मातुलचन्द्र Summary Notes Class 6 Sanskrit Chapter 15

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Class 6 Sanskrit Chapter 15 मातुलचन्द्र Summary Notes

मातुलचन्द्र पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ एक बालगीत है। एक बालक विस्तृत नील गगन में चंदा मामा की ओर आकर्षित हो अनुरोध करता है कि चंदा मामा आएँ उस पर स्नेह बरसाएँ, उसे गीत सुनाएँ। चंदा मामा कहाँ से आते हैं, कहाँ जाते हैं-यह बात भी उसे अचंभे में डालती है।

मातुलचन्द्र Summary

इस पाठ में शिशु चन्दामामा को सम्बोधित कर रहा है। वह कहता है-हे चन्दामामा! तुम कहाँ से आते हो? तुम कहाँ जाओगे? यह नीला आकाश बहुत विशाल है। यहाँ कहीं खाली जगह दिखाई नहीं देती। हे चन्दामामा! तुम कैसे जाओगे? तुम कहाँ से आते हो? हे मामा! तुम मेरे घर कैसे नहीं आते? तुम स्नेह क्यों नहीं बिखराते? हे चन्दामामा! तुम कब जाओगे? हे चन्दामामा! तुम कहाँ से आते हो?

हे चन्दामामा! तुम्हारी सफेद फैली हुई चाँदनी है। क्या तुम तारों से शोभित सफेद वस्त्र मुझे दोगे? हे चन्दामामा! तुम कहाँ से आते हो? हे प्रिय मामा जी ! तुम शीघ्र आओ, तुम मुझे गीत सुनाओ, तुम मेरी प्रीति बढ़ाओ। हे चन्दामामा! तुम क्या नहीं आओगे? हे चन्दामामा! तुम कहाँ से आते हो? ‘सम्बोधन’ सिखाने के लिए यह कविता सहायक है। मातुलचन्द्र सम्बोधन पद है।

मातुलचन्द्र Word Meanings Translation in Hindi

(क) कुत आगच्छसि मातुलचन्द्र?
कुत्र गमिष्यसि मातुलचन्द्र? अतिशयविस्तृतनीलाकाश:
नैव दृश्यते क्वचिदवकाशः कथं प्रयास्यसि मातुलचन्द्र?
कुत्र आगच्छसि मातुलचन्द्र?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
कुतः-कहाँ से (from where), आगच्छसि-आते हो (comes), मातुलचन्द्र!-हे चंदामामा! (Uncle Moon), कुत्र-कहाँ (where), गमिष्यसि-जाओगे (will go), अतिशयविस्तृतः-बहुत ज़्यादा फैला हुआ (spread out so far and wide), क्वचित्-कहीं भी (anywhere), प्रयास्यसि-जाओगे (will go), कथम्-किस प्रकार (how)।

अन्वय (prose-order):
मातुलचन्द्र! कुतः आगच्छसि? मातुलचन्द्र! कुत्र गमिष्यसि? नीलाकाशः अतिशयविस्तृत (अस्ति); क्वचिद् अवकाशः नैव (न+ एव) दृश्यते (हे) मातुलचन्द्र! (त्वं) कथं प्रयास्यसि? (हे) मातुलचन्द्र! (त्वम) कुतः आगच्छसि? सरलार्थ : हे चंदा मामा! तुम कहाँ से आते हो? कहाँ जाओगे? नीला आकाश बहुत दूर-दूर तक फैला हुआ है, कहीं खाली जगह (अवकाश:) नहीं दिखाई देता। चंदा मामा! तुम कैसे जाओगे? हे चंदा मामा तुम कहाँ से आते हो?

English Translation:
0 Uncle Moon! where do you come from, where will you go to? The blue sky is spread far and wide. O Uncle Moon! how will you go (travel) no open space is visible. O Uncle Moon, where do you come from?

(ख) कथमायासि न भो! मम गेहम्
मातुल! किरसि कथं न स्नेहम्
कदाऽऽगमिष्यसि मातुलचन्द्र?
कुत आगच्छसि मातुलचन्द्र?

शब्दार्थाः (Word Meanings):
कथमायासि (कथम् + आयासि)-कैसे/क्यों आते हो? (how do you come?), भो-संबोधन सूचक अव्यय (a symbol for addresing with respect), गेहम्-घर (home), किरसि-बिखेरते हो (scatter/shower), स्नेहम्-स्नेह (affection), कदा आगामिष्यसि (कदाऽऽगमिष्यसि)-कब आओगे (when will you come)।

अन्वय (prose-order):
भोः कथम् मम गेहं न आयासि? मातुलः कथम् स्नेहं न किरसि? मातुलचन्द्र! (त्वं) कदा आगमिष्यसि?, मातुलचन्द्र! (त्वं) कुतः आगच्छसि? सरलार्थ आप मेरे घर क्यों नहीं आते हो? मामा! तुम स्नेह क्यों नहीं बरसाते हो? चंदा मामा! तुम कब आओगे? चंदा मामा! तुम कहाँ से आते हो?

English Translation:
Why don’t you come to my house; O Uncle, why don’t you shower affection (onme). O Uncle Moon, when will you come? (I wonder)OUncle Moon, where you comefrom?

(ग) धवलं तव चन्द्रिकावितानम्
तारकखचितं सितपरिधानम्
मां दास्यसि मातुलचन्द्र?
कुत आगच्छसि मातुलचन्द्र?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
धवलं-सफ़ेद (white), चन्द्रिकावितानम्-चाँदनी का फैलाव (extension of moonlight), तारकखचितम्-तारों से भरा (full of stars), सितपरिधानम्-सफ़ेद चादर/पहनावा (white robe), मह्यम्-मुझे/ मेरे लिए (me/for me)।

अन्वय (prose-order):
मातुलचन्द्र! तव चन्द्रिकावितानम् धवलम् (अस्ति); (किं त्वं) तारकखचितं सितपरिधानम् मह्यम् दास्यसि? मातुलचन्द्र! कुतः आगच्छसि? सरलार्थ तुम्हारी फैली हुई चाँदनी सफ़ेद है। तुम्हारा सफ़ेद वस्त्र/चादर तारों से भरा है। हे चंदा मामा, क्या तुम (यह वस्त्र) मुझे दोगे? हे. चंदा मामा, तुम कहाँ से आते हो?

English Translation:
Your extension/pervasion of moonlight is white. Your white robe is studded with stars. O Uncle Moon! will you give (it) to me? Uncle Moon! where do you come from?

(घ) त्वरितमेहि मां श्रावय गीतिम्
प्रिय मातुल! वर्धय मे प्रीतिम्
किन्नायास्यसि मातुलचन्द्र?
कुत आगच्छसि मातुलचन्द्र?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
त्वरितम्-जल्दी (quickly/fast), एहि-आओ (come), श्रावय-सुनाओ (make me listen), गीतिम्-गीत (song), वर्धय-बढ़ाओ (increcaselenhance), प्रीतिम्-प्यार (love/affection), किन्नायास्यसि (किम्+न+आयास्यसि)-क्या नहीं आओगे (will you not come)।

अन्वय (prose-order): प्रिय मातुल! (त्वम्) त्वरितम् एहि; माम् गीतिम् श्रावय; (त्वम्) में प्रीति वर्धय; मातुलचन्द्र! किं (त्वं) न आयास्यसि? मातुचन्द्र! कुतः आगच्छसि? सरलार्थ प्यारे मामा! जल्दी आओ, मुझे गीत सुनाओ, मेरा प्यार बढ़ाओ, चंदा मामा क्या तुम नहीं आओगे? चंदा मामा तुम कहाँ से आते हो?

English Translation:
Come quickly, sing a song for me, dear uncle, enhance my love (ie give me more love). O Uncle Moon, won’t you come? (I wonder) Uncle Moon! where do you come from?

अवधेयम्
(क) अकारान्त शब्दों में संबोधन एकवचन के रूप में विसर्ग नहीं लगता।
यथा- चन्द्र अथवा मातुल शब्द संबोधन में – ‘हे मातुल’ अथवा ‘हे मातुल चन्द्र’ होता है। अर्थात् उसमें विसर्ग नहीं लगता। इसी प्रकार–’बालक’ ‘मित्र’, ‘नर’, ‘छात्र’ आदि शब्द भी संबोधन
एकवचन में – हे मित्र! हे नर! हे छात्र! आदि होते हैं।

(ख) आकारांत, इकारांत, ईकारान्त, उकारांत शब्दों में भी संबोधन रूप ध्यातव्य है। यथा
मातुलचन्द्र Summary Notes Class 6 Sanskrit Chapter 15

 

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति

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NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति

Class 7 Sanskrit Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति Textbook Questions and Answers

प्रश्न: 1.
उच्चारणं कुरुत। (उच्चारण कीजिए। Pronounce these.)

फुल्लोत्पलम् – हृदम्
कम्बुग्रीवः – उड्डीयते
उक्तवान् – पक्त्वा
भवद्भ्याम् – भक्षयिष्यामि
अवलम्ब्य – सुहृदाम्
आवाभ्याम् – भ्रष्टः
उत्तराणि:
छात्र ध्यानपूर्वक उच्चारण करें।

प्रश्न: 2.
एकपदेन उत्तरत- (एक शब्द में उत्तर दीजिए- Answer in one word.)

(क) कूर्मस्य किं नाम आसीत् ?
उत्तराणि:
कम्बुग्रीवः

(ख) सरस्तीरे के आगच्छन्?
उत्तराणि:
धीवराः

(ग) कूर्मः केन मार्गेण अन्यत्र गन्तुम् इच्छति?
उत्तराणि:
आकाशमार्गेण

(घ) लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा के अधावन् ?
उत्तराणि:
पौराः।

प्रश्न: 3.
अधोलिखितवाक्यानि कः कं प्रति कथयति इति लिखत- (निम्नलिखित वाक्यों को किसने किसको कहा है, लिखिए- Write who said the following sentences to whom.)

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति 1
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति 2
उत्तराणि:
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति 3

प्रश्न: 4.
मञ्जूषातः क्रियापदं चित्वा वाक्यानि पूरयत- (मञ्जूषा से क्रियावाचक शब्दों को चुनकर वाक्यों की afd ailfote- Fill in the blanks of the sentences by suitable verbs from the box.)

अभिनन्दति, भक्षयिष्यामः, इच्छामि, वदिष्यामि, उड्डीयते, प्रतिवसति स्म

(क) हंसाभ्यां सह कूर्मोऽपि ……..
उत्तराणि:
हंसाभ्यां सह कूर्मोऽपि उड्डीयते।

(ख) अहं किञ्चिदपि न …….
उत्तराणि:
अहं किञ्चिदपि न वदिष्यामि।

(ग) यः हितकामानां सुहृदां वाक्यं न …..
उत्तराणि:
यः हितकामानां सुहृदां वाक्यं न अभिनन्दति ।

(घ) एकः कूर्मः अपि तत्रैव …………
उत्तराणि:
एक: कूर्मः अपि तत्रैव प्रतिवसति स्म।

(ङ) अहम् आकाशमार्गेण अन्यत्र गन्तुम् …………….
उत्तराणि:
अहम् आकाशमार्गेण अन्यत्र गन्तुम् इच्छामि ।

(च) वयं गृहं नीत्वा कूर्मं ………..
उत्तराणि:
वयं गृहं नीत्वा कूर्मं भक्षयिष्यामः।

प्रश्नः 5.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (एक वाक्य में उत्तर दीजिए- Answer in one sentence.)

(क) कच्छपः कुत्र गन्तुम् इच्छति?
उत्तराणि:
कच्छपः आकाशमार्गेण अन्यत्र गन्तुम् इच्छति।

(ख) कच्छपः कम् उपायं वदति ?
उत्तराणि:
कच्छपः उपायं वदति-“युवां काष्ठदण्डम् चञ्च्वा धारयतम्, अहं काष्ठदण्डमध्ये अवलम्ब्य युवयोः पक्षबलेन सुखेन गमिष्यामि।”

(ग) लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा पौराः किम् अवदन् ?
उत्तराणि:
लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा पौराः अवदन्- “हंहो! महदाश्चर्यं हंसाभ्याम् सह कूर्मोऽपि उड्डीयते।”

(घ) कूर्मः मित्रयोः वचनं विस्मृत्य किम् अवदत् ?
उत्तराणि:
कूर्मः मित्रयोः वचनं विस्मृत्य अवदत्-“यूयं भस्मं खादत।”

प्रश्नः 6.
घटनाक्रमानुसारं वाक्यानि लिखत- (घटनाक्रम के अनुसार वाक्यों को पुनः लिखिए- Rewrite the sentences in order as they took place.)

(क) कूर्मः हंसयोः सहायतया आकाशमार्गेण अगच्छत् ।
उत्तराणि:
कूर्मः हंसौ च एकस्मिन् सरसि निवसन्ति स्म।

(ख) पौरा: अकथयन्–वयं पतितं कूर्मं खादिष्यामः ।
उत्तराणि:
केचित् धीवराः सरस्तीरे आगच्छन्।

(ग) कूर्मः हंसौ च एकस्मिन् सरसि निवसन्ति स्म।
उत्तराणि:
‘वयं श्वः मत्स्यकूर्मादीन् मारिष्यामः’ इति धीवराः अकथयन् ।

(घ) केचित् धीवराः सरस्तीरे आगच्छन्।
उत्तराणि:
कूर्मः अन्यत्र गन्तुम् इच्छति स्म।

(ङ) कूर्मः अन्यत्र गन्तुम् इच्छति स्म।
उत्तराणि:
कूर्मः हंसयोः सहायतया आकाशमार्गेण अगच्छत् ।

(च) लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा पौराः अधावन्।
उत्तराणि:
लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा पौराः अधावन्।

(छ) कूर्मः आकाशात् पतितः पौरैः मारितश्च ।
उत्तराणि:
पौराः अकथयन्–वयं पतितं कूर्म खादिष्यामः ।

(ज) ‘वयं श्वः मत्स्यकूर्मादीन् मारिष्यामः’ इति धीवराः अकथयन्।
उत्तराणि:
कूर्मः आकाशात् पतितः पौरैः मारितश्च ।

प्रश्न: 7.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (मञ्जूषा से शब्दों को चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए- Fill in the blanks by choosing suitable words from the box.)

जलाशयम्, अचिन्तयत्, वृद्धः, दुःखिताः, कोटरे, वृक्षस्य, सर्पः, आदाय, समीपे ।

एकस्य वृक्षस्य शाखासु अनेके काका: वसन्ति स्म । तस्य वृक्षस्य 1. ……….. एकः सर्पः अपि अवसत् । काकानाम् अनुपस्थितौ 2. ………… काकानां शिशून् खादति स्म। काका: 3. ………… आसन्। तेषु एक: 4. …………. काकः उपायम् 5. …………. । वृक्षस्य 6. ………… जलाशयः आसीत्। तत्र एका राजकुमारी स्नातुं 7. ………….. आगच्छति । शिलायां स्थितं तस्याः आभरणम् 8. …………. एक: काकः वृक्षस्य उपरि अस्थापयत्। राजसेवकाः काकम् अनुसृत्य 9. ………….. समीपम् अगच्छन् । तत्र ते तं सर्प च अमारयन् । अतः एवोक्तम्-उपायेन सर्वं सिद्धयति।
उत्तराणि:
1. कोटरे
2. सर्पः
3. दुःखिताः
4. वृद्धः
5. अचिन्तयत्
6. समीपे
7. जलाशयम्
8. आदाय
9. वृक्षस्य।

Class 7 Sanskrit Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति Additional Important Questions and Answers

(1) गद्यांशं पठित्वा अधोदत्तान् प्रश्नान् उत्तरत- (गद्यांश पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए- Read the extract and answer the questions that follow.)

अथ एकदा धीवराः तत्र आगच्छन्। ते अकथयन्- “वयं श्वः मत्स्यकूर्मादीन् मारयिष्यामः।” एतत् श्रुत्वा कूर्मः अवदत्-“मित्रे! किं युवाभ्याम् धीवराणां वार्ता श्रुता? अधुना किम् अहं करोमि?” हंसौ अवदताम्-“प्रातः यद् उचितं तत्कर्त्तव्यम्।” कूर्मः अवदत्-“मैवम्। तद् यथाऽहम् अन्यं ह्रदं गच्छामि तथा कुरुतम्।” हंसौ अवदताम्-“आवां किं करवाव?” कूर्मः
अवदत्-“अहं युवाभ्यां सह आकाशमार्गेण अन्यत्र गन्तुम् इच्छामि।”

I. एकपदेन उत्तरत

(i) तत्र के आगच्छन्?
उत्तराणि:
धीवराः

(ii) कूर्मः केन मार्गेण गन्तुम् इच्छति स्म?
उत्तराणि:
आकाशमार्गेण

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत

(i) धीवराः किम् अकथयन्?
उत्तराणि:
धीवराः अकथयन्–’वयं श्वः मत्स्यकूर्मादीन् मारयिष्यामः।’

(ii) कूर्मः हंसौ किम् अवदत्?
उत्तराणि:
कूर्मः हंसौ अवदत्-‘यथा अहम् अन्यं ह्रदं गच्छामि तथा कुरुतम्।’ अथवा-‘अहं युवाभ्यां सह आकाशमार्गेण अन्यत्र गन्तुम् इच्छामि’

III. भाषिककार्यम्
यथानिर्देशम् रिक्तस्थानानि पूरयत –

(i) ………………. अवदताम् ………………..
उत्तराणि:
अवदत्, अवदन्

(ii) गन्तुम् = ……………….. धातुः ………………..प्रत्ययः
उत्तराणि:
गम्, तुमुन्

(iii) पर्यायम् लिखत- कच्छपः = ………………..
उत्तराणि:
कूर्मः

(iv) ‘अहं युवाभ्याम् सह अन्यत्र गन्तुम् इच्छामि’-अत्र वाक्ये द्वे अव्ययपदे के?

(i)………………..
(ii) ………………..
उत्तराणि:
(i) सह
(ii) अन्यत्र

(2) मञ्जूषायाः उचितं क्रियापदं चित्वा कथायां रिक्तस्थानानि पूरयत- (मञ्जूषा से उचित क्रियापद चुनकर कथा में रिक्तस्थान भरिए- Pick out the appropriate verb from the box and fill in the blanks in the story.) विस्मरति मारयिष्यामः, वदिष्यन्ति, गमिष्यामि, निवसतः, वसति, इच्छति, वदिष्यामि, भवति, पतति

एकस्मिन् सरोवरे द्वौ हंसौ . । तयोः मित्रम् एकः कूर्मः अपि तत्र । एकदा धीवराः तत्र आगच्छन् अकथयन् च-‘वयं श्वः मत्स्यकूर्मादीन् । एतत् श्रुत्वा कूर्मः भयभीतः ” । सः अन्यं हृदं गन्तुम् .. । सः हंसौ उपायं वदति–’युवां चञ्च्वा काष्ठदण्डं धारयतम् अहं दण्डमध्ये अवलम्ब्य युवाभ्याम् सह आकाशमार्गेण ।’ हंसौ वदतः-‘जनाः त्वाम् आकाशे दृष्ट्वा विस्मिताः भविष्यन्ति किञ्चित् एव यदि त्वम् उत्तरं दास्यसि तर्हि भूमौ पतिष्यसि मरिष्यसि च।’ कूर्मः प्रतिज्ञां करोति–’अहं किञ्चिद् अपि न ………. ।’ परं सः हंसाभ्याम् दत्तं वचनं ……दण्डात् …” मृत्यु च गच्छति।
उत्तराणि:
निवसतः, वसति, मारिष्यामः भवति, इच्छति, गमिष्यामि, वदिष्यन्ति, वदिष्यामि, विस्मरति, पतति।

(3) कः कम् प्रति कथयति। (कौन किसे कहता है- Who says to whom.)

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति 4
उत्तराणि:
(i) कूर्मः, हंसौ
(ii) हंसौ, कूर्मम्
(iii) कूर्मः, हंसौ
(iv) कूर्मः, पौरान्।

(1) उचितविकल्पं चित्वा एकपदेन उत्तरत- (उचित विकल्प चुनकर एकपद में उत्तर दीजिए – Pick out the correct option and answer in one word.)

(i) केषां वचनं श्रुत्वा कूर्मः क्रुद्धः अभवत्? (हंसानाम्, धीवराणां, पौराणाम्)
उत्तराणि:
पौराणाम्

(ii) कूर्मः कम् अवलम्ब्य आकाशमार्गेण गच्छति? (ह्रदम्, काष्ठदण्डम्, उपायम्)
उत्तराणि:
काष्ठदण्डम्

(iii) के पतितं कूर्मं मारयन्ति? (धीवराः, हंसाः, पौराः)
उत्तराणि:
पौराः

(iv) कूर्मः हंसौ किम् वदति? (उत्तरम्, उपायम्, अपायम्)
उत्तराणि:
उपायम्

(v) कूर्मः कीदृशः आसीत्? (सुबुद्धि, चतुरः, दुर्बुद्धिः)
उत्तराणि:
दुर्बुद्धिः।

(2) (क) उचितेन विकल्पेन प्रत्येक प्रश्नम् उत्तरत रिक्तस्थानानि च पूरयत- (उचित विकल्प से चुनकर उत्तर दीजिए और रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए- Fill in the blanks with suitable answer from the options given.)

‘मित्राभ्याम् दत्तं वचनं विस्मृत्य सः अवदत्’-अस्मिन् वाक्ये

(i) ‘मित्राभ्याम्’ इति पदे का विभक्तिः? ” ……………… (तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी)
उत्तराणि:
चतुर्थी [ दत्तम्’ (दा धातु) योगे]

(ii) ‘अवदत्’ इति क्रियापदस्य कः कर्ता? – (मित्राभ्याम्, वचनम्, सः)
उत्तराणि:
सः

(iii) ‘विस्मृत्य’ इति पदे कः प्रत्ययः? (क्त्वा, तुमुन्, ल्यप्)
उत्तराणि:
ल्यप्

(iv) ‘अवदत्’ -अत्र कः लकार:? (लट्, लृङ् लृट्)
उत्तराणि:
लृङ्

(ख)
(i) कथमपि = …………… + ………………. (कथ + मपि, कथम् + अपि, कथम + अपि)
उत्तराणि:
कथम् + अपि

(ii) तत्रैव = …………… + ………………. (तत्र् + ऐव, तत्र + ऐव, तत्र + एव)
उत्तराणि:
तत्र + एव

(iii) पक्त्वा = …………… + ……………….(पच् + क्त्वा, पक् + क्त्वा, प + क्त्वा)
उत्तराणि:
पच् + क्त्वा

(iv) नाभिनेन्दति = …………… + ………………. (ना + अभिनन्दति, नाभि + नन्दति, न + अभिनन्दति)
उत्तराणि:
न + अभिनन्दति।

अहह आः च Summary Notes Class 6 Sanskrit Chapter 14

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Class 6 Sanskrit Chapter 14 अहह आः च Summary Notes

अहह आः च पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ एक कथा है। इसमें यह बताया गया है कि एक सरल स्वभाव वाला परिश्रमी कर्मचारी एक वृद्धा के द्वारा दिए हुए विचित्र उपाय से अपने चतुर मालिक की अद्भुत शर्त पूरी कर उससे अवकाश और वेतन का पूरा पैसा पाने में सफल हो जाता है। इस कथा द्वारा यह शिक्षा दी गई है कि परिश्रम और लगन से कठिन कार्य ही नहीं अपितु असंभव को भी संभव किया जा सकता है।

अहह आः च Summary

अहह आः च Summary Notes Class 6 Sanskrit Chapter 14

अजीज सरल स्वभाव वाला था। वह स्वामी की सेवा में लीन रहता था। एक दिन अजीज ने स्वामी से अवकाश माँगा। स्वामी ने उसे दो वस्तु ‘अरे, ओह’ लाने के लिए कहा। अजीज उन वस्तुओं की खोज में घर-घर भटकने लगा। एक बुढ़िया ने उसे दो अमूल्य वस्तुएँ दे दी। उन्हें लेकर वह स्वामी के पास आया। स्वामी ने एक पात्र को खोला। एक मधुमक्खी ने पात्र से निकल स्वामी को काट खाया। अचानक स्वामी के मुख से निकला-अरे। दूसरे पात्र को खोलने पर भी एक मक्खी ने स्वामी को काट लिया। पुनः स्वामी के मुख से निकला-ओह! अजीज परीक्षा में उत्तीर्ण हो चुका था। स्वामी ने उसे पूरे वेतन सहित अवकाश प्रदान कर दिया।

अहह आः च Word Meanings Translation in Hindi

(क) अजीज: सरलः परिश्रमी च आसीत्। सः स्वामिनः एव सेवायां लीनः आसीत्। एकदा सः गृहं गंतुम् अवकाशं वाञ्छति। स्वामी चतुरः आसीत्। सः चिंतयति- ‘अजीजः इव न कोऽपि अन्यः कार्यकुशलः। एष अवकाशस्य अपि वेतनं ग्रहीष्यति।’ एवं चिंतयित्वा स्वामी कथयति-‘अहं तुभ्यम् अवकाशस्य वेतनस्य च सर्वं धनं दास्यामि।’ परम् एतदर्थं त्वं वस्तुद्वयम् आनय-“अहह! आ:!” च इति।

शब्दार्थाः (Word Meanings):
स्वामिनः-स्वामी की (of master), सेवायां लीन:-सेवा में लीन (engaged in service), वाञ्छति-चाहता/चाहती है (wants), चिंतयति-सोचता/ सोचती है (thinks), ग्रहीष्यति-लेगा/लेगी (will take), दास्यामि-दूंगा/दूंगी (shall give), आनय-लाओं (bring), एतदर्थम्-इसके लिए (for this), अहह-कष्टसूचक अव्यय (Oh!), आ:-पीड़ासूचक (अव्यय) (ah!)।

सरलार्थ :
अजीज सरल स्वभाव वाला और मेहनती था। वह स्वामी की सेवा में ही लगा रहता था। एक बार वह घर जाने के लिए छुट्टी चाहता था। स्वामी (मालिक) चालाक था। वह सोचता है-‘अजीज जैसा कोई भी दूसरा कार्य कुशल नहीं है। यह छुट्टी का भी वेतन लेगा।’ यह सोचकर मालिक कहता है-“मैं तुम्हें छुट्टी और वेतन का सारा पैसा दूंगा।” परंतु तुम इसके लिए दो वस्तुएँ लाओ-‘अहह!’ और ‘आ:’ बस यह।

English Translation:
Ajeeja was a simpleton and hardworking. He was engaged in the service of his master. Once he wanted leave for going home. The master was clever. He thinks There is no skilful/expert person like Ajeeja.’ He will take wages for (the period of) leave also. Thinking this the master says—“I shall give you the (total) entire amount for your leave as also your wages.” But for this you bring two things—’Oh!’ and ‘Ah!’—that is it.

(ख) एतत् श्रुत्वा अजीजः वस्तुद्वयम् आनेतुं निर्गच्छति। सः इतस्ततः परिभ्रमति। जनान् पृच्छति। आकाशं पश्यति। धरां प्रार्थयति। परं सफलतां नैव प्राप्नोति। चिंतयति, परिश्रमस्य धनं सः नैव प्राप्स्यति। कुत्रचित् एका वृद्धा मिलति। सः तां सर्वां व्यथां श्रावयति। सा विचारयति-स्वामी अजीजाय धनं दातुं न इच्छति। सा तं कथयति-‘अहं तुभ्यं वस्तुद्वयम् ददामि।’ परं द्वयम् एव बहुमूल्यकं वर्तते। प्रसन्नः सः स्वामिनः समीपे आगच्छति।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
आनेतुम्-लाने के लिए (to bring), निर्गच्छति-निकलता है (exits/ comes out), इतस्तत: (इत: + ततः)-इधर-उधर- (here and there), पृच्छति-पूछता है (asks), धराम्-पृथ्वी को (the earth), प्राप्स्यति-पाएगा (will get), नैव (न+ एव)-नहीं (not/never), श्रावयति-सुनाता है (tells/relates), वस्तुद्वयम्-दो वस्तुएँ (two things), ददामि-देता/देती हूँ (shall give)।

सरलार्थ :
यह सुनकर अजीज दोनों वस्तुएँ लाने के लिए निकलता है। वह इधर-उधर घूमता है। लोगों से पूछता है। आकाश को देखता है। पृथ्वी से प्रार्थना करता है। किंतु सफलता प्राप्त नहीं करता। सोचता है, परिश्रम का धन वह नहीं पा सकेगा। कहीं पर एक बुढ़िया मिलती है। वह उसे सारी व्यथा सुनाता है। वह सोचती है-“स्वामी अजीज को धन नहीं देना चाहता।” वह उसे कहती है-“मैं तुम्हें दो वस्तुएँ देती हूँ। किंतु दोनों ही कीमती (बहुमूल्य) हैं।” प्रसन्न (होकर) वह मालिक के पास आता है।

English Translation:
Having heard this Ajeeja goes out to bring two things. He roams around here and there. He asks people. He looks at the sky. He requests the earth. But he does not get success. He thinks—’He shall never get the wages (money) of his labour.’ Somewhere he meets an old woman. He tells her his pain and agony. She thinks—“The master does not wish to pay money to Ajeeja’. She says to him-‘I am giving you two things. But both are precious (costly). Happily (at this) he comes back to his master.’

(ग) अजीजं दृष्ट्वा स्वामी चकितः भवति। स्वामी शनैः शनैः पेटिकाम् उद्घाटयति। पेटिकायां लघुपात्रद्वयम् आसीत्। प्रथमं सः एकं लघुपात्रम् उद्घाटयति। सहसा एका मधुमक्षिका निर्गच्छति। तस्य च हस्तं दशति। स्वामी उच्चै वदति-“अहह!” द्वितीयं लघुपात्रम् उद्घाटयति।
एका अन्या मक्षिका निर्गच्छति। सः ललाटे दशति। पीडितः सः अत्युच्चैः चीत्करोति-“आः” इति। अजीजः सफलः आसीत्। स्वामी तस्मै अवकाशस्य वेतनस्य च पूर्णं धनं ददाति।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
पेटिकाम्-पेटी को (box), लघुपात्रद्वयम्-दो छोटे पात्र (two small utensils), उद्घाटयति-खोलता है (opens), मधुमक्षिका-मधुमक्खी (honey bee), सहसा-अचानक (all of a sudden), दशति-डसती है (bites), हस्तम्-हाथ को (hand), ललाटे-मस्तक पर (on forehead), उच्चैः -जोर से (loudly), चीत्करोति-चिल्लाता है (cries out)।

सरलार्थ :
अजीज को देखकर स्वामी चकित होता है। स्वामी धीरे-धीरे पेटी खोलता है। पेटी में दो छोटे पात्र (बरतन) थे। पहले वह एक छोटा पात्र खोलता है। सहसा एक मधुमक्खी निकलती है और उसके हाथ को डसती है। मालिक ज़ोर से बोल उठता है-अहह (अरे!)। दूसरा छोटा पात्र खोलता है। एक दूसरी मक्खी निकलती है। वह मस्तक पर डसती है। व्यथित (होकर) वह बहुत ज़ोर से चिल्लाता है-‘आः’ ऐसा। अजीज सफल हुआ। स्वामी उसे (उसके लिए) अवकाश और वेतन के पूरे पैसे देता है।

English Translation:
Having seen Ajeeja Master gets surprised. Master opens the box slowly. There were two small pots in the box. First he opens one small pot. Suddenly a honey bee comes out of it and bites on his arm. He loudly says, “AHH!” Now he opens the other small pot. Another bee comes out. She bites on his forehead. Afflicted with pain he cries loudly, “AAH!” Ajeej became successful. Master gave him total amount for his leave and wages.

Class 8 Sanskrit Grammar Book Solutions समयलेखनम्

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Sanskrit Vyakaran Class 8 Solutions समयलेखनम्

‘भवतः घटिकायां कः समयः?’ अथवा ‘भवतः घटिकायां किं वादनम्?’ ऐसे प्रश्नों का उत्तर हम हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा में आसानी से दे पाते हैं। यदि हमें उत्तर संस्कृत में देना हो तो हमें कठिनाई महसूस होती है। इसके लिए संस्कृत भाषा में भी समय का ज्ञान होना आवश्यक है। चित्रों की सहायता से समय की जानकारी नीचे दी जा रही है।

समय
समय को चार भागों में बाँटा गया है-

  1. सामान्यः (पूर्ण)
  2. सपाद (सवा)
  3. सार्ध (साढे)
  4. पादोन (पौने)

1. सामान्यः (पूर्ण) – (एक बजे से लेकर बारह बजे तक)
Class 8 Sanskrit Grammar Book Solutions समयलेखनम् 1
5 : 00 – पंचवादनम् (पाँच बजे)
6 : 00 – षड्वादनम् (छह बजे)
7 : 00 – सप्तवादनम् (सात बजे)
8 : 00 – अष्टवादनम् (आठ बजे)
9 : 00 – नववादनम् (नौ बजे)
10 : 00 – दशवादनम् (दस बजे)
11 : 00 – एकादशवादनम् (ग्यारह बजे)
12 : 00 – द्वादशवादनम् (बारह बजे)

2. सपाद (सवा) – पूर्ण संख्या से पंद्रह मिनट अधिक के लिए ‘सपाद’ का प्रयोग होता है।
Class 8 Sanskrit Grammar Book Solutions समयलेखनम् 2
इसी प्रकार सपादचतुर्वादनम् (सवा चार बजे), सपादद्विवादनम् (सवा दो बजे), सपादत्रिवादनम् (सवा तीन बजे) आदि होंगे।

3. सार्ध (साढ़े) – (पूर्णसंख्या से तीस मिनट अधिक)
Class 8 Sanskrit Grammar Book Solutions समयलेखनम् 3
इसी प्रकार सार्ध-द्विवादनम् (अढ़ाई बजे), सार्ध-नववादनम् (साढ़े नौ बजे), सार्ध-एकादशवादनम् (साढ़े ग्यारह बजे) आदि होंगे।

4. पादोन (पौने) – (पूर्णसंख्या से 15 मिनट कम)
Class 8 Sanskrit Grammar Book Solutions समयलेखनम् 4
इसी प्रकार पादोनैकवादनम् / पादोन-एकवादनम् (पौने एक बजे), पादोन-नववादनं (पौने नौ बजे) आदि होंगे।

विशेष-

  1. यदि समय-संख्या वाक्य के बिना दी गई है तो उसके साथ केवल ‘वादनम्’ का प्रयोग होगा। जैसे- 5 : 00 – पंचवादनम्।
  2. यदि समय-संख्या का प्रयोग वाक्य में किया जा रहा है तो उसमें ‘वादनम्’ के स्थान पर ‘वादने’ हो जाएगा। जैसे- मम पिता अष्टवादने कार्यालयम् गच्छति।

बहुविकल्पीयप्रश्नाः

शुद्धं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-

प्रश्न 1.
महेशः प्रातः ___________ (4 : 45) उत्तिष्ठति।
(क) पादोन-पंचवादने
(ख) सार्ध-पंचवादने
(ग) सपाद पंचवादने
(घ) पादोन-चतुर्वादने
उत्तराणि:
(क) पादोन-पंचवादने

प्रश्न 2.
मम पिता ___________ (8 : 00) कार्यालयं गच्छति।
(क) सपाद अष्टवादने
(ख) सार्ध-अष्टवादने
(ग) अष्टवादने
(घ) पादोन-अष्टवादने
उत्तराणि:
(ग) अष्टवादने

प्रश्न 3.
अहं प्रातः ___________ (7 : 15) विद्यालयं गच्छामि।
(क) सार्ध-सप्तवादने
(ख) सप्तवादने
(ग) पादोन-सप्तवादने
(घ) सपाद सप्तवादने
उत्तराणि:
(घ) सपाद सप्तवादने

प्रश्न 4.
अनिलः सायं ___________ (5 : 30) उद्याने क्रीडति।
(क) सपाद पंचवादने
(ख) सार्ध-पंचवादने
(ग) पादोन-पंचवादने
(घ) पंचवादने
उत्तराणि:
(ख) सार्ध-पंचवादने

प्रश्न 5.
दामिनी ___________ (2 : 15) विद्यालयात् आगच्छति।
(क) पादोन-द्विवादने
(ख) द्विवादने
(ग) सपाद द्विवादने
(घ) सार्ध-द्विवादने
उत्तराणि:
(ग) सपाद द्विवादने

प्रश्न 6.
मम माता रात्रौ ___________ (8 : 45) भोजनं पचति।
(क) पादोन-नववादने
(ख) सपाद अष्टवादने
(ग) सार्ध-अष्टवादने
(घ) सपाद-नववादने
उत्तराणि:
(क) पादोन-नववादने

प्रश्न 7.
मम जनकः सायं ___________ (7 : 30) दूरदर्शनं पश्यति।
(क) सपाद सप्तवादने
(ख) सप्तवादने
(ग) सार्ध-सप्तवादने
(घ) पादोन-सप्तवादने
उत्तराणि:
(ग) सार्ध-सप्तवादने

प्रश्न 8.
सः ___________ (9 : 45) शयनं करोति।
(क) पादोन-दशवादने
(ख) पादोन-नववादने
(ग) सार्ध-नववादने
(घ) सपाद दशवादने
उत्तराणि:
(क) पादोन-दशवादने

प्रश्न 9.
प्रमोदः ___________ (7 : 00) व्यायामं करोति।
(क) सपाद सप्तवादने
(ख) सप्तवादने
(ग) पादोन-सप्तवादने
(घ) सार्ध-सप्तवादने
उत्तराणि:
(ख) सप्तवादने

प्रश्न 10.
रविः ___________ (3 : 15) गृहकार्यं करोति।
(क) सार्ध-त्रिवादने
(ख) त्रिवादने
(ग) सपाद त्रिवादने
(घ) पादोन-त्रिवादने
उत्तराणि:
(ग) सपाद त्रिवादने

विमानयानं रचयाम Summary Notes Class 6 Sanskrit Chapter 13

By going through these CBSE Class 6 Sanskrit Notes Chapter 13 विमानयानं रचयाम Summary, Notes, word meanings, translation in Hindi, students can recall all the concepts quickly.

Class 6 Sanskrit Chapter 13 विमानयानं रचयाम Summary Notes

विमानयानं रचयाम पाठ का परिचय

इस पाठ में बच्चों के मन की विशाल कल्पना का दिग्दर्शन कराया गया है। साथ ही उनके मन में छिपी हुई सुन्दरता और परोपकार की तरफ भी संकेत किया गया है। बच्चे अपने मन की कल्पना को साकार रूप देने में किस प्रकार संलग्न हो सकते हैं। उसका भी निर्देश दिया गया है।

विमानयानं रचयाम Summary

इस पाठ में चार पद्य हैं। प्रथम श्लोक में कहा गया है कि आओ हम विमान की रचना करें और आकाश में स्वच्छन्द होकर घूमें। द्वितीय श्लोक में कहा गया है कि हम ऊँचे-ऊँचे वृक्षों और भवनों को लाँघकर आकाश में छलाँग लगाएँ। हिमालय पर्वत को भी पार करके चन्द्रमा पर कदम रखें। तृतीय श्लोक में बताया है कि हम सूर्य आदि ग्रहों को गिनकर तथा तारों से एक हार बनाएँ। चतुर्थ श्लोक में कहा है कि हम बादलों की कतार को लेकर लौटें और पृथ्वी पर आकर दीन दुःखियों की सहायता करें। इस कविता में कवि के उदात्त विचार अभिव्यक्त हैं।

विमानयानं रचयाम Word Meanings Translation in Hindi

(क) राघव! माधव! सीते! ललिते!
विमानयानं रचयाम।
नीले गगने विपुले विमले
वायुविहारं करवाम॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
ललिते!-हे ललिता (oh Lalita), विमानयानम्-हवाई जहाज़ को (aeroplane), रचयाम-बनाएँ (should make), गगने-आकाश में (in sky), विपुले-बहुत अधिक (विस्तृत) (expansive), विमले-स्वच्छ (में) (clear), वायुविहारम्-वायु में भ्रमण (flying in the sky), करवाम-करें (should do)।

सरलार्थ :
हे राघव! हे माधव! हे सीता! हे ललिता!
(हम सब) विमान (हवाई जहाज़) बनाएँ।
बहुत विस्तृत स्वच्छ नीले आकाश में
वायु विहार (भ्रमण) करें।।

(ख) उन्नतवृक्षं तुङ्ग भवनं
क्रान्त्वाकाशं खलु याम।
कृत्वा हिमवन्तं सोपानं
चन्दिरलोकं प्रविशाम॥

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
उन्नतवृक्षम्-ऊँचे वृक्ष को (high tree), तुङ्गभवनम्-ऊँचे भवन को (high buildings), क्रान्त्वा -पार करके (crossing over), खलु-निश्चय से (surely), याम-जाएँ (should go), कृत्वा-करके (do), हिमवन्तम्-बर्फ को (की) (snow made), सोपानम्-सीढ़ी को (ladder), चन्दिरलोकम्-चन्द्रलोक में (को) (moonland), प्रविशाम-प्रवेश करें (should enter)।

सरलार्थ :
ऊँचे वृक्ष, ऊँचे मकान को निश्चय से पार करके आकाश में जाएँ। बर्फ की सीढ़ी बना करके चन्द्रलोक में प्रवेश करें।

(ग) शुक्रश्चन्द्रः सूर्यो गुरुरिति
ग्रहान् हि सर्वान् गणयाम।
विविधाः सुन्दरताराश्चित्वा
मौक्तिकहारं रचयाम॥

शब्दार्थाः (Word Meanings):
गुरु:-गुरु (बृहस्पति) (Jupiter), इति-इत्यादि (आदि) (et cetera), ग्रहान्-ग्रहों को (planets), गणयाम-गिर्ने (should count), विविधाः-अनेक (many), सुन्दरतारा:-सुन्दर तारों को (lovely stars), चित्वा-चुनकर (by picking up), मौक्तिकहारम्-मोतियों के हार को (pearl neckless), रचयाम-बनाएँ (should make)। सरलार्थ : (हम) शुक्र, चन्द्र, सूर्य और गुरु आदि सभी ग्रहों को निश्चय से गिने। अनेक सुन्दर तारे चुनकर मोतियों के हार बनाएँ।

(घ) अम्बुदमालाम् अम्बरभूषाम्
आदायैव हि प्रतियाम।
दुःखित-पीडित-कृषिकजनानां
गृहेषु हर्षे जनयाम॥

शब्दार्थाः (Word Meanings):
अम्बुदमालाम्-बादलों की पंक्तियों को (cloud-garland), अम्बरभूषाम्-आकाश की शोभा को (beauty of sky), आदाय-लेकर (taking), हि-निश्चय से (surely), प्रतियाम-वापस लौटें (should return), दुःखित-दुखी (दुख से युक्त) (sad), पीड़ित-पीड़ा से युक्त (victim), कृषिकजनानाम्-किसानों के (farmers’), गृहेषु-घरों में (in houses), हर्षम्-प्रसन्नता को (in happiness), जनयाम-उत्पन्न करें (should create)।

सरलार्थ :
(हम) निश्चय से बादलों की माला (पंक्तियों) को और आकाश की शोभा को लेकर ही वापस लौटें और दुख पीड़ा से युक्त किसानों के घरों में खुशी उत्पन्न करें।