठ भी नहीं बोलना चाहिए। यही शाश्वत (सदा से चला आ रहा) धर्म (आचार) है।

English Translation :
One should speak the truth, should speak pleasant words, should never speak the bitter truth a sweet lie. This is an eternal ethic.

(घ) सर्वदा व्यवहारे स्यात् औदार्यं सत्यता तथा।
ऋजुता मृदुता चापि कौटिल्यं च न कदाचन ॥4॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
सर्वदा-हमेशा (always), औदार्यम्-उदारता (generosity), ऋजुता-सीधापन (simplicity, straightforward), मृदुता-कोमलता (tenderness), कौटिल्यं-कुटिलता, टेढ़ापन (crookedness), न कदाचन-कभी नहीं (never).

सरलार्थ :
व्यवहार में हमेशा (सदैव) उदारता, सच्चाई, सरलता और मधुरता हो (होनी चाहिए), (व्यवहार में) कभी भी टेढ़ापन नहीं हो (होना चाहिए)।

English Translation :
There should always be generosity, truth, straight forwardness and pleasantness in behaviour. There should never be crookedness in behaviour.

(ङ) श्रेष्ठं जनं गुरुं चापि मातरं पितरं तथा।
मनसा कर्मणा वाचा सेवेत सततं सदा॥5॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
वाचा-वाणी से (by speech), मनसा-मन से (by heart), कर्मणा-कार्यों से (by actions), सततं-निरन्तर (ceaselessly), सदा-हमेशा (always), सेवेत-सेवा करनी चाहिए (should serve).

सरलार्थ :
सज्जन, गुरुजन और माता-पिता की भी हमेशा मन से, कर्म से और वाणी से निरन्तर सेवा करनी चाहिए।

English Translation :
One should ceaselessly serve the good people, teachers and parents with (one’s) heart, (good) actions and sweet speech.

(च) मित्रेण कलहं कृत्वा न कदापि सुखी जनः।
इति ज्ञात्वा प्रयासेन तदेव परिवर्जयेत्॥6॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
मित्रेण-मित्र से (with friend), कलह-झगड़ा (variance quarrel), न कदापि-कभी भी नहीं (never), प्रयासेन-प्रयत्न से (by efforts), परिवर्जयेत्-दूर रहना चाहिए (stay away).

सरलार्थ :
मित्र के साथ झगड़ा करके मनुष्य कभी भी सुखी नहीं रहता है। यह जानकर प्रयत्न से उसे (झगड़े को) ही छोड़ देना चाहिए।

English Translation :
One never remains happy after quarrelling with a friend, knowing this one should stay away from quarrel i.e., make every effort to avoid strike.

CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 2

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CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 2

निर्धारित समय: 3 घंटे
अधिकतम अंका: 80

खण्डः – ‘क’
अपठित-अवबोधनम्

प्रश्न 1.
अधोलिखितं अनुच्छेदं पठित्वा प्रदत्त प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (10)

एकस्मिन् नगरे द्वे मित्रे वसतः स्म। एकस्य नाम सोमेशः आसीत् अन्यस्य च धनेशः। सोमेशः विद्याम् इच्छति स्म धनेशः च प्रभूतं धनम्। एकदा मित्रद्वयं विदेशं अगच्छत्। तत्र सोमेशः परिश्रमेण अध्ययनं कृत्वा विद्यां प्राप्तवान्। धनेशः धनं अर्जितवान्। एवं अनेकानि वर्षाणि व्यतीतानि। तौ अचिन्तयताम्-“अधुना आवाम् गृहम् गच्छावः।” गृहम् प्रति आगमनसमये मार्गे चौराः आगच्छन्। ते धनेशस्य सर्वम् धनम् अहरन्। धनेशः दुःखी अभवत्। सः रिक्तहस्तः गृहम् आगच्छत्। परम् सोमेशः विद्याधनयुक्तः आसीत्। विद्याधनेन युक्तः सः शीघ्रम् अतीव प्रसिद्धः अभवत्। तस्य प्रसिद्धिम् श्रुत्वा राजा सोमेशं आहूय तस्य सम्मानम् अकरोत्। सः तस्मै मन्त्रिपदम् अपि अयच्छत्। सत्यम् एव कथ्यते–’विद्या एव सर्वत्र पूज्यते।’

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (1 × 4 = 4)
(i) मित्रद्वयं कुत्र अगच्छत्?
(ii) कः धनं अर्जितवान्?
(iii) मार्गे के अगच्छन्?
(iv) कः विद्याधनम् प्राप्तवान्?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (2 × 2 = 4)
(i) राजा सोमाय किम् अयच्छत्?
(ii) कः रिक्तहस्तः गृहम् आगच्छत्?

III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः उचितं उत्तरं चित्वा लिखत- (½ × 2 = 1)
(i) ‘अचिन्तयताम्’ इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
(क) राजा
(ख) सोमेशः
(ग) तौ
(घ) धनेशः

(ii) ‘शनैः’ इति पदस्य विलोमपदं किम् प्रयुक्तम्?
(क) प्रभूतं
(ख) शीघ्रम्
(ग) सर्वत्र
(घ) आहूय

IV. अस्य अनुच्छेदस्य समुचितं शीर्षकं चित्वा लिखत। (1)

खण्ड: – ‘ख’
रचनात्मकं कार्यम्

प्रश्न 2.
मञ्जूषातः प्रार्थनापत्रे उचितपदैः रिक्तस्थानानि पूरयत- (6)

पठनम्, आदरणीयाः, निवेदनम्, पितुः, प्रमाणपत्रं, विना

श्रीमन्तः प्राचार्यमहोदयः
राजकीयः विद्यालयः
इन्द्रप्रस्थम्
_______(1)_______ महोदयाः
सेवायाम् इदम् _______(2)_______ अस्ति यत् मम _______(3)_______ स्थानान्तरणम् जातम्। अतः मया अपि तत्रैव गत्वा _______(4)_______ अनिवार्यम् वर्तते। पितरौ _______(5)_______ मया अत्र एकाकिना अवस्थानं न शक्यते। अतः माम् विद्यालयान्तरणं _______(6)_______ प्रदापयन्तु भवन्तः इति प्रार्थये।
दिनांक: 20.8.2020
भवदीयः शिष्यः
कृष्णः

प्रश्न 3.
अधोदतं चित्रं दृष्ट्वा प्रदत्तशब्दानां सहायतया पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत- (10)

मञ्जूषा- चिकित्सकः, सेविका, रुग्णं, औषधम्, पयके, करोति, रुग्णाय, फलानि, जलम्, पात्रे, उपविशन्ति, निरीक्षणं
CBSE Class 8 Sanskrit Sample Paper Set 2 Q3

प्रश्न 4.
अधोदत्तां कथाम् मञ्जूषायाम् प्रदत्तशब्दानाम् सहायतया पूरयत- (4)

घटः, मत्स्यान्, नदीतटम्, स्वकुटुम्बस्य

289 पुरा बोधिसत्त्वः वणिकपुत्रः आसीत्। एकदा सः ___________ अगच्छत्। सः एकं धीवरम् अपश्यत्। धीवरस्य समीपे मृत्तिकायाः एक: ___________ आसीत्। धीवरः जालेन ___________ गृहीत्वा घटे क्षिपति स्म। इत्थम् सः ___________ पालनं करोति स्म।

खण्ड: – ‘ग’
अनुप्रयुक्त-व्याकरणम्

प्रश्न 5.
सन्धिं सन्धिविच्छेदं वा कुरुत- (1 × 4 = 4)

(i) सप्त + एताः = _____________
(ii) देवेन्द्रः = ______ + ________
(iii) तथा + अपि = _____________
(iv) सु + आगतम् = _____________

प्रश्न 6.
(अ) मञ्जूषात: विपरीतार्थकान् शब्दान् चित्वा लिखत- (½ × 6 = 3)

गुणाः, वामहस्तः, कृतघ्नः, स्वीकारः, अनन्या, पण्डितः

(i) दक्षिणहस्तः _____________
(ii) अस्वीकारः _____________
(iii) दुर्गुणाः _____________
(iv) कृतज्ञः _____________
(v) मूर्खः _____________
(vi) अन्या _____________

(ब) तद्भव पदानाम् कृते मञ्जूषातः चित्वा संस्कृतपदानि लिखत- (½ × 6 = 3)

कृपणः, कटुकम्, पुच्छः, लुब्धः, मधुमक्षिका, तृणम्

(i) तिनका = _____________
(ii) कंजूस = _____________
(iii) लोभी = _____________
(iv) मधुमक्खी = _____________
(v) पूँछ = _____________
(vi) कड़वा = _____________

प्रश्न 7.
उदाहरणम् अनुसृत्य लकारपरिवर्तनम् कुरुत- (4)
(अ) वर्तमानकाल: – अतीतकालः
यथा- वयम् प्रतिदिनं पाठं पठामः – वयम् प्रतिदिनं पाठम् अपठाम।
(i) सः शिक्षकः अस्ति। _____________
(ii). महिलाः तडागात् जलं नयन्ति। _____________
(iii) त्वम् विद्यालयं गच्छसि। _____________
(iv) अहम् लेखम् लिखामि। _____________

(ब) अधोलिखित पदानि आधृत्य वाक्यानि रचयत- (4)

(i) भूमिः = _____________
(ii) शिक्षकाः = _____________
(iii) पुस्तकालये = _____________
(iv) फलानि = _____________

प्रश्न 8.
(अ) मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (4)

एषः, एताः, एतानि, एते

(i) _____________ फलानि मधराणि सन्ति।
(ii) _____________ क्रीडकः अद्वितीयः अस्ति।
(iii) _____________ बालिकाः नृत्यन्ति।
(iv) अहम् _____________ फले मित्राय यच्छामि।

(ब) कोष्ठकेषु दत्तेषु शब्देषु उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (3)

(i) _____________ परितः भवनानि सन्ति। (विद्यालये / विद्यालय / विद्यालयस्य)
(ii) _____________ अधः व्याधः तिष्ठति। (वृक्षस्य / वृक्षात् / वृक्षम्)
(iii) धनिकः _____________ वस्त्राणि यच्छति। (याचकं / याचकाय / याचकः)

खण्ड: – ‘घ’
पठित-अवबोधनम्

प्रश्न 9.
अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (5)

‘गजधरः’ इति सुन्दरः शब्दः तडागनिर्मातृणाम् सादरं स्मरणार्थम्। राजस्थानस्य केषुचिद् भागेषु शब्दोऽयम् अद्यापि प्रचलति। कः गजधर:? यः गजपरिणामं धारयति सः गजधरः। गजपरिमाणम् एव मापनकार्ये उपयुज्यते। समाजे त्रिहस्त-परिमाणात्मिकीं लौहयष्टिं हस्ते गृहीत्वा चलन्तः गजधराः इदानीं शिल्पिरूपेण नैव समादृताः सन्ति। गजधरः, यः समाजस्य गाम्भीर्यं मापयेत् इत्यस्मिन् रूपे परिचितः।

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) कस्य राज्यस्य भागेषु गजधरः शब्दः प्रयुज्यते।
(ii) गजपरिमाणं कः धारयति?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) गजधराः कस्मिन् रूपे परिचिताः?

III. यथानिर्देशं उत्तरत- (½ × 2 = 1)
(i) ‘करे’ इत्यर्थे किम् पदं प्रयुक्तम्?
(क) रूपे
(ख) हस्ते
(ग) शब्दः
(घ) चलन्तः

प्रश्न 10.
अधोलिखितं नाट्यांशं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत- (5)

विनयः – पश्य पश्य, तत्र-धुनः शाकफलानामावरणैः सह प्लास्टिकस्यूतमपि खादति। यथाकथञ्चित् निवारणीया एषा।
(मार्गे कदलीफलविक्रेतारं दृष्ट्वा बालाः कदलीफलानि क्रीत्वा धेनुम् आह्यन्ति भोजयन्ति च, मार्गात् प्लास्टिकस्यूतानि चापसार्य पिहिते अवकरकण्डोले क्षिपन्ति)।

प्रश्नाः
I. एकपदेन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) बालाः किं क्रीत्वा धेनुम् आह्यन्ति?
(ii) बालाः कदलीफलानि क्रीत्वा काः भोजयन्ति?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (1 × 2 = 2)
(i) धेनुः केषाम् आवरणैः सह प्लास्टिकस्यूतमपि खादति।

III. यथानिर्देशं उत्तरत- (½ × 2 = 1)
(i) ‘अपसार्यं’ इत्यत्र कः प्रत्ययः?
(क) क्त्वा
(ख) ल्यप्
(ग) यत्
(घ) आर्यं

(ii) ‘पश्य’ इत्यत्र कः लकार:?
(क) लट
(ख) लोट
(ग) लङ्
(घ) लृट्

प्रश्न 11.
निम्नलिखितं पद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्यायशोबलम्।।

प्रश्ना:
I. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (1 × 4 = 4)
(i) केषां चत्वारि वर्धन्ते?
(ii) आयुः कस्य वर्धते?
(iii) अभिवादनशीलस्य किं वर्धते?
(iv) बलं कस्य वर्धते?

प्रश्न 12.
रेखांकितपदानाम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (1 × 3 = 3)
(i) कर्गदोपरि लेखनं प्रारब्धम्।
(ii) पुस्तकानाम् आवश्यकता न भविष्यति।
(iii) भ्राता भवानीस्तुतिं करोति।

प्रश्न 13.
मञ्जूषातः शब्दान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत। (4)

सावित्रीबाई फुले, आर्यभटः, वंशोद्योगः, प्लास्टिकम्

(i) भारतस्य प्रथमोपग्रहस्य नाम _____________ अस्ति।
(ii) मृत्तिकायां _____________ कदापि न विनश्यति।
(iii) महाराष्ट्रस्य प्रथमा महिला शिक्षिका _____________ आसीत्।
(iv) सप्तभगिनी-प्रदेशे _____________ सर्वप्रमुखः।

प्रश्न 14.
घटनाक्रमानुसारम् अधोलिखितानि वाक्यानि पुनः लेखनीयानि- (4)
(i) व्याधः जालम् प्रासारयत्।
(ii) व्याधः लोमाशिकायै निखिला कथां न्यवेदयत्।
(iii) जाले पुनः तम् बद्धं दृष्ट्वा सः व्याधः प्रसन्नः सन् गृहम् प्रत्यावर्तत।
(iv) सा अवदत्-बाढम्! अहम् पुनः व्याघ्रम् जाले बद्धं द्रष्टुम् इच्छामि।
(v) लोमाशिका व्याघ्रं अवदत्-सत्यं त्वया भणितम्।
(vi) लोमाशिका अवदत्-पुनः कूर्दनं कृत्वा दर्शय इति।
(vii) निःसहाय भूत्वा सः प्राणभिक्षामिव अयाचत्।
(viii) व्याघ्रः तम् वृत्तान्तं दर्शयितुम् पुनः जाले प्राविशत्।