Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 34 युधिष्ठिर की चिंता और कामना

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 34 युधिष्ठिर की चिंता और कामना

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 34

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
धृष्टद्युम्न ने क्या चलाकी की?
उत्तर:
धृष्टद्युम्न ने द्रोणाचार्य पर आक्रमण करके जयद्रथ की रक्षा के लिए जाने से रोके रखा।

प्रश्न 2.
सात्यकि जब संकट में पड़ गए तो युधिष्ठिर ने अपने योद्धाओं से क्या कहा?
उत्तर:
सात्यकि जब संकट में पड़ गए तो युधिष्ठिर ने अपने योद्धाओं से कहा- सात्यकि आचार्य द्रोण के बाण से आहत हो रहे हैं। अतः हम लोग उधर चलकर उस वीर महारथी की सहायता करें।

प्रश्न 3.
सात्यकि पर किसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी थी?
उत्तर:
सात्यकि पर युधिष्ठिर की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी।

प्रश्न 4.
आचार्य द्रोण का क्या संकल्प था?
उत्तर:
उनका संकल्प था युधिष्ठिर को जिंदा पकड़ना।

प्रश्न 5.
युधिष्ठिर ने धृष्टद्युम्न से क्या कहा?
उत्तर:
युधिष्ठिर धृष्टद्युम्न से बोले- द्रुपद कुमार/आपको अभी जाकर आचार्य पर आक्रमण करना चाहिए। अगर आप उनके ऊपर आक्रमण नहीं करेंगे, तो संभव है कि द्रोण के हाथों सात्यकि का वध हो जाए।

प्रश्न 6.
धृष्टद्युम्न ने भीम को क्या भरोसा दिलाया?
उत्तर:
धृष्टद्युम्न ने भीम से कहा- तुम किसी प्रकार की चिंता न करो। इतना विश्वास रखो कि मेरा वध किए बिना युधिष्ठिर को कोई नहीं पकड़ पायेगा।

प्रश्न 7.
युधिष्ठिर मन ही मन क्या कामना कर रहे थे?
उत्तर:
युधिष्ठिर मन ही मन कामना कर रहे थे कि- संध्या होने पहले अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर लौट जाएँ। जयद्रथ की मृत्यु के बाद दुर्योधन शायद संधि कर ले। इसके अलावे वे मन ही मन शांति की कामना भी कर रहे थे।

प्रश्न 8.
दुर्योधन मैदान छोड़कर क्यों भागने लगा? द्रोण ने उसे क्या समझाया?
उत्तर:
अर्जुन और जयद्रथ के मध्य घमासान युद्ध चल रहा था कि उसी वक्त वहाँ दुर्योधन भी उसकी सुरक्षा में आ गया और वहाँ युद्ध के दौरान बुरी तरह घायल होने के कारण मैदान छोड़कर भागने लगा। तब द्रोण ने सलाह दी कि- “बेटा तुम्हें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। तुम्हें जयद्रथ की सहायता के लिए जाना चाहिए और जो आवश्यक हो उसे करना भी चाहिए।”

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
द्रोणाचार्य और सात्यकि के बीच हुए युद्ध का वर्णन करें।
उत्तर:
आचार्य द्रोण को रोकने के लिए धृष्टद्युम्न आचार्य के रथ पर चढ़कर युद्ध करने लगा। अंत में द्रोण ने क्रोध में आकर पंचाल कुमार पर बाण चलाया। सात्यकि ने बाण बीच में ही काट दिया जिससे धृष्टद्युम्न के प्राण बच गए। अचानक सात्यकि के बाण रोक लेने से द्रोण का ध्यान उसकी ओर चला गया। इसी बीच पंचाल सेना के रथ सवार, धृष्टद्युम्न को वहाँ से हटा ले गए, लेकिन सात्यकि पांडव सेना के बहादुर योद्धाओं में से एक था, अत: जब आचार्य उन पर युद्ध के लिए झपटे तो सात्यकि भी उनका डटकर सामना करने लगे। इस प्रकार दोनों में भयंकर युद्ध लंबे समय तक होता रहा।

प्रश्न 2.
युधिष्ठिर ने धृष्टद्युम्न को क्या आदेश दिया?
उत्तर:
युधिष्ठिर ने धृष्टद्युम्न को आज्ञा दिया कि- द्रुपद कुमार आपको अभी जाकर आचार्य द्रोण के ऊपर हमला करना चाहिए। नहीं तो डर है कि कहीं आचार्य के हाथों सात्यकि का वध न हो जाए।” युधिष्ठिर ने धृष्टद्युम्न के साथ आक्रमण करने के लिए एक बड़ी सेना भेज दी। सही समय पर कुमुक के पहुँच जाने पर भी बड़े कठिन परिश्रम के बाद सात्यकि को द्रोण के चंगुल से छुड़ाया जा सका।

प्रश्न 3.
कर्ण और भीम के मध्य होने वाले युद्ध का वर्णन करें।
उत्तर:
कर्ण और भीम के युद्ध के दौरान भीम के रथ के घोड़े मारे गए। सारथी गिरकर कट गया। रथ टूट-फूट कर बिखर गया और धनुष भी कट गए। भीम अब ढाल-तलवार से आक्रमण करने लगा। कर्ण ने उसके ढाल के भी टुकड़े कर दिए। भीम को बड़ा क्रोध आया। वह कूदकर कर्ण के रथ पर ही बैठ गया। कर्ण ने रथ के ध्वज स्तंभ की आड़ लेकर भीम को आक्रमण से अपने को बचा लिया। इसके बाद भीम रथ से उतरकर मैदान में पड़े रथ के पहिए, घोड़े, हाथ, उठा-उठाकर कर्ण के ऊपर फेंकने लगा। उस समय कर्ण चाहता तो भीम को आसानी से मार देता लेकिन उसे माता कुंती को दिया हुआ वचन याद था कि युद्ध में अर्जुन के अलावा वह किसी से युद्ध नहीं करेगा।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 34

दुर्योधन को अर्जुन का पीछा करते देखकर पांडव-सेना ने शत्रुओं पर तेज़ हमला कर दिया। धृष्टद्युम्न ने सोचा कि यदि जयद्रथ की रक्षा करने के लिए यदि द्रोण भी चले गए तो अर्जुन के लिए जयद्रथ का वध करना असंभव हो जाएगा और अर्जुन काफ़ी कमज़ोर पड़ जाएगा। धृष्टद्युम्न की चाल के कारण कौरव सेना तीन हिस्सों में बँटकर कमज़ोर हो गई।

धृष्टद्युम्न आचार्य द्रोण के रथ पर भयंकर आक्रमण करने लगे। क्रोध में आकर द्रोण ने भी पांचाल कुमार पर एक पैना बाण चलाया। यह बाण पांचाल कुमार का जान ही ले लेता यदि सात्यकि का बाण उसे बीच में काट न देता। इसी बीच युधिष्ठिर को पता चला कि सात्यकि को द्रोण ने घेर लिया है तो वे अपने योद्धा को लेकर उनके सहायता के लिए गए। इसके बाद वे धृष्टद्युम्न से बोले अभी आपको द्रोणाचार्य पर आक्रमण करना चाहिए, नहीं तो द्रोण के हाथों सात्यकि मारा जाएगा।

इसी समय श्रीकृष्ण के पांचजन्य की ध्वनि सुनाई पड़ी। इसे सुनकर युधिष्ठिर चिंतत हो गए। वे सात्यकि से अनुरोध करने लगे कि आप जल्द ही अर्जुन की सहायता के लिए चले जाएँ। भीम, युधिष्ठिर को धृष्टद्युम्न के सहारे छोड़कर चला गया। भीम उस रणक्षेत्र में पहुँच गए जहाँ जयद्रथ और अर्जुन की सेना में युद्ध चल रहा था। अर्जुन को सुरक्षित देखकर भीम ने युधिष्ठिर के अनुसार सिंहनाद किया। सिंहनाद सुनकर श्रीकृष्ण और अर्जुन उछल पड़े। युधिष्ठिर भी समझ गए कि अर्जुन सकुशल है। वे मन ही मन अर्जुन को आशीर्वाद देने लगे। इतने में उसी समय वहाँ दुर्योधन भी पहुँच गया। उस दिन कर्ण और भीम में भयंकर युद्ध हुआ। इसमें भीम के रथ के घोडे मारे गए। सारथी भी मारा गया। भीम के ढाल भी टुकड़े-टुकड़े हो गए। भीम को बड़ा क्रोध आया वह उछल कर कर्ण के रथ पर जाकर बैठ गया। कर्ण ने किसी तरह अपने को भीम से बचा लिया। भीम मैदान में पड़े रथ के पहिए, घोड़े इत्यादि को उठा-उठा कर कर्ण को फेंककर मारने लगा। उसी समय कर्ण चाहता तो भीम को आसानी से मार सकता था लेकिन निहत्थे भीम को कर्ण ने मारना उचित नहीं समझा। उसे माता-कुंती को दिया हुआ वचन भी याद था कि अर्जुन के अलावा वह किसी से युद्ध नहीं करेगा।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-83- विक्षिप्त-बेचैन – पागल, कामना – इच्छा/चाह, हिस्सा – भाग, कमज़ोर – क्षीण, उछलकर – कूदकर, पैना – तेज़।
पृष्ठ संख्या-84- संकट – आफत, अधीर – बेचैन, हालचाल – समाचार, सिंहनाद – सिंह की तरह गर्जन, संग्राम – युद्ध, असह्य – जो सहन न हो सके, आघात – प्रहार, विलक्षण – अद्भुत, निहत्थे – जिसके हाथ में हथियार न हो।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 33 अभिमन्यु

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 33 अभिमन्यु

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 33

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
युधिष्ठिर ने अभिमन्यु से क्या कहा?
उत्तर:
युधिष्ठिर ने अभिमन्यु से कहा- “बेटा द्रोण के रचे हुए चक्रव्यूह को तोड़ना हमारे किसी और योद्धा से नहीं हो सकता। अकेले तुम्ही ऐसे हो, जो द्रोण के बनाए इस व्यूह को तोड़ सकते हो। हम द्रोण की सेना पर आक्रमण करने को तैयार हैं?”

प्रश्न 2.
युधिष्ठिर को जब पता चला कि सात्यकि संकट में है तो उन्होंने अपने वीरों से क्या कहा?
उत्तर:
तब युधिष्ठिर अपने योद्धा से बोले- कुशल योद्धा, नरोत्तम और सच्चे सात्यकि आचार्य द्रोण के बाण से आहत हो रहे हैं, अतः हम लोग वहाँ पहुँचकर उनकी सहायता करें।

प्रश्न 3.
तेरहवें दिन किस-किस में युद्ध छिड़ गया?
उत्तर:
तेरहवें दिन अर्जुन और सशंप्तकों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया।

प्रश्न 4.
द्रोणाचार्य ने किसकी रचना की?
उत्तर:
द्रोणाचार्य ने कौरव-सेना से चक्रव्यूह की रचना की।

प्रश्न 5.
अभिमन्यु किसका पुत्र था?
उत्तर:
अभिमन्यु अर्जुन-सुभद्रा का पुत्र था।

प्रश्न 6.
चक्रव्यूह के बारे में अभिमन्यु क्या जानता था?
उत्तर:
अभिमन्यु चक्रव्यूह में प्रवेश करना तो जानता था, पर निकलना नहीं जानता था।

प्रश्न 7.
भीम ने अभिमन्यु को क्या विश्वास दिलाया?
उत्तर:
भीम ने अभिमन्यु को विश्वास दिलाया कि मैं तुम्हारे पीछे चलूँगा तथा साथ में अन्य कई योद्धा होंगे।

प्रश्न 8.
धृष्टद्युम्न ने भीम को क्या भरोसा दिलाया?
उत्तर:
धृष्टद्युम्न ने भीम से कहा- तुम किसी प्रकार की चिंता न करो। इतना विश्वास रखो कि मेरा वध किए बिना युधिष्ठिर को नहीं पकड़ सकेंगे।”

प्रश्न 9.
युधिष्ठिर की क्या कामना थी?
उत्तर:
युधिष्ठिर की यह कामना थी कि सूरज डूबने से पहले अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर लौट जाएँ। जयद्रथ की मृत्यु के बाद दुर्योधन शायद संधि कर ले। वे मन ही मन शांति स्थापना की कामना कर रहे थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भीम की बात सुनकर अभिमन्यु ने क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर:
भीम की बात सुनकर बालक अभिमन्यु को अपने मामा श्रीकृष्ण और पिता अर्जुन की वीरता का स्मरण हो आया। वह बडे उत्साह के साथ बोला- मैं अपनी वीरता और पराक्रम से अपने मामा श्रीकृष्ण और पिता जी को अवश्य प्रसन्न करूँगा।

प्रश्न 2.
जयद्रथ युद्ध छोड़कर क्यों भागना चाहता था?
उत्तर:
अर्जुन की प्रतिज्ञा सुनकर जयद्रथ भयभीत हो गया। इस कारण युद्ध छोड़कर अपने राज्य चले जाना चाहता था। दुर्योधन ने उसे धीरज बँधाया और बोला सैंधव आप भयभीत न होवें। मेरी सारी सेना आपकी रक्षा करने के लिए लगी हुई है। यह कहकर दुर्योधन ने जाने से रोक लिया।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 33

तेरहवें दिन भी संशप्तकों ने अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारा। अर्जुन भी उनकी चुनौती स्वीकार करके उनके साथ युद्ध करते हुए दक्षिण की ओर चला गया। नियत स्थान पर पहुँचने के बाद अर्जुन और संशप्तकों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। इधर द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना कर युधिष्ठिर पर आक्रमण कर दिया। उनके आक्रमण को रोकने के लिए पांडवों की ओर से भीम, सात्यकि, चोकेतान, धृष्टद्युम्न, कुंतीभोज, उत्तमौजा, विराटराज और कैकेय इत्यादि सभी महारथी प्रयासरत थे। आचार्य का बेग रुक नहीं रहा था। अतः युधिष्ठिर ने बालक अभिमन्यु को बुलाकर कहा कि केवल तुम्ही द्रोण के बनाए चक्रव्यूह को तोड़ सकते हो। इस पर अभिमन्यु ने कहा- महाराज इस चक्रव्यूह के अंदर प्रवेश करना तो मुझे आता है और पर प्रवेश करने के बाद कहीं कोई संकट आ गया तो व्यूह से बाहर निकलना मुझे याद नहीं है। युधिष्ठिर ने कहा- “बेटा, व्यूह को तोड़कर एक बार तुम प्रवेश कर लो, फिर हम लोग तुम्हारे पीछे-पीछे चले आएँगे और तुम्हारी मदद करेंगे।

युधिष्ठिर की बातों का समर्थन करते हुए भीम ने कहा- एक बार तुमने व्यूह तोड़ दिया, तो फिर यह निश्चित है कि हम सब मिलकर कौरव सेना को तहस-नहस कर डालेंगे।

अभिमन्य ने अपने सारथी समित्र से कहा- जिधर द्रोणाचार्य के रथ का ध्वज है उसी ओर हमें ले चलो। पांडव वीर भी उनके पीछे-पीछे चल पड़े। द्रोण द्वारा बनाए गए चक्रव्यूह को तोड़कर अभिमन्यु व्यूह के अंदर प्रवेश करना चाहते थे लेकिन धृतराष्ट्र का दामाद जयद्रथ अपनी कुशलता और बहादुरी से चक्रव्यूह की टूटी हुई व्यूह की किलेबंदी को फिर से पूरा कर दिया और काफ़ी शक्तिशाली बना दिया। इससे पांडव अंदर प्रवेश नहीं कर सके। अकेला अभिमन्यु चक्रव्यूह के अंदर फँस गया लेकिन वह कौरवों की सेना तहस-नहस करता गया। उसके हाथों दुर्योधन का पुत्र लक्ष्मण मारा गया।

अपने पुत्र को मरते देखकर दुर्योधन के क्रोध की सीमा न रही। उसने आदेश दिया कि अभिमन्यु का इसी क्षण वध करो तुरंत द्रोण, अश्वत्थामा, वृहदबल, कृतवर्मा आदि छह महारथियों ने अभिमन्यु को घेर लिया। कर्ण ने उसके घोड़े की रास काट डाली और पीछे से वार किया, जिससे अभिमन्यु के घोड़े और सारथी मारे गए। उसका धनुष भी टूट गया। अब वह टूटे हुए रथ का पहिया हाथ में लेकर घुमाता रहा तब तक सारी कौरव सेना उस पर टूट पड़ी। दुःशासन का पुत्र गदा लेकर अभिमन्यु पर टूट पड़ा। दोनों में भयंकर युद्ध हुआ।

दोनों के युद्ध में अभिमन्यु मारा गया। शिविर में पहुँचकर अभिमन्यु की मृत्यु की बात सुनकर अर्जुन काफ़ी बिलखने लगे। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया। युधिष्ठिर ने घटनाक्रम की सारी जानकारी दी और बताया कि जयद्रथ के कारण अभिमन्यु मारा गया है। यह सुनकर अर्जुन ने गांडीव पर जोर से टंकार दी और बोले- जिसके कारण मेरे प्रिय पुत्र की मृत्यु हुई है उस जयद्रथ का मैं कल सूर्यास्त होने से पहले वध करके रहूँगा। यह मेरी प्रतिज्ञा है।

अर्जुन की यह प्रतिज्ञा सुनकर जयद्रथ काफ़ी डर गया लेकिन दुर्योधन ने उसकी रक्षा का पूरा भरोसा दिलाया। अगले दिन युद्ध में व्यूह की रचना करते हुए द्रोणाचार्य ने जयद्रथ को युद्ध के मैदान से बारह मील दूर सेना व रक्षकों के साथ रखा। उनके साथ कई वीर योद्धा उसकी रक्षा के लिए मौजूद थे। उनमें भुरिश्रवा, कर्ण, अश्वत्थामा, शल्य, वृषसेन आदि थे।

अर्जुन ने मोर्चा संभालते ही भोजों की सेना पर हमला कर दिया। उसे हराने के बाद, कृतवर्मा, सुदक्षिण, श्रुतायुध पर आक्रमण किया। श्रुतायुध अपनी गदा से मारा गया। कांभोजराज अर्जुन के हाथों मारा गया। कौरव सेना को मारता हुआ अर्जुन जयद्रथ के समीप पहुँच गया। जयद्रथ की रक्षा में लगे आठ महारथी अर्जुन का मुकाबला करने लगे।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-79- ललकारना – उकसाना, चुनौती – मुकाबला, संग्राम – युद्ध, धावा बोलना – चढ़ाई करना, समता – बराबरी, प्रवेश – दाखिल, चुनौती – मुकाबला, संग्राम – युद्ध, समर्थन – हामी भरना, अनुकरण – नकल।

पृष्ठ संख्या-81- स्मरण – याद, दाखिल – प्रवेश, भस्म – जल कर राख हो जाना, तहस-नहस – नष्ट करना, आभा – रोशनी, व्याकुल – बेचैन, मृत – मरा, तत्काल – तुरंत, रथविहीन – रथ के बिना।

पृष्ठ संख्या-82- आहत – घायल, प्रहार – आक्रमण, प्राण – प्रेखेरन, होना – मर जाना, संहार – बध, अभेद्य – जो भेदा न जा सके, धीरज – धैर्य, निःशंक – निश्चित, व्यवस्था – इंतजाम।

पृष्ठ संख्या-83- शरीक – भाग लेना, तमाम – पूरी।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 32 बारहवाँ दिन

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 32 बारहवाँ दिन

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 32

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दुर्योधन ने अर्जुन को युद्ध क्षेत्र से दूर ले जाने का निर्णय क्यों किया?
उत्तर:
दुर्योधन ने अर्जुन को रण क्षेत्र से दूर ले जाने का निर्णय इसलिए किया ताकि युधिष्ठिर को बंदी बना सके।

प्रश्न 2.
बारहवें दिन युद्ध में क्या अफवाह फैल गई?
उत्तर:
बारहवें दिन के युद्ध में यह अफवाह फैल गई कि भगदत्त के हाथी ने भीम को मार गिराया।

प्रश्न 3.
अर्जुन उस समय कहाँ किससे लड़ रहा था?
उत्तर:
अर्जुन उस समय दूर जाकर संशप्तकों से लड़ रहा था।

प्रश्न 4.
अर्जुन ने भगदत्त का क्या हाल कर दिया?
उत्तर:
अर्जुन ने भगदत्त के नाजुक स्थानों पर बाण चला कर उन्हें बेध डाला, उसकी रेशमी पट्टी काट डाली।

प्रश्न 5.
अर्जुन द्वारा छोड़े गए बाणों से शकुनि के कौन-कौन भाई मारे गए?
उत्तर:
अर्जुन द्वारा छोड़े गए बाणों से शकुनि के दो भाई कृषक तथा अचक मारे गए।

प्रश्न 6.
बारहवें दिन के युद्ध की उल्लेखनीय घटनाएँ क्या रहीं?
उत्तर:
बारहवें दिन की उल्लेखनीय घटनाएँ थीं, द्रोणाचार्य युधिष्ठिर को पकड़ने में असफल रहे और अर्जुन के द्वारा युद्ध में भगदत्त के अतिरिक्त असंख्य वीर योद्धा मारे गए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्जुन ने भगदत्त को कैसे मारा?
उत्तर:
अर्जुन ने अपने गांडीव से भगदत्त पर बाण चलाए। इससे भगदत्त के धनुष और तरकश का भी बुरा हाल हुआ। फिर अर्जुन ने भगदत्त के मर्म स्थलों को बाणों से छेद डाला। अर्जुन के तेज़ बाणों से भगदत्त के आँखों के ऊपर बँधी हुई रेशम की पट्टी फट गई जो उसकी आँखों के ऊपर लटक जाने वाली चमड़ी को उठाए रखती थी। इससे भगदत्त की आँखें बंद हो गईं। उसे कुछ नहीं सूझने लगा। वह अँधेरे में खो गया। फिर अर्जुन ने एक शक्तिशाली बाण से उसकी छाती बेध डाली जिससे भगदत्त गिर पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 2.
बारहवें दिन के युद्ध में कौन-सी घटना घटी, जिसके कारण शकुनि अत्यंत क्रोधित हो उठा? उसका क्या परिणाम रहा?
उत्तर:
बारहवें दिन युद्ध में शकुनि के दो भाई कृषक और अचक वीरतापूर्वक पांडवों से युद्ध कर रहे थे। अर्जुन ने उसके पहिए को तहस-नहस कर दिया और उनकी सेना पर बाणों की भयंकर वर्षा कर दी, जिससे दोनों वीर मारे गए। अपने भाइयों के मारे जाने पर शकुनि अत्यंत क्रोधित हुआ। क्रोध में आकर उसने अर्जुन से युद्ध करना शुरू कर दिया। शकुनि, अर्जुन के बाणों से घायल हो गया और युद्ध भूमि से भाग खड़ा हुआ।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 32

बारहवें दिन युधिष्ठिर को जिंदा पकड़ने की कोशिश के असफल हो जाने पर अंत में यही निश्चय किया गया कि अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारा जाए। लड़ते-लड़ते युधिष्ठिर से दूर ले जाया जाए। अर्जुन को संशप्तकों ने ललकारा और अर्जुन को दूर ले गए। एक अफवाह फैली की भगदत्त के हाथी ने भीम को मार दिया। इस बात पर यकीन कर युधिष्ठिर ने भगदत्त पर आक्रमण करने का आदेश दिया। अर्जुन भी वहीं रणभूमि में पहुँच गया। दूसरी ओर अर्जुन संशप्तकों से लड़ रहे थे। हाथी पर सवार भगदत्त ने अर्जुन और श्रीकृष्ण दोनों पर बाण बरसाने शुरू कर दिए। भगदत्त का चलाया तोमर अर्जुन के मुकुट पर जा लगा। अर्जुन को क्रोध आ गया और अर्जुन बोला- भगदत्त अब इस संसार को अंतिम बार अच्छी तरह से देख लो। अर्जुन ने उसके ऊपर बाण चलाया जिससे उसके धनुष टूट गए। कुछ ही देर बाद अर्जुन ने बाण से उसकी छाती छेद डाली। भगदत्त को गिरते देखकर कौरव सेना भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगी। इधर शकुनि के दो भाई कृषक और अचक जमकर लड़ते रहे। अर्जुन ने उन दोनों के रथों के पहिए को तोड़ डाला और उनके ऊपर भयंकर बाण का प्रहार किया जिससे दोनों की की मृत्यु हो गई।

अपने महाबली दो भाइयों के मारे जाने की सूचना पाकर शकुनि अत्यधिक क्रोधित हो गया। उसने युद्ध शुरू कर दिया। अंत में शकुनि अर्जुन के बाणों के सामने ठहर नहीं सका और रणभूमि छोड़कर हट गया।

इसके बाद पांडवों की सेना द्रोणाचार्य की सेना पर टूट पड़ी जिसमें काफ़ी संख्या में योद्धा मारे गए। खून की नदियाँ बह गईं। थोड़ी देर बाद सूर्यास्त हुआ और युद्ध समाप्त कर दोनों पक्षों की सेनाएँ अपने-अपने शिविर में लौट गईं। इस तरह बारहवें दिन का युद्ध समाप्त हुआ।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-78- किल – असफल, ललकारना – उकसाना, चेष्टा – कोशिश, हमला – आक्रमण, उत्साह – जोश, मर्म स्थान – संवेदनशील स्थान, सूझना – दिखना, तितर-बितर – इधर-उधर, विचलित – घबराना, परेशान – तंग, तहस-नहस – नष्ट करना।

पृष्ठ संख्या-79- अनुपम – अतुलनीय, आहत – घायल, असंख्य – जिसकी गिनती न हो सके।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 31 भीष्म शर-शय्या पर

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 31 भीष्म शर-शय्या पर are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 31 भीष्म शर-शय्या पर

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 31

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दसवें दिन के युद्ध में अर्जुन ने किसकी आड़ लेकर किस पर तीर बरसाए?
उत्तर:
अर्जुन ने शिखंडी की आड़ लेकर भीष्म पितामह पर तीर बरसाए।

प्रश्न 2.
भीष्म ने अर्जुन पर क्या चलाया?
उत्तर:
भीष्म ने अर्जुन पर शक्ति अस्त्र चलाया।

प्रश्न 3.
भीष्म का शरीर भूमि से क्यों नहीं लगा?
उत्तर:
भीष्म के सारे शरीर से बाण प्रवेश किए हए थे, अतः भीष्म का शरीर बाणों पर टिककर भूमि से ऊपर ही अड़ा रहा।

प्रश्न 4.
अर्जुन ने पितामह भीष्म को पानी कैसे पिलाया?
उत्तर:
अर्जुन ने पितामह भीष्म को पानी पिलाने के लिए तुरंत धनुष तानकर उनके दाहिने बगल में पृथ्वी पर बड़े जोर से एक तीर मारा। बाण पृथ्वी में प्रवेश कर पाताल में जा लगा और उसी क्षण जल का एक सोता फूट निकला। पितामह ने अमृत के समान मीठा शीतल जल पीकर अपनी प्यास बुझाई।

प्रश्न 5.
भीष्म ने अपना शरीर कब त्यागा?
उत्तर:
भीष्म ने शरीर त्यागने का उचित समय सूर्य नारायण के उत्तरायण होने पर था।

प्रश्न 6.
भीष्म के बाद किसे सेनापति बनाया गया?
उत्तर:
भीष्म के बाद द्रोणाचार्य को सेनापति बनाया गया।

प्रश्न 7.
शर-शय्या पर पड़े भीष्म ने कर्ण से क्या कहा?
उत्तर:
शर-शय्या पर पड़े भीष्म ने कर्ण से कहा- बेटा, तुम राधा के पुत्र नहीं, कुंती के पुत्र हो सूर्यपुत्र। वीरता में तुम कृष्ण और अर्जुन के बराबरी हो। तुम पांडवों के बड़े भाई हो। इस कारण तुम्हारा कर्तव्य है कि तुम उनसे मित्रता कर लो। मेरी यही इच्छा है कि युद्ध में मेरे सेनापतित्व के साथ ही पांडवों के प्रति तुम्हारे दुश्मनी का आज अंत हो जाए।

प्रश्न 8.
ग्यारहवें दिन के युद्ध में दुर्योधन ने द्रोणाचार्य से क्या अनुरोध किया?
उत्तर:
ग्यारहवें दिन के युद्ध में दुर्योधन आचार्य के पास जाकर बोला- आचार्य किसी भी तरीके से युधिष्ठिर को जीवित पकड़कर हमारे हवाले कर देते हमारे लिए उत्तम होगा।

प्रश्न 9.
युधिष्ठिर के पकड़े जाने पर अर्जुन ने क्या किया?
उत्तर:
अर्जुन के हमले के कारण द्रोणाचार्य को पीछे हटना पड़ा। युधिष्ठिर को जीवित पकड़ने का उनका प्रयत्न विफल हो गया और शाम होते-होते उस दिन का युद्ध भी बंद हो गया। कौरव-सेना में भय छा गया। पांडव की सेना-के योद्धा शान से अपने-अपने शिविर को लौट गए। सैन्य-समूह के पीछे-पीछे चलते हुए कृष्ण और अर्जुन अपने शिविर में आ पहुँचे। इस प्रकार ग्यारहवें दिन का युद्ध समाप्त हुआ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्जुन ने किस स्थिति में भीष्म पर बाण चलाया तथा इसका क्या परिणाम हुआ?
उत्तर:
दसवें दिन के युद्ध में पांडवों ने शिखंडी को आगे किया था। शिखंडी की आड़ में अर्जुन ने पितामह पर बाण चलाए जिसके परिणामस्वरूप पितामह भीष्म का वक्षस्थल बिंध गया। फिर भी पितामह ने उसके प्रत्युतर में बाण नहीं चलाए। अर्जुन के बाणों ने पितामह के शरीर में उँगली तक रखने की जगह नहीं छोड़ी थी। ऐसी अवस्था में भीष्म रथ से सिर के बल गिरे किंतु उनका शरीर-भूमि से नहीं लगा। शरीर में लगे हुए बाण एक तरफ़ से प्रवेश कर दूसरी तरफ़ निकल गए। भीष्म का शरीर ज़मीन पर नहीं गिरकर तीरों के सहारे ऊपर उठा रहा। उन्होंने अर्जुन से कहा- बेटा! मेरे सिर के नीचे कोई सहारा नहीं होने के कारण वह लटक रहा है। अतः कोई ठीक-सा सहारा लगा दो।

प्रश्न 2.
भीष्म जब घायल होकर युद्ध क्षेत्र में पड़े थे। तब उन्होंने कर्ण और पांडवों में मेल कराने का प्रयास किस प्रकार किया?
उत्तर:
भीष्म ने कर्ण से कहा- बेटा तुम राधा के पुत्र नहीं, कुंती के पुत्र हो, सूर्यपुत्र। मैंने तुमसे द्वेष नहीं किया। अकारण ही तुमने पांडवों से बैर रखा। इसी कारण तुम्हारे प्रति मेरा मन मलिन हुआ। तुम्हारी दानवीरता और शूरता से भी भली-भाँति परिचित हूँ। इसमे कोई संदेह नहीं कि वीरता में तुम श्रीकृष्ण और अर्जुन के बराबर हो। तुम पांडव के बड़े भ्राता हो। अंतः इस कारण तुम्हारा कर्तव्य है कि तुम उनसे मित्रता कर लो। मेरी यही इच्छा है कि युद्ध मेरे सेनापतित्व के साथ हो, जिससे पांडवों के प्रति वैर-भाव का अंत आज ही समाप्त हो जाए।

प्रश्न 3.
युधिष्ठिर को दुर्योधन जिंदा क्यों पकड़ना चाहता था?
उत्तर:
युधिष्ठिर को जिंदा पकड़ने का उद्देश्य दुर्योधन का यह था कि अगर उसे जीवित पकड़ लिया जाए तो युद्ध भी शीघ्र ही बंद हो जाएगा और जीत भी कौरवों की पक्की हो जाएगी। थोड़ा राज्य का हिस्सा युधिष्ठिर को दे देंगे और फिर चौसर में हराकर वापस ले लेंगे। इन सब विचारों से प्रेरित होकर दुर्योधन ने द्रोणाचार्य से युधिष्ठिर को जीवित पकड़ने का अनुरोध किया।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 31

दसवें दिन का युद्ध शुरू हुआ। अर्जुन ने शिखंडी को आगे किया। शिखंडी की आड़ में अर्जुन ने भीष्म पर बाण बरसाए। युद्ध में भीष्म पितामह का वक्षस्थल बिंध डाला लेकिन भीष्म पितामह ने शिखंडी के बाणों का जवाब नहीं दिया। उधर अर्जुन ने भीष्म पितामह के मर्म स्थानों पर तीक्ष्ण बाण मारे। भीष्म पितामह ने जो शक्ति अस्त्र अर्जुन पर चलाया उसे अर्जुन ने तीन बाणों से काट गिराया। बाणों ने भीष्म के शरीर को छलनी-छलनी कर दिया था। भीष्म रथ से सिर के बल ज़मीन पर गिर पड़े लेकिन उनका शरीर भूमि से न लगा। शरीर में लगे हुए बाण एक तरफ़ से घुसकर दूसरी तरफ़ निकल गए। भीष्म का शरीर ज़मीन पर नहीं गिरकर उन तीरों के सहारे ऊपर उठा रहा। भीष्म पितामह ने अर्जुन से कहा- बेटा मेरे सिर के नीचे कोई सहारा नहीं है। अतः मेरे सिर के नीचे कोई सहारा लगा दो। भीष्म के आदेश सुनकर अर्जुन ने अपने तरकश से तीन तेज़ बाण निकाले और पितामह का सिर उनकी नोक पर रखकर उनके लिए तकिया बना दिया। तब भीष्म ने कहा- मेरे शरीर त्याग करने का अभी उचित समय नहीं हुआ है। अतः सूर्य भगवान के उत्तरायण होने तक मैं ऐसे ही पड़ा रहूँगा। आप लोगों में से जो भी उस समय तक जीवित रहे, मुझे आकर देख जाएँ। इसके बाद पितामह ने अर्जुन से कहा- बेटा मेरा पूरा शरीर जल रहा है। प्यास भी लगी है। अतः मुझे पानी पिलाओ। अर्जुन ने तुरंत बाण धरती पर बड़े जोर से मारा जो सीधा पाताल में जा लगा। उसी समय जल का सोता फूट निकला। उस अमृत समान मधुर तथा शीतल जल को पीकर भीष्म ने अपनी प्यास बुझाई।

जब कर्ण को पता चला कि भीष्म पितामह घायल होकर रण क्षेत्र में पड़े हैं तो वह उनके पास दर्शन के लिए आया। वहाँ भीष्म पितामह ने कर्ण से कहा- बेटा, तुम राधा के पुत्र नहीं कुंती के पुत्र हो। सूर्य पुत्र हो। तुम्हारी दानवीरता तथा शूरता से मैं भली-भाँति परिचित हूँ। तुम पांडवों के सबसे बड़े भाई हो। अतः तुम्हारा कर्तव्य हैं कि तुम पांडवों से मित्रता कर लो। मेरी इच्छा है कि युद्ध में मेरे सेनापति के साथ ही पांडवों के प्रति तुम्हारे वैरभाव का भी आज ही अंत हो जाए।

यह सुनकर कर्ण बोला- मैं जानता हूँ कि मैं कुंती का पुत्र हूँ, पर मैं दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ सकता। मेरा कर्तव्य है कि दुर्योधन के पक्ष में रहकर ही युद्ध करूँ। इसके लिए आप मुझे क्षमा करें। भीष्म ने कर्ण की बातों को ध्यान से सुना और कहा जैसी तुम्हारी इच्छा हो कर्ण।

दुर्योधन कर्ण के युद्ध क्षेत्र में आने पर बहुत प्रसन्न हुआ। वह पितामह के जाने का दुख भूल गया। कर्ण से विचार-विमर्श के बाद द्रोणाचार्य को सेनापति बनाया गया। द्रोणाचार्य ने पाँच दिन तक सेनापति का प्रतिनिधित्व किया। युद्ध में द्रोणाचार्य सात्यकि, भीम, अर्जुन, धृष्टद्युम्न, अभिमन्यु, द्रुपद, काशिराज जैसे सुविख्यात वीरों से अकेले ही भिड़ जाते थे।

दुर्योधन आचार्य द्रोण के पास जाकर बोला- युधिष्ठिर को आप जीवित पकड़कर हमारे हवाले कर दें तो अतिउत्तम होगा। दुर्योधन जानता था कि युधिष्ठिर की हत्या करने से कोई विशेष लाभ नहीं होगा अगर इसे जीवित पकड़ लिया जाए तो युद्ध स्वतः बंद हो जाएगा। युधिष्ठिर को थोड़ा सा हिस्सा देकर संधि कर लेंगे और फिर जुआ खेलकर उससे दिया हुआ हिस्सा वापस कर लेंगे, लेकिन जब द्रोणाचार्य को दुर्योधन के असली उद्देश्य का पता चला तो वे उदास हो गए। दुर्योधन का असली चेहरा उसके सामने आया। वे मन ही मन खुश हुए कि युधिष्ठिर का प्राण न लेने का बहाना मिल गया।

इधर जब पांडवों को द्रोणाचार्य की प्रतिज्ञा के बारे में पता चला तो वे डर गए। पांडव-पक्ष युधिष्ठिर की रक्षा में लग गया। युधिष्ठिर पकड़े गए की आवाज़ से सारा कुरुक्षेत्र गूंज उठा। इतने में अर्जुन के बाणों से सारा मैदान में अंधकार छा गया और युधिष्ठिर को जीवित पकड़ने का प्रयत्न विफल हो गया। शाम होते-होते उस दिन का युद्ध बंद हो गया। पांडव-सेना के वीर शान से अपने शिविर को लौट चले। इस तरह ग्यारवें दिन का युद्ध समाप्त हो गया।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या-75- वक्षस्थल – सीना, छाती, शिकन न आना – लेश मात्र भी दुखी नहीं होना, प्रतिरोध – रोकना, मर्म स्थान – कोमल अंग।

पृष्ठ संख्या-76- प्राणहारी – प्राण लेने वाला, आदेश – आज्ञा, सिरहना – तकिया, स्थल – जगह, शीतल – ठंडा, रणक्षेत्र – युद्धभूमि, द्वेष – नफ़रत, ईर्ष्या, अकारण – बिना कारण के, शूरता – वीरता, ज्येष्ठ – बड़ा, अनुमति – आदेश, कथन – वचन, आशीष – आशीर्वाद, फूल उठना – बहुत खुश होना, विछोह – अलगाव।

पृष्ठ संख्या-77- अभिषेक – तिलक, खदेड़ना – भगाना, नाक में दम करना – परेशान करना। अनुरोध – प्रार्थना, गांडीव – अर्जुन के धनुष का नाम, विफल – असफल, विपरीत – उलटा, शीघ्र – जल्दी, परिचित – जानकार, अविरल – लगातार।

पृष्ठ संख्या-78- शिविर – छावनी, समाप्त – खत्म।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 30 सातवाँ, आठवाँ और नवाँ दिन

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 30 सातवाँ, आठवाँ और नवाँ दिन

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 30

पाठाधारित प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सातवें दिन के युद्ध की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
सातवें दिन के युद्ध की यह विशेषता थी कि वह एक स्थान पर केंद्रित न रहकर अनेक मोर्चों पर लड़ा जा रहा था।

प्रश्न 2.
सातवें दिन के युद्ध में किसकी मृत्यु हुई?
उत्तर:
सातवें दिन के युद्ध में कुमार शंख की मृत्यु हुई।

प्रश्न 3.
आठवें दिन के युद्ध में भीम ने क्या किया?
उत्तर:
आठवें दिन युद्ध में भीम ने धृतराष्ट्र के आठ बेटों को मार गिराया।

प्रश्न 4.
आठवें दिन के युद्ध में अर्जुन का कौन-सा पुत्र मारा गया?
उत्तर:
आठवें दिन अर्जुन का वीर पुत्र इरावान, जो नागकन्या से पैदा हुआ था, उसका वध हो गया।

प्रश्न 5.
नवें दिन के युद्ध में क्या हुआ?
उत्तर:
नवें दिन के युद्ध में अभिमन्यु और अलंबुष में घोर युद्ध हुआ। पांडवों की सेना की भीष्म पितामह ने घोर तबाही मचाई। यहाँ तक कि अर्जुन और कृष्ण को भी बड़ी पीड़ा हुई।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आठवें दिन के युद्ध की प्रमुख बातें क्या रहीं?
उत्तर:
आठवें दिन के युद्ध के पहले आक्रमण में ही भीम ने धृतराष्ट्र के आठ पुत्रों को मार गिराया। इधर अन्य भयंकर मुकाबले में अर्जुन का साहसी, लाडला और वीर पुत्र इरावान मारा गया, जो एक नागकन्या से पैदा हुआ था। अपने प्रिय पुत्र की मृत्यु ने अर्जुन को शोक संतप्त कर दिया। इरावान की मृत्यु के बाद भीम के बेटे घटोत्कच ने भयंकर तबाही मचाई जिससे कौरव-सेना भयभीत हो गई। इसके बाद घटोत्कच कौरव-सेना में भयंकर उत्पात मचाया।

प्रश्न 2.
महाभारत के युद्ध में नवें दिन की लड़ाई का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नवें दिन के युद्ध में अभिमन्यु और अलंबुष में घोर युद्ध छिड़ गया, पितामह ने पांडवों की सेना की बड़ी तबाही की। यहाँ तक कि पितामह ने अर्जुन और श्रीकृष्ण दोनों को ही बड़ी पीड़ा पहुँचाई। थोड़ी देर के बाद सूर्यास्त होते ही युद्ध बंद हो गया।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 30

सातवें दिन का युद्ध कई मोर्चों पर लड़ा जा रहा था। अर्जुन और भीष्म, द्रोणाचार्य, विराट राज, शिखंडी और अश्वत्थामा, धृष्टद्युम्न और दुर्योधन, नकुल, सहदेव और शल्य, भीम और दुर्योधन के चार भाई घटोत्कच व भगदत्त अलंबुष व सात्यकि, युधिष्ठिर व श्रुतायु, कृपाचार्य और चेकितान के मध्य भयंकर द्वंद्व युद्ध अलग-अलग मोर्चों पर चल रहे थे। द्रोण से विराट पराजित हुए और विराट का एक पुत्र कुमार शंख मारा गया। सूर्य अस्त होते ही युद्ध बंद हो गए।

आठवें दिन युद्ध में भीम ने धृतराष्ट्र के आठ बेटों को मार दिया। उस दिन युद्ध अर्जुन का नाग कन्या से उत्पन्न इरावान भी मारा गया। घटोत्कच व भीम ने भयंकर युद्ध किया।

नवें दिन युद्ध में अभिमन्यु और अलंबुष में घोर संग्राम की शुरुआत हुई। भीष्म पितामह ने पांडवों की सेना की बडी तबाही की। यहाँ तक की भीष्म ने अर्जुन और श्रीकृष्ण दोनों को बड़ी पीड़ा पहुँचाई। थोड़ी देर में सूर्यास्त हुआ और उस दिन का युद्ध समाप्त कर दिया गया।

शब्दार्थ:

पृष्ठ संख्या 73, 74- विख्यात – प्रसिद्ध, घमासान – घोर, भीषण – भयंकर, शोक विह्वल – दुख में बेचैन, दुर्गति – बुरी हालत।