NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 12

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 12 एक फूल की चाह

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) कविता की उन पंक्तियों को लिखिए, जिनसे निम्नलिखित अर्थ का बोध होता है-
(i) सुखिया के बाहर जाने पर पिता का हृदय काँप उठता था।
उत्तर:
मेरा हृदय काँप उठता था,
बाहर गई निहार उसे;

(ii) पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर की अनुपम शोभा।
उत्तर:
ऊँचे शैल-शिखर के ऊपर
मंदिर था विस्तीर्ण विशाल;
स्वर्ण-कलश सरसिज विहसित थे
पाकर समुदित रवि-कर-जाले।

(iii) पुजारी से प्रसाद/फूल पाने पर सुखिया के पिता की मन:स्थिति।
उत्तर:
भूल गया उसका लेना झट,
परम लाभ-सा पाकर मैं।
सोच,-बेटी को माँ के ये
पुण्य-पुष्प हूँ जाकर मैं।

(iv) पिता की वेदना और उसका पश्चाताप।
उत्तर:
अंतिम बार गोद में बेटी,
तुझको ले न सका मैं हा!
एक फूल माँ का प्रसाद भी
तुझको दे न सका मैं हा!

(ख) बीमार बच्ची ने क्या इच्छा प्रकट की?
उत्तर:
बीमार बच्ची सुखिया ने अपने पिता के सामने यह इच्छा प्रकट की कि वह उसके लिए (सुखिया के लिए) मंदिर से देवी के प्रसाद का एक फूल ला दें।

(ग) सुखिया के पिता पर कौन-सा आरोप लगाकर उसे दंडित किया गया?
उत्तर:
सुखिया के पिता पर निम्नलिखित आरोप लगाकर दंडित किया गया-

  • वह अछूत है। उसने मंदिर में जबरदस्ती प्रवेश करके मंदिर की पवित्रता और देवी की गरिमा नष्ट की है।

(घ) जेल से छूटने के बाद सुखिया के पिता ने अपनी बच्ची को किस रूप में पाया?
उत्तर:
जेल से छूटने के बाद सुखिया के पिता ने सुखिया को घर में नहीं पाया। उसकी मृत्यु जानकर वह श्मशान भागा हुआ गया जहाँ उसके निकट संबंधी सुखिया को जला चुके थे। चिता की आग बुझ चुकी थी। अब वहाँ राख की ढेरी मात्र थी। उसने अपनी फूल-सी बच्ची को राख की ढेरी के रूप में पाया।

(ङ) इस कविता का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए। [CBSE]
उत्तर:
इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि छुआछूत मानवता पर कलंक है। किसी को जन्म के आधार पर अछूत मानना और उसे मंदिर में प्रवेश न करने देना अपराध है। सुखिया के पिता को तथाकथित भक्तों ने केवल इसलिए पीटा क्योंकि वह अछूत था। इस कारण उसे मंदिर में नहीं आने दिया गया। न्यायालय ने भी उस पर अन्याय किया। उसे सात दिनों की सज़ा केवल इसलिए सुनाई गई क्योंकि उसने मंदिर में घुसकर मंदिर की पवित्रता नष्ट की थी। कवि कहना चाहता है कि अछूतों पर किए जाने वाले ये अत्याचार घिनौने हैं। इन्हें रोका जाना चाहिए।

(च) इस कविता में से कुछ भाषिक प्रतीकों/बिंबों को छाँटकर लिखिए-
उदाहरण : अंधकार की छाया
उत्तर:

  1. कितना बड़ा तिमिर आया!
  2. कब आई संध्या गहरी
  3. हाय वही चुपचाप पड़ी थी
  4. मंदिर था विस्तीर्ण विशाल
  5. हुई राख की थी ढेरी!

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए-
(क)अविश्रांत बरसा करके भी
 आँखें तनिक नहीं रीतीं
उत्तर:
आशय-सुखिया के पिता की आँखें निरंतर बहती रहीं। फिर भी उनमें से आँसू नहीं थमे। उसके हृदय की वेदना कम नहीं हुई।
अर्थ-सौंदर्य-इसमें सुखिया के पिता की असीम वेदना पूरे वेग से प्रकट हुई है। उसकी वेदना अनंत है। विशेषोक्ति अलंकार का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया गया है। बहुत कुछ बरसने के बाद भी वे आँसुओं से भरी रहीं।

(ख) बुझी पड़ी थी चिता वहाँ पर
छाती धधक उठी मेरी
उत्तर:
आशय- सुखिया के पिता ने देखा कि सुखिया की चिता बुझ चुकी थी। उसकी फूल जैसी कोमल बच्ची अब इस दुनिया में नहीं थी। उसे अपनी बच्ची की जगह राख की ढेरी मिली। इससे उसके हृदय का दुख और भी बढ़ गया।

अर्थ सौंदर्य- सुखिया के पिता ने देखा कि उसके निकट संबंधियों ने जो चिता जलाई थी, वह बुझ चुकी है, परंतु इससे सुखिया के हृदय की चिता धधकने लगी। एक चिता का बुझना, दूसरी को धधकना हृदय के बढ़े दुख की अभिव्यक्ति कर रहा है।

(ग) हाय! वही चुपचाप पड़ी थी
अटल शांति-सी धारण कर ।
उत्तर:
आशय-सुखिया के पिता ने अपनी बेटी को बीमारी की अवस्था में बिस्तर पर पड़े देखा। उसे याद आया कि सुखिया बहुत चंचल थी, शरारती थी। वह पल-भर के लिए भी टिककर नहीं बैठती थी। आज वही नटखट लड़की बीमारी की लाचारी के कारण बिस्तर पर ऐसे चुपचाप लेटी पड़ी थी मानो वह शांति की स्थिर मूर्ति हो।
अर्थ-सौंदर्य-इसमें बीमारी की मनोदशा में उत्पन्न होने वाली मौन उदासी का हृदयद्रावक चित्रण हुआ है।
‘अटल शांति-सी’ उपमा बहुत सुंदर बन पड़ी है। ‘हाय’ शब्द से हृदय की वेदना व्यक्त हो चली है।

(घ) पापी ने मंदिर में घुसकर ।
किया अनर्थ बड़ा भारी
उत्तर:
आशय- सुखिया का पिता अपनी बेटी की इच्छा पूरी करने के लिए मंदिर से देवी का प्रसाद लेने गया। उस अछूत के मंदिर में प्रवेश करने को मंदिर की पवित्रता भंग करने और देवी को अपमानित करने वाला माना गया। उसका मंदिर में प्रवेश करना भारी अनर्थ होने जैसा था।
अर्थ-सौंदर्य- एक अछूत द्वारा मंदिर में प्रवेश करना समाज के तथाकथित उच्च वर्ग को ऐसा लग रहा था, जैसे बड़ा भारी अनर्थ हो गया। अर्थात् अब देवी रुष्ट हो जाएगी और भारी तबाही मच जाएगी। इस भाव के लिए बड़ा भारी अनर्थ शब्द का प्रयोग हुआ है।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
‘एक फूल की चाह’ एक कथात्मक कविता है। इसकी कहानी को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
‘एक फूल की चाह’ का संक्षिप्त कहानी रूप सुखिया नाम की एक अछूत कन्या थी, जो सदैव हँसती-खेलती रहती थी। एक बार उस क्षेत्र में भयंकर महामारी फैली, जिसकी चपेट में सुखिया भी आ गई। उसे बुखार ने जकड़ लिया। धीरे-धीरे उसका चलना-फिरना, उठना-बैठना बंद हो गया। उसका शरीर कमज़ोर हो गया। यहाँ तक कि आवाज़ भी कमज़ोर पड़ने लगी। उसने अर्ध बेहोशी की हालत में अपने पिता से मंदिर से देवी के प्रसाद का एक फूल लाने के लिए कहा। उसके पिता ने उसकी इच्छा पूरी करने की कोशिश की और स्वच्छ कपड़े पहनकर मंदिर में चला गया। वहाँ पूजा के समय दीप-धूप चढ़ाकर प्रसाद के फूल लेकर आ रहा था कि मंदिर में कुछ सवर्ण भक्तों ने पहचान लिया और चिल्लाकर कहा कि यह अछुत मंदिर में कैसे आ गया।

उन्होंने उस अछूत पिता को मारा-पीटा और न्यायालय ले गए जहाँ उसे सात दिनों का कारावास मिला। कारावास का दंड भोगकर जब वह घर गया तो सुखिया उसे नहीं मिली। उसके मरने की बात जानकर वह भागा-भागा श्मशान गया जहाँ उसे अपनी बच्ची की जगह राख की ढेरी मिली। उसने अपना दुख प्रकट करते हुए कहा, “हाय ! मेरी फूल-सी बच्ची राख की ढेरी बन चुकी है। मैं माता के प्रसाद का एक फूल देकर उसकी अंतिम इच्छा भी न पूरी कर सका।”

प्रश्न 2.
‘बेटी’ पर आधारित निराला की रचना ‘सरोज-स्मृति’ पढ़िए।
उत्तर:
पुस्तकालय से पुस्तक निकलवाकर पढ़िए।

प्रश्न 3.
तत्कालीन समाज में व्याप्त स्पृश्य और अस्पृश्य भावना में आज आए परिवर्तनों पर एक चर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर:
समाज की तत्कालीन परिस्थितियों और वर्तमान परिस्थितियों पर छात्र स्वयं चर्चा करें।

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NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo

NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo are part of NCERT Solutions for Class 9 English. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo.

BoardCBSE
TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectEnglish Beehive (poem)
ChapterChapter 7
Chapter NameThe Duck and the Kangaroo
CategoryNCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo

COMPREHENSION QUESTIONS

Read the extracts given below and answer the questions that follow each :

1. Said the Duck to the Kangaroo,
“Good gracious ! how you hop !
Over the fields and the water too,
As if you never would stop !
My life is a bore in this nasty pond,
And I long to go out in the world beyond !
I wish I could hop like you !”
Said the Duck to the Kangaroo. (Page 94)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo 1

Questions

(a) How does the Duck speak to the Kangaroo ?
(b) How does the Duck look at the Kangaroo’s jumping ?
(c) What is the Duck’s desire ?
(d) Give the meaning of‘hop’.

Answers

(а) The Duck speaks to the Kangaroo most respectfully.
(b) The Duck looks at the Kangaroo’s jumping over the fields and water as never-ending.
(c) The Duck wishes she could hop like him.
(d) It is ‘jump’.

2. “Please give me a ride on your back !”
Said the Duck to the Kangaroo.
“I would sit quite still, and say nothing but ‘Quack’,
The whole of the long day through !
And we’d go to the Dee, and the Jelly Bo Lee,
Over the land, and over the sea ;
Please take me a ride ! O do !”
Said the Duck to the Kangaroo. (Page 95) (Imp.)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo 2

Questions

(a) What did the Duck request the Kangaroo for ?
(b) What shall the Duck do the whole day ?
(c) How did the Duck request the Kangaroo ? How do you know ?
(d) Give the rhyme scheme used in this stanza.

Answers

(a) The Duck requested the Kangaroo for a ride.
(b) The Duck would quack the whole day.
(c) She requested the Kangaroo very much. It is seen in her repeating the request for a ride.
(d) It is ab ab cc dd.

3. Said the Kangaroo to the Duck,
“This requires some little reflection ;
Perhaps on the whole it might bring me luck,
And there seems but one objection,
Which is, if you’ll let me speak so bold,
Your feet are unpleasantly wet and cold,
And would probably give me the roo-
Matiz !” said the Kangaroo. (Page 95) (Imp.)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo 3

Questions

(a) What is ‘This’ in the second line here ?
(b) What is the objection ?
(c) How would the Kangaroo like to speak ?
(d) What will the Kangaroo have in the end ?

Answers

(a) This’ here means ‘giving the Duck a ride’.
(b) It is that the Duck’s feet are ‘wet and cold’.
(c) The Kangaroo would like to speak boldly.
(d) He will have cold.

4. Said the Duck. “As I sat on the rocks,
I have thought over that completely,
And I bought four pairs of worsted socks Which fit my web-feet neatly.
And to keep out the cold I’ve bought a cloak,
And every day a cigar I’ll smoke,
All to follow my own dear true
Love of a Kangaroo !” (Page 96) (V. Imp.)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo 4

Questions

(a) When did the Duck think over ‘that’ ? What is ‘that’ ?
(b) Why did the Duck buy socks ?
(c) What for did she buy a cloak and other things ?
(d) Give the meaning of‘neatly’.

Answers

(a) When the Duck sat on the rocks, she thought over ‘that’. That’ here is her request for a ride.
(b) She bought these to protect her feet from cold.
(c) She bought all these for the love of Kangaroo.
(d) It means ‘completely’.

5. Said the Kangaroo. “I’m ready !
All in the moonlight pale ;
But to balance me well, dear Duck, sit steady !
And quite at the end of my tail!”
So away they went with a hop and a bound,
And they hopped the whole world three times round ;
And who so happy—O who,
As the Duck and the Kangaroo ? (Page 96) (M. Imp.) (CBSE 2016)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 7 The Duck and the Kangaroo 5

Questions

(a) How djd the kangaroo react ?
(b) Where did the kangaroo ask the duck to sit ?
(c) What is the rhyme scheme of the stanza ?
(d) Give the meaning of ‘steady’.

Answers

(a) The kangaroo reacted saying that he was ready. But the duck should sit steady to balance him well.
(b) The kangaroo asked the duck to sit quietly at the end of his tail to balance him well.
(c) The rhyme scheme of the stanza is : ab ab cc dd.
(d) It means ‘still’ or ‘not moving’.

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NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree

NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree are part of NCERT Solutions for Class 9 English. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree.

BoardCBSE
TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectEnglish Beehive (poem)
ChapterChapter 8
Chapter NameOn Killing a Tree
CategoryNCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree

I. COMPREHENSION QUESTIONS

Read the extracts given below and answer the questions that follow each :

1. It takes much time to kill a tree,
Not a simple jab of the knife
Will do it. It has grown Slowly consuming the earth,
Rising out of it, feeding
Upon its crust, absorbing
Years of sunlight, air, water,
And out of its leprous hide
Sprouting leaves. (Page 110)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree 1

Questions

(a) What will a simple jab of the knife not do to a tree ?
(b) Where has the tree grown ?
(c) What did the tree need to grow ?
(d) How does its bark look ?

Answers

(а) It will not kill a tree.
(b) It has grown on the earth’s surface.
(c) It needed sunlight, air, water and the earth’s crust.
(d) It looks like the leprous hide.

2. So hack and chop
But this alone won’t do it.
Not so much pain will do it.
The bleeding bark will heal
And from close to the ground
Will rise curled green twigs,
Miniature boughs
Which if unchecked will expand again
To former size. (Page 110) (Imp.)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree 2

Questions

(a) What alone will not do to the tree ?
(b) What will happen after the bark bleeds ?
(c) When will small boughs grow to their former size ?
(d) Give the meaning of ‘miniature’.

Answers

(a) Hacking and chopping will not kill the tree.
(b) It will soon heal.
(c) When they will not be checked.
(d) It is ‘small’.

3. No,
The root is to be pulled out —
Out of the anchoring earth ;
It is to be roped, tied,
And pulled out—snapped out Or pulled out entirely,
Out from the earth-cave, (Pages 110-111) (V. Imp.)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree 3

Questions

(a) What shall one have to do to kill the tree ?
(b) How does the earth give protection to the tree ?
(c) How is the earth seen in relation to it ?
(d) Name the poetic device used in the last line here.

Answers

(a) One shall have to pull out or snap out the tree from the roots.
(b) It anchors the tree and keeps it firmly standing.
(c) It is like a cave to preserve it.
(d) It is ‘metaphor’.

4. And the strength of the tree exposed
The source, white and wet,
The most sensitive, hidden
For years inside the earth. (Page 111)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree 4

Questions

(a) What happens when the tree is pulled out ?
(b) How does the source of the tree look ?
(c) Where has the source of the tree laid ?
(d) Give the meaning of ‘sensitive’.

Answers

(a) Its strength is seen.
(b) It looks white and wet.
(c) It has laid inside the earth.
(d) It is ‘that is easily affected’.

5. Then the matter
Of scorching and choking In sun and air,
Browning, hardening,
Twisting, withering,
And then it is done. (Page 111) (M. Imp.)
NCERT Solutions for Class 9 English Beehive Poem Chapter 8 On Killing a Tree 5

Questions

(a) What happens to the tree after it is pulled out ?
(b) Which colour does the tree acquire then and how does it look ?
(c) What happens to the tree after all these stages ?
(d) What is ‘it’ in the last line ?

Answers

(a) It is scorched and choked.
(b) It acquires brown colour. It looks hardened.
(c) It is then killed.
(d) ‘It’ here means the action of killing the tree.

II. TEXTUAL QUESTIONS
(Page 111)

Thinking About the Poem

I.

  1. Can a “simple jab of the knife” kill a tree ? Why not ?
  2. How has the tree grown to its full size ? List the words suggestive of its life and activity.
  3. What is the meaning of “bleeding bark” ? What makes it bleed ?
  4. The poet says “No” in the beginning of the third stanza. What does he mean by this ?
  5. What is the meaning of “anchoring earth” and “earth cave” ?
  6. What does he mean by “the strength of the tree exposed” ? (CBSE 2016)
  7. What finally kills the tree ?

Answers

  1. No, it can’t. It is because the bark of the tree will heal on its own after some time.
  2. It has consumed the earth and fed on its crust. It has absorbed light, air and water for years. The words are : consuming, feeding, absorbing sunlight, air and water.
  3. It means the bark giving out juice etc., after it is cut. A knife’s or axe’s cut makes it bleed.
  4. By ‘No’ he means to say that to kill a tree one should not hack, chop or jab it with a
  5. It means the earth that gives protection to the tree. The earth, that is, the soil keeps the tree in its grip and gives life to it. ‘Earth cave’ means a hole inside it. This looks like a small cave. The tree has its roots in it.
  6. The strength of the tree are its roots. When the tree is pulled out, these are exposed.
  7. Pulling out the tree in one jerk with ropes etc., finally kills the tree.

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 15

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 15 नए इलाके में … खुशबू रचते हैं हाथ

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 15 नए इलाके में … खुशबू रचते हैं हाथ.

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

(1) नए इलाके में

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) नए बसते इलाके में कवि रास्ता क्यों भूल जाता है? [CBSE]
(ख) कविता में कौन-कौन से पुराने निशानों का उल्लेख किया गया है?
अथवा
कवि अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए कौन-कौन-सी निशानियाँ ढूँढता है? [CBSE]
(ग) कवि एक घर पीछे या दो घर आगे क्यों चल देता है? [CBSE]
(घ) “वसंत का गया पतझड़’ और ‘बैसाख का गया भादों को लौटा’ से क्या अभिप्राय है?
(ङ) कवि ने इस कविता में समय की कमी की ओर क्यों इशारा किया है? [CBSE]
(च) इस कविता में कवि ने शहरों की किस विडंबना की ओर संकेत किया है?
अथवा
यह कविता किस ओर इशारा करती है, स्पष्ट कीजिए। (CBSE]
उत्तर:
(क) नए इलाके में कवि इसलिए रास्ता भूल जाता है, क्योंकि-

  • यहाँ रोज़ नए मकान बनते रहते हैं।
  • पुराने मकान ढहाकर नए मकान बनाए जाते हैं।
  • नए मकान बनाने के लिए पुराने पेड़ काटने से निशानी नष्ट हो जाती है।
  • खाली जमीन पर कोई नया मकान बन जाता है।

(ख) कविता में निम्नलिखित पुराने निशानों का उल्लेख हुआ है-

  • पीपल का पेड़
  • ढहा घर या खंडहर
  • जमीन का खाली टुकड़ा
  • बिना रंग वाले लोहे के फाटक वाला इकमंजिला मकान

(ग) कवि एक घर आगे या दो घर पीछे इसलिए चल देता है, क्योंकि नए बस रहे उस इलाके में एक ही दिन में काफ़ी बदलाव आ जाता है। वह अपने घर को पहचान नहीं पाता है कि वह सवेरे किस घर से गया था।

(घ)  ‘वसंत का गया पतझड़’ और ‘बैसाख का गया भादों को लौटा’ से यह अभिप्राय है कि वहाँ एक ही दिन में इतना कुछ नया बन गया है, जितना बनने में पहले नौ-दस महीने या साल भर लगते थे। सुबह का निकला कवि जब शाम को वापस आता है तो एक ही दिन में नौ-दस महीने के बराबर का बदलाव दिखाई देता है।

(ङ) कवि ने कविता में समय की कमी की ओर इसलिए संकेत किया है क्योंकि तेज़ी से आ रहे बदलाव के कारण मनुष्य की व्यस्तता भी बढ़ती जा रही है। इससे उसके पास समय की कमी होती जा रही है।

(च) इस कविता में कवि ने शहरों की उस विडंबना की ओर संकेत किया है, जिसमें शहरों में हो रहे बदलाव, खाली जमीनों में टूटे मकानों की जगह इतने नित नए मकान बनते जा रहे हैं कि सुबह घर से निकले आदमी को शाम के समय अपना मकान खोजना पड़ता है, फिर भी उसे अपना मकान नहीं मिल पाता है।

प्रश्न 2.
व्याख्या कीजिए-
(क) यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं
       एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया
उत्तर:
नगरों में बसने वाली नई बस्तियाँ इस तरह तेजी से बढ़ती चली जा रही हैं कि आदमी को अपना घर तक ढूँढना कठिन हो गया है। वह कुछ ही दिन बाद अपनी बस्ती में लौटकर आए तो रास्ते तक भूल जाता है। उसकी पुरानी निशानियाँ देखते ही देखते नष्ट हो जाती हैं। इसलिए उसकी पुरानी स्मृतियाँ और निशानियाँ किसी काम नहीं आतीं। दुनिया इतनी तेजी से बदल-बन रही है कि जो निर्माण एक दिन पहले किया जाता है, दूसरे दिन तक पुराना पड़ चुका होता है। उसके बाद नए-नए निर्माण और खड़े हो जाते हैं।

(ख)  समय बहुत कम है तुम्हारे पास।
        आ चला पानी ढहा आ रहा अकास
        शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देखकर
उत्तर:
देखिए व्याख्या क्र. 2..

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
पाठ में हिंदी महीनों के कुछ नाम आए हैं। आप सभी हिंदी महीनों के नाम क्रम से लिखिए।
उत्तर:
हिंदी महीनों के नाम-

  1. चैत्र,
  2. बैसाख,
  3. ज्येष्ठ,
  4. आषाढ़,
  5. श्रावण,
  6. भाद्रपक्ष,
  7. आश्विन,
  8. कार्तिक,
  9. मार्गशीर्ष,
  10. पौष,
  11. माघ,
  12. फाल्गुन

(2) खुशबू रचते हैं हाथ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) “खुशबू रचनेवाले हाथ’ कैसी परिस्थितियों में तथा कहाँ-कहाँ रहते हैं?
(ख) कविता में कितने तरह के हाथों की चर्चा हुई है?
(ग) कवि ने यह क्यों कहा है कि ‘खुशबू रचते हैं हाथ’?
(घ) जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल कैसा होता है?
(ङ) इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
(क) खुशबू रचनेवाले हाथ अत्यंत कठोर परिस्थितियों में गंदी बस्तियों में, गलियों में, कूड़े के ढेर के इर्द-गिर्द तथा नाले के किनारे रहते हैं। वे अस्वच्छ एवं प्रदूषित वातावरण में जीवन बिताते हैं। वे इस दुर्गंधमय वातावरण में रहने को विवश हैं। वे सामाजिक और आर्थिक विषमता के शिकार हैं। दूसरों को खुशबू देने का काम करने । वाले इस प्रकार बदहाली का जीवन बिताते हैं।

(ख) कविता में निम्नलिखित तरह के हाथों की चर्चा हुई है-

  1. उभरी नसोंवाले अर्थात् वृद्ध हाथ।
  2. घिसे नाखूनोंवाले हाथ श्रमिक वर्ग को प्रतीक है।
  3. पीपल के पत्ते जैसे नए-नए हाथ अर्थात् छोटे बच्चों के कोमल हाथ।
  4. जूही की डाल जैसे खुशबूदार हाथ अर्थात् नवयुवतियों के सुंदर हाथ।
  5. गंदे कटे-पिटे हाथ।
  6. जखम से फटे हुए हाथ।

(ग) कवि ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि इन गरीब मजदूरों के हाथ सुगंधित अगरबत्तियों का निर्माण करते हैं। तथा हमारे जीवन को सुख-सुविधाएँ उपलब्ध कराकर खुशबू से महकाते हैं जिससे ऐसा लगता है कि अत्यंत प्रदूषित वातावरण में रहकर भी इनके हाथ हमारे लिए सुख-सुविधाओं से भरी वस्तुओं का निर्माण करते हैं। जिससे समस्त प्राणियों के जीवन में सुगंध फैल जाती है। ये लोग स्वयं बदहाली का जीवन बिताकर दूसरे लोगों के जीवन में खुशहाली लाते हैं। इन शब्दों द्वारा कवि ने श्रमिकों के श्रम का गुणगान किया है।

(घ) जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं वहाँ का वातावरण अत्यंत गंदगी भरा होता है। चारों ओर नालियाँ तथा कूड़े-करकट का ढेर जमा होता है। चारों ओर बदबू फैली होती है। ये सुगंधित अगरबत्तियाँ बनाने वाले ऐसे गंदे वातावरण में रहकर भी दूसरों के जीवन में खुशबू बिखेरते हैं पर ऐसे वातावरण में, ऐसी भयावह स्थितियों में रहनी इनकी विवशता है।

(ङ) इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य यह है कि हमारे समाज में सुंदरता की रचना करनेवाले गरीब
और उपेक्षित लोगों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करना है ताकि आम लोग इन गरीब मजदूरों के जीवन की वास्तविकता को जान लें और समाज में फैली विषमताओं तथा भेदभावों को मिटाने की कोशिश करें। मजदूरों और कारीगरों की दुर्दशा का चित्रण करना तथा लोगों में उनके उद्धार की चेतना जगाना भी है। कवि अगरबत्तियाँ बनानेवाले कारीगरों का प्रदूषित वातावरण में रहना दिखाकर यह कहना चाहता है कि इनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना चाहिए ताकि इन्हें भी जीवन जीने के लिए। स्वच्छ वातावरण मिल सके।

प्रश्न 2.
व्याख्या कीजिए-
(क)
(i)  पीपल के पत्ते-से नए-नए हाथ
      जूही की डाल-से खुशबूदार हाथ
उत्तर:
अगरबत्ती बनाने वाले हाथों में कुछ के हाथ पीपल के नए-नए पत्तों के समान कोमल हैं। आशय यह है कि कुछ नन्हे-नन्हे बच्चे भी अगरबत्ती बनाने के काम में लगे हुए हैं। कुछ हाथ ऐसे हैं जिनमें से जूही की डालों जैसी खुशबू आती है। आशय यह है कि कुछ सुंदर युवतियाँ भी अगरबत्तियाँ बनाने में लगी हुई हैं।

(ii) दुनिया की सारी गंदगी के बीच
      दुनिया की सारी खुशबू
      रचते रहते हैं हाथे
उत्तर:
यद्यपि अगरबत्ती बनाने वाले कारीगर दुनिया भर को सुगंधित अगरबत्ती प्रदान करते हैं और वातावरण में सुगंध फैलाते हैं किंतु उन्हें स्वयं दुनिया भर की गंदगी के बीच रहना पड़ता है। उनके चारों ओर गंदगी का ही साम्राज्य रहता है। वे शोषित हैं, पीड़ित हैं।

(ख) कवि ने इस कविता में ‘बहुवचन’ का प्रयोग अधिक किया है? इसका क्या कारण है?
उत्तर:
कविता में ‘हाथ’ के लिए बहुवचन का प्रयोग किया गया है। इसके माध्यम से कवि बताना चाहता है कि यहाँ एक कारीगर या एक मजदूर की बात नहीं की जा रही। यह समस्या सब मज़दूरों की है।

(ग) कवि ने हाथों के लिए कौन-कौन से विशेषणों का प्रयोग किया है?
उत्तर:
कवि ने हाथों के लिए निम्नलिखित विशेषणों का प्रयोग किया है-

उभरी नसोंवाले
घिसे नाखूनोंवाले
पीपल के पत्ते-से नए-नए
जूही की डाल-से खुशबूदार
गंदे कटे-पिटे
ज़ख्म से फटे हुए।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
अगरबत्ती बनाना, माचिस बनाना, मोमबत्ती बनाना, लिफ़ाफ़े बनाना, पापड़ बनाना, मसाले कूटना आदि लघु उद्योगों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर:
आस पड़ोस में रहने वाले किसी मज़दूर या कर्मचारी से बात करके जानिए और उनकी फैक्ट्री में जाकर देखिए। संभव हो तो घर में बनाने का प्रयास कीजिए।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 14

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर.

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
‘इस विजन में ………… अधिक है’-पंक्तियों में नगरीय संस्कृति के प्रति कवि का क्या आक्रोश है। और क्यों?
उत्तर:
‘इस विजन में …… अधिक है’ पंक्तियों में नगरीय संस्कृति के प्रति कवि का आक्रोश यह है कि नगरों में सब अपनी रोटी-रोजी और स्वार्थ पूर्ति में इतने रम गए हैं कि उन्हें व्यवसाय और पैसों के अलावा कुछ नज़र नहीं आता है। इस आक्रोश का कारण यह है कि लोग पैसों के चक्कर में प्रेम, सौंदर्य, सहज मानवीय व्यवहार भूलने के साथ प्रकृति से भी दूर होते चले गए हैं।

प्रश्न 2.
सरसों को ‘सयानी’ कहकर कवि क्या कहना चाहता होगा? [CBSE][Imp.]
उत्तर:
कवि देखता है कि खेत में चना, अलसी आदि छोटे हैं वही सरसों उनकी तुलना में बढ़कर लंबी और बड़ी हो गई है। उसमें पीले फूल भी नजर आ रहे हैं। यह देख कवि सरसों को सयानी कहना चाहता है। वह अन्य फसलों से बढ़कर हाथ पीले कर विवाह मंडप में जाने को तैयार है।

प्रश्न 3.
अलसी के मनोभावों का वर्णन कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
अलसी प्रेमातुर नायिका है। उसकी कमर लचीली और शरीर दुबला-पतला है। वह अपने सिर पर नीले फूल धारण करके कह रही है कि इन फूलों को जो छुएगा उसे वह अपने हृदय का दान दे देगी।

प्रश्न 4.
अलसी के लिए ‘हठीली’ विशेषण का प्रयोग क्यों किया गया है?
उत्तर:
अलसी के लिए हठीली विशेषण का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि-

  1. किसान ने उसे चने से अलग कतार में बोया होगा, पर वह हठपूर्वक चने के पास उग आई है।
  2. दुबले शरीर वाली अलसी बार-बार हवा के झोंके से झुक जाती है और उठकर खड़ी हो जाती है और फिर चने के बीच नजर आने लगती है।
  3. उसकी हठ है कि उसके सिर पर सजे नीले फूलों को छूने वाले को ही अपना दिल दे देगी।

प्रश्न 5.
‘चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा’ में कवि की किस सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है? [Imp.]
उत्तर:
पोखर के पानी में सूर्य का प्रतिबिंब बनना एक प्राकृतिक एवं स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे लोग सदियों से देखते आए हैं। कवि को यही प्रतिबिंब चाँदी के बड़े से गोल खंभे के रूप में दिखाई देता है। इससे कवि की सर्वथा अनूठी एवं सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है।

प्रश्न 6.
कविता के आधार पर हरे चने’ का सौंदर्य अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।
उत्तर:
हरे चने का पौधा आकार में छोटा है। वह अपने सिर पर गुलाबी रंग की पगड़ी बाँधे खड़ा है। उसे देखकर लगता है कि वह दूल्हे के रूप में सजकर खड़ा है।

प्रश्न 7.
कवि ने प्रकृति का मानवीकरण कहाँ-कहाँ किया है?
उत्तर:
‘ग्राम श्री’ कविता में एक नहीं अनेक स्थानों पर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है; जैसे-

  1. बाँधे मुरैठा शीश पर
    छोटे गुलाबी फूल को
    सज कर खड़ा है।
  2. नील फूले फूल को सिर पर चढ़ाकर
    कह रही है, जो छुए यह
    हूँ हृदय का दान उसको।
  3. हाथ पीले कर लिए हैं।
    व्याह मंडप में पधारी।
  4. फाग गाता मास फागुन
    आ गया है आज जैसे।
  5. प्रकृति का अनुराग-अंचलं हिल रहा है।
  6. हैं कई पत्थर किनारे
    पी रहे चुपचाप पानी
  7. देखते ही मीन चंचल
    ध्यान-निद्रा त्यागता है।

प्रश्न 8.
कविता में से उन पंक्तियों को ढूंढिए जिनमें निम्नलिखित भाव व्यंजित हो रहा है और चारों तरफ़ सूखी और उजाड़ जमीन है लेकिन वहाँ भी तोते का मधुर स्वर मन को स्पंदित कर रहा है।
उत्तर:
चित्रकूट की अनगढ़ चौड़ी
कम ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ
दूर दिशाओं तक फैली हैं।
बाँझ भूमि पर
इधर-उधर रीवा के पेड़
काँटेदार कुरूप खड़े हैं।
सुन पड़ता है।
मीठा-मीठा रस टपकाता
सुग्गे का स्वर
टें टें हें टें;

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 9.
‘और सरसों की न पूछो’-इस उक्ति में बात को कहने का एक खास अंदाज है। हम इस प्रकार की शैली का प्रयोग कब और क्यों करते हैं?
उत्तर:
‘और सरसों की न पूछो’-इस प्रकार की शैली का प्रयोग हम किसी की प्रशंसा, आश्चर्य, निंदा करने का भाव व्यक्त करने के लिए करते हैं। उदाहरणार्थ-दशहरी आम की मिठास बताने के लिए विक्रेता कह देता है- “इस आम की मिठास न पूछो।” इस प्रकार की शैली का प्रयोग हम भावातिरेक की दशा में करते हैं।

प्रश्न 10.
काले माथे और सफ़ेद पंखों वाली चिड़िया आपकी दृष्टि में किस प्रकार के व्यक्तित्व का प्रतीक हो सकती है?
उत्तर:
काले माथे और सफेद पंखों वाली चिड़िया किसी सफेदपोश व्यक्तित्व का प्रतीक हो सकती है। इसी चिड़िया की तरह ही वह भी अपने शिकार पर नज़र रखता है। वह परोपकार, समाजसेवा आदि का दावा करता फिरता है परंतु अवसर मिलते ही अपना काम कर जाता है।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 11.
बीते के बराबर, ठिगना, मुरैठा आदि सामान्य बोलचाल के शब्द हैं, लेकिन कविता में इन्हीं से सौंदर्य उभरा है और कविता सहज बन पड़ी है। कविता में आए ऐसे ही अन्य शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर:
कविता में आए सामान्य बोलचाल के कुछ शब्द हैं चंद गहना, मेड़, नीले फूले, सयानी, फाग, फागुन, पोखर, चकमकाता, टाँग, माथ, उजली, चट, झपाटे, चटुल, औ, अनगढ़, बाँझ, सुग्गा, टें टें दें टें, जुगुल, चुप्पे-चुप्पे।

प्रश्न 12.
कविता को पढ़ते समय कुछ मुहावरे मानस-पटल पर उभर आते हैं, उन्हें लिखिए और अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।
उत्तर:
कविता में आए कुछ मुहावरे निम्नलिखित हैं-

  1. बीता भर                  जरा-सा, छोटा-सा   –  बीता-भर का दिखने वाला यह साँप बहुत ही जहरीला है।
  2. सिर चढ़ाना              बढ़ावा देना            –  प्यार में संतान को इतना मत सिर पर चढ़ाओ कि वह एक दिन
    परिवार के लिए मुसीबत बन जाए।
  3. हृदय का दान देना    समर्पित होना         –  सुमन तो कब से हृदय का दान दे चुकी थी।
  4. हाथ पीले करना       विवाह करना         –  दहेज-प्रथा ने गरीब माँ-बाप की चिंता बढ़ा दी है कि वह
    अपनी बेटियों का हाथ कैसे पीला करें।
  5. गले में डालना          जल्दी से खाना       –  ठेकेदार को आता देख मज़दूर ने जल्दी से रोटियाँ गले में
    डालीं और काम पर लग गया।
  6. हृदय चीरना            दुख पहुँचाना          –  कठोर बातें हृदय चीर देती हैं।
  7. प्यास बुझाना          तृप्त होना               –  कुएँ के शीतल जल ने हम दोनों की प्यास बुझा दी।
  8. झपाटे मारना          अचानक टूट पड़ना –  बाज ने झपाटे मारकर चिड़िया के बच्चे को दबोचा और
    उड़ गया।

पाठेतर सक्रियता 

• प्रस्तुत अपठित कविता के आधार पर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

देहात का दृश्य

अरहर कल्लों से भरी, हुई फलियों से झुकती जाती है,
उस शोभासागर में कमला ही कमला बस लहराती है।
सरसों दानों की लड़ियों से दोहरी-सी होती जाती है,
भूषण का भार सँभाल नहीं सकती है कटि बलखाती है।
है चोटी उस की हिरनखुरी* के फूलों से गूंथ कर सुंदर,
अन-आमंत्रित आ पोलंगा है इंगित करता हिल-हिल कर।
हैं मसें भींगती गेहूँ की तरुणाई फूटी आती है,
यौवन में माती मटरबेलि अलियों से आँख लड़ाती है।
लोने-लोने वे घने चने क्या बने-बने इठलाते हैं,
हौले-हौले होली गा-गा धुंघरू पर ताल बजाते हैं।
हैं जलाशयों के ढालू भीटों ** पर शोभित तृण शालाएँ,
जिन में तप करती कनक वरण हो जाग बेलि-अहिबालाएँ।
हैं कंद धरा में दाब कोष ऊपर तक्षक बन झूम रहे,
अलसी के नील गगन में मधुकर दृग-तारों से घूम रहे।
मेथी में थी जो विचर रही तितली सो सोए में सोई,
उस की सुगंध-मादकता में सुध-बुध खो देते सब कोई।

  1. इस कविता के मुख्य भाव को अपने शब्दों में लिखिए।
  2. इन पंक्तियों में कवि ने किस-किसका मानवीकरण किया है?
  3. इस कविता को पढ़कर आपको किस मौसम का स्मरण हो आता है?
  4. मधुकर और तितली अपनी सुध-बुध कहाँ और क्यों खो बैठे?

* हिरनखुरी – बरसाती लता
** भीटा – ढूह, टीले के शक्ले की ज़मीन

उत्तर:

(1) अरहर की फलियाँ पौधों पर लद आई हैं। सरसों के पौधे अपने दानों के भार से झुके हुए हैं। हिरनखुरी के फूल खिल आए हैं। गेहूँ के पौधे विकसित हो चले हैं। मटरबेलि पर भंवरे मँडराने लगे हैं। चने के घने झाड़ सुंदर प्रतीत हो रहे हैं। तालाबों के ढलवाँ किनारों पर घास के गुंफ उग आए हैं। उनमें कुछ बेलें भी लहराने लगी हैं। मूली, गाजर, आलू, शकरकंदी जैसे कंदमूल उग रहे हैं। अलसी के पौधों पर नीले फूल खिल चुके हैं। उन पर भंवरे गुंजार कर रहे हैं। मेथी की फसलों में तितलियाँ सोई हुई हैं। उसकी सुगंध की मादकता से सभी प्रसन्न हैं।

(2) इनमें निम्नलिखित का मानवीकरण किया गया है

  • अरहर – अरहर कल्लों से भरी हुई फलियों से झुकती जाती है।
  • सरसों –  सरसों दानों की लड़ियों से दोहरी-सी होती जाती है। | भूषण का भार सँभाल नहीं सकती है कटि बल खाती है।
  • गेहूँ – हैं मसें भीगतीं गेहूँ की तरुणाई फूटी आती है। मटरबेलि-यौवन में माती मटरबेलि अलियों से आँख लड़ाती है।
  • चने – लोने-लोने वे घने चने क्या बने-बने इठलाते हैं।
  • बेलि – जिनमें तप करती कनक वरण हो जाग बेलि-अहिबालाएँ।

(3) इस कविता को पढ़कर शीतकालीन मौसम का स्मरण हो आता है। इन्हीं दिनों में ये फसलें उगती हैं।

(4) मधुकर अलसी के नीले फूलों पर मुग्ध होकर अपनी सुध-बुध खो बैठे।
तितली मेथी की सुगंध से मोहित होकर अपनी सुध-बुध खो बैठी।

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