NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 9

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 9 पद

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीजों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए। [CBSE]
(ख) पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद सौंदर्य आ गया है, जैसे-पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।
(ग) पहले पद में कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध हैं। ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए- .
उदाहरण :

  • दीपक             बाती
  • …………….         …………….
  • ……………          ……………
  • ……………          ……………
  • ……………          ……………

(घ) दूसरे पद में कवि ने ‘गरीब निवाजु’ किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए। [CBSE]
(ङ) दूसरे पद की ‘जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। [CBSE]
(च) रैदास’ ने अपने स्वामी को किन-किन नाम से पुकारा है? [CBSE]
(छ) निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए-
मोरा, चंद, बाती, जोति, बरै, राती, छत्रु, धरै, छोति, तुहीं, गुसईआ।
उत्तर:
(क) पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना करते हुए कवि ने अपने प्रभु को चंदन, बताते हुए अपनी तुलना पानी से, घन बताते हुए उसे देखकर प्रसन्न होने वाले मोर से, दीपक के साथ जलकर प्रकाश फैलाने वाली बाती से, मोती। के साथ जुड़कर माला बनाने वाले धागे से और सोने में मिलकर उसको मूल्य बढ़ाने वाले सुहागे से की है।

(ख) नाद सौंदर्य प्रस्तुत करने वाले इस पद के अन्य शब्द हैं- मोरा-चकोरा, बाती-राती, धागा-सुहागा, दासा-रैदासा।

(ग) पहले पद में अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध पद हैं-

  • चंदन – पानी
  • दीपक – बाती
  • घन – मोर
  • मोती – धागा
  • चाँद – चकोर
  • सोना – सोहागा
  • स्वामी – दास

(घ) दूसरे पद में कवि ने अपने आराध्य प्रभु को ‘गरीब निवाजु’ कहा है। कवि को पता है कि उसके प्रभु ने समाज के उस वर्ग का भी उधार किया है जिसे कोई स्पर्श भी नहीं करना चाहता है। उन्होंने नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना, सैन आदि का उद्धार किया जो समाज के अत्यंत पिछड़े एवं दबे वर्ग से थे। समाज में इस वर्ग का सहायक ईश्वर के अलावा कोई और नहीं होता है। प्रभु द्वारा ऐसे लोगों का उद्धार करने के कारण कवि ने उन्हें गरीब नवाजु कहा है।

(ङ) “जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै’ पंक्ति का आशय है कि संत कवि रैदास समाज में फैली अस्पृश्यता को पसंद नहीं करते हैं। समाज के लोग इस वर्ग से दूरी बनाकर रहना चाहते हैं। वे छुआछूत के कारण उनके करीब भी नहीं जाते हैं, परंतु कवि के प्रभु इस भेदभाव को नहीं मानते हैं और अपने स्पर्श से उसका भी कल्याण करते हैं। प्रभु अपनी समदर्शिता, दयालुता, उदारता के कारण किसी भक्त से भेदभाव नहीं करते हैं।
(च) रैदास ने अपने स्वामी को गरीब निवाजु, गुसाईं हरिजीउ आदि नामों से पुकारा है।

(छ)
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 9 1

प्रश्न 2.
नीचे लिखी पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-

  1. जाकी अँग-अँग बास समानी
  2. जैसे चितवत चंद चकोरा
  3. जाकी जोति बरै दिन राती
  4. ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करे ।
  5. नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै [CBSE]

उत्तर:

  1. जिसकी सुगंध मेरे अंग-अंग में समा चुकी है अर्थात् मेरे जीवन रूपी जल में परमात्मा रूपी चंदन की सुगंध समा गई है।
  2. जिस प्रकार चकोर पक्षी दिन-रात चाँद की ओर निहारता रहता है, वैसे ही मैं अपने प्रभु की ओर निहारता रहता हूँ।
  3. रैदास कहते हैं कि उसके जीवन में दिन-रात उसी प्रभु की ज्योति जल रही है।
  4. रैदास कहते हैं कि प्रभु ही सर्वसमर्थ हैं, दीनदयालु और कृपालु हैं। उन्होंने रैदास जैसे अछूत को महान संत बना दिया। ऐसी असीम कृपा ईश्वर ही कर सकता है।
  5. रैदास कहते हैं-गोबिंद सर्वसमर्थ है। वह निडर है। वह रैदास जैसे नीच प्राणी को उच्च कोटि का संत बना सकता है।

प्रश्न 3.
रैदास के इन पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
संत कवि रैदास अपने आराध्य प्रभु से अत्यंत घनिष्ठ प्रेम करते हुए अनन्य भक्ति भाव रखते हैं। वे अपने प्रभु से मिलकर उसी प्रकार एकाकार हो जाते हैं; जैसे-चंदन के साथ पानी, घन के साथ मोर, चाँद के साथ चकोर और सोने के साथ सुहागा। वे अपने प्रभु से अनन्य भक्ति करते हैं। उनका प्रभु गरीबों को उद्धार करने वाला है। वह गरीब निवाज गरीबों के माथे पर भी छत्र सुशोभित करने वाला है, अछूतों का उद्धार करने वाला, नीचों को ऊँचा करने वाला तथा अपनी कृपा से सभी का उद्धार करने वाला है।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
भक्त कवि कबीर, गुरु नानक, नामदेव और मीराबाई की रचनाओं का संकलन कीजिए। |
उत्तर:
कबीर, नानक और नामदेव की वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में से पढ़े। मीराबाई के पद पाठ्यक्रम की पुस्तकें खोजकर पढ़ें।

प्रश्न 2.
पाठ में आए दोनों पदों को याद कीजिए और कक्षा में गाकर सुनाइए।
उत्तर:
छात्र याद करके कक्षा में सुनाएँ।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 13

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 13 ग्राम श्री

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
कवि ने गाँव को ‘हरता जन मन’ क्यों कहा है? [Imp.]
उत्तर:
कवि ने गाँव को ‘हरता जन-मन’ इसलिए कहा है क्योंकि गाँव में चारों ओर हरियाली फैली है। गाँव का वातावरण शांत एवं आकर्षक है। वहाँ खेतों में हरी-भरी फ़सलें हैं जो फल-फूल से लदी हैं। वहाँ हरियाली पर चमकती धूप पड़ने से पृथ्वी के मुसकराने का आभास होता है। दूर से देखने पर गाँव मरकत के डिब्बे-से प्रतीत होते हैं। अपनी इसी सुंदरता के कारण गाँव लोगों का मन हर लेते हैं।

प्रश्न 2.
कविता में किस मौसम के सौंदर्य का वर्णन है?
उत्तर:
कविता में शिशिर और वसंत ऋतु का वर्णन है। इसी ऋतु में पेड़ों के पत्ते गिरने शुरू होते हैं। उनमें नई-नई कोंपलें, शाखाएँ, फल-फूल आने शुरू होते हैं। आमों में मंजरियाँ आने का समय भी यही है। खेतों में फसलें-मटर, सेम, अलसी के फलने-फूलने का समय यही होता है। इसी समय चारों ओर फूल खिलने, उन पर तितलियाँ मँडराने लगती हैं। कटहल, जामुन के मुकुलित होने, अमरूद पकने, कोयल के मदमस्त होने का यही समय है।

प्रश्न 3.
गाँव को ‘मरकत डिब्बे सा खुला’ क्यों कहा गया है? [Imp.]
उत्तर:
गाँव को मरकत डिब्बे-सा खुला इसलिए कहा गया है क्योंकि गाँव में हरे-भरे पेड़ और हरी-भरी फ़सलें हैं जिससे वहाँ चारों ओर हरियाली ही हरियाली नज़र आती है। मरकत या पन्ना भी हरे रंग का रत्न होता है जो चमकीला होता है। गाँव की हरियाली पर सूर्य की धूप पड़ने से वह चमक उठती है, जिससे हरा-भरा गाँव मरकत-सा प्रतीत होता है।

प्रश्न 4:
अरहर और सनई के खेत कवि को कैसे दिखाई देते हैं? [CBSE]
उत्तर:
अरहर और सनई में फलियाँ आने पर जब हवा चलती है उन फलियों से हल्की-हल्की आवाज़ आती है। इसे सुनकर कवि को लगता है कि धरती ने अपनी कमर पर करधनी बाँध रखी हो। उस करधनी में लगे हुँघरुओं से यह आवाज़ आ रही है। सनई और अरहर के पेड़ उसे धरती की कमर में बँधे किंकिणियों जैसे लगते हैं।

प्रश्न 5.
भाव स्पष्ट कीजिए

  1. बालू के साँपों से अंकित गंगा की सतरंगी रेती
  2. हँसमुख हरियाली हिम-आतप सुख से अलसाए-से सोए।

उत्तर:

  1. गंगा के दोनों किनारों पर फैली चमकती रेत पर पानी की लहरों से जो टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ बनी हैं, उन्हें देखकर लगता है कि ये रेखाएँ रेत पर साँपों के चलने से बनी हैं।
  2. हरियाली पर पड़ी धूप के कारण ऐसा लग रहा है जैसे हँसती हुई हरियाली और सरदी की धूप आलस्य से भरकर सुखपूर्वक सोए हुए हैं।

प्रश्न 6.
निम्न पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
तिनकों के हरे हरे तन पर हिल हरित रुधिर हो रहा झलक
उत्तर:
अलंकार –

  1. अनुपास अलंकार-‘ह’ और ‘र’ वर्ण की पुनरावृत्ति के कारण।
  2. हरे-हरे–पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार।
  3. हरित-रुधिर-रक्त, हरे रंग का। विरोधाभास अलंकार।
  4. तिनकों के तन पर-रूपक और मानवीकरण अलंकार।

प्रश्न 7.
इस कविता में जिस गाँव का चित्रण हुआ है वह भारत के किस भू-भाग पर स्थित है?
उत्तर:
इस कविता में जिस गाँव का चित्रण हुआ है वह गंगा-यमुना के मैदानी भाग में फैले किसी गाँव का हो सकता है। रचना और अभिव्यक्ति

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8.
भाव और भाषा की दृष्टि से आपको यह कविता कैसी लगी? उसका वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
भाव – कविता में गाँव के प्राकृतिक सौंदर्य एवं समृधि का सुंदर चित्रण है। कविता में कवि का प्रकृति प्रेम स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कवि ने फसलों-मटर, सेम, सरसों, तीसी; सब्ज़ियों-गाजर, मूली, लौकी, टमाटर आदि; फलों-आम, जामुन, कटहल, अमरूद, आँवला; पक्षियों-कोयल, मगरौठी, सुरखाव, बगुले आदि के अलावा ढाक, पीपल के पत्तों का गिरना आदि का सूक्ष्म चित्रण किया है।

भाषा – कवि ने तत्सम शब्दों की बहुलता वाली परिनिष्ठित खड़ी बोली का प्रयोग किया है। भाषा सरल, मधुर तथा प्रवाहमयी है, जिसमें उपमा, रूपक, अनुप्रास, पुनरुक्तिप्रकाश, उत्प्रेक्षा, मानवीकरण आदि अलंकारों का प्रयोग है।

प्रश्न 9.
आप जहाँ रहते हैं उस इलाके के किसी मौसम विशेष के सौंदर्य को कविता या गद्य में वर्णित कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं लिखें।

पाठेतर सक्रियता

• सुमित्रानंदन पंत ने यह कविता चौथे दशक में लिखी थी। उस समय के गाँव में और आज के गाँव में आपको क्या परिवर्तन नज़र आते हैं?-इस पर कक्षा में सामूहिक चर्चा कीजिए।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

• अपने अध्यापक के साथ गाँव की यात्रा करें और जिन फ़सलों और पेड़-पौधों का चित्रण प्रस्तुत कविता में हुआ है, उनके बारे में जानकारी प्राप्त करें।
उत्तर:
स्वयं अभ्यास के लिए।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 10

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 10 वाख

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
‘रस्सी’ यहाँ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है?
उत्तर:
यहाँ ‘रस्सी’ शब्द मनुष्य की साँसों की डोरी के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसके सहारे वह शरीर रूपी नाव खींच रही है। यह रस्सी कच्चे धागे से बनी होने के कारण अत्यंत कमज़ोर है।

प्रश्न 2.
कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे हैं? [Imp.]
उत्तर:
कवयित्री लोभ, मोह-माया आदि से मुक्त नहीं हो पाई है। वह कोरी प्रभु भक्ति के सहारे भवसागर पार करना चाहती है। उसकी साँसों की डोर अत्यंत कमजोर है, इसलिए उसके द्वारा मुक्ति के लिए किए गए प्रयास विफल हो रहे हैं।

प्रश्न 3.
कवयित्री को ‘घर जाने की चाह’ से क्या तात्पर्य है? [CBSE]
उत्तर:
कवयित्री का ‘घर जाने की चाह’ से तात्पर्य उसके प्रभु या परमात्मा की शरण से है, ताकि वह सांसारिकता से मुक्ति पा सके।

प्रश्न 4.
भाव स्पष्ट कीजिए
(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई। [CBSE]
(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं, न खाकर बनेगा अहंकारी।
उत्तर:
(क) भाव-कवयित्री ने अपनी जीवन सांसारिक विषयों में फंसकर गॅवा दिया। उसने जीवन के अंतिम समय में अपने जीवन का लेखा-जोखा देखा तो उस भक्ति के फलस्वरूप प्रभु को देने लायक उसके पास कुछ भी न था।
(ख) भाव-इन पंक्तियों में कवयित्री ने मनुष्य को सांसारिक भोग तथा त्याग के बीच का मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी है कि विषय-वासनाओं के अधिकाधिक भोग से कुछ मिलने वाला नहीं है तथा भोगों से विमुखता एवं त्याग की भावना से मन में अहंकार पैदा होगा इसलिए मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए।

प्रश्न 5.
बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए ललद्यद ने क्या उपाय सुझाया है? [Imp.] [CBSE]
अथवा
ललद्यद के अनुसार, बंद द्वार की साँकल कैसे खुलती है? [CBSE]
उत्तर:
बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए कवयित्री ने यह सुझाव दिया है कि मनुष्य इंद्रियों पर नियंत्रण रखकर संयमी बने तथा भोग और त्याग के मध्य का मार्ग अपनाए। इससे प्रभु प्राप्ति का रास्ता खुल सकेगा।

प्रश्न 6.
ईश्वर प्राप्ति के लिए बहुत से साधक हठयोग जैसी कठिन साधना भी करते हैं, लेकिन उससे भी लक्ष्य प्राप्ति । नहीं होती। यह भाव किन पंक्तियों में व्यक्त हुआ है?
उत्तर:
उपर्युक्त भाव निम्नलिखित पंक्तियों में व्यक्त हुआ है-
आई सीधी राह से, गई न सीधी राह।
सुषुम-सेतु पर खड़ी थी, बीत गया दिन आह!
जेब टटोली, कौड़ी न पाई।
माझी को हूँ, क्या उतराई?

प्रश्न 7:
‘ज्ञानी’ से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘ज्ञानी’ से कवयित्री का अभिप्राय है आत्मज्ञानी व्यक्ति जो यह जान गया है कि मैं कौन हूँ तथा आत्मा-परमात्मा में क्या नाता है?

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8.
हमारे संतों, भक्तों और महापुरुषों ने बार-बार चेताया है कि मनुष्यों में परस्पर किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता, लेकिन आज भी हमारे समाज में भेदभाव दिखाई देता है।
(क) आपकी दृष्टि में इस कारण देश और समाज को क्या हानि हो रही है?
(ख) आपसी भेदभाव को मिटाने के लिए अपने सुझाव दीजिए।
उत्तर:
(क) समाज में भेदभाव के कारण देश और समाज को बहुत हानि हो रही है।
उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

  1. समाज का बँटवारा हो गया है। एक वर्ग से दूसरे वर्ग के बीच अकारण ही मतभेद पैदा हो गया है।
  2. भेदभाव के कारण पैदा हुआ समाज का उच्च-वर्ग, निम्न-वर्ग को हीन दृष्टि से देखता है।
  3. त्योहारों के अवसर पर अनायास झगड़े होते रहते हैं।
  4. आपसी भेदभाव के कारण एक वर्ग दूसरे वर्ग को संदेह और अविश्वास की दृष्टि से देखता है।
  5. हमारी सहिष्णुता समाप्त होती जा रही है। आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
    जिसका परिणाम उग्रवाद, अलगाववाद के रूप में हमारे सामने आ रहा है।

(ख) आपसी भेदभाव को मिटाने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं-

  1. सभी लोगों को चाहे वे किसी जाति, धर्म के क्यों न हों, अपने नाम के साथ जातिसूचक शब्दों को लिखना बंद कर देना चाहिए।
  2. अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए।
  3. पाठ्यक्रम में समता को बढ़ाने वाला तथा जातीयता को बढ़ावा न देने वाले कुछ पाठ शामिल किए जाएँ।
  4. नौकरियों तथा सेवाओं में आरक्षण समाप्त कर योग्यता को आधार बनाया जाना चाहिए।
  5. धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीयता, भाषा की राजनीति करने वाली पार्टियों तथा उनके नेताओं को प्रतिबंधित कर देना चाहिए।
  6. सभी के लिए शिक्षा की एक समान व्यवस्था होनी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी के मन में ऊँच-नीच का भेदभाव पैदा न हो।

पाठेतर सक्रियता

• भक्तिकाल में ललद्यद के अतिरिक्त तमिलनाडु की आंदाल, कर्नाटक की अक्क महादेवी और राजस्थान की मीरा जैसी भक्त कवयित्रियों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए एवं उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।

• ललद्यद कश्मीरी कवयित्री हैं। कश्मीर पर एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर:
कश्मीर भारत का स्वर्ग कहा जाता है। इसके ऊँचे-ऊँचे पहाड़ मन को मोहित कर लेते हैं। यहाँ केसर की खेती खूब होती है। यहाँ बारह महीनों ठंड रहती है। भारत के ही नहीं, विश्व भर के लोग यहाँ भ्रमण के लिए आते हैं। यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय है-पर्यटन। यहाँ के लोग बहुत शांतिप्रिय रहे हैं। परंतु पिछले 60 वर्षों से यहाँ के लोगों में राजनीति का विष फैल गया है। जो पंडित अपनी विद्वता के लिए विश्व-भर में मशहूर थे, उन्हें सांप्रदायिक शक्तियों के द्वारा कश्मीर की घाटी से बाहर खदेड़ दिया गया है। वे आज भी मारे-मारे घूम रहे हैं। इस प्रकार शांति की यह धरती आज अंगारों से धधक रही है।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 2

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 2 मेरे संग की औरतें

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं? [Imp.]
उत्तर:
यद्यपि लेखिका ने अपनी नानी को कभी नहीं देखा था फिर भी वह उनके व्यक्तित्व से प्रभावित थी क्योंकि-

  • उसकी नानी अनपढ़, परंपरागत नारी थीं। उनके पति साहबों की भाँति रहते थे, किंतु वे उनसे प्रभावित हुए बिना अपनी मरजी से जीती थीं।
  • उनके मन में स्वतंत्रता के प्रति जुनून था जिसका प्रदर्शन उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिनों में कर दिया था।
  • वे अन्य भारतीय माताओं के समान अपनी पंद्रह वर्षीया बेटी के विवाह के लिए चिंतित हो उठी।
  • वे स्पष्टवादिनी थी। उन्होंने अपने पति के मित्र स्वतंत्रता सेनानी प्यारेलाल शर्मा को बुलवाकर अपने मन की बात निःसंकोच रूप से कह दिया था।
  • लेखिका की नानी के दृढ़ निश्चय के कारण उनकी बेटी का विवाह स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले होनहार लड़के से हो सका।
    नानी के इन गुणों के कारण लेखिका उनके व्यक्तित्व से प्रभावित थी।

प्रश्न 2.
लेखिका की नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही? [Imp.][CBSE]
उत्तर:
यूँ तो लेखिका की नानी का आज़ादी के आंदोलन में कोई प्रत्यक्ष योगदान न था क्योंकि वे अनपढ़, परंपरागत, परदानशीं, दूसरों की जिंदगी में दखल न देने वाली महिला थीं, पर कम उम्र में ही अपनी मृत्यु को निकट जान वे अपनी पंद्रहवर्षीय बेटी (लेखिका की माँ) के लिए चिंतित हो उठीं।
उन्होंने अपने पति से कहा कि वे परदे का लिहाज़ छोड़कर उनके स्वतंत्रता सेनानी मित्र प्यारेलाल शर्मा से मिलना चाहती हैं। तथा उनसे मिलकर कहा कि उनकी बेटी का रिश्ता वे स्वयं तय करें। जिस वर से उनकी बेटी की शादी हो वह भी उन्हीं (शर्मा जी) जैसा ही आज़ादी का सिपाही हो।
इस तरह उनकी स्वतंत्रता आंदोलन में परोक्ष भागीदारी रही।

प्रश्न 3.
लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में
(क) लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए। [CBSE]
(ख) लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।
अथवा
लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए। [CBSE]
उत्तर:
(क) लेखिका की माँ घर परिवार की परंपरा का निर्वाह नहीं करती थी फिर भी वे सबके दिलों पर राज करती थी। इसके आलोक में लेखिका की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • वे खूबसूरत परीजात-सी जादुई लगती थीं।
  • वे किसी की गोपनीय बात को दूसरों से नहीं कहती थी।
  • वे झूठ नहीं बोलती थी।
  • वे हर बात पर उचित राय-सलाह दिया करती थी।
  • उनके मन में आजादी के प्रति जुनून था।

(ख) उक्त कथन के आलोक में लेखिका की दादी के घर के माहौल में अनेक बातें कल्पना से परे लगने के बाद भी सत्य थी। वहाँ परिवार के सदस्यों को अपनी निजता बनाए रखने की छूट थी। वे अपने काम अपने ढंग से स्वतंत्रतापूर्वक करते थे। लेखिका की दादी संचय के विरुद्ध थी। वे अपनी तीसरी धोती दान दे देती थी। परिवार में महिलाओं की इज्ज़त थी। लेखिका की माँ की राय लेकर उसे महत्त्व दिया जाता था। लेखिका की दादी अपनी पुत्रवधू के गर्भवती होने पर मंदिर गई और पहली संतान कन्या के रूप में पाने की मन्नत माँगी । वे घर में पूजा-पाठ आदि के द्वारा धार्मिक वातावरण बनाए रखती थी।

प्रश्न 4.
आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी? [Imp.]
उत्तर:
लेखिका की परदादी लीक से हटकर चलने वाली महिला थी। उन्होंने लड़की पैदा होने की मन्नत इसलिए माँगी होगी क्योंकि उस समय ऐसी मन्नत माँगना और सबके सामने बताना अत्यंत साहसपूर्ण कार्य था। ऐसा करके वे सबसे अलग दिखने की चाह रखती होंगी। उनके ऐसा करने का दूसरा कारण यह रहा होगा कि वे स्वयं एक महिला थीं।

उन्होंने महिला होकर स्वतंत्र जीवन जिया था तथा अपने जीवन में किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं देखी थी, इसलिए महिला होना उनके लिए गर्व की बात थी।

प्रश्न 5.
डराने धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है-पाठ के आधार पर तर्क सहित उत्तर दीजिए।
अथवा
डरा-धमका कर क्या किसी को रास्ते पर लाया जा सकता है-पाठ के आधार पर प्रकाश डालिए। [CBSE]
उत्तर:
कभी-कभी कुछ लोग परिस्थितिवश या किसी दबाव में आकर अनैतिक आचरण करने लगते हैं। ऐसे ही लोगों की तरह वह चोर भी था जो परदादी के घर में चोरी करने घुस आया पर परदादी के जाग जाने से वह हड़बड़ा गया। परदादी ने पुलिस के हवाले नहीं किया बल्कि उससे माँ-बेटे का संबंध जोड़कर उसे कुछ सोचने पर विवश कर दिया। इस घटना के बाद चोर सुधरकर खेती करने लगा। इस तरह हम कह सकते हैं कि डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को राह पर लाया जा सकता है।

प्रश्न 6.
‘शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है-इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख कीजिए? [CBSE]
उत्तर:
शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है, यह बात लेखिका को अपने पारिवारिक वातावरण से पता चल चुकी थी। बच्चों की शिक्षा के लिए उसने निम्नलिखित प्रयास किए

  1. शादी के बाद लेखिका को कर्नाटक के बागनकोट में रहना पड़ा वहाँ उसके बच्चों की शिक्षा हेतु उचित प्रबंध न था। उसने वहाँ के कैथोलिक विशप से प्राइमरी स्कूल खोलने का अनुरोध किया।
  2. लेखिका ने कर्नाटक के बागनकोट के स्थानीय तथा समृद्ध लोगों की मदद से एक प्राइमरी स्कूल खोला, जिसमें अंग्रेजी-हिंदी-कन्नड़ तीन भाषाएँ पढ़ाई जाती थीं। लेखिका ने इसे सरकार से मान्यता भी दिलवाई, जिससे स्थानीय बच्चों को शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।

प्रश्न 7.
पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है? [Imp.] [CBSE]
उत्तर:
जीवन में उन इनसानों को अधिक श्रद्धाभाव से देखा जाता है जो अच्छे कर्म करते हैं, अपने धन-बल का दुरुपयोग नहीं करते हैं तथा मानवीय मूल्यों को बनाए रखते हैं। पाठ से पता चलता है कि सत्य बोलने वाले, किसी की गुप्त बात को दूसरों से न कहने वाले, दृढ़ निश्चय वाले, स्वतंत्रता की ज्योति जलाए रखने वाले, दूसरों से स्नेह करने वाले, उन्हें यथोचित आदर देने वाले, दूसरों की मदद करने वाले, बने-बनाए रास्ते से अलग चलने वाले, देश प्रेम की उत्कट भावना रखने वाले लोग दूसरों के लिए श्रद्धा के पात्र होते हैं तथा लोग उनके प्रति श्रद्धाभाव रखते हैं।

प्रश्न 8.
‘सच, अकेलेपन का मज़ा ही कुछ और है-इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
लेखिका अपने जीवन में इस बात को बहुत पसंद करती थी कि ‘सच, अकेलेपन का मजा ही कुछ और है।’ लेखिका की बहन और लेखिका इसके उदाहरण हैं। लेखिका की बहन रेणु जिस काम को सोचती थी, उसे करके ही रहती थी। कोई कितना भी समझाता रहे पर वह नहीं मानती थी। इसमें उसकी जिद कम दृढ़ निश्चय अधिक झलकता है।

एक बार वह बारिश में दो मील दूर स्कूल जाने की जिद पर पैदल जाने के लिए अड़ी रही। सब कहते रहे कि स्कूल बंद होगा, पर वह न मानी। बारिश में गई और स्कूल बंद देखकर वापस आ गई। इसें तरह वह मंजिल की ओर अकेले बढ़ने की दिशा में उत्सुक दिखती है।

लेखिका भी जीवन की राह पर अकेले चलते हुए डालमिया नगर में स्त्री-पुरुषों के नाटक खेलकर सामाजिक कार्य हेतु धन एकत्र किया तथा कर्नाटक में अथक प्रयास से अंग्रेज़ी-कन्नड़-हिंदी तीन भाषाएँ पढ़ाने वाला स्कूल खोलकर उसे मान्यता दिलाना उनके स्वतंत्र सोच रखने तथा लीक से हटकर चलने वाले व्यक्तित्व की ओर संकेत करता है।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 16

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 16 यमराज की दिशा

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 16 यमराज की दिशा.

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
कवि को दक्षिण दिशा पहचानने में कभी मुश्किल क्यों नहीं हुई? [CBSE]
उत्तर:
कवि को दक्षिण दिशा पहचानने में कभी मुश्किल इसलिए नहीं हुई क्योंकि उसकी माँ ने बचपन में ही दक्षिण दिशा के प्रति यमराज का भय दिखा दिया था। इसके कारण कवि को दक्षिण दिशा अविस्मरणीय हो गई।

प्रश्न 2.
कवि ने ऐसा क्यों कहा कि दक्षिण को लाँघ लेना संभव नहीं था? [Imp.]
उत्तर:
कवि ने दक्षिण दिशा को लाँघ सकना असंभव बताया क्योंकि कोई ऐसा निश्चित बिंदु नहीं है जहाँ जाकर यह दिशा समाप्त हो जाती हो। दक्षिण में चलकर हम जहाँ भी ठहरते हैं, उसके आगे से फिर दक्षिण दिशा शुरू हो जाती है। इस प्रकार दक्षिण को लाँघ पाना संभव नहीं था।

प्रश्न 3.
कवि के अनुसार आज हर दिशा दक्षिण दिशा क्यों हो गई है? [Imp.]
उत्तर:
कवि के अनुसार आज हर दिशा इसलिए दक्षिण दिशा होती जा रही है क्योंकि शोषणकारी ताकतें और शोषक अपनी शक्ति बढ़ाते हुए चारों ओर फैलाते जा रहे हैं। इन ताकतों के विस्तार के कारण आम आदमी कहीं भी सुरक्षित नहीं रह गया है।

प्रश्न 4.
भावे स्पष्ट कीजिए-
सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं।
और वे सभी में एक साथ
अपनी दहकती आँखों सहित विराजते हैं।
उत्तर:
भाव-प्राचीन परंपरानुसार लोगों का मानना था कि यमराज दक्षिण दिशा में रहता है।
उस समय लोगों में न इतनी धनलोलुपता थी और न मानवीय मूल्यों का इतना ह्रास हुआ था। आज सभ्यता के खतरनाक विकास के साथ लोगों में स्वार्थ तथा शोषण की प्रवृत्ति बढ़ी है। ये शोषण करने वाली शक्तियाँ किसी एक दिशा तक सीमित न रहकर चारों ओर फैली हुई हैं। रचना और अभिव्यक्ति

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 5.
कवि की माँ ईश्वर से प्रेरणा पाकर उसे कुछ मार्ग-निर्देश देती है। आपकी माँ भी समय-समय पर आपको सीख देती होंगी
(क) वह आपको क्या सीख देती हैं?
(ख) क्या उसकी हर सीख आपको उचित जान पड़ती है? यदि हाँ तो क्यों और नहीं तो क्यों नहीं?

उत्तर:
(क) कवि की माँ की ही तरह मेरी माँ भी सत्य बोलने, बड़ों का कहना मानने अत्याचार का सामना करने अपने आसपास साफ़-सफ़ाई रखने तथा ईश्वर पर भरोसा बनाए रखने की सीख देती है।

(ख) हाँ, मुझे अपनी माँ की सीख उचित जान पड़ती है। इसका कारण यह है कि दुनिया की हर माँ अपनी संतान की सदा भलाई चाहती है। उसे दुनियादारी की समझ संतान से अधिक होती है। वह अपने अनुभव की सीख संतान तक पहुँचाना चाहती है इसलिए उसकी सीख उचित होती है।

प्रश्न 6.
कभी-कभी उचित-अनुचित निर्णय के पीछे ईश्वर का भय दिखाना आवश्यक हो जाता है, इसके क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
ईश्वर का भय दिखाना इसलिए आवश्यक हो जाता है, जिससे

  1. हम अनैतिक कार्य न करें।
  2. हमारी ईश्वर में आस्था बनी रहे।
  3. हम असत्य तथा बुराई का दामन न पकड़े।
  4. हम मर्यादित जीवन जिएँ।

पाठेतर सक्रियता

• कवि का मानना है कि आज शोषणकारी ताकतें अधिक हावी हो रही हैं। ‘आज की शोषणकारी शक्तियाँ’ विषय . पर एक अनुच्छेद लिखिए।
(आप शिक्षकों, सहपाठियों, पड़ोसियों, पुस्तकालय आदि से मदद ले सकते हैं।)
उत्तर:
कवि की यह बात सही है कि आज शोषणकारी शक्तियाँ बहुत अधिक हावी हो चुकी हैं। धीरे-धीरे यह शोषण बढ़ता ही जा रहा है। कहने को यह समाज सभ्य है। परंतु हमारी सभ्यता संस्कारों पर नहीं, शोषण पर टिकी है। आज उसी को श्रेष्ठ माना जा रहा है जिसके पास बंगला, कोठी, कार है; जिसके बच्चे ऊँचे स्कूलों में पढ़ते हैं। लोग यह नहीं देखते कि उसके पास यह धन कहाँ से आया है। इसलिए बड़े-बड़े धनपतियों की खूब पूजा हो रही है। वे चुनाव जीत रहे हैं और समाज के महापुरुष बने हुए हैं।
इसके विपरीत, ईमानदार व्यक्ति धक्के खा रहे हैं। उनकी मजाक उड़ाई जा रही है। यह देखकर हर आदमी अपने आदर्श बदल रहा है। वह सेवा, त्याग को आदर्श तजकर व्यवसायी बनता जा रहा है। इसी व्यावसायिकता में शोषण छिंपा है। व्यवसायी व्यक्ति सोचता है कि मैं कैसे और अधिक धन कमा लें। अधिक धन कमाने की हर युक्ति शोषण को बढ़ावा देती है। अत: आज चप्पे-चप्पे पर शोषणकर्ता मिलते हैं। न केवल हमें शोषणकर्ता मिलते हैं, बल्कि बदले में हम भी औरों का शोषण करने की सोचने लगते हैं। किसी कवि ने सच कहा है-

तल के नीचे हाल वही, जो तल के ऊपर हाल।
मछली बचकर जाए कहाँ, जब जल ही सारा जाल।

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