Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 5 कुंती

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 5 कुंती

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 5

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विदुर का पहला नाम क्या था?
उत्तर:
विदुर का पहला नाम धर्मदेव था।

प्रश्न 2.
सूरसेन कौन थे?
उत्तर:
सूरसेन यदुवंश के लोकप्रिय राजा और श्रीकृष्ण के पितामह थे।

प्रश्न 3.
पृथा किसकी बेटी थी?
उत्तर:
पृथा यदुवंश के प्रसिद्ध राजा सूरसेन की पुत्री थी।

प्रश्न 4.
धर्मदेव का जन्म किसकी कोख से हुआ था?
उत्तर:
धर्मदेव का जन्म विचित्रवीर्य की रानी अंबालिका की दासी की कोख से हुआ था।

प्रश्न 5.
कर्ण का पालन-पोषण किसने किया था?
उत्तर:
कर्ण का लालन-पालन अधिरथ नाम के सारथी ने किया था।

प्रश्न 6.
पृथा का नाम कुंती कैसे पड़ा?
उत्तर:
पृथा के पिता सूरसेन ने अपने फूफेरे भाई कुंतिभोज को वचन दिया था कि अपनी पहली संतान उसे गोद देगा। जब कुंतिभोज ने पृथा को गोद लिया तब उन्होंने पृथा का नाम परिवर्तित कर कुंती रख दिया। इस प्रकार पृथा का नाम कुंती हो गया।

प्रश्न 7.
धृतराष्ट्र ने विदुर को क्या बनाया?
उत्तर:
धृतराष्ट्र ने विदुर को अपना प्रधानमंत्री बनाया।

प्रश्न 8.
पांडु के पत्नियों का नाम बताएँ।
उत्तर:
पांडु की दो पत्नियाँ थीं – कुंती व माद्री।

प्रश्न 9.
पांडु को शाप क्यों मिला?
उत्तर:
जंगल में हिरण का रूप धारण कर दो ऋषि दंपति विचरण कर रहे थे। जाने-अनजाने में शिकार खेलते हुए पांडु के तीर उन दंपति में से एक को जा लगी, जिससे उनमें से एक की मृत्यु हो गई। ऋषि ने मरते-मरते पांडु को शाप दिया था।

प्रश्न 10.
पांडु की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर:
वसंत ऋतु में पांडु अपनी पत्नी माद्री के साथ वन-विहार कर रहे थे। ऋतु की मादकता और पत्नी की सुंदरता को देखकर आकर्षित हो गए। उनमें वासना की भावना जगी। वे शाप को भूल गए। माद्री के समीप आते ही उनकी मृत्यु हो गई।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विदुर का संक्षिप्त जीवन परिचय दीजिए।
उत्तर:
विचित्रवीर्य की पत्नी अंबालिका की दासी की कोख से धर्मदेव का जन्म हुआ। यही बालक बड़ा होकर बिदुर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। विदुर को धर्म-शास्त्र और राजनीति का काफ़ी ज्ञान था। उन्हें क्रोध नहीं आता था। उनके विवेक और ज्ञान के कारण ही उन्हें बाद में राज्य का प्रधानमंत्री बनाया गया था।

प्रश्न 2.
मुनि दुर्वासा कुंती से क्यों प्रसन्न थे? उन्होंने प्रसन्न होकर उसे क्या वरदान दिया?
उत्तर:
कुंती ने मुनि दुर्वासा की एक वर्ष तक बड़ी लगन के साथ सेवा की थी। उनकी सेवा भावना से खुश होकर उन्होंने उसे वरदान दिया कि जब तुम किसी भी देवता का ध्यान करोगी, तो वह अपने समान तेजस्वी पुत्र प्रदान करेगा।

प्रश्न 3.
माद्री पति के साथ सती क्यों हो गई?
उत्तर:
माद्री पति के साथ सती इसलिए हो गई क्योंकि वह स्वयं को पति की मृत्यु का कारण मानती थी, इसलिए वह पति के साथ सती हो गई।

प्रश्न 4.
कुंती ने पति की मृत्यु के बाद क्या किया?
उत्तर:
कुंती अपने पति की मृत्यु के बाद अपने पाँचों पुत्रों के साथ हस्तिनापुर चली गई और अपने पुत्रों को भीष्म पितामह को सौंप दिया।

प्रश्न 5.
पांडु की मृत्यु का सत्यवती पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
पांडु की मृत्यु की खबर सुनकर सत्यवती अपनी विधवा पुत्रवधुओं को लेकर वन में चली गई और कुछ दिन बाद इन तीनों विधवाओं की मृत्यु हो गई।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 5

एक बार कुंतिभोज के घर ऋषि दुर्वासा पधारे। ऋषि ने प्रसन्न होकर कुंती को वरदान दिया कि तुम जिस देवता का ध्यान करोगी, तो वह अपने समान तेजस्वी पुत्र प्रदान करेगा।

कुंती ने ऋषि के वरदान की परीक्षा लेने के लिए एक दिन सूर्यदेव का ध्यान किया। सूर्यदेव के संयोग से जन्मजात कवच और कुंडलों से युक्त एक बालक को जन्म दिया। कुंती अभी अविवाहित थी। अतः लोकनिंदा के डर से उसने बच्चे को एक पेटी में सावधानीपूर्वक बंद करके गंगा में बहा दिया। अधिरथ नाम के सारथी की नज़र उस बालक पर पड़ी। वह निस्संतान था। वह इस बालक को पाकर बहुत खुश हुआ। इस तरह से सूर्य पुत्र कर्ण एक सारथी के घर पलने लगा। यह बालक आगे चलकर शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ कर्ण कहलाया।

विवाह योग्य होने पर कुंती ने स्वयंवर में पांडु का वरण किया। इस प्रकार पांडु का दूसरा विवाह मद्रराज की कन्या माद्री से हुआ। एक दिन महाराज पांडु वन में शिकार खेलने गए। वहाँ एक ऋषि दम्पति हिरण के रूप में विचरण कर रहे थे। पांडु उस दिन माद्री के साथ वहाँ प्रकृति का आनंद ले रहे थे। उन्हें इस बात का पता नहीं था कि हिरण जोड़ी ऋषि हैं। उन्होंने हिरण को मार गिराया। मरते-मरते ऋषि ने शाप दे दिया कि तुम भी जब अपनी पत्नी के साथ विहार करोगे तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-10
जन्मजात – पैदा होते ही, उत्पन्न होने के समय ही। विख्यात – प्रसिद्ध, महसूर। लोक – निंदा-समाज में होने वाली बुराई। नज़र – दृष्टि। निस्संतान – जिसको संतान न हो। प्रथा – परंपरा।

पृष्ठ संख्या-11
सलाह – राय, ब्याह – शादी, दंपति – पत्नी-पति, खिन्न – दुखी, लालसा – अभिलाषा, ज़िक्र – वर्णन, सुषमासौंदर्य, सुंदरता, निहारना – देखना, असर – प्रभाव, तत्काल – तुरंत, छल – प्रपंच-धोखा, संभवतः – शायद।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 4 विदुर

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 4 विदुर are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 4 विदुर

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 4

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विदुर कौन थे?
उत्तर:
विदुर विचित्र वीर्य की रानी अंबालिका की दासी के पुत्र थे।

प्रश्न 2.
विदुर किस स्वभाव के व्यक्ति थे?
उत्तर:
विदुर धर्मशास्त्र एवं राजनीति के पंडित थे। इनमें इनका अथाह ज्ञान था। वे क्रोध एवं अभिमान से दूर रहते थे।

प्रश्न 3.
विदुर ने धृतराष्ट्र द्वारा दुर्योधन को जुआ खेलने की अनुमति दिए जाने पर क्या किया?
उत्तर:
विदुर ने धृतराष्ट्र को सलाह दिया कि जुआ खेलने से पुत्रों के बीच वैर भाव बढ़ेगा, अतः जुआ खेलने की अनुमति न दें। धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को समझाते हुए कहा कि विदुर बड़ा बुद्धिमान है, वह हमेशा हमारा हित चाहता है। उसके बताए हुए रास्ते पर चलने में हमारी भलाई है। अत: बेटा! जुआ खेलने का विचार छोड़ दो।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विदुर युधिष्ठिर के पास क्यों गए? युधिष्ठिर ने विदुर की बात क्यों नहीं मानी?
उत्तर:
विदुर युधिष्ठिर के पास इसलिए गए ताकि जुएँ के खेल को रुकवाया जा सके। युधिष्ठिर विदुर की बातों से सहमत थे, लेकिन महाराज धृतराष्ट्र के प्रस्ताव की अवहेलना नहीं कर सकते थे। उनका मानना था कि युद्ध या खेल के लिए बुलाए जाने पर न जाना क्षत्रिय धर्म नहीं है। यह बात बताकर युधिष्ठिर क्षत्रिय कुल की मर्यादा रखने के लिए जुआ खेलने गए।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 4

विचित्र वीर्य की रानी अंबालिका की दासी की कोख से धर्मदेव विदुर का जन्म हुआ था। वह आगे चलकर विदुर के नाम से प्रसिद्ध हुए। वे धर्म-शास्त्र तथा राजनीति के ज्ञाता थे। वे क्रोध और अहंकार से दूर रहते थे। वे बहुत ही बुद्धिमान व विनम्र थे। उनके विवेक और ज्ञान से प्रभावित होकर भीष्म पितामह ने उन्हें धृतराष्ट्र का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। जब धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को जुआ खेलने की अनुमति दी, तब विदुर ने धृतराष्ट्र को आग्रहपूर्वक समझाने का काफ़ी प्रयास किया। उन्होंने समझाया कि जुआ खेलने से पुत्रों में वैरभाव बढ़ेगा। धृतराष्ट्र ने विदुर की बात से प्रभावित होकर दुर्योधन को बहुत समझाया परंतु वह बिलकुल न माना। जब धृतराष्ट्र को विदुर नहीं समझा पाया तब वह युधिष्ठिर के पास गए और उनको जुआ खेलने से रोकने का प्रयत्न किया। युधिष्ठिर ने विदुर से कहा कि मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ लेकिन महाराज धृतराष्ट्र बुलाएँ तो मैं कैसे मना कर सकता हूँ।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-9
प्रख्यात – प्रसिद्ध, वैरभाव – दुश्मनी, कुचाल – गलत रास्ता, नाश – पतन, स्नेह – प्रेम।

पृष्ठ संख्या-10
न्यौता – निमंत्रण, आदर – सम्मान, मर्यादा – प्रतिष्ठा अथवा सम्मान

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 3 अंबा और भीष्म

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 3 अंबा और भीष्म are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 3 अंबा और भीष्म

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 3

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चित्रांगद कौन था?
उत्तर:
चित्रांगद सत्यवती का बड़ा लड़का था।

प्रश्न 2.
चित्रांगद की मृत्यु कैसे हुई।
उत्तर:
चित्रांगद वीर और स्वार्थी प्रकृति का व्यक्ति था। उसकी मृत्यु गंधर्वो के साथ युद्ध में हुई थी।

प्रश्न 3.
स्वयंवर में राजकुमारों ने हंसी क्यों उड़ाई थी।
उत्तर:
यहाँ पर सभी उपस्थित राजकुमार जानते थे कि भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा ली थी, भीष्म को स्वयंवर में देखकर राजकुमारों ने सोचा कि वे स्वयंवर में भाग लेने आए हैं। उनको लगा कि इन्होंने जो प्रतिज्ञा की थी वह झूठी है।

प्रश्न 4.
विचित्र वीर्य के विवाह योग्य होने पर भीष्म ने क्या किया?
उत्तर:
जब विचित्र वीर्य विवाह के योग्य हुए तो भीष्म को उसके विवाह की चिंता हुई। तभी भीष्म को पता चला कि काशीराज की पुत्री का स्वयंवर होने वाला है। वे स्वयंवर पहुँच गए और बलपूर्वक काशीराज की तीनों पुत्रियों को हस्तिनापुर ले आए। उनकी मनसा विचित्र वीर्य का विवाह इन कन्याओं के साथ कराना था।

प्रश्न 5.
भीष्म और शल्य के बीच युद्ध क्यों हुआ?
उत्तर:
शल्य राजकुमार काशीराज की बड़ी पुत्री से प्रेम करते थे। भीष्म ने अंबा को भी हरण कर लिया था। शल्य ने भीष्म को रोकने के लिए युद्ध किया लेकिन युद्ध में वह हार गया। काशीराज की पुत्री के अनुरोध पर शल्य को जीवित छोड़ दिया।

प्रश्न 6.
भीष्म से बदला लेने के लिए अंबा ने क्या प्रयास किया?
उत्तर:
भीष्म से बदला लेने के लिए अंबा कई राजाओं से मिलकर युद्ध करने के लिए अनुरोध किया लेकिन कोई राजा उनसे सामना करने की साहस नहीं जुटा पाए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जब विवाह मंडप में जाने का समय आया तो काशीराज की बड़ी पुत्री ने एकांत में जाकर क्या कहा?
उत्तर:
काशीराज की बड़ी पुत्री अंबा ने भीष्म को एकांत में जाकर बोली, मैंने अपने मन से सोम देश के राजा शल्य को अपना पति मान चुकी हूँ। इसी दौरान आप बलपूर्वक मुझे वहाँ से उठा लाए। मेरे मन की इच्छा जानने के बाद आप जो उचित समझें फैसला करें।

प्रश्न 2.
अंबा की शल्य को अपना पति स्वीकार करने की बात सुनकर भीष्म ने क्या किया?
उत्तर:
जब भीष्म ने अंबा की पूरी बात सुनी तो इसके बाद भीष्म ने अंबा को शल्य के पास भेजा दिया। अंबा ने शल्य को सारी बात बताई। शल्य ने अंबा को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि भीष्म ने युद्ध में हरा दिया है और बलपूर्वक तुम्हारा हरण करके ले गया। ऐसी परिस्थिति में मैं तुमसे विवाह नहीं कर सकता हूँ।

प्रश्न 3.
अंबा परशुराम के पास क्यों गई?
उत्तर:
भीष्म से अपना बदला लेने के लिए वह परशुराम के पास गई क्योंकि परशुराम ही इतना शक्तिशाली था जो भीष्म को हराने की शक्ति रखता था। भीष्म और परशुराम में भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में परशुराम की पराजय हुई।

प्रश्न 4.
अंबा ने भीष्म से किस प्रकार बदला लिया?
उत्तर:
परशुराम की पराजय के बाद अंबा ने वन में जाकर तपस्या शुरू कर दी। वह अपने तपो बल से स्त्री से पुरुष के रूप में परिवर्तित हो गई। पुरुष बनने के बाद उसने अपना नाम शिखंडी रख लिया। जब कौरव और पांडवों के बीच कुरुक्षेत्र में युद्ध हुआ तो भीष्म के साथ युद्ध में लड़ते हुए शिखंडी अर्जुन के रथ के आगे बैठा था। भीष्म को यह बात मालूम थी कि शिखंडी ही अंबा है अतः उन्होंने उस पर बाण नहीं चलाया। शिखंडी को आगे करके विजय प्राप्त की। इस तरह से अंबा ने अपने अपमान का बदला लिया।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 3

सत्यवती के बड़े पुत्र चित्रांगद गंधर्वो के द्वारा युद्ध में मारे जाने के उपरांत विचित्र वीर्य हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठे। उस समय उनकी आयु काफ़ी कम थी। अतः हस्तिनापुर का राज-काज भी भीष्म को ही संभालना पड़ा। विचित्र वीर्य के विवाह योग्य होने पर भीष्म को उनके विवाह की चिंता हुई। उन्हें पता चला कि काशीराज की पुत्री का स्वयंवर होने वाला है। भीष्म भी स्वयंवर में पहुँच गए। भीष्म को देखकर सभी राजाओं के बीच चर्चा होने लगी कि इन्होंने जीवनभर ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की थी। क्या वह झूठी थी, यह जानकर काशीराज की पुत्रियों ने भी भीष्म की अवहेलना की। भीष्म इस अवहेलना को सहन नहीं कर पाए। वे बलपूर्वक काशीराज की तीनों पुत्रियों को रथ पर बैठाकर हस्तिनापुर चल पड़े। इसके बाद शल्य ने भीष्म का पीछा करके उसे रोकने का काफ़ी प्रयास किया। भीष्म और शल्य के बीच भयंकर युद्ध हुआ। भीष्म ने शल्य को हरा दिया लेकिन काशीराज की पुत्रियों के अनुरोध पर शल्य को जीवित छोड़ दिया। हस्तिनापुर पहुँचकर जब भीष्म विचित्रवीर्य के साथ विवाह के लिए काशीराज की पुत्रियों को विवाह मंडप पर ले जाने लगे तो काशीराज की बड़ी पुत्री अंबा ने भीष्म को एकांत में बुलाकर कहा कि मैं राजा शल्य से प्रेम करती हूँ। मैंने उन्हें अपना पति मान लिया है। भीष्म ने अंबा को शल्य के पास भेज दिया लेकिन शल्य ने यह कहकर लौटा दिया कि भीष्म ने सभी राजाओं के सामने उसे हरा दिया और तुम्हें हरण कर ले गया है, इसलिए अब मैं तुम्हें स्वीकार नहीं कर सकता। इसके बाद अंबा पुनः हस्तिनापुर लौट गई। विचित्रवीर्य भी अंबा से विवाह के लिए तैयार नहीं हुए। अंबा ने भीष्म से कहा अब आप ही मेरे साथ विवाह करें लेकिन भीष्म ने अपनी प्रतिज्ञा के बारे में बताया कि वह किसी के साथ शादी नहीं कर सकते। अंबा इस प्रकार हस्तिनापुर और सौम्य देश के बीच भटकती रही। उसके मन में आक्रोश की आग जलने लगी। भीष्म से बदला लेने के लिए वह अनेक राजाओं के पास गई लेकिन कोई राजा भीष्म के साथ युद्ध करने के लिए तैयार नहीं हुआ। अंबा ने अपनी व्यथा परशुराम को सुनाई। परशुराम ने भीष्म के साथ युद्ध किया लेकिन उनकी पराजय हुई। उसके बाद अंबा वन में गई और वहाँ तपस्या करने लगी। तप के प्रभाव से वह स्त्री से पुरुष बन गई। पुरुष बनने के बाद उसने अपना नाम शिखंडी रखा। कौरवों और पांडवों के मध्य हुआ तो शिखंडी ने अर्जुन का सारथी बनकर भीष्म से अपना प्रतिशोध लिया। भीष्म ने शिखंडी पर बाण चलाना अपनी वीरोचित प्रतिष्ठा के खिलाफ़ समझा। इसी बीच अर्जुन ने भीष्म पर बाणों से प्रहार करके विजय प्राप्त की।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-7
स्वेच्छाचारी – अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने वाला, स्वयंवर – विवाह की एक प्रथा, स्पर्धा – प्रतियोगिता, फब्तियाँ – तंज कसना।

पृष्ठ संख्या-8
गांगेय – गंगा के पुत्र अर्थात भीष्म, मिन्नतें करना – निवेदन करना, दया – दया से परिपूर्ण भाव, वध करना – जान से मारना।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 2 भीष्म-प्रतिज्ञा

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 2 भीष्म-प्रतिज्ञा are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 2 भीष्म-प्रतिज्ञा

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 2

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सत्यवती कौन थी? राजा शांतनु ने उसे कहाँ देखा?
उत्तर:
सत्यवती मल्लाहों के राजा केवटराज की पुत्री और राजा शांतनु की दूसरी पत्नी थी। राजा शांतनु ने यमुना नदी के किनारे देखा था।

प्रश्न 2.
केवटराज ने शांतन के सामने क्या शर्त रखी थी?
उत्तर:
पुत्री से विवाह का प्रस्ताव सुनकर केवटराज ने शांतनु से शर्त रखी कि आपके बाद हस्तिनापुर के राज-सिंहासन पर मेरी लड़की का पुत्र बैठेगा। क्या आप मुझे इस बात का वचन दे सकते हैं?

प्रश्न 3.
केवटराज ने देवव्रत के सामने दूसरी शर्त क्या रखी?
उत्तर:
दूसरी शर्त में केवटराज में कहा कि मुझे डर है कि आपकी संतान आपके वचन का ध्यान न रखकर मेरे नाती से राज्य छीनने की कोशिश करने लगे तो आपके वचन का क्या होगा?

प्रश्न 4.
सत्यवती को देखकर राजा शांतनु के मन में क्या इच्छा बलबती हो उठी?
उत्तर:
सत्यवती को देखकर राजा शांतनु के मन में उसे अपनी पत्नी बनाने की इच्छा बलबती हो उठी।

प्रश्न 5.
केवटराज ने सत्यवती के विवाह के लिए क्या शर्त लगाई ?
उत्तर:
केवटराज ने शर्त लगाई-शांतनु की मृत्यु के बाद सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर के राज सिंहासन पर बैठेगा।

प्रश्न 6.
केवटराज की प्रथम शर्त पर देवव्रत ने क्या उत्तर दिया।
उत्तर:
केवटराज की प्रथम शर्त सुनकर देवव्रत ने कहा- मैं वचन देता हूँ कि मेरे पिता के बाद सत्यवती का पुत्र ही राजा बनेगा।

प्रश्न 7.
देवव्रत ने केवटराज की शंका का निवारण कैसे किया?
उत्तर:
केवटराज’ की शंका निवारण करते हुए देवव्रत ने कहा- “मैं जीवन भर विवाह नहीं करूँगा। आजन्म ब्रह्मचारी रहूँगा। मेरे संतान ही नहीं होगी। अब तो तुम खुश हो।”

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
देवव्रत किस प्रतिज्ञा के कारण भीष्म कहलाए।
उत्तर:
जीवनभर विवाह न करने तथा आजन्म ब्रह्मचारी रहने की भयंकर प्रतिज्ञा के कारण देवव्रत भीष्म कहलाए। इन्हीं कारणों से वे भीष्म के नाम से प्रसिद्ध हुए।

प्रश्न 2.
सत्यवती से शांतनु को कितने पुत्र प्राप्त हुए। उनके नाम बताइए।
उत्तर:
सत्यवती से शांतनु के दो पुत्र हुए चित्रांगद और विचित्रवीर्य।

प्रश्न 3.
शांतनु के बाद हस्तिनापुर के सिंहासन पर कौन बैठा?
उत्तर:
शांतनु के बाद हस्तिनापुर के सिंहासन पर चित्रांगद बैठा। उसके युद्ध में मारे जाने के बाद विचित्रवीर्य ने राजगद्दी सँभाली।

प्रश्न 4.
देवव्रत के चरित्र से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर:
देवव्रत ने अपने पिता की खुशी के लिए अपना सबकुछ बलिदान कर दिया और आजीवन शादी न करने की प्रण ली। उनके पिता जिस सुंदरी से विवाह करना चाहते थे उसके पिता की भी ऐसी ही शर्त थी। अपने पिता के लिए ऐसी कठोर प्रतिज्ञा लेने वाले देवव्रत के चरित्र से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अपने माता-पिता की खुशी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देना चाहिए।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 2

राजा शांतनु अपने तेजस्वी बेटे को पालकर प्रसन्नचित होकर खुशी-खुशी अपने नगर में लौट गए। गंगा से देवव्रत को प्राप्त करके शांतनु ने उसको राजकुमार बना दिया। इस प्रकार से चार वर्ष बीत गए। एक दिन राजा शांतनु यमुना के किनारे घूम रहे थे। वहाँ उन्होंने नदी के किनारे सत्यवती नाम की युवती को देखा। राजा ने उससे अपने प्रेम की याचना की तो सत्यवती ने बताया कि मेरे पिता मल्लाहों के सरदार हैं। आप उनसे अनुमति लीजिए फिर मैं आपसे विवाह करने के लिए तैयार हूँ।

राजा शांतनु ने जब अपनी इच्छा प्रकट की तो, केवटराज ने कहा- “आपको मुझे एक वचन देना पड़ेगा।” राजा शांतनु ने कहा-“जो माँगोगे दूंगा यदि वह मेरे लिए अनुचित न हो।”

केवटराज बोले- “आपके बाद हस्तिनापुर के राज सिंहासन पर मेरी लड़की का पुत्र बैठेगा, इस बात का आप मुझे वचन दे सकते हैं” केवटराज की शर्त राजा शांतनु को नागवार लगी। निराश मन से वे अपने नगर राज्य को लौट आए। उनकी व्यथा को देखकर देवव्रत ने अपने पिता शांतनु से पूछा कि आपको किस बात की चिंता है। राजा शांतनु के स्पष्ट जवाब न पाकर देवव्रत ने उनके सारथी से पूछा। सारथी ने उस दिन राजा और केवटराज की बातों को बताया। अपने पिता के मन की व्यथा को जानकर देवव्रत केटवराज के पास गए और, बोले आप अपनी पुत्री का विवाह राजा शांतनु से कर दें। केवटराज ने पुनः वही शर्त देवराज देवव्रत के सामने रखी। देवव्रत ने कहा कि मैं वचन देता हूँ कि पिता के बाद सत्यवती का पुत्र ही राजा बनेगा।

इस पर केवटराज ने कहा- मुझे आप पर भरोसा है कि अपने वचन पर अटल रहेंगे, किंतु आप जैसे वीर का पुत्र भविष्य में मेरे नाती से राज्य छीनने का प्रयास नहीं करेगा, यह मैं कैसे मान लूँ।” केवटराज के इस प्रश्न को सुनकर पितृ भक्त देवव्रत तनिक भी विचलित नहीं हुए। गंभीर स्वर में देवव्रत ने कहा- “मैं जीवन भर विवाह नहीं करूँगा। आजन्म ब्रह्मचारी रहूँगा। मेरे संतान ही न होगी। अब तो तुम संतुष्ट हो?”

देवव्रत के इस भयंकर प्रतिज्ञा के कारण ही उनका नाम भीष्म पड़ गया। केवटराज ने खुशी-खुशी अपनी पुत्री को देवव्रत के साथ विदा कर दिया।

इस तरह शांतनु का सत्यवती के साथ विवाह हो गया। सत्यवती के दो पुत्र हुए- चित्रांगद और विचित्रवीर्य। शांतनु के बाद चित्रांगद सिंहासन पर बैठे पर उनकी असमय मृत्यु हो गई। इसके बाद विचित्रवीर्य राजा बने जिसकी दो रानियाँ थीं। अंबिका और अंबालिका। अंबिका से धृतराष्ट्र व अंबालिका से पांडु पैदा हुए। धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव व पांडु के पुत्र पांडव कहलाए। कुरुक्षेत्र के युद्ध के अंत तक भीष्म इस वंश के कुल नायक व पूज्य रहे। शांतनु के बाद कुरुवंश का क्रम यह रहा।
Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 2 भीष्म-प्रतिज्ञा 1

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-5
प्रफुल्लित – प्रसन्न, अप्सरा – देवलोक की नर्तकी, तरुणी – युवती, विराग – उदासीनता, विलीन – समाप्त हो गया, प्रेम-याचना – प्रणय निवेदन, अनुमति – आज्ञा, नागवार – अनुचित, व्यथा – पीड़ा, कुशाग्र – तेज़, सारथी – रथवान, रथ चलाने वाला, आर्य पुत्र – श्रेष्ठ पुरुष, अटल – अडिग, नाती – पुत्री का पुत्र।

पृष्ठ संख्या-6
अप्रत्याशित – जिसकी आशा न हो, आजन्म – जीवनभर, ब्रह्मचारी – अविवाहित, भीष्म – भयंकर, सानंद – आनंदपूर्वक, देवावसान – मृत्यु, कुलनायक – वंश का मुख्य पुरुष, क्रम – सिलसिला।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 1 देवव्रत

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 1 देवव्रत

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 1

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नदी के किनारे पर खडी कन्या कौन थी?
उत्तर:
नदी के किनारे खड़ी कन्या गंगा थी।

प्रश्न 2.
शांतनु के सामने पत्नी बनने के लिए गंगा ने क्या शर्त रखी थी?
उत्तर:
गंगा ने पत्नी बनने के लिए राजा शांतनु से शर्त रखी थी कि मैं कुछ भी करूँ, आप मुझसे कुछ नहीं कहेंगे।

प्रश्न 3.
शांतनु के द्वारा गंगा की शर्त मान लेने पर क्या परिणाम हआ?
उत्तर:
शांतनु के द्वारा सारी शर्त मान लेने के बाद गंगा उसकी पत्नी बन गई। बीते समय के साथ-साथ गंगा ने कई तेजस्वी पुत्रों को जन्म दिया और उन्हें गंगा की धारा में बहाती रही।

प्रश्न 4.
अपने पुत्रों को नदी की धारा में बहाने के बाद गंगा कहाँ जाती थी?
उत्तर:
अपने पुत्रों को नदी की धारा में बहाने के बाद गंगा हँसती-मुसकराती हुई शांतनु के महल में आ जाती थी।

प्रश्न 5.
राजा शांतनु गंगा के द्वारा अपनी संतान को नदी के धारा में बहाते हुए देखकर भी कुछ क्यों नहीं बोल पाते थे?
उत्तर:
राजा शांतनु गंगा को संतान को नदी की धारा में बहाते हुए देखकर भी कुछ इसलिए नहीं कह पाते थे, क्योंकि वे वचनबद्ध थे।

प्रश्न 6.
गंगा जब आठवें बच्चे को लेकर नदी की ओर चली तब शांतनु ने उससे क्या कहा?
उत्तर:
जब गंगा आठवें पुत्र को गंगा की धारा में बहाने के लिए चली तब शांतनु ने उससे कहा-
“माँ होकर अपने नादान बच्चे को अकारण ही क्यों बलि दिया करती हो? यह घृणित व्यवहार तुम्हें शोभा नहीं देता।”

प्रश्न 7.
आठवें बच्चे का क्या हुआ? यह आठवाँ बच्चा आगे चलकर किस नाम से प्रसिद्ध हुआ?
उत्तर:
आठवें बच्चे को गंगा अपने साथ ले गई। इस आठवें बच्चे का नाम था देवव्रत। आगे चलकर यह भीष्म के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 8.
शांतनु की बात सुनकर गंगा ने क्या कहा?
उत्तर:
शांतनु की बात सुनकर गंगा ने राजा शांतनु से कहा- राजन आपने दिया हुआ वचन तोड़ दिया है। अतः अब मैं ठहर नहीं सकती। अतः अब मैं आपके इस पुत्र को नदी में न डालकर कुछ दिन इन्हें पालूँगी और फिर आपको इसे दे दूंगी।

प्रश्न 9.
अचानक एक दिन गंगा नदी की धारा क्यों रुकी थी?
उत्तर:
एक दिन सुंदर और गठीला युवक (देवव्रत) गंगा नदी की बहती हुई धारा में बाण चला रहा था। उसी से गंगा की धारा रुकी हुई थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राजा को गंगा ने अपना और देवव्रत का परिचय किस प्रकार से दिया?
उत्तर:
राजा शांतनु के पास आकर गंगा ने उस युवक को अपने पास बुलाया और राजा से बोली- ‘राजन यह मेरा और आपका आठवाँ पुत्र देवव्रत है। यह शास्त्र ज्ञान में शुक्राचार्य व रण-कौशल में परशुराम के समान है। यह कुशल योद्धा और चतुर राजनीतिज्ञ है। अब आप अपने साथ ले जाइए।

प्रश्न 2.
देवव्रत कौन थे?
उत्तर:
देवव्रत गंगा और शांतनु के पुत्र थे जो आगे चलकर भीष्म पितामह के नाम से विख्यात हुए।

प्रश्न 3.
गंगा ने शांतनु को देवव्रत की किन-किन विशेषताओं का परिचय कराया?
उत्तर:
गंगा ने देवव्रत की विशेषताओं का परिचय कराया कि इसे महर्षि वशिष्ठ द्वारा शिक्षा दिया गया है। इसके सामने शास्त्र ज्ञान में शुक्राचार्य और युद्धकला में परशुराम ही इसका मुकाबला कर सकते हैं।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 1

एक बार गंगा एक सुंदर कन्या का रूप धारण किए हुए खड़ी थीं कि राजा शांतनु उस पर आकर्षित हो गया था। राजा ने गंगा की बातें मानकर उससे विवाह कर लिया। समय पाकर गंगा से शांतनु के कई तेजस्वी पुत्र हुए। गंगा अपने पुत्र को पैदा होते ही नदी की धरा में बहाकर राजा शांतनु के महल में वापस आ जाती थी। राजा शांतनु उसके इस व्यवहार पर आश्चर्य चकित रह जाते थे। राजा को क्रोध आता था, पर वचन से बंधे रहने के कारण मन मसोस कर रह जाते थे। इस तरह गंगा ने सात बच्चों को नदी की धारा में बहा दिया।

गंगा ने तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया और आठवें बच्चे की बारी आई तब राजा शांतनु से नहीं रहा गया। उन्होंने इस घृणित कार्य को करने से गंगा को मना कर दिया। गंगा बोली- राजन क्या आप अपना वचन भूल गए। शर्त के अनुसार, मैं अब यहाँ नहीं ठहर सकती। अब मैं इस आठवें पुत्र को नदी में नहीं फेकूगी लेकिन आपके आठवें पुत्र को मैं कुछ समय पालूँगी और फिर आपको सौंप दूंगी। इसके बाद गंगा अपने पुत्र को लेकर चली गई। बड़ा होकर यही बच्चा आगे चलकर भीष्म पितामह के नाम से विख्यात हुआ। गंगा के चले जाने के बाद राजा शांतनु का मन भोग विलास से विरक्त हो गया और वे राज-काज में लगे। एक दिन राजा शांतनु शिकार खेलते-खेलते गंगा तट पर गए। वहाँ एक सुंदर गठीले युवक को देखा जो नदी की बहती धारा में तीर चलाकर, उसकी प्रचंड धारा को रोक रहा था। राजा आश्चर्यचकित थे। इतने में वहाँ स्वयं गंगा आ गईं। उन्होंने राजा से कहा-

राजन पहचाना मुझे और इस युवक को यही आपका और मेरा आठवाँ पुत्र देवव्रत है। महर्षि वशिष्ठ ने इसे शिक्षा दी है। शास्त्र ज्ञान में शुक्राचार्य और रण-कुशल में परशुराम ही इसका मुकाबला कर सकते हैं। यह जितना, कुशल योद्धा है उतना ही कुशल राजनीतिज्ञ भी है अब मैं आपका पुत्र आपको सौंप रही हूँ। अब इसे आप अपने साथ ले जाइए। गंगा ने देवव्रत का माथा चूमा और आशीर्वाद देकर राजा के साथ विदा कर दिया।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-3
युवती – कन्या, आकर्षित – मोह लेना, अपने तरफ़ आकर्षित कर लेना, अज्ञात – जिसके बारे में पता न हो, नादान – ना समझ, अकारण – बिना किसी कारण के।

पृष्ठ संख्या-4
विख्यात – प्रसिद्ध, क्रोध – गुस्सा, मुकाबला – बराबरी, राजनीतिज्ञ – राजनीति की जानकारी रखने वाला, कुशल – चतुर।