NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 3

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
लेखक के अनुसार जीवन में ‘सुख’ से क्या अभिप्राय है? [CBSE]
उत्तर:
लेखक के अनुसार जीवन में ‘सुख’ का अभिप्राय है-हार्दिक आनंद, मानसिक सुख-शांति, शारीरिक आराम और संतुष्टि है। लेखक सुख को उपभोग सुख तक सीमित नहीं समझता है जैसा कि आज समझा जा रहा है।

प्रश्न 2.
आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित कर रही है? [Imp.]

                                      अथवा

उपभोक्तावादी संस्कृति के क्या दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं? [CBSE]

                                     अथवा

उपभोक्तावादी संस्कृति से हमें क्या नुकसान हुए हैं? [CBSE]
उत्तर:
आज की उपभोक्ता संस्कृति हमारे जीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर रही है। उनमें से कुछ प्रभाव निम्नलिखित हैं

  1. आज हम अपने खाने-पीने और पहनने के लिए उन्हीं वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हैं जिनका विज्ञापन नित्य प्रति देखते हैं।
  2. हम पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण कर रहे हैं? इससे जीवन से शांति गायब हो रही है।
  3. उपभोक्तावादी संस्कृति से समाज में वर्गों के बीच दूरी बढ़ रही है।
  4.  सामाजिक सरोकार कम होते जा रहे हैं। इससे व्यक्ति केंद्रिकता बढ़ रही है।
  5.  नैतिक मापदंड तथा मर्यादाएँ कमज़ोर पड़ती जा रही हैं।
  6.  स्वार्थ की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है।
  7.  इस संस्कृति से भोग की आकांक्षाएँ आसमान को छू रही हैं। इससे हमारी सांस्कृतिक नींव हिल रही है।

प्रश्न 3.
लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है? [Imp.]
अथवा
उपभोक्तावादी संस्कृति के विषय में गाँधी जी के क्या विचार थे? [CBSE]
उत्तर:
गांधी जी ‘सादा जीवन उच्चविचार’ के सिद्धांतवादी थे। वे सामाजिकता, नैतिकता, प्रेम-सद्भाव और समानता के समर्थक थे। वे जानते थे कि उपभोक्तावादी संस्कृति भारत के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि उसका मूल आधार भोगवादी है। इस संस्कृति से सामाजिक सरोकार खतरे में पड़ गए हैं तथा हमारी सांस्कृतिक अस्मिता कमजोर पड़ती जा रही है, इस कारण गांधी जी ने इस संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती कहा है।

प्रश्न 4.
आशय स्पष्ट कीजिए
(क) जाने-अनजाने आज के माहौल में आपका चरित्र भी बदल रहा है और आप उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं। [CBSE]
(ख) प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं, चाहे वे हास्यास्पद ही क्यों न हो। [CBSE]
उत्तर:
(क) आज उपभोक्तावादी संस्कृति को अपनाने के फलस्वरूप मनुष्य उपभोग को ही चरम सुख मान बैठा है। वह उत्पाद एवं भोग के पीछे अंधाधुंध भागा जा रहा है। यह सब वह अनजाने में कर रहा है, इससे उसका चरित्र बदल रहा है। | उपभोग को ही वह जीवन का लक्ष्य मानने लगा है।

(ख) उपभोक्ता संस्कृति के प्रभाववश हम अंधानुकरण में कई ऐसी चीजें अपना लेते हैं, जो अत्यंत हास्यास्पद हैं; जैसे अमेरिका में लोग मृत्युपूर्व ही अंतिम क्रियाओं का प्रबंध कर लेते हैं। वे ज्यादा धन देकर हरी घास तथा संगीतमय फव्वारे की चाहत प्रकट कर देते हैं। भारतीय संस्कृति में ऐसे अंधानुकरण की हँसी उड़ना ही है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 5.
कोई वस्तु हमारे लिए उपयोगी हो या न हो, लेकिन टी.वी. पर विज्ञापन देखकर हम उसे खरीदने के लिए अवश्य लालायित होते हैं? क्यों? [CBSE]
उत्तर:
टी.वी. पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों की भाषा अत्यंत आकर्षक और प्रभावशाली होती हैं। टी.वी. पर चलते-फिरते, हँसते गाते और मन वाले विज्ञापन हमें इस तरह सम्मोहित कर देते हैं कि हम कुछ और सोचे-समझे बिना उन्हें खरीदने के लिए लालायित हो उठते हैं।

प्रश्न 6.
आपके अनुसार वस्तुओं को खरीदने का आधार वस्तु की गुणवत्ता होनी चाहिए या उसका विज्ञापन? तर्क देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:
मेरे अनुसार वस्तुओं को खरीदने का आधार विज्ञापन नहीं उनका गुणवत्ता होना चाहिए, क्योंकि

  1. विज्ञापनों में वस्तुओं के गुणों का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन किया जाता है, जिसकी वास्तविकता से कुछ लेना-देना नहीं होता है।
  2. विज्ञापनों का उद्देश्य उत्पादकों के हित में सोचना होता है, इसलिए वे उपभोक्ताओं के हित को सोचना तो दूर उनकी ब पर डाका डालते हैं।
  3. विज्ञापनों की भाषा भ्रामक तथा सम्मोहक शैली में होती है जिसमें हम हँसते जाते हैं।
  4.  विज्ञापनों के माध्यम से हम किसी वस्तु के गुण-दोष की सच्चाई नहीं जान सकते हैं।

प्रश्न 7.
पाठ के आधार पर आज के उपभोक्तावादी युग में पनप रही ‘दिखावे की संस्कृति’ पर विचार व्यक्त कीजिए। [Imp.]
अथवा
दिखावे की संस्कृति का हमारे समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
उपभोक्तावादी संस्कृति अधिकाधिक उपभोग के लिए प्रेरित करती है। यह संस्कृति उपयोग को ही सुख मान लेती है। इसके प्रभाव के कारण लोग अधिक से अधिक वस्तुएँ खरीदकर अपनी हैसियत का प्रदर्शन करने लगते हैं। इतना ही नहीं वे महँगी से महँगी वस्तुएँ खरीदकर दूसरों को नीचा दिखाना चाहते हैं। नि:संदेह उपभोक्तावादी संस्कृति दिखावे की संस्कृति है।

प्रश्न 8.
आज की उपभोक्ता संस्कृति हमारे रीति-रिवाजों और त्योहारों को किस प्रकार प्रभावित कर रही है? अपने अनुभव के आधार पर एक अनुच्छेद लिखिए। [CBSE]
उत्तर:
आज उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे रीति-रिवाजों और त्योहारों को अत्यंत गहराई से प्रभावित कर रही है। इससे रीति-रिवाजों और त्योहारों के स्वरूप में काफी बदलाव आ गया है, जैसेरीति-रिवाज-उपभोक्ता संस्कृति ने हमारे रीति-रिवाजों का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। पहले लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में वहाँ पहुँचकर शामिल हुआ करते थे, पर आज वे धन्यवाद, शुभकामना संदेश, जन्मदिन की बधाई आदि फोन या एस. एम. एस. के माध्यम से दे देते हैं।
किसी के पास आने-जाने का समय ही नहीं रह गया। वृह दिन गया जब लड़की की शादी में गली-मोहल्ले वाले तथा रिश्तेदार हर काम अपने हाथ से करते थे तथा बारात की सेवा, खान-पान के बाद ही कन्यापक्ष के लोग खाते थे, पर आज बैंक्वेटहाल यो होटल के कर्मचारी यह सब कर देते हैं। कन्यापक्ष के रिश्तेदार तथा निकट संबंधी बारातवालों का इंतजार किए बिना खा-पीकर चलते बनते हैं।
त्योहार-उपभोक्ता संस्कृति से त्योहार भी प्रभावित हुए हैं। आज होली, दीपावली, दशहरा, रक्षाबंधन, ईद मनाने के रिवाज में बदलाव आया है। दीवाली पर सरसों के तेल में जलाए जाने वाले दीपों का स्थान बिजली के बल्बों, लड़ियों, इलेक्ट्रिकल दीपों और मोमबत्तियों ने ले लिया है। इन अवसर पर बनने वाले पारंपरिक पकवानों की जगह फास्टफूड लेते जा रहे हैं।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 9.
धीरे-धीरे सब कुछ बदल रहा है।
इस वाक्य में बदल रहा है’ क्रिया है। यह क्रिया कैसे हो रही है-धीरे-धीरे। अतः यहाँ धीरे-धीरे क्रिया-विशेषण है। जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। जहाँ वाक्य में हमें पता चलता है क्रिया कैसे, कब, कितनी और कहाँ हो रही है, वहाँ वह शब्द क्रिया-विशेषण कहलाता है।

(क) ऊपर दिए गए उदाहरण को ध्यान में रखते हुए क्रिया-विशेषण से युक्त पाँच वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए।
(ख) धीरे-धीरे, ज़ोर से, लगातार, हमेशा, आजकल, कम, ज्यादा, यहाँ, उधर, बाहर-इन क्रियाविशेषण शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
(ग) नीचे दिए गए वाक्यों में से क्रिया-विशेषण और विशेषण शब्द छाँटकर अलग लिखिए।
                  वाक्य                                                                   क्रिया-विशेषण             विशेषण

  1. कल रात से निरंतर बारिश हो रही है।
  2. पेड़ पर लगे पके आम देखकर बच्चों के मुँह में पानी आ गया।
  3. रसोईघर से आती पुलाव की हलकी
    खुशबू से मुझे ज़ोरों की भूख लग आई।
  4. उतना ही खाओ जितनी भूख है।
  5. विलासिता की वस्तुओं से आजकल बाजार भरा पड़ा है।

उत्तर:
(क) (i) उत्पादन बढ़ाने पर जोर है चारों ओर।
(ii) वहाँ मंद ध्वनि में निरंतर संगीत भी।
(iii) सामंती संस्कृति के तत्व भारत में पहले भी रहे हैं।
(iv) विकास के विराट उद्देश्य पीछे छूट रहे हैं।
(v) नैतिक मानदंड ढीले पड़ रहे हैं।

(ख) धीरे-धीरे – सुमन धीरे-धीरे मेरे पास आ गई।
ज़ोर से – ज़ोर से आँधी आई और कपड़े उड़ गए।
लगातार – कल से लगातार बूंदाबाँदी हो रही है।
हमेशा – हरिश्चंद्र हमेशा सच बोलते थे।
आजकल – हज़ार और पाँच के नोट बंद होने से आजकल बड़ी परेशानी हो रही है।
कम – अधिक सुनकर भी कम बोलो।
ज्यादा – रचना ज्यादा बोल रही थी।
यहाँ – रंजना नहीं आई थी।
उधर – उधर बहुत शोर शराबा है।
बाहर – अध्यापक से डाँट खाकर छात्र बाहर चला गया।

(ग) 1. निरंतर – रीतिवाचक क्रिया-विशेषण
कल रात – कालवाचक क्रिया-विशेषण
2. पके मुँह में – गुणवाचक विशेषण, स्थानवाचक क्रिया-विशेषण
3. हल्की जोरो की – गुणवाचक विशेषण, रीतिवाचक क्रिया-विशेषण
4. उतना, जितना – परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण
5. आजकल – कालवाचक क्रिया-विशेषण

पाठेतर सक्रियता

• ‘दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों का बच्चों पर बढ़ता प्रभाव’ विषय पर अध्यापक और विद्यार्थी के बीच हुए वार्तालाप को संवाद शैली में लिखिए।
उत्तर:

  • अध्यापक- बच्चो! आप विज्ञापन देखना पसंद करते हैं या नहीं?
  • विद्यार्थी- करते हैं सर! कई विज्ञापन तो बहुत सुंदर होते हैं।
  • अध्यापक- जैसे? विद्यार्थी-कोका-कोला का विज्ञापन।अध्यापक-इसमें क्या अच्छा है?
  • विद्यार्थी- सर आमिर खान की एक्टिंग? क्या एक्टिंग है।
  • अध्यापक- क्या तुम इस विज्ञापन को अच्छा विज्ञापन कहोगे?
  • विद्यार्थी- क्यों नहीं सर! इससे तो अच्छा विज्ञापन हो नहीं सकता।
  • अध्यापक- परंतु इससे यह कैसे पता चला कि तुम्हें कोका-कोला पीनी चाहिए या नहीं।
  • विद्यार्थी- सर! मैं तो एक्टिंग की बात कर रहा था।
  • अध्यापक- परंतु मैंने विज्ञापन की बात पूछी थी। जिस काम के लिए विज्ञापन बना था, क्या वह काम हो गया।
  • विद्यार्थी- (सोचते हुए) सर! वो तो हो गया। कोका-कोला कंपनी को अपना माल बेचना था, उसमें वह सफल रही।
  • अध्यापक- परंतु क्या कोका-कोला का कोई गुण पता चला, जिस कारण हमें कोका-कोला पीनी चाहिए।
  • विद्यार्थी- नहीं सर! वो तो नहीं पता चला।
  • अध्यापक- इसका मतलब यह भ्रामक विज्ञापन है। भटकाऊ, ललचाऊ या दिशाभ्रष्ट विज्ञापन है।
  • विद्यार्थी- परंतु आजकल तो सारे विज्ञापन ऐसे होते हैं।
  • अध्यापक- तभी तो मैं कहता हूँ। ये विज्ञापन लक्ष्य से भटके हुए हैं। ये उपभोक्ता को शिक्षित नहीं करते, केवल  अपने मायाजाल में अंधे करके उन्हें बाँधते हैं।

• इस पाठ के माध्यम से आपने उपभोक्ता संस्कृति के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। अब आप अपने अध्यापक की सहायता से सामंती संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त करें और नीचे दिए गए विषय के पक्ष अथवा विपक्ष में कक्षा में अपने विचार व्यक्त करें।
क्या उपभोक्ता संस्कृति सामंती संस्कृति का ही विकसित रूप है?
उत्तर:
पक्ष में विचार-जी हाँ! उपभोक्तावादी संस्कृति सामंती संस्कृति का ही विकसित रूप है। पहले सामंत भोगवाद में जीवन बसर करते थे। उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य संसार का भोग करना होता था। उन्होंने ही अपनी आन-बान-शान के लिए ताजमहले, किले और बाग-बगीचे बनवाए। आम लोग कीड़े-मकौड़ों की भाँति गरीबी में पलते रहे और सामंत उनके खून पर पलकर भोगविलास करते रहे। आज यही काम उपभोक्तावादी संस्कृति के संचालक कर रहे हैं। वे सारी दुनिया को अपने उत्पादों के जाल में फंसा रहे हैं। इसके माध्यम से वे अपना साम्राज्य बढ़ा रहे हैं। आज अरबों-खरबों कमाने वाले पूँजीपति बढ़ते जा रहे हैं। उनके भोग के साधन भी बढ़ रहे हैं। ।

विपक्ष में विचार- उपभोक्तावादी संस्कृति सामंती संस्कृति का रूप नहीं है, बल्कि यह उपभोग के साधनों की प्रचुरता का प्रमाण है। पहले जो साधन बड़े-बड़े पूँजीपतियों को उपलब्ध होते थे, वे आज आम आदमी को भी मिलने लगे हैं। पहले राजा-महाराजा ही मोटरकार और हवाई जहाज की यात्रा का सुख ले पाते थे, अब मध्यमवर्गीय व्यक्ति भी इनका सुख ले रहा है। अतः यह सामंती संस्कृति का विकसित रूप नहीं है, बल्कि जन-जन की समृद्धि का प्रतीक है।

• आप प्रतिदिन टी.वी. पर ढेरों विज्ञापन देखते-सुनते हैं और इनमें से कुछ आपकी ज़बान पर चढ़ जाते हैं।
आप अपनी पसंद की किन्हीं दो वस्तुओं पर विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
नमकीन का विज्ञापन

  • श्रीमती – लीजिए आप भी खाइए! कुरकुरी नमकीन!!
  • श्रीमान – बस कुरकुरी?
  • श्रीमती – कुरकुरी नहीं, करारी भी!
  • श्रीमान – बस कुरकुरी और करारी?
  • श्रीमती – अजी खाइए तो! यह स्वादिष्ट भी है।
  • श्रीमान – अरे! तुम क्या खिलाओगी! मैं तुम्हें खिलाता हूँ ऐसी नमकीन-जो कुरकुरी भी है, करारी भी है, स्वादिष्ट भी है और चटपटी भी! और नाम भी है उसका खटमिठी।
  • श्रीमती – खटमिठी! यही तो मैं खिला रही थी-खटमिठी नमकीन।
  • दोनों – आप भी खाइए खटमिठी नमकीन!!

जूते का विज्ञापन
(पाँव देखकर) – अरे! यह पाँव को क्या हुआ?
घिस गए
और जूते!
वो तो लोहा हैं। वे टस-से-मस भी नहीं हुए!
वाह, बाऊ जी! इधर मेरे पैर देखो!
तुम्हारे पैर तो बिल्कुल ऐसे हैं, जैसे कभी धरती पर रखे ही नहीं।
और क्या! यह मेरे जूतों का कमाल है!
जूतों का कमाल!
जी हाँ! ये खुद घिस गए, किंतु पैर को सुरक्षित रखा!  बिल्कुल फूल से हैं जूते!
क्यों लौहपुरुष जी!
सच भई! जूते पैरों के लिए हैं; पैर जूतों के लिए नहीं। मैं भी अब खरीदा करूंगा रक्षक जूते। सुंदर! आरामदायक! रक्षक जूते!

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 8

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 8 शक्र तारे के समान

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न अभ्यास

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए

प्रश्न 1.
महादेव भाई अपना परिचय किस रूप में देते थे?
उत्तर:
महादेव भाई दूसरों से अपना परिचय गांधी जी का हम्माल तथा पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर के रूप में देते थे।

प्रश्न 2.
‘यंग इंडिया’ साप्ताहिक में लेखों की कमी क्यों रहने लगी थी?
उत्तर:
‘यंग इंडिया’ नामक पत्र में अधिकतर लेख हॉर्नीमैन लिखा करते थे। अंग्रेजों ने उन्हें देश निकाला दे दिया। परिणामस्वरूप इस पत्र में लेख लिखने वालों की कमी हो गई।

प्रश्न 3.
गाँधी जी ने ‘यंग इंडिया’ प्रकाशित करने के विषय में क्या निश्चय किया?
उत्तर:
‘यंग इंडिया’ के प्रकाशन में गांधी जी ने यह निश्चय किया कि इसे सप्ताह में दो बार निकाला जाए क्योंकि काम बहुत अधिक बढ़ गया है।

प्रश्न 4.
गाँधी जी से मिलने से पहले महादेव भाई कहाँ नौकरी करते थे?
उत्तर:
गाँधी जी से मिलने से पहले महादेव भाई सरकार के अनुवाद विभाग में नौकरी किया करते थे।

प्रश्न 5.
महादेव भाई के झोलों में क्या भरा रहता था?
उत्तर:
महादेव भाई के झोलों में ताजे-से-ताजे समाचार पत्र, मासिक पत्र और पत्रिकाएँ भरे रहते थे, जिन्हें वे सफर के दौरान पढ़ते थे।

प्रश्न 6.
महादेव भाई ने गाँधी जी की कौन-सी प्रसिद्ध पुस्तक का अनुवाद किया था?
उत्तर:
महादेव भाई ने गाँधी जी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ को अंग्रेजी अनुवाद किया।

प्रश्न 7.
अहमदाबाद से कौन-से दो साप्ताहिक निकलते थे?
उत्तर:
अहमदाबाद से ‘यंग इंडिया’ और ‘नवजीवन’ नामक साप्ताहिक निकलते थे।

प्रश्न 8.
महादेव भाई दिन में कितनी देर काम करते थे?
उत्तर:
महादेव भाई रात होने तक काम करते रहते थे।

प्रश्न 9.
महादेव भाई से गाँधी जी की निकटता किस वाक्य से सिद्ध होती है?
उत्तर:
“ए रे जखम जोगे नहि जशे।” अर्थात यह घाव कभी योग से नहीं भरेगा। गांधी जी द्वारा कहे गए इस वाक्य से उनकी और महादेव भाई की निकटता सिद्ध होती है।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में लिखिए

प्रश्न 1.
गाँधी जी ने महादेव को अपना वारिस कब कहा था?
उत्तर:
1919 में पंजाब जाते समय गाँधी जी को पलवल स्टेशन पर अंग्रेज़ सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। गाँधी जी ने उसी समय महादेव भाई को अपना वारिस कहा था।

प्रश्न 2.
गाँधी जी से मिलने आनेवालों के लिए महादेव भाई क्या करते थे?
उत्तर:
पंजाब में हो रहे अत्याचारों को बताने के लिए आनेवालों की बातों को महादेव भाई संक्षिप्त टिप्पणियों के रूप में तैयार करते और गांधी जी के सामने प्रस्तुत करते। इसके अलावा वे आनेवालों के साथ गांधी जी के साथ उनकी मुलाकात भी कराते थे।

प्रश्न 3.
महादेव भाई की साहित्यिक देन क्या है?
उत्तर:
महादेव भाई ने टैगोर द्वारा रचित ‘विदाई का अभिशाप’ शीर्षक नाटिका और ‘शरद बाबू की कहानियाँ’ का अनुवाद किया। उन्होंने महात्मा गाँधी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ का अंग्रेज़ी अनुवाद किया।

प्रश्न 4.
महादेव भाई की अकाल मृत्यु का कारण क्या था?
उत्तर:
महादेव भाई मगनवाड़ी में रहते थे। उसी समय से गाँव की सीमा पर मकान बनवाए जा रहे थे। वर्धा की असह्य गरमी में मगनवाड़ी से गाँव जाते, दिनभर काम करके शाम को फिर पैदल आते। इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। जो उनकी मृत्यु का कारण बन गया।

प्रश्न 5.
महादेव भाई के लिखे नोट के विषय में गाँधी जी क्या कहते थे?
उत्तर:
गाँधी जी अन्य टिप्पणीकारों को विश्वासपूर्वक यह कहते थे कि महादेव के लिखे नोट से अपने नोट का मिलान कर लो, गलती का पता चल जाएगा। उन्हें विश्वास था कि महादेव जो लिखेंगे, सही लिखेंगे।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
पंजाब में फ़ौजी शासन ने क्या कहर बरसाया?
उत्तर:
पंजाब में फ़ौजी शासन ने घोर कहर बरपाया और पंजाब के अधिकतर नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इन नेताओं को फ़ौजी कानून के अंतर्गत जन्म कैद की सज़ाएँ देकर काला पानी (अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर) भेज दिया। लाहौर के मुख्य राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक पत्र ट्रिब्यून के संपादक श्री कालीनाथ राम को दस साल जेल की सजा दी गई।

प्रश्न 2.
महादेव जी के किन गुणों ने उन्हें सबका लाड़ला बना दिया था? [CBSE 2012]
उत्तर:
महादेव जी जो लिखते थे, वह बड़ा सुंदर व सटीक होता था। वह चाहे साधारण लेख हो या विरोधी समाचार पत्रों की प्रतिक्रियाओं का जवाब, सभी में उनकी शिष्टाचार भरी शैली होती थी। उनके कॉलम सीधी-सादी भाषा में सुस्पष्ट व उच्च भावों से भरे होते थे। वे विरोधियों की बातों का जवाब उदार हृदय से देते थे। यही कारण था कि वे सबके लाड़ले बन गए।

प्रश्न 3.
महादेव जी की लिखावट की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर:
महादेव भाई द्वारा लिखे गए अक्षर मोती जैसे सुंदर और त्रुटिरहित होते थे। पूरे भारत में उनकी लिखावट का सानी न था। वाइसराय को लिखे जाने वाले पत्र उन्हीं की लिखावट में लिखे जाते थे। उनकी लिखावट देख वाइसराय भी सोचने पर विवश हो जाते थे। वे सुंदर लिखते हुए भी तेज़ गति से लिख सकते थे। इन लेखों में इतनी शुद्धता होती थी कि लोग अपने लेख का मिलान महादेव द्वारा लिखे लेख से करते थे। उनकी लिखावट पढ़ने वाले को मंत्रमुग्ध कर देने वाली तथा मनोहारी थी।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1.
अपना परिचय उनके ‘पीर बावर्ची-भिश्ती-खर’ के रूप में देने में वे गौरवान्वित महसूस करते थे।’ [CBSE 2012]
उत्तर:
महादेव भाई मज़ाक में अपने आपको गाँधीजी का सेवक, रसोइया, पानी भरने वाला भिश्ती और गधा कहते थे। यह कहने में वे गौरव का अनुभव करते थे। गाँधी जी की सेवा करने में उन्हें आनंद आता था। वे गौरव का अनुभव इसलिए करते थे क्योंकि उन्हें गाँधी जी का सान्निध्य प्राप्त था।

प्रश्न 2.
इस पेशे में आमतौर पर स्याह को सफ़ेद और सफेद को स्याह करना होता था।
उत्तर:
आशय-महादेव भाई और उनके मित्र नरहरि भाई ने वकालत की पढ़ाई के साथ वकालत भी साथ-साथ शुरू की थी। इस पेशे में सच्चाई और ईमानदारी के लिए कोई जगह नहीं होती। यहाँ तो बुधिकौशल और वाक्पटुता के बल पर सच को झूठ और झूठ को सच साबित किया जाता है। इसी सच और झूठ के चक्कर में कई बार निर्दोष को सज़ा और दोषी को बाइज्जत बरी कर दिया जाता है।

प्रश्न 3.
देश और दुनिया को मुग्ध करके शुक्रतारे की तरह ही अचानक अस्त हो गए।
उत्तर:
इसका आशय यह है कि महादेव की मृत्य अल्पायु में ही हो गई थी। इस संसार से जाने से पहले उन्होंने ऐसा काम किया था कि सारी दुनिया उन पर मुग्ध हो गई थी। वे शुक्रतारे की तरह अल्प समय में अपनी चमक बिखेरकर अस्त हो गए।

प्रश्न 4.
उन पत्रों को देख-देखकर दिल्ली और शिमला में बैठे वाइसराय लंबी साँस-उसाँस लेते रहते थे।
उत्तर:
आशय- महादेव भाई की लिखावट अत्यंत सुंदर थी। यह लिखावट इतनी शुद्ध होती थी कि उसमें कॉमा और मात्रा की भी गलती नहीं होती थी। उनकी लेखन शैली मनोहारी होती थी। शिमला में बैठे वाइसराय को लिखे जाने वाले पत्र महादेव की लिखावट में भेजे जाते थे। इन पत्रों की लिखावट देख वाइसराय लंबी-लंबी साँसें लेने लग जाते थे क्योंकि ब्रिटिश सर्विस में उनके समान अक्षर लिखने वाला मिलना कठिन था।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्दों का निर्माण कीजिए-

         सप्ताह    –    साप्ताहिक

  1. अर्थ        –    …………………
  2. साहित्य   –    …………………
  3. धर्म        –    …………………
  4. व्यक्ति    –    …………………
  5. मास       –    …………………
  6. राजनीति –    …………………
  7. वर्ष        –    …………………

उत्तर:

  1. अर्थ – आर्थिक
  2. साहित्य – साहित्यिक
  3. व्यक्ति  – वैयक्तिक
  4. धर्म  -धार्मिक
  5. मास  – मासिक
  6. राजनीति – राजनीतिक
  7. वर्ष  – वार्षिक

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए उपसर्गों का उपयुक्त प्रयोग करते हुए शब्द बनाइए-
अ, नि, अन, दुर, वि, कु, पर, सु, अधि

  1. आर्य           –     …………………….
  2. आगत         –     …………………….
  3. डर            –      …………………….
  4. आकर्षण     –     …………………….
  5. क्रय           –      …………………….
  6. मार्ग           –      …………………….
  7. उपस्थित     –      …………………….
  8. लोक          –      …………………….
  9. नायक        –      …………………….
  10. भाग्य         –      …………………….

उत्तर:

  1. आर्य – अनार्य
  2. आगत – अनागत
  3. डर – निडर
  4. आकर्षण – विकर्षण
  5. क्रये – विक्रय
  6. मार्ग – कुमार्ग
  7. उपस्थित – अनुपस्थित
  8. लोक – परलोक
  9. नायक – अधिनायक
  10. भाग्य – दुर्भाग्य ।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित मुहावरों को अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए,

  1. आड़े हाथों लेना
  2. अस्त हो जाना
  3. दाँतों तले अंगुली दबाना
  4. मंत्र-मुग्ध करना
  5. लोहे के चने चबाना

उत्तर:

  1. आड़े हाथों लेना – जब दुश्मन सामने आए तो नरमी न बरतना। उसे आड़े हाथों लेना
  2. अस्त हो जाना – कभी कांग्रेस में सेवा का भाव था। आज वह पवित्र भावना अस्त हो गई है।
  3. दाँतों तले अँगुली दबाना – नट को एक रस्सी पर चढ़ते देखकर सब लोग दाँतों तले अँगुली दबाने लगे
  4. मंत्र मुग्ध करना – लता मंगेशकर की मधुर आवाज़ ने सबको मंत्र मुग्ध कर दिया
  5. लोहे के चने चबाना – सैनिकों का जीवन आसान नहीं होता। उन्हें युद्ध के मैदान में लोहे के चने चबाने पड़ते हैं

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए

  1. वारिस     –   ……………..
  2. जिगरी     –   ……………..
  3. कहर       –   …………….
  4. मुकाम     –  ……………..
  5. रूबरू    –   ……………..
  6. फ़र्क       –   ……………..
  7. तालीम    –   ……………..
  8. गिरफ्तार –   ……………..

उत्तर:

  1. वारिस – उत्तराधिकारी
  2. जिगरी – हार्दिक
  3. कहर – जुल्म, अत्याचार
  4. मुकाम – लक्ष्य
  5. रूबरू – प्रत्यक्ष
  6. फ़र्क – अंतर
  7. तालीम – शिक्षा
  8. गिरफ़्तार – कैद, बंधक

प्रश्न 5.
उदाहरण के अनुसार वाक्य बदलिए-
उदाहरण :
गाँधीजी ने महादेव भाई को अपना वारिस कहा था।
गाँधीजी महादेव भाई को अपना वारिस कहा करते थे।

  1. महादेव भाई अपना परिचय ‘पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर’ के रूप में देते थे।
  2. पीड़ितों के दल-के-दल गामदेवी के मणिभवन पर उमड़ते रहते थे।
  3. दोनों साप्ताहिक अहमदाबाद से निकलते थे।
  4. देश-विदेश के समाचार-पत्र गाँधीजी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी करते थे।
  5. गाँधीजी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाते थे।

उत्तर:

  1. महादेव भाई ने अपना परिचय ‘पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर’ के रूप में दिया था।
  2. पीड़ितों के दल-के-दल गामदेवी के मणिभवन पर उमड़े थे।
  3. दोनों साप्ताहिक अहमदाबाद से निकला करते थे।
  4. देश-विदेश के समाचार पत्रों ने गाँधीजी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी की।
  5. गाँधीजी के पत्र हमेशा महादेवी की लिखावट में जाया करते थे।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
गाँधीजी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ को पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
जलियाँवाला बाग में कौन-सी घटना हुई थी? जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर:
जलियाँवाला बाग में वैशाखी के दिन जनसभा हुई थी। उस सभा पर जनरल डायर ने गोलियाँ चलवा दी थीं। उसमें हज़ारों लोग मारे गए थे।

प्रश्न 3.
अहमदाबाद में बापू के आश्रम के विषय में चित्रात्मक जानकारी एकत्र कीजिए।
उत्तर:
साबरमती आश्रम साबरमती नदी के तट पर गुजरात में है।

प्रश्न 4.
सूर्योदय के 2-3 घंटे पहले पूर्व दिशा में या सूर्यास्त के 2-3 घंटे बाद पश्चिम दिशा में एक खूब चमकता हुआ ग्रह दिखाई देता है, वह शुक्र ग्रह है। छोटी दूरबीन से इसकी बदलती हुई कलाएँ देखी जा सकती हैं, जैसे चंद्रमा की कलाएँ।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
वीराने में जहाँ बत्तियाँ न हों वहाँ अँधेरी रात में जब आकाश में चाँद भी दिखाई न दे रहा हो तब शुक्र ग्रह (जिसे हम शुक्र तारा भी कहते हैं) के प्रकाश से अपने साए को चलते हुए देखा जा सकता है। कभी अवसर मिले तो इसे स्वयं अनुभव करके देखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1.
सूर्यमंडल में नौ ग्रह हैं। शुक्र सूर्य से क्रमश: दूरी के अनुसार दूसरा ग्रह है और पृथ्वी तीसरा। चित्र सहित परियोजना पुस्तिका में अन्य ग्रहों के क्रम लिखिए।
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 8 1
उत्तर:
सूर्य से नज़दीकी के क्रम से ग्रह

  1. बुध
  2. शुक्र
  3. पृथ्वी
  4. मंगल
  5. बृहस्पति
  6. शनि
  7. अरुण
  8. वरुण (नेप्च्यून)
  9. यम (प्लूटो)

प्रश्न 2.
‘स्वतंत्रता आंदोलन में गाँधी जी का योगदान’ विषय पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर:

  • गाँधी जी ने दक्षिणी अफ्रीका में स्वतंत्रता की लड़ाई शुरू की।
  • उन्होंने भारत में आकर कांग्रेस की कमान संभाली।
  • उन्होंने डांडी-यात्रा की। नमक आंदोलन किया। 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन चलाया। वे अनेक बार जेल गए। उन्होंने लाखों सत्याग्रहियों को प्रेरित किया। आखिरकार एक दिन देश आज़ाद हुआ।

प्रश्न 3.
भारत के मानचित्र पर निम्न स्थानों को दर्शाएँ :
अहमदाबाद, जलियाँवाला बाग (अमृतसर), कालापानी (अंडमान), दिल्ली, शिमला, बिहार, उत्तर प्रदेश।
उत्तर:
नक्शा लेकर उस पर रंगों से चिह्न लगाएँ।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 9

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 9 साखियाँ एवं सबद

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 9 साखियाँ एवं सबद.

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

साखियाँ

प्रश्न 1.
मानसरोवर’ से कवि का क्या आशय है?[CBSE]
उत्तर:
मानसरोवर से कवि के दो आशय हैं-

  • तिब्बत में हिमालय की ऊँचाई पर स्थित पवित्र झील, जिसमें हंस क्रीड़ा करते हैं।
  • मनुष्य का पवित्र मन रूपी सरोवर।

प्रश्न 2.
कवि ने सच्चे प्रेमी की क्या कसौटी बताई है? [Imp.] [CBSE]
उत्तर:
कवि ने सच्चे प्रेमी की कसौटी बताते हुए कहा है कि सच्चा प्रेमी अपने प्रेम अर्थात् ईश्वर की भक्ति करते हुए ईश्वर को पाने का प्रयास करता है। उसे ईश्वर के अलावा किसी सांसारिक वस्तु को पाने की रुचि नहीं होती है। वह लोभ, मोह, माया से ऊपर उठ चुका होता है। उसके लिए सांसारिक आकर्षण तथा बंधन ईश्वर की प्राप्ति में बाधक नहीं बन पाते हैं।

प्रश्न 3.
तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्त्व दिया है?
उत्तर:
तीसरे दोहे में कबीर ने उस आध्यात्मिक ज्ञान को महत्त्व दिया है जो व्यक्तिव अनुभव से प्राप्त करता है।

प्रश्न 4.
इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है? [Imp.] [CBSE]
अथवा
‘संत सुजान’ से क्या आशय है? [CBSE 2012]
उत्तर:
इस संसार में सच्चा संत वही है जो-

  1. मोह-माया, लोभ, अपने-पराए की भावना से दूर रहता है।
  2. सांसारिक मोहमाया से दूर रहकर प्रभु की सच्ची भक्ति करता है।
  3. सुख-दुख, लाभ-हानि, ऊँच-नीच, अच्छा-बुरा आदि को समान रूप से अपनाता है।
  4. दिखावे की भक्ति नहीं करता है। वे सच्ची भक्ति से प्रभु को प्राप्त करना चाहता है।

प्रश्न 5.
अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने किस तरह की संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है?
उत्तर:
अंतिम दो दोहों में कबीर ने जिने संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है, वे हैं-

  • अपने-अपने धर्म को श्रेष्ठ मानने की कट्टरता और दूसरे धर्म की निंदा करना।
  • ऊँचे कुल में जन्म लेने के कारण बड़ा होने का अभिमान करने संबंधी संकीर्णता।

प्रश्न 6.
किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कुल से होती है या उसके कर्मों से? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
कुछ लोगों का मानना है कि अच्छे कुल में जन्म लेने से ही वह महान नहीं बन जाता है। पहचान बनाने के लिए व्यक्ति को अच्छे कर्म करने होते हैं। व्यक्ति की पहचान उसके अच्छे कर्मों से होती है ऊँचे कुल में जन्म लेकर भी व्यक्ति यदि अच्छे कर्म नहीं करता है तो वह सम्मानीय नहीं हो सकता है। इसके विपरीत छोटे या निम्न कुल में ” भी जन्म लेकर व्यक्ति यदि अच्छे कर्म करता है तो सम्माननीय बन जाता है।

प्रश्न 7.
काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए हस्ती चढिए ज्ञान को, सहज दुलीचा डारि। स्वान रूप संसार है, भूकन दे झख मारि।।
उत्तर-
काव्यसौंदर्य
भावसौंदर्य- कवि ने ज्ञान की साधना में जुटे लोगों को देखकर संसार की प्रतिक्रिया की अभिव्यक्ति की है। साधक व्यक्ति को देखकर संसार उस पर तरह-तरह टीका-टिप्पणी करता है।

शिल्य सौंदर्य-

  • मिश्रित शब्दावली युक्त सधुक्कड़ी भाषा है जिसमें तत्सम शब्द का प्रयोग है।
  • दोहा छंद का प्रयोग है।
  • रूपक अलंकार का अति सुंदर प्रयोग है। इस अलंकार की छटा दर्शनीय है।
  • स्वान रूप संसार में उपमा तथा अनुप्रास अलंकार है।
  • ‘झख मारना’ मुहावरे का सुंदर प्रयोग है।
  • भाषा में चित्रात्मकता है तथा दृश्य बिंबसाकार हो उठा है।

सबद (पद)

प्रश्न 8.
मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढ़ता फिरता है? [Imp.] [CBSE]
उत्तर:
मनुष्य ईश्वर को निम्नलिखित स्थानों पर ढूँढ़ता है-

  1. हिंदू ईश्वर को मंदिर तथा अपने पवित्र तीर्थस्थल कैलाश पर्वत पर ढूँढ़ता है।
  2. मुसलमान अपने प्रभु को काबा तथा मस्जिद में खोजता है।
  3. मनुष्य ईश्वर को योग, वैराग्य तथा अनेक प्रकार की धार्मिक क्रियाओं में खोजता है।

प्रश्न 9.
कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है? [CBSE]
उत्तर:
कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए जिन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है, वे हैं-

  • ईश्वर मंदिर-मस्जिद या देवालयों में नहीं रहता है।
  • ईश्वर काबा-काशी जैसे धर्म स्थलों पर नहीं रहता है।
  • ईश्वर को कर्मकांडों जैसे योग-वैराग्य द्वारा नहीं पाया जा सकता है।
  • भक्ति का दिखावा करने से ईश्वर नहीं मिलता है।

प्रश्न 10.
कबीर ने ईश्वर को ‘सब स्वाँसों की स्वाँसे में क्यों कहा है? [Imp.] [CBSE]
उत्तर:
सभी प्राणियों की रचना ईश्वर द्वारा की गई है। उसी ईश्वर का अंश आत्मा के रूप में प्रत्येक प्राणी में समाया हुआ है। जीव के अस्तित्व का कारण भी वही है, इसलिए कवि ने ईश्वर को ‘सब स्वाँसों की स्वाँस में कहा है।

प्रश्न 11.
कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न कर आँधी से क्यों की? [CBSE]
उत्तर:
सामान्य हवा के चलने से आस-पास के वातावरण में विशेष परिवर्तन नहीं होता है किंतु आँधी आने से सारा दृश्य बदल जाता है। इसी तरह ज्ञान की आँधी आने से भक्त के मन से छल, कपट, मोह-माया, तृष्णा, लोभ-लालच तथा अज्ञानता का अंधकार नष्ट हो जाता है और व्यक्ति प्रभु भक्ति के आनंद में डूब जाता है इसलिए कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना आँधी से की है।

प्रश्न 12.
ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अथवा
ज्ञान की आँधी आने पर व्यक्ति के व्यवहार में क्या-क्या परिवर्तन देखने को मिलते हैं?[CBSE 2012]
उत्तर:
ज्ञान की आँधी के प्रभावस्वरूप भक्त के मन पर पड़ा भ्रम और अज्ञान का पर्दा हट गया। मन में जमा अंधकार दूर हो गया। वह मोह-माया के बंधनों से मुक्त हो गया। उसको मन निश्छल हो गया। वह प्रभुभक्ति में लीन हो सच्ची भक्ति करने लगा। उसकी परमात्मा से पहचान हो गई।

प्रश्न 13.
भाव स्पष्ट कीजिए
(क) हिति चित्त की है श्रृंनी गिराँनी, मोह बलिंडा तूटा।। उत्तर- इसका भाव यह है कि ईश्वरीय ज्ञान के आने से स्वार्थ-चिंतन समाप्त हो गया तथा सांसारिक मोह नष्ट हो गया।
(ख) आँधी पीछे जो जल बूठा, प्रेम हरि जन भींनाँ।
उत्तर:
(क) भाव यह है कि ज्ञान की आँधी आने से पहले मनुष्य के मन में भ्रम को जो छप्पर पड़ा था उसे सहारा देने वाले स्वार्थ पूर्ण विचारों के खंभे टूट गए और सांसारिक मोह-माया का बंधन टूट गया।

(ख) ज्ञान की आँधी आने के बाद भक्त के हृदय में प्रभु-प्रेम की जो वर्षा हुई उसके आनंद में भक्त का हृदय पूरी तरह से सराबोर हो गया।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 14.
संकलित साखियों और पदों के आधार पर कबीर के धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव संबंधी विचारों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
कबीर अपनी साखियों में कहते हैं कि मनुष्य को पक्ष-विपक्ष अर्थात् जातिगत भेदभाव से दूर रहना चाहिए। सबको हिंदू-मुसलमान आदि के झगड़ों से दूर रहना चाहिए। उनकी स्पष्ट धारणा थी कि जो निष्पक्ष होकर हरि का ध्यान करता है, वही ज्ञानी संत कहलाता है। वे हिंदू और मुसलमान दोनों की कट्टरता को फटकारते हुए कहते हैं

हिंदू मूआ राम कहि, मुसलमान खुदाइ।
कहै कबीर सो जीवता, जो दुहुँ के निकट न जाइ।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 15.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए-
पखापखी, अनत, जोग, जुगति, बैराग, निरपख
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 9 1

पाठेतर सक्रियता

• कबीर की साखियों को याद कर कक्षा में अंत्याक्षरी का आयोजन कीजिए।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

• एन.सी.ई.आर.टी द्वारा कबीर पर निर्मित फिल्म देखें।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

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NCERT Solutions for Class 9 English Literature Chapter 11 Oh, I Wish I’d Looked After Me Teeth

NCERT Solutions for Class 9 English Literature Chapter 11 Oh, I Wish I’d Looked After Me Teeth are part of NCERT Solutions for Class 9 English. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 English Literature Chapter 11 Oh, I Wish I’d Looked After Me Teeth.

BoardCBSE
TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectEnglish Literature
ChapterChapter 11
Chapter NameOh, I Wish I’d Looked After Me Teeth
Number of Questions Solved8
CategoryNCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 9 English Literature Chapter 11 Oh, I Wish I’d Looked After Me Teeth

TEXTUAL EXERCISES
(Page 84)

Question 1.
Parents alone are responsible for inculcating a good sense of dental hygiene amongst children. Do you agree/disagree ? Discuss with your partner.
Answer
For discussion with partners at school level.
Yes, I agree with this. It is the parents who are responsible for inculcating a good sense of dental hygiene amongst their children. Children are children. They can’t be expected to live like the adults who know what is good or bad for them. Actually, children have a limited knowledge. They don’t know what is or will be good or bad for them. Since sweets are tasty they go on eating them and in greater quantities.

But they know it little how harmful they’ll be for their teeth. It is like eating fried food with cold drinks which makes them obese. If it is continued, obesity becomes the mother of many diseases. So parents must teach their children, in fact, must caution them against the results of eating more sweets. These will surely damage their teeth. They will undergo the pain of fillings and the whining drills of the dentist in their mouths. Quite possibly one day they might wear false teeth.

Question 2.
Listen to the poem.
Answer
Class level activity. No questions have been asked in it.

Question 3.
On the basis of your reading of the poem, complete the following table.

Stages in the life of the poetActivitiesConsequences
(a) Youtheating toffees,

________
________
________
________

_________
_________
_________
_________
(b) Adulthood________
________
________
gazing at the dentist in despair.

Answer

Stages in the life of the poetActivitiesConsequences
(a) Youtheating toffees,

eating sweet sticky food,
gobstoppers,
liquorice, sherbet dabs,
peanut brittle

cavities, decay, caps,
possibility of false teeth in the end.
(b) Adulthoodeating gobstoppers,
liquorice, hard peanut
brittle
gazing at the dentist in despair.

Question 4.
On the basis of your understanding of the poem, answer the following questions by ticking the correct choice.
(a) The title ‘Oh, I wish I’d looked after me teeth’ expresses _____.

  1. regret
  2. humour
  3. longing
  4. pleasure

(b) The conscience of the speaker pricks her as she has ____.

  1. been careless
  2. been ignorant
  3. been fun-loving
  4. been rude

(c) The speaker says that she has paved the way for cavities and decay by _____

  1. eating the wrong food and not brushing
  2. not listening to her mother
  3. laughing at her mother’s false teeth
  4. not listening to the dentist

(d) The tone of the narrator is one of ____.

  1. joy
  2. nostalgia
  3. regret
  4. sorrow

Answer
(a) 1
(b) 1
(c) 1
(d) 3

Question 5.
Answer the following questions

  1. “… But up-and-down brushin’
    And pokin’ and fussin’
    Didn’t seem worth the time-I could bite !”
    What do these lines convey ?
  2. Why did the poet go to the dentist ? How could she have avoided it ?
  3. “If you got a tooth, you got a friend”, what do you understand from the line ?
  4. With reference to the poem, how can you look after your teeth ? (V. Imp.)
  5. Give an appropriate proverb that conveys the message that this poem carries.

Answer

  1. These lines convey that the narrator continued brushing her teeth up-and-down and checking them. But she never stopped eating various kinds of sweets. She didn’t think it was worth to check all this as she could bite still. She thought her teeth were alright but they had decayed and were in the process of decaying.
  2. The poet went to the dentist to get her teeth repaired and to have fillings of her cavities in them. She could have avoided if she had cared for them and stopped eating sweets at right time.
  3. It means when a new tooth came it became like a friend. Earlier, the mouth was ‘friendless’ without the teeth. Now it was not so. Also it means the tooth was like a ‘friend’ because it had not been affected by the decay.
  4. We can look after our teeth by avoiding all kinds of sweets. Then we can take care of them by regularly brushing them appropriately.
  5. Healthy and sparkling teeth
    Add lustre to your health.

Question 6.
Listen to, the conversation between Doki and his sister, Moki. As you listen complete the idioms and expressions listed below.
Answer

  1. a wink
  2. giving
  3. whip
  4. horse
  5. turn
  6. never cease
  7. past
  8. had sown

Question 7.
Read the following statement where ‘I’ refers to ‘you’
“I can’t afford to, after what Jack’s done to his teeth.”
What is it, you think you can’t afford and why ? Write a diary entry of not less than 125 words.
(in-class activity; not to be set up as homework).
Answer
15 September 20…                                                               9.30 pm
I feel horrified to see Jack with diseased and decaying teeth. How beautiful and sparkling teeth he had earlier ! But now when he opens his mouth it is a scene of decayed and coloured teeth. I simply can’t afford to treat my teeth like Jack. I know sparkling teeth add to our personality. Then with healthy teeth we are almost disease- free. I feel that decaying teeth cause bad breath. They invite a horde of germs of other allied diseases. By keeping good teeth, I can laugh at those people who sit in a dentist’s chair listening to their terror.

This horror is caused by the whining sound of their drill. I am very conscious to eat good and healthy food and avoid junk food. Then brushing the teeth daily and flushing it with liquids like Listerene, has become my hobby. There is no doubt that bright and sparkling teeth are God’s gift. They add to the person’s personality. We must keep them healthy and in a good condition. It is never difficult to afford keeping them fine and bright.

JUST THINK
Question 8.
In line 35, the poet has misspelt the word ‘amalgam’. Why do you think she has done that ? Discuss.
(Teacher would point out the use of ‘me’ instead of ‘my’ and other linguistic variations that make the poem enjoyable.)
Answer
For discussion at class level. Some points are given below to facilitate this.

  • ‘amulgum’ distortion of amalgamation.
  • by saying or adding ‘amulgum’ the poet’s intention is to suggest mispronunciation due to decayed teeth or causing humour.
  • to suggest horror by striking some sort of suspense in the patient’s mind.
  • to alert the patient to be conscious of the fact that ‘mercury’, a part in the filling material, is something to be avoided.
  • to suggest caution in the readers’ minds to be wary of the necessity of keeping one’s teeth healthy.
  • to teach the narrator and readers as well, to avoid eating sweets for the sake of maintaining healthy teeth

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 15

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 15 मेघ आए

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 15 मेघ आए.

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
बादलों के आने पर प्रकृति में जिन गतिशील क्रियाओं को कवि ने चित्रित किया है, उन्हें लिखिए।
अथवा
मेघों के आने पर प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन हुए? [CBSE]
उत्तर:
बादलों के आने पर प्रकृति में बढ़ी गतिशीलताएँ निम्नलिखित हैं-

  • हवा बहने लगी।
  • पेड़ झुकने और उठने लगे।
  • आँधी चलने से गलियों में धूल उड़ने लगी।
  • बहती नदी अचानक ठिठक गई।
  • पीपल का पेड़ झुकने लगा।
  • लता पेड़ के पीछे छिपने लगी।
  • क्षितिज पर बिजली चमकने लगी।
  • जोरदार बरसात होने लगी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं?

  • धूल
  • पेड़
  • नदी
  • लता
  • ताल

उत्तर:

  • धूल – किशोरी लड़की का जो मेहमान के आने की सूचना देने भाग रही है।
  • पेड़ – गाँव के पुरुष।
  • नदी – गाँव की विवाहिता औरतें।
  • लता – नवविवाहिता, जो साल भर से पति का इंतजार कर रही थी।
  • ताल – घर का सदस्य।

प्रश्न 3.
लता ने बादल रूपी मेहमान को किस तरह देखा और क्यों?
उत्तर:
लता ने अपने पति मेघ को दरवाजे की ओर से देखा, क्योंकि ग्रामीण संस्कृति में नवविवाहिता नायिका अपने मायके वालों की उपस्थिति में अपने पति से बातें नहीं करती है। वह बात करने के लिए, उसे देखने के लिए उत्सुक रहती है, इसलिए ओट से देखती है।

प्रश्न 4.
भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की
(ख) बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूघट सरके।
उत्तर:
(क) भाव-लता रूपी नायिका मेघ रूपी मेहमान से क्षमा माँगते हुए कहने लगी मुझे माफ करना क्योंकि एक साल तक तुम्हारे न आने का मेरे मन में भ्रम बन गया था। अन्य भाव-वर्षा होने से व्याकुल ग्रामवासियों के मन का यह भ्रम मिट गया कि इस साल मेघ नहीं बरसेंगे।
(ख) भाव-नदी में उठती-गिरती लहरें देखकर लगता है कि नदी आने वाले मेघ रूपी मेहमान को पूँघट उठाकर तिरछी नजर से देख रही है। अन्य भाव-गाँव की स्त्रियाँ आते मेहमान को देखने के लिए ठिठक गई और पूँघट उठाकर तिरछी नजर से देखने लगीं।

प्रश्न 5.
मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए?
अथवा
मेघों के आने पर गाँव में कैसा वातावरण हो गया? [CBSE]
उत्तर:
मेघ रूपी मेहमान के आने से हवा रूपी नवयुवतियाँ प्रसन्न हो उठीं। वे मेहमान के आने की सूचना देने के लिए घर की ओर भागीं। घर की स्त्रियाँ दरवाजे और खिड़कियाँ खोलकर मेहमान को देखने लगीं। पेड़ गरदन उचकाकर देखने लगे। लताएँ पेड़ों की ओट में छिपने लगीं। आकाश में बादल छा गए और बिजली चमकने लगी। थोड़ी ही देर में बादल बरसने लगे।

प्रश्न 6.
मेघों के लिए ‘बन-ठन के, सँवर के आने की बात क्यों कही गई है?
उत्तर:
बादल काले-काले हुँघराले होते हैं। इनकी सुंदरता देखते ही बनती है। बादलों के बीच कभी सतरंगी इंद्रधनुष दिखता है, जिससे बादलों का सौंदर्य बढ़ जाता है। बादलों के आगमन की सूचना देती या आगवानी करती हवा आई। बादल गाँव में सजे-धजे मेहमान के रूप में आए।

प्रश्न 7.
कविता में आए मानवीकरण तथा रूपक अलंकार के उदाहरण खोजकर लिखिए।
उत्तर:
कविता में आए मानवीकरण अलंकार के उदाहरण

  • मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के
  • आगे-आगे नाचती गाती बयार चली,
  • पेड़ झुक कर झाँकने लगे, गरदन उचकाए,
  • आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए,
  • बाँकी चितवन उठी, नदी ठिठकी
  • बूढे पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की
  • बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की,
  • हरषायो ताल लाया पानी परातभर के

रूपक अलंकार का उदाहरण
क्षितिज अटारी गहराई

प्रश्न 8.
कविता में जिन रीति-रिवाजों का मार्मिक चित्रण हुआ है, उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. मेहमान के आने पर खुशी छा जाना।
  2. गाँववालों द्वारा मेहमान को उत्सुकतापूर्वक देखना।
  3. बड़ों-बूढ़ों द्वारा स्वागत-सत्कार किया जाना।।
  4. घर के किसी सदस्य द्वारा पानी लाना, हाथ-पाँव धुलवाने का प्रबंध करना।

प्रश्न 9.
कविता में कवि ने आकाश में बादल और गाँव में मेहमान (दामाद) के आने का जो रोचक वर्णन किया है, उसे लिखिए। [CBSE]
उत्तर:
कविता में आकाश में बादलों के आने का वर्णन इस प्रकार है-
आकाश में बादल आते ही हवा चलने लगी। हवा के चलने से पेड़ झुकते-उठते हुए प्रतीत होने लगे। आँधी चलने से धूल उड़ने लगी और दरवाजे खिड़कियाँ खुलने लगीं। नदी का बहाव रुक गया, लता पेड़ की ओट में छिपने लगी। आसमान में बादल गहरे हो गए, बिजली चमकी और बरसात होने लगी।

इसी प्रकार गाँव में मेहमान (दामाद) का वर्णन इस प्रकार है-
गाँव में मेहमान को आता देख लड़कियाँ मेहमान के आने की सूचना देने घर की ओर दौड़ पड़ी। गाँव वाले मेहमान को उचक-उंचंककर देखने लगे। स्त्रियाँ दरवाजे-खिड़कियाँ खोलकर उत्सुकता से देखने लगीं। मेहमान के आने पर घर के बुजुर्ग ने राम-जुहार की। घर का कोई युवा थाल में पानी भर लाया। मेहमान की नवविवाहिता पत्नी ने सालभर बाद आने की उससे शिकायत की। दोनों के मन का भ्रम दूर हुआ और उनकी आँखों से आँसू बहने लगे।

प्रश्न 10.
काव्य-सौंदर्य लिखिए
पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
उत्तर:
काव्य-सौंदर्य
भाव-सौंदर्य – गाँव में मेघ रूपी बादलों के आने का सजीव चित्रण किया गया है।
शिल्प-सौंदर्य-

  • भाषा आम-बोलचाल के शब्दों से युक्त है जिसमें चित्रात्मकता है।
  • सजे-धजे मेहमान द्वारा बादलों को उपमानित करने से उत्प्रेक्षा अलंकार है।
  • मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के-मानवीकरण एवं अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 11.
वर्षा के आने पर अपने आसपास के वातावरण में हुए परिवर्तनों को ध्यान से देखकर एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर:
वर्षा आने से पूर्व ही आसमान बादलों से ढंक जाता है। बिजली चमकने लगती है। वर्षा होने पर चारों ओर उल्लास का वातावरण छा जाता है। पत्ते धुले-धुले से नज़र आने लगते हैं। बच्चे नहाने के लिए बाहर निकल आते हैं। शीतल हवा चलने चलती है। पेड़ झूम-झूमकर अपनी खुशी प्रकट करते हैं। बादल गरज-गरजकर नगाड़े बजाते हुए प्रतीत होते हैं। दादुर और मोर इस धुन के साथ तान मिलाने लगते हैं। वर्षा बंद होते ही लोग रंग-बिरंगे छाते लेकर निकल पड़ते हैं। बच्चे कागज़ की नाव तैराने के लिए तालाब की ओर चल पड़ते हैं।

प्रश्न 12.
कवि ने पीपल को ही बड़ा बुजुर्ग क्यों कहा है? पता लगाइए। [CBSE]
उत्तर:
कवि ने पीपल को ही बुजुर्ग इसलिए माना है क्योंकि पीपल का पेड़ आकार में काफी बड़ा तथा पुराना होता है। यह गाँव के लिए साफ हवा देने के अलावा कल्याणकारी भी होता है।

प्रश्न 13.
कविता में मेघ को ‘पाहुन’ के रूप में चित्रित किया गया है। हमारे यहाँ अतिथि (दामाद) को विशेष महत्त्व प्राप्त है, लेकिन आज इस परंपरा में परिवर्तन आया है। आपको इसके क्या कारण नज़र आते हैं, लिखिए।
उत्तर:
भारतीय संस्कृति में अतिथि (दामाद) को विशेष महत्त्व प्राप्त है परंतु समय और परिस्थितियाँ बदलने से इस परंपरा में बहुत बदलाव आ गया है। पहले यातायात और संचार के साधन कम होने से मेहमान का प्राय; अपना नहीं हो पाता था और न एक-दूसरे से बात करने, हाल-समाचार जानने का मौका मिल पाता था। इसके अलावा तब लोगों की दिनचर्या इतनी व्यस्त न थी। लोग समय निकालकर आव-भगत करते थे। इसके अलावा बढ़ती महँगाई से भी मेहमान की आतिथ्य परंपरा प्रभावित हुई है।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 14.
कविता में आए मुहावरों को छाँटकर अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।
उत्तर:
कविता में आए मुहावरे                                   वाक्य-प्रयोग

  1. सुधि लेना (याद करना)                         तुम काम में इतने डूबे रहते हो कि माँ की सुधि लेने की भी फुर्सत नहीं रह गई है।
  2. गाँठ खुलना (मन का मैल दूर होना)        तुम्हारी बातें सुनकर मेरे मन की गाँठ खुल गई
  3. बाँध टूटना (धैर्य समाप्त होना)               देखो अपने सब्र का बाँध न टूटने दो, यही परिवार के लिए ठीक होगा।
  4. बन-ठन के आना (सज-सँवरकर आना)  शादी में मेहमान बन-उन कर आए हैं।
  5. गरदन उचकाना (उचक कर देखना)      मेहमान को देखने के लिए लड़कियाँ गरदन उचकाने लगीं।

प्रश्न 15:
कविता में प्रयुक्त आँचलिक शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर:
बन-ठन, सँवर, यार, पाहुन, उचकाए, चितवन, जुहार, सुधि, लीन्हीं, ओर, किवार, ताल, परात, अटारी, भरम।

प्रश्न 16.
‘मेघ आए’ कविता की भाषा सरल और सहज है-उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘मेघ आए’ कविता की भाषा प्रवाहमयी, चित्रात्मक, सरल और सजीव है। इसमें शब्दों की क्लिष्टता और जटिलता नहीं है। कवि ने अपनी बात को लोक भाषा में कह दिया है; जैसे-‘मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।’ कविता में आँचलिक शब्दों की बहुलता है। तत्सम शब्द बस नाम मात्र के हैं। जो हैं भी वे आम बोलचाल में प्रचलित हैं। कविता में संवाद ग्रामीणों की जुबान में ही रखे गए हैं; जैसे‘बरस बाद सुधि लीन्हीं’ तथा क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की।’ इस प्रकार हम कह सकते हैं कि इस कविता की भाषा सरल और सहज है।

पाठेतर सक्रियता

• वसंत ऋतु के आगमन का शब्द-चित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
लो वसंत ऋतु आ गई है। उसके स्वागत में प्रकृति का मुखमंडल खिल उठा है। आकाश सजकर सरोवरों के दर्पण में मुँह निहार रहा है। वृक्षों ने उनके स्वागत में धरती पर फूल बिछा दिए हैं। हवा उन्हें पंखा कर रही है। कोयले कू-कू करके उनका अभिनंदन कर रही हैं।

• प्रस्तुत अपठित कविता के आधार पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

धिन-धिन-धा धमक-धमक
मेघ बजे
दामिनि यह गई दमक
मेघ बजे
दादुर का कंठ खुला
मेघ बजे
धरती का हृदय धुला
मेघ बजे
पंक बना हरिचंदन
मेघ बजे
हल का है अभिनंदन
मेघ बजे
धिन-धिन-धा

  1. ‘हल का है अभिनंदन’ में किसके अभिनंदन की बात हो रही है और क्यों?
  2. प्रस्तुत कविता के आधार पर बताइए कि मेघों के आने पर प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन हुए?
  3. पंक बना हरिचंदन’ से क्या आशय है?
  4. पहली पंक्ति में कौन सा अलंकार है?
  5. ‘मेघ आए’ और ‘मेघ बजे’ किस इंद्रिय बोध की ओर संकेत हैं?

उत्तर:

  1. यहाँ स्वयं स्रष्टा अर्थात् भगवान के अभिनंदन की बात हो रही है क्योंकि वही कर्ता है।
  2. मेघ आने पर चारों ओर जल बरसने की संगीत-ध्वनि होने लगी। आकाश में बिजली चमकने लगी। मेंढक आवाज़ करने लगे। धरती साफ-स्वच्छ हो गई। कहीं कीचड़ जम गई।
  3. धरती पर कीचड़ जमा हो गया। परंतु प्रसन्नता के कारण वह चंदन-लेप-सा प्रतीत होने लगा।
  4. अनुप्रास अलंकार।
  5. ‘मेघ आए’ में आँख से देखने का बोध है। (दृश्य बिंब)
    ‘मेघ बजे’ में कान से सुनने का बोध है। (श्रव्य बिंब)

• अपने शिक्षक और पुस्तकालय की सहायता से केदारनाथ सिंह की ‘बादल ओ’, सुमित्रानंदन पंत की ‘बादल’ और निराला की ‘बादल-राग’ कविताओं को खोजकर पढ़िए।
उत्तर:
केदारनाथ सिंह की कविता ‘बादल ओ’ में प्यासी प्रकृति की पुकार है कि बादल शीघ्र बरसें और उनकी प्यास बुझाएँ।
पंत की ‘बादल’ में बादल के विविध रूपों की रोचक वर्णन है।
निराला की ‘बादल-राग’ में बादल क्रांति के दूत बनकर क्रांति का आह्वान करते हैं।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की ‘मेघ आए’ कविता में बादल को सजे-सँवरे नायक के रूप में दिखाते हुए प्रकृति का बहुरूपी वर्णन है।

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