Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 10 Questions and Answers Summary उपसंहार

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Class 8 Hindi Bharat Ki Khoj Chapter 10 Question Answers Summary उपसंहार

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 10 Question and Answers

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत ने अपने स्वरूप को किस तरह बचाए रखा है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1943 का भीषण अकाल और उससे उत्पन्न महामारी तथा भुखमरी में भारत ने अपना स्वरूप उसी प्रकार बनाए तथा बचाए रखा है जैसे- प्रकृति ने भविष्य के युद्धस्थलों को आज फूलों और हरी घास से ढक लिया है।

प्रश्न 2.
भारत की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
भारत की विशेषताएँ हैं- विभिन्नता में एकता। बार-बार के आक्रमणों के बावजूद इसकी आत्मा को नहीं जीता जा सका। यह अपराजेय है। बदलते समय के साथ यह ढल जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हम कैसी दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं ?
उत्तर:
हम एक ऐसी दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं। जहाँ राष्ट्रीय संस्कृतियाँ मानव जाति की अंतर्राष्ट्रीय संस्कृति घुलमिल जाएगी। हमें समझदारी और सहयोग से काम लेना है। हमें विश्व का नागरिक बनना है।

प्रश्न 2.
हमारी क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
हम भारतवासी किसी साधारण देश के नागरिक नहीं हैं। हमें अपनी, जन्मभूमि, अपने देशवासियों अपनी संस्कृति और अपनी परंपराओं पर गर्व है।

पाठ-विवरण

इस पाठ के माध्यम से लेखक ने भारत की खोज का निष्कर्ष बताया है।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 10 Summary

भारत की खोज के बारे में लेखक का कहना है कि- भारत के पर्दे को उठाकर उसने झाँकने का प्रयास किया था। यह कल्पना करना कि भारत वर्तमान रूप में क्या है और उसका इतिहास क्या रहा होगा, यह मेरी अधिकार से बाहर की चेष्टा है। इसकी विभिन्नता में सांस्कृतिक एकता है। यह विरुद्धों का एक ऐसा पुंज है जो मज़बूत और अदृश्य सूत्रों से बँधा है। बार-बार आक्रमणों के बावजूद उसकी आत्मा कभी जीती नहीं जा सकती। यह आज भी अपराजित है।

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत का पुराना जादू अब समाप्त हो रहा है। वह वर्तमान के प्रति जागरूक हो रहा है। समयानुसार यह परिवर्तन ज़रूरी भी था, इसके बाद भी उसमें जनता को वश में करने का तरकीब मालूम रहेगा। हमें अतीत और सुदूर की खोज में देश के बाहर नहीं जाना है। हमारे पास भारत के अतीत बहुतायत हैं। हमें अपने संस्कृति और परंपराओं पर गर्व है। हमें कमजोरियों और असफलताओं को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमारे पास समय कम है और दुनिया तेज़ गति से बढ़ती जा रही है। अतीत में भारत दूसरी संस्कृतियों का स्वागत कर उन्हें अपने में समा लेता था। आज इस बात की और भी अधिक ज़रूरत है।

हम किसी मामूली देश के नागरिक नहीं हैं। हमें अपने राष्ट्र पर, अपने देशवासियों पर, अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व है। यह गर्व ऐसे रोमांचक अतीत के लिए नहीं होना चाहिए। हमें अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है। हम आत्मनिर्भर होकर दूसरों का सहयोग करेंगे तभी हम सच्चे भारतीय, अच्छे अंतर्राष्ट्रीयतावादी तथा विश्व नागरिक होंगे।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या 121.
कल्पना – सोचना, चेष्टा कोशिश, पुंज – गुच्छा, अदृश्य – जो दिखाई दे, अपराजेय – जिसे जीता न जा सके, अनुरूप – अनुसार, सराबोर – भरा हुआ, जागरूक – सचेत।

पृष्ठ संख्या 122.
सम्मोहन – आकर्षित करना, क्षय – हानि, बुनियाद – नींव, बंदरगाह – जहाँ समुद्री जहाज़ खड़े हों, कुंठित – कम, प्रगति – उन्नति, आत्मसात – अपनाना, सामूहिक – मिलकर।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 9 Questions and Answers Summary दो पृष्ठभूमियाँ – भारतीय और अंग्रेज़ी

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Class 8 Hindi Bharat Ki Khoj Chapter 9 Question Answers Summary दो पृष्ठभूमियाँ – भारतीय और अंग्रेज़ी

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 9 Question and Answers

पाठाधारित प्रश्न

बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
जनता अब सरकार के विरुद्ध कैसा प्रदर्शन कर रही थी?
(i) शांतिपूर्ण
(ii) हिंसात्मक
(iii) शांतिपूर्ण व हिंसात्मक दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(iii) शांतिपूर्ण व हिंसात्मक दोनों

प्रश्न 2.
इस विद्रोह में पुलिस और सेना की गोलाबारी से मारे गए लोगों की संख्या लगभग कितनी थी?
(i) 820
(ii) 1120
(ii) 1020
(iv) 1028
उत्तर:
(ii) 1120

प्रश्न 3.
भारत में भयंकर अकाल कब पड़ा?
(i) 1942 में
(ii) 1943 में
(iii) 1944 में
(iv) 1945 में
उत्तर:
(iii) 1944 में

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
1942 में नेताओं की गिरफ्तारी का जनता पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
1942 में राष्ट्रवादी नेताओं की गिरफ्तारी और गोलीबारी से देश की जनता त्रस्त होकर भड़क गई। तब उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हिंसक और शांतिपूर्ण आंदोलन किया। उन्होंने तोड़-फोड़ करना भी शुरू किया।

प्रश्न 2.
सन् 1942 में हुए जन-आंदोलन की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
सन् 1857 के बाद 1942 का विद्रोह सबसे पहला बड़ा विद्रोह था। इस आंदोलन की विशेषता थी कि इसमें युवा पीढी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसमें देश के सभी लोगों ने अंग्रेजी सरकार के प्रति अपना आक्रोश प्रकट किया। इसलिए यह आंदोलन हिंसात्मक व शांतिपूर्ण दोनों था।

प्रश्न 3.
ब्रिटिश शासन काल के दौरान भारत में कहाँ-कहाँ अकाल पड़ा?
उत्तर:
ब्रिटिश शासन-काल के दौरा भारत में बंगाल और पूर्वी तथा दक्षिणी राज्यों में अकाल पड़ा।

प्रश्न 4.
अकाल की तस्वीर को देखकर भारतीय विद्वानों का क्या मत है?
उत्तर:
भारत की तस्वीर प्रस्तुत करते हुए भारतीय विद्वानों का कहना है कि जिस प्रकार अकाल और युद्ध के बाद भी प्रकृति अपना स्वरूप अवश्य बदलती है, उदाहरण के तौर पर युद्ध के मैदान को भी फूल और हरी घास ढक लेती है, उसी प्रकार भारत ने कितने ही अत्याचार का सामना भले ही किया हो लेकिन फिर भी उसकी आने वाली सशक्त पीढ़ियों ने उसके स्वरूप को डूबने न दिया, उसने अपना वजूद कभी समाप्त नहीं किया। देश के लिए साहसी लोग सदैव मशाल लेकर यहाँ का नेतृत्व करते हुए आगे बढ़ते रहे और आने वाले पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करते रहे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इस प्रदर्शन को मूर्खतापूर्ण प्रदर्शन क्यों कहा गया?
उत्तर:
यह प्रदर्शन मूर्खतापूर्ण इसलिए कहा गया क्योंकि यह योजनाबद्ध तरीके से प्रदर्शन नहीं किया गया था। एक तरफ करोड़ों जनता थी जबकि दूसरी तरफ हथियार बंद सैनिकों का प्रहार। यदि आंदोलन सोच समझकर किया जाता तो इसके नतीजे बहुत अच्छे हो सकते थे।

प्रश्न 2.
1942 के जन आंदोलन का अंग्रेज़ी सरकार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
1942 के जन आंदोलन के परिणामस्वरूप जनता ने अंग्रेज़ी सरकार के विरोध, घृणा, आक्रोश और देश के प्रति राष्ट्र प्रेम की भावना का विकास हुआ। इस प्रदर्शन के परिणामस्वरूप अनेक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों पर अंग्रेजों का अधिकार समाप्त हो गया। अब इन पर पुनः अधिकार करने में अंग्रेजों को हफ़्तों लग गए। इनमें बिहार, बंगाल का मिदिनापुर जिला तथा संयुक्त प्रांत (यू.पी.) का बलिया जिला था, जिसे दोबारा अंग्रेजों को इस पर अपना अधिकार जमाना पड़ा।

पाठ-विवरण

भारत सन् 1942 के विद्रोह में जो कुछ हुआ वह अचानक नहीं था। लोगों ने अपने मन में निश्चित कर लिया था कि अब अंग्रेज़ों को देश से बाहर करके छोड़ेंगे। अंग्रेजी हुकुमत को किसी हालत में नहीं रहने देंगे।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 9 Summary

सन् 1942 में ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पारित होते ही जगह-जगह भारतीय नेताओं ने गिरफ्तारियाँ देनी शुरू कर दी। इस काल में जनता अंग्रेज़ों के अत्याचार से त्रस्त हो चुकी थी जिसके कारण वह भड़क उठी। उसने हिंसक रूप अपना लिया था। ब्रिटिश के द्वारा गिरफ्तारियाँ तथा गोलीबारी की घटना से भारतीय जनता और उग्र हो गई। कई स्थानीय नेता उभर कर आए। आम लोगों ने उनका अनुसरण किया। इस आंदोलन में छात्रों ने हिंसक और शांतिपूर्वक कार्यवाहियों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सन् 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध यह पहली चुनौती थी। यह विद्रोह सुसंगठित व सोचा समझा विद्रोह न थ। जबकि दूसरी ओर हथियार बंद सैनिक शक्ति थी। इस विद्रोह का परिणाम यह रहा कि भारतीय जनता के दिल में राष्ट्र प्रेम और विदेशी शासन के विरुद्ध नफ़रत की भावना का उदय हुआ।

1942 के विद्रोह में पुलिस और सेना की गोलाबारी से मारे गए और घायलों की संख्या सरकारी आँकड़ों के अनुसार 1208 मरे और 3200 लोग घायल हुए। आम लोगों की मृतकों की संख्या 2500 थी। लेकिन इसमें अनुमानतः 10,000 से अधिक लोगों की मरने की बात सही प्रतीत होती है।

इस विद्रोह के बाद कई जगहों पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजी हुकूमत समाप्त हो चुकी थी। यह मुख्य रूप से बिहार, बंगाल के मिदनापुर जिले में और संयुक्त प्रांत के दक्षिण-पूर्वी जिले में देखने को मिला। जिसे पुन:स्थापित करने में उसे हफ़्तों लग गए। संयुक्त प्रांत बलिया जिले को अंग्रेज़ों को दुबारा जीतना पड़ा।

भारत की बीमारी – अकाल
भारत कई रूप से डाँवाडोल था। अंग्रेजी शासन में यहाँ की जनता बहत ही दीन-हीन थी। इन परेशानियों के बीच अकाल ने उसकी कमर ही तोड़कर रख दी। इस अकाल का प्रभाव बंगाल और दक्षिणी भारत पर पड़ा। पिछले 170 वर्षों में यह सबसे बड़ा और विनाशकारी था। इनकी तुलना 1766 ई. से 1870 के मध्य बंगाल और बिहार के उन भयंकर आकालों से की जा सकती है जो अंग्रेज़ी शासन की स्थापना के शुरुआती परिणाम थे। इसके बाद महामारी फैली, विशेषकर हैजा और मलेरिया।

हज़ारों की संख्या में लोग इसके शिकार हुए। कोलकता की सड़कों पर लाशें बिछी थीं। अमीर वर्ग के लोगों में विलासिता दिखाई पड़ रही थी। भारत की जनता भुखमरी के कगार पर था।

भारत की इस दुर्दशा को देखकर विद्वान भारत के भविष्य को लेकर सोचते थे कि अंग्रेजों के जाने के बाद भारत का स्वरूप कैसा होगा क्योंकि भारत की दुर्गति का कोई अंत उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था।

भारत की सजीव सामर्थ्य
अकाल और युद्ध के बाद प्रकृति अपना कायाकल्प करती है। इस संबंध में नेहरू जी का कहना है कि अकाल और युद्ध के बाद प्रकृति अपना कायाकल्प कर लेती है। यानी उनमें परिवर्तन आता है। उदाहरण के तौर पर जिस बंजर युद्ध भूमि में कल लड़ाई हुई थी आज उसमें फलों और हरे-भरे घास दिखाई पड़ते हैं। मनुष्य के पास स्मृति का विलक्षण गुण होता है। वह कहानियों और यादों के सहारे अतीत में विचरण करता है। इसी गुण के आधार पर वह अपना भीषणतम समय भूलकर आगे बढ़ता जाता है। आज, जो बीते हुए कल की संतान है, खुद अपनी जगह संतान, आने वाली कल को दे जाता है। कमज़ोर आत्मा वाले समर्पण कर देते हैं और वे हटा दिए जाते हैं। बाकी बचे बहादुर लोग देश का नेतृत्व करते हैं। आने वाले हिम्मत के साथ जीवन पथ पर आगे की ओर बढ़ते हैं।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या 117.
अकस्मात – अचानक, हिंसात्मक – हिंसक रूप, हथियारबंद – हथियारों से लैस, क्रुद्ध – गुस्से में, अनुसरण – मानना, जन आंदोलन – जनता का आंदोलन, आम जनता द्वरा किसी विचार को उठाना।

पृष्ठ संख्या 118.
गदर – विद्रोह, निहत्था – बिना हथियारों का, वंद्व – युद्ध, तात्कालिक – उसी समय, अतिरंजित – अत्यधिक रंगा हुआ, बहुत बढ़ा, फले-फूले – उन्नति किए, चढ़ाकर कहा जाए, चरम – सर्वोच्च, स्मृति – याद।

पृष्ठ संख्या 119.
विनाशकारी – नष्ट होने वाला, झीने – पतले पारदर्शी, आवरण – ढकना, उघाड़ – उभारना, बदहाली – बुरे हाल की, बदसूरत – जो सुंदर न हो, तबके – पद, विलासिता – आरामपरस्त, उल्लास – खुशी, दुर्गति – बुरी दशा, कचरा – कूड़ा।

पृष्ठ संख्या 120.
अकाल – भुखमरी, कायाकल्प – रूप बदलना, स्मृति – याद, विलक्षण – अद्भुत, वर्तमान – जो समय चल रहा हो, समर्पण – अपने आप को सौंप देना, मार्गदर्शक – रास्ता दिखाने वाला।

NCERT Solutions for Class 9 Social Science

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Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 8 Questions and Answers Summary तनाव

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Class 8 Hindi Bharat Ki Khoj Chapter 8 Question Answers Summary तनाव

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 8 Question and Answers

पाठाधारित प्रश्न

बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में राजनैतिक तनाव कब सबसे अधिक था?
(i) सन् 1950 में
(ii) सन् 1947 में
(iii) सन् 1942 में
(iv) सन् 1947 में
उत्तर:
(iii) सन् 1942 में

प्रश्न 2.
सन् 1942 का समय किस दौर का था?
(i) प्रथम विश्व युद्ध का
(ii) द्वितीय विश्व युद्ध का
(iii) राष्ट्रीयकरण का
(iv) भारत-पाकिस्तान के विभाजन का
उत्तर:
(ii) द्वितीय विश्व युद्ध का

प्रश्न 3.
भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत कब हुई थी?
(i) सन् 1942 ई. में
(ii) सन् 1940 में
(iii) सन् 1950 ई. में
(iv) 1945 ई. में
उत्तर:
(i) सन् 1942 ई. में

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में तनाव कब बढ़ा?
उत्तर:
भारत में तनाव सन् 1942 ई. से शुरू के दिनों में बढ़ा।

प्रश्न 2.
तनाव बढ़ने का कारण क्या था?
उत्तर:
वास्तव में यह समय द्वितीय विश्व युद्ध का था और भारत को इस बात का डर था कि कहीं हवाई हमले न हों और दूसरा तनाव इस बात का था कि भारत और इंग्लैंड के संबंध कैसे होंगे।

प्रश्न 3.
‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव कब और किसके द्वारा रखा गया?
उत्तर:
‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध था जिसमें आम जनता ने भी यह अपील की कि अब अंग्रेज़ों को भारत छोड़ देना चाहिए।

प्रश्न 4.
कांग्रेस कमेटी ने अपनी अपील किसके समक्ष की?
उत्तर:
कांग्रेस कमेटी ने अपनी अपील ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र संघ के समक्ष की।

पाठ-विवरण

इस पाठ के माध्यम से बताया गया है कि किस प्रकार 1942 ई. में अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रस्ताव ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ से तनाव का वातावरण फैला।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 8 Summary

चुनौती-‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव
सात-आठ अगस्त को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने खुली सभा में उस प्रस्ताव पर विचार किया जो ‘भारत छोड़ो प्रस्ताव’ के नाम से जाना जाता है। इस बड़े प्रस्ताव में ऐसी अंतरिम सरकार बनाने का सुझाव दिया गया जिसमें सभी वर्गों के महत्त्वपूर्ण लोगो का प्रतिनिधित्व हो, जिसका पहला काम मित्र शक्तियों के बाहरी हमले को रोकना है।

कांग्रेस कमेटी ने संसार की आज़ादी के लिए संयुक्त राष्ट्र से अपील की। अपने भाषण में अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम आजाद और गांधी जी ने स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि वायसराय से मुलाकात कर संयुक्त राष्ट्र के मुख्य अधिकारियों से एक सम्मानपूर्ण समझौते के लिए अपील करेंगे।

कमेटी के कड़े प्रयास व अपील के बाद 8 अगस्त सन् 1942 को यह प्रस्ताव पास हो गया। जन आंदोलन के शुरुआत होते ही अगस्त की सुबह-सुबह गिरफ़्तारियाँ प्रारंभ हो गईं। इसी गिरफ्तारी में जवाहर लाल नेहरू व अन्य नेता अहमदनगर के किले में बंदी बनाए गए।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या 116.
विशद – बड़ा विस्तृत, प्रतिनिधित्व – नेतृत्व अगुवाई, अपील – माँग, प्रार्थना, अपरिहार्य – अति आवश्यक, जिसे रोका न जा सके, समापन – समाप्ति, अंततः – आखिरकार अहिंसक बिना किसी मारकाट के, समापन – समाप्ति।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 7 Questions and Answers Summary अंतिम दौर-दो

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Class 8 Hindi Bharat Ki Khoj Chapter 7 Question Answers Summary अंतिम दौर-दो

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 7 Question and Answers

पाठाधारित प्रश्न

बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में आज़ादी के लिए किन दो गुटों ने जन्म लिया?
(i) उग्र और नरम
(ii) नरम दल और गरम दल
(iii) तीव्र और भेद
(iv) मुख्य और गौण
उत्तर:
(ii) नरम दल और गरम दल

प्रश्न 2.
गांधी जी की कार्य पदधति का रूप क्या था?
(i) हिंसात्मक
(ii) अहिंसात्मक
(iii) विरोध
(iv) बदला
उत्तर:
(ii) अहिंसात्मक

प्रश्न 3.
भारत के विभाजन में किस नेता का योगदान रहा?
(i) मिस्टर जिन्ना
(ii) अबुल कलाम आजाद
(iii) गांधी
(iv) जवाहर लाल नेहरू
उत्तर:
(i) मिस्टर जिन्ना

प्रश्न 4.
कांग्रेस किस सिद्धांत पर अडिग रही?
(i) राष्ट्रीय एकता
(ii) लोकतंत्र
(iii) राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र
(iv) अन्य
उत्तर:
(iii) राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रथम विश्वयुद्ध के समय राजनीतिक स्थिति क्या थी?
उत्तर:
प्रथम विश्व युद्ध के समय राजनीतिक स्थिति उतार पर थी।

प्रश्न 2.
कांग्रेस में दो दल कौन-कौन से थे?
उत्तर:
कांग्रेस में दो दल थे (1) गरम दल (2) नरम दल।

प्रश्न 3.
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद देश में लोगों की क्या स्थिति थी?
उत्तर:
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद देश में आम लोगों की स्थिति दयनीय थी। किसान, मजदूर, वर्ग, मध्यम वर्ग सभी आक्रांत थे। उनका बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा था। देश में भुखमरी और गरीबी बढ़ती जा रही थी।

प्रश्न 4.
मार्शल लॉ क्या था?
उत्तर:
‘मार्शल लॉ’ अंग्रेज़ी सरकार द्वारा बनाया गया एक ऐसा कानून था जिसमें किसी भी व्यक्ति को किसी भी समय पुलिस व न्यायालय की आदेश के बगैर गोली का निशाना बनाया जा सकता था।

प्रश्न 5.
गांधी जी द्वारा अहवान करने पर देश की आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
गांधी जी द्वारा आम जनता को अह्वान करने पर ‘डरो मत’ किए जाने पर लोगों में ब्रिटिश सरकार का डर समाप्त हो गया। वे अपने कार्य खुलेआम करने लगे। उनमें हौंसला और साहस की वृद्धि हुई और मनोवैज्ञानिक परिवर्तन दिखाई पड़ने लगा।

प्रश्न 6.
भारतीय संस्कृति के बारे में गांधी जी के क्या विचार थे?
उत्तर:
गांधी जी ने भारतीय संस्कृति के बारे में लिखित रूप में कहा कि “भारतीय संस्कृति न हिंदू है न इस्लाम, न पूरी तरह से कुछ और है। यह सबका मिलाजुला रूप है। उन्होंने हिंदू धर्म को सार्वभौमिक यानी सबके लिए समान रूप देना चाहा। सत्य के घेरे में सबको शामिल करने का प्रयास किया।

प्रश्न 7.
कांग्रेस किस प्रयासों में असफल रही?
उत्तर:
कांग्रेस ने बहुत प्रयास किया कि सांप्रदायिक तत्वों को राजनीति में न लाया जाए लेकिन मुस्लिम लीग ने सहयोग न किया और राष्ट्रीय एकता कायम रखने में असफल रही।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गांधी जी के सपनों का भारत कैसा था?
उत्तर:
गांधी जी ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे- जिसमें गरीब-से-गरीब व्यक्ति भी यह महसूस करेगा कि यह उसका देश है जिसके निर्माण में उसका योगदान रहा है। एक ऐसा भारत हो जिसमें लोगों के बीच ऊँच-नीच, अमीर-गरीब का भेद न हो। ऐसा भारत जिसमें सभी जातियाँ समभाव से रहें। ऐसा भारत हो जिसमें भेद-भाव से रहित हो, छुआछूत की जगह न हो, नशीली मदिरा और दवाइयों के अभिशाप के लिए कोई जगह नहीं हो, जिसमें स्त्री-पुरुषों के समान अधिकार हों, यही गांधी जी के सपनों का भारत है।

प्रश्न 2.
प्रथम विश्व युद्ध का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति पर देश में राहत और प्रगति की बजाय दमनकारी कानून और पंजाब में मार्शल लॉ लागू हुआ। जनता में अपमान की कड़वाहट और क्रोध फैल गया और शोषण का बाजार गर्म था। इससे लोगों की आशा निराशा में बदल गई।

प्रश्न 3.
गांधी जी की कार्य-प्रणाली क्या थी?
उत्तर:
गांधी जी की कार्य प्रणाली अहिंसात्मक थी, उसमें हिंसा के लिए लेशमात्र की जगह नहीं थी। उनके काम करने का तरीका पूर्णतया शांतिपूर्वक था लेकिन जिस बात को गलत समझा जाता था उसके आगे सिर झुकाना भी उन्होंने कबूल नहीं किया। उन्होंने लोगों को अंग्रेजों के द्वारा दी गई पदवियाँ वापस करने के लिए प्रेरित किया। सविनय अवज्ञा आंदोलन व असहयोग आंदोलन उन्हीं की देख-रेख में भारत में चले, जिन्होंने अंग्रेज़ी सरकार को उखाड़कर रख दी।

पाठ-विवरण

इस पाठ के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अंतिम दो दौर का वर्णन किया गया है।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 7 Summary

राष्ट्रीयता बनाम साम्राज्यवाद : मध्य वर्ग की बेबसी गांधी जी का आगमन- दूसरे विश्वयुद्ध के शुरुआत होने के समय कांग्रेस की राजनीति में उतार आया था। इसका मुख्य कारण कांग्रेस का दो गुटों में बँटना था। जिनमें एक था नरमदल और दूसरा गरम दल। विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद भारत में अंग्रेजों द्वारा दमनकारी कानून और भारत में मार्शल ला लागू हुआ। भारतीय जनता का शोषण लगातार बढ़ने लगा। तभी भारतीय राजनीति में गांधी का उदय हुआ। वे करोड़ों की आबादी से निकलकर आए थे। वे जनता की भाषा बोलने वाले और जनता के सच्चे शुभ चिंतक थे। अतः उन्होंने भारत में करोड़ों जनता को प्रभावित किया। गांधी ने पहली बार कांग्रेस के संगठन में प्रवेश किया। इस संगठन का उद्देश्य था सक्रियता और तरीका था शांतिप्रिय तरीके से। गांधी ने आते ही ब्रिटिश शासन की बुनियादों पर चोट की। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने अंदर का भय निकाल दो क्योंकि आम लोगो की व्यापक दमनकारी, दमघोटू भय सेना का, पुलिस का, खुफिया विभाग का, अफसरों, जमीनदारों, साहूकारों, बेकारी और भुखमरी का भय सताता रहता था। गांधी जी की प्रेरणा से लोगों ने भयमुक्त होकर काम करना शुरू किया। इससे लोगों में मनोवैज्ञानिक परिवर्तन का संचालन हुआ। यह परिवर्तन असंख्य लोगों को प्रभावित कर रहा था। उनकी इस प्रेरणा से सभी आम जनता में जागरुकता का विस्तार हुआ।

गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस सक्रिय
गांधी जी ने पहली बार कांग्रेस में प्रवेश करते ही उसके संविधान में परिवर्तन ला दिया। उन्होंने कांग्रेस को लोकतांत्रिक संगठन बनाया। इस संगठन का लक्ष्य और आधार था सक्रियता। इसके परिणामस्वरूप किसानों ने कांग्रेस में भाग लेना शुरू किया। अब कांग्रेस विशाल किसान संगठन दिखाई देने लगा। गांधी जी का सक्रियता का आह्वान दोहरा था – विदेशी शासन को चुनौती देना और इसका मुकाबला करना। अपनी खुद की सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध लड़ने में भी सक्रियता थी। गांधी जी ने अंग्रेजी शासन की बुनियादों पर चोट की। लोगों से इसके विरोध में मैडल और खिताब वापस करने की अपील की। धनी लोगों ने सादगीभरा जीवन व्यतीत करना अपना लिया। गांधी जी के अनुसार आज़ादी पाने के लिए आम जनता की भागीदारी आवश्यक है। वे हर काम को शांतिपूर्ण तरीके से सही ढंग से करते थे । उनका मानना था कि भारतीय संस्कृति धर्मनिरपेक्ष है। यह सभी धर्मों का सम्मिश्रण है। गांधी जी सभी की भावनाओं का सम्मान करते थे। वे प्रायः लोगों की इच्छा के सामने झक जाते थे। कभी-कभी अपने विरुद्ध फैसले स्वीकार कर लेते थे। सन् 1920 तक कांग्रेस में शामिल और आम लोगों ने गांधी के रास्ते को अपनाकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ संघर्ष किया। पहली बार नए आंदोलन हुए, सविनय अवज्ञा आंदोलन हुआ, असहयोग की नीति अपनाई गई लेकिन यह अहिंसक आंदोलन था।

अल्पसंख्यकों की समस्या-मुस्लिम लीग-मोहम्मद अली जिन्ना
भारत सदैव से धर्म निरपेक्षता का अनुसरण करता रहा और सभी धर्मों को एक समान मान्यता दी। यहाँ किसी धर्म का विरोध नहीं किया गया। लेकिन भारत में उस समय राजनीतिक मामलों में धर्म का स्थान सांप्रदायिकता ने ले लिया था। कांग्रेस इन धार्मिक सांप्रदायिक मामलों का हल निकालने के लिए उत्सुक और चिंतित थी। कांग्रेस की सदस्य संख्या में अधिकांश हिंदू सदस्य थे। कांग्रेस मुख्यतः दो बुनियादी प्रश्नों पर अटल रही – राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र। 1940 में कांग्रेस ने घोषणा की कि भारत में ब्रिटिश सरकार की नीति ‘नव जीवन में संघर्ष और फूट को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देती है।’

ऐसे में भारत की बलि देना और लोकतंत्र का त्याग करना देश के लिए अहितकर था। अंग्रेज़ों की नीति हिंदू और मुस्लिम एकता को कमज़ोर करना रहा। वे फूट डालो राज्य करो की नीति को अपनाते थे। ऐसे में कांग्रेस ऐसा कोई हल न ढूँढ़ सकी जिससे सांप्रदायिक समस्या को सुलझाया जा सके।

अब हर हाल में हिंदू और मुसलमानों में दीवार खड़ी करना चाहता थे। वे हिंदू-मुस्लिम के मत-भेदों को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास करने लगा।

मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना की माँग का आधार एक नया सिद्धांत था- भारत में दो राष्ट्र हैं- हिंदू और मुसलमान। अब मुस्लिम लीग के अगुवा जिन्ना ने हिंदू और मुसलमान के लिए दो अलग राष्ट्रों की घोषणा की। इससे देश में भारत और पाकिस्तान के रूप में विभाजन की अवधारणा विकसित हुई। इससे दो राष्ट्रों की समस्या का हल न हो सका क्योंकि हिंदू व मुसलमान पूरे राष्ट्र में ही थे।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या 106.
विभाजन – बँटवारा, गरमदल – गरम विचारों वाला, नरमदल – नरम विचारों वाला, प्रतिबंध – रोक, दमनदारी – नष्ट करने वाला, आवेश – उत्तेजना, निर्मम – निर्दय, दब्बू, डरने वाला।

पृष्ठ संख्या 107.
सर्वग्रामी – सबको निगल लेने वाला, आकाशद्वीप – आकाश में चमक बिखेरने वाले, सोचनीय – खराब, चिंताजनक, दुर्गति – बुरी स्थिति, प्रबल – मज़बूत, खुफिया – जासूस, कारिंदा – जमींदार के लिए काम करने वाला, लाबादा – ढीलाढाला ऊपरी पोशाक आंशिक अधूरा।

पृष्ठ संख्या 108.
लोकतांत्रिक – लोगों के प्रभुत्व वाला, हैसियत – औकात, सक्रियता – क्रियाशील होना, विकल्प – तरीके, ऊर्जा – शक्ति, शिष्ट – सभ्य, आह्वान – प्रेरित करना।

पृष्ठ संख्या 109.
बुनियादी – नीवों/आधार, खिताब – पदवी, उपहासास्पद – मज़ाक उड़ाने योग्य, अभद्र – अशिष्ट, वेशभूषा – पहनावा, निष्क्रिय – कार्य न करना, निवृत्तिमार्गी – मुक्ति के मार्ग को अपनाने वाले, पैठाने – स्थान देने।

पृष्ठ संख्या 110.
मतभेद – विचार एक न होना, धर्मप्राण – धार्मिक, अंतरतनम – मन की गहराइयों से, अवधारणा – विचार, दृढ़ – पक्का, अहिंसा – बिना हिंसा के अनुरूप, मदिरा – शराब, एक नशीला पेय।

पृष्ठ संख्या 111.
लगन – गहरी रुचि, गौण – तुच्छ, कम महत्त्वपूर्ण, अलंकार – सजावट का सामान, आकांक्षा – इच्छा, सम्मोहित – अपनी ओर आकर्षित कर लेना, तटस्थ – किसी विशेष पक्ष का साथ न देनेवाला, प्रभुत्व – प्रभाव।

पृष्ठ संख्या 112.
सांप्रदायिक समस्या – धर्म के आधार पर बनाई हुई समस्या, संरक्षण – सहारा, बढ़ावा, भाषिक – भाषा संबंधी।

पृष्ठ संख्या 113.
स्वाधीनता – स्वतंत्र रहने की भावना, एक – एकता, बनियादी – आधारभूत, अडिग – दृढता से अपने मत पर स्थिर रहना, भड़काना – उग्रता को बढ़ावा देना, खल्लम खुल्ला – खले रूप में, सामंती – जमींदारी, विभाजन – बँटवारा, अस्वीकार – अमान्य, खुल्लमखुल्ला – स्पष्ट रूप से सबके सामने, एकता की बलि – एकता को तोड़ना।

पृष्ठ संख्या 114.
प्रोत्साहित – उत्साहित, अतीत – बीता हुआ, बहुराष्ट्रीय – बहुत से राष्ट्र।