NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 15

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 15 नए इलाके में … खुशबू रचते हैं हाथ

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

(1) नए इलाके में

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) नए बसते इलाके में कवि रास्ता क्यों भूल जाता है? [CBSE]
(ख) कविता में कौन-कौन से पुराने निशानों का उल्लेख किया गया है?
अथवा
कवि अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए कौन-कौन-सी निशानियाँ ढूँढता है? [CBSE]
(ग) कवि एक घर पीछे या दो घर आगे क्यों चल देता है? [CBSE]
(घ) “वसंत का गया पतझड़’ और ‘बैसाख का गया भादों को लौटा’ से क्या अभिप्राय है?
(ङ) कवि ने इस कविता में समय की कमी की ओर क्यों इशारा किया है? [CBSE]
(च) इस कविता में कवि ने शहरों की किस विडंबना की ओर संकेत किया है?
अथवा
यह कविता किस ओर इशारा करती है, स्पष्ट कीजिए। (CBSE]
उत्तर:
(क) नए इलाके में कवि इसलिए रास्ता भूल जाता है, क्योंकि-

  • यहाँ रोज़ नए मकान बनते रहते हैं।
  • पुराने मकान ढहाकर नए मकान बनाए जाते हैं।
  • नए मकान बनाने के लिए पुराने पेड़ काटने से निशानी नष्ट हो जाती है।
  • खाली जमीन पर कोई नया मकान बन जाता है।

(ख) कविता में निम्नलिखित पुराने निशानों का उल्लेख हुआ है-

  • पीपल का पेड़
  • ढहा घर या खंडहर
  • जमीन का खाली टुकड़ा
  • बिना रंग वाले लोहे के फाटक वाला इकमंजिला मकान

(ग) कवि एक घर आगे या दो घर पीछे इसलिए चल देता है, क्योंकि नए बस रहे उस इलाके में एक ही दिन में काफ़ी बदलाव आ जाता है। वह अपने घर को पहचान नहीं पाता है कि वह सवेरे किस घर से गया था।

(घ)  ‘वसंत का गया पतझड़’ और ‘बैसाख का गया भादों को लौटा’ से यह अभिप्राय है कि वहाँ एक ही दिन में इतना कुछ नया बन गया है, जितना बनने में पहले नौ-दस महीने या साल भर लगते थे। सुबह का निकला कवि जब शाम को वापस आता है तो एक ही दिन में नौ-दस महीने के बराबर का बदलाव दिखाई देता है।

(ङ) कवि ने कविता में समय की कमी की ओर इसलिए संकेत किया है क्योंकि तेज़ी से आ रहे बदलाव के कारण मनुष्य की व्यस्तता भी बढ़ती जा रही है। इससे उसके पास समय की कमी होती जा रही है।

(च) इस कविता में कवि ने शहरों की उस विडंबना की ओर संकेत किया है, जिसमें शहरों में हो रहे बदलाव, खाली जमीनों में टूटे मकानों की जगह इतने नित नए मकान बनते जा रहे हैं कि सुबह घर से निकले आदमी को शाम के समय अपना मकान खोजना पड़ता है, फिर भी उसे अपना मकान नहीं मिल पाता है।

प्रश्न 2.
व्याख्या कीजिए-
(क) यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं
       एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया
उत्तर:
नगरों में बसने वाली नई बस्तियाँ इस तरह तेजी से बढ़ती चली जा रही हैं कि आदमी को अपना घर तक ढूँढना कठिन हो गया है। वह कुछ ही दिन बाद अपनी बस्ती में लौटकर आए तो रास्ते तक भूल जाता है। उसकी पुरानी निशानियाँ देखते ही देखते नष्ट हो जाती हैं। इसलिए उसकी पुरानी स्मृतियाँ और निशानियाँ किसी काम नहीं आतीं। दुनिया इतनी तेजी से बदल-बन रही है कि जो निर्माण एक दिन पहले किया जाता है, दूसरे दिन तक पुराना पड़ चुका होता है। उसके बाद नए-नए निर्माण और खड़े हो जाते हैं।

(ख)  समय बहुत कम है तुम्हारे पास।
        आ चला पानी ढहा आ रहा अकास
        शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देखकर
उत्तर:
देखिए व्याख्या क्र. 2..

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
पाठ में हिंदी महीनों के कुछ नाम आए हैं। आप सभी हिंदी महीनों के नाम क्रम से लिखिए।
उत्तर:
हिंदी महीनों के नाम-

  1. चैत्र,
  2. बैसाख,
  3. ज्येष्ठ,
  4. आषाढ़,
  5. श्रावण,
  6. भाद्रपक्ष,
  7. आश्विन,
  8. कार्तिक,
  9. मार्गशीर्ष,
  10. पौष,
  11. माघ,
  12. फाल्गुन

(2) खुशबू रचते हैं हाथ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) “खुशबू रचनेवाले हाथ’ कैसी परिस्थितियों में तथा कहाँ-कहाँ रहते हैं?
(ख) कविता में कितने तरह के हाथों की चर्चा हुई है?
(ग) कवि ने यह क्यों कहा है कि ‘खुशबू रचते हैं हाथ’?
(घ) जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल कैसा होता है?
(ङ) इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
(क) खुशबू रचनेवाले हाथ अत्यंत कठोर परिस्थितियों में गंदी बस्तियों में, गलियों में, कूड़े के ढेर के इर्द-गिर्द तथा नाले के किनारे रहते हैं। वे अस्वच्छ एवं प्रदूषित वातावरण में जीवन बिताते हैं। वे इस दुर्गंधमय वातावरण में रहने को विवश हैं। वे सामाजिक और आर्थिक विषमता के शिकार हैं। दूसरों को खुशबू देने का काम करने । वाले इस प्रकार बदहाली का जीवन बिताते हैं।

(ख) कविता में निम्नलिखित तरह के हाथों की चर्चा हुई है-

  1. उभरी नसोंवाले अर्थात् वृद्ध हाथ।
  2. घिसे नाखूनोंवाले हाथ श्रमिक वर्ग को प्रतीक है।
  3. पीपल के पत्ते जैसे नए-नए हाथ अर्थात् छोटे बच्चों के कोमल हाथ।
  4. जूही की डाल जैसे खुशबूदार हाथ अर्थात् नवयुवतियों के सुंदर हाथ।
  5. गंदे कटे-पिटे हाथ।
  6. जखम से फटे हुए हाथ।

(ग) कवि ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि इन गरीब मजदूरों के हाथ सुगंधित अगरबत्तियों का निर्माण करते हैं। तथा हमारे जीवन को सुख-सुविधाएँ उपलब्ध कराकर खुशबू से महकाते हैं जिससे ऐसा लगता है कि अत्यंत प्रदूषित वातावरण में रहकर भी इनके हाथ हमारे लिए सुख-सुविधाओं से भरी वस्तुओं का निर्माण करते हैं। जिससे समस्त प्राणियों के जीवन में सुगंध फैल जाती है। ये लोग स्वयं बदहाली का जीवन बिताकर दूसरे लोगों के जीवन में खुशहाली लाते हैं। इन शब्दों द्वारा कवि ने श्रमिकों के श्रम का गुणगान किया है।

(घ) जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं वहाँ का वातावरण अत्यंत गंदगी भरा होता है। चारों ओर नालियाँ तथा कूड़े-करकट का ढेर जमा होता है। चारों ओर बदबू फैली होती है। ये सुगंधित अगरबत्तियाँ बनाने वाले ऐसे गंदे वातावरण में रहकर भी दूसरों के जीवन में खुशबू बिखेरते हैं पर ऐसे वातावरण में, ऐसी भयावह स्थितियों में रहनी इनकी विवशता है।

(ङ) इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य यह है कि हमारे समाज में सुंदरता की रचना करनेवाले गरीब
और उपेक्षित लोगों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करना है ताकि आम लोग इन गरीब मजदूरों के जीवन की वास्तविकता को जान लें और समाज में फैली विषमताओं तथा भेदभावों को मिटाने की कोशिश करें। मजदूरों और कारीगरों की दुर्दशा का चित्रण करना तथा लोगों में उनके उद्धार की चेतना जगाना भी है। कवि अगरबत्तियाँ बनानेवाले कारीगरों का प्रदूषित वातावरण में रहना दिखाकर यह कहना चाहता है कि इनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना चाहिए ताकि इन्हें भी जीवन जीने के लिए। स्वच्छ वातावरण मिल सके।

प्रश्न 2.
व्याख्या कीजिए-
(क)
(i)  पीपल के पत्ते-से नए-नए हाथ
      जूही की डाल-से खुशबूदार हाथ
उत्तर:
अगरबत्ती बनाने वाले हाथों में कुछ के हाथ पीपल के नए-नए पत्तों के समान कोमल हैं। आशय यह है कि कुछ नन्हे-नन्हे बच्चे भी अगरबत्ती बनाने के काम में लगे हुए हैं। कुछ हाथ ऐसे हैं जिनमें से जूही की डालों जैसी खुशबू आती है। आशय यह है कि कुछ सुंदर युवतियाँ भी अगरबत्तियाँ बनाने में लगी हुई हैं।

(ii) दुनिया की सारी गंदगी के बीच
      दुनिया की सारी खुशबू
      रचते रहते हैं हाथे
उत्तर:
यद्यपि अगरबत्ती बनाने वाले कारीगर दुनिया भर को सुगंधित अगरबत्ती प्रदान करते हैं और वातावरण में सुगंध फैलाते हैं किंतु उन्हें स्वयं दुनिया भर की गंदगी के बीच रहना पड़ता है। उनके चारों ओर गंदगी का ही साम्राज्य रहता है। वे शोषित हैं, पीड़ित हैं।

(ख) कवि ने इस कविता में ‘बहुवचन’ का प्रयोग अधिक किया है? इसका क्या कारण है?
उत्तर:
कविता में ‘हाथ’ के लिए बहुवचन का प्रयोग किया गया है। इसके माध्यम से कवि बताना चाहता है कि यहाँ एक कारीगर या एक मजदूर की बात नहीं की जा रही। यह समस्या सब मज़दूरों की है।

(ग) कवि ने हाथों के लिए कौन-कौन से विशेषणों का प्रयोग किया है?
उत्तर:
कवि ने हाथों के लिए निम्नलिखित विशेषणों का प्रयोग किया है-

उभरी नसोंवाले
घिसे नाखूनोंवाले
पीपल के पत्ते-से नए-नए
जूही की डाल-से खुशबूदार
गंदे कटे-पिटे
ज़ख्म से फटे हुए।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
अगरबत्ती बनाना, माचिस बनाना, मोमबत्ती बनाना, लिफ़ाफ़े बनाना, पापड़ बनाना, मसाले कूटना आदि लघु उद्योगों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर:
आस पड़ोस में रहने वाले किसी मज़दूर या कर्मचारी से बात करके जानिए और उनकी फैक्ट्री में जाकर देखिए। संभव हो तो घर में बनाने का प्रयास कीजिए।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 14

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर.

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
‘इस विजन में ………… अधिक है’-पंक्तियों में नगरीय संस्कृति के प्रति कवि का क्या आक्रोश है। और क्यों?
उत्तर:
‘इस विजन में …… अधिक है’ पंक्तियों में नगरीय संस्कृति के प्रति कवि का आक्रोश यह है कि नगरों में सब अपनी रोटी-रोजी और स्वार्थ पूर्ति में इतने रम गए हैं कि उन्हें व्यवसाय और पैसों के अलावा कुछ नज़र नहीं आता है। इस आक्रोश का कारण यह है कि लोग पैसों के चक्कर में प्रेम, सौंदर्य, सहज मानवीय व्यवहार भूलने के साथ प्रकृति से भी दूर होते चले गए हैं।

प्रश्न 2.
सरसों को ‘सयानी’ कहकर कवि क्या कहना चाहता होगा? [CBSE][Imp.]
उत्तर:
कवि देखता है कि खेत में चना, अलसी आदि छोटे हैं वही सरसों उनकी तुलना में बढ़कर लंबी और बड़ी हो गई है। उसमें पीले फूल भी नजर आ रहे हैं। यह देख कवि सरसों को सयानी कहना चाहता है। वह अन्य फसलों से बढ़कर हाथ पीले कर विवाह मंडप में जाने को तैयार है।

प्रश्न 3.
अलसी के मनोभावों का वर्णन कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
अलसी प्रेमातुर नायिका है। उसकी कमर लचीली और शरीर दुबला-पतला है। वह अपने सिर पर नीले फूल धारण करके कह रही है कि इन फूलों को जो छुएगा उसे वह अपने हृदय का दान दे देगी।

प्रश्न 4.
अलसी के लिए ‘हठीली’ विशेषण का प्रयोग क्यों किया गया है?
उत्तर:
अलसी के लिए हठीली विशेषण का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि-

  1. किसान ने उसे चने से अलग कतार में बोया होगा, पर वह हठपूर्वक चने के पास उग आई है।
  2. दुबले शरीर वाली अलसी बार-बार हवा के झोंके से झुक जाती है और उठकर खड़ी हो जाती है और फिर चने के बीच नजर आने लगती है।
  3. उसकी हठ है कि उसके सिर पर सजे नीले फूलों को छूने वाले को ही अपना दिल दे देगी।

प्रश्न 5.
‘चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा’ में कवि की किस सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है? [Imp.]
उत्तर:
पोखर के पानी में सूर्य का प्रतिबिंब बनना एक प्राकृतिक एवं स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे लोग सदियों से देखते आए हैं। कवि को यही प्रतिबिंब चाँदी के बड़े से गोल खंभे के रूप में दिखाई देता है। इससे कवि की सर्वथा अनूठी एवं सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है।

प्रश्न 6.
कविता के आधार पर हरे चने’ का सौंदर्य अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।
उत्तर:
हरे चने का पौधा आकार में छोटा है। वह अपने सिर पर गुलाबी रंग की पगड़ी बाँधे खड़ा है। उसे देखकर लगता है कि वह दूल्हे के रूप में सजकर खड़ा है।

प्रश्न 7.
कवि ने प्रकृति का मानवीकरण कहाँ-कहाँ किया है?
उत्तर:
‘ग्राम श्री’ कविता में एक नहीं अनेक स्थानों पर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है; जैसे-

  1. बाँधे मुरैठा शीश पर
    छोटे गुलाबी फूल को
    सज कर खड़ा है।
  2. नील फूले फूल को सिर पर चढ़ाकर
    कह रही है, जो छुए यह
    हूँ हृदय का दान उसको।
  3. हाथ पीले कर लिए हैं।
    व्याह मंडप में पधारी।
  4. फाग गाता मास फागुन
    आ गया है आज जैसे।
  5. प्रकृति का अनुराग-अंचलं हिल रहा है।
  6. हैं कई पत्थर किनारे
    पी रहे चुपचाप पानी
  7. देखते ही मीन चंचल
    ध्यान-निद्रा त्यागता है।

प्रश्न 8.
कविता में से उन पंक्तियों को ढूंढिए जिनमें निम्नलिखित भाव व्यंजित हो रहा है और चारों तरफ़ सूखी और उजाड़ जमीन है लेकिन वहाँ भी तोते का मधुर स्वर मन को स्पंदित कर रहा है।
उत्तर:
चित्रकूट की अनगढ़ चौड़ी
कम ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ
दूर दिशाओं तक फैली हैं।
बाँझ भूमि पर
इधर-उधर रीवा के पेड़
काँटेदार कुरूप खड़े हैं।
सुन पड़ता है।
मीठा-मीठा रस टपकाता
सुग्गे का स्वर
टें टें हें टें;

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 9.
‘और सरसों की न पूछो’-इस उक्ति में बात को कहने का एक खास अंदाज है। हम इस प्रकार की शैली का प्रयोग कब और क्यों करते हैं?
उत्तर:
‘और सरसों की न पूछो’-इस प्रकार की शैली का प्रयोग हम किसी की प्रशंसा, आश्चर्य, निंदा करने का भाव व्यक्त करने के लिए करते हैं। उदाहरणार्थ-दशहरी आम की मिठास बताने के लिए विक्रेता कह देता है- “इस आम की मिठास न पूछो।” इस प्रकार की शैली का प्रयोग हम भावातिरेक की दशा में करते हैं।

प्रश्न 10.
काले माथे और सफ़ेद पंखों वाली चिड़िया आपकी दृष्टि में किस प्रकार के व्यक्तित्व का प्रतीक हो सकती है?
उत्तर:
काले माथे और सफेद पंखों वाली चिड़िया किसी सफेदपोश व्यक्तित्व का प्रतीक हो सकती है। इसी चिड़िया की तरह ही वह भी अपने शिकार पर नज़र रखता है। वह परोपकार, समाजसेवा आदि का दावा करता फिरता है परंतु अवसर मिलते ही अपना काम कर जाता है।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 11.
बीते के बराबर, ठिगना, मुरैठा आदि सामान्य बोलचाल के शब्द हैं, लेकिन कविता में इन्हीं से सौंदर्य उभरा है और कविता सहज बन पड़ी है। कविता में आए ऐसे ही अन्य शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर:
कविता में आए सामान्य बोलचाल के कुछ शब्द हैं चंद गहना, मेड़, नीले फूले, सयानी, फाग, फागुन, पोखर, चकमकाता, टाँग, माथ, उजली, चट, झपाटे, चटुल, औ, अनगढ़, बाँझ, सुग्गा, टें टें दें टें, जुगुल, चुप्पे-चुप्पे।

प्रश्न 12.
कविता को पढ़ते समय कुछ मुहावरे मानस-पटल पर उभर आते हैं, उन्हें लिखिए और अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।
उत्तर:
कविता में आए कुछ मुहावरे निम्नलिखित हैं-

  1. बीता भर                  जरा-सा, छोटा-सा   –  बीता-भर का दिखने वाला यह साँप बहुत ही जहरीला है।
  2. सिर चढ़ाना              बढ़ावा देना            –  प्यार में संतान को इतना मत सिर पर चढ़ाओ कि वह एक दिन
    परिवार के लिए मुसीबत बन जाए।
  3. हृदय का दान देना    समर्पित होना         –  सुमन तो कब से हृदय का दान दे चुकी थी।
  4. हाथ पीले करना       विवाह करना         –  दहेज-प्रथा ने गरीब माँ-बाप की चिंता बढ़ा दी है कि वह
    अपनी बेटियों का हाथ कैसे पीला करें।
  5. गले में डालना          जल्दी से खाना       –  ठेकेदार को आता देख मज़दूर ने जल्दी से रोटियाँ गले में
    डालीं और काम पर लग गया।
  6. हृदय चीरना            दुख पहुँचाना          –  कठोर बातें हृदय चीर देती हैं।
  7. प्यास बुझाना          तृप्त होना               –  कुएँ के शीतल जल ने हम दोनों की प्यास बुझा दी।
  8. झपाटे मारना          अचानक टूट पड़ना –  बाज ने झपाटे मारकर चिड़िया के बच्चे को दबोचा और
    उड़ गया।

पाठेतर सक्रियता 

• प्रस्तुत अपठित कविता के आधार पर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

देहात का दृश्य

अरहर कल्लों से भरी, हुई फलियों से झुकती जाती है,
उस शोभासागर में कमला ही कमला बस लहराती है।
सरसों दानों की लड़ियों से दोहरी-सी होती जाती है,
भूषण का भार सँभाल नहीं सकती है कटि बलखाती है।
है चोटी उस की हिरनखुरी* के फूलों से गूंथ कर सुंदर,
अन-आमंत्रित आ पोलंगा है इंगित करता हिल-हिल कर।
हैं मसें भींगती गेहूँ की तरुणाई फूटी आती है,
यौवन में माती मटरबेलि अलियों से आँख लड़ाती है।
लोने-लोने वे घने चने क्या बने-बने इठलाते हैं,
हौले-हौले होली गा-गा धुंघरू पर ताल बजाते हैं।
हैं जलाशयों के ढालू भीटों ** पर शोभित तृण शालाएँ,
जिन में तप करती कनक वरण हो जाग बेलि-अहिबालाएँ।
हैं कंद धरा में दाब कोष ऊपर तक्षक बन झूम रहे,
अलसी के नील गगन में मधुकर दृग-तारों से घूम रहे।
मेथी में थी जो विचर रही तितली सो सोए में सोई,
उस की सुगंध-मादकता में सुध-बुध खो देते सब कोई।

  1. इस कविता के मुख्य भाव को अपने शब्दों में लिखिए।
  2. इन पंक्तियों में कवि ने किस-किसका मानवीकरण किया है?
  3. इस कविता को पढ़कर आपको किस मौसम का स्मरण हो आता है?
  4. मधुकर और तितली अपनी सुध-बुध कहाँ और क्यों खो बैठे?

* हिरनखुरी – बरसाती लता
** भीटा – ढूह, टीले के शक्ले की ज़मीन

उत्तर:

(1) अरहर की फलियाँ पौधों पर लद आई हैं। सरसों के पौधे अपने दानों के भार से झुके हुए हैं। हिरनखुरी के फूल खिल आए हैं। गेहूँ के पौधे विकसित हो चले हैं। मटरबेलि पर भंवरे मँडराने लगे हैं। चने के घने झाड़ सुंदर प्रतीत हो रहे हैं। तालाबों के ढलवाँ किनारों पर घास के गुंफ उग आए हैं। उनमें कुछ बेलें भी लहराने लगी हैं। मूली, गाजर, आलू, शकरकंदी जैसे कंदमूल उग रहे हैं। अलसी के पौधों पर नीले फूल खिल चुके हैं। उन पर भंवरे गुंजार कर रहे हैं। मेथी की फसलों में तितलियाँ सोई हुई हैं। उसकी सुगंध की मादकता से सभी प्रसन्न हैं।

(2) इनमें निम्नलिखित का मानवीकरण किया गया है

  • अरहर – अरहर कल्लों से भरी हुई फलियों से झुकती जाती है।
  • सरसों –  सरसों दानों की लड़ियों से दोहरी-सी होती जाती है। | भूषण का भार सँभाल नहीं सकती है कटि बल खाती है।
  • गेहूँ – हैं मसें भीगतीं गेहूँ की तरुणाई फूटी आती है। मटरबेलि-यौवन में माती मटरबेलि अलियों से आँख लड़ाती है।
  • चने – लोने-लोने वे घने चने क्या बने-बने इठलाते हैं।
  • बेलि – जिनमें तप करती कनक वरण हो जाग बेलि-अहिबालाएँ।

(3) इस कविता को पढ़कर शीतकालीन मौसम का स्मरण हो आता है। इन्हीं दिनों में ये फसलें उगती हैं।

(4) मधुकर अलसी के नीले फूलों पर मुग्ध होकर अपनी सुध-बुध खो बैठे।
तितली मेथी की सुगंध से मोहित होकर अपनी सुध-बुध खो बैठी।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 2

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार.

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

प्रश्न 1.
किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है?
उत्तर:
किसी व्यक्ति की पोशाक देखकर हमें यह पता चल जाता है कि उस व्यक्ति की हैसियत क्या है तथा वह व्यक्ति किस श्रेणी का है।

प्रश्न 2.
खरबूजे बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूजे क्यों नहीं खरीद रहा था? [CBSE]
उत्तर:
खरबूजे बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूजे इसलिए नहीं खरीद रहा था क्योंकि वह फुटपाथ पर बैठी हुई फफक-फफककर रो रही थी।

प्रश्न 3.
उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा?
उत्तर:
उस स्त्री को देखकर लेखक का मन इतना व्यथित हो गया कि वह उसके पास जाकर रोने का कारण पूछना चाहता था, पर उसकी पोशाक उसे ऐसा करने से रोक रही थी।

प्रश्न 4.
उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था? [CBSE]
उत्तर:
स्त्री का लड़का साँप से डसे जाने के कारण मर गया।

प्रश्न 5.
बुढ़िया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता?
उत्तर:
बुढ़िया का बेटा ही घर में कमाऊ सदस्य था। वही घर का गुजारा चलाता था। उसकी मृत्यु के बाद घर में ऐसा कोई नहीं था, जो कमाकर उधार लौटा देता, इसलिए बेटे के बिना बुढ़िया को कौन उधार देता।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्त्व है? [CBSE]
उत्तर:
मनुष्य के जीवन में पोशाक को महत्त्व है। उसकी पोशाक ही समाज में उसका दर्जा तथा अधिकार तय करती है। पोशाक के कारण कभी उसके सब रास्ते खुल जाते हैं और कभी अड़चनें आ घेरती हैं।

प्रश्न 2.
पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है? [CBSE]
अथवा
खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुकने से रोकती है, क्यों? [CBSE]
उत्तर:
पोशाक हमारे लिए उस समय बंधन और अड़चन बन जाती है जब हम अपने से निचले स्तर के व्यक्ति के दुख में शामिल होकर सहानुभूति प्रकट करना चाहते हैं तब पोशाक हमारे आड़े आ जाती है।

प्रश्न 3.
लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया? [CBSE]
उत्तर:
लेखक ने देखा कि वह स्त्री फुटपाथ पर बैठकर फफक-फफककर रोए चली जा रही थी। लेखक की पोशाक तथा स्थिति ऐसी थी कि उसके साथ बाजार में बैठकर उसका हाल-चाल जानना कठिन था। इससे उसे भी संकोच होता तथा लोग भी व्यंग्य करते। इसलिए वह चाहकर भी उसके रोने का कारण नहीं जान पाया।

प्रश्न 4.
भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था? [CBSE]
उत्तर:
बुढिया के पास शहर के निकट डेढ़ बीघा जमीन थी, जिसमें उसका बेटा भगवाना सब्ज़ियाँ और मौसमी फल उगाता था। वह उन्हें बाजार में बेच देता था और होने वाली आय से गुजारा चलाता था।

प्रश्न 5.
लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे बेचने क्यों चल पड़ी? ‘ [CBSE 2012]
उत्तर:
लड़के की मृत्यु के अगले ही दिन उसकी माँ के सामने पोतों की भूख और बहू की बीमारी की समस्या आ खड़ी हुई। पोते-पोतियाँ भूख से बिलबिला रहे थे और बहू बुखार से तप रही थी। घर में पैसा नहीं था। इसलिए वह मजबूरी में पुत्र शोक के अगले ही दिन खरबूजे बेचने चल पड़ी।

प्रश्न 6.
बुढ़िया के दुःख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?
उत्तर:
बुढ़िया का दुख देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद इसलिए आ गई क्योंकि बुढिया अपने मृत बेटे का शोक न मना सकी, जबकि उसके पड़ोस की संभ्रांत महिला अपने बेटे की मृत्यु के बाद अढाई मास तक बिस्तर से भी न उठ सकी थी।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1.
बाज़ार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
बाज़ार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में तरह-तरह की बातें बना रहे थे। कोई उसे बेहया कह रहा था। किसी ने कहा कि उस स्त्री की नीयत ही ठीक नहीं है। एक आदमी ने कहा कि यह कमीनी औरत है जिसके लिए बेटा-बेटी, खसम-लुगाई, धर्म-ईमान कुछ नहीं है। उसके लिए रोटी का टुकड़ा ही सब कुछ है। एक लाला जी ने कहा कि यह औरत औरों का धर्म-ईमान बिगाड़कर अँधेर मचा रही है। पुत्र शोक के कारण यह सूतक में है। इसलिए उसे इन दिनों में कोई सामान नहीं छूना चाहिए।

प्रश्न 2.
पास-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को क्या पता चला? [CBSE]
उत्तर:
पास-पड़ोस की दुकानों पर पूछने से लेखक को यह पता चला कि बुढिया का तेईस वर्षीय जवान लड़का था। घर में उसकी बहू और पोता-पोती है। उसका लड़का शहर के पास स्थित डेढ़ बीघा जमीन पर कछियारी करता था। इसमें उगने वाली सब्जियों और फलों को बेचकर वह घर का गुजारा चलाता था। परसों जब बुढ़िया का लड़का मुँह अँधेरे खरबूजे तोड़ रहा था तभी गीली मेड़ की तरावट में विश्राम करते साँप पर उसका पैर पड़ गया। उसे साँप ने डॅस लिया। बुढ़िया ने उसके इलाज के लिए झाड़-फेंक और पूजा-अर्चना कराई, पर सब व्यर्थ। इससे उसके बेटे की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 3.
लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया माँ ने क्या-क्या उपाय किए? [CBSE]
उत्तर:
बुढ़िया का लड़का भगवाना साँप के डसने से बेहोश हो गया था। जैसे ही बुढ़िया को पता चला, वह उसका विष दूर करने के लिए गाँव के ओझा को बुला लाई। ओझा ने खूब झाड़-फेंक की। परंतु साँप का विष दूर न हो सका। बुढ़िया जो कर सकती थी, उसने किया। उसने ओझा को प्रसन्न करने के लिए नागराज की पूजा भी की। घर में जो आटा और अनाज था, वह भी ओझा के हवाले कर दिया। परंतु इतना करने पर भी उसका पुत्र बच न सका।

प्रश्न 4.
लेखक ने बुढ़िया के दु:ख का अंदाज़ा कैसे लगाया? [CBSE]
उत्तर:
लेखक ने रोती बुढ़िया के दुख का अंदाजा अपने पड़ोस की उस संभ्रांत महिला को याद करके लगाया। उस संभ्रांत महिला का बेटा भी मर गया था। उसके दुख से दुखी महिला अढाई महीने तक पलंग पर पड़ी रही। वह हर दस पंद्रह मिनट में बेहोश हो जाती थी और बेहोश न होने पर आँखों से आँसू बहते रहते थे। उसके सिरहाने दो-दो डॉक्टर सदैव बैठे रहते थे। हर दम उसके सिर पर बरफ़ रखी जाती थी। ऐसी दशा को याद करके लेखक ने जान लिया कि इस बुढ़िया का दुख भी उतना ही गहरा है, पर उसके पास शोक मनाने का समय नहीं है।

प्रश्न 5.
इस पाठ का शीर्षक ‘दु:ख का अधिकार’ कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
इस पाठ का शीर्षक है-‘दुःख का अधिकार’। यह शीर्षक एकदम उचित है। लेखक यह कहना चाहता है कि यद्यपि दुःख प्रकट करना हर व्यक्ति का अधिकार है। परंतु हर कोई इसे संभव नहीं कर पाता। एक महिला संपन्न है। उस पर कोई जिम्मेदारी नहीं है। उसके पास पुत्र शोक मनाने के लिए डॉक्टर हैं, सेवा-कर्मी हैं, साधन हैं, धन है, समय है। परंतु गरीब लोग अभागे हैं। वे चाहें भी तो शोक प्रकट करने के लिए आराम से दो आँसू नहीं बहा सकते। सामने खड़ी भूख, गरीबी और बीमारी नंगा नाच करने लगती है। अतः दु:ख प्रकट करने का अधिकार गरीबों को नहीं है।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 1.
जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिर जाने देतीं उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है।
अथवा
लेखक ने पतंग का उदाहरण क्यों दिया है? स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2012]
उत्तर:
उक्त पंक्ति का आशय यह है कि जब व्यक्ति ज्यादा महँगी और अच्छी पोशाक पहन लेता है तो उसकी सामाजिक स्थिति बढ़ जाती है। वह संपन्न व्यक्तियों की श्रेणी में आ जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति जब अपने से कमजोर स्थिति वाले व्यक्ति के दुख के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त करना चाहता है तो उसकी पोशाक उसे गरीब व्यक्ति के स्तर तक नहीं जाने देती है। यह स्थिति वैसी होती है जैसे हवा की लहरों के कारण पतंग सीधे नीचे जमीन पर नहीं आ पाती है।

प्रश्न 2.
इनके लिए बेटा-बेटी, खसम-लुगाई, धर्म-ईमान सब रोटी का टुकड़ा है।
उत्तर:
एक राह चलता आदमी भगवाना की माँ को बेटे की मृत्यु के अगले ही दिन ख़रबूजे बेचते देखकर कहता है-ये गरीब लोग कमीने होते हैं। इनका अपने बेटा-बेटी से, पति-पत्नी से या धर्म-ईमान से कोई लगाव नहीं होता। ये केवल एक रोटी के टुकड़े के लिए अपनी सारी भावनाएँ तथा आस्थाएँ बेच देते हैं।

प्रश्न 3.
शोक करने, गम मनाने के लिए भी सहूलियत चाहिए और ……….. दुःखी होने का भी एक अधिकार होता है। [CBSE 2012]
उत्तर:
जब किसी गरीब और विवश व्यक्ति के घर में भूख से रोते-बिलखते बच्चे, भूखी और बीमार कोई अन्य सदस्य हो तो शोक मनाने की बात कैसे सोची जा सकती है, शोक कैसे मनाया जा सकता है। उन रोते बिलखते बच्चों के लिए रोटी और बीमार सदस्य की दवा का प्रबंध होना आवश्यक है। ऐसा करने के कारण गरीब व्यक्ति को शोक मनाने की सुविधा भी नहीं। ऐसे में वह क्या करे। दुखी होने का अधिकार भी उन्हीं लोगों के पास है जिनके पास धन-दौलत और तरह-तरह की सुविधाएँ हैं।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नांकित शब्द-समूहों को पढ़ो और समझो

  1. कङ्घा, पतङ्ग, चञ्चल, ठण्डा, सम्बन्ध।
  2. कंघा, पतंग, चंचल, ठंडा, संबंध।
  3. अक्षुण्ण, सम्मिलित, दुअन्नी, चवन्नी, अन्न।
  4. संशय, संसद्, संरचना, संवाद, संहार।
  5. अँधेरा, बाँट, मुँह, ईंट, महिलाएँ, में, मैं।

उत्तर:
ध्यान दो कि ङ, ज्, ण, न् और म् ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं। इनके लिखने की विधियाँ तुमने ऊपर देखीं-इसी रूप में या अनुस्वार के रूप में। इन्हें दोनों में से किसी भी तरीके से लिखा जा सकता है और दोनों ही शुद्ध हैं। हाँ, एक पंचमाक्षर जब दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा; जैसे-अम्मा, अन्न आदि। इसी प्रकार इनके बाद यदि अंतस्थ य, र, ल, व और ऊष्म श, ष, स, ह आदि हों तो अनुस्वार का प्रयोग होगा, परंतु उसका उच्चारण पंचम वर्गों में से किसी भी एक वर्ष की भाँति हो सकता है; जैसे-संशय, संरचना में ‘न्’, संवाद में ‘म्’ और संहार में ‘ङ’।
( ं) यह चिह्न है अनुस्वार का और ( ँ) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमशः बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार को प्रयोग व्यंजन के साथ होता है अनुनासिक का स्वर के साथ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए|

  1. ईमान        …………………………..
  2. बदन          …………………………..
  3. अंदाज़ा       …………………………..
  4. बेचैनी         …………………………..
  5. गम            …………………………..
  6. दर्जा           …………………………..
  7. ज़मीन        …………………………..
  8. ज़माना        …………………………..
  9. बरकत        …………………………..

उत्तर: 

  1. ईमान     –    सच्चाई
  2. बदन      –    शरीर, देह, गात
  3. अंदाजा   –    अनुमान
  4. बेचैनी     –    तड़प, व्याकुलता
  5. गम        –    दुःख, वेदना, कष्ट, पीड़ा
  6. दर्जा       –    श्रेणी
  7. ज़मीन     –    धरती, भूमि
  8. ज़माना    –    युग, समय
  9. बरकत     –   वृद्धि, उन्नति, विकास

प्रश्न 3.
निम्नलिखित उदाहरण के अनुसार पाठ में आए शब्द-युग्मों को छाँटकर लिखिए-
उदाहरण : बेटा-बेटी ।
उत्तर:
पाठ में आए संबंधवाची शब्द-युग्म निम्नलिखित हैं-
बेटा-बेटी, खसम-लुगाई, पोता-पोती।
अन्य शब्द-युग्म इस प्रकार हैं-
धर्म-ईमान, मरे-जिए, आते-जाते, दान-दक्षिणा, चूनी-भूसी, दुअन्नी-चवन्नी।

प्रश्न 4.
पाठ के संदर्भ के अनुसार निम्नलिखित वाक्यांशों की व्याख्या कीजिए-
बंद दरवाजे खोल देना, निर्वाह करना, भूख से बिलबिलाना, कोई चारा न होना, शोक से द्रवित हो जाना।
उत्तर:

  1. बंद दरवाजे खोल देना –
    इसका अर्थ है-जहाँ पहले सुनवाई नहीं होती थी, वहाँ अब बात सुनी जाती है। जहाँ पहले तिरस्कार होता था, वहाँ अब मान-सम्मान होता है। यदि आदमी के कपड़े अच्छे हों तो लोग कपड़े देखकर स्वागत-सत्कार करते हैं।
  2. निर्वाह करना –
    पेट भरना, घर का खर्च चलाना। भूख से बिलबिलाना-भूख के कारण तड़पना। भगवाना के बच्चे अगले ही दिन भूख से तड़पने लगे।
  3. कोई चारा न होना –
    कोई उपाय न होना। भगवाना की माँ के पास अपने पोता-पोती का पेट भरने के लिए तथा बहू की दवा-दारू करने के लिए पैसे नहीं थे। कोई उधार भी नहीं देता था। अतः उसके पास खरबूजे बेचने के सिवाय और कोई चारा न था।
  4. शोक से द्रवित हो जाना –
    दुःख को देखकर करुणा से पिघल जाना। जब लोगों ने लेखक के पड़ोस में रहने वाली संभ्रांत महिला के दु:ख को देखा तो वे शोक से द्रवित हो गए।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्द-युग्मों और शब्द-समूहों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(क)

  1. छन्नी-ककना
  2. अढ़ाई-मास
  3. पास-पड़ोस
  4. दुअन्नी-चवन्नी
  5. मुंह-अँधेरे
  6. झाड़ना-फेंकना।

उत्तर:

  1. छन्नी-ककना – गरीब बुढ़िया को अपने बेटे का कफ़न खरीदने के लिए अपनी छन्नी-ककना भी बेचना पड़ा।
  2. अढ़ाई मास – संभ्रांत महिला पुत्र-शोक में अढाई मास तक पलंग पर रही।
  3. पास पड़ोस – लेखक ने पास पड़ोस के दुकानदारों से गरीब महिला के दु:ख का कारण जाना।
  4. दुअन्नी-चवन्नी – महिला को गरीब जानकर किसी पड़ोसी ने उसे दुअन्नी-चवन्नी भी उधाएँ न दी।
  5. मुँह अँधेरे – अखबार बेचने वाले मुँह अँधेरे ही चलकर अखबार बाँट आते हैं।
  6. झाड़ना-फेंकना – ओझा साँप के काटे का इलाज झाड़-फेंक करके करता है।

(ख)

  1. फफक-फफककर
  2. बिलख-बिलखकर
  3. तड़प-तड़पकर
  4. लिपट-लिपटकर

उत्तर:

  1. फफक-फफककर – बुढिया खरबूजे बेचते समय फफक-फफककर रो रही थी।
  2. बिलख-बिलखकर – पुत्र को मृत देखकर उसकी माँ बिलख-बिलखकर रोई।
  3. तड़प-तड़पकर – साँप से काटे जाने पर भगवाना ने तड़प-तड़पकर प्राण दे दिए।
  4. लिपट-लिपटकर – दुखियारी माँ अपने मृत बेटे के शरीर से लिपट-लिपटकर रोई।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्य-संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और इस प्रकार के कुछ और वाक्य बनाइए-
(क)

  1. लड़के सुबह उठते ही भूख से बिलबिलाने लगे।
  2. उसके लिए तो बजाज की दुकान से कपड़ा लाना ही होगा।
  3. चाहे उसके लिए माँ के हाथों के छन्नी-ककना ही क्यों न बिक जाएँ। |

उत्तर:

  • गरीबों को हर हाल में मेहनत करनी ही पड़ती है।
  • न चाहते हुए भी ओझा को झाड़-फेंक कर बुलाना ही पड़ा।

(ख)

  1. अरे जैसी नीयत होती है, अल्ला भी वैसी ही बरकत देता है।
  2. भगवाना जो एक दफे चुप हुआ तो फिर न बोला।

उत्तर:

  • मनुष्य जैसा काम करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है।
  • कृष्ण मथुरा जो गए, तो वापस नहीं लौटे।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
व्यक्ति की पहचान उसकी पोशाक से होती है। इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य की पहली पहचान उसकी पोशाक से होती है। गरीब-अमीर, गंभीर-चंचल, सब प्रकार के लोगों की अलग पहचान होती है। सुदामा की पोशाक देखकर कृष्ण के द्वारपालों ने उसे अंदर ही नहीं आने दिया। एक राजा का मित्र भला फटेहाल कैसे हो सकता है?

प्रश्न 2.
यदि आपने भगवाना की माँ जैसी किसी दुखिया को देखा है तो उसकी कहानी लिखिए।
उत्तर:
मेरे पड़ोस में रहने वाली एक विधवा के तीन बच्चे हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं है। आसपास के लोग उसे सहयोग देने की बजाय उस पर ताने कसते हैं। वे कहते हैं-यह मनहूस अपने पति को खा गई। वह दिनभर बर्तन माँजकर बच्चों को पढ़ाती है। कभी-कभी घर में अन्न का दाना भी नहीं होता तो उसका दुख देखकर मेरे आँसू निकल आते हैं। मैं उसे कुछ सहायता देना चाहूँ तो वह स्वीकार भी नहीं करती।।

प्रश्न 3.
पता कीजिए कि कौन-से साँप विषेले होते हैं? उनके चित्र एकत्र कीजिए और भित्ति पत्रिका में लगाइए।
उत्तर:
इंटरनेट से साँप के चित्र खोजिए और उन्हें भित्ति-पत्रिका में लगाइए।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 5

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 5 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 5 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया.

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया? [CBSE]
उत्तर:
बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को महल की रक्षा करने के लिए निम्नलिखित तर्क दिए-

  • यह महल जड़ पदार्थ है, जिसने अंग्रेजों के विरुद्ध कोई कार्य नहीं किया है। अतः यह दोषी नहीं है।
  • मैना को यह राजमहल अत्यंत प्रिय था।
  • अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार उठाने वाले दोषी हो सकते हैं। अतः उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाए।

प्रश्न 2.
मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज़ उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों? [CBSE][Imp.]
उत्तर:
मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी क्योंकि इस मकान में वह पल-बढ़कर बड़ी हुई थी। वह मकान उसके पिता का था जो उसे बहुत प्रिय था। मैना की दृष्टि में इस मकान ने अंग्रेज़ों का अहित नहीं किया है। इससे उसकी अनेक यादें जुड़ी हैं।
अंग्रेज़ उसे नष्ट करना चाहते थे क्योंकि नाना साहेब जिन्होंने कानपुर में अंग्रेज़ों के खिलाफ हथियार उठाए थे तथा विद्रोह का नेतृत्व किया था, यह मकान उन्हीं का था। वे नाना साहब की हर वस्तु, नष्ट करना चाहते थे। वे नाना से बदला लेने के लिए ऐसा कर रहे थे।

प्रश्न 3.
सर टामस ‘हे’ के मैना पर दया-भाव के क्या कारण थे? [CBSE][Imp.]
उत्तर:
सर टामस ‘हे’ के मैना पर दया-भाव के निम्नलिखित कारण थे-

  • मैना और ‘हे’ की पुत्री दोनों सहचरी थीं।
  • जनरल ‘हे’ नानासाहब के पास आया-जाया करते थे।
  • जनरल ‘हे’ को अपनी मृत पुत्री ‘मैरी’ की छवि मैना में दिखाई दे रही थी।
  • वे सहृदय तथा संवेदनशील इंसान थे।

प्रश्न 4.
मैना की अंतिम इच्छा थी कि वह उस प्रासाद के ढेर पर बैठकर जी भरकर रो ले लेकिन पाषाण हृदय वाले जनरल ने किस भय से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी?
उत्तर:
मैना को अपना राजमहल बहुत ही प्रिय था। उस मकान को अउटरम ने ध्वस्त कर दिया था। वह प्रासाद के अवशेष पर बैठकर रोना चाहती थी पर अउटरम ने इसकी अनुमति नहीं दी क्योंकि उसके विलाप से सैनिकों में भी सहानुभूति पैदा हो सकती थी। यह सहानुभूति अंग्रेज़ी सेना के विरुद्ध विद्रोह की भावना भड़का सकती थी।

इसके अलावा यह भी डर था कि मैना पर सहानुभूति दिखाने पर उसे अंग्रेज़ी सरकार के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। उसे मैना के साहसी स्वभाव ने भयभीत कर दिया था।

प्रश्न 5.
बालिका मैना के चरित्र की कौन-कौन सी विशेषताएँ आप अपनाना चाहेंगे और क्यों? [CBSE][Imp.]
उत्तर:
मैं बालिका मैना के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ अपनाना चाहूँगा-

  • साहस – मैना ने जिस साहस से जनरल ‘हे’ से बात की वह अनुकरणीय है।
  • वाक्पटुता – मैना वाक्पटु है। वह अपनी वाक्पटुता से ‘हे’ को महल की रक्षा करने के लिए तैयार कर लेती है।
  • निडरता – मैना निडर है। वह सैनिकों से घिरी होने पर भी नहीं डरती है।
  • जन्मभूमि से प्रेम – मैना अपनी जन्मभूमि से असीम प्रेम करती है। वह चाहती तो महल छोड़कर अन्यत्र भाग जाती पर उसने अपने मातृभूमि से प्रेम के कारण अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया।

स्वगृह-प्रेम – मैना को अपने राजमहल से स्वाभाविक प्रेम है। उसके टूटने पर वह दुख सहन नहीं कर पाती। इसलिए वह एक बार उस टूटे महल पर बैठकर रो लेना चाहती है। यह स्वगृह-प्रेम अनुकरणीय है। । ये दोनों ही गुण उसे महिमा प्रदान करते हैं। इसलिए इन्हें हम भी अपनाना चाहेंगे।

प्रश्न 6.
‘टाइम्स’ पत्र ने 6 सितंबर को लिखा था-बड़े दुख का विषय है कि भारत सरकार आज तक उस दुर्दात नाना साहब को नहीं पकड़ सकी। इस वाक्य में भारत सरकार’ से क्या आशय है?
उत्तर:
6 सितंबर के टाइम्स पत्र में छपे वाक्य में प्रयुक्त भारत सरकार’ का अर्थ है-भारत में शासन चलाने वाले ब्रिटिश या ‘अंग्रेज़ी सरकार से है क्योंकि भारत में उस समय वही शासन कर रही थी।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 7.
स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाने में इस प्रकार के लेखन की क्या भूमिका रही होगी? [Imp.]
उत्तर:
स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाने में देश प्रेम और देशभक्ति की भावना से भरपूर ऐसे लेखों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही होगी। ऐसे लेख लोगों में देश प्रेम का संचार करते हैं तथा अपनी मातृभूमि की रक्षा हेतु कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देते हैं। इन लेखों में अंग्रेजों द्वारा किए गए अमानुषिक व्यवहार का हृदयस्पर्शी वर्णन होता है जिससे मन में त्याग, बलिदान की भावना और अत्याचार से मुकाबला करने का साहस बढ़ता है। इससे लोग एकजुट होकर अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन को तैयार हो जाते होंगे। यह आजादी पाने की दिशा में एक और कदम होता था।

प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि मैना के बलिदान की यह खबर आपको रेडियो पर प्रस्तुत करनी है। इन सूचनाओं के आधार पर आप एक रेडियो समाचार तैयार करें और कक्षा में भावपूर्ण शैली में पढ़ें।
उत्तर:
मैना के बलिदान पर एक रेडियो समाचार-यह आकाशवाणी का……… चैनल है।
आज के विशेष कार्यक्रम में मैना के बलिदान पर रेडियो समाचार प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके प्रस्तुतकर्ता हैं श्री……..।
कल अंग्रेज़ सरकार ने कानपुर के किले में ऐसा कायरतापूर्ण कृत्य किया जो इतिहास को कलंकित करता रहेगा।
नाना साहब की जिस पुत्री मैना को जनरल अउटरम ने आधी रात को गिरफ्तार किया था, उसे हथकड़ी डाल रात में ही कानपुर के किले में डाल दिया था।
समाचार यह है कि मैना को योजनाबद्ध तरीके से जलती आग में भस्म कर दिया गया।
आग की भीषण लपटों में जलती उस बालिका के बलिदान को देश की स्वतंत्रता के लिए पवित्र मानकर कानपुर की जनता शीश झुका रही है। मैना के इसे बलिदान से उसका नाम अमर हो गया है।

प्रश्न 9.
इस पाठ में रिपोर्ताज के प्रारंभिक रूप की झलक मिलती है लेकिन आज अखबारों में अधिकांश खबरें रिपोर्ताज की शैली में लिखी जाती हैं। आप
(क) कोई दो खबरें किसी अखबार से काटकर अपनी कॉपी में चिपकाइए तथा कक्षा में पढ़कर सुनाइए।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।
(ख) अपने आसपास की किसी घटना का वर्णन रिपोर्ताज शैली में कीजिए।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

प्रश्न 10.
आप किसी ऐसे बालक/बालिका के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए जिसने कोई बहादुरी का काम किया हो।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 11.
भाषा और वर्तनी का स्वरूप बदलता रहता है। इस पाठ में हिंदी गद्य का प्रारंभिक रूप व्यक्त हुआ है जो लगभग 75-80 वर्ष पहले था। इस पाठ के किसी पसंदीदा अनुच्छेद को वर्तमान मानक हिंदी रूप में लिखिए।
उत्तर:
उसी दिन संध्या समय लार्ड केनिंग का एक तार आया, जिसका आशय इस प्रकार था-
“लंदन के मंत्रिमंडल का यह मत है, कि नाना की स्मृति-चिह्न तक मिटा दिया जाए। इसलिए वहाँ की आज्ञा के विरुद्ध कुछ नहीं हो सकता।”
उसी क्षण क्रूर जनरल आउटरम की आज्ञा से नाना साहब के सुविशाल राजमंदिर पर तोप के गोले बरसने लगे। घंटे भर में वह महल मिट्टी में मिला दिया गया।

पाठेतर सक्रियता

• अपने साथियों के साथ मिलकर बहादुर बच्चों के बारे में जानकारी देने वाली पुस्तकों की सूची बनाइए।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

• इन पुस्तकों को पढ़िए‘भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महिलाएँ’-राजम कृष्णन, नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली। ‘
1857 की कहानियाँ’-ख्वाजा हसन निजामी, नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली।

उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

• अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए
आज़ाद भारत में दुर्गा भाभी को उपेक्षा और आदर दोनों मिले। सरकारों ने उन्हें पैसों से तोलना चाहा। कई वर्ष पहले पंजाब में उनके सम्मान में आयोजित एक समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री दरबारा सिंह ने उन्हें 51 हजार रुपये भेंट किए। भाभी ने वे रुपये वहीं वापस कर दिए। कहा-”जब हम आजादी के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय किसी व्यक्तिगत लाभ या उपलब्धि की अपेक्षा नहीं थी। केवल देश की स्वतंत्रता ही हमारा ध्येय था। उस ध्येय पथ पर हमारे कितने ही साथी अपना सर्वस्व निछावर कर गए, शहीद हो गए। मैं चाहती हूँ कि मुझे जो 51 हजार रुपये दिए गए हैं, उस धन से यहाँ शहीदों का एक बड़ा स्मारक बना दिया जाए, जिसमें क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास का अध्ययन और अध्यापन हो, क्योंकि देश की नई पीढ़ी को इसकी बहुत आवश्यकता है।”

मुझे याद आता है सन् 1937 का जमाना, जब कुछ क्रांतिकारी साथियों ने गाज़ियाबाद तार भेजकर भाभी से चुनाव लड़ने की प्रार्थना की थी। भाभी ने तार से उत्तर दिया-‘चुनाव में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। अतः लड़ने का प्रश्न ही नहीं उठता।”
मुल्क के स्वाधीन होने के बाद की राजनीति भाभी को कभी रास नहीं आई। अनेक शीर्ष नेताओं से निकट संपर्क होने के बाद भी वे संसदीय राजनीति से दूर ही बनी रहीं। शायद इसलिए अपने जीवन का शेष हिस्सा नई पीढ़ी के निर्माण के लिए अपने विद्यालय को उन्होंने समर्पित कर दिया।

  1. स्वतंत्र भारत में दुर्गा भाभी का सम्मान किस प्रकार किया गया?
  2. दुर्गा भाभी ने भेंट स्वरूप प्रदान किए गए रुपये लेने से इंकार क्यों कर दिया?
  3. दुर्गा भाभी संसदीय राजनीति से दूर क्यों रहीं?
  4. आज़ादी के बाद उन्होंने अपने को किस प्रकार व्यस्त रखा?
  5. दुर्गा भाभी के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता आप अपनाना चाहेंगे?

उत्तर:

1. स्वतंत्र भारत में दुर्गा भाभी का सम्मान दो प्रकार से किया गया

  1. पंजाब में उनके सम्मान में एक राजनीतिक सम्मेलन आयोजित किया गया।
  2. उन्हें मुख्यमंत्री दरबारा सिंह ने 51000 रु. की राशि भेंट की।

2. दुर्गा भाभी ने भेंट-स्वरूप मिले 51000 रु. की राशि को लेने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वे स्वतंत्रता-संघर्ष के बदले कोई मूल्य नहीं लेना चाहती थीं। उनका संघर्ष निस्वार्थ था। उस संघर्ष में कितने क्रांतिकारी अपना सर्वस्व न्योछावर करके शहीद हो गए थे। अतः उन्होंने वह राशि उनकी याद में एक स्मारक बनाने के लिए समर्पित कर दी।

3. दुर्गा भाभी संसदीय राजनीति में रुचि नहीं रखती थीं। इसलिए वे उससे दूर बनी रहीं।

4. आज़ादी के बाद उन्होंने देश की नई पीढ़ी के निर्माण के लिए एक विद्यालय खोला और उसी में समर्पित रहीं।

5. दुर्गा भाभी के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ अपनाने योग्य हैं

  1. निस्वार्थ देशभक्ति
  2. लोभ, पुरस्कार और धन का देश-हित में त्याग
  3. दृढ़ निश्चय
  4. चुनावी राजनीति की दलदल से दूरी
  5. देश के भविष्य निर्माण में लगन।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 3

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 3 रीढ़ की हड्डी

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1.
रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद बात-बात पर ‘‘एक हमारा जमाना था’. ” कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना करना कहाँ तक तर्कसंगत है?
उत्तर:
रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद अधेड़ उम्र के व्यक्ति हैं जिन्होंने पुराना समय देख रखा है, उसे जिया है और अनुभव किया है। एक हमारा ज़माना था’ ऐसा बार-बार कहकर वे अपने बचपन और युवावस्था के दिनों को याद करके कहते हैं। यह सत्य कि उस समय महँगाई बहुत कम थी। हर तरह की वस्तुएँ सस्ती थीं इससे खाने-पीने का अपना एक अलग मज़ा था। इसके अलावा न इतना प्रदूषण था और न इतनी मिलावट, ऐसे में उनका ऐसा कहना ठीक था परंतु उसकी तुलना वर्तमान काल से करना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि कुछ बातें उस समय अच्छी थी तो बहुत-सी बातें आज अच्छी हैं।

प्रश्न 2.
रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है? [Imp.]
उत्तर:
उमा के पिता रामस्वरूप, आधुनिक विचारों वाले तथा स्त्री शिक्षा के समर्थक हैं। वे अपनी पुत्री उमा को बी.ए. तक पढ़ाते हैं। उसके विवाहयोग्य होने पर जब वे योग्य वर की तलाश करते हैं तब वही शिक्षा राह का रोड़ा बन जाती है।
पेशे से वकील तथा समाज में उठने-बैठने वाले गोपाल प्रसाद और बी.एस.सी. कर मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाला उनका बेटा शंकर दोनों ही कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं। उन्हें दसवीं पढ़ी बहू ही चाहिए। अधिक पढ़ी-लिखी लड़की उन्हें पसंद नहीं। अपनी बेटी की शादी के लिए रामस्वरूप इस बात को (उमो का बी.ए. पास होना) छिपा जाते हैं।
उनके आचरण का यह विरोधाभास उनकी इस विवशता को प्रकट करता है कि आधुनिक समाज का सभ्य नागरिक होने के बावजूद उन्हें रूढ़िवादी लोगों के दबाव के सामने झुकना पड़ रहा है।

प्रश्न 3.
अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है?
उत्तर:
अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह इसलिए उचित नहीं है क्योंकि वह उमा की उच्च शिक्षा रूपी उस तथ्य को छिपा रहे हैं जिसके लिए न उमा ने कोई पाप किया है और न चोरी। इसके अलावा आज नहीं तो कल इस सत्य का पता शंकर और उसके पिता को चलना ही है तब आज छिपाने से बात जितनी बनने की संभावना है, कल उससे अधिक बिगड़ने की। इसके अलावा विवाह जैसे मांगलिक कार्य में झूठ का सहारा लेना तनिक भी उपयुक्त नहीं क्योंकि झूठ की बुनियाद पर खड़ा महल अधिक समय तक नहीं टिकता है।

प्रश्न 4.
गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिज़नेस’ मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।
उत्तर:
आधुनिक विचार रखने वाले तथा शिक्षा के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण रखने वाले रामस्वरूप ने बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाई कि उच्च शिक्षा प्राप्त उनकी बेटी को विवाह अत्यंत आसानी से हो जाएगा, पर अंततः उन्हें अपनी सोच बदलनी पड़ी। उधर गोपाल प्रसाद वकील होकर भी रूढ़िवादी विचारों वाले व्यक्ति हैं।
उनका मानना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त लड़की घर के लिए अच्छी नहीं होती। इसलिए रामस्वरूप गोपाल प्रसाद की अपेक्षाकृत कम अपराधी हैं क्योंकि परिस्थितियों से विवश होकर उन्होंने झूठ बोला। हालाँकि झूठ बोलना भी अपराध है। अगर कोई किसी कारणवश मजबूरी में चोरी करता है, तो क्या वह चोर नहीं कहलाएगा, क्या वह अपराधी नहीं होगा?
निश्चित रूप से अपराधी ही कहलाएगा। इस तरह दोनों ही अपराधी हैं।

गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हैं। इसलिए वे बातचीत के बीच कहते हैं-चलो, अब बिजनेस की बात कर ली जाए। शादी को व्यवसाय मानना पाप है। इससे मानव तथा मानवीय संबंधों की गरिमा कम होती है। व्यक्ति वस्तु में बदल जाता है। शादी एक व्यापार या धंधा बन जाता है। इससे विवाह में लाभ-हानि की भाषा में बातें होती हैं। संबंधों की मधुरता नष्ट हो जाती है।

प्रश्न 5.
“… आपके लाड़ले बेटे की रीढ़ की हड़ी भी है या नहीं ..” उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है? [Imp.]
उत्तर:
आपके लाड़ले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं… उमा इस कथन द्वारा शंकर की अनेक कमियों की ओर संकेत करना चाहती है, जैसे-

  • वह शंकर के दुर्बल चरित्र की ओर संकेत करना चाहती है क्योंकि वह लड़कियों के हॉस्टल के आसपास चक्कर लगाता हुआ पकड़ा गया था।
  • वह शंकर की शारीरिक दुर्बलता की ओर संकेत करना चाहती है क्योंकि शंकर सीधा तनकर बैठने में भी असमर्थ है।
  • वह शंकर की वैचारिक दुर्बलता की ओर संकेत करना चाहती है क्योंकि शंकर स्वयं मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। परंतु चाहता है कि उसकी शादी जिस लड़की से हो वह अधिक से अधिक दसवीं तक पढ़ी हो।
  • वह शंकर के विवेकहीन तथा रुढिगत विचारों की ओर संकेत करना चाहती है।

प्रश्न 6.
शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की-समाज को कैसे व्यक्तित्व की जरूरत है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
समाज को उमा जैसे व्यक्तित्व की जरूरत है। उमा चरित्रवान है। वह शिक्षित लड़की है। उसके पिता रामस्वरूप, गोपाल प्रसाद से उमा की शिक्षा की बात छिपा जाते हैं परंतु गोपाल प्रसाद के पूछने पर वह अपनी शिक्षा के बारे में दृढ़तापूर्वक बता देती है।
इसके विपरीत शंकर स्वयं तो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है, परंतु वह नहीं चाहता है कि उसकी पत्नी भी उच्च शिक्षा प्राप्त हो। अतः समाज को शंकर जैसे व्यक्तित्व की जरूरत नहीं है।
शंकर जैसे व्यक्तित्व से हमें न अच्छे समाजोपयोगी स्वस्थ विचारधारा वाले नागरिक मिलेंगे और न ही इनसे समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान की अपेक्षा की जा सकती है। वास्तव में समाज को उमा जैसे साहसी, स्पष्टवादीनी तथा उच्च चरित्र वाले व्यक्तितत्व की आवश्यकता है।

प्रश्न 7.
‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। [Imp.]
उत्तर:
प्रायः किसी रचना के शीर्षक का निर्धारण उसके प्रमुख पात्र, घटना, समस्या, मूलभाव, संवेदना, निहित संदेश आदि के आधार पर किया जाता है परंतु कुछ शीर्षक प्रतीकात्मक होते हैं जो अपनी प्रतीकात्मकता के कारण पाठकों में उत्सुकता और जिज्ञासा जगाते हैं। शीर्षक छोटा रोचक होना चाहिए। रीढ़ की हड्डी’ यूँ तो मानव शरीर की मुख्य हड्डी है परंतु यहाँ यह चारित्रिक मज़बूती का प्रतीक हैं जो एकांकी के प्रमुख पात्र शंकर की कमियों को पूर्णतया खोल कर देती हैं। इसके साथ ही यह शीर्षक संक्षिप्त रोचक तथा जिज्ञासा जगाने वाला है। अतः ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक पूर्णतया सार्थक है।

प्रश्न 8.
कथावस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों?
उत्तर:
कथावस्तु के आधार पर निःसंदेह उमा ही इस एकांकी का मुख्य पात्र है। वास्तव में इस एकांकी में रामस्वरूप, गोपाल प्रसाद, शंकर तथा उनका नौकर तथा महिला पात्रों में प्रेमा तथा उमा हैं। इनमें से रामस्वरूप तथा गोपालदास एकांकी के अधिकांश भाग में उपस्थित रहते हैं, किंतु इनमें से कोई भी चारित्रिक रूप से आकर्षित नहीं कर पाती है।

रामस्वरूप परिस्थितियों के अधीन हो समझौता कर लेते हैं तो गोपाल प्रसाद में अनुकरणीय चरित्र या गुणों का अभाव दिखता है। शंकर दोहरे व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है। उसमें समाजोपयोगी तथा समाज का आदर्श व्यक्ति बनने की योग्यता नहीं है।

इनमें उमा बी.ए. पास सुशिक्षित लड़की है जो चरित्रवान, साहसी, अपनी बात को दृढ़तापूर्वक कहने वाली है। वह अपनी तथा समाज में नारियों की
सम्मानजनक स्थिति के लिए चिंतित दिखती है। एकांकी के कम अंश में उपस्थित रहने पर भी वही मुख्य पात्र है।

प्रश्न 9.
एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए। [CBSE]
उत्तर:
एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
रामस्वरूप की चारित्रिक विशेषताएँ-

  • रामस्वरूप अधेड़ उम्र वाले व्यक्ति हैं जो लड़कियों की उच्च शिक्षा के पक्षधर हैं।
  • रामस्वरूप शिक्षा के साथ-साथ पेंटिंग, संगीत आदि के प्रति रुचि रखनेवाले हैं।
  • रामस्वरूप में भी मानवीय कमियाँ हैं। वे लड़केवालों की इच्छा के आगे अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा छिपाने को विवश हो जाते हैं।
  • रामस्वरूप अपनी बीवी को बजता ग्रामोफ़ोन कहकर अपनी विनोदप्रियता प्रकट करते हैं।
  • वे अपने जमाने को आज के समय से बेहतर मानते हैं।

गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ-

  • गोपाल प्रसाद उच्च शिक्षित वकील हैं परंतु चालाक किस्म के व्यक्ति हैं।
  • वे रूढ़िवादी विचारों वाले हैं, क्योंकि अपने बेटे के लिए वे दसवीं पास बहू ही चाहते हैं।
  • वे विवाह जैसे पवित्र संस्कार को बिजनेस समझते हैं।
  • वे अपने बेटे के विवाह में भरपूर दहेज चाहते हैं।
  • गोपाल प्रसाद अपनी तथा अपने बेटे की कमियों को सरलता से नहीं स्वीकारते हैं।

प्रश्न 10.
इस एकांकी का क्या उद्देश्य है? लिखिए। [Imp.]
उत्तर:
‘रीढ़ की हड्डी’ नामक एकांकी के उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. समाज में लड़कियों को समुचित सम्मान न मिलने की समस्या को समाज के सामने लाना।
  2. लड़कियों के विवाह में आने वाली समस्या को समाज के सामने लाना।
  3.  लड़कियों के विवाह के समय उनकी पसंद-नापसंद, रुचि आदि को महत्त्व न दिया जाना।
  4.  लड़कियों के विवाह के समय उनके माता-पिता को दबाया जाना तथा उन्हें अनुचित समझौता करने पर विवश किया जाना
  5.  समाज के उन लोगों को बेनकाब करना जो शिक्षा के प्रति दोहरी मानसिकता रखते हैं।
  6.  उन लोगों की मानसिकता को उजागर करना जो लड़कियों को समाज में सम्मानजनक स्थान नहीं देना चाहते हैं।

प्रश्न 11.
समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं?
उत्तर:
स्त्री और पुरुष जीवन रूपी गाड़ी के दो पहिए हैं। इस गाड़ी के सुचारू परिचालन हेतु दोनों का समान होना आवश्यक है। इस समानता के लिए महिलाओं की शिक्षा, सम्मान और अधिकार पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्हें समाज में गरिमामय स्थान दिलाने के लिए निम्नलिखित प्रयास किए जा सकते हैं-

  • लड़कियों की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • उन्हें शिक्षा के साथ खेल-कूद, कला, संगीत आदि में आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए।
  • महिलाओं को कंप्यूटर तथा कौशल विकास का प्रशिक्षण देना चाहिए।
  • नौकरियों और व्यवसाय में उनके लिए स्थान आरक्षित होना चाहिए।
  • उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए उन्हें छूट मिलनी चाहिए।
  • महिलाओं के प्रति समाज को स्वस्थ दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
  • महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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