NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 1

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 1 गिल्लू

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पाठ्य-पुस्तक के बोध-प्रश्न

प्रश्न 1.
सोनजुही में लगी पीली कली को देख लेखिका के मन में कौन से विचार उमड़ने लगे? [CBSE)
उत्तर:
सोनजुही में लगी पीली कली देखकर लेखिका के मन में गिल्लू से जुड़े अनेक विचार उमड़ने लगे। उसे स्मरण हो आया कि इसी सोनजुही की सघन हरियाली में गिल्लू छिपकर बैठता था। जब लेखिका सोनजुही के निकट आती थी तो उसके कंधे पर कूदकर उसे चौंका देता था। लेखिका को गिल्लू जिस हालत में मिला था तथा दो वर्ष तक उसके साथ की गई क्रियाएँ एक-एककर उसे याद आने लगीं थी।

प्रश्न 2.
पाठ के आधार पर कौए को एक साथ समादरित और अनादरित प्राणी क्यों कहा गया है? [CBSE 2012]
अथवा
कौओं कब समादरित और कब अनादरित लगने लगता है? [CBSE]
उत्तर:
कौओ एक विचित्र प्राणी है। कभी इसका आदर किया जाता है तो कभी अनादर। श्राद्ध के दौरान लोग कौए को आदर से बुलाते हैं। पाठ के आधार पर कौए को समादरित इसलिए कहा गया है क्योंकि माना जाता है कि जो लोग मर जाते हैं, वे कौए के रूप में अपने प्रियजनों से मिलने आते हैं। कौए को खाना खिलानेवाला यह मानता है कि उसने अपने प्रियजनों को खाना खिला दिया। कौए के माध्यम से ही दूर बसे प्रियजनों के आने का संदेश मिलता है। इसका अनादर इसलिए किया जाता है, क्योंकि कौआ काँव-काँव करके हमारा सिर खा जाता है इसकी कर्कश वाणी किसी को नहीं भाती। अतः यह अनादरित होता है।

प्रश्न 3.
गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार किस प्रकार किया गया? [CBSE]
अथवा
लेखिका ने घायल गिल्लू की देखभाल किस प्रकार की? [CBSE]
उत्तर:
गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार करने के लिए उसे गमले और दीवार के बीच से सावधानीपूर्वक निकाला गया। उसके घावों के रक्त को रुई से साफ़ कर उन पर पेंसिलीन का मरहम लगाया गया। कुछ घंटों के प्रयास के बाद उसके मुँह में एक बूंद पानी टपकाया गया। इस तरह लगातार की गई देखभाल से वह तीसरे दिन तक स्वस्थ हो गया।

प्रश्न 4.
लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू क्या करता था? [CBSE 2012]
उत्तर:
जब लेखिका लिखने बैठती तो गिल्लू लेखिका का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करता। इसके लिए वह लेखिका के पैर तक आकर तेज़ी से पर्दे पर चढ़ जाता और फिर उसी तेजी से उतरता। गिल्लू यह क्रिया तब तक करता रहता जब तक लेखिका उसे पकड़ने के लिए न दौड़ती। इस प्रकार गिल्लू लेखिका का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल हो जाता। लेखिका के गिल्लू की समझदारी और इस प्रकार के कार्य-कलापों पर हैरानी होती थी।

प्रश्न 5.
गिल्लू को मुक्त करने की आवश्यकता क्यों समझी गई और उसके लिए लेखिका ने क्या उपाय किया?
अथवा
गिल्लू को क्यों और कैसे मुक्त किया गया? [CBSE 2012]
उत्तर:
गिल्लू के जीवन में प्रथम वसंत आने पर वह जाली के पास बैठकर बाहर की गिलहरियों को अपनेपन से झाँका करता था। उसे ऐसा करता देख लेखिका को लगा कि अब उसे मुक्त करना आवश्यक है। उसके लिए उसने खिड़की की कीलें निकालकर जाली का कोना खोल दिया। इसी रास्ते से गिल्लू बाहर जाता, गिलहरियों के साथ खेलता-कूदता और ठीक चार बजे कमरे में वापस आ जाता।

प्रश्न 6.
गिल्लू किन अर्थों में परिचारिका की भूमिका निभा रहा था?
उत्तर:
एक बार लेखिका मोटर दुर्घटना में घायल हो गई और उसे कई दिन तक अस्पताल में रहना पड़ा। अस्पताल से घर आने पर गिल्लू ने उसकी सेवा की। वह लेखिका के पास बैठा रहता। वह तकिए पर सिरहाने बैठकर अपने नन्हे-नन्हे पंजों से लेखिका के सिर और बालों को इस प्रकार सहलाता रहता जिस प्रकार कोई सेविका हल्के हाथों से मालिश करती है। जब तक गिल्लू सिरहाने बैठा रहता लेखिका को ऐसा प्रतीत होता मानो कोई सेविका उसकी सेवा कर रही है। उसका वहाँ से हटना लेखिका को किसी परिचारिका के हटने के समान लगता। इस प्रकार लेखिका की अस्वस्थता में गिल्लू ने परिचारिका की भूमिका निभाई।

प्रश्न 7.
गिल्लू की किन चेष्टाओं से यह आभास मिलने लगा था कि अब उसका अंत समय समीप है? [CBSE]
उत्तर:
उस दिन गिल्लू ने दिन भर न कुछ खाया और न बाहर गया। वह रात में अपने झूले से उतरकर लेखिका के बिस्तर पर आया। उसने अपने ठंडे पंजों से लेखिका की उसी अँगुली को पकड़ लिया जिसे उसने बचपन में तब पकड़ा था, जब लेखिका ने उसे मरणासन्न स्थिति में उठाया था। यह सब चेष्टाएँ देखकर लेखिका ने जान लिया कि गिल्लू का अंत समय समीप है।

प्रश्न 8.
‘प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ ही वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया’-का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विधाता प्रदत्त जीवन के दो पहलू हैं-जीवन और मरण। जीवन खुशी का अनुभव कराता है तो मृत्यु दुख का। गिल्लू के जीवन का मार्मिक अंत हो गया। सुबह का उजाला पुनः फैलाने के लिए वह मृत्यु की गोद में समा गया था। मृत्यु का आभास वेदनापूर्ण था। उसने पारिवारिक माहौल को अवसाद से भर दिया। जिन्हें परिवार के सदस्य की भाँति पाला-पोसा गया हो और जब वही छोड़कर चले जाते हैं तो जीवन को अनुभूति दुखद हो जाती है। गिल्लू भी महादेवी के लिए पारिवारिक सदस्य की भाँति था। उसके साथ उनका साहचर्यजनित लगाव था परंतु अधूरेपन व अल्पावधि का अनुभव कराकर गिल्लू का प्रभात की प्रथम किरण के रूप में मौत की गोद में सो जाना लेखिका को हिलाकर रख गया। मृत्यु पर किसी का वश नही चलता। इसी कारण सभी हाथ पर हाथ रखकर बैठने के सिवा कुछ नहीं कर सकते।

प्रश्न 9.
सोनजुही की लता के नीचे बनी गिल्लू की समाधि से लेखिका के मन में किस विश्वास का जन्म होता है?
उत्तर:
सोनजुही की लता के नीचे बनी गिल्लू की समाधि से लेखिका के मन में इस विश्वास का जन्म होता है कि किसी वासंती के दिन गिल्लू जूही के पीले फूल के रूप में अवश्य खिल उठेगा।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 10

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 10 दोहे

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता? [CBSE]
(ख) हमें अपना दुःख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है?
(ग) रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है? [CBSE)
(घ) एक को साधने से सब कैसे सध जाता है? [CBSE]
अथवा
‘एकै साधे सब सधै’ से रहीम का क्या भाव है? [CBSE)
(ङ) जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता? (च) अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा? । [CBSE]
(छ) ‘नट’ किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है? [CBSE]
अथवा
(ज) “मोती, मानुष, चून’ के संदर्भ में पानी के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए। [CBSE]

उत्तर:
(क) प्रेम का धागा टूटने पर पहले जैसा इसलिए नहीं हो पाता है, क्योंकि टूटने पर जब प्रेम-संबंधों को जोड़ने की कोशिश की जाती है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। ऐसा करने पर भी मन की मलिनता पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाती है। इससे प्रेम संबंधों में पहले जैसी घनिष्ठता नहीं आ पाती है।

(ख) हमें अपना दुख दूसरों पर इसलिए प्रकट नहीं करना चाहिए क्योंकि जिस अपेक्षा के कारण हम दूसरों को अपना दुख सुनाते हैं, सुनने वाले की प्रतिक्रिया उसके विपरीत होती है। जो व्यक्ति हमारे दुखों के बारे में सुनता है वह मदद करने के बजाय हँसी उड़ाने लगता है।

(ग) रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य इसलिए कहा है क्योंकि कीचड़ के बीच स्थित थोड़ा-सा पानी दूसरों के काम आता है। विभिन्न पक्षी, कीड़े-मकोड़े और अन्य छोटे-छोटे जीव इसे पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं, जबकि सागर का जल जो असीमित मात्रा में होता है, खारा होने के कारण किसी के काम नहीं आता है।

(घ) एक को साधने अर्थात् एक काम में मन लगाकर पूरा प्रयास करने से काम उसी तरह सध जाता है जिस प्रकार पेड़ की पत्तियों, तना, शाखा आदि को पानी देने के बजाय केवल उसकी जड़ों को पानी देने पर वह भरपूर मात्रा में फल देता है। इसके विपरीत जड़ के अलावा हर जगह पानी देने पर भी वह सूख जाता है।

(ङ) जलहीन कमल की रक्षा सूर्य इसलिए नहीं कर पाता है क्योंकि जल ही कमल की अपनी संपत्ति होती है जिसके सहारे वह जीवित रहता है। इस जल रूपी संपत्ति के अभाव में सूर्य भी कमल की रक्षा करने में असमर्थ हो जाता। है और कमल सूख जाता है।

(च) अवध नरेश अर्थात् श्रीराम को चित्रकूट इसलिए जाना पड़ा था, क्योंकि अपने पिता के वचनों की रक्षा करने एवं उन्हें निभाने के लिए चौदह वर्ष के वनवास के लिए गए। वनवास जाते हुए उन्होंने अपने वनवास के कुछ दिन चित्रकूट में बिताए थे।

(छ) नट अपने शरीर को सिकोड़कर छोटा बनाने और कुंडली मारने की कला में पारंगत होने के कारण ऊपर चढ़ जाता। है, जहाँ जन सामान्य के लिए पहुँचना कठिन होता है।

(ज) मोती के संदर्भ में ‘पानी’ का अर्थ है-उसकी चमक, जिसके कारण मोती बहुमूल्य मानी जाती है और आभूषण बनती है। मनुष्य के संदर्भ में ‘पानी’ का अर्थ है-इज्ज़त, प्रतिष्ठा और मान-सम्मान। इसके कारण ही व्यक्ति समाज में आदर का पात्र समझा जाता है। चून (आटा) के संदर्भ में पानी’ का अर्थ जल है जिसके मेल से वह रोटियों के रूप में वह प्राणियों का पोषण करता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित को भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।
(ख) सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँट न लैहैं कोय।
(ग) रहिमन मूलहिं सचिबो, फूलै फलै अघाय।।
(घ) दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।
(ङ) नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत।
(च) जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।
(छ) पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून। ‘

उत्तर:
(क) प्रेम संबंध एक बार टूटने से दुबारा नहीं बनते। यदि दुबारा बनते भी हैं तो उनमें पहले के समान घनिष्ठता नहीं रहती। मन में अविश्वास बना रहता है।

(ख) मनुष्य को अपना दुख सबके सामने प्रकट नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें अपने हृदय में छिपाकर रखना चाहिए। लोग उसे जानकर केवल मज़ाक उड़ाते हैं। कोई भी उन दु:खों को बाँटता नहीं है।

(ग) अनेक देवी-देवताओं की भक्ति करने की अपेक्षा अपने इष्टदेव के प्रति आस्था रखना अधिक अच्छा होता है। जिस प्रकार जड़ को सींचने से पेड़ के फूल-पत्तों तक का पोषण हो जाता है। उसी प्रकार इष्ट के प्रति ध्यान कर लें तो सांसारिक सुख स्वयं मिल जाते हैं।

(घ) दोहा छंद आकार में छोटा है, परंतु अर्थ बहुत गहरा लिए हुए होता है। उसका गूढ़ अर्थ ही उसकी गागर में सागर भरने की प्रवृत्ति को स्पष्ट कर देता है। ठीक वैसे ही जैसे नट कुंडली को समेटकर रस्सी पर चढ़ जाता है।

(ङ) हिरण संगीत पर मुग्ध होकर शिकारियों को अपना जीवन तक दे देता है अर्थात अपनी अस्तित्व समर्पित कर देता है तथा मनुष्य दूसरों पर प्रसन्न होकर उसे धन देता है और उसका हित भी करता है। किंतु जो दूसरों पर प्रसन्न होकर भी उसे कुछ नहीं देता, वह पशु तुल्य होता है।

(च) प्रत्येक मनुष्य का अपना महत्त्व होता है। समयानुसार उसकी उपयोगिता है। कवि ने तलवार और सुई के उदाहरण द्वारा यह तथ्य सिद्ध किया है। जहाँ छोटी वस्तु का उपयोग होता है वहाँ बड़ी वस्तु किसी काम की नहीं होती और जहाँ बड़ी वस्तु उपयोगी सिद्ध होती है वहाँ छोटी वस्तु बेकार साबित होती है। सुई जो काम करती है वह काम तलवार नहीं कर सकती और जिस काम के लिए तलवार है वह काम सुई नहीं कर सकती। हर चीज़ की अपनी उपयोगिता है।

(छ) मोती में यदि चमक न रहे, वह व्यर्थ है। मनुष्य यदि आत्म-सम्मान न बनाए रखे तो बेकार है। सूखा आटा पानी के बिना किसी का पेट भरने में सहायक नहीं होता। पानी के बिना मोती, मनुष्य और चून नहीं उबर सकते। मोती की चमक, मनुष्य को आत्म-सम्मान व आटे की गुँथना सभी पानी के द्वारा ही संभव है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित भाव को पाठ में किन पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है

  1. जिस पर विपदा पड़ती है वही इस देश में आता है।
  2. कोई लाख कोशिश करे पर बिगड़ी बात फिर बन नहीं सकती।
  3. पानी के बिना सब सूना है अतः पानी अवश्य रखना चाहिए।

उत्तर:

  1. जा पर विपदा पड़त है, सो आवत यह देश।
  2. बिगरी बात बनत नहिं, लाख करौ किन कोय।
  3. रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।

प्रश्न 4.
उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए-
उदाहरण :

          कोय            –       कोई,                       जे         –       जो

  1. ज्यों             –       ……………….               कछु       –       ………………
  2. नहिं             –       ………………               कोय       –       ………………
  3. धनि             –       ………………              आखर      –      ………………
  4. जिय            –        ……………..              थोरे          –      ……………..
  5. होय             –        ……………..              माखन      –      ……………..
  6. तरवारि         –       ……………..              सचिबो      –      ……………..
  7. मूलहिं          –        ……………..             पिअत       –       ……………..
  8. पिआसो       –         ……………..             बिगरी        –      ……………..
  9. आवे            –         …………….             सहाय         –      ……………..
  10. ऊबरै           –        ……………..             बिनु           –      ……………..
  11. बिथा            –        ……………..            अठिलैहैं     –       ………………
  12. परिजाये       –        ………………

उत्तर:

  1. ज्यों   –  ज्यों                       कछु   – कुछ
  2. नहिं    –  नहीं                     कोय  –  कोई
  3. धनि    –  धन्य                    आखर  –  अक्षर
  4. जिय  –  जीव                      थोरे  –  थोड़े
  5.  होय  –  होता                     माखन  –  मक्खन
  6. तरवारि  –  तलवार              सचिबो  –  सींचना
  7. मूलहिं  –  मूल को               पिअत  –  पीते ही
  8. पिआसो  –   प्यासा              बिगरी  –  बिगड़ी
  9. आवे  –  आए                     सहाय  –  सहायक
  10. ऊबरे  –  उबरे                   बिना   –  बिथा
  11.  बिथा  –  व्यथा                   अठिलैहैं  –  इठलाएँगे
  12. परिजाय  –  पड़ जाए।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
‘सुई की जगह तलवार काम नहीं आती’ तथा ‘बिन पानी सब सून’ इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर:
सुई की जगह तलवार काम नहीं आती पहला छात्र-सुई का काम सुई से ही हो सकता है। दूसरा छात्र-तलवार सुई का काम नहीं कर सकती। तीसरा छात्र-तलवार का महत्त्व अपनी जगह है। चौथा छात्र-सुई जोड़ती है, तलवार काटती है।

प्रश्न 2.
चित्रकूट’ किस राज्य में स्थित है, जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
उत्तर प्रदेश में

परियोजना कार्य

प्रश्न1.
नीति संबंधी अन्य कवियों के दोहे/कविता एकत्र कीजिए और उन दोहों/कविताओं को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका परं लगाइए।
उत्तर:
रहीम के दोहे चार्ट पर लिखकरे कक्षा में टाँगिए।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 7

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 7 मेरे बचपन के दिन

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
‘मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।’ इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि
(क) उस समय लड़कियों की दशा कै री थी?
(ख) लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं?
उत्तर:
(क) महादेवी वर्मा के बचपन के समय लड़कियों की दशा बहुत अच्छी न थी। लड़कियों के प्रति समाज की सोच अच्छी न थी। लड़कियों को बोझ समझा जाता था। उनके पैदा होने पर लोगों को दुख होता था। वे उन्हें मार देते थे। खुद लेखिका का परिवार इसका उदाहरण है जहाँ दो सौ वर्षों तक कोई लड़की पैदा नहीं हुई।

(ख) उस समय की तुलना में आज लड़कियों की दशा में बहुत बदलाव आ गया है। यद्यपि विज्ञान और तकनीक का कुछ लोग दुरुपयोग करके कन्या भ्रूणहत्या करवा देते हैं पर इसके विरुद्ध कानून बन जाने से स्थिति में सुधार आया है। विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे-लाडली योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, विभिन्न स्थानों पर महिलाओं के लिए आरक्षण, बालिकाओं को मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति आदि सुलभ होने के कारण अब लड़कियों को बोझ नहीं समझा जाता है। इस तरह परिस्थितियों में सुधार आया है।

प्रश्न 2.
लेखिका उर्द-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाईं?
उत्तर:
लेखिका उर्दू-फ़ारसी इसलिए नहीं सीख पाई क्योंकि

  1. उसके घर में उर्दू-फारसी का माहौल न था, जिससे बचपन में उसे इस भाषा को सीखने के लिए प्रोत्साहन नहीं मिला।
  2. लेखिका के मन में यह बात बैठ गई थी कि उर्दू-फारसी सीखना उसके वश की बात नहीं।
  3.  इस भाषा को सीखने में वह रुचि नहीं लेती थी।
  4. उर्दू सिखाने वाले मौलवी के आने पर वह चारपाई के नीचे छिप जाया करती थी।

प्रश्न 3.
लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर:
लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की अनेक विशेषताओं का उल्लेख किया है-

  • वह परिवार में हिंदी भाषा लाई
  • पूजा-पाठ में उनकी विशेष रुचि थी।
  • वे संस्कृत जानती थी और गीता पढ़ती थीं।
  • वे मीरा के पद तथा प्रभाती ‘जागिए कृपा निधान पंछी बन बोले’ गाती थी।
  • वे ब्रज भाषा में पद रचना भी करती थीं।

प्रश्न 4.
जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा क्यों कहा है? [Imp.]
उत्तर:
जवारा के नवाब और लेखिका का परिवार एक ही कंपाउंड में रहता था। मुसलमान और हिंदू परिवार होने के बाद भी दोनों परिवारों के संबंध बहुत अच्छे थे। दोनों के त्योहारों को एक-दूसरे के परिवार वाले मिल-जुलकर मनाते थे। एक का जन्मदिन दूसरे के परिवार में मनाया जाता था।

रक्षाबंधन के दिन लेखिका नवाब के बेटे को राखी बाँधती थी तो मुहर्रम के दिन लेखिका के परिवार के बच्चे हरे कपड़े पहनते थे। लेखिका के छोटे भाई को मनमोहन नाम नवाब की पत्नी द्वारा ही दिया गया था।

आज हिंदू और मुसलमान के नाम पर जगह-जगह दंगे होते हैं। इसके अलावा धर्म, संप्रदाय आदि के नाम पर वैमनस्यता उत्पन्न हो गई है। उस तरह के सांप्रदायिक सद्भाव सचमुच स्वप्न बनकर रह गए हैं।

प्रश्न 5.
जेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थी। जेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं/होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती?
उत्तर:
जेबुन्निसा की जगह यदि मैं होती तो और महादेवी वर्मा का कुछ काम करती तो महादेवी से अपेक्षा भी रखती कि

  • वे पढ़ाई में मेरी मदद कर दिया करें।
  • वे मुझे तुकबंदी करना सिखाएँ।
  • वे अपने साथ मुझे भी कवि सम्मेलनों में ले जाया करें ताकि कविता पाठ का आनंद मैं भी उठा सकें।

प्रश्न 6.
महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे/करेंगी?
उत्तर:
देशहित में या देश पर आई किसी आपदा निवारण के लिए मैं पुरस्कार में मिली कोई वस्तु या अपनी निजी वस्तु सहर्ष दे दूंगा। पुरस्कार से प्यार तो मुझे भी है पर देशहित की बात आने पर यह प्यार देश के लिए बढ़ जाएगा। मेरे लिए व्यक्तिगत हित, देशहित के सामने कोई महत्त्व नहीं रखता है।

प्रश्न 7.
लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
उत्तर:
महादेवी क्रास्थवेट गर्ल्स स्कूल के छात्रावास में रहती थीं वहाँ कई प्रांतों से लड़कियाँ पढ़ने आती थीं। उनकी मातृभाषा और बोली-भाषा अलग थी। उनमें कुछ अवधी बोलती थी तो कुछ ब्रज और कुछ बुंदेलखंडी। सब हिंदी में पढ़ाई करती थी। सब एक ही मेस में खाती थी। एक ही प्रार्थना में खड़ी होती। वहाँ सांप्रदायिकता या वाद-विवाद जैसी कोई बात नहीं थी।

प्रश्न 8.
महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।
उत्तर:
मैं जहाँ रहता हूँ वहीं पास में कुछ मुसलमानों के घर भी हैं। एक बार पाकिस्तान | भारत के साथ क्रिकेट के एक नजदीकी मुकाबले में हार गया। कुछ शरारती लड़कों ने मुसलमानों के घर के पास पटाखे फोड़ दिया। यह बात मुसलमानों को नागवार गुजरी। उन्होंने एक हिंदू लड़के को पीट दिया। बस क्या था, दंगे जैसी स्थिति बन गई।

पता चला कि दोनों ओर के दस आदमी घायल हो चुके हैं। मैं उस दिन अपनी कोचिंग की कक्षाएँ समाप्त कर दस बजे लौट रहा था कि सबसे किनारे वाले मकान के रऊफ चाचा ने मुझे अंदर खींच लिया और सारी बातों से अवगत कराया। उन्होंने मेरे घरवालों को फोन किया।
घरवाले पुलिस के साथ वहाँ आए और रऊफ चाचा को धन्यवाद देकर मुझे घर ले गए। यह घटना याद कर मैं आज भी रऊफ चाचा का कृतज्ञ हो उठता हूँ।

प्रश्न 9.
महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।
उत्तर:
सोमवार
15 अगस्त, 2016 आज विद्यालय में प्रातः 9 बजे स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम मनाया गया। इस राष्ट्रीय पर्व के शुभ अवसर पर आगंतुकों, अध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए विशेष व्यवस्था की गई तथा मंच सजाया गया। प्रातः 8बजे से ही देशभक्तिपूर्ण गीत बजाए जा रहे थे। मुख्य अतिथि के आते ही दीप प्रज्वलित करके सरस्वती वंदना की गई और सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गया।

इसी कार्यक्रम में मुझे राष्ट्र कवि दिनकर की कविता ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है। का पाठ करना था। मन में भय की लहर जब-तब दौड़ जाती थी। एक उत्सुकता भी थी कि कब मेरा नाम पुकारा जाए, अंततः उद्घोषक ने मेरा नाम पुकारा। मैं सहमा-सा मंच गया। मन में सरस्वती माँ का स्मरण किया और कविता पढ़ना शुरू कर दिया। कविता होते ही जब तालियाँ बजी तब मन खुशी से भर गया। मैं खुशी मन से आकर अपनी सीट पर बैठ गया और बाकी कार्यक्रम का आनंद उठाने लगा।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 10.
पाठ से निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए

  1. विद्वान,
  2. अनंत,
  3. निरपराधी,
  4. दंड,
  5. शांति।

उत्तर:

  1. विद्वान – विदुषी (विपरीतलिंग)
  2. अनंत – अंत
  3. निरपराधी – अपराधी
  4. दंड – पुरस्कार
  5. शांति – बेचैनी।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग/प्रत्यय अलग कीजिए और मूल शब्द बताइए
निराहारी               –     निर्      +     आहार       +     ई
सांप्रदायिकता
अप्रसन्नता
अपनापन
किनारीदार
स्वतंत्रता
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 7 1

प्रश्न 12.
निम्नलिखित उपसर्ग-प्रत्ययों की सहायता से दो-दो शब्द लिखिए
उपसर्ग – अन्, अ, सत् स्व, दुर्
प्रत्यय – दार, हार, व, अनीय
उत्तर:
उपसर्ग   –

  • अन् – अनधिकार, अनादर ,
  • अ – अन्याय, अकाल
  • सत् – सत्संगति, सत्पथ
  • स्व – स्वाध्याय, स्वराज्य
  • दुर – दुर्गति, दुराचार

प्रत्यय    –

  • दार – हवादार, देनदार
  • हार – तारनहार, पालनहार
  • वाला – ताँगेवाला, रिक्शावाला
  • अनीय – दयनीय, पूजनीय।

प्रश्न 13.
पाठ में आए सामासिक पद छाँटकर विग्रह कीजिए-
पूजा -पाठ                                   पूजा और पाठ
……………………..                            …………………….
…………………….                             …………………….
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उत्तर:
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 7 2

पाठेतर सक्रियता

• बचपन पर केंद्रित मैक्सिम गोर्की की रचना ‘मेरा बचपन’ पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

• ‘मातृभूमि : ए विलेज विदआउट विमेन’ (2005) फिल्म देखें। मनीष झा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में कन्या भ्रूण हत्या की त्रासदी को अत्यंत बारीकी से दिखाया गया है।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

• कल्पना के आधार पर बताइए कि लड़कियों की संख्या कम होने पर भारतीय समाज का रूप कैसा होगा? :
उत्तर:
यदि देश में लड़कियों की संख्या कम हो गई तो बहुत ही चिंताजनक स्थितियाँ बन जाएंगी। प्रत्येक पुरुष का विवाह नहीं हो सकेगा। इसलिए कुँवारे पुरुष गलत रास्तों की ओर चल पड़ेंगे। समाज में बलात्कार जैसी घटनाएँ बढ़ेगी। स्त्रियों का बाजारों में निकलना भी कठिन हो जाएगा। दूसरी ओर वेश्यावृत्ति बढ़ेगी। यह भी हो सकता है कि एक स्त्री का दो-तीन पुरुषों के साथ विवाह हो। इससे हमारी समाज-व्यवस्था में उथल-पुथल मच जाएगी।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 17

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 17 बच्चे काम पर जा रहे हैं

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने तथा विचार करने से आपके मन-मस्तिष्क में जो चित्र उभरता है उसे लिखकर व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
कविता की पहली दो पंक्तियाँ पढने तथा विचार करने से हमारे मन-मस्तिष्क में आक्रोश, चिंता और सदयता का भाव उमड़ता है। कोहरे से ढंकी सरदी की सुबह में बच्चों का काम पर जाना मन में करुणा भाव पैदा करता है। जिस प्रतिकूल परिस्थिति में हम बिस्तर से भी नहीं निकलना चाहते हैं उन्हीं दशाओं में बच्चे काँपते-ठिठुरते काम पर जा रहे हैं। यह देखकर समाज की संवेदनहीनता एवं स्वार्थी प्रवृत्ति पर क्रोध आता है। ऐसे बच्चों का बचपन नष्ट होता देखकर चिंता होती है।

प्रश्न 2.
कवि का मानना है कि बच्चों के काम पर जाने की भयानक बात को विवरण की तरह न लिखकर सवाल के रूप में पूछा जाना चाहिए कि ‘काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?’ कवि की दृष्टि में उसे प्रश्न के रूप में क्यों पूछा जाना चाहिए?
उत्तर:
बच्चों का काम पर जाना सामाजिक एवं आर्थिक विडंबना का जीता-जागता उदाहरण है। आज के बच्चे कल के भविष्य हैं। इन बच्चों का अमानवीय दशाओं में मजदूरी करने को सामान्य बात मानकर जानकारी भर नहीं देना चाहिए। इसके प्रति गहरा * लगाव एवं चिंता दिखाई पड़नी चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है।

प्रश्न 3.
सुविधा और मनोरंजन के उपकरणों से बच्चे वंचित क्यों हैं? [Imp.]
उत्तर:
सुविधा और मनोरंजन के उपकरणों से वंचित होने का सबसे मुख्यकारण गरीबी है। इस कारण गरीब माता-पिता न चाहकर भी अपने बच्चों को काम पर भेजने के लिए विवश हो जाते हैं। गरीबी के कारण जब माता-पिता बच्चों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं करा पाते हैं तो उन्हें खिलौने कहाँ से देंगे। इस स्थिति के लिए समाज में व्याप्त स्वार्थी प्रवृत्ति और शोषण की व्यवस्था भी समान रूप से उत्तरदायी है।

प्रश्न 4.
दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा/रही है, फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता। इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
काम पर जाते बच्चों को देख हर कोई उदासीनता का भाव प्रकट नहीं कर रहा है। क्योंकि-

  1. लोग आत्मकेंद्रित हो गए हैं। वे सोचते है कि चलो मेरा बच्चा तो काम पर नहीं जा रहा है।
  2. लोग इसके प्रति जागरूकता नहीं दिखाते हैं। वे सोचते हैं कि यह सरकार के सोचने का कार्य है।
  3. समाज का एक बड़ा वर्ग इन बच्चों से काम कराकर मुनाफा कमाकर अपनी जेब भर रहा है, तो वह इस बारे में क्यों सोचे।

प्रश्न 5.
आपने अपने शहर में बच्चों को कब-कब और कहाँ-कहाँ काम करते हुए देखा है?
उत्तर:
मैंने अपने शहर में बच्चों को चाय की दुकान, ढाबे, किराने की दुकानों, मोमबत्ती, अगरबत्ती बनाने वाले स्थानों, सामानों की पैकिंग करने वाली जगहों, घरों में, प्राइवेट कार्यालयों आदि जगहों पर देखा है। ये बाल-मज़दूर सुबह से देर रात तक प्रायः बारहों महीनों में देखे जा सकते हैं।

प्रश्न 6.
बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान क्यों है? [CBSE][Imp.]
उत्तर:
बच्चों का काम पर जाना हादसे के समान है। क्योंकि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। जिस उम्र में बच्चों को पढ़ना-लिखना चाहिए तथा भविष्य का योग्य एवं सुशिक्षित नागरिक बनने की तैयारी करनी चाहिए, वे उस उम्र में बाल-मजदूरी करते हुए अपना भविष्य नष्ट कर रहे हैं। बच्चों का भविष्य नष्ट होना किसी हादसे से कम नहीं है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 7.
काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर अपने-आप को रखकर देखिए। आपको जो महसूस होता है उसे लिखिए।
उत्तर:
काम पर जाते हुए किसी बच्चे के स्थान पर स्वयं को रखकर देखने से महसूस होता है कि मुझे काम पर क्यों जाना पड़ रहा है। इस समय तो मित्रों के साथ खेलना-कूदना चाहिए था, रंग-बिरंगी पुस्तकें लेकर बाजार जाना चाहिए था और अपनी इच्छा से घूमना-फिरना था, वर बाल मजदूरी करने की विवशता के कारण बचपन छिना जा रहा है। उन बच्चों की किस्मत कितनी अच्छी है जिन्हें काम पर नहीं जाना पड़ता है।

प्रश्न 8.
आपके विचार से बच्चों को काम पर क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए? उन्हें क्या करने के मौके मिलने चाहिए? [CBSE]
उत्तर:
मेरे विचार से बच्चों को काम पर नहीं भेजा जाना चाहिए क्योंकि छोटी उम्र में काम करने पर बच्चों का शारीरिक एवं बौधिक विकास बाधित होता है। वे जिंदगी भर के लिए मजदूर बनकर रह जाते हैं। बच्चों का बौधिक विकास हो इसके लिए उन्हें पढ़ने-लिखने के पर्याप्त अवसर तथा शारीरिक विकास हेतु खेलकूद के उचित अवसर मिलने चाहिए।

पाठेतर सक्रियता

• किसी कामकाजी बच्चे से संवाद कीजिए और पता लगाइए कि-
(क) वह अपने काम करने की बात को किस भाव से लेता/लेती है?
(ख) जब वह अपनी उम्र के बच्चों को खेलने/पढ़ने जाते देखता/देखती है तो कैसा महसूस करता/करती है?
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

• ‘वर्तमान युग में सभी बच्चों के लिए खेलकूद और शिक्षा के समान अवसर प्राप्त हैं-इस विषय पर वाद-विवाद आयोजित कीजिए।
उत्तर:
पक्ष में विचार –
वर्तमान युग में सभी बच्चों के लिए खेलकूद और शिक्षा के समान अवसर हैं। यह बात बिलकुल ठीक है। सरकार ने अपने शिक्षण-संस्थानों में सब बच्चों को बिना किसी भेद-भाव के छूट दी है। गरीब से गरीब बच्चा भी पढ़ सकता है और खेल-कूद में भाग ले सकता है। आजकल कई राज्यों में तो प्राथमिक शिक्षा मुफ्त है। बड़ी कक्षाओं में भी फीस न के बराबर है। अत: हम कह सकते हैं कि सबके लिए खेलकूद और शिक्षा के समान अवसर हैं।

विपक्ष में विचार –
भारत में सभी बच्चों के लिए खेलकूद और शिक्षा के समान अवसर हैं, यह बात कहना झूठ ही नहीं, एक भद्दा मजाक है। यहाँ करोड़ों बच्चे भूखे रह जाते हैं। उन्हें पढ़ने और खेलने से पहले पेट भरने की चिंता खाने लगती है। उधर लाखों बच्चे बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ते हैं तथा हर खेल का आनंद लेते हैं। किसी गाँव के सरकारी स्कूल की तुलना किसी महानगर के बड़े स्कूल से करें तो पता चलेगा कि दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है।

• ‘बाल श्रम की रोकथाम’ पर नाटक तैयार कर उसकी प्रस्तुति कीजिए।
उत्तर:
छात्र प्रस्तुत करें।

• चंद्रकांत देवताले की कविता ‘थोड़े से बच्चे और बाकी बच्चे’ (लकड़बग्घा हँस रहा है) पढ़िए। उस कविता के भाव तथा प्रस्तुत कविता के भावों में क्या साम्य है?
उत्तर:
स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 4

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 4 माटी वाली

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1.
‘शहरवासी सिर्फ माटी वाली को नहीं, उसके कंटर को भी अच्छी तरह पहचानते हैं। आपकी समझ से वे कौन से कारण रहे होंगे जिनके रहते ‘माटी वाली’ को सब पहचानते थे?
उत्तर:
शहरवासी सिर्फ माटी वाली को नहीं उसके कंटर को भी अच्छी तरह पहचानते हैं। मेरी समझ में इसके निम्नलिखित कारण हैं-

  • माटी वाली नाटे कद की बुढ़िया थी जो कंटर में माटी लाया करती थी।
  • माटी वाली यह कार्य करने वाली अकेली महिला थी जो घर-घर लाल माटी दिया करती थी।
  • टिहरी शहर की रेतीली मिट्टी से लिपाई नहीं की जा सकती थी। इसलिए उसकी मिट्टी की ज़रूरत हर घर को थी।
  • वह टिहरी शहर में वर्षों से मिट्टी दे रही थी।
  • शहर में रहने वाले यहाँ तक किराएदार भी उसी से मिट्टी लेते थे।
  • उसका कंटर, जिसमें ढक्कन नहीं होता था, अपनी विशेष पहचान रखता था।

प्रश्न 2.
माटी वाली के पास अपने अच्छे या बुरे भाग्य के बारे में ज्यादा सोचने का समय क्यों नहीं था? [Imp.]
उत्तर:
माटी वाली समाज के अत्यंत गरीब मजदूर वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। वह सुबह जल्दी उठकर माटाखान जाती तथा मिट्टी खोदकर कंटर में भरती और मिट्टी सहित कंटर सिर पर रख शहर में घर-घर घूमती थी। इसके बदले में लोग उसे एक-दो सूखी रोटियाँ कभी-कभी ताजा-बासी साग या चाय दे देते। उसे अपनी बीमार पति की चिंता भी रहती थी।
उसकी देखभाल भी वही करती थी। अपनी इसी दिनचर्या को अपनी नियति मानकर वह जिए जा रही थी। ऐसे में उसके पास अपने अच्छे या बुरे भाग्य के बारे में सोचने का ज्यादा समय न था।

प्रश्न 3.
“भूख मीठी कि भोजन मीठा’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘भूख मीठी कि भोजन मीठा’ अभिप्राय यह है कि भूख ने होन पर यदि स्वादिष्ट और उच्च कोटि का भोजन मिलता है। तो भी खाने का मन नहीं करता है। इसके विपरीत यदि भूख लगी हो तो रूखा-सूखा या बासी खाना जैसे भी खाने को मिल जाए तो भी रुचिकर लगता है। उसे खाकर पेट ही नहीं भरते वरन संतुष्टि की अनुभूति करते हैं। अतः भोजन मीठा नहीं होता है, भूख मीठी होती है।

प्रश्न 4.
पुरखों की गाढ़ी कमाई से हासिल की गई चीजों को हराम के भाव बेचने को मेरा दिल गवाही नहीं देता।’-मालकिन के इस कथन के आलोक में विरासत के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
हमारे घरों में पूर्वजों के अथक परिश्रम से बनाई हुई कुछ पुरानी वस्तुएँ होती हैं जो उनके न रहने पर भी पूर्वजों की याद दिलाती हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यही धरोहर विरासत के नाम से जानी जाती है।
हमें इनका महत्त्व इनका मूल्य देखकर नहीं समझना चाहिए। हमें यह अनुमान लगाना चाहिए कि अपनी आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी कमी करके बचाई गई राशि से उन्होंने यह सब बनाया होगा। इसके लिए उन्हें कितनी ही मेहनत करनी पड़ी होगी।
लोग धरोहर का मूल्य समझे बिना, उन्हें अनुपयोगी वस्तु समझकर औने-पौने दाम में बेच दिया करते हैं। वे आज के दौर की सौंदर्य वृदृधि वाली वस्तुएँ खरीद लेते हैं तथा अपने पूर्वजों की यादें नष्ट करते हैं। हमें अपने पूर्वजों की बनाई वस्तुओं को सहेजकर रखना चाहिए तथा उनकी रक्षा करनी चाहिए।

प्रश्न 5.
माटी वाली की रोटियों का इस तरह हिसाब लगाना उसकी किस मजबूरी को प्रकट करता है? [Imp.]
उत्तर:
माटी वाली जब किसी घर में चाय के समय पर माटी देने पहुँच गई तो घर की मालकिन ने उसे दो रोटियाँ दीं, जिनमें से माटी वाली ने एक खा लिया और दूसरा कपड़े में लपेट दिया। सामने वाले घर से कामिनी नामक लड़की के बुलाने पर जब वहाँ गई तो माटी लाने के लिए उसे दो रोटियाँ और मिल गईं जिन्हें उसने कपड़े में बाँध लिया। घर जाते हुए वह सोच रही थी कि ये रोटियाँ वह अपने बीमार अशक्त बुड्ढे के सामने परोस देगी। वह हद से हद एक या डेढ़ रोटियाँ ही खा सकेगा। बाकी डेढ़ रोटियों से वह अपना काम चला लेगी। उसके द्वारा रोटियों का ऐसा हिसाब लगाया जाना उसकी घोर गरीबी की ओर संकेत करता है कि वह किस तरह दूसरे घरों से मिली रोटियों पर गुजर करने को विवश है।

प्रश्न 6.
आज माटी वाली बुड़े को कोरी रोटियाँ नहीं देगी-इस कथन के आधार पर माटी वाली के हृदय के भावों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
माटी वाली को घर-घर माटी पहुँचाने से इतनी आय नहीं हो पाती थी कि वह कुछ साग या सब्जी खरीद सके। उसे घर की मालकिनों से जो एक-दो रोटियाँ मिल जाती थीं उन्हें ही बचाकर अपने बीमार पति (बूढ़े) के लिए ले जाती थी। वह इन रोटियों को साग या सब्ज़ी के बिना ही खा लिया करता था।
माटी वाली इस बात से दुखी है पर विवश है कि वह कुछ कर भी नहीं सकती है। उस दिन जब वह तीन रोटियाँ बचाकर ले जा रही थी तो सोच रही थी कि आज वह कुछ प्याज (एक-पाव) खरीद कर ले जाएगी और अपने बूढ़े को रोटियों के साथ प्याज कूटकर देगी। रोज सूखी रोटियाँ खाने वाला उसका बीमार पति आज तो प्याज के साथ रोटियाँ खा लेगा।

प्रश्न 7.
‘गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए।’ इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। [Imp.]
उत्तर:
‘गरीब आदमी का शमशान नहीं उजड़ना चाहिए’–कथन का आशय यह है कि गरीब आदमी अपनी गरीबी के बोझ तले दबा होता है। ऐसे आदमी के पास न रहने का कोई ठिकाना होता है न जीविका का कोई साधन। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को मरने के बाद शमशान घाट पर ही ठिकाना मिलता है जहाँ उसकी माटी जलाई या दफनाई जाती है। शमशान उजड़ने के बाद गरीब आदमी का अंतिम ठिकाना भी नष्ट हो जाएगा। अतः गरीब आदमी का शमशान हर हाल में बचा रहना चाहिए।

प्रश्न 8.
विस्थापन की समस्या पर एक अनुच्छेद लिखिए। [Imp.]
उत्तर:
आज व्यक्ति, समाज, देश सभी प्रगति के पथ पर अग्रसर होकर विकास करना चाहते हैं। विकास के लिए देश में बिजली, पानी, सड़कें आदि की अच्छी व्यवस्था बहुत ही आवश्यक है।

जिन स्थानों पर बिजली, सड़क संबंधी परियोजनाएँ स्थापित की जाती हैं वहाँ के नागरिकों की जमीन को अधिग्रहीत कर लिया जाता है। इसके बदले उन्हें कहीं अन्यत्र स्थान दिया जाता है। विस्थापितों के लिए मात्र जगह दे देने से ही समस्या हल नहीं हो जाती है। लोगों को अपना बसा-बसाया घर छोड़ने के साथ व्यवसाय तथा खेती-बारी से भी दूर होना पड़ता है।

सरकारी आदेश की अवहेलना भी नहीं की जा सकती है। लोग अपने पुरखों की बनाई ज़मीन-जायदाद, घर आदि को छोड़ना नहीं चाहते हैं। उनके लिए ऐसा कर पाना बहुत ही कष्टकर होता है।

कुछ लोग इस दुख को नहीं सह पाते हैं और विक्षिप्त जैसे हो जाते हैं तो कुछ लोग मृत्यु को प्राप्त कर लेते हैं।
सबसे बुरी स्थिति उन लोगों की होती है जो किसी ज़मीन पर रहते तो हैं पर उनके पास जमीन का कोई प्रमाण पत्र नहीं होता है। इसके अभाव में वे नई जगह में अपना आवास नहीं बना सकते हैं तथा उनके पास जो था उससे भी हाथ धो बैठते हैं।

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