NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 3

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 3 टोपी शुक्ला

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पाठ्य पुस्तक प्रश्न

प्रश्न 1.
इफ़्फ़न टोपी शुक्ला की कहानी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा किस तरह से है?
उत्तर:
इफ्फ़न और टोपी शुक्ला अत्यंत घनिष्ठ दोस्त थे। उनकी दोस्ती उस समय हुई जब वे चौथी कक्षा में पढ़ते थे। अलग अलग जाति धर्म के होने के बाद भी उनमें जैसी मित्रता थी, वह अपने आप में अनुकरणीय थी। उनकी मित्रता आदर्श के चरम को छू रही थी। वे एक-दूसरे को दुख-दर्द समझते हैं और एक-दूसरे के प्रति घनिष्ठ लगाव और अपनापन महसूस करते हैं। इफ्फ़न के पिता के स्थानांतरण के बाद इफ़्फ़न से बिछुड़कर टोपी शुक्ला उदास रहता है और उसी दिन ठान लेता है कि किसी ऐसे लड़के से दोस्ती नहीं करेगा जिसके पिता नौकरी करते हों। इस तरह इफ्फ़न टोपी शुक्ला कहानी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रश्न 2.
इफ्फ़न की दादी अपने पीहर क्यों जाना चाहती थीं?
उत्तर:
इफ्फन की दादी ज़मींदार की बेटी थी। पीहर का घी-दूध, फलों के पेड़, कच्ची हवेली आदि उन्हें हमेशा याद आते रहते थे। यहाँ का मौलवी परिवार का वातावरण उन्हें कभी रास नहीं आया। अतः वे अपने पीहर जाना चाहती थीं।

प्रश्न 3.
इफ्फ़न की दादी अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा पूरी क्यों नहीं कर पाईं?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी का विवाह लखनऊ में मौलवी के साथ हुआ था। एक मौलवी के घर में नाच-गाना, बजाना, जलसा आदि बहुत ही कम होता है। इस कारण वे अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा चाहकर भी न पूरी कर पाई।

प्रश्न 4.
“अम्मी’ शब्द पर टोपी के घर वालों की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर:
टोपी के ‘अम्मी’ शब्द कहते ही उसके घरवालों की परंपराओं की दीवारें डोलने लगीं। सभी की आँखें उसके चेहरे पर जम गईं कि उनकी संस्कृति के विपरीत यह शब्द इस घर में कैसे आ गया? जब टोपी ने बताया कि उसने यह शब्द अपने दोस्त इफ़्फ़न के घर से सीखा है, तो माँ और दादी ने उसकी खूब पिटाई की अर्थात् सभी घरवालों की प्रताड़ना भरी प्रतिक्रिया उसके खिलाफ़ थी।

प्रश्न 5.
दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का दिन टोपी के जीवन में क्या महत्त्व रखता है?
उत्तर:
दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का दिन टोपी की जिंदगी में विशेष महत्त्व रखता है। इसी दिन उसके सबसे प्रिय मित्र इफ़्फ़न के पिता का तबादला मुरादाबाद हो गया। इससे वह इफ्फ़न से अलग होने के लिए विवश हो गया। अब वह अकेला और उदास-सा रहने लगा।

प्रश्न 6.
टोपी ने इफ्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी टोपी की दादी की भाँति कठोर एवं अनुशासनप्रिय नहीं थी, बल्कि वह स्नेहपूर्ण व्यवहार करती थी और टोपी को अपने पास बैठाकर बातें करती थी। उनकी भाषा तथा टोपी की माता की भाषा भी एक जैसी थी। अतः टोपी दादी बदलना चाहता था।

प्रश्न 7.
पूरे घर में इफ्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह क्यों था?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी का स्वभाव बहुत अच्छा था। वे इफ़्फ़न को ही नहीं उसके मित्र टोपी को स्नेह देती थी। उन्होंने इफ्फ़न को कभी डाँटा नहीं। वे इफ्फ़न को रात में बहराम डाकू, अनार परी, बारह बुर्ज, अमीर हमज़ा, गुलबकावली हातिमताई पंचफुल्लारानी की कहानियाँ सुनाया करती थी। उसे अब्बू अम्मी और बाजी से कभी-कभार डाँट-फटकार मिलती थी, परंतु दादी ने उसे कभी डाँटा-डपटा नहीं। यही कारण है कि इफ्फ़न को उसकी दादी से ही विशेष स्नेह मिला।

प्रश्न 8.
इफ्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा क्यों लगा?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा इसलिए लगने लगा, क्योंकि उसके घर में दादी ही उसे सबसे अच्छी लगती थी। टोपी इफ़्फ़न के घर जाने पर उसकी दादी के पास बैठा रहता था। दादी भी उसे बहुत प्यार करती थी। अब उसके घर में इफ्फ़न के अलावा उसका अपना कोई नहीं था।

प्रश्न 9.
टोपी और इफ्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे, पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। इस कथन के आलोक में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
टोपी और इफ्फ़न की दादी अलग-अलग मजहब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। वास्तव में टोपी में और इफ्फ़न की दादी प्यार के उस मज़बूत और अटूट रिश्ते से जुड़े थे, जो उम्र, जाति और धर्म का बंधन नहीं मानता है। टोपी और दादी ने एक-दूसरे का दुख समझा। उन्हें एक-दूसरे से अपनापन मिला। उनके रिश्ते में किसी तरह का स्वार्थ नहीं था। टोपी, दादी के पास आकर अपने सारे दुख भूल जाता था और दादी को भी टोपी के रूप में उन्हें समझने वाला कोई मिल जाता था।

प्रश्न 10.
टोपी नवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया। बताइए-
(क) ज़हीन होने के बावजूद भी कक्षा में दो बार फेल होने के क्या कारण थे?
(ख) एक ही कक्षा में दो-दो बार बैठने से टोपी को किन भावात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
(ग) टोपी की भावात्मक परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव सुझाइए।
उत्तर:
(क) टोपी के ज़हीन (बुधिमान) होने के बावजूद भी नवीं कक्षा में दो बार फेल होने के निम्नलिखित कारण थे-

  1. पहले साल तो वह पढ़ ही नहीं पाया, क्योंकि घर का प्रत्येक सदस्य उससे अपना-अपना निजी कार्य करवाता रहता था, जिससे उसे पढ़ने का समय ही नहीं मिल पाता था।
  2. दूसरे वर्ष उसे टाइफाइड हो गया था, इसलिए वह पढ़ाई न कर सका और पास न हो सका अर्थात् दोनों साल वह किसी न किसी कारणवश पढ़ नहीं पाया, जो उसकी असफलता के कारण बने।

(ख) एक ही कक्षा में दो-दो बार बैठने से टोपी को बहुत-सी भावात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
जैसे-मास्टर जी जब कमज़ोर लड़कों को समझाते, तो उसका ही उदाहरण दिया जाता कि क्या बात है राम अवतार (या कोई भी बच्चा) बलभद्र की तरह इसी दर्जे में टिके रहना चाहते हो?’ मास्टर जी के ऐसा कहते ही सभी जोरों से हँसने लगते। हँसने वाले वे होते, जो पिछले साल उससे पीछे थे। अगले साल भी उसे उसी कक्षा में बैठना पड़ा, तो वह बिलकुल ही भोंदू हो गया, क्योंकि उसका कोई दोस्त नहीं रह गया था। आठवीं कक्षा वाले दसवीं कक्षा में थे, तो सातवीं वाले बच्चे उसके साथ थे। वह अपने भरे-पूरे घर की तरह स्कूल में भी अकेला हो गया था। मास्टरों ने भी उसपर ध्यान देना छोड़ दिया था। उससे कक्षा में कोई सवाल न पूछा जाता था। कई लड़के ऐसे-ऐसे कटाक्ष करते कि वह बिलबिला उठता। घर में भी दादी, माँ, भाई आदि के तीखे बाण सहने पड़ते।

(ग) टोपी जैसे बालकों की भावात्मक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में जो आवश्यक बदलाव होने चाहिए, उनमें प्रमुख हैं-टोपी जैसी भावात्मक परेशानियों से पीड़ित विद्यार्थियों पर माता-पिता तथा शिक्षकगण विशेष ध्यान दें। उनके साथ माता-पिता तथा शिक्षकों का सहानुभूति तथा प्यार भरा उपचारात्मक व्यवहार होना चाहिए। विद्यालयों में हतोत्साह की जगह प्रोत्साहन होना चाहिए, सफलता और असफलता दोनों ही जीवन के पहलू हैं, यह उन्हें समझाया जाना चाहिए। शिक्षा के लिए विशेष प्रबंध होना चाहिए, जैसे-उपचारात्मक शिक्षा प्रणाली वस्तुनिष्ठ प्रश्नावली तथा दिलचस्पी से पढ़े जाने वाले विषय हो। साथ ही वैकल्पिक शिक्षा की ओर भी रुझान होना चाहिए।

प्रश्न 11.
इफ्फ़न की दादी के मायके को घर कस्टोडियन में क्यों चला गया?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी की बातचीत से लगता था कि वह पूरब अर्थात् लखनऊ से पूरब किसी स्थान की रहने वाली थीं। उनका विवाह लखनऊ के एक मौलवी परिवार में हो गया। देश में जब विभाजन हुआ तब उनके मायके वाले अपना घर जमीन आदि छोड़कर पाकिस्तान जा बसे। परिवार के सभी सदस्यों के चले जाने से उनका घर लावारिस हो गया और कस्टोडियन में चला गया।

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 2

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 2 सपनों के-से दिन

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पाठ्य पुस्तक प्रश्न

प्रश्न 1.
कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती-पाठ के किस अंश से सिद्ध होता है?
उत्तर:
‘कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती’—यह पाठ के निम्नलिखित अंश से सिद्ध होता है-
हमारे आधे से अधिक साथी राजस्थान या हरियाणा से आकर मंडी में व्यापार या दुकानदारी करने आए परिवारों से थे। जब बहुत छोटे थे तो उनकी बोली कम समझ पाते। उनके कुछ शब्द सुनकर हमें हँसी आने लगती, परंतु खेलते तो सभी एक-दूसरे की बात खूब अच्छी तरह समझ लेते।

प्रश्न 2.
पीटी साहब की ‘शाबाश’ फौज के तमगों-सी क्यों लगती थी ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पीटी साहब बिल्ला मार-मारकर बच्चों की चमड़ी तक उधेड़ देते थे। यहाँ तक कि तीसरी-चौथी कक्षाओं के बच्चों से थोड़ा-सा भी अनुशासन भंग हो जाने पर उन्हें कठोर सज़ा देते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले पीटी साहब जब बच्चे कोई गलती न करते, तो वे अपनी चमकीली आँखें हलके से झपकाते हुए उन्हें ‘शाबाश’ कहते थे। उनकी यह ‘शाबाश’ बच्चों को फ़ौज के सारे तमगों को जीतने के समान लगती थी, अर्थात् मानों उनकी कोई बहुत बड़ी तरक्की हो गई हो, ऐसा महसूस करते थे।

प्रश्न 3.
नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?
उत्तर:
नई श्रेणी में जाने पर प्रायः बच्चों के मन में एक नया उल्लास, उत्साह एवं लगन रहती है। नई पुस्तकों के नए पाठ्यक्रम के प्रति उनमें एक उत्साह होना चाहिए, परंतु नई कापियों और पुरानी पुस्तकों की गंध से लेखक का मन इसलिए उदास हो जाता था, क्योंकि-

  • अगली कक्षा की कठिन पढाई मन को भयभीत करती थी।
  • नए अध्यापकों की अपेक्षा पर खरा न उतर पाने पर पिटाई का भय सताता रहता था।

प्रश्न 4.
स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्त्वपूर्ण आदमी’ फौजी जवान क्यों समझने लगता था?
उत्तर:
जब पीटी साहब स्काउटों को परेड करवाते थे, तो लेफ़्ट-राइट की आवाज़ या सीटी बजाकर मार्च करवाया करते थे तथा उनके राइट टर्न या लेफ़्ट टर्न या अबाऊट टर्न कहने पर लेखक अपने छोटे-छोटे बूटों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ या एकदम पीछे मुड़कर बूटों की ठक-ठक की आवाज़ करते हुए लेखक स्वयं को विद्यार्थी न समझकर एक महत्त्वपूर्ण ‘आदमी’ फ़ौजी जवान समझने लगता था।

प्रश्न 5.
हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअत्तल कर दिया?
उत्तर:
हेडमास्टर साहब बच्चों की पिटाई के बिलकुल विरुद्ध थे। वे बच्चों को न दंडित करते थे और न दंड पाते उन्हें देख सकते थे। हेडमास्टर साहब ने देखा कि पीटी मास्टर फारसी पढ़ाते हुए शब्द रूप न सुना पाने के कारण अत्यंत क्रूरतापूर्वक मुरगा बना रखा है तथा उन्हें पीठ ऊँची करने का आदेश भी दे रखा है। चौथी कक्षा के छात्रों को ऐसा दंड देना हेडमास्टर को अत्यंत यातनापूर्ण लगा। उन्होंने इसे तुरंत रोकने का आदेश देते हुए पीटी मास्टर प्रीतमचंद को मुअत्तल कर दिया।

प्रश्न 6.
लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?
उत्तर:
लेखक और उसके साथियों को स्कूल ऐसी जगह कतई नही लगता था कि वे भागकर खुशी-खुशी से जाएँ, क्योंकि उनके मन में स्कूल के प्रति एक प्रकार का भय समाया हुआ था, लेकिन तीसरी-चौथी श्रेणी में इंडियाँ पकड़कर व धुली हुई वर्दी तथा चमकते हुए जूते पहनकर स्काउटिंग परेड करना, गलती न होने पर पीटी साहब से ‘शाबाश’ सुनना लेखक को विद्यालय जाने के लिए प्रेरित करता था।

प्रश्न 7.
लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुटूटियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति ‘बहादुर’ बनने की कल्पना किया करता था?
उत्तर:
लेखक के छात्र जीवन में गरमी की छुट्टियाँ डेढ़ या दो महीने की होती थी। इसके आरंभ के दो-तीन हफ़्तों तक खूब खेलकूद और मस्ती करते हुए लेखक अपने साथियों संग समय बिताता फिर नानी के घर चला जाता। जब एक महीने की छुटियाँ बचती तो लेखक अध्यापक द्वारा दिए गए दो सौ सवालों के बारे में गणना करता और सोचता कि एक दिन में । दस सवाल हल करने पर बीस दिन में पूरे हो जाएँगे। एक-एक दिन गिनते खेलकूद में दस दिन और बीत जाते तब पिटाई का डर बढ़ने लगता। तब वह डर भगाने के लिए सोचता कि एक दिन पंद्रह सवाल भी हल किए जा सकते हैं पर सवाल न होते और छुट्टियाँ समाप्त होने को आ जाती, तब वह मास्टरों की पिटाई को सस्ता सौदा समझकर बहादुरी से पिटना स्वीकार कर लेता। इस तरह वह बहादुर बनने की कल्पना किया करता।

प्रश्न 8.
पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
पीटी सर की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. पीटी सर कठोर स्वभाव के थे, लेकिन अनुशासनप्रिय व कर्तव्यनिष्ठ थे इसीलिए तो स्काउटों को परेड करवाते हुए अनुशासन के भंग हो जाने पर बच्चों को बहुत डाँटते थे। वे बच्चों में कर्मठता व सजगता का विकास करना चाहते थे।
  2. पक्षियों के लिए उनके मन में गहरी ममता थी। तभी अपने दो तोतों को भीगे हुए बादाम छीलकर गिरियाँ खिलाते थे।

प्रश्न 9.
विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर:
बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में कठोर पिटाई के रूप में शारीरिक यातना दी जाती थी। उन्हें थोड़ी-सी गलती पर पीटा जाता था और मुरगा बना दिया जाता था। वर्तमानकाल में बच्चों को शारीरिक दंड देने पर पूर्णतया रोक है। मेरे विचार से यही पूर्णतया उपयुक्त है कि बच्चों को अनुशासन में लाने के लिए शारीरिक दंड नहीं प्यार और अपनत्वपूर्ण व्यवहार की आवश्यकता होती है। बच्चों को स्नेह, पुरस्कार तथा प्रशंसा आदि के माध्यम से अनुशासित करना बेहतर होता है।

प्रश्न 10.
बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं, विशेषकर स्कूली दिनों की। अपने अब तक के स्कूली जीवन की खट्टी-मीठी यादों को लिखिए।
उत्तर:
प्रत्येक व्यक्ति के बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं, पर ये यादें सभी की निजी होती हैं। मुझे भी पूरी तरह से याद है, जब मैं कक्षा दूसरी में थी, तो एक दिन स्कूल में बारिश के कारण मैदान में पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। हम सभी बच्चे थोड़ी-सी दूरी पर खेल रहे थे, तो एक शरारती लड़के ने मुझे पानी में धक्का दे दिया। मेरे पानी में गिरते ही सारे बच्चे जोरों से हँसने लगे। मैं पानी में पूरी तरह से भीग गई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। बाद में मुझे घर भेज दिया गया था। उस समय की याद आज भी बनी हुई है।

प्रश्न 11.
प्रायः अभिभावक बयों को खेल-कूद में ज्यादा रुचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए-

  1. खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं?
  2. आप कौन-से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे, जिनसे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो?

उत्तर:

  1. खेल हमारे लिए इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि खेलों से शारीरिक और मानसिक विकास होता है। खेलों से शरीर स्वस्थ और मजबूत बनता है। खेल हमें मानवीय मूल्य अपनाने की सीख देते हुए त्याग, हार-जीत को समान समझने का भाव पारस्परिक सहयोग, मैत्री आदि को प्रगाढ़ बनाते हैं, जो हमें समाजोपयोगी नागरिक बनने में मदद करता है।
  2. अभिभावक खेलकूद को बच्चों के लिए अच्छा नहीं समझते हैं। वे इसे पढ़ाई में बाधक मानते हुए समय बरबाद करने का साधन मानते हैं। अभिभावकों को मेरे खेल पर आपत्ति न हो इसके लिए मैं-
    • खेलकूद और पढ़ाई में संतुलन बनाऊँगा।
    • पढ़ाई तथा गृहकार्य पूरा करने के बाद खेलकूद करूंगा।
    • स्कूल से अधिक कार्य मिलने पर मैं उस दिन नहीं खेलूंगा। इसकी भरपाई के लिए मैं छुट्टी वाले दिन खेलकर कर लूंगा।
    • अभिभावकों को खेलकूद की उपयोगिता एवं महत्ता बताऊँगा।

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 1

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 1 हरिहर काका

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पाठ्य पुस्तक प्रश्न 

प्रश्न 1.
कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?
उत्तर:
कथावाचक और हरिहर काका के बीच घनिष्ठ दोस्तों जैसे प्यार भरा रिश्ता था।

  • इसका कारण यह था कि ये दोनों एक ही गाँव के रहने वाले थे। लेखक उनके हर सुख-दुख में उनके पास पहुँच जाता था।
  • हरिहर काका के कोई संतान ने थी। वे लेखक को बचपन से बहुत प्यार करते थे। बड़ा होते-होते यही दुलार दोस्ती में बदल गया।
  • हरिहर काका अपनी सारी बातें लेखक से बता दिया करते थे।

प्रश्न 2.
हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे?
उत्तर:
महंत एवं हरिहर काका के भाई, दोनों की स्वार्थ-लिप्सो, दोनों का अपने प्रति क्रूर दुर्व्यवहार देखकर हरिहर काका को वे एक ही श्रेणी के लगने लगे। दोनों का लक्ष्य एक ही था-हरिहर काका की जमीन हथियाला। इसके लिए दोनों ने ही छल-बल का प्रयोग किया और उनके विश्वास को ठेस पहुँचाई। दोनों में कोई अंतर नहीं था।

प्रश्न 3.
ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं, उससे उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?
उत्तर:
ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा का भाव है। यह उनकी मनोवृत्ति से पता चलता है, क्योंकि-

  • लोग पुत्र प्राप्ति, लड़की की शादी अच्छे घर में तय होने, लड़के को नौकरी मिलने आदि को ठाकुर जी की कृपा मानते थे।
  • वे खुशी के अवसर पर ठाकुर जी पर रुपये, जेवर, अनाज आदि चढ़ाते थे तथा अधिक खुशी होने पर अपनी जमीन का एक भाग ठाकुर जी के नाम लिख देते थे।
  • वे बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा में राहत पाने के लिए ठाकुर जी से प्रार्थना करते थे।
  • वे अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु ठाकुर जी से प्रार्थना करते थे।

प्रश्न 4.
अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं। कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझे इसलिए रखते हैं, क्योंकि जिंदगी में उन्हें जो अनुभव हुए, उन अनुभवों ने उनकी समझ को निखार दिया। परिवार वाले और मठाधीश दोनों ही उनके लिए काल-विकराल बन जाते हैं। इन दोनों ने हरिहर काका से 15 बीघे जमीन हथियाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए तथा उनपर बहुत ज़ुल्म और अत्याचार किए। इन सबके बावजूद हरिहर काका ने जीते जी अपनी जमीन किसी के नाम नहीं लिखी, क्योंकि अपनी जमीन इनके नाम करके वे अपना जीवन ‘रमेसर की विधवा की तरह नर्क में नहीं झोंकना चाहते थे तथा न ही जीते जी कुत्ते की मौत मरना चाहते थे। ये सभी बातें यही स्पष्ट करती हैं कि अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं।

प्रश्न 5.
हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने उनके साथ कैसा बर्ताव किया?
उत्तर:
हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले लोग ठाकुरबारी के साधु-संत और महंत के पक्ष के लोग थे। हरिहर काका अपनी जमीन ठाकुरबारी के नाम लिखने को तैयार न थे। वे अपने भाइयों के घेरे में रह रहे थे तब काका से बलपूर्वक जमीन-जायदाद की वसीयत करने का एकमात्र यही उपाय नजर आया। ठाकुरबारी में महंत के लोगों ने काका के साथ बुरा बरताव किया। उन्होंने काका के मुँह में कपड़ा ढूंस दिया। उन्होंने अनेक जगह सादे कागजों पर अँगूठा लगवाया और उनके हाथ-पैर बाँधकर एक कमरे में डालकर ताला बंद कर दिया और भाग गए।

प्रश्न 6.
हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे?
उत्तर:
हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की राय के रूप में दो वर्ग बन गए थे और दोनों वर्गों की राय भी भिन्न-भिन्न थी। पहले वर्ग का कहना था कि हरिहर काका को अपनी जमीन ठाकुर जी के नाम लिख देनी चाहिए। इससे उत्तम उनके लिए कुछ न होगा, क्योंकि ऐसा करने से उनकी कीर्ति अचल बनेगी तथा ठाकुरबारी का महत्त्व गाँव की सीमा के बाहर भी फैलेगा। पहले वर्ग की राय इसलिए ऐसी थी, क्योंकि यह वर्ग धार्मिक प्रवृत्ति का था, ठाकुरबारी से जुड़ा था तथा यह वर्ग ठाकुरबारी में प्रसाद के बहाने हलुआ-पूरी का भोग लगाता था। दूसरे वर्ग की राय यह थी कि भाइयों के परिवार भी तो अपने ही होते हैं, इसलिए हरिहर काका को अपनी सारी ज़मीन उनके नाम लिख देनी चाहिए। अन्यथा वे लोग उनके साथ अन्याय करेंगे। दूसरे वर्ग की राय प्रगतिशील विचारों के कारण ऐसी थी।

प्रश्न 7.
कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा-“अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।”
उत्तर:
‘अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है। लेखक ने ऐसा इसलिए कहा है, क्योंकि काका जिस भयावह स्थिति से गुजर रहे थे उस स्थिति में फँसा हर आदमी यही सोचता है कि इस तरह घुट-घुटकर जीने से तो एक बार मरना ही अच्छा है। काका भली प्रकार जानते थे कि महंत या भाइयों के नाम ज़मीन कर देने से उनका जीवन वैसे भी नरक बन जाएगा। उन्होंने मौत का भय दिखाने वाले भाइयों को भी जमीन लिखने के बजाय मौत को गले लगाना उचित समझा और वे मरने के लिए तैयार हो गए।

प्रश्न 8.
समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर:
समाज में रिश्तों की बहुत बड़ी तथा विशेष अहमियत है, क्योंकि संसार को चलाने के लिए रिश्ते-नातों का, संबंधों का बहुत महत्त्व है। रिश्तों के कारण ही बहुत-से पाप-अत्याचार, अनाचारों का शमन हो जाता हैं। वंशपरंपराएँ चलती हैं तथा रिश्तों की डोर मज़बूत होती है। व्यक्ति कई बदनामी के कार्य करने से बच जाता है तथा सीख देने में रिश्तों की अहमियत बहुत बड़ी मदद करती है। लेकिन आज रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है। भौतिक सुखों की होड़ और दौड़, स्वार्थ लिप्सा तथा धर्म की आड़ में फलने-फूलने वाली हिंसावृत्ति ने रिश्तों की अहमियत को औपचारिकता तथा आडंबर का जामा पहना दिया है। आज रिश्तों से ज़्यादा धन-दौलत को अहमियत दी जा रही है।

प्रश्न 9.
यदि आपके आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो आप उसकी किस प्रकार मदद करेंगे?
उत्तर:
यदि हमारे समाज में हरिहर काका जैसा व्यक्ति है तो अपने व्यस्ततम समय से कुछ समय निकालकर उसके साथ बातें करेंगे ताकि उसका एकाकीपन दूर हो सके। उसकी आवश्यकता के बारे में पूछेगे तथा यथासंभव उसको पूरा करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा उसके खाने-पीने संबंधी आवश्यकता पूरी करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा खुश रखने का हर संभव प्रयास करेंगे।

प्रश्न 10.
हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती, तो उनकी क्या स्थिति होती? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती, तो उनकी ऐसी दयनीय स्थिति इस तरह से कदापि न होती, जैसी उनके भाइयों और ठाकुरबारी के महंत ने की। मीडिया उनकी दयनीय स्थिति को दूरदर्शन पर दिखाकर सरकार और जनता का ध्यान इस ओर खींचता और हरिहर काका की घटना सारे देश की घटना बन जाती, जिससे उनके भाई हरिहर काका की अच्छी तरह से देखभाल करने के लिए बाध्य हो जाते। ठाकुरबारी के महंत सहित अन्य सभी । लोगों का भी पर्दाफाश हो जाता, जिससे हरिहर काका भयमुक्त हो जाते और उनका जीना सरल हो जाता तथा पूरी जनता की सहानुभूति उन्हें मिल जाती।

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 17

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 17 कारतूस

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पाठ्य पुस्तक प्रश्न

मौखिक

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

प्रश्न 1.
कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था?
उत्तर:
कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में इसलिए लगा हुआ था ताकि वे वज़ीर अली को पकड़ सकें जिसने उनकी नाक में दम कर रखा है।

प्रश्न 2.
वज़ीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे?
उत्तर:
वज़ीर अली से सिपाही इसलिए तंग आ चुके थे, क्योंकि वे लोग लंबे समय से जंगल में डेरा डाले हुए थे, पर वज़ीर अली उनकी पकड़ में नहीं आ रहा था। वह सबकी आँखों में धूल झोंककर उन्हीं जंगलों में रह रहा था। वह अपनी सूझ-बूझ से किसी के भी हाथ नहीं आ रहा था।

प्रश्न 3.
कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए क्यों कहा?
उत्तर:
कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए इसलिए कहा क्योंकि आने वाला सवार वज़ीर अली का कोई सैनिक या सहायक हो सकता है, या उसको पकड़वाने में मदद करने वाला कोई व्यक्ति हो सकता है।

प्रश्न 4.
सवार ने क्यों कहा कि वज़ीर अली की गिरफ्तारी मुश्किल है?
उत्तर:
सवार ने वज़ीर अली की गिरफ़्तारी मुश्किल है, ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि वह सवार स्वयं वज़ीर अली था। वह एक जाँबाज़ सिपाही था। कर्नल ने उस सवार से कहा कि कंपनी का आदेश है कि वज़ीर अली को गिरफ्तार किया जाए। उसकी गिरफ़्तारी के लिए कर्नल के पास पूरा लावलश्कर था। इस पर सवार ने कहा कि उसकी गिरफ़्तारी बहुत मुश्किल है, क्योंकि वह एक जाँबाज़ सिपाही है।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी?
उत्तर:
वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद इसलिए आ जाती थी, क्योंकि-

  • वज़ीर अली अत्यंत साहसी, वीर एवं चतुर व्यक्ति था।
  • उसके मन में कंपनी-शासन और अंग्रेजों का भय न था।
  • उसने कंपनी के वकील को उसके घर जाकर मार डाला था।
  • पूरे लाव-लशकर के साथ जंगल में डेरा डालने पर भी वह कर्नल की आँखों में धूल झोकने में सफल हो रहा था।

प्रश्न 2.
सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा?
उत्तर:
सआदत अली नवाब आसिफउद्दौला का छोटा भाई था। उसे आशा थी कि नवाब के घर कोई संतान तो होगी नहीं, इसलिए वह अवध का नवाब बन जाएगा, लेकिन वज़ीर अली का जन्म हुआ, तो सआदत अली को अपना भविष्य डूबता-सा नज़र आया, इसलिए उसने वज़ीर अली को अपनी मौत के समान समझा और वह उसका दुश्मन बन गया, क्योंकि अवध को वज़ीर अली के रूप में उत्तराधिकारी मिल गया था।

प्रश्न 3.
सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?
उत्तर:
सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का मकसद यह था कि अवध पर अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा करना। सआदत अली कायर तथा अवसरवादी व्यक्ति था जिसने अंग्रेजों से मित्रता कर ली। अंग्रेज़ उसे शासक बनाकर अवध की आधी संपत्ति और दस लाख रुपये तथा अन्य वस्तुएँ प्राप्त कर लिया।

प्रश्न 4.
कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त कैसे की?
उत्तर:
कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली जानिसारों सहित आज़मगढ की तरफ़ भाग गया। आजमगढ़ के शासक ने उसे अपनी हिफ़ाजत में घागरा पहुँचा दिया। इसके बाद उसका कारवाँ अंग्रेजों से बचने के लिए कई सालों तक जंगल में भटकता रहा।

प्रश्न 5.
सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया ?
उत्तर:
कर्नल के सामने अचानक यूँ आनेवाला सवार स्वयं वज़ीर अली था। कर्नल सोच भी नहीं सकता था कि वजीर अली इतनी निडरता से उसके सामने खेमे में आ जाएगा और वह कर्नल से कारतूस लेकर जान बख्श देने की बात कहकर चला जाएगा। वज़ीर अली का साहस और मौत के चंगुल से बचने के कारण वह हक्का-बक्का रह गया।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
लेफ्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है?
उत्तर:
लेफ्टीनेंट को ऐसा इसलिए लगा कि कर्नल के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है। क्योंकि-

  1. दक्षिण भारत में टीपू सुल्तान अंग्रेज़ों को भगाने के लिए कटिबद्ध है। उसने अफगान शासक शाहे-जमा से मदद माँगी थी।
  2. पूरब में बंगाल के नवाब का भाई शमसुद्दौला भी अंग्रेजों को पसंद नहीं करता है। उसने भी शाहे-जमा को आमंत्रित किया था।
  3. अवध के पूर्व नवाब वजीर अली के मन में अंग्रेजों के विरुद्ध कूट-कूटकर नफ़रत भरी हुई है। वह शाहे-जमा के हमले के इंतजार में है ताकि शाहे-जमा का साथ देकर अंग्रेज़ों को भारत से खदेड़ सके।

प्रश्न 2.
वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?
उत्तर:
वज़ीर अली को उसके पद से हटा कर बनारस भेज दिया गया और तीन लाख रुपये वार्षिक वज़ीफ़ा देना तय कर दिया गया। कुछ महीने बाद ही गवर्नर जनरल ने उसे कलकत्ता बुलाया। इसपर वज़ीर अली कंपनी के वकील के पास गया, जो बनारस में रहता था और उससे शिकायत की कि गवर्नर जनरल उसे कलकत्ता में क्यों बुला रहा है। वकील ने उसकी शिकायत की परवाह तक नहीं की, उलटा उसे ही बुरा-भला सुना दिया। अंग्रेज़ों के लिए वज़ीर अली के दिल में वैसे भी नफ़रत कूट-कूटकर भरी हुई थी, इसलिए उसने खंजर से वकील का काम तमाम कर दिया।

प्रश्न 3.
सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए?
उत्तर:
सवार, जो अपनी जान की परवाह किए बिना कर्नल के खेमें में चला आया था, वह वज़ीर अली ही था। वजीर अली को कर्नल द्वारा डेरा डालने अपने साथ लाव-लशकर रखने की बात अच्छी तरह पता थी। उसने आते ही कर्नल से ‘तनहाई ! तनहाई !’ कहकर एकांत चाहा। कर्नल ने समझा कि यह वज़ीर अली के बारे में सूचना या उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाला कोई व्यक्ति होगा उसने वज़ीर अली को पकड़वाने के नाम पर कर्नल से दस कारतूस लिया और जान बख्शने की। बात कहता हुआ चला गया।

प्रश्न 4.
वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वज़ीर अली का अपने शत्रु के खेमे में पहुँचकर उसे दो-दो हाथ करने की चुनौती देना एवं वकील की अपमानजनक बातों पर उसकी हत्या कर देना तथा देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान न्योछावर करने से भी नहीं डरना आदि उसकी जाँबाज़ी के परिचायक हैं।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1.
मुट्ठी भर आदमी और ये दमखम।
उत्तर:
मुट्ठी भर आदमी और ये दमखम-आशय है कि वज़ीर अली से अवध की सत्ता छिनने के बाद अब उसके साथ थोड़े से आदमी ही थे, जिनके सहारे अपने से कई गुना शक्तिशाली दुश्मनों (अंग्रेज़ों) और घर के भेदियों से मुकाबला करते हुए दुश्मनों की आँखों में धूल ही नहीं झोक रहा था बल्कि अपनी खोई सत्ता पाने के लिए प्रयासरत था। उसने कंपनी की हत्या करके अपना दमखम दिखा दिया था।

प्रश्न 2.
गर्द तो ऐसे उड़ रही है जैसे कि पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो, मगर मुझे तो एक ही सवार’ नज़र आता है।
उत्तर:
इसका आशय है कि गर्द (धूल) तो ऐसे उड़ रही थी, मानों कोई काफ़िला आ रही हो, क्योंकि वज़ीर अली अकेला भी चलता था, तो उसके अदम्य साहस और विवेक पूर्ण ढंग से चलना ऐसे लगता था कि सेना सहित चला आ रहा हो। वज़ीर अली जब अपनी योजनाएँ बनाता था, तो इतनी सूझ-बूझ से बनाता था कि शत्रु को इसकी भनक भी नहीं पड़ती थी। किसी भी देशद्रोही अथवा धोखेबाज़ को वह ऐसा मौका नहीं देता था कि उसकी योजना या उसका पता शत्रु को बता सके इसलिए उसे कोई भी धोखा नहीं दे सका और न ही पकड़ सका। तभी तो दूर से आता हुआ वह अकेला घुड़सवार ही काफ़िले की तरह दिखाई दे रहा था।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का एक-एक पर्याय लिखिए-

  1. खिलाफ,
  2. पाक,
  3. उम्मीद,
  4. हासिल,
  5. कामयाब,
  6. वजीफा,
  7. नफ़रत,
  8. हमला,
  9. इंतेज़ार,
  10. मुमकिन।

उत्तर:

  1. विरुद्ध,
  2. पवित्र,
  3. आशा,
  4. मिलना (प्राप्त होना),
  5. सफल,
  6. वृत्ति (परवरिश के लिए दी जाने वाली राशि),
  7. घृणा,
  8. आक्रमण,
  9. प्रतीक्षा,
  10. संभव।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

  1. आँखों में धूल झोंकना,
  2. कूट-कूट कर भरना,
  3. काम तमाम कर देना,
  4. जान बख्श देना,
  5. हक्का-बक्का रह जाना।

उत्तर:

  1. वज़ीर अली अंग्रेजों की आँखों में धूल झोंककर चला गया।
  2. सरदार भगत सिंह में देश भक्ति की भावना कूट-कूट भरी हुई थी।
  3. पुलिस ने गोलियों से डाकुओं का कामतमाम कर दिया।
  4. हे ईश्वर! मुझ अस्वस्थ की जानबख्श दो।
  5. वज़ीर अली की चतुराई देखकर कर्नल हुक्का-बक्का रह गया

प्रश्न 3.
कारक वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताता है। निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम लिखिए-

  1. जंगल की जिंदगी बड़ी खतरनाक होती है।
  2. कंपनी के खिलाफ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई।
  3. वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया।
  4. फौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।
  5. सिपाही घोड़े पर सवार था।

उत्तर:

  1. जंगल की जिंदगी बड़ी खतरनाक होती है।                                 (संबंध कारक)
  2. कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई।              (संबंध कारक, अधिकरण कारक)
  3. वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया।                                    (कर्म कारक, आपादान कारक)
  4. फौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।                               (संप्रदान कारक, संबंध कारक)
  5. सिपाही घोड़े पर सवार था।                                                     (अधिकरण कारक)

प्रश्न 4.
क्रिया का लिंग और वचन सामान्यतः कर्ता और कर्म के लिंग और वचन के अनुसार निर्धारित होता है। वाक्य में कर्ता और कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार जब क्रिया के लिंग, वचन आदि में परिवर्तन होता है, तो उसे अन्विति कहते हैं। क्रिया के लिंग, वचन में परिवर्तन तभी होता है, जब कर्ता या कर्म परसर्ग रहित हों;
जैसे-

  • सवार कारतूस माँग रहा था। (कर्ता के कारण)
  • सवार ने कारतूस माँगे। (कर्म के कारण)
  • कर्नल ने वज़ीर अली को नहीं पहचाना। (यहाँ क्रिया कर्ता और कर्म किसी के भी कारण प्रभावित नहीं है)

अतः कर्ता और कर्म के परसर्ग सहित होने पर क्रिया कर्ता और कर्म में से किसी के भी लिंग और वचन से प्रभावित नहीं होती और वह एकवचन पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है। नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-

  1. घोड़ा पानी पी रहा था।
  2. बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
  3. रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।
  4. देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।

उत्तर:

  1. घोड़े ने पानी पियो ।
  2. बच्चों ने दशहरे का मेला देखा।
  3. राबिनहुड ने गरीबों की मदद की।
  4. देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए-

  1. कर्नल ने कहा सिपाहियो इस पर नज़र रखो ये किस तरफ जा रहा है।
  2. सवार ने पूछा आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है इतने लावलश्कर की क्या ज़रूरत है।
  3. खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बाते कर रहे थे चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे एक व्यक्ति कह रहा था दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।

उत्तर:

  1. कर्नल ने कहा- “सिपाहियो! इस पर नज़र रखो, ये किधर जा रहे हैं?”
  2. सवार ने पूछा- “आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है? इतने लावलश्कर की क्या ज़रूरत है?”
  3. खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे, चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे।

योग्यता विस्तार-

प्रश्न 1.
पुस्तकालय से रॉबिनहुड के साहसिक कारनामों के बारे में जानकारी हासिल कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
वृंदावनलाल वर्मा की कहानी इब्राहिम गार्दी पढ़िए और कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

परियोजना

प्रश्न 1.
कारतूस’ एकांकी का मंचन अपने विद्यालय में कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
‘एकांकी’ और ‘नाटक’ में क्या अंतर है? कुछ नाटकों और एकांकियों की सूची तैयार कीजिए।
उत्तर:
एकांकी एक अंक का नाटक होता है, जिसमें दृश्य परिवर्तन नहीं होता। एकांकी में नाटकाकार अपने कथ्य को विस्तृत रूप से न कहकर संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करता है। इसका कलेवर लघु होता है, जबकि नाटक का स्वरूप विशाल होता है। नाटक एक ऐसी विधा है, जो वस्तुनिष्ठता की माँग करती है। नाटक केवल लिखा नहीं जाता, वह अभिनीत होकर दर्शकों से तादात्मय स्थापित करने के बाद पूरा होता है।
नाटक

  1. मृत्युंजय
  2. अंधायुग
  3. आषाढ़ का एक दिन
  4. आधे-अधूरे
  5. द्रौपदी
  6. कविरा खड़ा बाज़ार में
  7. एक और अजनबी

एकांकी

  1. एक तोले की अफीम की कीमत
  2. भोर का तारा
  3. दस मिनट
  4. स्वर्ग का कमरा
  5. स्ट्राइक
  6. लक्ष्मी का स्वागत
  7. सूखी डाली
  8. पहेली

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16 पतझर में टूटी पत्तियाँ

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 10 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16 पतझर में टूटी पत्तियाँ.

पाठ्य पुस्तक प्रश्न

मौखिक

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

I.
प्रश्न 1.
शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
उत्तर:
शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना इसलिए अलग होता है क्योंकि शुद्ध सोना 24 कैरेट वाला, लचीला और कमजोर होता है, जबकि गिन्नी का सोना 22 कैरेट वाला मज़बूत और चमकदार होता है।

प्रश्न 2.
प्रैक्टिकले आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?
उत्तर:
शुद्ध आदर्श भी शुद्ध सोने की तरह होते हैं। कुछ लोग आदर्शों में व्यावहारिकता का ताँबा मिला देते हैं और फिर उसे आचरण में लाकर दिखाते हैं, तब उन्हें प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट कहा जाता है।

प्रश्न 3.
पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या हैं?
उत्तर:
‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श हैं-अपने सत्य, अपने मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहना तथा उनसे कोई समझौता न करना।

II.
प्रश्न 4.
लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात क्यों कही है?
उत्तर:
लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात इसलिए कही है, क्योंकि जापानियों के जीवन की रफ़्तार बहुत बढ़ गई है। वहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है। वहाँ कोई बोलता नहीं, बकता है। जब वे अकेले पड़ जाते हैं, तो स्वयं से ही बड़बड़ाने लगते हैं। वे एक महीने का काम एक दिन में करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने विश्व के विकसित देशों की अग्रणी श्रेणी में आने की ठान ली है।

प्रश्न 5.
जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?
उत्तर:
जापान में चाय पीने की विधि का नाम ‘टी-सेरेमनी’ है, जिसमें शांति को प्रमुखता दी जाती है। चाय बनाने और पीने का यह काम अत्यंत शांतिपूर्ण वातावरण में होता है।

प्रश्न 6.
जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है ?
उत्तर:
जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की यह विशेषता है कि वह एक पर्णकुटी जैसा सजा होता है तथा वहाँ बहुत शांति होती है। इस पर्णकुटी जैसे सजे स्थान पर केवल तीन लोग बैठकर चाय पी सकते हैं। यहाँ पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। बैठने के लिए चटाई, हाथ पैर धोने के लिए मिट्टी के बर्तन में पानी व चाय बनाने के लिए अँगीठी की व्यवस्था होती है।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

I.
प्रश्न 1.
शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
उत्तर:
शुद्ध आदर्श पूरी तरह से शुद्ध होते हैं जिनसे कोई समझौता नहीं किया जाता है। यही स्थिति शुद्ध सोने की होती है। जिसमें किसी अन्य धातु की मिलावट नहीं की जाती है। चूंकि व्यावहारिकता के नाम पर आदर्शों से समझौता किया जाता है इसलिए इसकी तुलना ताँबे से की गई है।

II.
प्रश्न 2.
चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?
उत्तर:
चाजीन ने टी-सेरेमनी से जुड़ी सभी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं।
वे क्रियाएँ निम्नलिखित हैं-

  1. टी-सेरेमनी एक पर्णकुटी में पूरी हुई।
  2. सर्वप्रथम सभी हाथ-पैर धोकर अंदर गए। वहाँ चाजीन ने सभी का कमर झुकाकर स्वागत किया, प्रणाम किया तथा बैठने की जगह दिखाई।
  3. अँगीठी सुलगाकर उसपर चायदानी रखी। बगल के कमरे से बरतन लाकर उनको तौलिए से साफ़ किया।
  4. वहाँ के शांत वातावरण में चाय के उबलने की भी आवाज़ आ रही थी। चाजीन ने बड़े ही सलीके से चाय परोसी।

प्रश्न 3.
‘टी-सेरेमनी में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?
उत्तर:
टी-सेरेमनी में एक साथ तीन व्यक्तियों को प्रवेश दिया जाता था, जिससे वहाँ के शांत वातावरण में खलल न पैदा हो और चाय पीने वाले चाय पीकर अद्भुत शांति और सकून की अनुभूति कर सकें।

प्रश्न 4.
चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया ?
उत्तर:
चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में यह परिवर्तन महसूस किया कि उसके दिमाग से भूत और भविष्य दोनों उड़ गए थे। केवल वर्तमान क्षण उसके सामने था और वह अनंतकाल जितना विस्तृत हो गया था।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

I.
प्रश्न 1.
गांधी जी के नेतृत्व में अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
गांधी जी अत्यंत कुशल एवं लोकप्रिय नेता थे। उनमें नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। हजारों-लाखों लोग उनके पीछे चल पड़ते थे। उन्होंने व्यावहारिकता के नाम पर कभी आदर्शों से समझौता नहीं किया। उनका प्रयास रहता था कि मानव-व्यवहार आदर्श बने। वे आदर्शों का पालन करने में आगे रहे। वे सत्य और अहिंसा का पालन करते रहे। उन्हें देखकर उनकी शरण में आने वाले अन्य लोग भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित हुए। यह गांधी जी की नेतृत्व क्षमता ही थी कि उनके अनुयायियों ने भी उनके आदर्शों को अपनाया।

प्रश्न 2.
आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं, जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हमारे विचार से सत्य, ईमानदारी, सच्चरित्रता, विनम्रता, सहनशक्ति, अहिंसा, परोपकार आदि शाश्वत मूल्य हैं, जिनकी प्रासंगिकता आज भी है। इन्हीं मूल्यों को अपनाकर समाज के विघटन को रोका जा सकता है और विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है। आज पाश्चात्य सभ्यता एवं संस्कृति के कुप्रभाव से इन शाश्वत मूल्यों में गिरावट आ गई है। समाज पतन के गर्त में गिरता जा रहा है। खेद का विषय यह है कि हम तो शाश्वत मूल्यों से विरक्त होते जा रहे हैं और पाश्चात्य लोग शाश्वत मूल्यों से बनी हमारी संस्कृति की ओर झुक रहे हैं।

प्रश्न 3.
अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब

  1. शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो।
  2. शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।

उत्तर:

1. मैंने अपने जीवन का आदर्श बनाया है-सत्यवादिता। मेरी हर संभव यही कोशिश रहती है कि झूठ न बोलूं। मेरे एक पड़ोसी दहेज के लिए अपनी बहू को मारते-पीटते रहते थे। एक बार किसी ने 100 नं. पर फ़ोन करके पुलिस को बुला लिया। मैंने पुलिस को सही-सही बता दिया। इससे वे अब तक नाराज हैं। अब वे हर समय मेरा अहित करने की फिक्र में रहते हैं।

2. मैं बच्चों को यही सीख देता हूँ कि वे झूठ न बोलें। बच्चे भी इस बात को ध्यान में रखते हैं पर बाल स्वभाव के
कारण यदि एकाध बार झूठ बोल दिए तो उनका ध्यान उस झूठ की ओर आकर्षित कराकर छोड़ देता हूँ। वे भविष्य में फिर झूठ न बोलने का वायदा करते हैं। इस तरह की व्यावहारिकता के मेल से वे सत्य बोलना अपनी आदत में शामिल कर लेते हैं।

प्रश्न 4.
“शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना’-गांधी जी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गांधी जी ने जीवन भर आदर्शों को ही व्यावहारिक रूप दिया था। उन्होंने कहीं भी व्यवहार में ताँबे रूपी असत्य, | हिंसा, बेईमानी जैसी मिलावट को नहीं आने दिया था। उदाहरण के लिए जब वे विद्यार्थी थे, तो ‘परीक्षा में ‘कैटल शब्द अशुद्ध लिखने पर अध्यापक ने उन्हें पड़ोसी बच्चे की नकल करके ठीक करने को कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। ऐसे अनेक उदाहरणों से उनका जीवन भरा पड़ा है।

प्रश्न 5.
‘गिरगिट’ कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी को सोना’ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि आदर्शवादिता’ और ‘व्यावहारिकता’ इनमें से जीवन में किसको महत्त्व है?
उत्तर:
यह पूर्णतया सत्य है कि मनुष्य के व्यवहार में कुशलता होनी चाहिए परंतु उसका अपना आदर्श होना चाहिए। इस आदर्श से उसे कभी भी डिगना नहीं चाहिए। इस आदर्श को बनाए रखते हुए उसे अपने व्यवहार को विनम्र मधुर बनाना चाहिए। उसे अवसरानुकूल व्यवहार को लचीला बनाना चाहिए पर आदर्श को अवश्य बनाए रखना चाहिए।

प्रश्न 6.
लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर:
लेखक के मित्र ने मानसिक रोगों के कई कारण बताए, जो निम्नलिखित हैं-

  1. जापानी लोग हमेशा प्रगति के लिए अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करते हैं।
  2. जीवन की गति अधिक बढ़ने से वे चलने के स्थान पर दौड़ते हैं।
  3. महीने का काम एक दिन में करने का प्रयास करते हैं।
  4. जापानी लोग बोलते नहीं, बकते हैं, अकेला होने के कारण बड़बड़ाते हैं।
  5. विकसित देशों से प्रतिस्पर्धा के कारण वे लोग दिमाग को बड़ी तेजी से दौड़ाते हैं।

हम इन सभी कारणों से सहमत हैं, क्योंकि बहुत जल्दी-जल्दी करने से भी तनाव बढ़ता है, अशांति बढ़ती है, जिससे मानसिक रोग बढ़ते हैं। आज महानगरीय जीवन तो कुछ-कुछ जापान जैसा ही होता जा रहा है।

प्रश्न 7.
लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लेखक का मानना है कि भूतकाल तो बीत चुका है। उसकी अच्छी या बुरी बातें याद करने से मनुष्य को दुख होता है। वह तनाव में जीता है। इसी प्रकार भविष्य जो न तो हमारे सामने है और न जिसे हमने देखा है के बारे में रंगीन कल्पनाएँ। हमारे वर्तमान के दुख को बढ़ाती हैं। वे सच भी नहीं होती हैं। वर्तमान काल हमारे सामने होता है। हम उसी में जीते हैं। यही वास्तविक और सत्य है। वर्तमान काल की वास्तविकता और सत्यता देखकर ही लेखक ने ऐसा कहा होगी।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

I.
प्रश्न 1.
समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है, तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
उत्तर:
व्यवहारवादी लोग ‘येनकेन प्रकारेण’ अपनी ही उन्नति के बारे में सोचते हैं और आगे बढ़ते जाते हैं। उन्हें दूसरों से कुछ लेना-देना नहीं होता है। वास्तव में होना यह चाहिए कि वे अपनी उन्नति के अलावा दूसरों के बारे में भी कुछ सोचें। आदर्शवादी अपने आदर्शों के कारण ऐसा ही सोचते और करते हैं। इनके व्यवहार में त्याग, अहिंसा, समता, बंधुता, समानता दिखाई देती है। समाज में शाश्वत मूल्य ऐसे लोगों के कारण ही बचे हैं।

प्रश्न 2.
जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है, तब ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है।
उत्तर:
जब हम व्यावहारिकता की बात करने लगते हैं या व्यावहारिकता पर बल देने लगते हैं, तो आदर्श फीके पड़ जाते | हैं, पीछे छूटने लगते हैं। लोगों की सोच व्यावहारिकता का समावेश करने लगती है। ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट में से आइडियालिस्ट शब्द गायब होने लगता है और वे व्यावहारिकता को ही सब कुछ मानने लगते हैं।

II.
प्रश्न 3.
हमारे जीवन की रफ्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। जब हम अकेले पड़ते हैं, तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।
उत्तर:
जापानी लोग जल्दी से जल्दी तरक्की करने के लिए दिन-रात काम में लगते हैं। वे स्वाभाविक रूप से तेज सोचते हैं पर वे इसमें स्पीड’ का इंजन लगाकर मस्तिष्क की गति बढ़ा देना चाहते हैं। वे महीनों का काम दिनों में करना चाहते हैं। उनके हर काम में जल्दबाजी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। अधिकाधिक काम करने के चक्कर में चलने की जगह भागते हैं और बोलने की जगह बड़बड़ाते हैं और तनावग्रस्त जीवन जीते हैं।

प्रश्न 4.
सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था, मानों जयजयवंती के सुर गूंज रहे हों।
उत्तर:
इसका आशय है कि जब लेखक अपने दो मित्रों सहित ‘टी सेरेमनी में गया, तो वहाँ ‘चाजीन’ ने उनका स्वागत किया तथा बैठाया। इसके बाद उसने अँगीठी सुलगाई, उसपर चायदानी रखी, बगल के कमरे में जाकर कुछ बरतन ले आया तथा तौलिए से बरतने साफ़ किए। यह सब देखकर लेखक को अनुभव हुआ कि ‘चाजीन’ ने सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा तथा गतिविधि से लगता था कि जैसे जयजयवंती के सुर गूंज रहे हों।

भाषा अध्ययन

I.
प्रश्न 1.
नीचे दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-

  1. व्यावहारिकता,
  2. आदर्श,
  3. सूझबूझ,
  4. विलक्षण,
  5. शाश्वत।

उत्तर:

  1. व्यावहारिकता – गांधी जी व्यावहारिकता को पहचानते थे।
  2. आदर्श – मानव को हमेशा अपने आदर्श ऊँचे रखने चाहिए।
  3. सूझबूझ – हमें हमेशा सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए।
  4. विलक्षण – गांधी विलक्षण प्रतिभा वाले थे।
  5. शाश्वत – शाश्वत मूल्य आदर्शवादी लोगों ने दिए हैं।

प्रश्न 2.
लाभ-हानि’ का विग्रह इस प्रकार होगा-लाभ और हानि। यहाँ द्वंद्व समास है, जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। दोनों पदों के बीच योजक शब्द का लोप करने के लिए योजक चिह्न लगाया जाता है। नीचे दिए गए दूवंद्व समास का विग्रह कीजिए-

  1. माता-पिता    = ………………..
  2. पाप-पुण्य     =  ………………..
  3. सुख-दुख      =  ………………..
  4. रात-दिन      =  ………………..
  5. अन्न-जल      =  ………………..
  6. घर-बाहर     =  ………………..
  7. देश-विदेश   =  ………………..

उत्तर:

  1. माता-पिता  = माता और पिता
  2. पाप-पुण्य   = पाप और पुण्य
  3. सुख-दुख   = सुख और दुख
  4. रात-दिन    = रात और दिन
  5. अन्न-जल    = अन्न और जल
  6. घर-बाहर   = घर और बाहर
  7. देश-विदेश = देश और विदेश

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए-

  1. सफल             = ……………..
  2. विलक्षण लक्षण  = ……………..
  3. व्यावहारिक       = ……………..
  4. सजग               = ……………..
  5. आदर्शवादी       = ……………..
  6. शुद्ध                 = ……………..

उत्तर:

  1. सफल = सफलता
  2. विलक्षण = विलक्षणता
  3. व्यावहारिक = व्यावहारिकता। जग सजगता
  4. आदर्शवादी = आदर्शवादिता
  5. शुद्ध = शुद्धता

प्रश्न 4.
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए-

  1. शुद्ध सोना अलग है।
  2. बहुत रात हो गई अब हमें सोना चाहिए।

ऊपर दिए गए वाक्यों में ‘सोना’ का क्या अर्थ है? पहले वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है धातु ‘स्वर्ण’। दूसरे वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है ‘सोना’ नामक क्रिया। अलग-अलग संदर्भो में ये शब्द अलग अर्थ देते हैं अथवा एक शब्द के कई अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए
उत्तर, कर, अंक, नंगे।
उत्तर:

  1. उत्तर –
    1. मुझे प्रश्न का उत्तर दो।
    2. उत्तर दिशा की ओर देखो।
  2. कर –
    1. तुम माला कर में पकड़ लो।
    2. तुम पर कितना कर लगा है?
  3. अंक –
    1. नाटक के तीन अंक हैं।
    2. तुम्हें परीक्षा में कितने अंक मिले?
  4. नग –
    1. यह अँगूठी नग वाली है।
    2. पहाड़ों को नग कहते हैं।

II.
प्रश्न 5.
नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए-

  1. (क)
    1. अँगीठी सुलगायी।
    2. उस पर चायदानी रखी।
  2. (ख)
    1. चाय तैयार हुई।
    2. उसने वह प्यालों में भरी।
  3. (ग)
    1. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया।
    2. तौलिये से बरतन साफ किए।

उत्तर:

  1. (क) अँगीठी सुलगाई और उस पर चायदानी रखी।
  2. (ख) चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।
  3. (ग) वह बगल के कमरे से कुछ बर्तन लाया और उसने तौलिये से बर्तन साफ किए।

प्रश्न 6.
नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए-

  1. (क)
    1. चाय पीने की यह एक विधि है।
    2. जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं।
  2. (ख)
    1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बतरन था।
    2. उसमें पानी भरा हुआ था।
  3. (ग)
    1. चाय तैयार हुई।
    2. उसने वह प्यालों में भरी।
    3. फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।

उत्तर:

  1. (क) जापानी में इसे चा-नो-यू कहते हैं, जोकि चाय पीने की एक विधि है।
  2. (ख) बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था, जो पानी से भरा हुआ था।
  3. (ग) उसने प्याले हमारे सामने रख दिए, जो तैयार की गई चाय से भरे हुए थे।

योग्यता विस्तार

I.
प्रश्न 1.
गांधीजी के आदर्शों पर आधारित पुस्तकें पढ़िए; जैसे- महात्मा गांधी द्वारा रचित ‘सत्य के प्रयोग और गिरिराज किशोर द्वारा रचित उपन्यास ‘गिरमिटिया’ ।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

II.
प्रश्न 2.
पाठ में वर्णित ‘टी-सेरेमनी’ का शब्द चित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
हिंदी भाषा में जिसे चाय पीने की विधि कहते हैं, उसे जापानी भाषा में ‘चा-नो-यू’ और अंग्रेज़ी भाषा में ‘टी-सेरेमनी’ कहा जाता है।
छः मंजिली ऊँची इमारत, उस भवन की छत पर दफ्ती की दीवारें व चटाई की ज़मीन वाली एक बहुत सुंदर पत्तों की झोंपड़ी थी। उस पर्णकुटी के बाहर एक असुंदर मिट्टी का बर्तन था। उसे बर्तन के पानी से लेखक और उसके मित्र ने अपने हाथ-पैर धोए। इसके बाद वे अंदर गए। वहाँ उन्होंने एक ‘चाजीन’ को बैठे देखा। उसने दोनों को प्रणाम किया और कहा-

तशरीफ लाइए (बैठिए)। उसने लेखक को बैठने की जगह दिखाई। चाजीन ने फिर अँगीठी सुलगाई और उस पर चायदानी रखी। उसने कुछ बर्तन लाकर कपड़े से बर्तन साफ किए। उसकी इस प्रक्रिया को देखकर लगा कि लेखक व उनके मित्र किसी राग का आनंद ले रहे हैं। वहाँ वातावरण इतना शांतमय था कि चायदानी के पानी का खदबदना भी सुनाई दे रहा है। इसके बाद चाय सामने रखी गई और वे चाय की चुस्कियों का आनंद डेढ़ घंटे तक लेते रहे। यह दृश्य व क्षण आनंदकारी था।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1.
भारत के नक्शे पर वे स्थान अंकित कीजिए, जहाँ चाय की पैदावार होती है। इन स्थानों से संबंधित भौगोलिक स्थितियाँ क्या हैं और अलग-अलग जगह की चाय की क्या विशेषताएँ हैं, इनका पता लगाइए और परियोजना पुस्तिका में लगाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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