NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 6

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 6 कीचड़ का काव्य

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

मोखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उन एक दो पंक्तियों में दीजिए-

प्रश्न 1.
रा की शोभा ने क्या कर दिया?
उत्तर:
लाल रंग (लालिमा) ने उत्तर दिशा में कुछ देर के लिए फैलकर उस दिशा की सुंदरता में वृद्धि कर दिया था।

प्रश्न 2.
बादले किसकी तरह हो गए थे?
उत्तर:
बादल सफेद पूनी अर्थात् सफेद कपास की तरह हो गए।

प्रश्न 3.
लोग किन-किन चीजों का वर्णन करते हैं?
उत्तर:
लोग आकाश, पृथ्वी और जलाशयों का सौंदर्य देखते हैं और उन्हीं का वर्णन करते हैं।

प्रश्न 4.
कीचड़ से क्या होता है?
उत्तर:
कीचड़ से, तन तथा कपड़े मैले होते हैं।

प्रश्न 5.
कीचड़ जैसा रंग कौन लोग पसंद करते हैं?
उत्तर:
कीचड़ जैसा रंग कला-प्रेमी और फोटोग्राफर पसंद करते हैं। इसके अलावा कुछ लोग पुस्तक के गत्तों, दीवारों और वस्त्रों का रंग कीचड़ जैसा पसंद करते हैं।

प्रश्न 6.
नदी के किनारे कीचड़ कब सुंदर दिखता है?
उत्तर:
नदी के किनारे का कीचड़ तब बहुत सुंदर प्रतीत होता है, जब वह सूखकर ठोस हो जाता है तथा उसमें दरारें पड़ जाती हैं।

प्रश्न 7.
कीचड़ कहाँ सुंदर लगता है?
उत्तर:
गंगा या सिंधु के किनारों के अलावा, खंभात की खाड़ी तथा मही नदी के मुहाने पर दूर-दूर तक फैला कीचड़ सुंदर लगता है।

प्रश्न 8.
‘पंक’ और ‘पंकज’ शब्द में क्या अंतर है?
उत्तर:
‘पंक’ का अर्थ है-कीचड़। पंकज’ का अर्थ है-कमल का फूल। पंक से ही पंकज उत्पन्न होता है। इसलिए उनमें पिता-पुत्र का संबंध है।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
कीचड़ के प्रति किसी को सहानुभूति क्यों नहीं होती?
उत्तर:
कीचड़ के प्रति किसी को सहानुभूति इसलिए नहीं होती क्योंकि वे बाह्य सौंदर्य देखने के आदी हैं। वे कीचड़ को गंदगी का प्रतीक मानते हुए उससे बचकर चलते हैं। वे कीचड़ को शरीर और कपड़े गंदे करने वाला मानते हैं।

प्रश्न 2.
जमीन ठोस होने पर उस पर किनके पदचिह्न अंकित होते हैं?
उत्तर:
ज़मीन ठोस होने पर अनेक पशु उस पर आकर चहलकदमी करते हैं तथा उछल-कूद करते हैं। इन पशुओं में प्रमुख हैं-गायें, भैंसें, बैल, पाडे, भेड़े और बकरियाँ। भैसों के पाड़े तो इस ठोस जमीन पर खूब कुश्ती करते हैं।

प्रश्न 3.
मनुष्य को क्या भान होता जिससे वह कीचड़ का तिरस्कार न करता?
उत्तर:
मनुष्य को यदि यह भान होता है कि जिस भोजन को खाने से उसका पेट भरता है उसका स्रोत अन्न उसी कीचड़ में पैदा होता है, जिसे वह गंदा समझता है, तो वह कभी कीचड़ का तिरस्कार न करता।

प्रश्न 4.
पहाड़ लुप्त कर देने वाले कीचड़े की क्या विशेषता हैं?
उत्तर:
खंभात में माही नदी के सामने जो विशाल और अति गहरा कीचड़ फैला हुआ है, उसमें पूरे का पूरा पहाड़ ही लुप्त हो सकता है। आशय यह है कि यह कीचड़ जमीन के नीचे बहुत गहराई तक है।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
कीचड़ का रंग किन-किन लोगों को खुश करता है?
उत्तर:
कीचड़ का रंग कलाभिज्ञों, चित्रकारों, मूर्तिकारों के अलावा जनसाधारण को भी अच्छा लगता है। कलाभिज्ञ पके हुए मिट्टी के बर्तनों पर यही रंग देखना चाहते हैं। छायाकार फ़ोटो खींचते समय फ़ोटो में एक दो स्थान पर इसका रंग देखना चाहते हैं, इस रंग से वे खुश होते हैं। इसके अलावा जनसाधारण पुस्तकों के गत्तों, अपने घर की दीवारों, अपने कीमती वस्त्रों का रंग कीचड़ जैसा देखना चाहते हैं। इससे वे खुश होते हैं।

प्रश्न 2.
कीचड़ सूखकर किस प्रकार के दृश्य उपस्थित करता है?
उत्तर:
कीचड़ सूखकर टुकड़ों में बँट जाता है। अधिक गरमी के कारण उन टुकड़ों में दरारें पड़ जाती हैं। तब वे नदी के किनारे फैले हुए ऐसे प्रतीत होते हैं मानो दूर-दूर तक खोपरे सूखने के लिए पड़े हों। कीचड़ के अधिक सूखने पर उस पर पशु चलते हैं तथा किल्लौल करते हैं। तब उनके पैरों के निशानों से अद्भुत शोभा अंकित हो जाती है। यों लगता है मानो उन पर अभी-अभी भैंसों के कुल का महाभारत लड़ा गया हो।

प्रश्न 3.
सूखे हुए कीचड़ का सौंदर्य किन स्थानों पर दिखाई देता है?
उत्तर:
सूखे कीचड़ का सौंदर्य हमें तालाबों के किनारे, गंगा और सिंधु जैसी नदियों के विस्तृत किनारों के मीलों-मील फैले क्षेत्रों में दिखाई देता है। इसके अलावा खंभात की खाड़ी और मही नदी के मुँह से आगे, जहाँ तक हम देख पाते हैं, तक कीचड़ का सौंदर्य दिखता है।

प्रश्न 4.
कवियों की धारणा को लेखक ने युक्ति शून्य क्यों कहा है?
उत्तर:
लेखक ने कवियों की धारणा को युक्ति शून्य ठीक ही कहा है। वे बाहरी सौंदर्य पर ध्यान देते हैं, किंतु आंतरिक सौंदर्य और उपयोगिता को बिल्कुल नहीं देखते। ये कविजन कीचड़ में उगने वाले कमल को तो बहुत सम्मान देते हैं किंतु कीचड़ का तिरस्कार करते हैं। वे केवल अपने काम की, सौंदर्य की और प्रत्यक्ष. महत्त्व की बात का आदर करते हैं किंतु उन्हें उत्पन्न करने वाले कारणों का सम्मान नहीं करते।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1.
नदी किनारे अंकित पदचिह्न और सींगों के चिह्नों से मानो महिषकुल के भारतीय युद्ध का पूरा इतिहास ही इस कर्दम लेख में लिखा हो ऐसा भास होता है।
उत्तर:
आशय- नदी के किनारे का गीला कीचड़ जब सूखकर ठोस हो जाता है तो मद में डूबे पाड़े अपने सींगों से कीचड को रौंदकर आपस में लड़ते हैं। इससे उस कीचड़ में उन पाड़ों के सींगों और पैरों के चिह्न अंकित हो जाते हैं। इन अनगिनत पदचिह्नों को देखकर ऐसा लगता है जैसे महिषकुल में अब तक जितने भी भारतीय युद्ध हुए हैं, उनका इतिहास इस कीचड़ में लिख उठा है।

प्रश्न 2.
“आप वासुदेव की पूजा करते हैं इसलिए वसुदेव को तो नहीं पूजते, हीरे का भारी मूल्य देते हैं किंतु कोयले या पत्थर का नहीं देते और मोती को कंठ में बाँधकर फिरते हैं किंतु उसकी मातुश्री को गले में नहीं बाँधते!” कम-से-कम इस विषय पर कवियों के साथ तो चर्चा न करना ही उत्तम!
उत्तर:
कविजन मनमानी करते हुए पंक से उत्पन्न कमल की तो प्रशंसा करते हैं किंतु पंक को महत्त्व नहीं देते। वे अपने पक्ष में तर्क देते हुए कहते हैं-पंकज की प्रशंसा करना ठीक ही है। हम लोग वासुदेव कृष्ण की पूजा करते हैं किंतु इस कारण वसुदेव की तो पूजा नहीं करते। इसी प्रकार हम हीरे को बहुत मूल्यवान मानते हैं किंतु उसके जनक पत्थर या कोयले की तो प्रशंसा नहीं करते। इसी प्रकार मोती को गले में डालते हैं किंतु उसकी जननी सीपी को गले में धारण नहीं करते।
लेखक कवियों के इन अकाट्य तर्को से तंग आकर कहता है-कीचड़ की प्रशंसा करने के बारे में कम-से-कम इन कवियों से बात ही न की जाए तो अच्छा है। ये अपनी मनमानी करते हैं। इन्हें जो भा गया, सो भा गया। उसके आगे वे किसी की नहीं सुनते।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए-

  1. जलाशय      …………………           …………………           …………………
  2. सिंधु            …………………           …………………           …………………
  3. पंकज          …………………           …………………           …………………
  4. पृथ्वी            …………………          …………………           …………………
  5. आकाश       …………………           …………………           …………………

उत्तर: 

  1. जलाशय – सरोवर, सर, तड़ाग, पुष्कर, पोखर।
  2. सिंधु – सागर, समुद्र, रत्नाकर, जलनिधि, जलधि।
  3. पंकज – कमल, नीरज, वारिज, जलज।
  4. पृथ्वी – धरती, धरा, भू, वसुधा, धारयित्री।
  5. आकाश – गगन, नभ, व्योम।।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम भी लिखिए

  1. कीचड़ का नाम लेते ही सब बिगड़ जाता है। ……………………
  2. क्या कीचड़ का वर्णन कभी किसी ने किया है। ……………………
  3. हमारा अन्न कीचड़ से ही पैदा होता है।  ……………………
  4. पदचिह्न उस पर अंकित होते हैं।  ……………………
  5. आप वासुदेव की पूजा करते हैं।  ……………………

उत्तर:

  1. का (संबंध कारक)
  2. का (संबंध कारक) ने। (कर्ता कारक)
  3. से (अधिकरण कारक)
  4. पर (अधिकरण कारक)
  5. की (कर्म कारक)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों की बनावट को ध्यान से देखिए और इनका पाठ से भिन्न किसी नए प्रसंग में वाक्य प्रयोग कीजिए-

  1. आकर्षक
  2. यथार्थ
  3. तटस्थता
  4. कलाभिज्ञ
  5. पदचिह्न
  6. अंकित
  7. तृप्ति
  8. सनातन
  9. लुप्त
  10. जाग्रत
  11. घृणास्पद
  12. युक्तिशून्य
  13. वृत्ति

उत्तर:

  1. आकर्षक – मोर का नृत्य सबको आकर्षक प्रतीत होता है।
  2. यथार्थ – हमें कल्पना नहीं, यथार्थ को महत्त्व देना चाहिए।
  3. तटस्थता – साधु संतों की तटस्थता सज्जनों के लिए शुभ नहीं है।
  4. कलाभिज्ञ – चित्र प्रदर्शनी में बड़े-बड़े कलाभिज्ञ उपस्थित थे।
  5. पदचिह्न – हम महापुरुषों के पदचिह्नों पर चलकर अपना जीवन महान बना सकते हैं।
  6. अंकित होली के पक्के रंग अब भी मेरे कुरते पर अंकित हैं।
  7. तृप्ति – हिमालय को कितना भी निहारू, तृप्ति नहीं मिलती।
  8. सनातन – शक्तिशाली राजाओं का दबदबा सनातन काल से चला आ रहा है।
  9. लुप्त – आज कितनी ही पशु जातियाँ इस संसार से लुप्त हो चुकी हैं।
  10. जाग्रत – आज भारत अपने विकास के लिए जाग्रत हो चुका है।
  11. घृणास्पद – कीचड़ से लथपथ मनुष्य घृणास्पद प्रतीत होता है।
  12. युक्तिशून्य – सामने खड़े शेर को देखकर मैं युक्तिशून्य हो गया।
  13. वृत्ति – कवियों की वृत्ति मनमानी होती है।

प्रश्न 4.
नीचे दी गई संयुक्त क्रियाओं का प्रयोग करते हुए कोई अन्य वाक्य बनाइए

  1. देखते-देखते वहाँ के बादल श्वेत पूनी जैसे हो गए।
    ……………………………………………………………………………
  2. कीचड़ देखना हो तो सीधे खंभात पहुँचना चाहिए
    ……………………………………………………………………………
  3. हमारा अन्न कीचड़ में से ही पैदा होता है।
    ……………………………………………………………………………

उत्तर:

  1. मेरे देखते-देखते वहाँ भगदड़ मच गई और भयभीत लोगों के चेहरे श्वेत पूनी जैसे हो गए।
  2. सूर्योदय का सौंदर्य देखना हो तो कन्याकुमारी पहुँचना चाहिए
  3. पंकज़ सदा पंक से ही पैदा होता है।

प्रश्न 5.
न, नहीं, मत का सही प्रयोग रिक्त स्थानों पर कीजिए

  1. तुम घरे ………………. जाओ।
  2. मोहन कल ………………. आएगा।
  3. उसे ………………. जाने क्या हो गया है?
  4. डॉटो ………………. प्यार से कहो।
  5. मैं वहाँ कभी ………………. जाऊँगा ।
  6. ………………. वह बोला ……………….. मैं।

उत्तर:

  1. तुम घर मत जाओ।
  2. मोहन कल नहीं आएगा।
  3. उसे जाने क्या हो गया है?
  4. डाँटो मत प्यार से कहो।
  5. मैं वहाँ कभी नहीं जाऊँगा।
  6. ने वह बोला मैं।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
विद्यार्थी सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य देखें तथा अपने अनुभवों को लिखें।
उत्तर:
सूर्योदय की वेला अत्यंत पावन होती है। जब ओंस से गीले वातावरण में सूरज की नम किरणें चौंधियाती हुई आँखों में प्रवेश करती हैं तो सुख का अहसास होता है। पक्षी चहचहाते हैं। ठंडी हवाएँ चलती हैं।
सूर्यास्त के समय आकाश में शांति छा जाती है। रंगबिरंगी किंतु शांत किरणें मन को शांति दे जाती हैं। पक्षी भी कलरव छोड़कर घोंसलों में घुस जाते हैं।

प्रश्न 2.
कीचड़ में पैदा होनेवाली फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर:
धान, सिघाडा आदि।

प्रश्न 3.
भारत के मानचित्र में दिखाएँ कि धान की फसल प्रमुख रूप से किन-किन प्रांतों में उपजाई जाती है?
उत्तर:
भूगोल की पुस्तक का सहारा लें। कुछ उदाहरण—बिहार, झारखण्ड, पंजाब, हरियाणा, आँध्र प्रदेश, तमिलनाडु।

प्रश्न 4.
क्या कीचड़ ‘गंदगी’ है? इस विषय पर अपनी कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर:

  1. एक छात्र – कीचड़ गंदगी प्रतीत होती है। एक बार कीचड़ में पैर धंस जाए तो घिन आती है।
  2. दूसरा छात्र – परंतु मैं तो रोज ही खेतों की कीचड़ में से गुजरता हूँ। मुझे अच्छा लगता है। इसी कीचड़ में से अन्न पैदा होता है।
  3. तीसरा छात्र – जब मैं किसी मजदूर को गारे और कीचड़ में सना देखता हूँ तो मेरा मन भी करता है कि उस कीचड़ ‘ में घुसकर काम करूं। मुझे अच्छा लगता है।
  4. चौथा छात्र – परंतु जब बारिश के बाद अपनी गली के गंदे कीचड़ में से गुजरता हूँ तो घिन आती है।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 11

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 11 सवैये

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
ब्रजभूमि के प्रति कवि का प्रेम किन-किन रूपों में अभिव्यक्त हुआ है? [CBSE]
अथवा
कवि रसखान ने ब्रजभूमि के प्रति अपने प्रेम को किस प्रकार प्रकट किया है? [CBSE]
उत्तर:
ब्रजभूमि के प्रति कवि का प्रेम, निम्न रूपों में अभिव्यक्त हुआ है।

  • वह अगले जन्म में मनुष्य बनकर ब्रज के ग्वाल-बालों के मध्य बसना चाहता है।
  • वह पशु बनकर नंद की गायों के मध्य चरना चाहता है।
  • वह पत्थर के रूप में गोवर्धन पर्वत का हिस्सा बनना चाहता है।
  • वह पक्षी बनकर यमुना-किनारे कदंब के पेड़ पर बसेरा बनाना चाहता है।
  • कवि ब्रज के वन-बाग और तालाब निहारते रहना चाहता है।

प्रश्न 2.
कवि को ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण हैं? [CBSE]
उत्तर:
कवि श्रीकृष्ण और उनसे जुड़ी हर वस्तु से अगाध प्यार करता है। ब्रज के वन, बाग, तथा तालाबों के आसपास श्रीकृष्ण आया करते थे। वे इनमें गाय चराते हुए, रासलीला रचाते हुए आया-जाया करते थे। उनसे कवि कृष्ण का जुड़ाव तथा लगाव महसूस करता है। इसलिए कवि इन वनों, बागों और तालाबों को निहारते रहना चाहता है क्योंकि वह उनमें कृष्ण का अंश महसूस करता है।

प्रश्न 3.
एक लकुटी और कामरिया पर कवि सब कुछ न्योछावर करने को क्यों तैयार है? [Imp.] [CBSE]
अथवा
कवि कृष्ण की लाठी और कंबल के बदले क्या त्यागने को तैयार हैं? [CBSE]
अथवा
रसखान किस पर कैसे न्योछावर हो जाने को तैयार है? [CBSE]
उत्तर:
एक लकुटी और कामरिया पर कवि सब कुछ इसलिए न्योछावर करने को तैयार है क्योंकि ये वस्तुएँ उसके आराध्य प्रभु से जुड़ी हैं और इन वस्तुओं में कृष्ण की यादें बसी हैं।

प्रश्न 4.
सखी ने गोपी से कृष्ण का कैसा रूप धारण करने का आग्रह किया था? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सखी ने गोपी से वही सब कुछ धारण करने को कहती है, जो श्रीकृष्ण धारण किया करते थे। वह गोपी से कहती है कि सिर पर मोर के पंख को मुकुट, गले में कुंजों की माला, तन पर पीले वस्त्र धारण कर तथा हाथ में लाठी लिए वन-वन गायों को चराने जाए।

प्रश्न 6.
चौथे सवैये के अनुसार गोपियाँ अपने आप को क्यों विवश पाती हैं?
अथवा
गोपी कृष्ण की किन विशेषताओं से प्रभावित होती है? [CBSE 2012]
उत्तर:
इस सवैथे के अनुसार-श्रीकृष्ण की मुरली की धुन अत्यंत मधुर तथा मादक है तथा उनका रूप अत्यंत सुंदर है। उनकी मुरली की मधुरता तथा उनके रूप सौंदर्य के प्रति गोपियाँ आसक्त हैं। वे इनके समक्ष स्वयं को विवश पाती हैं और कृष्ण की होकर रह जाती हैं।

प्रश्न 7.
भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।
(ख) माइ री वा मुख की मुसकानि सम्हारी न जैहै, न जैहै, न जैहै।

उत्तर:
भाव
(क) कवि रसखान श्रीकृष्ण और ब्रज क्षेत्र से असीम लगाव रखते हैं। श्रीकृष्ण ब्रज के करील के कुंजों की छाया में विश्राम किया करते थे। इस करील के कुंजों की छाया के बदले वे सोने के महलों का सुख भी न्योछावर करने को तैयार थे।

(ख) श्रीकृष्ण की मुसकान की मादकता के विषय में गोपी कहती हैं कि माई री, वह मुसकान इतना आकर्षक है कि मैं उससे बच नहीं पाऊँगी और मुझसे स्वयं को सँभाला नहीं जाएगा।

प्रश्न 8.
‘कालिंदी कुल कदंब की डारन’ में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर:
‘कालिंदी कूल कदंब की डारन’ में ‘क’ वर्ण की आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 9.
काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए| या मुरली मुरलीधर की अधरान धरी अधरा न धरौंगी। [CBSE]
उत्तर:
भाव-सौंदर्य- गोपी कह रही है कि वह श्रीकृष्ण का स्वांग करने को तैयार है पर वह मुरलीधर की मुरली को अपने होठों पर नहीं रखेगी।
शिल्प सौंदर्य

  • भाषा में व्रजभाषा की मधुरता है।
  • छंद सवैया है।
  • ‘म’ की आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार तथा अधरा न – अधरों पर, अधरा न – अधरों पर नहीं में यमक अलंकार है।
  • दृश्य बिंब साकार हो उठा है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 10.
प्रस्तुत सवैयों में जिस प्रकार ब्रजभूमि के प्रति प्रेम अभिव्यक्त हुआ है, उसी तरह आप अपनी मातृभूमि के प्रति अपने मनोभावों को अभिव्यक्त कीजिए।
उत्तर:
मैं अपनी मातृभूमि से बहुत प्यार करता हूँ। मैं इसी मातृभूमि का अन्न ग्रहण कर बड़ा हुआ हूँ। इसी की पावन तथा शीतल वायु में साँस लेकर पला-बढ़ा हूँ। यहीं की पावन नदियों का जल पीकर प्यास बुझाई है। मुझे यहाँ की गौरवशाली प्राचीन संस्कृति का अंग बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मैं हर जन्म में यहाँ की पावन भूमि पर जन्म लेना चाहूँगा। अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हूँ।

प्रश्न 11.
रसखान के इन सवैयों का शिक्षक की सहायता से कक्षा में आदर्श वाचन कीजिए। साथ ही किन्हीं दो सवैयों को कंठस्थ कीजिए।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

पाठेतर सक्रियता

• सूरदास द्वारा रचित कृष्ण के रूप-सौंदर्य संबंधी पदों को पढ़िए।
उत्तर:
छात्र पढ़ें।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 5

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1.
वह ऐसी कौन सी बात रही होगी जिसने लेखक को दिल्ली जाने के लिए बाध्य कर दिया?
उत्तर:
लेखक ने जिस समय देहरादून से दिल्ली आने का जिक्र किया है उस समय वह बेरोजगार था। वह कोई काम नहीं करता था। उसकी इस स्थिति पर घर के किसी सदस्य ने व्यंग्यपूर्वक ऐसी कठोर बात कह दी होगी जिससे उसका स्वाभिमान आहत हो गया होगा जिसके कारण वह उसी हाल में घर छोड़कर दिल्ली आ गया।

प्रश्न 2.
लेखक को अंग्रेजी में कविता लिखने का अफसोस क्यों रहा होगा?
उत्तर:
एक बार जब बच्चन जी ने लेखक के लिए नोट लिखा तो उसने बच्चन जी के उसे नोट का जवाब देने का निर्णय लिया, किंतु अपनी आदत से मजबूर वह पत्रोत्तर न दे सका। इसके बदले में उसने एक अंग्रेजी कविता (सॉनेट) लिख डाला। इस सॉनेट को जब बच्चन ने पढ़ा तो उन्हें यह स्तरानुरूप नहीं लगा।
इधर लेखक को इलाहाबाद का साहित्यिक वातावरण, मित्रों का सहयोग, बच्चन, निराला तथा पंत जैसे साहित्यकारों का मार्गदर्शन उसे हिंदी में लेखन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था। यह सब देख उसने हिंदी में लिखने का निर्णय लिया जो बाद में भी चलता रहा। इस प्रकार अंग्रेजी में लिखने का उसका प्रयास व्यर्थ गया जिसका उसे अफसोस रहा।

प्रश्न 3.
अपनी कल्पना से लिखिए कि बच्चन ने लेखक के लिए ‘नोट’ में क्या लिखा होगा?
उत्तर:
बच्चन जी स्टूडियो में लेखक से मिलने आए। वहाँ उन्होंने लेखक द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स देखी होंगी और प्रभावित हुए बिना न रह सके होंगे। उन्होंने लेखक के लिए जो नोट लिखा होगा उसमें पेंटिंग्स की प्रशंसा की होगी तथा लेखक के उज्ज्वल भविष्य की कामना की होगी। उन्होंने लिखा होगा कि इलाहाबाद आकर लेखक उनसे मिले।

प्रश्न 4.
लेखक ने बच्चन के व्यक्तित्व के किन-किन रूपों को उभारा है?
उत्तर:
इस पाठ में लेखक ने बच्चन जी के व्यक्तित्व के अनेक रूपों को उभारा है, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं

  1. बच्चन जी का स्वभाव अत्यंत दयालु था। उनका हृदय मक्खन-सा मुलायम था।
  2.  उनका स्वभाव संघर्षशील, दूसरों के लिए प्रेरणादायी, परोपकारी तथा फौलादी संकल्प वाला था। दूसरों की सहायता करने का अवसर वे कभी न छोड़ते थे।
  3.  बच्चन जी समय के बड़े पाबंद थे। वे कहीं भी अपने नियत समय पर पहुँचते थे।
  4. वे किसी से छल-कपट पूर्ण व्यवहार नहीं करते थे।
  5. वे नए साहित्यकारों की मदद धन, समय और प्रेरणा के माध्यम से किया करते थे।
  6.  वे वाणी के धनी थे। जो कहते थे उसे अवश्य पूरा करते थे।

प्रश्न 5.
बच्चन के अतिरिक्त लेखक को अन्य किन लोगों का तथा किस प्रकार का सहयोग मिला?
उत्तर:
बच्चन जी के अलावा लेखक को अनेक व्यक्तियों का सहयोग विभिन्न रूपों में मिला। दिल्ली आकर उकील आर्ट स्कूल में उसे गुरुवर श्री शारदा चरण जी ‘उकील’ का सहारा मिला, जिन्होंने बिना फ़ीस लिए ही दाखिला दिया। चित्रकला सीखते समय उसके भाई तेज बहादुर का आर्थिक सहयोग मिला। वे कभी-कभी रुपये भेज दिया करते थे। इलाहाबाद में लेखक को ‘पंत’ और ‘निराला जी’ का सहयोग मिला। पंत जी के सहयोग से उसे हिंदू बोर्डिंग हाउस में फ्री सीट मिल गई तथा इंडियन प्रेस से अनुवाद का काम मिल गया।

उसे लेखन के लिए मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन भी इन कवियों से मिला। लेखक को अपनी ससुरालवालों से भी सहयोग मिला। वहाँ उसने-कंपाउंडरी सीखी और नुस्खे पढ़ना सीखा। इसके अलावा लेखक के भाई के मित्र ब्रजमोहन से भी उसे सहयोग मिला, जिन्होंने बच्चन जी से देहरादून में उसकी मुलाकात करवाई।

प्रश्न 6.
लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने का क्रमानुसार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सन् 1937 में लेखक की मुलाकात ‘पंत’ और ‘निराला’ जैसे साहित्यकारों से हुई।
उनसे प्राप्त संस्कार, इलाहाबाद-प्रवास और इलाहाबाद का साहित्यिक वातावरण और मित्रों से मिलने वाले साहित्यिक सानिध्य ने लेखक को बहुत प्रभावित किया। उस समय तक लेखक की कुछ कृतियाँ ‘सरस्वती’ और ‘चाँद’ पत्रिका में छप चुकी थीं।
इसी बीच बच्चन जी ने उसे एक नए प्रकार के स्टैंजा के बारे में बताया जिसमें लिखने का प्रयास लेखक ने किया। संयोग से ‘सरस्वती’ पत्रिका में छपी एक रचना ने “निरालाजी’ का ध्यान आकृष्ट किया। लेखक ने कुछ निबंध लिखे। इसके बाद वह ‘रूपाभ’ ऑफिस में प्रशिक्षण लेकर ‘हंस’ के कार्यालय में चला गया। इस प्रकार लेखक ने क्रमशः हिंदी जगत् में प्रवेश किया।

प्रश्न 7.
लेखक ने अपने जीवन में जिन कठिनाइयों को झेला है, उनके बारे में लिखिए।
उत्तर:
लेखक ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों को झेला है। देहरादून में रहते हुए वह बेरोजगार थे। उनकी जेब में थोड़े से रुपये हुआ करते थे। ऐसे ही समय पर किसी ने ताना दिया और वह उसी दशा में बसे द्वारा दिल्ली आ गया। यहाँ उसने उकील आर्ट स्कूल में बिना फ़ीस दाखिला लिया। उसने बोर्ड पेंटिंग करके तथा अपने भाग द्वारा भेजे गए पैसों से गुज़ारा किया। वह पैसों की कमी के कारण पैदल स्कूल आया था।

उसे देहरादून जाकर अपनी ससुराल वालों की दुकान पर कंपाउंडरी सीखनी पड़ी। इलाहाबाद आकर उसने एम.ए. में प्रवेश लिया। यह काम बच्चन जी की सहायता से ही हो पाया। अंत में ‘निराला’ और ‘पंत’ जैसे साहित्यकारों के सान्निध्य में उसे कुछ काम मिला तथा कविता लेखन के लिए निरंतर अभ्यास किया। इसके अलावा पत्नी की मृत्यु होने से उसे दुख भरा एकाकी जीवन बिताना पड़ा।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 5

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 5  वैज्ञानिक चेतना के वाहक : चन्द्र शेखर वेंकट रामन

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

प्रश्न 1.
रामन् भावुक प्रकृति प्रेमी के अलावा और क्या थे?
उत्तर:
रामन् भावुक प्रकृति प्रेमी के अलावा एक जिज्ञासु वैज्ञानिक भी थे, जिन्होंने साधनों की कमी वाली प्रयोगशाला में भी अपनी जिज्ञासा शांत करने का प्रयास किया।

प्रश्न 2.
समुद्र को देखकर रामन् के मन में कौन-सी दो जिज्ञासाएँ उठीं? [CBSE 2012]
उत्तर:
समुद्र को देखकर रामन् के मन में निम्नलिखित दो जिज्ञासाएँ उठीं

  • समुद्र के जल का रंग नीला क्यों होता है? ।
  • नीले रंग के अतिरिक्त अन्य कोई रंग क्यों नहीं होता?

प्रश्न 3.
रामन् के पिता ने उनमें किन विषयों की सशस्त नींव डाली। [CBSE 2012]
उत्तर:
रामनु के पिता गणित और भौतिकी के शिक्षक थे। उन्होंने रामन् में इन्हीं दो विषयों की नींव डाली।

प्रश्न 4.
वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के अध्ययन के द्वारा रामन् क्या करना चाहते थे? [CBSE 2012]
उत्तर:
वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के अध्ययन के द्वारा रामन् यह बताना चाहते थे कि भारतीय वीणा, मृदंगम् आदि वाद्ययंत्र विदेशी पियानो आदि की तुलना में घटिया नहीं हैं।

प्रश्न 5.
सरकारी नौकरी छोड़ने के पीछे रामन् क्रीं क्या भावना थी?
अथवा
शम्न ने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला क्यों लिया?
उत्तर:
सरकारी नौकरी छोड़ने के पीछे भावना यह थी कि वे अध्ययन के साथ-साथ शोध एवं प्रयोगों से अपनी जिज्ञासा शांत करने तथा विज्ञान के प्रचार-प्रसार की थी।

प्रश्न 6.
‘रामन् प्रभाव’ की खोज के पीछे कौन-सा सवाल हिलोरें ले रहा था?
उत्तर:
‘रामन् प्रभाव’ की खोज के पीछे यह सवाल हिलोरें ले रहा था कि समुद्र का रंग नीला क्यों होता है?

प्रश्न 7.
प्रकाश तरंगों के बारे में आइंस्टाइन ने क्या बताया? [CBSE 2012]
उत्तर:
प्रकाश तरंगों के बारे में आइंस्टाइन ने बताया कि प्रकाश अति सूक्ष्म कणों की तीव्र धारा के समान है। इन अति सूक्ष्म कणों की तुलना उन्होंने बुलेट से की है।

प्रश्न 8.
रामन् की खोज ने किन अध्ययनों को सहज बनाया? [CBSE 2012]
उत्तर:
रामन् की खोज ने अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना के अध्ययन को सहज बना दिया।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1.
कॉलेज के दिनों में रामन् की दिली इच्छा क्या थी?
उत्तर:
रामन् ने कॉलेज के दिनों से ही शोधकार्यों में रुचि लेना शुरू कर दिया था। उनकी दिली इच्छा थी कि वे अपना सारा जीवन शोधकार्यों को ही समर्पित कर दें।

प्रश्न 2.
वाद्ययंत्रों पर की गई खोजों से रामन् ने कौन सी अति तोड़ने की कोशिश की?
उत्तर:
रामन् ने वाद्ययंत्रों की ध्वनियों पर खोज करके इस भ्रांति को तोड़ा कि विदेशी वाद्ययंत्रों की ध्वनियाँ भारतीय वाद्ययंत्रों की तुलना में अधिक उन्नत हैं और भारतीय वाद्ययंत्र उनसे घटिया हैं।

प्रश्न 3.
रामन के लिए नौकरी संबंधी कौन-ए र कठिन था?
उत्तर:
रामन् के लिए कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय में कम वेतन वाले प्रोफेसर के पद पर नौकरी करने संबंधी निर्णय कठिन था क्योंकि तब वे वित्त विभाग में मोटी तनख्वाह और अनेक सुविधाओं वाली नौकरी कर रहे थे।

प्रश्न 4.
सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् को समय-समय पर किन-किन पुरस्कारों से सम्मानित किया ? [CBSE 2012]
उत्तर:
सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् को समय-समय पर निम्नलिखित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया

  1. रॉयल सोसाइटी की सदस्यता तथा ह्यूज़ पदक
  2. ‘सर’ की उपाधि
  3. नोबेल पुरस्कार
  4. रोम का मेत्यूसी पदक
  5. फिलोडेल्फ़िया इंस्टीट्यूट का फ्रैंकलिन पदक
  6. सोवियत रूस का अंतर्राष्ट्रीय लेनिन पुरस्कार
  7. भारत का सर्वोच्च पुरस्कार ‘भारतरत्न’।

प्रश्न 5.
रामन् को मिलने वाले पुरस्कारों ने भारतीय चेतना को जाग्रत किया। ऐसा क्यों कहा गृया है?
उत्तर:
रामन् को अधिकांश पुरस्कार एवं सम्मान तब मिला, जब देश अंग्रेजों का गुलाम था। गुलामी के कारण भारतीयों को इस तरह के शान और प्रतिभा का हकदार नहीं माना जाता था। नोबेल तथा अन्य पुरस्कार भारतीयों की प्रतिभा के प्रमाण थे, इसलिए ऐसा कहा गया है।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए…

प्रश्न 1.
रामन् के प्रारंभिक शोधकार्य को आधुनिक हठयोग क्यों कह?
उत्तर:
रामन् के प्रारंभिक शोधकार्य को आधुनिक हठयोग इसलिए कहा गया क्योंकि उनकी परिस्थितियाँ बिल्कुल
विपरीत थीं। वे बहुत महत्त्वपूर्ण तथा व्यस्त नौकरी पर थे। उन्हें हर प्रकार की सुख-सुविधा प्राप्त थी। समय की कमी थी। स्वतंत्र शोध के लिए पर्याप्त सुविधाएँ नहीं थीं। न ही शोध करने में कोई भविष्य था। ले-देकर कलकत्ता में एक छोटी-सी प्रयोगशाला थी जिसमें बहुत कम उपकरण थे। ऐसी विपरीत परिस्थिति में शोध करते रहना दृढ़ इच्छाशक्ति से ही संभव था। यह रामन के मन का दृढ़ हठ था जिसके कारण वे शोध जारी रख सके। इसलिए उनके प्रारंभिक शोधकार्य को आधुनिक हठयोग कहा गया है। यह हठयोग विज्ञान से संबंधित था, इसलिए इसे आधुनिक कहना उचित है।

प्रश्न 2.
रामन् की खोज ‘रामन् प्रभाव’ क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रामन् ने शोधकार्य करते हुए देखा कि एकवर्णीय प्रकाश की किरण जब किसी तरल या ठोस रवेदार पदार्थ से गुजरती है। तो उसके वर्ण में परिवर्तन आ जाता है। इसका कारण यह है कि एकवर्णीय प्रकाश की किरण के फोटॉन तरल या ठोस पदार्थ के रवों से टकराते हैं तो या कुछ ऊर्जा खो बैठते हैं या ग्रहण कर लेते हैं। यह ऊर्जा जिस मात्रा में ली अथवा दी जाती है, उसी हिसाब से प्रकाश का वर्णन परिवर्तन होता है। इसी को रामन् प्रभाव के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 3.
‘रामन् प्रभाव’ की खोज से विज्ञान के क्षेत्र में कौन-कौन से कार्य संभव हो सके?
उत्तर:
‘रामन् प्रभाव’ की खोज से विज्ञान के क्षेत्र में निम्नलिखित कार्य संभव हो सके-

  1. विभिन्न पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन करना सरल, प्रामाणिक और निर्दोष हो सका।।
  2. विभिन्न अणुओं-परमाणुओं का संश्लेषण करके नए उपयोगी पदार्थ बनाने का कार्य संभव हो सका।

प्रश्न 4.
देश को वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन प्रदान करने में सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् के महत्त्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
रामन् अपनी राष्ट्रीय चेतना के कारण देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और चिंतन के विकास के लिए समर्पित थे। उन्होंने उच्चकोटि की प्रयोगशाला और उपकरणों के अभाव को दूर करने के लिए रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की बंगलोर में स्थापना की। भौतिक शास्त्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने ‘इंडियन जनरल ऑफ फिज़िक्स’ नामक शोध पत्रिका की शुरुआत की। इसके अलावा उन्होंने अनेक शोध-छात्रों का मार्गदर्शन भी किया।

प्रश्न 5.
सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् के जीवन से प्राप्त होनेवाले संदेशं को अपने शब्दों में लिखिए।।
उत्तर:
सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् ने कहीं भाषण में संदेश प्रसारित नहीं किया। उन्होंने अपना जीवन जिस प्रकार जिया, वह किसी भी मौखिक संदेश से अधिक प्रभावी और सार्थक है। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। सरकारी नौकरी में रहते हुए भी वे कलकत्ता की कामचलाऊ प्रयोगशाला में जाकर प्रयोग करते रहे। जब उन्हें भौतिकी विभाग के प्रोफ़ेसर की नौकरी मिली तो उन्होंने कम वेतन और कम सुख-सुविधाओं के बावजूद वह नौकरी स्वीकार कर ली। इससे हमें यह संदेश मिलता है कि हमें धन और सुख-सुविधा का मोह त्याग करके नई शोध के लिए जीवन अर्पित करना चाहिए। उन्होंने जिस प्रकार अनेकानेक नवयुवकों को शोध के लिए प्रेरित किया, वह भी अनुकरणीय है। उन्होंने अपनी राष्ट्रीयता और भारतीयता का संस्कार नहीं त्यागा। अपना दक्षिण भारतीय पहनावा नहीं छोड़ा। यह संदेश भी अनुकरणीय है।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 1.
उनके लिए सरस्वती की साधना सरकारी सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण थी। [CBSE 2012]
उत्तर:
रामन् जिज्ञासु प्रवृत्ति के शोधरत वैज्ञानिक थे। उन्होंने शुरुआत में सरकारी नौकरी अवश्य की, परंतु अध्ययन एवं शोध का अवसर मिलते ही उन्होंने मोटा वेतन और ढेरों सुख-सुविधाएँ त्यागकर कोलकाता विश्वविद्यालय में कम वेतन वाला पद ग्रहण कर लिया। इस प्रकार उन्होंने सुख-सुविधाओं की जगह अध्ययन-अध्यापन को महत्त्व दिया।

प्रश्न 2.
हमारे पास ऐसी न जाने कितनी ही चीजें बिखरी पड़ी हैं, जो अपने पात्र की तलाश में हैं। [CBSE 2012]
उत्तर:
हमारे जीवन में हमारे आस पास जो कुछ घटता रहता है, उसका अध्ययन करना आवश्यक है। यह अध्ययन का खुला क्षेत्र है। इन घटनाओं को अनुसंधान करने वाले खोजियों की तलाश रहती है।

प्रश्न 3.
यह अपने आप में एक आधुनिक हठयोग का उदाहरण था।
उत्तर:
हठयोग का अर्थ है-विपरीत परिस्थितियों में अत्यंत कठोर परिश्रम एवं दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी वस्तु या सफलता को पाने के लिए प्रयास करना। रामन् ने भी तो नौकरी करते हुए बचे-खुचे समय को उपकरण विहीन प्रयोगशाला में लगाकर प्रयोग और शोध करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। यह स्वयं में हठयोग का उदाहरण ही तो था।

(घ) उपयुक्त शब्द का चयन करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

इंफ्रा रेड स्पेक्ट्रोस्कोपी, इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ़ साइंस, फिलॉसॉफिकल मैगज़ीन, भौतिकी, रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट।

  1. रामन् का पहला शोध पत्रे …………………. में प्रकाशित हुआ था।
  2. रामन् की खोज ………………….. के क्षेत्र में एक क्रांति के समान थी।
  3. कलकत्ता की मामूली-सी प्रयोगशाला का नाम ………………… था।
  4. रामन् द्वारा स्थापित शोध संस्थान ………………… नाम से जानी जाती है।
  5. पहले पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन करने के लिए …………. का सहारा लिया जाता था।

उत्तर:

  1. रामन् का पहला शोध-पत्र फिलॉसॉफिकल मैगज़ीन में प्रकाशित हुआ था।
  2. रामन् की खोज भौतिकी के क्षेत्र में एक क्रांति के समान थी।
  3. कोलकाता की मामूली-सी प्रयोगशाला का नाम ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ़ साइंस’ था।
  4. रामन् द्वारा स्थापित शोध-संस्थान ‘रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट’ नाम से जाना जाता है।
  5. पहले पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन करने के लिए इंफ्रा रेड स्पेक्ट्रोस्कोपी का सहारा लिया जाता था।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
नीचे कुछ समानदर्शी शब्द दिए जा रहे हैं जिनका अपने वाक्य में इस प्रकार प्रयोग करें कि उनके अर्थ का अंतर स्पष्ट हो सके।

  1. प्रमाण                …………………….
  2. प्रणाम                …………………….
  3. धारणा                …………………….
  4. धारण                 …………………….
  5. पूर्ववर्ती               …………………….
  6. परवर्ती               …………………….
  7. परिवर्तन            …………………….
  8. प्रवर्तन               …………………….

उत्तर:

  1. रामन ने आइंस्टाइन द्वारा कहे गए सिद्धांत का प्रमाण प्रयोग द्वारा दे दिया।
  2. सभी भारतीय रामन् की प्रतिभा को प्रणाम करते हैं।
  3. रामन के प्रयोगों ने विदेशियों की भ्रांत धारणा को तोड़ दिया।
  4. रामन ने सरकारी सुख-सुविधा को त्याग कर सरस्वती साधना का विचार मन में धारण किया।
  5. रामन के पूर्ववर्ती वैज्ञानिक मानते थे कि प्रकाश एक तरंग की तरह है।
  6. रामन प्रभाव की खोज के बाद परवर्ती वैज्ञानिकों के लिए बहुत से अध्ययन सरल हो गए।
  7. रामन ने देखा कि प्रकाश की एकवर्णीय धारा से टकराकर रवेदार पदार्थों का वर्ण परिवर्तन हो जाता है।
  8. रामन ने अनेक नए शोध संस्थानों को प्रवर्तन किया।

प्रश्न 2.
रेखांकित शब्द के विलोम शब्द का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  1. मोहन के पिता मन से सशक्त होते हुए भी तने से ………………. हैं।
  2. अस्पताल के अस्थायी कर्मचारियों को ……………….. रूप से नौकरी दे दी गई है।
  3. रामन् ने अनेक ठोस रवों और ………………. पदार्थों पर प्रकाश की किरण के प्रभाव का अध्ययन किया।
  4. आज बाज़ार में देशी और …………………. दोनों प्रकार के खिलौने उपलब्ध हैं।
  5. सागर की लहरों का आकर्षण उसके विनाशकारी रूप को देखने के बाद …………… में परिवर्तित हो जाता है।

उत्तर:

  1. मोहन के पिता मन से सशक्त होते हुए भी तन से अशक्त हैं।
  2. अस्पताल के अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी रूप से नौकरी दे दी गई है।
  3. रामन् ने अनेक ठोस रवों और तरल पदार्थों पर प्रकाश की किरण के प्रभाव का अध्ययन किया।
  4. आज बाज़ार में देशी और विदेशी दोनों प्रकार के खिलौने उपलब्ध हैं।
  5. सागर की लहरों का आकर्षण उसके विनाशकारी रूप को देखने के बाद विकर्षण में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 3.
नीचे दिए उदाहरण में रेखांकित अंश में शब्द-युग्म का प्रयोग हुआ है-
उदाहरण : चाऊतान को गाने-बजाने में आनंद आता है।
उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित शब्द-युग्मों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

  1. सुख-सुविधा       ………………………………….
  2. अच्छा खासा      ………………………………….
  3. प्रचार-प्रसार      ………………………………….
  4. आस-पास         ………………………………….

उत्तर:

  1. सुख-सुविधा – सरकारी नौकरी में सुख-सुविधा भरपूर मिलती है।
  2. अच्छा खासा – रामन् का विश्व भर में अच्छा खासा प्रभाव था।
  3. प्रचार-प्रसार – रामन् ने वैज्ञानिक अनुसंधान शाला तथा पत्र-पत्रिकाओं का आरंभ करके विज्ञान का अच्छा प्रचार-प्रसार किया।
  4. आस-पास – हमें अपने आस-पास की घटनाओं को वैज्ञानिक दृष्टि से देखना चाहिए।

प्रश्न 4.
प्रस्तुत पाठ में आए अनुस्वार और अनुनासिक शब्दों को निम्न तालिका में लिखिए।
 अनुस्वार                                अनुनासिक

  1. अंदर                                   (क) ढूँढ़ते
  2.  ………………….                       ………………….
  3. ………………….                        ………………….
  4. ………………….                        ………………….
  5. ………………….                        ………………….

उत्तर:
अनुस्वार                     अनुनासिक
असंख्य                        ढूँढने
चंद्रशेखर                      भ्रांति
घंटों                             जहाँ
रंग                             पहुँचता
भ्रांति
नितांत
संस्था
वाद्ययंत्र

प्रश्न 5.
पाठ में निम्नलिखित विशिष्ट भाषा प्रयोग आए हैं। सामान्य शब्दों में इनका आशय स्पष्ट कीजिए-

  1. घंटों खोए रहते,
  2. स्वाभाविक रुझान बनाए रखना,
  3. अच्छा खासा काम किया,
  4. हिम्मत का काम था,
  5. सटीक जानकारी,
  6. काफ़ी ऊँचे अंक हासिल किए,
  7. कड़ी मेहनत के बाद खड़ा किया था,
  8. मोटी तनख्वाह।

उत्तर:

  1. घंटों खोए रहते – बहुत देर तक ध्यान में लीन रहते।
  2. स्वाभाविक रुझान बनाए रखना – सहज रूप से रुचि बनाए रखना।
  3. अच्छा खासा काम किया – अच्छी मात्रा में ढेर सारा काम किया।
  4. म्मत का काम था – कठिन काम था।
  5. सटीक जानकारी – बिल्कुल सही और प्रामाणिक जानकारी।
  6. काफ़ी ऊँचे अंक हासिल किए – बहुत अच्छे अंक पाए।
  7. कड़ी मेहनत के बाद खड़ा किया था – बहुत मेहनत करने के बाद शोध संस्थान की स्थापना की थी।
  8. मोटी तनख्वाह – बहुत अधिक आय या वेतन।

प्रश्न 6.
पाठ के आधार पर मिलान कीजिए-
नीला                        कामचलाऊ
पिता                         रव
तैनाती                      भारतीय वाद्ययंत्र
उपकरण                  वैज्ञानिक रहस्य
घटिया                      समुद्र
फोटॉन                     नींव
भेदन                        कलकत्ता
उत्तर:
नीला               समुद्र
पिता                नींव
तैनाती              कलकत्ता
उपकरण          कामचलाऊ
घटिया              भारतीय वाद्ययंत्र
फोटॉन             वैज्ञानिक रहस्य
भेदन                रव

प्रश्न 7.
पाठ में आए रंगों की सूची बनाइए। इनके अतिरिक्त दस रंगों के नाम और लिखिए।
उत्तर:
पाठ में आए रंग – बैंजनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी, लाल।
अन्य रंग – काला, सफ़ेद, गुलाबी, संतरिया, महरून, मुँगिया, तोतिया, फ़िरोजी, भूरा, सलेटी।

प्रश्न 8.
नीचे दिए गए उदाहरण के अनुसार ‘ही’ का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए।
उदाहरण : उनके ज्ञान की सशक्त नींव उनके पिता ने ही तैयार की थी।
उत्तर:

  1. समुद्र को निहारना रामन् को अच्छा लगता ही था।
  2. आखिर समुद्र का रंग नीला ही क्यों होता है?
  3. रामन् के पिता गणित और भौतिकी के शिक्षक ही थे।
  4. कलकत्ता के शोध संस्थान की स्थापना एक डॉक्टर ने ही की थी।
  5. रामन् ने आखिरकार सरकारी नौकरी त्याग ही दी।

योग्यता विस्तार

प्रश्न1.
‘विज्ञान को मानव विकास में योगदान’ विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
छात्र कक्षा में चर्चा करें-
कि विज्ञान के बिना मानव जीवन कैसा था?
बिना आग और बिजली के जीवन कैसा था?
बिना सड़कों और पुलों के जीवन कैसा था?
बिना स्वचालित वाहनों और मोटरकारों के जीवन कैसा था?
बिना समाचार पत्र, रेडियो, टी.वी. के जीवन कैसा था?
बिना वायुयान, टेलीफोन और मोबाइल के जीवन कैसा था?

प्रश्न 2.
भारत के किन-किन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार मिला है? पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
1. सर चंद्रशेखर वेंकटरमने                भौतिकी में
2. वेंकटरमन रामकृष्ण                      रसायनशास्त्र में
3. डॉ. हरगोविंद खुराना                     चिकित्साशास्त्र में
4. डॉ. चंद्रशेखर सुब्रह्मण्यम                भौतिकी में
5. सर रोनाल्ड रॉस                           फिजियोलोजी में

प्रश्न 3.
न्यूटन के आविष्कार के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत के बारे में सारी दुनिया जानती है। परंतु उनकी सबसे पहली खोज परावर्तक दूरबीन के बारे में थी। हालांकि उनके द्वारा बनाई गई परावर्तक दूरबीन केवल 6 इंच लंबी थी किंतु वह 30 इंच लंबी सामान्य दूरबीन से भी अधिक दूर तथा सुस्पष्ट देख सकती थी। उनकी दूरबीन का मॉडल आज भी प्रयोग में लाया जाता है। न्यूटन ने गणित के क्षेत्र में कैलकुलस नामक गणन विधि का भी आविष्कार किया।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1.
भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों की सूची उनके कार्यों/योगदानों के साथ बनाइए।
उत्तर:

  1. सर चंद्रशेखर वेंकटरमन – ठोस रवों और तरल पदार्थों पर प्रकाश की किरणों के प्रभाव का अध्ययन।
  2. होमी जहाँगीर भाभा – परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण कार्यों में प्रयोग। ‘टाटा इंस्टिट्यूट’ व ‘भाभा रिसर्च सेंटर’ की स्थापना।
  3. जगदीशचंद्र बोस – सिद्ध किया कि पौधों में भी संवेदना होती है। पौधों की धड़कन रिकार्ड करने के लिए यंत्र की खोज की।
  4. मेघनाद साहा – साहा भौतिकी क्षेत्र में नाभिकीय भौतिकी और आयोनाइजेशन सूत्र पर काम किया।
  5. मोक्षागुंडम विश्वश्वरैया – वे प्रबुद्ध इंजीनियर थे। उन्होंने कृष्णाराजा सागर बाँध का डिजायन बनाया। सिंचाई का नया तरीका खोजा। उन्होंने कई उद्योग विकसित
    किए, जिनमें भद्रावती आयरेन एण्ड स्टील वर्ल्स महत्त्वपूर्ण हैं।
  6. सत्येंद्र नाथ बोस – वे भारतीय भौतिकविद् थे। वे आइस्टीन सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध थे। एक परमाणु के छोटे भाग का नाम ‘बोसोन’ उनके नाम पर पड़ा।
  7. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर – इन्होंने भौतिकी व एप्लाइड गणित में काम किया। इनकी खोजें तारों की उत्पत्ति समझने में सहायक हैं।
  8. विक्रम साराभाई – इन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान में काम किया। इन्हें भारतीय स्पेस प्रोग्राम का जनक कहा जाता है। इन्होंने ‘थुम्बा’ में पहला राकेट लांचिंग स्टेशन शुरू किया। इनके प्रयास से स्पूतनिक- लांच किया गया।
  9. श्री निवास रामानुजम – वे महान गणितज्ञ थे। उन्होंने संख्या संबंधी सिद्धांत दिए।
  10. डॉ. शांतिस्वरूप भटनागर – इन्होंने भारत में  12 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ स्थापित कीं। खाद्य पदार्थों के संसाधन पर काम किया।
  11. हरगोविंद खुराना – चिकित्सा व शरीर संबंधी विज्ञान के क्षेत्र में काम किया। प्रोटीन निर्माण आनुवांशिकी पर शोध किए।

प्रश्न 2.
भारत के मानचित्र में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली और कलकत्ता की स्थिति दर्शाएँ।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3.
पिछले बीस-पच्चीस वर्षों में हुए उन वैज्ञानिक खोजों, उपकरणों की सूची बनाइए, जिसने मानव जीवन बदल दिया है।
उत्तर:

डिजिटल कैमरा
डी.एन.ए. फिंगर प्रिंटिंग
मैमोरी कार्ड
स्मार्ट फोन
एम.पी. 3 डिजिटल आडियो प्लेयर
डिजिटल वीडियो रिकार्डर
प्लाज्मा टेलीविज़न

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Nomenclature of Aldehydes and Ketones

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Nomenclature of Aldehydes and Ketones

We have already learnt the IUPAC system of nomenclature of organic compounds in XIth standard. Let us apply the rules to name the following compounds.

Nomenclature of Aldehydes and Ketones img 1
Nomenclature of Aldehydes and Ketones img 1a
*PIN – Preferred IUPAC name

Aldehydes contain the carbonyl group bonded to at least one hydrogen atom. Ketones contain the carbonyl group bonded to two carbon atoms.

Naming Ketones

  1. Ketones take their name from their parent alkane chains.
  2. The common name for ketones are simply the substituent groups listed alphabetically +ketone.

They are named by finding the carbonyl group and identifying it with a location number, if necessary, then adding the suffix “- one.” The common name for ketones is determined by naming the alkyl groups attached to the carbonyl (in alphabetical order), then adding ‘ketone’.

For an aldehyde, drop the -e from the alkane name and add the ending -al. Methanal is the IUPAC name for formaldehyde, and ethanal is the name for acetaldehyde.

Nomeclature of ketone

The parent chain is numbered from the end that gives the carbonyl carbon the smaller number. The suffix -e of the parent alkane is changed to -one to show that the compound is a ketone.

Characteristics of Aldehydes and Ketones

Aldehydes and ketones are the class of organic compounds that have a carbonyl group i.e. carbon-oxygen double bond (-C=O). As they do not have any other reactive groups like -OH or -Cl attached to the carbon atom in the carbonyl group they are very simple compounds.

Functional Group of Ketone

Nomenclature of Aldehydes and Ketones. Aldehydes and ketones are organic compounds which incorporate a carbonyl functional group, C=O. The carbon atom of this group has two remaining bonds that may be occupied by hydrogen or alkyl or aryl substituents.

You will remember that the difference between an aldehyde and a ketone is the presence of a hydrogen atom attached to the carbon-oxygen double bond in the aldehyde. Ketones don’t have that hydrogen. Aldehydes are easily oxidized by all sorts of different oxidizing agents: ketones are not.

Aldehyde Formula

Aldehyde is a chemical compound with a functional group -CHO. The general formula of alkene is CnH2n+1 so the general formula for aldehyde will be CnH2n+1CHO or CnH2nO.

An aldehyde is similar to a ketone, except that instead of two side groups connected to the carbonyl carbon, they have at least one hydrogen (RCOH). The simplest aldehyde is formaldehyde (HCOH), as it has two hydrogens connected to the carbonyl group.

Combined with other functional group aldehydes and ketone are widespread in nature. Compounds such as cinnamaldehyde (cinnamon bark), vanillin (vanilla bean), Citra (lemongrass), helminthosporal (a fungal toxin), carvone (spearmint and caraway), camphor (camphor trees) are found chiefly in microorganisms or plants.